(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (7th - 14th February 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (7th - 14th February 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • एक बार फिर उठी समान नागरिक संहिता की आंच...सर्वोच्च न्यायलय एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा समान आचार संहिता पूरे देश के लिए एक अच्छा उदाहरण..
  • एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान 10 फरवरी से हुआ शुरू, देश के विभिन्न भागों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है उद्देश
  • वैश्विक बौद्धिक संपदा सूचकांक में भारत 40वें स्थान पर, किया जाता है दुनिया की 53 अर्थव्यवस्थाओं में बौद्धिक संपदा परिवेश का आकलन
  • सुप्रीम कोर्ट का SC/ST एक्ट पर बड़ा फैसला, अधिनियम 2018 की संवैधानिक वैधता को रखा बरकरार, FIR दर्ज करने के लिए शुरुआती जांच की जरूरत नहीं..
  • जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला समेत अन्य के खिलाफ PSA के तहत दर्ज हुआ मामला, बिना ट्रायल 3 महीने रखा जा सकता है हिरासत में....
  • विज्ञान जगत में भारत का नया कदम , जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट... बंगलुरु के केंद्रीय मष्तिष्क अनुसन्धान संसथान के नेतृत्व में चलाया जा रहा है ये प्रोजेक्ट.....
  • पश्चिम बंगाल के शोधकर्ताओं ने विकसित की चावल की नई किस्म, मुक्तोश्री नामक ये चावल आर्सेनिक मुक्त...सेहत के लिए लाभकारी ....

खबरें विस्तार से:

1.

कोई भी धर्म हो हिन्दू, मुस्लिम, सीख, हो या इसाई.. सब एक है हिन्दुस्तानी और सबका एक ही देश है हिन्दुस्तान....लेकिन हमारे देश में धर्म के आधार पर कई चीजों को लेकर नियम और बातें अलग-अलग हैं, और लोगों को उनके अपने धर्म के मुताबिक नियम पालन करने की छूट है...ऐसे सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में समान नागरिक संहिता का जिक्र कर इसे चर्चा में ला दिया है...

पिछले हफ्ते गोवा के एक व्यक्ति की संपत्ति के मामले में सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायलय ने कहा की गोवा में समान नागरिक संहिता पूरे देश के लिए एक अच्छा उदाहरण है । न्यायलय ने सुनवाई करते हुए कहा की समान नागरिक संहिता के बारे में हमारे संविधान निर्माताओं ने इसे पूरे देश में लागू करने का सपना देखा था मौजूदा केंद्र सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के अपने वादे को पूरा करेगी और संसद में इसके लिए कानून लेकर आएगी. आइए जानते हैं कि आखिर यह कोड है क्या और इससे क्या फायदे या नुकसान हो सकते हैं?यूनिफॉर्म सिविल कोड या समान नागरिक संहिता का मतलब है देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून का होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति से ताल्लुक क्यों न रखता होसंविधान के अनुच्छेद 44 के मुताबिक़ राज्य भारत के सभी भागों में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास करेगा…संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता का प्रावधान है । संविधान के अनुच्छेद 37 में नीति निर्देशक तत्वों की परिभाषा दी गयी है जिसके अंतर्गत राज्य के प्रशासन को चलाने के लिए नीति निर्देशक तत्वों की अहम् भूमिका है संविधान के अनुच्छेद 44 में ये कहा गया है की राज्य एक उपयुक्त क़ानून के ज़रिये इन नीति निर्देशक तत्वों को नीति निर्माण में इस्तेमाल कर सकेगा…साल 1976 में 42वे संविधान संशोधन के ज़रिये संविधान में एक नया अनुच्छेद 31 C जोड़ा गया। इस अनुच्छेद के मुताबिक़ ये कहा गया की यदि किसी नीति निर्देशक तत्व के क्रियान्वन के लिए किसी कानून को सरकार बनाएगी तो इसे मूल अधिकार के अंतर्गत अनुच्छेद 15 और 19 के उल्लंघन के लिए कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी..आपको बता दें की व्यक्तिगत कानूनों को भारतीय संविधान की समवर्ती सूची में रखा गया है न की केंद्र सूची में । गौर तलब है की विधि आयोग ने पिछले साल ये वक्तव्य दिया की सामान नागरिक संहिता भारत में न तो संभव है और ना ही इसकी ज़रुरत है...जम्मू और कश्मीर राज्य में 5 अगस्त 2019 से पहले तक स्थानीय हिन्दू कानूनों का प्रावधान था जो केंद्रीय कानूनों से अलग थे ।हालांकि कुछ साल पहले 1939 का शरीयत कानून जम्मू और कश्मीर राज्य में लागू किया गया था जिसे अब हटा लिया गया है..उत्तर पूर्व में तकरीबन 200 से ज़्यादा जनजातियां ऐसी हैं जो सदियों से खुद के बनाये कानूनों को मानती हैं...दूसरी तरफ संविधान के अनुच्छेद 25 और 29 कहते हैं कि किसी भी वर्ग को अपनी धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को मानने की पूरी आजादी है। यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाने से हर धर्म के लोगों को सिर्फ समान कानून के दायरे में लाया जाएगा, जिसके तहत शादी, तलाक, प्रॉपर्टी और गोद लेने जैसे मामले शामिल होंगे। ये लोगों को कानूनी आधार पर मजबूत बनाएगा...हिंदुओं के लिए 1951 में तत्कालीन कानून मंत्री डॉ. बीआर अंबेडकर ने हिंदू कोड बिल पेश किया था. लेकिन देश में जबरदस्त विरोध के बाद इस बिल को चार हिस्सों में बांट दिया गया था. तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसे हिंदू मैरिज एक्ट (Hindu Marriage Act), हिंदू सक्सेशन एक्ट (Hindu Succession Act), हिंदू एडॉप्शन ऐंड मैंटेनेंस एक्ट (Hindu Adoption and Maintenance Act) और हिंदू माइनॉरिटी ऐंड गार्जियनशिप एक्ट (Hindu Minority and Guardianship Act) में बांट दिया था

2.

देश के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने हेतु ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान’ शुरू किया गया है. यह 18 दिनों तक चलने वाला अभियान है जो 28 फरवरी 2020 तक जारी रहेगा. इस अभियान का उद्देश्य विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना है.....

एक भारत श्रेष्ठ भारत), भारत सरकार द्वारा शुरु की जाने वाली नयी पहल है, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल 31 अक्टूबर 2015 की 140वीं वर्षगाँठ के अवसर पर की थी...भारत विश्वभर में अपनी एकता, शान्ति और सद्भाव के लिये जाना जाता है...इसलिये, ये पहल सरकार द्वारा किया गया वो प्रयास है जिससे पूरे देश में लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर एकता, शान्ति और सद्भावना को बढ़ावा दिया जा सकेगा...“एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना महान व्यक्ति और स्वतंत्रता सेनानी सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से प्रेरणा लेकर शुरु की गयी योजना है..योजना पर प्रभावशाली ढंग से कार्य करने के लिये राज्यों के साथ विचार-विमर्श करने के लिये समितियों का निर्माण किया गया है..इस योजना को एक वर्ष के लिये दोनों राज्यों की अनूठी साझेदारी के साथ शुरु करने का उद्देश्य रखा गया है जिसमें संस्कृति और छात्रों का परस्पर आदान प्रदान किया जायेगा..दोनों राज्यों के छात्र एक दूसरे राज्य की संस्कृति, परम्परा और भाषा के बारे में ज्ञान प्राप्त करने जायेंगे..ये भारतीय सरकार द्वारा पूरे देश में एकता और सद्भाव को मजबूत करने के लिये किया गया प्रयास है। ये एक ऐसा कार्यक्रम हैं जिसमें पूरे देश के लोगों को आपस में एक दूसरे से जोड़ने का लक्ष्य बनाया गया हैं। भारत एक ऐसा देश है जो “विविधता में एकता” का श्रेष्ठ उदाहरण है। ये कार्यक्रम भी भारत की एकता की गुणवत्ता को सुधारने के लिये की गयी पहल है। इन्होंने “मन की बात” कार्यक्रम में कहा भी था कि “एक भारत श्रेष्ठ भारत” योजना भारत को “वन इंडिया सुप्रीम इंडिया” बनायेगा....एक भारत श्रेष्ठ भारत के एजेंडे के अनुसार, भारत के लिए एक राष्ट्र की अवधारणा सांस्कृतिक विविधता पर आधारित है.... इस अभियान का उद्देश्‍य देश की जनता के बीच भावनात्‍मक एकता के परम्‍परागत ताने-बाने को और मजबूत बनाना है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्‍य देश के 36 राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों की समृद्ध संस्‍कृति तथा विरासत, खान-पान, हस्‍तकलाओं और रीति-रीवाजों को प्रदर्शित करना है...इस अभियान के अंतर्गत सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने हेतु दो अलग-अलग राज्‍यों को जोड़ीदार बनाया गया है. जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य को तमिलनाडु के साथ, पंजाब को आंध्र प्रदेश के साथ, उत्‍तराखंड़ को कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश को केरल, दिल्‍ली को सिक्किम और राजस्‍थान को असम के साथ जोडा़ गया है....सरकार की इस अभियान का मुख्य उद्देश्‍य सभी राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों के बीच गहरे रचनात्‍मक संपर्कों के माध्‍यम से राष्‍ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना है...यह राष्ट्र की मजबूती और एकता का एक महत्वपूर्ण कारक बनेगा...साथ ही, यह भारतीय शासन के संघीय ढांचे को भी मजबूती प्रदान करेगा....यह अभियान देश की विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं को पहचानने और उजागर करने में भी मदद करेगा...ये देश के विकास को नयी ऊँचाईयों तक ले जाने के लिये किया गया महत्वपूर्ण कार्य है..

3.

अमेरिकी चैंबर आफ कॉमर्स के वैश्विक नवोन्मेषण नीति केंद्र (जीआईपीसी) द्वारा साल 2020 का वैश्विक बौद्धिक संपदा सूचकांक’ का आठवाँ संस्करण, तैयार किया गया....जिसमे भारत 40वें स्थान पर रहा...पिछले साल की अगर बात करें तो भारत 50 देशों इस सूची में 36वें (छत्तीस वें) स्थान पर था....

बौद्धिक संपदा... किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सृजित कोई रचना, संगीत, साहित्यिक कृति, कला, खोज, नाम अथवा डिजाइन आदि, उस व्यक्ति अथवा संस्था की ‘बौद्धिक संपदा’ कहलाती है.. बौद्धिक संपदा अधिकार व्यक्ति या संस्था को अपनी रचना/आविष्कार पर एक निश्चित अवधि हेतु विशेषाधिकार प्रदान करते हैं...इन विशेषाधिकारों का विधि द्वारा संरक्षण पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क आदि के रूप में किया जाता है...आपको बता दें अमेरिकी चैंबर आफ कॉमर्स के वैश्विक नवोन्मेषण नीति केंद्र (जीआईपीसी) द्वारा तैयार वर्ष 2020 के इस सूचकांक में भारत 40वें स्थान पर पहुंच गया है. भारत सरकार ने साल 2016 में राष्ट्रीय आईपीआर नीति जारी करने के बाद से नए नवोन्मेषण और रचनात्मकता में निवेश बढ़ाने का केंद्रित प्रयास किया है. यह ‘वैश्विक बौद्धिक संपदा सूचकांक’ का आठवाँ संस्करण है जिसका शीर्षक आर्ट ऑफ़ द पॉसिबल (Art of the Possible) है...

भारत पिछले साल (साल 2019) में 36वें स्थान पर था...गौरतलब हो की भारत साल 2018 में 44वें स्थान पर था....भारत साल 2017 में इस सूची में 45 देशों में 43वें स्थान पर था...भारत इस साल सूचकांक में फिसलकर 40वें स्थान पर आ गया है....वहीँ अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक में 42.66 के स्कोर के साथ अमेरिका पहले नंबर पर है. इस सूचकांक में अमेरिका पहले, ब्रिटेन दूसरे, स्वीडन तीसरे, फ्रांस चौथे और जर्मनी पांचवें स्थान पर रहा है. ये देश पिछले साल भी इन्हीं स्थानों पर थे....

इस वर्ष भारत ने अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संपदा सूचकांक में 16.22 का स्कोर हासिल किया है...भारत के स्कोर में पिछले वर्ष के मुकाबले सात प्रतिशत वृद्धि हुई है...अन्य देशों के मुकाबले तुलनात्मक प्रदर्शन के आधार पर भारत की रैंकिंग में चार स्थानों की गिरावट आई है....रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने मजबूत आईपी संरक्षण की दिशा में अच्छी प्रगति की है लेकिन अभी काम पूरा नहीं हुआ है...

यह सूचकांक GIPC जीआईपीसी ने 45 संकेतकों पर तैयार किया है...इनमें पेटेंट, कॉपीराइट और व्यापार गोपनीयता का संरक्षण आदि शामिल हैं...गौरतलब है कि इस सूचकांक में शामिल देशो में आधा से ज़्यादा देशो ने अपनी स्थिति में सुधार दर्ज़ की है....

4.

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम 2018 की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए,..कहा कि कोई अदालत सिर्फ ऐसे ही मामलों पर अग्रिम जमानत दे सकती है, जहां प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता हो..उच्चतम न्यायालय का यह फैसला एससी-एसटी संशोधन अधिनियम 2018 को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर आया है..तीन जजों की पीठ में दो-एक से यह फैसला कोर्ट ने सुनाया है...

अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति संशोधन अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने के लिए शुरुआती जांच की जरूरत नहीं है और इसके लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी की भी आवश्यकता नहीं है...पीठ के अन्य सदस्य न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने सहमति वाले एक निर्णय में कहा कि प्रत्येक नागरिक को सह-नागरिकों के साथ समान बर्ताव करना होगा और बंधुत्व की अवधारणा को प्रोत्साहित करना होगा...न्यायमूर्ति भट ने कहा कि यदि प्रथमदृष्टया एससी/एसटी अधिनियम के तहत कोई मामला नहीं बनता तो कोई अदालत प्राथमिकी को रद्द कर सकती है...दरअसल, SC/ST एक्ट में संशोधन के जरिए शिकायत मिलने पर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान फिर से जोड़ा गया था...कोर्ट में दायर याचिका में इस संशोधन को अवैध करार देने की मांग की गई थी...क्योंकि, मार्च 2018 में कोर्ट ने तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाला फैसला दिया था..कोर्ट ने कहा था कि कानून के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों के मद्देनजर शिकायतों की शुरुआती जांच के बाद ही पुलिस को कोई कदम उठाना चाहिए...इस फैसले के व्यापक विरोध के चलते सरकार को कानून में बदलाव कर तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान दोबारा जोड़ना पड़ा था.. सरकार की दलील है कि अनुसूचित जातियों के लोग अब भी सामाजिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं। उनके लिए विशेष कानून जरूरी है... .संशोधित कानून के जरिए SC–ST अत्याचार निरोधक कानून में धारा 18A जोड़ी गई...इस धारा के मुताबिक, इस कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं है और न ही जांच अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले किसी से इजाजत लेने की जरूरत है..केन्द्र की तरफ से लाए गए इस बिल के बाद सवर्णों की ओर से भारत बंद का ऐलान किया गया था...इसके बाद केन्द्र की मोदी सरकार सवर्णों को नौकरी में दस फीसदी आरक्षण का कानून संसद में लेकर आई थी...

SC/ST एक्ट क्या है?- अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से ये एक्ट लाया गया था...इस अधिनियम के तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने हेतु कई प्रावधान किए गए और इनकी हर संभव सहयता के लिए जरूरी उपाय किए गए....

5.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला, पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और अन्य के खिलाफ सार्वजनिक सुरक्षा कानून (PSA) के तहत 06 फरवरी 2020 को मामला दर्ज कर लिया गया है...आपको बता बिना ट्रायल के ही इन्हें 3 महीने तक जेल में रखा जा सकता है...ये दोनों नेता जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद पिछले छह महीने से नजरबंद थे...

जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (के तहत PSA) मामला दर्ज करदिया गया... पिछले साल उमर अब्दुल्ला के पिता फारुख अब्दुल्ला को भी PSA एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था...जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला को राज्य प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत बंदी बना लिया गया था....आपको बता दें वे PSपीएसए के तहत बंदी बनाए जाने वाले राज्य के पहले पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद हैं...फारुख अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब 05 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था....

क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA)?

सरकार सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है. यह कानून जम्मू कश्मीर में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने साल 1978(अठत्तर) में लागू किया था....इस कानून को तत्कालीन सरकार द्वारा लाने का मुख्य उद्देश्य लकड़ी की तस्करी को रोकना बताया गया था. इस कानून के तहत किसी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को सही तरह से बनाए रखने के मद्देनजर वहां नागरिकों के आने-जाने पर रोक लगा दी जाती हैं....यह कानून सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हो. यह कानून सरकार को 16 वर्ष से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना दो साल की अवधि के लिए बंदी बनाने की अनुमति देता है...अगर किसी व्यक्ति के काम से सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने में कोई बाधा उत्पन्न होती है तो उसे एक वर्ष की प्रशासनिक हिरासत में लिया जा सकता है...डीएम पांच दिनों के भीतर व्यक्ति को लिखित रूप में नजरबंदी के कारण के बारे में सूचित करता है...हालांकि, डीएम को असाधारण मामलों में 10 दिनों के भीतर संवाद करने का अधिकार है...PSA के तहत हिरासत के आदेश डिवीजनल कमिश्नर या डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी किये जा सकते हैं...आपको बता दें...हिरासत में लिए गए व्यक्ति को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना होता है. अधिनियम की धारा-22 , लोगों के हित में की गई कार्रवाई के लिये सुरक्षा प्रदान करती है. इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक हिरासत में लिये गए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई मुकदमा, अभियोजन या कोई अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती.

6.

दुनिया चाँद तक पहुँच गयी है...चाँद के अलावा मंगल बृहस्पति और शनि ग्रहों पर भी दुनिया ने अपने कदम बढ़ा दिए है लेकिन इन सबको रोशनी देने वाला सूरज अभी भी वैज्ञानिकों की ज़द से बाहर रहा है..यूँ तो सूरज को जानने और समझने की कोशिश कई सालों से चल रही है...लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद अभी भी सूरज कौतूहल का विषय बना रहा..लेकिन अब चांद के बाद वैज्ञानिकों ने सूर्य के रहस्‍यों से पर्दा उठाने के लिए एक कदम आगे बढ़ा दिया है...सूरज के रहस्यों से पर्दा उठाने की कोशिश में वैज्ञानिकों ने हाल ही में सोलर ऑर्बिटर को छोड़ा गया है....

इस परियोजना को बंगलुरु स्थित केंद्रीय मष्तिष्क अनुसन्धान संसथान के नेतृत्व में चलाया जा रहा है ।इसके अलावा परियोजना में बंगलूरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science- IISc) एवं कुछ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (Indian Institute of Technology- IITs) सहित लगभग 20 संस्थान शामिल होंगे। इस परियोजना की अनुमानित लागत तकरीबन 238 करोड़ रुपए आएगी...गौरतलब है की जनवरी, 2020 के आखिर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology-DBT) ने इस परियोजना को मंज़ूरी प्रदान की थी । इस परियोजना के पहले चरण में देश भर से 10,000 लोगों के नमूनों को इकठ्ठा किया जाएगा। IISc के मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (Center for Brain Research) को इस परियोजना का नोडल कार्यालय बनाया गया है...इसकी निदेशक प्रो विजयलक्ष्मी रवींद्रनाथ की देख रेख में यह परियोजना संपन्न की जाएगी। इस परियोजना में शामिल संस्थान परियोजना के कई पहलुओं पर काम करेंगे । इन पहलुओं में नैदानिक नमूने देना और अनुसंधान में मदद करना, आदि शामिल हैं । कुछ IITs द्वारा गणना के नए तरीकों में मदद ली जाएगी । इसके अलावा परियोजना हेतु डेटाबेस बनाने के लिए दो नई राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान योजनाएँ शुरू की जाएंगी...आपको बता दें की इनफ़ोसिस के सह संस्थापक क्रिस गोपालकृष्णन ने बुढ़ापे में दिमागी रोगों जैसे याददाश्त जाना और अल्ज़ाइमर्स जैसे रोगों के इलाज़ और अनुसंधान के लिए IISc में केंद्रीय मष्तिस्क अनुसन्धान केंद्र की स्थापना की थी...भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में जहाँ जनसांख्यिकी विविधता की वजह से मधुमेह,और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े रोगों ने अपना घर बना रखा है । ऐसे में इन रोगों की रोकथाम के लिए आनुवंशिक जानकारी और उसकी मैपिंग बेहद अहम् साबित होगी । अनुवांशिक जानकारी मौजूद होने पर रोग की शुरुआत से पहले ही उसकी रोकथाम की जा सकेगी ....भारत की आनुवंशिक विविधता की मैपिंग अगली पीढ़ी के लिए बेहद कारगर हैं । चिकित्सा, कृषि और जैव-विविधता प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों में इससे काफी मदद मिल सकेगी ....आधुनिक जीवन-शैली से होने वाली बीमारियों जैसे- हृदय रोग , मधुमेह या अन्य मानसिक रोगों के लिये, जीनोम मैपिंग परियोजना के तहत होने वाली खोजें इस दिशा में अहम् भूमिका निभाएँगी। जीनोम मैपिंग परियोजना कैंसर से होने वाली मौतों को भी कम करने में भी बेहद कारगर साबित होगी....जहां जीनोम मैपिंग के कई फायदे हैं तो वहीं इसके कई घाटे भी हैं । मसलन जीनोम मैपिंग से मिलने वाली जानकारी से नियोक्ता कर्मचारियों को काम पर रखने से पहले उनकी आनुवंशिक जानकारी हासिल कर सकते हैं । इस जानकारी से लोगों की व्यक्तिगत जानकारियों का पता लगाकर उन्हें काम से निकाला जा सकता है । आनुवंशिक डेटा के गलत इस्तेमाल से बीमा, रोज़गार, आपराधिक न्याय, शिक्षा, आदि क्षेत्रों में..

7.

ये चिंता का विषय है की भारत ARSENIC CONTAMINATED WATER के खतरे में है...ये भूजल प्रदूषण का एक रूप है... भूजल में आर्सेनिक आने की क्रिया प्राकृतिक है...ऐसे में इस पानी को पीने और सिचाई में इस्तेमाल लाना दोनों ही खतरनाक है...ऐसे में पश्चिम बंगाल सरकार के चावल अनुसंधान केंद्र ने चावल की एक नई किस्म के साथ आया है जिसे आर्सेनिक प्रोन क्षेत्रों में उगाया जा सकता है.... जो आर्सेनिक की बहुत कम मात्रा को सोखती है...

2007 के एक अध्ययन में पाया गया कि 70 से अधिक देशों में 137 मिलियन से अधिक लोग पीने के पानी के आर्सेनिक विषाक्तता से प्रभावित हैं.. ऐसे में पश्चिम बंगाल सरकार के चावल अनुसंधान केंद्र मुक्तोश्री नामक चावल की एक नई किस्म के साथ आया है जिसे आर्सेनिक प्रवण क्षेत्रों में उगाया जा सकता है...यह पश्चिम बंगाल के कृषि विभाग और राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ के अंतर्गत आने वाले राइस रिसर्च स्टेशन , चिनसुराह के द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया.....मुक्तोश्री चावल , अन्य चावल की किस्मों की तुलना में मिट्टी और पानी से बहुत कम मात्रा में ARSENIC (आर्सेनिक) को ABSORBED करती है... मुक्तोश्री नामक चावल की ये नई किस्म , बोरो सीजन में 5.5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर और खरीफ सीजन में 4.5 से 5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर उपज देती है...पश्चिम बंगाल में भूजल में ARSENIC (आर्सेनिक) की HIGH CONCENTRATION है, जिसमें सात जिलों के 83(तिरासी) ब्लॉकों में जायज़ सीमा से अधिक ARSENIC (आर्सेनिक) का स्तर है...भारत में ARSENIC नमक इस ज़हर की चपेट में आने का पहला मामला 1983(तिरासी) में कोलकाता, पश्चिम बंगाल में हुआ, जब एक मरीज त्वचा रोग बीमारी से ग्रसित था... आपको बता दें...भारत में 1970 के दशक से पहले, टैंकों, तालाबों और खुले कुओं के पानी का उपयोग पीने के लिए किया जाता था...लेकिन तब से, गंगा डेल्टा में लाखों ट्यूबवेल स्थापित किए गए थे ताकि सतह के पानी से दस्त जैसे संबंधी रोगों को रोका जा सके...लोग जल्द ही भूजल पर निर्भर हो गए...ARSENIC CONCENTRATION का कारण सिचाईं और पीने के लिए भूजल का ज्यादा पप्रयोग है...CENTRAL GROUND WATER BOARD की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 21 राज्य ऐसे है जहाँ आर्सेनिक दूषित पानी मिलेगा...आपको बता दें WHO और BUREAU of INDIAN STANDARS द्वारा आर्सेनिक की कुछ सीमित मात्रा रखी है...0.01 मिलीग्राम PER LITRE..अगर इससे अधिक आर्सेनिक की मात्रा शारीर के लिए नुक्सानदायक है... National rural drinking water programme (NRDWP) या राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की और से जारी रिपोर्ट में भारत में करोड़ो लोग आर्सेनिक के दुष्प्राभों से ग्रसित है....भारत के पश्चिम बंगाल की बात की जाए तो यहाँ 9.6 MILLION , 1.6 MILLION असम, 1.2 MILLION बिहार, 0.5 MILLION उत्तर प्रदेश, और झारखंड में 0.03 MILLION लोग सीधे सीधे तौर पर आर्सेनिक दूषित पानी के खतरे में है.... आर्सेनिक स्वाभाविक रूप से कई देशों के भूजल में उच्च स्तर पर मौजूद है। यह चट्टानों और मिट्टी में भी मौजूद है........विश्व स्वास्थ्य संगठन के पीने के पानी में आर्सेनिक के लिए अस्थायी दिशानिर्देश मूल्य 0.01 mg / l (10 μg / l) है...वैकल्पिक स्रोत के अभाव में भारत में आर्सेनिक की अनुमेय सीमा 0.05 mg / l (50 μg / l) है...पीने, भोजन तैयार करने और खाद्य फसलों की सिंचाई के लिए प्रयुक्त दूषित पानी आर्सेनिक से जन स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है...पीने-पानी और भोजन से आर्सेनिक के लंबे समय तक संपर्क कैंसर और त्वचा के घावों का कारण बन सकता है...यह हृदय रोग और मधुमेह के साथ भी जुड़ा हुआ है... आर्सेनिक से साँस संबंधी रोग, न्यूरोपैथी और liver fibrosis जैसी जानलेवा बीमारी हो सकती है.......ऐसे में विकसिक मुक्तोश्री चवाल की नई किस्म कईं न कईं आर्सेनिक के खतरे से होने वाली तकलीफों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है...

8.

भारत और अमेरिका के बीच फरवरी का ये महिना बेहद खास होने वाला है। खास इसलिए क्‍योंकि इसी महिओने की 24 तारीख को अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भारत आने वाले हैं..उनका ये दौरा सिर्फ भारत के लिए ही खास नहीं है बल्कि इसके पूरे क्षेत्र के लिए ही बेहद खास मायने हैं... क्यूंकि.....अमेरिका की सरकार ने भारत को Integrated Air Defence Weapon System - IADWS) की बिक्री को मंजूरी दे दी है....जो भारत के रक्षा बलों को आधुनिक बनाने के लिए सक्षम है....

अमेरिका की सरकार ने भारत को एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (Integrated Air Defence Weapon System - IADWS) की बिक्री को मंजूरी दे दी है….अमेरिका ने 1.9 बिलियन अमरीकी डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये) के इस सौदे को मंजूरी दी है. इससे पहले, अमेरिकी सरकार ने उस समय अपनी नाराजगी ज़ाहिर की थी जब भारत ने रूस के साथ पांच अरब डॉलर (लगभग 35000 करोड़ रुपये) में पांच एस-400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदने के लिए एक समझौते पर दस्तखत किए थे….राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान इस सौदे पर हस्ताक्षर किये जा सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 23-26 फरवरी, 2020 को भारत की यात्रा पर आएंगे…दरअसल में भारत अपने रक्षा बलों को आधुनिक बनाने के मकसद से अमेरिका से एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) खरीदना चाहता है. इससे भारतीय सेना को हवाई हमले के मद्देनज़र तुरंत करवाई करने में मदद मिलेगी. आपको बता दें की एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (IADWS) के अंतर्गत वायु रक्षा हथियार प्रणाली, AMRAAM मिसाइल, NASAMS-II, सतह से हवा में मिसाइल, रडार, आदि शामिल हैं…डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) कई स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली जैसे आकाश Mk1 और आकाश Mk1S भी विकसित कर रहा है. आकाश Mk1 पहले ही चालू हो चुका है जबकि DRDO दूसरे पर शोध कर रहा है…

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उत्तर प्रदेश सरकार ने भूजल विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी गई....भूजल प्रदूषित करने और इसका अत्यधिक उपयोग करने वालों पर जुर्माना लगेगा साथ ही उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है... आपको बता दें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश भूजल विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी गई....मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह तथा श्रीकांत शर्मा ने बताया कि गिरते भूजल स्तर और प्रदूषण को देखते हुए विधेयक में कड़े प्रावधान किए गए हैं.. इसके मुताबिक अब RAIN WATER HARVESTING SYSTEM लगाए बिना किसी भी सरकारी, अथवा गैर सरकारी भवन का नक्शा पास नहीं किया जाएगा....

12 फरवरी 2020 को उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने भूजल अधिनियम-2020 या ग्राउंड वाटर एक्ट -2020) को मंजूरी दे दी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने एक बैठक के दौरान इस अधिनियम को मंजूरी दी। इस अधिनियम का मकसद उत्तर प्रदेश में भूमिगत जल के गिरते स्तर को सुधारना है..गौर तलब है की उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने भूजल स्तर को दूषित करने वालों के खिलाफ जुर्माने और सजा के प्रावधानों को भी मंजूरी दी है….आइये अब नज़र डालते हैं इस विधेयक के कुछ ख़ास प्रावधानों पर उत्तर प्रदेश भूजल अधिनियम-2020 के प्रावधानों के मुताबिक़ सबमर्सिबल पंप स्थापित करना अब ज़रूरी होगा…इसके अलावा सरकार इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी देगी..घरेलू उपयोगकर्ताओं और किसानों को इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा । इस विधेयक के मुताबिक़ सभी सरकारी और निजी कॉलेजों तथा स्कूलों को बारिश के पानी को इकठ्ठा करने के लिए भी प्रावधान करने होंगे..इस विधेयक के मुताबिक़ यदि कोई व्यक्ति 300 वर्गमीटर से बड़ा घर बनाने के लिए एक सबमर्सिबल पंप लगाता है, तो उसे वर्षा जल संचयन प्रणाली भी स्थापित करनी होगी…आपको बता दें की उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके लिए राज्य स्तर पर एक ग्राम पंचायत समिति का गठन किया है..इसके अलावा, अगर प्राधिकरण ने किसी व्यक्ति को बोरिंग पाइप के माध्यम से भूजल को प्रदूषित करते हुए पकड़ा तो व्यक्ति को जुर्माना देना होगा या सजा भुगतनी पड़ेगी..दुनिया में हर जगह भूजल स्तर घट रहा है. उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में भूजल के गिरते स्तर को बचाने के लिए ये कदम उठाया है. मीडिया रिपोर्टों में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के 47 ब्लॉकों में भूजल स्तर अत्यधिक कम है, जबकि 151 ब्लॉकों में तेजी से कम हो रहा है. यूपी सरकार का मानना है कि नए कानून से राज्य में भूजल स्तर में सुधार करने में मदद मिलेगी.

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. बिहार सरकार की प्रदुषण नियत्रण पर पहल...पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह से लगाई रोक

बिहार सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण लगाने हेतु 15 साल से पुराने सरकारी डीजल वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है इसके अलावा राजधानी पटना और उसके आस-पास के नगर निकाय क्षेत्र जैसे- दानापुर, खगौल एवं फुलवारी शरीफ में 15 वर्ष से अधिक पुराने व्यावसायिक डीज़ल वाहनों पर भी मार्च 2021 से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है....बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि राज्य सरकार डीज़ल या पेट्रोल से चलने वाले तिपहिया वाहनों को CNG में बदलने के लिये 40,000 रुपए और बैटरी में बदलने के लिये 25,000 रुपए भी देगी....बिहार में प्रदूषण को कम करने के लिए राज्य स्तर पर जल-जीवन-हरियाली योजना भी चलाई जा रही है..

2. मुंबई में 8 फरवरी को आयोजित हुआ 23 वें राष्ट्रिय ई-गवर्नेंस सम्मलेन

ई-गवर्नेंस पर राष्ट्रीय सम्मलेन इस सम्मेलन में सार्वजनिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए डिजिटल प्लेटफार्म के उपयोग को बढ़ावा देने पर फोकस किया गया. ई-गवर्नेंस का अर्थ है, किसी देश के नागरिकों को सरकारी सूचना एवं सेवाएँ प्रदान करने के लिये संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी का समन्वित प्रयोग करना है...इसका उद्देश्य राज्य और नागरिकों के मध्य संबंध को मज़बूत करना है...

3. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र के वधावन पर देश का नया बंदरगाह बनाने को दी मंजूरी

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र स्थित वधावन में एक नये प्रमुख बंदरगाह (पोर्ट) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है...यह बंदरगाह बड़े से बड़े जहाज को रखने में सहायक होगा...इस परियोजना पर लगभग 65,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी...वधावन बंदरगाह के विकास के बाद भारत दुनिया के टॉप-10 कंटेनर बंदरगाह वाले देशों में शामिल हो जाएगा.

4. केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने लौंच किया पोर्टल....होगा श्रमिकों की शिकायतों का निवारण मुहिम पोर्टल केंद्रीय श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने श्रमिकों व रोज़गार प्रदाताओं की शिकायतों का निवारण करने के लिये ‘संतुष्ट’ नाम से एक पोर्टल लॉन्च किया है...पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य बीमा तथा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की सेवाओं के साथ-साथ कर्मचारी राज्यत बीमा निगम की सेवाओं की निगरानी भी की जाएगी...

5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में की घोषणा, राम मंदिर ट्रस्ट का हुआ नामकरण....के परासरन ट्रस्ट के अध्यक्ष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 05 फरवरी 2020 को संसद में घोषणा की कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाया जायेगा जिसे श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के नाम से जाना जायेगा. उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मस्जिद के लिए 5 एकड़ भूमि भी दी जाएगी. इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को मंदिर निर्माण के लिए आवश्यक स्वयात्तता प्रदान की जाएगी तथा 67.70(सडसठ) एकड़ भूमि दी जाएगी..केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र' ट्रस्ट की स्थापना की गई है....रामलला पक्ष की वकालत करने वाले वरिष्ठ वकील के.परासरन को इस ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया है...उनके अतिरिक्त ट्रस्ट के अन्य सदस्यों में शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज, हरिद्वार के परमानंद महाराज जी, पुणे के स्वामी गोविंदगिरी जी, और बिहार से डॉ. कमलेश्वर चौपाल तथा निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास का नाम शामिल है...

7. WHO ने कोरोना वायरस को दिया आधिकारिक नाम, WHO का दावा कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन 18 महीने में हो सकती है तैयार...

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा कोरोना वायरस का आधिकारिक नाम 'COVID-19' कर दिया गया है. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इससे जुड़े बहुत से कारकों की वजह से इसे यह नाम दिया गया है. इसे यदि कोई और नाम दिया जाता तो गलत होता. WHO के अनुसार, कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन 18 महीने में तैयार हो सकती है. इस वायरस से अब तक 1000 से अधिक लोग सिर्फ चीन में ही मारे जा चुके हैं.

8. ISRO ने युविका के दूसरे सत्र का किया शुरुआत....दी जाती है अन्तरिक्ष विज्ञान से जुडी सभी जानकारियाँ....

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने युवा विज्ञानी कार्यक्रम ‘युविका’ के दूसरे सत्र के आयोजन की घोषणा की है. इसरो ने इस कार्यक्रम को 2019 में लॉन्च किया था. इस कार्यक्रम के तहत स्कूली छात्रों को अन्तरिक्ष विज्ञान और इससे जुड़ी दूसरी तकनीक की जानकारी दी जाती है. इस वर्ष भारत में यह कार्यक्रम 11 मई से 22 मई, 2020 के बीच आयोजित किया जायेगा...

9. DRDO विकसित कर रहा है प्रनाश मिसाइल, 200 किमी रेंज तक की क्षमता..वायु और थल सेना की ताकत बढाने में मिलेगी मदद..

भारत की थल और वायु सेना की मारक क्षमता बढ़ाने हेतु रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) प्रनाश मिसाइल का विकास कर रहा है.. 200 किमी रेंज की इस मिसाइल को पारंपरिक वारहैड से लैस किया जा सकेगा....प्रनाश मिसाइल 150 किलोमीटर तक मारक क्षमता वाली 'प्रहार' की उन्नत रूप है...प्रहार मिसाइल भी ठोस इंधन की सतह से सतह तक मार करने में सक्षम कम दूरी की सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल है. इस मिसाइल का उपयोग किसी भी सामरिक और रणनीतिक लक्ष्यों को खत्म करने हेतु होगा.

10. भारतीय मूल के वैज्ञानिक एस.एस. वासन की अगुआई में बन रहा कोरोना वायरस से लड़ने हेतु वैक्सीन

कोरोनावायरस का परिक्षण ऑस्ट्रेलिया के पशु स्वास्थ्य प्रयोगशाला (Australian Animal Health Laboratory -AAHL ) की हाई सेक्योरिटी लैब में चल रहा है.... ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में इसके मरीजों की पुष्टि हुई है... इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य कोरोना वायरस को ठीक से समझना है कि ये किस तरह विकसित होता है और किस तरह सांस की नली पर असर डालता है....कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया अलर्ट पर है...कई देशों ने चीन के लिए अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं...वहीँ अब तक इस वायरस से मरने वालों की संख्या 1 हज़ार से भी ज्यादा पहुँच चुकी है....

11. प्रदेश सरकार के 100 दिन पूरे हो जाने पर....हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लॉन्च की “मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना”...

प्रदेश सरकार के 100 दिन पूरे होने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना को लॉन्च किया है. सरकार दो-दो हजार रुपए की तीन किस्तों में यह पैसा इन गरीब परिवारों को देगी. इस योजना के तहत बीमा व पेंशन के प्रीमियम मिलाकर 6 हजार रुपए सालाना आर्थिक सहायता परिवार को मिल सकेगी. योजना के लाभ हेतु परिवार का पहचान पत्र होना चाहिए. पंजीकरण का कार्य 26 जनवरी 2020 से शुरू हो चुका है.

12. 10 फरवरी 2020 को विश्व भर में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस, दालों के महत्व को दर्शाने के लिए मनाया जाता है दिवस..

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 10 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय दलहन दिवस- WORLD PULSES DAY मनाया जाता है. संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व दलहन दिवस को वैश्विक भोजन के रूप में दालों के महत्व को पहचानने के लिए मनाया जाता है. इस दिन चने, सूखी बीन्स, दाल, सूखी मटर, लूपिन और अन्य दालों के महत्व के बारे में बताया जाता है. दालों में पोषक तत्व पाए जाते हिना उर इनमें उच्च प्रोटीन सामग्री होती है.

13. RBI ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिये की...अंतिम द्विमासिक नीति समीक्षा बैठक...रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का निर्णय लिया...

RBI ने चलनिधि समायोजन सुविधा के तहत नीतिगत रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है. RBI ने बैंक से स्पष्ट किया कि भविष्य में ज़रूरत पडऩे पर दरों में कटौती की जाएगी. RBI ने जिन नीतिगत हस्तक्षेपों की घोषणा की उनके पीछे इसका उद्देश्य पारेषण में सुधार लाने और बैंकिंग प्रणाली को ऋण देने के लिये प्रोत्साहित करना है.

14. संयुक्त अरब अमीरात में 80 ट्रिलियन घनफुट प्राकृतिक गैस का मिला विशाल भंडार

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अबूधाबी और दुबई के साथ लगने वाली सीमा के पास 80 ट्रिलियन घनफुट प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार का पता चला है...जेबेल अली गैस क्षेत्र की खोज से संयुक्ती अरब अमीरात प्राकृतिक गैस के मामले में आत्मंनिर्भर हो जाएगा और अगले 50 वर्षों के अपने विकास कार्यक्रमों के अनुरूप विकास परियोजनाओं के अगले चरण की तैयारी कर सकेगा. यह गैस क्षेत्र पांच हजार वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और संयुक्त अरब अमीरात में प्राकृतिक गैस की सबसे बड़ी खोज है...

15. 92वें (ब्यनावे)एकेडमी अवॉर्ड्स 2020 हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में हुआ आयोजित... कुल 24 कैटेगरीज में दिए गए एकेडमी अवार्ड....

विश्व के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म अवॉर्ड्स के रूप में प्रसिद्ध ऑस्कर अवॉर्ड्स का 92वां(ब्यनावाँ) संस्करण 9 फरवरी (10 फरवरी IST) रात लॉस एंजेलिस में हॉलीवुड एंड हाईलैंड सेंटर के डॉल्बी थियेटर में किया गया...जहाँ ऑस्कर 2020 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार एक्टर वॉकीन फिनिक्स ने फिल्म ‘जोकर’ के लिए बेस्ट एक्टर का ऑस्कर अवॉर्ड जीत लिया है....इस पुरस्कार समारोह में दक्षिण कोरिया की फिल्म ‘पैरासाइट’ ने बेस्ट फिल्म और बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले के अवॉर्ड्स जीते हैं...एक्ट्रेस Renée Zellweger फिल्म ‘जूडी’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का ऑस्कर जीतने में कामयाब रहीं...

16. क्रिस्टिना कोच ने रचा इतिहास, लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड किया कायम

नासा के मुताबिक, पिछला रिकॉर्ड अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी विटसन के नाम था. नासा के मुताबिक, उन्‍होंने अंतरिक्ष में 328 दिन बिताया. उन्‍होंने इस क्रम में धरती के 5,248 चक्कर लगाए और 13.9 करोड़ किमी की दूरी तय की. उन्‍होंने अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर निकलकर 6 बार चहलकदमी की और खुले अंतरिक्ष में 42 घंटे 15 मिनट बिताए. उन्होंने इस दौरान अनेक वैज्ञानिक प्रयोगों व मिशनों को अंजाम दिया. यह क्रिस्टिना कोच का पहला अंतरिक्ष मिशन था.

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।