(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (5th September - 11th September 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  1. सामने आई बाल मृत्युदर के स्तर एवं रुझान’ की रिपोर्ट 2020.... रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल पांच सालों में कम उम्र के जिन बच्चों की मौत हुईं है, उनमें से एक तिहाई बच्चे भारत में...
  2. केंद्र सरकार ने विज्ञापनों के लिए दिशानिर्देशों का मसौदा जारी किया, डिस्क्लेमर पर बढ़ेगी सख्ती...इस मसौदे पर आम लोगों से 18 सितंबर तक सुझाव आमंत्रित किए हैं...
  3. रक्षा क्षेत्र में भारत को मिली अहम कामयाबी....HYPERSONIC TENCHNOLOGY DEMENSTRATOR VEHCILE का हुआ सफलतापूर्ण परीक्षण....
  4. 'वैश्विक बहु आयामी गरीबी सूचकांक' की निगरानी करने के लिये ‘नीति आयोग’ द्वारा राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का किया जा रहा है निर्माण....... उद्देश्य विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मापदंडों पर भारत के प्रदर्शन को मापने और निगरानी करने की आवश्यकता को पूरा करना....
  5. भारत जल्दी ही अमेरिका के साथ 2 + 2 संवाद के लिए क्वाड मीट की करेगा मेजबानी...इस चतुर्पक्षीय बैठक से चीन की बढ़ सकती है मुश्किलें....लोकतांत्रिक शक्तियों के इस समूह को खतरे के संकेत के तौर पर देखता है चीन...
  6. शुरू हुई गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन के संरक्षण के लिए ‘डॉल्फिन परियोजना’की शुरुवात.... उद्देश्य स्तनपायी जलचरों का संरक्षण ..नदी और समुद्री डॉल्फिन की सुरक्षा करना है....
  7. अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के पहले प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन का आयोजन.... इस सम्मेरलन में 153 तरेपन देशों के 26 हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए...सम्मेलन में सौर ऊर्जा की अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया....

खबरें विस्तार से:

1.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘बाल मृत्युदर के स्तर एवं रुझान’ की रिपोर्ट 2020 जारी की गयी है....बताते चलें भारत में बाल मृत्यु दर में 1990 से लेकर 2019 के बीच में काफी गिरावट आई है......संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल पांच सालों में कम उम्र के जिन बच्चों की मौत हुईं है, उनमें से एक तिहाई बच्चे भारत और नाइजीरिया के है...

रिपोर्ट में सचेत किया गया है कि कोविड-19 वैश्विक स्तर पर बाल मृत्यु में आई कमी पर पानी फेर सकता है....

‘बाल मृत्युदर के स्तर एवं रुझान’ की रिपोर्ट 2020 में कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत की संख्या 1990 में एक करोड़ 25 लाख से कम होकर 2019 में 52 बावन लाख रह गई....पिछले तीस सालों में बच्चों की मृत्यु के कारणों पर अंकुश लगाकर, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करके बच्चों की मृत्यु दर को कम किया गया है..

कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं में रूकावट आ रही है, जिनसे बच्चों की मौतों की संख्या में आई गिरावट पर पानी फिर सकता है...मृत्युदर को लेकर यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के जनसंख्या प्रभाग और विश्व बैंक समूह द्वारा जारी नए अनुमान के अनुसार भारत में पांच साल से कम आयु के बच्चों की मृत्युदर (प्रति 1,000 जीवित बच्चों की मौत) 1990 में 126 से कम होकर 2019 में 34 चौंतीस रह गई...

देश में 1990 से 2019 के बीच पांच साल से कम आयु के बच्चों की मौत में 4.5 प्रतिशत की वार्षिक कमी दर्ज की गई है। भारत में पांच साल से कम आयु के बच्चों की मौत की संख्या 2019 में 8,24,000 रही, जबकि 1990 में यह 34 चौंतीस लाख थी....

रिपोर्ट के अनुसार भारत में बाल मृत्युदर (प्रति 1,000 जीवित शिशुओं की मौत) 1990 में 89 नवासी की तुलना में पिछले साल 28 रह गई। देश में पिछले साल 6,79,000 उनासी शिशुओं की मौत हुई थी, जबकि 1990 में यह संख्या 24 लाख थी...

भारत में 1990 में लड़कों की बाल मृत्युदर 122 और लड़कियों की बाल मृत्युदर 131 थी। पिछले साल लड़कों की बाल मृत्युदर 34 चौतीस और लड़कियों की मृत्युदर 35 पैंतीस रही....रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019 में पांच साल से कम आयु के जिन बच्चों की मौत हुई, उनमें से आधे बच्चें नाइजीरिया, भारत, पाकिस्तान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और इथियोपिया के है....केवल नाइजीरिया और भारत में करीब एक तिहाई बच्चों की मौत हुई....

2.

केंद्र सरकार ने हाल ही में विज्ञापनों के संबंध में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत प्रस्तावित दिशा-निर्देंशों का एक व्यापक मसौदा जारी किया है. इसमें आसानी से न दिखने वाले या सामान्य उपभोक्ता के लिए समझने में कठिन DIS CLAIMER डिस्क्लेमर को भ्रामक करार दिया जाएगा. इन दिशा निर्देशों के उल्लंघन पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की तरफ से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

इस प्राधिकरण का गठन हाल ही में किया गया है. उपभोक्ता मंत्रालय ने इस मसौदे पर आम लोगों से 18 सितंबर तक सुझाव आमंत्रित किए हैं. मसौदे में कहा गया है कि डिस्क्लेमर साफ, मोटा और पठनीय होना चाहिए. यह खंडन ऐसा हो जिसे कोई सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति एक व्यावहारिक दूरी और व्यावहारिक गति की अवस्था में पढ़ सके. इसे पैकेट पर किसी स्पष्ट रूप से दिखने वाली जगह पर ही प्रकाशित होना चाहिए.

अगर यह विज्ञापन किसी आवाज या वायस ओवर में सुनाया गया हो, तो उसके साथ लिखित पाठ भी चलाया जाए. यह उसी आकार के फांट तथा भाषा में हो, जिसमें विज्ञापन प्रकाशित किया गया हो. किसी खंडन या अस्वी कारोक्ति में विज्ञापन की किसी भ्रामक बात को शुद्ध करने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए.

मसौदे में कहा गया है कि विज्ञापन में किसी माल या सेवा को मुफ्त या नि:शुल्क या इसी तरह की किसी शब्दावली में प्रस्तुत न किया जाए, AGAR यदि उपभोक्ता को किसी उत्पाद की खरीद या डिलिवरी के लिए उसकी लागत से कुछ भी अलग भुगतान करना पड़ता हो.

इसमें यह भी कहा है कि विज्ञापन में कपंनी के दावे की पुष्टि के लिए खड़े व्यक्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कि उसमें कही गयी बातें ठोस हों और उनकी पुष्टि की जा सके. उसे कोई असत्य या भ्रामक बात का प्रचार नहीं करना चाहिए.

बताते चलें उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना 2020 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 10 (1) के तहत की गई थी. यह अनुचित व्यापार प्रथाओं और भ्रामक विज्ञापनों को ट्रैक करके उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करेगा. यह प्राधिकरण उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के उल्लंघन के मामलों की जांच करेगा. यह उन सामानों को वापस बुलाएगा जो खतरनाक या असुरक्षित हैं.

वहीँ भ्रामक विज्ञापनों के लिए यह निर्माताओं को 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और निर्माताओं को दो साल तक कारावास की सजा दी जा सकती है. यह जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ शिकायतें दर्ज कर सकता है.

3.

हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमन्स्ट्रेटर व्हीकल के सफलतापूर्ण परीक्षण से देश को सस्ते में सेटेलाइट के लॉन्च करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा क्रूज मिसाइल बनाने में भी भारत को मदद मिल सकगी। आइए जानते हैं इसके सफलतापूर्ण परीक्षण से हमारे रक्षा क्षेत्र के विकास पर तथा अन्य क्षेत्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा-

DRDO डीआरडीओ ने इस मिशन को ऐतिहासिक करार दिया है….'DRDO ने यह परीक्षण ओडिशा के वीलर आइलैंड स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लॉन्च कंप्लेक्स से किया। खास बात यह है कि स्क्रैमजेट प्रपल्सन सिस्टम को देश में ही विकसित किया गया है….

इस परीक्षण के बाद हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के विकास के लिये सभी अहम तकनीक का विकास कर लिया गया है। इस तकनीक का कई नागरिक प्रोजेक्टों में भी इस्तेमाल हो सकता है । इस वाहन के जरिये काफी कम लागत पर उपग्रह भी अंतरिक्ष में स्थापित किये जा सकते हैं। इस वाहन का स्क्रैमजेट इंजन हवा से अपना इंधन बनाता है।

यह लॉन्चिंग बालासोर, ओडिशा स्थित डॉ. अब्दुल कलाम द्वीप के एकीकृत परीक्षण रेंज (आइटीआर) से किया गया। यह हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ान भरने वाला मानव रहित स्क्रैमजेट सिस्टम है। जिसकी रफ्तार ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक है। इसके साथ ही ये आसमान में 20 सेकेंड में लगभग 32.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाता है। बता दें कि हाइपरसोनिक technology Demonstrator vehicle यानी HTDV प्रोजेक्ट DRDO की एक महत्त्वाकांक्षी परियोजना है। इसका उद्देश्य कई सैन्य और नागरिक लक्ष्यों को सेवाएं देना है।

जानें HSTDV में क्या है खास?

यह स्क्रै मजेट एयरक्राफ्ट अपने साथ लॉन्गख रेंज और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ले जा सकता है। आवाज से 6 गुना ज्यापदा तेज रफ्तार का मतलब ये कि दुनिया के किसी भी कोने में दुश्मन के ठिकाने को घंटे भर के भीतर निशाना बनाया जा सकता है। आम मिसाइलें बैलस्टिक ट्रैजेक्ट्री फॉलो करती हैं। इसका मतलब है कि उनके रास्ते को आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। इससे दुश्म न को तैयारी और काउंटर अटैक का मौका मिलता है जबकि हाइपरसोनिक वेपन सिस्टॉम कोई तयशुदा रास्तेै पर नहीं चलता। इस कारण दुश्मिन को कभी अंदाजा नहीं लगेगा कि उसका रास्ताो क्यार है। स्पीपड इतनी तेज है कि टारगेट को पता भी नहीं चलेगा।

हाइपरसोनिक मिसाइल डेवलवप करने में मिलेगी मदद

रिपोर्ट्स के मुताबिक डीआरडीओ अगले पांच साल में स्क्रै मजेट इंजन के साथ हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर सकता है। इसकी रफ्तार दो किलोमीटर प्रति सेकेंड से ज्या दा होगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे अंतरिक्ष में सैटलाइट्स भी कम लागत पर लॉन्चज किया जा सकते हैं। HSTDV के सफल परीक्षण से भारत को अगली जेनरेशन की हाइपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस-II तैयार करने में मदद मिलेगी। फिलहाल उसे DRDO और रूस की एजेंसी मिलकर डेवलप कर रहे हैं।

4.

'वैश्विक बहु आयामी गरीबी सूचकांक' (Global Multi dimensional Poverty Index- MPI) इसकी निगरानी करने के लिये ‘नीति आयोग’ द्वारा राष्ट्रीय फ्रेमवर्क का निर्माण किया जा रहा है ....नीति आयोग, वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक मापदण्ड , डैशबोर्ड तथा ‘राज्य सुधार कार्य योजना की तैयारियों के अंतिम चरण में है।

नीति आयोग, वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) के लिए नोडल एजेंसी है...ये वैश्विक MPI दरअसल 29 चुनिंदा वैश्विक सूचकांकों में देश के प्रदर्शन की निगरानी करने के भारत सरकार के फैसले का हिस्सा है...

‘सुधार और विकास के संचालन के लिए वैश्विक सूचकांकों’ वाले इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मापदंडों पर भारत के प्रदर्शन को मापने और निगरानी करने की आवश्यकता को पूरा करना है..

इस प्रक्रिया का उद्देश्य, आत्म-सुधार के उपकरणों के तौर पर इन सूचकांकों के उपयोग को सक्षम करना है और सरकारी योजनाओं के अंतिम-मील तक के कार्यान्वयन में सुधार करते हुए नीतियों में सुधार लाना है...

वैश्विक बहुआयामी निर्धनता सूचकांक (MPI) क्या है?

वैश्विक MPI निर्धनता को लेकर 107 विकासशील देशों को कवर करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय उपाय है...इसे पहली बार 2010 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की मानव विकास रिपोर्ट के लिए ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (Oxford Poverty and Human Development Initiative– OPHI) और UNDP द्वारा विकसित किया गया था...वैश्विक MPI को हर साल जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास संबंधी ‘उच्च-स्तरीय राजनीतिक फोरम’ (High-Level Political Forum– HLPF) पर जारी किया जाता है...

देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

वैश्विक MPI की गणना प्रत्येक सर्वेक्षित घर को 10 मापदंडों पर आधारित अंक देकर की जाती है। इसमें पोषण, बाल मृत्यु दर, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास और घरेलू संपत्ति जैसे मानक शामिल हैं।

MPI 2020 में भारत एवं पड़ोसी देशों का प्रदर्शन

वैश्विक MPI 2020 के अनुसार, NFHS 4 (2015/16) के आंकड़ों के आधार पर भारत 107 देशों में 62वें स्थान पर है और उसका MPI स्कोर 0.123 अंक है और प्रति व्यक्ति अनुपात 27.91 प्रतिशत है....इस सूचकांक में भारत के पड़ोसी देशों, श्रीलंका (25वें), भूटान अडसठवें (68वें), नेपाल (65वें), बांग्लादेश (58वें), चीन (30वें), म्यांमार (69वें) और पाकिस्तान (73वें) रैंकिंग दी गई है....

5.

भारत जल्दी ही ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ 2 + 2 संवाद के लिए क्वाड मीट की मेजबानी करेगा. इस संदर्भ के लिए सभी जरुरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं...बीते 3 सितंबर, 2020 को विदेश मंत्रालय द्वारा नियमित साप्ताहिक ब्रीफिंग में राजनयिक क्रियाकलापों के बारे में जानकारी साझा की गई थी....

क्वाड ग्रुपिंग क्या है

क्वाड या चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद चार लोकतंत्रों - भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका का एक समूह है. इन क्वाड देशों में से दो देशों - ऑस्ट्रेलिया और जापान ने भारत की अवसंरचना प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला में भारी निवेश का आश्वासन दिया है...संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी भारत को भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति के रूप में मान्यता दी है और यह देश भारत के साथ एक अत्यंत करीबी संबंध साझा करता है....

यह क्वाड या चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद/ वार्ता एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच वर्ष 2007 में शुरू किया गया था. इस मंच की शुरुआत तत्कालीन अमेरिकी प्रधानमंत्री डिक चेंजे, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड और भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समर्थन से तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा बातचीत के तौर पर की गई थी...

इन राष्ट्रों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास द्वारा इस संवाद को और अधिक बढ़ावा दिया गया - जिसका शीर्षक एक्सरसाइज मालाबार था. चीन की बढ़ती आर्थिक और सैन्य शक्ति की प्रतिक्रिया के रूप में इस राजनयिक व्यवस्था को बड़े पैमाने पर देखा गया था. चीन ने इस मंच के सदस्य देशों को औपचारिक राजनयिक सुरक्षा जारी की थी...यह मंच तब कुछ राष्ट्रों में सरकारों में बदलाव के बाद, निष्क्रिय हो गया. हालांकि, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मालाबार एक्सरसाइज के माध्यम से अपना संयुक्त नौसेना अभ्यास जारी रखा...

साल 2017 के आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान, सभी चार पूर्व सदस्यों ने क्वाड गठबंधन को पुनर्जीवित करने के लिए बातचीत में भाग लिया और इस वार्ता के बाद, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मुख्य रूप से चीन और दक्षिण चीन सागर में इसकी बढ़ी हुई क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं के कारण उत्पन्न हुए तनाव के कारण क्वाड गठबंधन को पुनर्जीवित करने पर अपनी सहमति व्यक्त की....

यह बैठक महत्वपूर्ण क्यों ?

क्वाड बैठक ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन के बीच सीमा के गतिरोध के महीनों जारी रहने के बाद चीन के घुसपैठ के प्रयासों को रोकने के लिए मौजूदा तनाव बहुत अधिक है. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, चीन इस चतुर्पक्षीय बैठक और 2 + 2 वार्ता को बहुत बारीकी से देख रहा होगा क्योंकि यह लोकतांत्रिक शक्तियों के इस समूह को खतरे के संकेत के तौर पर देखता है.

क्वाड चीन के लिए चिंता का विषय क्यों है?

जबकि चीन का भारत के साथ पहले से ही सीमा पर गतिरोध चल रहा है, उसे अपने विवादास्पद हांगकांग राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कारण भी पूरी दुनिया से अपार आलोचना झेलनी पड़ रही है. इस कानून को लोकतंत्र की एक त्रासदी के रूप में देखा जा रहा है...

शिनजियांग में उइगर मुसलमानों के खिलाफ अपने कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर भी चीन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. चीन पर भारत, अमेरिका और अन्य कई राष्ट्रों द्वारा कथित तौर पर इंटरनेट गोपनीयता भंग करने का भी आरोप लगाया गया है.

सभी द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर यथास्थिति को बदलने की चीन की कोशिश की भी दुनिया भर के कई देशों ने निंदा की है.

दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ी हुई सैन्य आक्रामकता ने इस क्षेत्र में स्थित देशों के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है....इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोविड -19 की उत्पत्ति पर यह आरोप लगाते हुए एक सवाल उठाया था कि, यह वायरस वुहान में एक चीनी प्रयोगशाला में उत्पन्न हुआ है. ट्रम्प ने कोरोना वायरस को चीनी वायरस भी कहा है....

अमेरिका ने देश में चीनी राजनयिकों और अमेरिकी लोगों के साथ काम करने वाली चीनी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाया है. अमेरिका ने तब तक टिकटॉक पर लगभग प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है, जब तक यह अपनी चीनी मूल कंपनी बाइटडांस द्वारा एक अमेरिकी फर्म को बेचा नहीं जाता है...भारत ने चीनी लिंक वाले कई प्रमुख ऐप पर प्रतिबंध लगाते हुए एक कड़ा कदम उठाया, जिसमें लोकप्रिय वीडियो-साझाकरण प्लेटफ़ॉर्म टिकटॉक और पबजी भी शामिल हैं. भारतीय रेलवे ने अपने चीनी निवेश सौदे को भी रद्द कर दिया है.

6.

गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन मीठे पानी में पाई जाने वाली डॉल्फिन की एक प्रजाति है जो भारत, बांग्लादेश और नेपाल में गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों में पाई जाती है...

बतातें चलें गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलप्राणी घोषित किए जाने के दस साल बाद चोहततर वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने इस प्रजाति के संरक्षण के लिए परियोजना शुरू करने की घोषणा की....‘बाघ परियोजना’ और ‘हाथी परियोजना’ की भांति ‘डॉल्फिन परियोजना’ का उद्देश्य स्तनपायी जलचरों का संरक्षण करना है.... इस प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य नदी और समुद्री डॉल्फिन की सुरक्षा करना है...

गोरतलब हो की प्रोजेक्ट डॉल्फिन को बीते वर्ष दिसंबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा परिषद (NGC) की पहली बैठक में मंज़ूरी मिली थी...अब तक नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG), जो कि सरकार की प्रमुख योजना नमामि गंगे को लागू करता है, उसकी और से डॉल्फिन को बचाने के लिये कुछ पहल की हैं...डॉल्फिन के संरक्षण के लिये यह प्रोजेक्ट डॉल्फिन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा...

बताते चलें गंगा डॉल्फिन विश्व भर की नदियों में पाई जाने वाली डॉल्फिन की पाँच प्रजातियों में से एक है...गंगा नदी जल प्रणाली जलीय जीवन की एक विशाल विविधता का घर है, जिसमें गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) भी शामिल है... इसका वैज्ञानिक नाम प्लैटनिस्टा गैंगेटिका (Platanista Gangetica) है....

इस प्रकार की डॉल्फिन मुख्य तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप खासतौर पर गंगा-ब्रह्मपुत्र-सिंधु-मेघना और कर्णाफुली-सांगू (Karnaphuli-Sangu) नदी तंत्र में पाई जाती हैं...

‘गंगा डॉल्फिन संरक्षण कार्य योजना 2010-2020’ में नर डॉल्फिन को 2 से 2.2 मीटर लंबा और मादा डॉल्फिन को 2.4 से 2.6 मीटर लंबा बताया गया है...बताते चलें की एक वयस्क गंगा डॉल्फिन का वजन 70 किलोग्राम से 90 किलोग्राम के बीच हो सकता है...

भारत में ये असम, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में पाई जाती है..भारत सरकार ने गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव (National Aquatic Animal) के रूप में मान्यता दी है....

एक समय था जब गंगा डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) को गंगा में बंगाल की खाड़ी के डेल्टा से लेकर हिमालय की तलहटी में ऊपर के कई स्थानों पर देखा जा सकता था...यह गंगा की सहायक नदियों में भी पाई जाती थी...कई विशेषज्ञ मानते हैं कि 19वीं शताब्दी के दौरान दिल्ली की यमुना नदी में भी डॉल्फिन पाई जाती थी....हालाँकि नदियों पर बाँधों के निर्माण और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण जलीय जीवों खासतौर पर डॉल्फिन की आबादी में गिरावट आई है....

चूँकि गंगा डॉल्फिन खाद्य श्रृंखला के शीर्ष पर है, इसलिये नदी के जलीय जीवन का संरक्षण सुनिश्चित करने के लिये गंगा डॉल्फिन की रक्षा करना बेहद जरूरी है...

लेकिन जल प्रदूषण के रूप में एकल उपयोग वाले प्लास्टिक औद्योगिक प्रदूषण, मछली पकड़ने वाले जाल, नदियों में गाद का जमा होना, तेल प्राप्त करने के लिये इनका शिकार करना, आदि इनकी उपस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक हैं...नदियों पर बने बांध भी इनकी वृद्धि को प्रभावित कर रहे हैं, क्योंकि ये संरचनाएँ पानी के प्रवाह को बाधित करती हैं....

वर्तमान में गंगा डॉल्फिन की स्थिति

हालाँकि इस संबंध में कोई सटीक आँकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न अनुमानों से पता चलता है कि भारत में गंगा डॉल्फिन की आबादी लगभग 2,500-3,000 हो सकती है....हालाँकि बीते साल केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो ने लोकसभा को सूचित किया था कि अकेले उत्तर प्रदेश में लगभग 1,272 डॉल्फिन और असम में लगभग 962 बासठ डॉल्फिन हैं...

यह ध्यान देने वाली बात है कि गंगा के बढ़ते प्रदूषण के कारण उसमें जलीय जीवन पर खासा प्रभाव पड़ा है, खासतौर पर डॉल्फिन की संख्या में कमी देखने को मिली है....

गंगा डॉल्फिन को बचाने के प्रयास

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम: साल 1985 पचासी में गंगा एक्शन प्लान (Ganga Action Plan) की शुरुआत के बाद 24 नवंबर, 1986 छियासी को सरकार ने एक अधिसूचना के माध्यम से गंगा डॉल्फिन को भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 बहत्तर की प्रथम अनुसूची में शामिल कर दिया गया था। सरकार के इस कदम का उद्देश्य गंगा डॉल्फिन के संरक्षण को बढ़ावा देना और उनके लिये वन्यजीव अभयारण्यों जैसी संरक्षण सुविधाएँ प्रदान करना था....

संरक्षण योजना: सरकार ने ‘गंगा डॉल्फिन संरक्षण कार्य योजना 2010-2020’ भी तैयार की है, जिसमें गंगा डॉल्फिन के समक्ष मौजूद खतरों और उनकी आबादी पर नदी के यातायात और सिंचाई नहरों आदि के प्रभावों की पहचान की गई है...

राष्ट्रीय जलीय जीव: 5 अक्तूबर, 2009 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) की पहली बैठक की अध्यक्षता करते हुए गंगा डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। अब राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन द्वारा प्रत्येक वर्ष 5 अक्तूबर को गंगा डॉल्फिन दिवस मनाया जाता है....

लेकिन इन तमाम कोशिशों के बावजूद भी गंगा डॉल्फिन अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लुप्तप्राय (Endangered) सूची में शामिल है.. सरकार द्वारा शुरू किया जा रहा प्रोजेक्ट डॉल्फिन (Project Dolphin) इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हो सकता है, हालाँकि आवश्यक है कि प्रोजेक्ट के लॉन्च के बाद इसके कार्यान्वयन पर भी ध्यान दिया जाए...

7.

इंटरनेशनल सोलर एलायंस द्वारा बीते 8 सितम्बर को विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन का वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए आयोजन किया गया.....153 तरेपन देशों के 26 हजार से अधिक प्रतिभागी इस सम्मेजलन में शामिल हुए...इस सम्मेलन में सौर ऊर्जा की अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को लेकर नवीन और नवीकरणीय और सस्ती-टिकाऊ स्वच्छ हरित ऊर्जा के उत्पादन में तेजी लाने के बारे में विचार-विमर्श किया गया....

इंटरनेशन सोलर एलायंस या आई एस ए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए सम्मेलन में हिस्सा लिया...बताते चलें देश की पांच सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस कंपनियां उद्यगी सहभागी के तौर पर आईएसए में हिस्सा लेंगी..सम्मेलन में भारत के नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और इंटरनेशनल सोलर एलायंस के बीच 47 सैंतालिस परियोजनाओं को लागू करने के समझौते पर भी दस्तख्त किए गए..इस समझौते के तहत एनटीपीसी आईएसए के 47 सैंतालिस सदस्य देशों में सौर ऊर्जा उत्पादन परियोजनाएं शुरु करेगा....

शिखर सम्मेलन में आईएसए और ग्लोबल ग्रीन ग्रोथ इंस्टीट्यूट के बीच साझेदारी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए..इस समझौते के तहत आईएसए के सबसे ज़रुरतमंद सदस्य देशों में सिंचाई के लिए 10 लाख सोलर पंप्स लगाने का लक्ष्य है...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर इंटरनेशनल सोलर एलायंस की शुरुआत 2015 में हुई थी। इस संगठन का उद्देश्य कर्क व मकर रेखा के बीच स्थित उन देशों को एक मंच पर लाने का है जहां सौर ऊर्जा उत्पादन की अपार संभावना है...

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन या International Solar Alliance

ISA में 121 देश हैं जो सौर ऊर्जा के लाभों का दोहन करने और स्वच्छ ऊर्जा अनुप्रयोगों को बढ़ावा देने के लिए काम करते हैं। इस गठबंधन की पहल भारत ने की थी। यह 2015 में आयोजित पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में प्रस्तावित किया गया था। भारत सरकार ने गुरुग्राम में आईएसए के मुख्यालय के निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन आवंटित की है। साथ ही, बुनियादी सुविधाओं के लिए 160 करोड़ रुपये जारी किए गए। पहली आईएसए सभा 2018 में आयोजित की गई थी....

बताते चलें केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, भारत ने जुलाई 2020 में 35 पैंतीस गीगावॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया....

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं का शुभारंभ

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9 सितंबर, 2020 को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) द्वारा डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं का शुभारंभ किया है. इस सेवा का उद्देश्य ग्राहकों को उनके डोरस्टेप (द्वार) पर बैंकिंग सेवाओं की सुविधा प्रदान करना है.

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी करके यह कहा है कि, EASE रिफॉर्म्स के एक हिस्से के तौर पर, कॉल सेंटर, वेब पोर्टल या मोबाइल ऐप के सार्वभौमिक टचपॉइंट्स के माध्यम से ग्राहकों को उनके दरवाजे पर बैंकिंग सेवाएं प्रदान करने के लिए इन डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं की परिकल्पना की गई है.

2. भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने की भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने हेतु त्रिपक्षीय वार्ता आयोजित

ऑस्ट्रेलिया, भारत और फ्रांस के विदेश सचिवों ने इस 9 सितंबर, 2020 को पहली त्रिपक्षीय वार्ता की सह-अध्यक्षता की. इस संवाद का उद्देश्य एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण, समृद्ध और नियमों पर आधारित प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए अपनी-अपनी ताकत का समन्वय करना था.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस आभासी बैठक की अध्यक्षता भारतीय विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, यूरोप मंत्रालय और फ्रांस के विदेश मामलों के महासचिव फ्रेंकोइस डेल्ट्रे और ऑस्ट्रेलियाई विदेश विभाग और व्यापार सचिव, फ्रांसेस एडमसन ने की थी. भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच त्रिपक्षीय वार्ता का ध्यान भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर था.

3. आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 105वें स्थान पर

कनाडा की एक संस्था द्वारा प्रकाशित की जाने वाली वार्षिक तुलनात्मक रिपोर्ट ‘ग्लोबल इकोनामिक फ्रीडम इंडेक्स’ (वैश्विक आर्थिक स्वतंत्रा सूचकांक) 2020 में भारत 26 स्थान नीचे खिसक कर 105वें स्थान पर आ गया है. इस सूची में हांगकांग और सिंगापुर पहले और दूसरे स्थान पर तथा चीन 124वें स्थान पर है.

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक वर्ष में सरकार के आकार, न्यायिक प्रणाली और सम्पत्ति के अधिकार, वैश्विक स्तर पर व्यापार की स्वतंत्रता, वित्त, श्रम और व्यवसाय के विनियमन जैसी कसौटियों पर भारत की स्थिति थोड़ी खराब हुई है. भारत पिछले साल 79वें स्थान पर था.

4. पीएम मोदी ने लॉन्च किया मत्स्य संपदा योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 सितम्बर 2020 को प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (पीएमएमएसवाई) का शुभारंभ किया. इस योजना का मुख्य मकसद किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के लक्ष्य के तहत मत्स्यपालन क्षेत्र का निर्यात बढ़ाना है. प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और किसानों से बातचीत भी की.

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये आयोजित इस कार्यक्रम के जरिये प्रधानमंत्री ने मत्स्यपालन तथा पशुपालन क्षेत्र के लिए कई और योजनाओं की शुरुआत की. इस योजना की शुरुआत बिहार से हुई है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने मोबाइल ऐप ई-गोपाला का भी शुभारंभ किया. यह ऐप किसानों को पशुधन के लिए ई-मार्केटप्लस उपलब्ध कराएगी.

5. पीएम मोदी ने लॉन्च किया ई-गोपाला ऐप

ई-गोपाला ऐप के बारे में खुद पीएम ने ट्वीट कर कहा है कि यह हमारे मेहनती किसानों के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाजार और सूचना पोर्टल प्रदान करता है. यह एक अभिनव प्रयास है, जिससे कृषि क्षेत्र को बहुत लाभ होगा. इसके मुताबिक यह ऐप किसानों के प्रत्यक्ष उपयोग के लिए एक व्यापक नस्ल सुधार बाज़ार और सूचना पोर्टल है. इस ऐप के जरिए कृत्रिम गर्भाधान, पशु की प्राथमिक चिकित्सा, टीकाकरण, उपचार आदि और पशु पोषण के लिए किसानों का मार्गदर्शन किया जा सकेगा. ई-गोपाला ऐप इन सभी पहलुओं पर किसानों को समाधान प्रदान करेगा.

6. केंद्र सरकार ने चीनी नागरिकों के लिए ज्यादा सख्त किये वीजा नियम

भारत सरकार ने चीनी नागरिकों के लिए सख्त वीजा मानदंड लागू किए हैं. ये मानदंड चीन को अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे प्राइम रेफरल श्रेणी के देशों के बराबर लाएंगे.

गृह मंत्रालय ने व्यापार वीजा देने के अपने नवीनतम दिशानिर्देशों में इन ‘चीनी नागरिकों के लिए विशिष्ट प्रावधान’ पेश किए हैं, जिसमें विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) को रिपोर्ट करना शामिल है.

गृह मंत्रालय के ये नवीनतम निर्देश कोरोना वायरस महामारी के कारण भारत में चल रहे यात्रा प्रतिबंधों के मद्देनजर वीजा नियमों में किये गये बड़े बदलावों का हिस्सा हैं. गृह मंत्रालय ने अपने 72 पन्नों के इन दिशा-निर्देशों में चिकित्सा, रोजगार, छात्र और अनुसंधान वीजा के अनुदान की शर्तों को निर्धारित किया है और यह कहा है कि, अगर चीनी व्यापार वीज़ा धारकों का प्रवास एक कैलेंडर वर्ष में 180 दिनों से अधिक हो, तो उन सभी चीनी व्यापार वीज़ा धारकों के लिए अपने प्रवास के दौरान खुद को FRRO में पंजीकृत कराना आवश्यक है.

7. भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ Rafale

राफेल लड़ाकू विमान औपचारिक रूप से भारतीय वायुसेना में शामिल हो गया है. राफेल अंबाला एयरबेस पर 17 स्कवॉड्रन 'गोल्डन ऐरोज़' में शामिल किया गया है. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोंरेस पार्ले की मौजूदगी में राफेल वायुसेना में शामिल हुआ. इसके साथ ही एयरफोर्स की ताकत और बढ़ गई है.

भारत-चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव के बीच भारत के लिए इस उपलब्धि को काफी अहम माना जा रहा है. राफेल के भारतीय वायुसेना में शामिल होने के बाद दुश्मनों के खिलाफ बड़ी बढ़त के तौर पर देखा जा रहा है. पांच राफेल लड़ाकू विमानों को 10 सितम्बर

2020 को अंबाला हवाई ठिकाने पर हुए शानदार समारोह में भारतीय वायु सेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया.

8. हिमाचल प्रदेश ने रचा इतिहास, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना

हिमाचल प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (New Education Policy-2020) को लागू कर दी गई है. हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल से 08 सितम्बर 2020 को मंजूरी मिलते ही शिक्षा सचिव ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है. इसे सफलतापूर्वक लागू करने के लिए

43 सदस्यों की टास्क फोर्स का गठन किया गया है.

हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने तत्काल प्रभाव से नई शिक्षा नीति को लागू कर दिया है. हिमाचल प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू होने के साथ ही 43 सदस्यों की टास्क फोर्स के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर को दी है.

9. ब्रिटिश प्रसारक डेविड एटनबरो को मिला इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

ब्रिटिश पत्रकार डेविड एटनबरो को इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. 07 सितम्बर 2020 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें एक वर्चुअल कार्यक्रम में इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया. इस ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं.

इंदिरा गांधी स्मारक न्यास की तरफ से आयोजित डिजिटल कार्यक्रम में एटनबरो को इस पुरस्कार से नवाजा गया. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इस मौके पर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक विकासशील देश के लिए विकास की जरूरत को समझने वाली नेता होने के साथ पर्यावरण संरक्षण की चैम्पियन थीं.

10. 2021 के शुरू में लॉन्च हो सकता है चंद्रयान-3

केंद्रीय अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने 6 सितंबर, 2020 को यह सूचित किया है कि, वर्ष 2021 के शुरू में भारत के चंद्रमा के मिशन, चंद्रयान - 3 को लॉन्च किये जाने की संभावना है.

केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि, चंद्रयान -2 के विपरीत, इस मिशन में ऑर्बिटर शामिल नहीं होगा, लेकिन इसमें एक रोवर और एक लैंडर शामिल होंगे.

सितंबर, 2019 में चंद्रयान - 2 की कठिन लैंडिंग के बाद, भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने वर्ष 2020 में बाद में, चंद्रमा के लिए एक और मिशन की योजना बनाई थी. हालांकि, इसरो के कई प्रोजेक्ट्स और मिशनों में महामारी और लॉकडाउन की मार पड़ी है.

11. फाइव स्टार विलेज स्कीम’ (Five Star Villages Scheme) की शुरुआत

हाल ही में भारतीय डाक विभाग ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख डाक योजनाओं की सार्वभौमिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिये ‘फाइव स्टार विलेज स्कीम’ (Five Star Villages Scheme) की शुरुआत की है।

यह योजना विशेष रूप से सुदूरवर्ती गाँवों में डाक सेवाओं के बारे में जन जागरूकता फैलाने तथा डाक उत्पादों एवं सेवाओं को पहुँचाने का प्रयास करेगी।

फाइव स्टार गाँवों की योजना के तहत सभी डाक उत्पादों एवं सेवाओं को ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध कराके उनका विपणन एवं प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

भारतीय डाक विभाग के शाखा कार्यालय ग्रामीणों की सभी संबंधित ज़रूरतों को पूरा करने के लिये वन-स्टॉप शॉप के रूप में कार्य करेंगे।

12. नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य 2.5 मिमी. लंबी चींटी की एक नई प्रजाति ‘वैभव प्रोटानिल्ला’ की खोज

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने गोवा के नेत्रावली वन्यजीव अभयारण्य (Netravali Wildlife Sanctuary) में लगभग 2.5 मिमी. लंबी चींटी की एक नई प्रजाति ‘वैभव प्रोटानिल्ला’ (Vaibhav’s Protanilla) की खोज की है। चींटी की इस नई प्रजाति का नाम ‘वैभव प्रोटानिल्ला’ (Vaibhav’s Protanilla), प्रोफेसर वैभव चिंदारकर (Vaibhav Chindarkar) के नाम पर रखा गया है जो गोवा के सखाली (Sakhali) में ‘गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स’ के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रमुख हैं।

वैभव प्रोटानिल्ला को प्रोटानिल्ला नामक चींटियों के एक दुर्लभ समूह में स्थान दिया गया है, अभी तक इस समूह से संबंधित सिर्फ 12 चींटी प्रजातियाँ ही ज्ञात थीं।

अन्य भूमिगत चींटियों की तरह यह समूह पारिस्थितिकी तंत्र के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है जैसे- मिट्टी में कीट नियंत्रण करके मृदा की उर्वरता बनाए रखना।

13. परेश रावल को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama-NSD) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया

वरिष्ठ कलाकार परेश रावल को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (National School of Drama- NSD) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस संबंध में घोषणा करते हुए केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह ने कहा कि ‘परेश रावल की प्रतिभा का लाभ देश के कलाकारों एवं छात्रों को अवश्य मिलेगा।’ ध्यातव्य है कि परेश रावल ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरुआत वर्ष 1982 में एक गुजराती फिल्म से की थी। परेश रावल उन कुछ चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं, जो फिल्मी दुनिया में सफलता हासिल करने के बाद भी थिएटर में काफी सक्रिय रहे हैं। वहीं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) विश्व के अग्रणी नाट्य प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक और भारत में अपनी तरह का एक मात्र संस्थान है। इसकी स्थापना संगीत नाटक अकादमी (Sangeet Natak Akademi) द्वारा उसकी एक इकाई के रूप में वर्ष 1959 में की गई। वर्ष 1975 में यह एक स्वतंत्र संस्था बनी और वर्तमान में यह संस्था संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्तपोषित एक शिक्षण संस्थान के रूप में कार्य कर रही है।

14. गुजरात ने राज्‍य की पहली धरोहर पर्यटन नीति (Heritage Tourism Policy) की घोषणा की

गुजरात सरकार ने राज्‍य की पहली धरोहर पर्यटन नीति (Heritage Tourism Policy) की घोषणा की है। राज्य की इस नई धरोहर पर्यटन नीति में राज्य के पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय आगंतुकों हेतु प्राचीन महलों, किलों और अन्य विरासत स्मारकों को खोलने का प्रावधान किया गया है। नई नीति के मुताबिक वर्ष 1950 से पूर्व की सभी ऐतिहासिक इमारतों को धरोहर होटलों, धरोहर म्‍यूज़ियम और धरोहर रेस्‍टोरेंट के रूप में इस्‍तेमाल करने की इजाज़त देने का प्रावधान है। यह नीति न केवल राज्य में आने वाले पर्यटकों को राज्य के ऐतिहासिक स्मारकों में ठहरने और उनका अनुभव लेने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि यह स्थानीय रोज़गार और राज्य पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। इस नीति के अंतर्गत व्‍यवसायिक गतिविधियों से राज्य की धरोहर इमारतों को किसी तरह का नुकसान न हो, इस बात का भी ध्‍यान रखा गया है। इस निर्णय से राज्य में ऐतिहासिक इमारतों को पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र के रूप में विकसित करने में काफी मदद मिलेगी। इस नीति के तहत राज्‍य सरकार मौजूदा और नए होटलों के रख-रखाव तथा विस्‍तार के लिये पाँच से दस करोड़ रुपए तक की सहायता राशि उपलब्‍ध कराएगी।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।