(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (31st July - 06th August 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • सैकड़ों सालों का इंतजार हुआ खत्म ...5 अगस्त को राम मंदिर का हुआ भूमि पूजन और शिलान्यास.... सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को अपने ऐतिहासिक फैसले में विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला को दिया था ....
  • नेपाल के बाद पकिस्तान ने जारी किया पना नया नक्षा....भारत के कश्मीर-लद्दाख और जूनागढ़ पर किया दावा...
  • आंध्रप्रदेश की तीन राजधानियों की मांग....(YSR Congress) सरकार द्वारा राज्य के लिए तीन राजधानियों के गठन पर जारी की गयी अधिसूचना ....आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 14 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गयी…
  • नेपाल ने उठाया गोरखा सैनिकों का मसला, कहा त्रिपक्षीय समझौता हुआ निरर्थक....त्रिपक्षीय समझौते की समीक्षा की जरूरत बताई ,....
  • H1B वीसा धारकों को बड़ा झटका.....राष्ट्रपति ट्रंप ने को एच-1बी वीजा को लेकर एक कार्यकारी आदेश पर किये हस्ताक्षर....अमेरिकी एजेंसियां अब नही रख पाएंगी एच -1बी वीजा धारकों को नौकरी पर...भारतीय आईटी कामगारों के लिए बड़ा झटका...
  • रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्‍पादन और निर्यात संवर्द्धन नीति-2020 का मसौदा तैयार किया.... इस नीति का मुख्य उद्देश्‍य ‘आत्‍मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में देश को आत्मसहायक बनाना...
  • राज्य के अरावली क्षेत्र में हरित आवरण को बेहतर बनाने के लिये ..हरियाणा वन विभाग की पहले......एरियल सीडिंग ड्रोनों को किया तैनात...अब फिर से जी उठेंगी अरावली और शिवालिक पहाड़ियों के दुर्गम और कठिन स्थलों पर कम वनस्पति घनत्व या खंडहर क्षेत्रों

खबरें विस्तार से:

1.

5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन किया गया....जिसमे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कई गणमान्य लोगों ने भाग लिया....हालांकि महामारी की स्थिति को देखते हुए कार्यक्रम को सीमित रखा गया है...

बतातें चलें की पिछले साल सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या राम जन्म भूमि-बाबरी बस्जिद भूमि विवाद मामले पर अपना निर्णय सुनाया था...

क्या था सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय ने 5 एकड़ की विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए किसी अन्य स्थान पर पांच एकड़ भूमि प्रदान करने का आदेश दिया है...

यह निर्णय भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने सुनाया। इस पीठ में जस्टिस अशोक भूषण, एस.ए. बोबड़े, डी. वाई. चंद्रचूड़ तथा एस. अब्दुल नजीर शामिल है। इस फैसले का समर्थन पाँचों न्यायधीशों ने किया है।

एक नज़र अयोध्या भूमि विवाद की टाइमलाइन पर

1885 पचासी को महंत रघुबर दास ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रथम मुकद्दमा दायर किया....साल 1949 उनचास में बाबरी मस्जिद के अन्दर भगवान् श्री राम की मूर्तियाँ पायी गयीं....साल 1950 से 1950 के बीच हिन्दू तथा मुस्लिम संगठनों ने 5 अन्य मुकद्दमे दायर किये।

1992 बानबे में दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को नष्ट कर दिया...जिसके बाद 2010 में इलाहबाद उच्च न्यायालय ने विवादित भूमि को तीन पार्टियों – निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा राम लल्ला में विभाजित किया था...

2.

पाकिस्तान का नया नक्शा

पाकिस्तान ने नेपाल के नक़्शे कदम पर चलते हुए अपना विवादित नया नक्शा जारी किया है जिसमे भारत के लद्दाख , जम्मू-कश्मीर के सियाचिन समेत गुजरात के जूनागढ़ पर भी दावा किया गया है...पाकिस्तान ने यह कदम ऐसे वक़्त पर उठाया है जिस समय भारत 5 अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 कश्मीर से हटाने की बरसी मनाने जा रहा है। इसके पहले भारत के पड़ोसी देश नेपाल ने उत्तरखंड राज्य के पिथौरागढ़ ज़िले के कालापानी क्षेत्र को अपने नक़्शे में शामिल किया था

सियाचिन सर क्रीक और जूनागढ़ पर दावा

पाकिस्तान के नए नक़्शे में सियाचिन को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत पर आरोप लगाते हुए कहा की वो यहां गैरकानूनी तरीके से गतिविधियों में संलग्न है । सर क्रीक में भारत के साथ विवाद को दरकिनार करते हुए पाकिस्तान ने इस इलाके को अपने नक्शे में शामिल कर लिया है। गौर तलब है की इन दोनों इलाकों के अलावा पकिस्तन ने गुजरात के जूनागढ़ को भी नए नक़्शे में दिखाया है। पाकिस्तान ने नए नक़्शे में जहां भारतीय क्षेत्रों पर दावेदारी ज़ाहिर की है, वहीं जिन इलाकों को लेकर चीन और भारत के बीच विवाद है, उन्हें 'अनडिफाइंड फ्रंटियर' बताया है। कहा जा रहा है की पाकिस्तान यह नक्शा अब संयुक्त राष्ट्र के सामने पेश करने की मंशा में है।

चीन की साज़िश

चीन, जो की पाकिस्तान का हितैषी माना जाता है ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अपने वीटो का इस्तेमाल करते हुए कई बार कश्मीर मसले पर बहस की कोशिशें की। हालांकि ये सारे मंसूबे नाकाम साबित हुए और संयुक्त राष्ट्र के अन्य सदस्योंद्वारा खारिज कर दिए गए। पाकिस्तान के नया नक्शा पेश किये जाने के पीछे चीन का हाथ हो सकता है। इससे पहले पाकिस्तान के मानचित्र पर कश्मीर के हिस्से को नहीं दिखाया गया था जबकि नए माचित्र में LOC को काराकोरम दर्रे तक दिखाया गया है। इस नक़्शे में जम्मू और कश्मीर को विवादित क्षेत्र बताया गया है जिसका अंतिम निर्णय सुरक्ष परिषद् के द्वारा किया जाएगा...

पूरे मामले में भारत की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान द्वारा नया मानचित्र जारी किये जाने के घंटों बाद भारत की प्रतिक्रिया आयी जिसमे पाकिस्तान के इस नए मानचित्र को सिरे से नकारा गया है। एक वक्तव्य में भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा की पाकिस्तान द्वारा उठाया गया ये कदम राजनैतिक रूप से बेबुनियाद है जिसमे उसने भारत के गुजरता जम्मू कश्मीर और लदाख क्षेत्रों पर दावा किया है। भारत ने कहा की पाकिस्तान का ये कदम गैर कानूनी है और इसके अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई मायने नहीं हैं....

3.

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य की तीन नयी राजधानियां बनाने से संबंधित दो नए कानूनों पर मंगलवार को यथास्थिति का आदेश दिया....

बता ते चलें की वाईएसआर कांग्रेस (YSR Congress) सरकार द्वारा राज्य के लिए तीन राजधानियों के गठन पर जारी की गयी अधिसूचना पर आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा 14 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी गयी है…

सरकार द्वारा जारी किये गए दो अधिनियमों पर रोक लगाने तथा प्रदेश के लिए तीन राजधानियों के गठन संबंधी अधिसूचना के विरोध में उच्च न्यायालय में कई याचिकाएं दायर की गयीं हैं...

इन याचिकाओं के प्रत्युत्तर में, अदालत ने राजपत्रित अधिसूचना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है तथा राज्य सरकार से 10 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।

गोरतलब हो की जनवरी 2020 में आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक, 2020 पारित किया गया था।...

राज्य सरकार द्वारा 31 जुलाई को ‘आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम, 2020 तथा आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (निरसन) अधिनियम, 2020 को अधिसूचित किया गया....

यह अधिनियम राज्य के लिए तीन राजधानियों का मार्ग प्रशस्त करता है।

अमरावती- विधायी राजधानी

विशाखापत्तनम- कार्यकारी राजधानी

कुर्नूल – न्यायिक राजधानी

तीन राजधानियों की क्यूँ है आवश्यकता?

राज्य सरकार का कहना है कि वह राज्य के अन्य हिस्सों की उपेक्षा करते हुए एक विशाल राजधानी शहर बनाने के विरुद्ध है। प्रदेश की तीन राजधानियाँ होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का समान रूप से विकास सुनिश्चित होगा।

आंध्र प्रदेश की राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान का सुझाव देने के लिए गठित सभी प्रमुख समितियों की सिफारिशों में ‘विकेंद्रीकरण’ केंद्रीय विषय रहा है। इन समितियों में जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण समिति, के शिवरामकृष्णन समिति, तथा जी एन राव समिति आदि सम्मिलित हैं।

इस विचार को लागू करने में समस्या आ सकती है जैसे समन्वय और क्रियान्वयन संबधी आशंका: अलग-अलग शहरों में स्थित विधायिका तथा कार्यपालिका का मध्य समन्वय स्थापित करना, कहने के लिए आसान लेकिन करने के लिए काफी मुश्किल साबित होगा, तथा, इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा इस संदर्भ में किसी योजना का विवरण नहीं दिया गया है, इससे अधिकारी तथा आम नागरिक सभी, इसके कार्यान्वयन को लेकर आशंकित हैं।

परिवहन लागत और समय: कार्यकारी राजधानी विशाखापत्तनम, न्यायिक राजधानी कुर्नूल से 700 किमी तथा विधायी राजधानी अमरावती से 400 किमी की दूरी पर स्थित है। अमरावती तथा कुर्नूल के मध्य 370 किमी की दूरी है। तीन राजधानियां होने से यात्रा में लगने वाला समय तथा लागत काफी महंगी साबित होगी।

4.

हाल ही में नेपाल के विदेश मंत्री द्वारा गोरखा सैनिकों की सैन्य सेवाओं से संबंधित सन 1947 सैंतालिस में नेपाल, भारत और ब्रिटेन के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते को विफल बताया गया है...

गोरखा सैनिकों संबंधी समझौते के बारे में:

वर्ष 1814-16 में हुए एंग्लो-नेपाली युद्ध के पश्चात वर्ष 1815 में अंग्रेजों द्वारा सेना में गोरखा सैनिकों की भर्ती करने का फैसला किया गया....

वर्ष 1947 सैंतालिस में भारत की आजादी के समय ब्रिटिश सेना में गोरखा सैनिकों की 10 रेजिमेंट्स थी, इनके बटबारे को लेकर ब्रिटेन-भारत-नेपाल के मध्य त्रिपक्षीय समझौता किया गया था....

इस समझौते के तहत ब्रिटिश साम्राज्य की गोरखा रेजिमेंट्स को भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बांट दिया गया.....

इसमें यह भी आश्वासन दिया गया, कि गोरखा सैनिकों को दोनों सेनाओं में भारतीय और ब्रिटिश सैनिकों की भांति ही वेतन, भत्ते, सुविधाएं और पेंशन दी जायेगी।

विवाद का विषय

पिछले कुछ समय से, सेवानिवृत्त गोरखा सैनिक ब्रिटेन पर उनके साथ भेदभाव करने का आरोप लगा रहे हैं....हाल ही में कालापानी क्षेत्र को लेकर हुए नेपाल-भारत क्षेत्रीय विवाद की पृष्ठभूमि में भारतीय सेना में सेवारत गोरखाओं के संदर्भ में नेपाल द्वारा प्रमुखता से आपत्तियों को उठाया गया है।

नेपाल द्वारा उठाये गए कदम

नेपाल द्वारा गोरखा सैनिकों के सुरक्षित भविष्य के संबंध में यूनाइटेड किंगडम से 1947 सैंतालिस के समझौते की समीक्षा करने के लिए पत्र लिखा है....इसके अतिरिक्त, नेपाल वर्ष 1947 सैंतालिस में किये गए इस समझौते को समाप्त करने की योजना बना रहा है।

वर्तमान में, ब्रिटिश सेना में गोरखाओं की संख्या 3% है तथा वर्ष 2015 में गोरखाओं को ब्रिटिश सेना में 200 वर्ष पूरे हो गए....ब्रिटिश सेना में गोरखाओं को खूँखार और वफादार के रूप में जाने जाते है तथा उच्च सम्मान दिया जाता है। सेना में गोरखाओं को पैदल सेना (Infantry) के अलावा इंजीनियरिंग कोर तथा लोजिस्टिक कोर में भी भर्ती किया जाता है।

उनका प्रसिद्ध हथियार, खुखरी, अपनी आकृति तथा ऐतिहासिक उपयोगिता के लिए विख्यात है, तथा यह ब्रिटेन के साथ-साथ भारत में भी गोरखा रेजिमेंट के प्रतीक चिन्ह का एक भाग है।

ब्रिटेन की रानी एलिजाबेथ द्वितीय की सुरक्षा दो निजी गोरखा अधिकारियों की जाती है।

5.

काफी समय से चल रही H 1B वीजा को लेकर अटकलों पर विराम लगाते हुए.... राष्ट्रपति ट्रंप ने बीते 3 अगस्त को एच-1बी वीजा को लेकर एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसमें अमेरिकी नागरिकों की विदेशी प्रोफेशनल्स को रखने पर रोक लगा दी गई है...जो की एच-1बी (H-1B) वीजा धारकों के लिए बड़ा झटका है....

इसके तहत अब अमेरिका की सरकारी एजेंसियां एच-1बी वीजा धारकों को नौकरी पर नहीं रख सकेंगी....अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है...जहाँ उन्होंने कहा है कि हमारा सीधा नियम है- अमेरिकन को रखो....

अमेरिका के श्रम मंत्री के अनुसार, एच-1बी वीजा के नाम पर धोखाधड़ी रोकने और अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने के लिए यह कदम उठाया गया है. ...

दरहसल अमेरिका में इस साल नवम्बर में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने वाले हैं...जिसको लेकर हलचल काफी तेज़ है...ऐसे में ट्रंप के इस कदम को अमेरिकी श्रमिकों के लिए मददगार माना जा रहा है, लेकिन इससे उन लोगों की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है, जो एच-1बी वीजा पर अमेरिका में नौकरी के अरमान पाले थे...

बताते चलें की जहाँ ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी कामगारों के हितों को बचाने के नाम पर 23 जून 2020 को इस साल के अंत तक के लिए एच-1बी और विदेशी कामगारों को अमेरिका में काम करने के लिए जरूरी अन्य वीजा को निलंबित करने घोषणा की थी....वहीँ यह H1 B वीसा पर रोक का फैसला उसके एक महीने बाद जारी किया है....इस फैसले का सबसे ज्यादा असर एच-1बी वीजा धारकों को होगा. इस फैसले के बाद अब वो सभी कंपनियां जो एच-1बी वीजा के आधार पर ही दूसरे देश के लोगों को नौकरी देती हैं, वह अब ऐसा नहीं कर पाएंगी....

एक नज़र क्या है एच-1बी वीजा क्या है?

क्या है एच-1 बी वीजा ?

एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है. यह किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह साल काम करने के लिए जारी किया जाता है. अमेरिका में कार्यरत कंपनियों को यह वीजा ऐसे कुशल कर्मचारियों को रखने के लिए दिया जाता है जिनकी अमेरिका में कमी हो. इस वीजा के लिए कुछ शर्तें भी हैं. जैसे इसे पाने वाले व्यक्ति को स्नातक होने के साथ किसी एक क्षेत्र में विशेष योग्यता हासिल होनी चाहिए. साथ ही इसे पाने वाले कर्मचारी की सैलरी कम से कम 60 हजार डॉलर यानी करीब 40 लाख रुपए सालाना होना जरूरी है.

इस वीजा की एक खासियत भी है कि यह अन्य देशों के लोगों के लिए अमेरिका में बसने का रास्ता भी आसान कर देता है, एच-1बी वीजा धारक पांच साल के बाद स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. इस वीजा की मांग इतनी ज्यादा है कि इसे हर साल लॉटरी के जरिये जारी किया जाता है. एच-1बी वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल टीसीएस, विप्रो, इंफोसिस और टेक महिंद्रा जैसी 50 से ज्यादा भारतीय आईटी कंपनियों के अलावा माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियां भी करती हैं......

भारत के लिए चिंता का कारण

H1-B वीजा पर रोक भारत के लिए चिंता का विषय है....कई दिग्गज भारतीय आईटी कंपनियों का करीब 60 फीसदी रेवेन्यू अमेरिका से आता है कंपनियां जैसे टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो.....साथ ही ये सभी कंपनियां बड़ी संख्या में एच-1बी वीजा धारकों से काम करवाती हैं....अमेरिकी श्रम मंत्रालय के अनुसार हर साल दिए जाने वाले कुल 85000 पचासी हज़ार एच-1बी वीजा में से 60 फीसदी भारतीय कंपनियों को दिए जाते हैं...

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में इंफोसिस के कुल कर्मचारियों में 60 फीसदी से ज्यादा एच 1बी वीजा धारक हैं. इसके अलावा वाशिंगटन और न्यूयॉर्क में एच-1बी वीजा धारकों में करीब 70 प्रतिशत भारतीय हैं....

इन आंकड़ों को देखकर साफ़ हो जाता है कि अमेरिका में एच-1बी वीजा पर रोक से सबसे ज्यादा भारतीय इंजीनियर और भारतीय कंपनियां प्रभावित होंगी. साथ ही इसका बुरा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. दरअसल, भारतीय जीडीपी में भारतीय आईटी कंपनियों का योगदान 9.5 प्रतिशत के करीब है और इन कंपनियों पर पड़ने वाला कोई भी फर्क सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा...

6.

भारत को रक्षा क्षेत्र, एयरोस्पेस और नेवल शिप बिल्डिंग सेक्टर में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने आज आत्मनिर्भरत भारत पैकेज के तहत कई घोषणाएं की। भारत के इन क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय (MoD) ने रक्षा उत्पादन और निर्यात प्रोत्साहन नीति 2020 (DPEPP 2020) का मसौदा तैयार किया है।

इस मसौदे में साल 2025 के आख़िरी तक विनिर्माण क्षेत्र में 25 बिलियन डॉलर या 1 लाख 75 पचहतर हज़ार करोड़ टर्नओवर का लक्ष्य रखा गया है। इसमें Aerospace और रक्षा VASTU एवं सेवा निर्यात संबंधी 5 बिलियन डॉलर भी शामिल हैं....

मसौदे में देश के रक्षा उत्पादों के उत्पादन और निर्यात मामले में देश को आत्मनिर्भर बनाने का ज़िक्र है। मौजूदा समय में पूरे भारत में रक्षा खरीद में घरेलु खरीद का हिस्सा 60 फीसदी है। मसौदे में घरेलु खरीद को साल 2025 तक 70,000 करोड़ से 1 लाख 40 हज़ार करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है....

इस मसौदे के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं

1. इसके तहत 2025 तक एयरोस्पेस और रक्षा वस्तुओं और सेवाओं में 35,000 पैंतीस करोड़ रुपये के निर्यात सहित 1,75 पचहतर,000 करोड़ रुपये का कारोबार हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है...

2. गुणवत्ता वाले उत्पादों के साथ सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एयरोस्पेस और नौसेना जहाज निर्माण उद्योग सहित एक गतिशील, मजबूत और प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है...

3. आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू डिजाइन और विकास के माध्यम से "मेक इन इंडिया" पहल को आगे बढ़ाना

4. रक्षा उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक रक्षा मूल्य श्रृंखलाओं का हिस्सा बनना।

5. एक ऐसा वातावरण बनाने जो रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्रोत्साहित करता हो, पुरस्कार, नवाचार भारतीय आईपी स्वामित्व बनाना और एक मजबूत आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग को बढ़ावा देना

नीतिगत सुझाव

  1. रक्षा खरीद में लगने वाले लम्बे समय को देखते हुए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना जिसका मकसद रक्षा उत्पादों के विकास और उत्पादन के मद्देनज़र विनिर्देशों और प्रौद्योगिकियों का अनुमान लगाना है
  2. इसमें स्वदेशी डिज़ाइन, विकास और उत्पादन के लिये लाइसेंस लेने में लगने वाली देरी को दूर किया जायेगा
  3. इसका उद्देश्य दीर्घकालिक एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना (Long Term Integrated Perspective Plan- LTIPP) में अनुमानित प्रणालियों के डिज़ाइन अधिकारों और बौद्धिक संपदा अधिकारों को अपनाना है।
  4. प्रौद्योगिकी मूल्यांकन सेल (Technology Assessment Cell-TAC) की स्थापना की जाएगी।
  5. स्वदेशीकरण और MSMEs/स्टार्टअप की मदद करना
  6. साल 2025 तक इस तरह के तकरीबन 5,000 उपकरणों का भारत में ही निर्माण करना
  7. निवेश को बढ़ावा देना और व्यापार सुगमता सूचकांक में सुधार करना- भारत पहले से ही बढ़ते यात्री, यातायात और सैन्य व्यय के साथ एक बड़ा एयरोस्पेस बाज़ार है जिसके परिणामस्वरूप हवाई जहाज़ों की मांग बढ़ रही है...

विमान निर्माण कार्य, विमान रखरखाव, मरम्मत और आमूलचूल परिवर्तन, हेलिकाप्टर, इंजन निर्माण और लाइन रिप्लेसमेंट इकाइयाँ, मानव रहित हवाई वाहन और उन्नयन तथा रेट्रोफिट्स जैसे क्षेत्रों में एयरोस्पेस उद्योग के अवसरों की पहचान की गई है...

यह विश्व बैंक द्वारा जारी व्यापार सुगमता सूचकांक में बाज़ार के आकार में सुधार, जनसांख्यिकीय विभाजन आदि संकेतकों में भारत की रैंकिंग से स्पष्ट है..

7.

हरियाणा वन विभाग द्वारा प्रायोगिक रूप से राज्य भर में हवाई बीजारोपण यानी Aerial Seeding शरू किया है....

इस तकनीक से अरावली के दुर्गम क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण किया जा सकेगा...यह प्रायोगिक परियोजना, इस तकनीक तथा बीज-प्रकीर्णन क्रियाविधि की प्रभावशीलता को निर्धारित करने में मदद करेगी...

क्या है हवाई बीजारोपण ?

हवाई बीजारोपण (Aerial Seeding) वृक्षारोपण की एक तकनीक है, जिसमें मिट्टी, खाद, और अन्य आवश्यक तत्त्वों के मिश्रण से ढंके हुए बीजों का, गोले बनाकर, हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर या ड्रोन आदि हवाई उपकरणों का उपयोग करके जमीन पर छिड़काव किया जाता है।

यह तकनीक कैसे काम करेगी...?

नीची उड़ान भरने वाले ड्रोन या किसी अन्य हवाई उपकरणों द्वारा बीजों के गोलों को एक लक्षित क्षेत्र में बिखेरा जाता है...ये बीज के गोलों पर मिट्टी, खाद, और अन्य आवश्यक तत्त्वों के मिश्रण का लेप चढ़ा रहता है, जिससे बीज हवा में उड़ने की बजाय भूमि पर निर्धारित क्षेत्र में गिरते है....

इन बीज के गोलों से पर्याप्त वर्षा होने पर अंकुर निकल आयेंगे, तथा इनमे पहले से मौजूद पोषक तत्व शुरुआती विकास में सहायता प्रदान करेंगे...

इस तकनीक के लाभ

खडी ढलान वाले, खंडित, मार्ग रहित दुर्गम क्षेत्रों में पारंपरिक वृक्षारोपण अत्याधिक कठिन हो जाता है, इन क्षेत्रों में एरियल सीडिंग की सहायता से सरलतापूर्वक वृक्षारोपण किया जा सकता है....

इस तकनीक में बीजों के अंकुरण तथा वृद्धि एक विशिष्ट प्रक्रिया से होती है, कि इसमें बीजों के प्रकीर्णन के पश्चात ध्यान देने की आवश्यकता नहीं रह जाती है – यही कारण है कि बीज-गोलों के रोपण को ‘फेंको और भूल जाओं’ तरीके के रूप में जाना जाता है...

इस तकनीक में मिट्टी में जुताई और खुदाई की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, क्योंकि इसमें बीजों पर पहले से ही मिट्टी, खाद तथा पोषक तत्वों और सूक्ष्मजीवों का लेप लगा दिया जाता है...बीजों के ऊपर मिट्टी तथा अन्य तत्वों का लेप इन्हें पक्षियों, चींटियों और चूहों से भी बचाता है.....

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. रेपो रेट में कोई बदलाव नही

RBI ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक के बाद 06 अगस्त 2020 को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किए जाने की घोषणा की. रेपो रेट को चार प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है.

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रेपो रेट को 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 3.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. लेकिन उन्होंने कहा कि भविष्य में कोविड-19 संकट की मार झेल रही अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जरूरत पड़ने पर दरों में और अधिक कटौती की जा सकती है.

2. प्रधानमंत्री जन धन योजना:

छह सालों में 40 करोड़ के पार हुई खातों की संख्या प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत अब तक 40 करोड़ से अधिक बैंक खाते खुल चुके है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह साल पहले इस योजना की शुरुआत की थी. यह वित्तीय समावेशन से जुड़ी केंद्र सरकार की प्रमुख योजना है. केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 40.05 करोड़ लोगों के जनधन बैंक खाते खोले जा चुके है.....हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन बैंक खातों में 1.30 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है. जनधन खातों में यह सफलता योजना की छठी वर्षगांठ से कुछ दिन पहले ही हासिल हुई है. इस योजना का मकसद देश के तमाम लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ना है.

3. दुनिया का सबसे ऊँचा रेल पुल

जम्मू कश्मीर में बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल

जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल अगले साल तक तैयार हो जाएगा। यह पुल कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ेगा। इस पुल की कुल ऊंचाई 467 सडसठ मीटर होगी और यह नदी तल से 359 उन्सठ मीटर ऊंचाई पर होगा। अभी चीन के बेपेजिंयाग नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज से भी बड़ा होगा। चीन का यह रेलवे पुल 275 पचहतर मीटर ऊंचा है। दिल्ली में स्थित कुतुब मीनार की ऊंचाई 72 बहत्तर मीटर और एफिल टावर की ऊंचाई 324 मीटर है....

रियासी जिले में चिनाब नदी पर बनने वाला यह मेहराबदार पुल नदी तल से 359 उन्सठ मीटर ऊपर और कुतुब मीनार से पांच गुना ऊंचा होगा। यह बारामूला और श्रीनगर को उधमपुऱ-कटरा़-काजीगुंड के जरिए जम्मू से जोड़ेगा। इससे समूचा रास्ता करीब सात घंटे में तय किया जा सकेगा।

4. उत्तराखंड में हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र

उत्तराखंड में हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र स्थापित होगा

उत्तराखंड में जल्द ही हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र स्थापित होगा. उत्तरकाशी वन प्रभाग क्षेत्र में यह संरक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा. इस राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह हिम तेंदुआ संरक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा.

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस संबंध में वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की. इस बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि, राज्य में कुल हिम तेंदुओं की गिनती की जानी चाहिए और हिम तेंदुओं की संख्या को संरक्षित करने और बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए.मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिन क्षेत्रों में हिम तेंदुए देखे गए हैं, उनकी पहचान वन विभाग द्वारा स्थानीय लोगों और सैन्य बलों के सहयोग से की जानी चाहिए. इन क्षेत्रों की गणना ग्रिड बनाकर की जाएगी. हिम तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण से राज्य में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने कहा कि, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कई वन्यजीव प्रजातियां हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं.

5. भारत एयर फाइबर

रेडियो नेटवर्क पर आधारित संपूर्ण दूरसंचार कनेक्टिविटी: भारत एयर फाइबर

केंद्रीय एचआरडी, इलेक्ट्रोनिक्स, संचार एवं आईटी राज्य मंत्री श्री संजय धोत्रे ने महाराष्ट्र के अकोला में ‘ भारत एयर फाइबर सेवाओं‘ का उद्घाटन किया। भारत एयर फाइबर सेवाओं के उद्घाटन के साथ ही, अकोला और वाशिम जिले के निवासी मांग के आधार पर वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन प्राप्त कर सकेंगे।

भारत एयर फाइबर सेवाएं बीएसएनएल द्वारा भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहलों के एक हिस्से के रूप में प्रस्तुत की गई हैं और इसका लक्ष्य बीएसएनएल स्थान से 20 किमी के दायरे में वायरलेस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है और इस प्रकार दूरदूराज के स्थान के ग्राहक भी लाभान्वित हो सकेंगे क्योंकि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पाटनर्स (टीआईपी) की सहायता से बीएसएनएल सबसे सस्ती सेवाएं उपलब्ध कराती है।

6. कोरोना मरीजों का नेशनल क्लीनिकल रजिस्टर

सरकार देश भर में भर्ती कोरोना मरीजों की संख्या का लेखा-जोखा रखने जा रही है। इसके तहत देश भर में भर्ती कोरोना मरीजों के लिए एक नेशनल क्लीनिकल रजिस्टर बनाने की तैयारी चल रही है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) इसको लेकर तैयारियों में जुटा हुआ है।

देश भर के अस्पतालों में भर्ती कोरोना के मरीजों का रियल टाइम डाटा एकत्र करने के लिए ऐसा किया जा रहा है, जो उपचार के परिणामों को बेहतर बनाने, महामारी की प्रगति में रुझान का विश्लेषण करने और इसके खिलाफ प्रतिक्रिया करने में मदद करेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(AIIMS) के सहयोग से भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद(ICMR), नेशनल क्लिनिकल रजिस्ट्री स्थापित करने की योजना बना रहा है जो शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को कोरोना मरीजों के इलाज में सुधार के लिए जांच उपचारों की प्रभावशीलता, प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और सबूत उत्पन्न करने में मदद करेगा।

7. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 रिपोर्ट

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 पर जारी की गयी रिपोर्ट

श्रम पर संसद की स्थाई समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 पर अपनी अंतिम रिपोर्ट ईमेल के जरिए लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी है। यहश्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित नौ कानूनों की जगह लेगी....

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2019 रिपोर्ट से जुड़े प्रमुख बिंदु

समिति ने बेरोजगारी बीमा और ग्रेच्युटी पाने के लिए लगातार काम करने की अवधि को पांच साल से कम करके एक साल करने की सिफारिश की है। इसके अलावा संहिता में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को चलाने के लिए उनके वित्त पोषण के स्रोत को भी स्पष्ट करने के लिए कहा है....

रिपोर्ट के अनुसार समिति ने श्रम मंत्रालय से अनुरोध किया है कि वह संहिता के साथ रोजगार कार्यालयों (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचना) अधिनियम, 1959 उन्सठ के प्रस्तावित विलय पर फिर से विचार करे।

8. ‘मोर टुगेदर’ अभियान

फेसबुक ने भारत के लिए ‘मोर टुगेदर’ अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत की

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने भारत में अपने उपभोक्ता विपणन अभियान का अगला चरण शुरू किया है – ‘मोर टुगेदर’ यह प्रदर्शित करने के लिए कि COVID-19 महामारी की स्थिति में देश भर के लोग एक साथ मंच पर अपने कनेक्शन की शक्ति का उपयोग कैसे कर सकते हैं।

यह अभियान वास्तविक कहानियों से प्रेरित है और उन लोगों को भी प्रदर्शित करता है जो एक दूसरे की सहायता और समर्थन करने के लिए इन कठिन समय के दौरान साथ आए थे। इसमें विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को दर्शाया गया है और यह बताया गया है कि इन कठिन समय के दौरान एक-दूसरे की मदद करने के लिए उन्हें अपने कनेक्शन के माध्यम से समर्थन कैसे मिला।

9. ड्रोन ऑपरेटिंग सिस्टम

ड्रोन ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए दिशानिर्देश जारी

ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) जो देश में एविएशन सिक्योरिटी रेगुलेटर है, ने ड्रोन ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो मानव रहित हवाई वाहन को दूरस्थ रूप से पायलट के लिए जमीन पर कॉकपिट की तरह काम करते हैं।

वैश्विक मानक ड्रोन नियमों को विकसित करने के लिए, जो विभिन्न ड्रोन प्रौद्योगिकियों के व्यावसायिक अनुप्रयोग की अनुमति देगा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भारत में एक विश्व-अग्रणी ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत की है। मानवरहित हवाई वाहन तकनीक अभी भी नई है और भारत के सुरक्षा वातावरण, नागरिक उड्डयन आवश्यकता (सीएआर) के माध्यम से इन ड्रोन विनियमों की तैयारी में कई साल लगे हैं। भारत ने ड्रोनों के पंजीकरण और संचालन के लिए केवल कागजी-आधारित प्रक्रिया तैयार करने के बजाय एक ऑल-डिजिटल प्रक्रिया तैयार की है। डिजिटल स्काई प्लेटफ़ॉर्म एक ऐसा पूरी तरह से डिजिटल राष्ट्रीय मानवरहित यातायात प्रबंधन (UTM) प्लेटफ़ॉर्म है जो कहता है कि “अनुमति नहीं तो टेकऑफ़ नहीं” (NPNT)।

10. तीन भाषा नीति

तमिलनाडु केंद्र की तीन भाषा नीति से असहमत

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी को केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में प्रस्तावित तीन-भाषा नीति के साथ असहमत हैं। हाल ही में एक प्रेस विज्ञप्ति में, मुख्यमंत्री को यह कहते हुए पाया गया कि राज्य कभी भी केंद्र की तीन-भाषा नीति को अनुमति नही देगा, बल्कि राज्य तमिल और अंग्रेजी की दोहरी भाषा नीति को जारी रखेगा।

1968 अडसठ में द्रविड़ पार्टी के नेता सीएन अन्नादुरई, तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने राज्य विधानसभा में घोषणा की कि तमिलनाडु केवल दो-भाषा नीति तमिल और अंग्रेजी का पालन करेगा। इसके अलावा, वर्ष 1986 छियासी में AIADMK के संस्थापक एमजी रामचंद्रन, तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एक विधानसभा प्रस्ताव पारित किया जो दो-भाषा नीति को मजबूत करने की बात करता है...60 पृष्ठ लंबी नई शिक्षा नीति में, जो 5 + 3 + 3 + 4 मोड का पालन करती है, नीति बहुभाषावाद को बढ़ावा देने वाली तीन भाषा नीति की वकालत करती है। नीति कहती है कि, बच्चा पाँचवीं कक्षा तक अपनी मातृभाषा में सीखेगा, जिसके बाद हिंदी और अंग्रेजी के साथ साथ देशी भाषा का प्रयोग पाठ्यक्रम को पढ़ाने के लिए किया जाएगा। हालाँकि, नीति में कहा गया है कि तीन भाषाओं के फॉर्मूले में अधिक लचीलापन होगा। किसी भी राज्य पर कोई जबरन कार्रवाई नहीं होगी। इसके अलावा, नई नीति में कहा गया है कि बच्चों द्वारा सीखी गई तीन भाषाएं पूरी तरह से राज्यों, क्षेत्रों और निश्चित रूप से स्वयं छात्रों की पसंद होंगी, बशर्ते कम से कम दो भाषाएं भारत की देशी भाषाएँ हों।

11. गांधी जी की याद में ब्रिटेन में सिक्के निकाले जायेंगे

BAME समुदाय (Black, Asian and minority ethnic) के लोगों के योगदान को पहचानने में बढ़ती रुचि के कारण ब्रिटेन महात्मा गांधी की स्मृति में एक सिक्का बनाने पर विचार कर रहा है...ब्रिटेन के वर्तमान वित्त मंत्री ऋषि सुनक ने BAME समुदाय के व्यक्तियों की मान्यता को आगे बढ़ाने के लिए रॉयल मिंट एडवाइजरी कमेटी (RMAC) को एक पत्र जारी किया। आरएमएसी आदेश का पालन करने के लिए एक कदम आगे बढ़ाते हुए गांधी को याद करने के लिए एक सिक्का लाएगा।

12. राजस्थान में होगी इंदिरा रसोई योजना लॉन्च

राजस्थान में इंदिरा रसोई योजना लॉन्च की जाएगी

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में अपने अधिकारियों को 20 अगस्त 2020 से इंदिरा रसोई योजना शुरू करने का निर्देश दिया। सीएम ने कहा कि यह राजस्थान सरकार के “नो हंगर नो स्लीप” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक और कदम है। इस योजना के तहत, जरूरतमंद और गरीबों को 8 रुपये प्रति प्लेट में स्वस्थ और पौष्टिक भोजन मिलेगा। योजना पर राज्य सरकार प्रति वर्ष 100 करोड़ खर्च करेगी।

पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नाम पर बनी इंदिरा रसोई योजना राज्य के 213 शहरी स्थानीय निकायों में 358 अठावन सोई में चलेगी। योजना के तहत 100 ग्राम दालों, 100 ग्राम सब्जियों, 250 ग्राम चपाती और अचार का एक मेनू 4.87 करोड़ लोगों को परोसा जाएगा।हालांकि इससे पहले अन्नपूर्णा योजना हालांकि जारी थी, हाल ही में शुरू की गई इंदिरा रसोई योजना अलग होगी। लोगों के बैठने के लिए जगह के साथ एक स्थायी रसोईघर होगा। बताया जाता है कि कुल प्रति प्लेट 20 रुपये का खर्च आएगा जिसमें राज्य सरकार 12 रुपये देगी। और शेष 8 रुपये लाभार्थी द्वारा भुगतान किया जाएगा।

13. फ्लिपकार्ट के समर्थ कार्यक्रम से जुड़ेंगे लाखों कारीगर

फ्लिपकार्ट के समर्थ कार्यक्रम अपने उत्पादों को ऑनलाइन बेचने के लिए पूरे भारत में 6 लाख कारीगरों की मदद कर रहा है

वॉलमावॉलमार्ट के स्वामित्व वाले फ्लिपकार्ट ने शुक्रवार को घोषणा की कि देश भर में 6 लाख कारीगरों को इस साल उनके समर्थ कार्यक्रम में जोड़ा जाएगा जो पिछले साल 2019 में लॉन्च किया गया था।

समर्थ 2019 में फ्लिपकार्ट द्वारा शुरू की गई एक पहल है, जिसमें ई-कॉमर्स कंपनी ने अपने उत्पादों को बेचने के लिए स्थानीय कारीगरों को ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में मदद करने के लिए पांच गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के साथ सहयोग किया था। यह कार्यक्रम लगभग छह लाख कारीगरों (बुनकरों, शिल्पकारों आदि) की मदद करता है और वे इस ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर अपने हाथ से बने कला और शिल्प उत्पाद बेचकर अपनी आजीविका कमाते हैं। एनजीओ और सरकार के साथ साझेदारी के बाद कंपनी ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, पंजाब और कर्नाटक के विभिन्न दूरदराज के हिस्सों से कारीगरों को लाने में सक्षम हो गई है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।