(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (29th August - 4th September 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  1. केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा “मिशन कर्मयोगी” को मिली मंजूरी....सिविल सर्विस अधिकारीयों को अब कर्मयोगी मिशन के तहत दी जाएगी खास ट्रेनिंग.....यह मिशन नेशनल प्रोग्राम for सिविल SERVICES कैपेसिटी बिल्डिंग के तहत चल्या जाएगा...
  2. चीन को मुहतोड़ जवाब देते हुए...विरोध के बावजूद भारत ने दक्षिण चीन सागर में तैनात किया युधपोत..एयर फोर्स के बेस पर तैनात किया...मिग-29 K लड़ाकू विमान....
  3. अधिसूचित किये गये केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में प्रशासन के लिए नए नियम...पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, अखिल भारतीय सेवाएं और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल का होगा सीधा नियंत्रण...
  4. कोरोना वैरुस के मद्देनज़र एनपीआर को अद्यतन बनाने और 2021 की जनगणना के पहले चरण को कर दिया गया स्थगित....एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरी की जानी थी दोनों प्रक्रियाएं...
  5. भारतीय अल्पकालिक बिजली बाजार को बनाने की और सरकार का पहला कदम... पूरे देश के लिए विद्युत क्षेत्र में शरू की Green Term Ahead Market..
  6. गगनयान अंतरिक्ष यात्रियों के लिए मिशन अल्फा जैसे उपकरण उपलब्ध करवाने के लिए भारत और फ्रांस ने की चर्चा... जल्दी ही एक घोषणा होने की संभावना है...
  7. भारत में बना दुनिया का सबसे बड़ा सोलर ट्री... दुर्गापुर में किया गया स्थापित...पूरे साल में 12,000-14,000 यूनिट स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादित करने में है सक्षम...

खबरें विस्तार से:

1.

केंद्र सरकार ने 02 सितंबर 2020 को सिविल सेवाओं में कार्मिकों की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB) ‘मिशन कर्मयोगी’ को मंजूरी दे दी है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा कैबिनेट के फैसलों पर मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यह घोषणा की गई....केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के अनुसार, यह मिशन अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों को उनके क्षमता निर्माण का एक मौका प्रदान करेगा.

इस मिशन का उद्देश्य ऐसे लोक सेवक तैयार करना है, जो अधिक रचनात्मक, चिंतनशील, नवाचारी, व्यावसायिक और प्रौद्योगिकी-सक्षम हों. इस मिशन के तहत नियुक्ति के बाद सिविल अधिकारियों समेत अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें खास ट्रेनिंग दी जाएगी. मिशन कर्मयोगी सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है. यह सिविल सेवकों के लिए क्षमता निर्माण की नींव रखता है ताकि वे दुनिया भर में सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख लेते हुए भारतीय संस्कृति में उलझे रहें....

कर्मयोगी मिशन योजना सरकार की ओर से अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाने की सबसे बड़ी योजना है. मिशन कर्मयोगी का उद्देश्य व्यक्तिगत सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण के साथ-साथ संस्थागत क्षमता निर्माण पर ध्यान देना है. मिशन 'कर्मयोगी' के जरिए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपना प्रदर्शन बेहतर करने का मौका मिलेगा. मिशन कर्मयोगी के तहत सिविल सेवा क्षमता निर्माण योजनाओं को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली एक परिषद को मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री इस परिषद के सदस्य होंगे.

मिशन कर्मयोगी के तहत सिविल सेवा अधिकारियों को क्रिएटिव, कल्पनाशील, इनोवेटिव, प्रो-एक्टिव, पेशेवर, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और तकनीकी तौर पर दक्ष बनाकर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा. इस योजना का प्रमुख लक्ष्य अधिकारियों की स्किल बढ़ाना है. राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम के तहत इस मिशन को शुरू किया गया है.

मिशन कर्मयोगी की निगरानी एवं मुल्यांकन चार चरणों में होगा.

पहला-सबसे पहले प्रधानमंत्री का डैशबोर्ड- विभागों के लए वार्षिक स्कोर कार्ड एवं रैंकिंग के साथ केपीआई क्षमता विकास की वास्तविक सूचना के आधार पर.

दूसरा-इसके बाद क्षमता विकास योजना के तहत लक्ष्य निर्धारण प्रत्येक विभागों द्वारा प्रस्तुत की गई वार्षिक योजनाओं का राष्ट्रीय आकांक्षाओं के साथ संरेखण.

तीसरा-सिविल सेवाओं की स्थिति पर वार्षिक रिपोर्ट यानी राष्ट्रीय प्रगति में उपलब्धियों और योगदान को ध्यान रखते हुए एक वर्ष में सिविल सेवाओं का समेकित प्रदर्शन.

चौथा- निष्पक्ष लेकापरीक्षा यानी क्षमता विकास आयोग द्वारा नियमित लेखा परीक्षा और गुणवत्ता आश्वासन के अतिरिक्त इस कार्यक्रम की तीसरा पक्ष द्वारा लेखापरीक्षा.

मिशन कर्मयोगी के तहत ट्रेनिंग का एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा. नए डिजिटल प्लेफॉर्म से अब सिविल सर्विस अधिकारी कहीं भी बैठकर ट्रेनिंग ले सकते हैं. वे अपने मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट पर ट्रेनिंग ले सकते हैं. अधिकारियों की दक्षता बढ़ाना इस मिशन का मकसद होगा. केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप के बाद यह योजना लाई गई है. इससे कर्मचारियों के व्यक्तिनिष्ठ मूल्यांकन को समाप्त करने में मदद मिलेगी...

2.

भारत और चीन के बीच रिश्ते सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। चीन अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है। सीमा पर जहां चीन ने अपने लाव लश्कर और हथियारों का ज़खीरा जमा करने में कोई कसार नहीं छोड़ी है तो अब भारत भी चीन की हर नापाक हरकत का माकूल जवाब देने की तैयारी कर चुका है। भारतीय नौसेना ने बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण चीन सागर (South China Sea) में युद्धपोत तैनात किया है। । चीन लगातार इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाजों की मौजूदगी पर ऐतराज़ ज़ाहिर करता रहा है। गौरतलब है की इस इलाके में चीन ने 2009 से मिलिटरी और आर्टिफिशल आइलैंड्स का इस्तेमाल करके काफी विस्तार किया है।

बीते 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान वैली (Galwan valley clash) में चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प के बाद 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद भारत ने दक्षिण चीन सागर में एक युद्धपोत तैनात किया है। इस युद्धपोत को उस इलाके में तैनात किया गया है, जहां पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना ने किसी भी अन्य फोर्स की मौजूदगी पर ऐतराज जताया था। चीनी नेवी का दावा था कि दक्षिणी चीनी सागर का अधिकांश हिस्सा उसके क्षेत्र में आता है।सूत्रों ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत की तत्काल तैनाती से चीनी नौसेना में बेचैनी का माहौल है। क्योंकि उन्होंने भारतीय पक्ष के साथ डिप्लोमैटिक लेवल की बातचीत में भारतीय युद्धपोत की उपस्थिति के बारे में शिकायत की थी।

दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी नौसेना ने भी अपने विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात किए थे। यहां अपने युद्धपोत की तैनाती के दौरान भारतीय युद्धपोत लगातार अपने अमेरिकी समकक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए थे। उन्होंने कहा कि रूटीन ड्रिल के हिस्से के रूप में, भारतीय युद्धपोत को लगातार अन्य देशों के सैन्य जहाजों की आवाजाही की स्थिति के बारे में अपडेट किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक चकाचौंध से बचने के लिए पूरे मिशन को बहुत ही गोपनीय तरीके से किया गया।

इसी दौरान, भारतीय नौसेना ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास मलक्का स्ट्रेट्स में चीनी नौसेना की गतिविधि पर नजर रखने के लिए अपने फ्रंटलाइन जहाजों को तैनात किया। चीनी नौसेना इसी रास्ते से हिंद महासागर में प्रवेश करती है। इसके अलावा कई चीनी जहाज भी तेल या मर्चेंट शिपमेंट्स के साथ अन्य महाद्वीपों से आकर इसी रास्ते से गुजरते हैं।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय नौसेना पूर्वी या पश्चिमी मोर्चे पर विरोधियों द्वारा किसी भी दुस्साहस का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है और मिशन-बेस्ड तैनाती ने हिंद महासागर क्षेत्र और इसके आसपास लगातार उभर रही स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में मदद की है।

सूत्रों ने कहा कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना के जहाजों की मलक्का स्ट्रेट्स से लेकर हिंद महासागर में होने वाली मूवमेंट पर नजर रखने के लिए भारतीय नौसेना अंडरवाटर जहाजों, अन्य मानवरहित सिस्टमों और सेंसरों को तुरंत हासिल कर तैनात करने की योजना बना रही है। इसके अलावा भारतीय नौसेना जिबूती इलाके के आसपास मौजूद चीनी जहाजों पर भी नजर बनाए रखे हुए है। नौसेना ने राष्ट्रीय हितों के लिए आसपास के इलाके में अपने असेट्स तैनात किए हैं।

एयर फोर्स के बेस पर नेवी ने तैनात किए मिग-29 K लड़ाकू विमान

सूत्रों के मुताबिक, नौसेना ने वायुसेना के एक महत्वपूर्ण बेस पर अपने मिग-29 K लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया है। नौसेना 10 नेवल शिपबॉर्न मानव रहित हवाई वाहनों की खरीद पर भी काम कर रही है। इनके लिए 1,245 करोड़ रुपये से अधिक का सौदा होने की उम्मीद है।

3.

हाल ही में, गृह मंत्रालय द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में प्रशासन के लिए नए नियमों को अधिसूचित किया गया है। इन नियमों में उपराज्यपाल और मंत्रिपरिषद के कार्यों को निर्दिष्ट किया गया है…

पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, अखिल भारतीय सेवाएं और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल का सीधा नियंत्रण रहेगा अर्थात मुख्यमंत्री अथवा मंत्रिपरिषद का उनके कामकाज में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा…

ऐसे प्रस्ताव या मामले, जिनसे केंद्र शासित प्रदेश की शांति और व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, अथवा ये किसी अल्पसंख्यक समुदाय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के हित को प्रभावित करते हैं, मुख्यमंत्री को सूचना देते हुए अनिवार्यतः मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल को प्रस्तुत किए जाएंगे…

उपराज्यपाल तथा किसी मंत्री के बीच मतभेद होने की स्थिति में तथा महीने के बाद भी किसी समझौते पर नहीं पर ‘उपराज्यपाल के फैसले को मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत’ माना जाएगा..

नए नियमों में राष्ट्रपति की भूमिका

किसी भी मामले में उपराज्यपाल तथा परिषद के बीच मतभेद होने पर, उपराज्यपाल द्वारा संबंधित मामले को राष्ट्रपति के निर्णय के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जायेगा तथा वह राष्ट्रपति के निर्णयानुसार अनुसार कार्य करेगा....

ऐसी स्थिति में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार दिया गया है...और मंत्रिपरिषद द्वारा की गई कार्रवाई, भारत के राष्ट्रपति द्वारा संबधित मामलों पर निर्णय लेने तक, निलंबित रहेगी।

मुख्यमंत्री तथा मंत्रिपरिषद की भूमिका

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद, गैर-अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के सेवा मामलों, नए कर लगाने संबधी प्रस्ताव, भूमि राजस्व, सरकारी संपत्ति की बिक्री, अनुदान अथवा पट्टे, विभागों और कार्यालयों के पुनर्गठन तथा कानूनों के मसौदा संबंधी निर्णय लेगी...

कोई भी मामला जो केंद्र शासित प्रदेश की सरकार तथा किसी अन्य राज्य सरकार अथवा केंद्र सरकार के साथ विवाद उत्पन्न कर सकता है, उसे अति शीघ्र संबंधित सचिव के द्वारा मुख्य सचिव के माध्यम से उपराज्यपाल तथा मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा...

केंद्र सरकार की भूमिका

उपराज्यपाल द्वारा किसी अन्य राज्य, भारत के सर्वोच्च न्यायालय अथवा किसी अन्य उच्च न्यायालय के साथ केंद्र के संबंधों को प्रभावित करने वाले, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति संबधी प्रस्ताव , केंद्रशासित प्रदेश की शांति और व्यवस्था को भंग अथवा प्रभावित करने की संभावना वाले मामले ,और किसी अल्पसंख्यक समुदाय, अनुसूचित जाति या पिछड़े वर्गों के हितों को प्रभावित करने की संभावना वाले मामले.... इन सभी प्रस्तावों के संबंध में केंद्र सरकार को पूर्व सूचित किया जायेगा...

बतातें चलें 6 अगस्त, 2019 को, संसद के द्वारा जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द करते हुए संविधान के अनुच्छेद 370 को निरसित कर दिया गया और राज्य को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया...

गोरतलब हो की जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेशों में परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष नए चुनाव कराये जायेंगे...

4.

कोरोना वायरस के मद्देनज़र राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अद्यतन बनाने और 2021 की जनगणना के पहले चरण को स्थगित कर दिया गया है... दोनों प्रक्रियाएं एक अप्रैल से 30 सितंबर के बीच पूरी की जानी थी...

जनगणना को दो चरणों में पूरा किया जाना था। इनमें पहले चरण के तहत अप्रैल से सितंबर के दौरान मकान सूचीकरण और मकानों की गणना, वहीँ नौ से 28 फरवरी के दौरान आबादी की गणना शामिल है। असम को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 2021 की जनगणना के पहले चरण के साथ ही एनपीआर को अद्यतन किया जाना भी प्रस्तावित था...अब इसमें संभवतः एक साल तक की देरी हो सकती है, क्योंकि महामारी कम होने के अभी तक संकेत नहीं मिले हैं।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) क्या है?

यह ‘देश के सामान्य निवासियों’ की एक सूची होती है.. राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) को नागरिकता कानून, 1955 और नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्‍ट्रीय पहचान-पत्र जारी करना) नियम, 2003 के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय, उप-ज़िला, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) में पंजीकरण कराना भारत के प्रत्येक ‘सामान्य निवासी’ के लिये अनिवार्य है।

उद्देश्य: देश के प्रत्येक आम नागरिक की विस्तृत पहचान का डेटाबेस तैयार करना।

देश के सामान्य निवासी कौन है?

गृह मंत्रालय के अनुसार, ‘देश का सामान्य निवासी’ को निम्नलिखित रूप से परिभाषित किया गया है- वह व्यक्ति, जो कम-से-कम पिछले छह महीनों से किसी स्थानीय क्षेत्र में रहता है या अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक के लिये किसी विशेष स्थान पर रहने का इरादा रखता है।

वहीँ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) से संबंधित विवाद, असम में जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रक्रिया में लाखों लोगों को बाहर किये जाने की पृष्ठभूमि से उत्पन्न होते हैं।

इसका उद्देश्य भारी मात्रा में भारत के निवासियों का विस्तृत व्यक्तिगत डेटा एकत्र करना है।

एकत्र किये हुए डेटा की विशाल मात्रा के संरक्षण के लिए प्रणाली पर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है।

5.

हाल ही में सरकार द्वारा, भारतीय अल्पकालिक बिजली बाजार को हरित बनाने के लिए पहले कदम के रूप में पूरे देश के लिए विद्युत क्षेत्र में Green Term Ahead Market– GTAM की शुरुआत की गयी है...

GTAM क्या है?

यह एक नया वैकल्पिक मॉडल है, जिसे अक्षय ऊर्जा डेवलपर्स द्वारा दीर्घकालिक सार्वजनिक-निजी भागीदारी में शामिल हुए बगैर खुले बाजार में नवीकरणीय ऊर्जा बेचने के लिए लागू किया गया है...

GTAM की प्रमुख विशेषताएं

GTAM के माध्यम से लेन-देन द्विपक्षीय होगा, जिसमें खरीदार और विक्रेता की स्पष्ट पहचान होगी, इससे नवीकरणीय खरीद दायित्व (Renewable Purchase Obligations– RPO) के लेखांकन में कोई कठिनाई नहीं होगी...

GTAM अनुबंधों को सौर RPO और गैर-सौर RPO में अलग किया जाएगा क्योंकि RPO लक्ष्य भी अलग किए गए हैं।

दैनिक और साप्ताहिक अनुबंध – बोली का कार्य MWh मेगावाट HOUR के आधार पर होगा।

मूल्य की खोज निरंतरता के आधार पर अर्थात मूल्य समय प्राथमिकता के आधार पर की जायेगी। इसके बाद, बाजार की स्थितियों को देखते हुए दैनिक और साप्ताहिक अनुबंधों के लिए खुली नीलामी शुरू की जा सकती है।

GTAM अनुबंध के माध्यम से निर्धारित ऊर्जा को खरीदार का RPO अनुपालन माना जाएगा।

इस कदम का महत्व और लाभ:

GTAM प्लेटफॉर्म की शुरूआत नवीकरणीय ऊर्जा-समृद्ध राज्यों पर बोझ कम करेगी और अपने नवीकरणीय खरीद दायित्व (RPO) से नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को और अधिक विकसित करने के लिए उन्हें रियायत देकर प्रोत्साहित करेगी।

GTAM, नवीकरणीय ऊर्जा कारोबारी क्षमता संवर्धन को बढ़ावा देगा और देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता वृद्धि के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगा..

GTAM प्लेटफॉर्म नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिभागियों की संख्या में वृद्धि करेगा।

यह प्रतिस्पर्धी कीमतों तथा पारदर्शी और लचीली खरीद के माध्यम से आरई के खरीदारों को लाभान्वित करेगा।

पूरे देश के बाज़ार तक पहुंच प्राप्त करने से विक्रेताओं को भी लाभ होगा।

बताते चलें भारत सरकार ने 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा में 175 गीगावाट क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य निधारित किया है...पेरिस जलवायु समझौते 2016 के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, भारत वर्ष 2030 तक 40 प्रतिशत अर्थात 450 गीगावॉट नवीकरणीय क्षमता स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है...

6.

भारत और फ्रांस अंतरिक्ष के क्षेत्र में आपस में घनिष्ठ सहयोग करते हैं...भारत और फ्रांस ‘गगनयान’ के अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन अल्फा जैसे उपकरण प्रदान करने के लिए चर्चा के अंतिम दौर में हैं....फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी, नेशनल सेंटर फॉर स्पेस स्टडीज के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस बारे में जल्दी ही एक घोषणा होने की संभावना है....वहीँ मिशन अल्फा के लिए इंस्ट्रूमेंटेशन पर काम चल रहा था...

बता दें मिशन अल्फा एक फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेस्केट के मिशन को दिया गया नाम है, जिसके तहत अगले साल की शुरुआत में, क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान पर उड़ान भरते हुए उन्हें अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना किया जाएगा.

इसरो और CNES , गगनयान अंतरिक्ष यात्रियों को आवश्यक उपकरण प्रदान करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसेकि मिशन अल्फा के दौरान फ्रांसीसी अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेस्केट द्वारा उपयोग किये जायेंगे.

नवंबर, 2016 और जून, 2017 के बीच अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर छह महीने बिताने वाले पेस्केट, वर्तमान में क्रू अल्फा के लिए क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान और स्टेशन सिमुलेटर के साथ प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिससे वे आईएसएस में वापस आ जाएंगे.

उनके इस नए मिशन को सीएनईएस के साथ साझेदारी में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा आयोजित एक प्रतियोगिता के बाद ’अल्फा’ नाम दिया गया है, जिसके लिए 27,000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं...

भारत के गगनगायन मिशन के लिए भारतीय वायु सेना के चार शॉर्ट-लिस्टेड पायलट और भावी अंतरिक्ष यात्री वर्तमान में रूस में प्रशिक्षण ले रहे हैं.

फ्रांस में अंतरिक्ष चिकित्सा के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र है और इसमें फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस मेडिसिन और फिजियोलॉजी स्पेस क्लिनिक भी शामिल हैं, जो सीएनईएस की सहायक कंपनी है, जहां अंतरिक्ष सर्जन्स को प्रशिक्षण दिया जाता है. कोविड -19 का खतरा कम हो जाने के बाद, वर्ष 2020 में भारतीय अंतरिक्ष सर्जन प्रशिक्षण के लिए फ्रांस जाने वाले हैं.

एक नज़र मिशन अल्फा पर

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने और वहां की गतिविधियों के समन्वय के लिए यूरोपीय वैज्ञानिकों को अनुमति देने के लिए उपयोगकर्ता सहायता और संचालन केंद्र (USOC) की स्थापना की है. इन केंद्रों में से एक, माइक्रोग्रैविटी एप्लिकेशन और स्पेस ऑपरेशंस (CADMOS) के विकास का केंद्र सीएनईएस के टूलूज़ स्पेस सेंटर में स्थित है.

CADMOS केंद्र अमेरिका, यूरोप और रूस में स्थित जमीनी विभागों और अंतरिक्ष यात्रियों का समर्थन करने वाली विज्ञान टीमों के बीच एक संपर्क केंद्र है, क्योंकि वे मानव अंतरिक्ष उड़ानों के दौरान ही रियल टाइम में अपने एक्सपेरिमेंट्स करते हैं.

बता ते चलें की इन दोनों ही देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां लगभग 10,000 करोड़ रूपये के ‘गगनयान मिशन’ पर भी सहयोग कर रही हैं, जिसका उद्देश्य वर्ष 2022 तक तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजना है. फ्रांसीसी फ़्लाइट सर्जन ब्रिजिट गोडार्ड भारतीय चिकित्सकों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए वर्ष 2019 में भारत आये थे...

7.

हाल ही में, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में दुनिया का सबसे बड़ा सौर वृक्ष यानी सोलर ट्री लगाया गया है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • ये सौर वृक्ष केंद्रीय वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् की इकाई सेंट्रल मेकेनिकल इंजीनियरिग रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी CMERI द्वारा निर्मित किया गया है।
  • इसे CMERI, दुर्गापुर के आवासीय कालोनी में लगाया गया है।
  • इसमें कुल 35 सौर फोटोवोल्टिक पैनल यानी पीवी पैनल लगाए गए हैं।
  • इस सौर वृक्ष को काफी छोटे क्षेत्र में ही तैयार किया गया है।
  • इस एक सौर पेड़ को बनाने में करीब साढ़े सात लाख की लागत आई है।
  • आने वाले समय में एमएसएमई इकाइयों को भी यह तकनीक दी जाएगी।

सौर वृक्ष क्या है?

मौजूदा सयम में सौर ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का एक बेहतरीन जरिया है। लेकिन बड़े स्तर पर सौर पैनल लगाने के लिये ज़मीन की कमी सबसे बड़ी समस्या है। सौर वृक्ष की अवधारणा आ जाने से अब यह दिक्कत नहीं रही।

सौर वृक्ष दिखने में किसी वृक्ष जैसे दिखते हैं लेकिन इनमें पत्तियों के रूप में सौर पैनल लगे होते हैं।

इस सौर वृक्ष के ढांचे में धातु का इस्तेमाल होता हैं।

इन सौर वृक्षों की ख़ास बात ये होती है कि इन्हें सामान्य सौर ऊर्जा संयंत्रों के मुकाबले 100 गुना कम स्थान की ज़रूरत होती है।

सबसे बड़े सौर वृक्ष की विशेषता

इस सौर वृक्ष की क्षमता की बात करें तो इसकी क्षमता 11.5 kWp से अधिक है और इसमें स्वच्छ और हरित ऊर्जा की 12,000-14,000 इकाइयों को पैदा करने की भी सालाना क्षमता है।

इस सौर वृक्ष को इस तरह से बनाया किया गया है कि इसके प्रत्येक पैनल के ज़रिए सूर्य के ज़्यादा प्रकाश को प्राप्त करने और इसके नीचे के क्षेत्र में न्यूनतम छाया क्षेत्र को सुनिश्चित किया जा सके।

इसके अलावा, प्रत्येक 'सौर वृक्ष' में जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा उत्पादन के दौरान वायुमंडल के लिए पैदा होने वाली ग्रीनहाउस गैसों के मुकाबले 10-12 टन कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जन को बचाने की क्षमता है।

साथ ही, अतिरिक्त उत्पन्न ऊर्जा को ऊर्जा ग्रिड में सुरक्षित रखा जा सकता है।

इस सौर वृक्ष में कृषि से जुड़ी कुछ हाईटेक सुविधाऐं भी मौजूद हैं। इसकी मदद से कृषि क्षेत्र की चौबीस घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा सकती है। साथ ही, किसानों को पंप और ई-ट्रैक्टर आदि को चलाने में भी सुविधा होगी।

रियल टाइम में आर्द्रता की स्थिति, हवा की गति, वर्षा की भविष्यवाणी और मिट्टी के विश्लेषण के लिए सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन सब के अलावा इस वृक्ष को सौर ऊर्जा संचालित ई-सुविधा कियोस्क से भी जोड़ा जा सकता है जिससे व्यापक कृषि डेटाबेस तक पहुंचा जा सकता है और रियल टाइम में जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

इसकी मदद से राष्ट्रीय कृषि बाजार से ऑनलाइन जुड़ा जा सकता है।

यह पेड़ न केवल किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है बल्कि यह कार्बन मुक्त भारत के सपने को भी साकार कर सकता है। यानी 'सौर वृक्ष' ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. भारत रूस AK-203 डील

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के तीन दिवसीय मॉस्को दौरे के दौरान भारत और रूस ने अत्याधुनिक एके-203 राइफल भारत में बनाने हेतु एक बड़े समझौते को अंतिम रूप दे दिया है. भारत और रूस के बीच एके-203 राइफल्स को लेकर डील पक्की हो गई है. अब इस राइफल को भारत में भी बड़े पैमाने पर तैयार किया जा सकेगा.

एके-203 राइफल, एके-47 राइफल का नवीनतम और सर्वाधिक उन्नत प्रारूप है. यह अब इंडियन स्मॉल आर्म्स सिस्टम (इंसास) असॉल्ट राइफल की जगह लेगा. इस सौदे पर एससीओ (शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गनाइजेशन) समिट के दौरान सहमति बनी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस समिट में हिस्सा लेने के रूस में ही मौजूद हैं. इन रायफलों को भारत में संयुक्त उद्यम भारत-रूस राइफल प्राइवेट लिमिटेड (आइआरआरपीएल) के तहत बनाया जाएगा. इसकी स्थापना आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) और कलाशनीकोव कंसर्न तथा रोसोबोरेनेक्सपोर्ट के बीच हुई है.

2. PUBG समेत 118 चीनी ऐप्स बैन

केंद्र सरकार ने हाल ही में एक और बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने पबजी (PUBG) समेत 118 मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. भारत और चीन के बीच जारी तनाव (India-China tension) के बीच सरकार ने तीसरी बार चीनी मोबाइल ऐप्स पर बैन लगाया है. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन पर बैन लगाया है. सरकार द्वारा इस बार जिन चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है उनमें पबजी के अतिरिक्त लिविक, वीचैट वर्क और वीचैट रीडिंग, ऐपलॉक, कैरम फ्रेंड्स जैसे मोबाइल ऐप शामिल हैं. चीन के साथ तनाव के बीच इन ऐप पर बैन लगना चीन के लिए एक और झटका है. प्रतिबंध की बात करें तो भारत सरकार सीमा विवाद के बीच अबतक कुल 224 चीनी ऐप्स पर बैन लगा चुकी है.

3. टेलीकॉम कंपनियों को राहत

सुप्रीम कोर्ट ने 01 सितम्बर 2020 को टेलीकॉम कंपनियों को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया को एजीआर भुगतना करने के लिए 10 साल का समय दिया है. बता दें कि कंपनी ने कोर्ट में दलील पेश करते हुए कहा था कि यदि अभी एजीआर भुगतान का आदेश दिया गया तो कंगाली की स्थिति आ जाएगी.

टेलिकॉम कंपनियों पर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये बकाया हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 10 साल की राहत देने की ये अवधि 01 अप्रैल 2021 से शुरू होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि टेलिकॉम कंपनियों को 31 मार्च 2021 तक एजीआर बकाया के 10 प्रतिशत चुकाने होंगे. वहीं बाकी का पैसा हर साल 7 फरवरी को एक किस्त के रूप में देना होगा.

4. एनसीआरबी: किसान आत्महत्या

1 सितंबर, 2020 को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने किसान आत्महत्याओं के आंकड़े जारी किए। यह NCRB द्वारा प्रकाशित भारत में एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स रिपोर्ट का एक हिस्सा है।

अक्टूबर 2019 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने ”एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया” रिपोर्ट जारी की। हालांकि, इसमें किसानों की आत्महत्या के आंकड़े शामिल नहीं थे। इससे देश में भारी विवाद पैदा हो गया था। किसानों की आत्महत्या के बारे में डेटा केवल 2015 तक उपलब्ध था। 2016 की कृषि आत्महत्याओं का डेटा एनसीआरबी द्वारा 2018 की शुरुआत में सरकार को प्रस्तुत किया गया था। हालांकि, यह प्रकाशित नहीं किया गया था। किसान आत्महत्याओं पर हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार 2019 में लगभग 42,480 किसानों और दैनिक वेतनभोगियों ने आत्महत्या की। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6% की वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में देश में सबसे ज्यादा आत्महत्या की दर 26.4% थी, उसके बाद केरल में 24.3% और तेलंगाना में 20.6% थी।

5. लद्दाख लक्षद्वीप वन नेशन वन राशन कार्ड में शामिल

वन नेशन वन राशन कार्ड योजना में 1 सितंबर, 2020 को लद्दाख और लक्षद्वीप को एकीकृत किया गया। इस योजना के तहत अब कुल 26 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

वन नेशन वन कार्ड योजना से जुड़े 26 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, तेलंगाना, सिक्किम, राजस्थान, पंजाब, ओडिशा, नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, लक्षद्वीप, लद्दाख, केरल, कर्नाटक , झारखंड, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, गोवा, दमन और दीव, दादरा और नगर हवेली, बिहार और आंध्र प्रदेश हैं।

वन नेशन वन कार्ड भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत कवर किए गए लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा अधिकारों की डिलीवरी सुनिश्चित करती है। इस योजना ने मुख्य रूप से प्रवासी एनएफएसए लाभार्थियों को लक्षित किया है। ये वे लाभार्थी हैं जो अस्थायी रोजगार की तलाश में अक्सर अपना आवास बदलते हैं।

6. सितम्बर : राष्ट्रीय पोषण माह

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने घोषणा की है कि सितम्बर को राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया जायेगा, इसका उद्देश्य देश में कुपोषण की समस्या को समाप्त करना है। इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम के दौरान की। इस अभियान को महीने भर चलाया जायेगा, इस अभियान का उद्देश्य ‘हर घर पोषण त्यौहार’ का सन्देश पहुँचाना है।

7. राष्ट्रीय पोषण माह

इसका उद्देश्य प्रसवपूर्व देखभाल, स्तनपान तथा एनीमिया, तथा बालिकाओं के लिए पोषण का महत्व, स्वच्छता तथा विवाह की सही उम्र के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसका आयोजन संयुक्त रूप से नीति आयोग, महिला व बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पेयजल व स्वच्छता मंत्रलाय, आवास व शहरी मामले मंत्रालय, अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, जनजातीय मामले मंत्रालय तथा आयुष मंत्रालय द्वारा द्वारा किया जायेगा।

8. राष्ट्रीय खेल दिवस

भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त को मनाया जाता है। 29 अगस्त महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यान चंद की जन्म तिथि है। मेजर ध्यान चंद को उनके उत्कृष्ट हॉकी खेल के लिए हॉकी का जादूगर कहा जाता है। उन्होंने ने भारत के लिए ओलिंपिक में 1928, 1934 और 1936 में स्वर्ण पदक जीते थे।

उन्होंने 1926 से 1948 के बीच अपने करियर में 400 से अधिक गोल स्कोर किये। उनकी आत्मकथा ‘गोल’ को 1952 में प्रकाशित किया गया था। भारत सरकार ने 1956 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया था। खेल में योगदान देने के लिए ‘मेजर ध्यान चंद अवार्ड’ भी उनकी समृति में गठित किया गया है। यह अवार्ड 2002 से लाइफ टाइम अचीवमेंट के तौर पर खिलाडियों को दिया जाता है।

9. भारतीय खगोलविद आकाशगंगा की खोज

भारत के पहले मल्टी-वेवलेंथ उपग्रह एस्ट्रोसैट ने पृथ्वी से 9.3 बिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक आकाशगंगा से अल्ट्रा वायलेट प्रकाश का पता लगाया। आकाशगंगा को AUDFs01 कहा जाता है। विभाग ने बताया कि यह अद्वितीय खोज भारत के एस्ट्रोसैट/यूवीआईटी से की गई। विभाग ने कहा कि यूवीआईटी डिटेक्टर में बैकग्राउंड नॉइज (पृष्ठभूमि का शोर) नासा के हबल टेलीस्कोप की तुलना में बहुत कम है, जो इस खोज का अहम कारक रहा। विभाग ने बताया कि यह अद्वितीय खोज भारत के एस्ट्रोसैट/यूवीआईटी से की गई। विभाग ने कहा कि यूवीआईटी डिटेक्टर में बैकग्राउंड नॉइज (पृष्ठभूमि का शोर) नासा के हबल टेलीस्कोप की तुलना में बहुत कम है, जो इस खोज का अहम कारक रहा।

10. राजीव कुमार : चुनाव आयुक्त

राजीव कुमार ने भारत के नए चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया है। वह 1984 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह फरवरी 2020 में वित्त सचिव के रूप में सेवानिवृत्त हुए। फिर उन्होंने अप्रैल 2020 से 31 अगस्त 2020 तक अध्यक्ष सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड के रूप में कार्य किया। उन्होंने अशोक लवासा का स्थान लिया, जिन्होंने एशियाई विकास बैंक के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा देने के लिए इस्तीफा दे दिया। भारत के वर्तमान मुख्य चुनाव

आयुक्त सुनील अरोड़ा हैं और दूसरे चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा हैं। भारत चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है। यह भारत में संघ और राज्य चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार निकाय है। संविधान के 324 से 329 अनुच्छेद निर्वाचन आयोग और उसके सदस्यों की शक्तियों, कार्यों, कार्यकाल, पात्रता आदि के लिए प्रदान करते हैं। आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है। उनका कार्यकाल छह साल के लिए या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।

11. आरओ-आरओ (RO-RO) ट्रेन सेवा

रोल-ऑन / रोल-ऑफ (आरओ-आरओ) ट्रेन सेवा बेंगलुरु के बाहरी इलाके सोलापुर (महाराष्ट्र) के नेलमला स्टेशन से शुरू की गई है। दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) ने कहा है कि रोल-ऑन / रोल-ऑफ (RO-RO) ट्रेन सेवा में खुले फ्लैट वैगन होंगे। माल वाले ट्रकों को वैगन पर लोड किया जाता है। रोल-ऑन / रोल-ऑफ (आरओ-आरओ) ट्रेन सेवा परिवहन लागत को कम करती है, सड़क दुर्घटनाओं को कम करती है और ईंधन की बचत करती है। यह वस्तुओं के तेज परिवहन को भी सुनिश्चित करती है। रोल-ऑन / रोल-ऑफ (आरओ-आरओ) सेवा में, रेलवे वैगन सीधे अपने चालकों के साथ लोड किए गए ट्रकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाते हैं। फिर, ड्राइवर ट्रकों को उनके अंतिम गंतव्य तक ले जाते हैं। कोंकण रेलवे ने भारत में पहली बार RO-RO सेवा शुरू की

12. आंध्रप्रदेश में दुर्लभ शिलालेख

हाल ही में आंध्रप्रदेश के कुडप्पा (Kadapa) ज़िले में खुदाई के दौरान रेनाटी चोल युग (Renati Chola Era) के एक दुर्लभ शिलालेख (Rare Inscription) की प्राप्ति हुई है। यह दुर्लभ शिलालेख डोलोमाइट चट्टान का एक टुकड़ा है। जिस पर तेलुगू भाषा में उत्कीर्ण किया गया है। 25 पंक्तियों में उत्कीर्ण इस शिलालेख को पुरातन तेलुगू भाषा में लिखा गया था, चट्टान के एक तरफ 11 पंक्तियों को तथा 14 पंक्तियों को दूसरी तरफ उत्कीर्ण किया गया था।

यह शिलालेख 8वीं शताब्दी के आसपास का बताया जाता है जब यह क्षेत्र (कडप्पा ज़िले के आसपास का क्षेत्र) रेनाडू (Renadu) के चोल महाराजा के अधीन था। शिक्षाविद् बताते हैं कि यह शिलालेख सिद्यामायु (Sidyamayu) नामक एक व्यक्ति को उपहार में दी गई छह मार्टटस [Marttus- एक प्रकार की भूमि मापने की इकाई) भूमि के रिकॉर्ड से संबंधित है।

सिद्यामायु (Sidyamayu), पिडुकुला गाँव में मंदिर की सेवा करने वाले ब्राह्मणों में से एक ब्राह्मण था।

13. प्रणब मुखर्जी

पिछले कुछ कुछ समय से बीमार चल रहे भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 31 अगस्त 2020 को निधन हो गया। दिल्ली कैंट स्थित आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा था। अस्पताल की तरफ से ज़ारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया था कि फेफड़ों में संक्रमण की वजह से वह सेप्टिक शॉक में थे। 84 वर्षीय मुखर्जी लगातार गहरे कोमा में थे और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। सेप्टिक शॉक की स्थिति में रक्तचाप काम करना बंद कर देता है और शरीर के अंग पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में विफल हो जाते हैं। वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी देश के राष्ट्रपति बने थे। वे भारत के 13वें राष्ट्रपति थे।

14. शेतुरुंजी और भादर बांध

30 अगस्त, 2020 को गुजरात सरकार के सिंचाई विभाग ने अत्यधिक वर्षा के कारण सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित शेतरुंजी (Shetrunji) और भादर (Bhadar) बांधों से अत्यधिक मात्रा में जल का निर्वहन किया। पिछले पाँच वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि इन दोनों बांधों के पीछे निर्मित जलाशय एक साथ ओवरफ्लो हुए हैं।

गुजरात के भावनगर ज़िले के पालिताना (Palitana) तालुका में राजस्थली गाँव में स्थित शेतरुंजी बांध (Shetrunji Dam) में 308.68 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) की सकल भंडारण क्षमता है जो गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सबसे बड़ा जलाशय है।

राजकोट ज़िले के गोंडल (Gondal) तालुका के लिलाखा (Lilakha) गाँव में स्थित भादर बांध (Bhadar Dam) की सकल भंडारण क्षमता 188.14 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) है जो सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है।

इन दोनों बांधों की एक साथ जल संचयी संग्रहण क्षमता लगभग 497 MCM है जो सौराष्ट्र के कुल 140 प्रमुख बांधों की कुल जल संचयी संग्रहण क्षमता (2540 MCM) का लगभग 20% है। दोनों बांध शेतरुंजी एवं भादर नदियों पर अवस्थित हैं। ये नदियाँ विपरीत दिशाओं में बहती हैं और दोनों बांधों का अलग-अलग जलग्रहण क्षेत्र है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।