(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (26th September - 1st October 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • भारत और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों की अगुवाई में हुई संयुक्त परामर्श आयोग की छठी बैठक .... दिसम्बर में हो सकती है प्रधानमंत्री मोदी और शेख हसीना के बीच डिजिटल बैठक...
  • 28 साल बाद आया बाबरी मस्जिद विध्वंस केस का फैसला.... आडवाणी सहित सभी 32 आरोपी बरी....
  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक नयी रक्षा खरीद प्रक्रिया को किया जारी...दिया गया स्वदेशी उत्पादन बढ़ाने और भारत को शस्त्रों और सैन्य प्लेटफॉर्म के वैश्विक विनिर्माण का केंद्र बनाने पर ध्यान ....
  • संसद ने FCRA बिल पर लगाई अपनी मुहर..नए बिल में अब ग़ैर-सरकारी संस्थाओं के प्रशासनिक कार्यों में की 30 % की कटौती...
  • देश में विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश से भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू किया डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज – 4....
  • ISRO द्वारा लॉन्च किया गया पहला मल्टी-वेवलेंथ ASTRONOT ने आकाशीय पिंडों की सफल इमेजिंग के पांच साल किये पूरे...एस्ट्रोसैट की सफलता के साथ, भारत हुआ अंतरिक्ष-आधारित वेधशालाओं वाले देशों के विशेष क्लब में शामिल..
  • इसरो 2025 में वीनस मिशन को करेगा लांच...फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी CNES लेगा.... इसरो के वीनस मिशन में भाग....

खबरें विस्तार से:

1.

हाल ही में भारत और बांग्लादेश के विदेश मंत्रियों की अगुवाई में हुई संयुक्त सलाहकार आयोग की बैठक में दोनों, देशों के प्रधानमंत्रियों की अगुवाई में होने वाली शिखर सम्मेलन की जमीन तैयार की गई है...... आपको बतादें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में बांग्लादेश की अपनी समकक्ष प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ डिजिटल माध्यम से द्विपक्षीय बैठक करेंगे...

सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन ने भारत-बांग्लादेश संयुक्त परामर्श आयोग की छठी बैठक के बाद यह बात कही. कोविड-19 के मद्देनजर डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक में मोमेन ने बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व किया और भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दल की अगुवाई की.

बांग्लादेश में भारत के वित्त पोषित विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए जल्द ही एक उच्च स्तरीय प्रणाली का गठन किया जाएगा. दोनों देशों के बीच मंत्री स्तरीय डिजिटल बैठक के बाद यह जानकारी दी गई. बैठक में तीस्ता नदी के जल बंटवारे के अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई...

वहीँ संयुक्त बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने ‘उच्च स्तरीय निगरानी समिति’ का गठन करने का निर्णय किया है ताकि बांग्लादेश में भारत के ऋण सहयोग से बन रही परियोजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा की जा सके. इसमें कहा गया कि दोनों देशों के बीच की सीमाओं पर प्रभावी सुरक्षा के लिए समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (सीबीएमपी) लागू की जाए.

गोरतलब हो की भारत और बांग्लादेश दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश हैं और आमतौर पर उन दोनों के बीच संबंध मैत्रीपूर्ण रहे हैं.... हालांकि कभी-कभी सीमा विवाद होते हैं. बांग्लादेश की सीमा तीनों ओर से भारत द्वारा ही घिरा हुआ है....

ये दोनो देश सार्क, बिम्सटेक, हिंद महासागर तटीय क्षेत्रीय सहयोग संघ और राष्ट्रकुल के सदस्य हैं. विशेष रूप से, बांग्लादेश और पूर्व भारतीय राज्य जैसे पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा बंगाली भाषा बोलने वाले प्रांत हैं....बतादें की भारत और बांग्लादेश आपस में 54 चौवन नदियाँ साझा करते हैं...

भारत और बांग्लादेश के बीच 1972 बहत्तर में पहला व्यापार समझौता हुआ था. भारत-बांग्लादेश व्यापार समझौते को अंतिम बार जून 2015 में स्वतः नवीनीकरण के प्रावधान के साथ 5 सालों की अवधि के लिये नवीनीकृत किया गया था. भारत मे बांग्लादेश को साल 2010 से अब तक 8 बिलियन डॉलर की 3 लाइन ऑफ क्रेडिट दी हैं...

भारत-बांग्लादेश परिवहन के सभी साधनों के माध्यम से कनेक्टिविटी का एक अच्छा उदाहरण है. वर्तमान समय में दोनों देशों के मध्य व्यापार और आवागमन के लिए लगभग सभी साधनों जैसे- पानी के जहाज़, रेल, बस और हवाई जहाज़ आदि का प्रयोग किया जा रहा है.

2.

लगभग 28 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने अयोध्या विवादित ढांचा ढहाए जाने के आपराधिक मामले में फैसला सुना दिया.....कोर्ट ने इस मामले में देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी समेत 32 नेताओं को बरी कर दिया है. जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई की तरफ से पेश किए गए सबूत मजबूत नहीं थे....

इस केस की चार्जशीट में बीजेपी के एलके आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत कुल 49 उनचास लोगों का नाम शामिल था. जिनमें से 17 लोगों का निधन हो चुका है...

जज ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सीबीआई की तरफ से पेश किए गए सबूत मजबूत नहीं थे. बाबरी विध्वंस की घटना अचानक से ही हुई थी...अदालत ने माना की श्रद्धालुओं को कारसेवक मानना सही नहीं थी...सबसे बड़ी बात यह है कि जिन लोगों ने ढांचा तोड़ा उनमें और आरोपियों के बीच किसी तरह की सीधा संबंध स्थापित नहीं हो सका....

मामला क्या था?

राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के समय 06 दिसंबर 1992 बानबे को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था. इस मामले के तहत आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था. कोर्ट ने फैसले में कहा था कि विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए. कोर्ट ने कहा की जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए. सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए तथा बाकी का एक तिहाई जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी जाए....

बता दें कि बाबरी मस्जिद के गिरने के सात दिन बाद ही केस सीबीआई को सौंप दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या की विवादित भूमि पर रामलला विराजमान और हिंदू महासभा ने याचिका दायर की. वहीं, दूसरी ओर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध अर्जी दाखिल कर दी. इसके बाद इस केस में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई. इस मामले की अलग-अलग जिलों में सुनवाई हुई, जिसके बाद इलाहबाद हाईकोर्ट ने साल 1993 तिरानवे में सुनवाई के लिए लखनऊ में विशेष अदालत का गठन किया था....

3.

बीते 28 सितंबर को रक्षा मंत्री राज नाथ सिंह ने एक नई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया, 2020 जारी की...इसमें भारतीय विक्रेताओं द्वारा डिजाइन और विकसित किए गए उत्पादों के लिए विशेष प्रोत्साहन है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में विनिर्माण श्रेणी शामिल है जो विदेशी निवेशकों और निर्माताओं को देश में विनिर्माण सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है...

बतातें चले की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी), 2020 उस प्रक्रिया का स्थान लेगी जिसे 2016 में जारी किया गया था....2020 रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , विशेष मिश्र और मेड इन इंडिया हाई एंड मटेरियल जैसे नए विचार शामिल है...

विभिन्न श्रेणियों की स्वदेशी सामग्री में 10% की वृद्धि की गई है।यह मेक इन इंडिया पहल का समर्थन करने के लिए किया गया है...

Buy (Global – Manufacturing in India)नामक नई श्रेणी पेश की गई है। इस श्रेणी के तहत उत्पाद में कुल अनुबंध मूल्य के आधार पर न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री होगी..

एक अन्य नई श्रेणी “लीजिंग” को पेश किया गया है...

मूल्य भिन्नता खंड पेश किया गया है।यह उन सभी मामलों पर लागू होता है जहां अनुबंध की कुल लागत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है...

साथ ही, यह नई प्रक्रिया एक दीर्घकालिक उत्पाद सहायता प्रदान करती है जो वारंटी अवधि पूरी होने के बाद तीन से पांच साल के बीच होगी।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया क्या है?

इसमें ऐसी प्रक्रियाएं शामिल हैं जिनका पालन रक्षा वस्तुओं की खरीद के दौरान सरकारी संस्थाओं द्वारा किया जाना चाहिए। यह रक्षा खरीद प्रक्रिया को आसान बनाने और आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए तैयार की गयी है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया का लक्ष्य स्वदेशी डिजाइन और रक्षा हथियारों के विनिर्माण को समयबद्ध तरीके से बढ़ावा देना है।

पहली रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2002 में प्रख्यापित की गई थी। तब से घरेलू उद्योगों को गति प्रदान करने और आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए इसे कई बार संशोधित किया गया है।

4.

हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरेशनल इंडिया ने भारत में अपना कामकाज रोक दिया है....एमनेस्टी का आरोप है कि 10 सितंबर 2020 को भारत सरकार ने संस्था के सभी अकाउंट को फ्रीज कर दिया....

एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ सरकारी मामला मुख्यतः दो जांचों से सम्बंधित है, एक में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत विसंगतियों का आरोप लगाया गया था

वहीँ दूसरे मामले में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के तहत उल्लंघन का आरोप लगाते हुए CBI द्वारा केस दर्ज किया गया था...

बतातें चलें की संसद ने फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट 2020 यानी FCRA बिल पर अपनी मुहर लगा दी है. नए बिल में अब ग़ैर-सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ के प्रशासनिक कार्यों में 50 फ़ीसदी विदेशी फ़ंड की जगह बस 20 फ़ीसदी फ़ंड ही इस्तेमाल हो सकेगा. यानी इसमें 30 फ़ीसदी की कटौती कर दी गई है..आपको बता दें कि मौजूदा वक्त में देश में एफसीआरए के तहत करीब 22,400 एनजीओ रजिस्टर्ड हैं.

एफसीआरए क्या है?

साल 1976 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा विदेशी फ़ंडिंग की निगरानी के लिए FCRA क़ानून बनाया गया था. साल 2011 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा इसमें संशोधन किया गया. यह कानून व्यक्तियों, संघों और कंपनियों के लिए विदेशी योगदान की प्राप्ति और उपयोगिता को नियंत्रित करता है। विदेशी योगदान का मतलब किसी विदेशी निकाय द्वारा मुद्रा, सुरक्षा या लेख का दान या हस्तांतरण है। गैर सरकारी संगठनों में बढ़ता हुआ विदेशी योगदान देश की नीतियों को प्रभावित करता है। कभी-कभी विदेशी योगदान से संचालित संस्थाएं विदेशी राष्ट्रों के इशारे पर भारत में नीतियों को प्रभावित करती हैं। ऐसी स्थिति में, विदेशी वित्तीय योगदान को विनियमित करना जरूरी हो जाता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि सारी संस्थाएं ही ऐसा करती हों.

इस बार क्या बदलाव किया गया है इस बिल में?

नए बिल में अब ग़ैर-सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ के प्रशासनिक कार्यों में 50 फ़ीसदी विदेशी फ़ंड की जगह बस 20 फ़ीसदी फ़ंड ही इस्तेमाल हो सकेगा.

अब एक एनजीओ मिलने वाले ग्रांट को अन्य एनजीओ से शेयर भी नहीं कर सकेगी और एनजीओ को मिलने वाले विदेशी फ़ंड स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली की ब्रांच में ही रिसीव किए जाएंगे. हालांकि, दूरदराज के इलाकों में काम करने वाले एनजीओ के लिए स्थानीय बैंक में खाता खोलने की अनुमति दी गई है.

साथ ही, सरकार किसी एनजीओ के एफसीआरए लाइसेंस को तीन साल के लिए निलंबित करने के अलावा उसे निरस्त भी कर सकती है.

संशोधन विधेयक में कहा गया है कि विदेशी नागरिक होने पर पासपोर्ट की एक प्रति या ओसीआई कार्ड की प्रति देना जरूरी होगा. कोई भी सरकारी विभाग या अधिकारी विदेशी चंदा नहीं ले सकेगा.

क्यों आलोचना हो रही है इस बिल की?

सरकार के मुताबिक, विदेशी फ़ंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए ये बिल लाया गया है लेकिन ऐसा कोई भी सबूत या डेटा नहीं दिखाया गया है जिससे यह साबित हो कि कितनी संस्थाओं ने विदेशी फंड का इस्तेमाल गलत कामों के लिए किया है.

सबग्रांट यानी बड़ी एनजीओ जो छोटी एनजीओ को ग्रांट बाँट दिया करती थीं वह रोक दिया गया है. ऐसे में, जो मिलकर समन्वय के साथ काम करने की धारणा थी वो अब ख़त्म हो जाएंगी.

ऐसी संस्थाओं के उच्च पदों पर बैठे लोगों के आधार नंबर अनिवार्य कर दिए गए हैं. यह सबसे पहले तो सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि आधार अनिवार्य नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा, आधार की अनिवार्यता के चलते इन संस्थाओं के प्रमुख बनने और बोर्ड को ज्वाइन करने से लोग कतराएंगे क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत जानकारियाँ सार्वजनिक नहीं करना चाहता.

सरकार का ये नया क़ानून ऐसे समय में आया है जब एनजीओ को सबसे ज़्यादा आर्थिक मदद की ज़रूरत है. आज पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है. ऐसे में, एनजीओ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.

सरकार का क्या कहना है?

इस बिल को लेकर सरकार का कहना है कि विदेशों से मिलने वाले फ़ंड को रेगुलेट करना जरूरी था. दरअसल, ढेर सारी एनजीओ ऐसी हैं जिनमें ज़्यादातर फंडिंग विदेशों से होती है. ऐसे में, इन पर लगाम लगाना आवश्यक है ताकि ये फ़ंड किसी भी सूरत में देश विरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल ना हों.

इसके लिए सरकार विदेशी चंदा लेने पर पाबंदी, विदेशी चंदे के ट्रांसफर और एफसीआरए एकाउंट खोलने को लेकर स्पष्ट नियम और आधार नंबर देने अनिवार्यता की व्यवस्था लागू करना चाहती है.

5.

बीते 29 सितम्बर को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने iDEX के लिए परियोजना प्रबंधन दृष्टिकोण (PMA) दिशानिर्देश (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) जारी किये....

बतातें चले डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज - 4 यानी (DISC 4), iDEX 4 Fauji पहल के लॉन्च समारोह के दौरान ये दिशानिर्देश जारी किए गए थे...

केंद्रीय मंत्री ने इस लॉन्च के दौरान यह बताया कि, DISC-4 चैलेंज अपने पहले संस्करणों से आगे बढ़ेगा और देश में विकास और नवाचार को बढ़ावा देगा. जबकि iDEX4 Fauji पहल भारत के सशस्त्र कर्मियों की इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करेगी....

केंद्रीय रक्षा मंत्री ने एक ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए उन सभी हितधारकों को बधाई दी, जिनमें रक्षा मंत्रालय के हितधारक भी शामिल हैं, जहां रक्षा में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभागी एक साथ आए हैं....

रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार (iDEX) दरअसल, रक्षा के लिए एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र है जिसे अप्रैल, 2018 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया था. इसका उद्देश्य स्टार्टअप, MSMEs, R&D इंस्टीट्यूट्स, इंडिविजुअल इनोवेटर्स और एकेडमिक फील्ड सहित निष्ठावान उद्योगों द्वारा एयरोस्पेस और रक्षा में प्रौद्योगिकी विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है और उन्हें रक्षा के क्षेत्र में R&D कार्यों के लिए धन या अनुदान प्रदान करना है.

iDEX ने रक्षा स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए पूरे देश में डिफेंस इनोवेशन हब्स की स्थापना का आदेश दिया है.

क्या है डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज (DISC) क्या है?

इस iDEX पहल को अगले स्तर तक बढ़ाने के लिए, रक्षा मंत्रालय द्वारा अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के साथ साझेदारी में डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज की शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में प्रोटोटाइप बनाने और व्यवसायीकरण समाधान या उत्पाद तैयार करने के लिए MSMEs, स्टार्टअप, इनोवेटर्स को सारी जरुरी सहायता उपलब्ध करवाना है....

इस लॉन्च कार्यक्रम के दौरान, केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 28 सितंबर, 2020 को लॉन्च की गई रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के बारे में भी बात की और यह कहा कि, इसमें रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रावधान शामिल हैं...

6.

28 सितम्बर 2015 को लांच किया गया ASTROSAT, जिसने अब आकाशीय पिंडों की सफल इमेजिंग के पांच साल पूरे कर लिए हैं.....बतातें चलें की यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा लॉन्च किया गया पहला मल्टी-वेवलेंथ उपग्रह है...

ASTROSAT ने तारों, तारामंडलों का पता लगाया और मिल्की वे आकाशगंगा की बड़ी और छोटी आकाशगंगाओं का मानचित्रण किया जिसे “मैगेलैनिक क्लाउड” कहा जाता है.... मैगेलैनिक क्लाउड गामा-रे फटने, सुपरनोवा, सक्रिय आकाशगंगा नाभिक जैसी ऊर्जावान घटना हैं...आसन शब्दों में समझें तो उन्हें मिल्की वे का उपग्रह आकाशगंगा कहा जाता है....ASTROSAT का रेजोल्यूशन NASA मिशन GALEX के रेजोल्यूशन से तीन गुना बेहतर है...

एस्ट्रोसैट की सफलता के साथ, भारत अंतरिक्ष-आधारित वेधशालाओं वाले देशों के विशेष क्लब में शामिल हो गया है...जिन दुसरे देशों के पास अंतरिक्ष वेधशालाएं हैं वे अमेरिका, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी, रूस और जापान हैं। इस उपग्रह का उद्देश्य बाइनरी स्टार सिस्टम में उच्च ऊर्जा प्रक्रियाएं प्रदान करना है जिसमें ब्लैक होल और न्यूट्रॉन स्टार शामिल हैं...

एस्ट्रोसैट पहला समर्पित भारतीय मिशन था जिसने एक्स-रे, यूवी और ऑप्टिकल स्पेक्ट्रल बैंड के साथ-साथ अपने पांच यूवी टेलीस्कोप और एक्स-रे टेलिस्कोप के साथ आकाशीय स्रोतों का अध्ययन किया था। एस्ट्रोसैट का ग्राउंड कमांड और कंट्रोल सेंटर ISRO टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC), बैंगलोर में स्थित है...ISTRAC के ग्राउंड स्टेशन बैंगलोर, हैदराबाद, पोर्ट ब्लेयर, तिरुवनंतपुरम, श्रीहरिकोटा और लखनऊ में स्थित हैं...

आपको बतादें ASTROSAT-1 का संचालन समय पांच साल था और 2020 में समाप्त हो रहा है...वहीँ अभी तक ASTROSAT-2 की ओर कोई कदम नहीं उठाया गया है, लेकिन इसरो द्वारा एक प्रस्ताव बनाया गया है....

7.

बीते 30 सितंबर, 2020 को, फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस ने घोषणा की कि वह इसरो के वीनस मिशन, शुक्रयान में भाग लेगी, इस मिशन को 2025 में लॉन्च किया जायेगा। इसरो के अध्यक्ष और उनके फ्रांसीसी समकक्ष ने दोनों देशों के बीच सहयोग के क्षेत्रों की समीक्षा करने पर वार्ता की....

बतातें चलें की VIRAL जो रूसी फेडरल स्पेस एजेंसी रोस्कोस्मोस और LATMOS एटमोस्फीयर के साथ सह-विकसित किया गया था....इसका मतलब है Venus Infrared Atmospheric Gases Linker instrument है, मिशन मंगलयान, चंद्रयान -1 और चंद्रयान -2 के बाद, इसरो ने अब शुक्र गृह पर अपनी नजरें गड़ा दी हैं..

फ्रांस उन तीन देशों में से एक है जिनके साथ भारत अंतरिक्ष, परमाणु और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग करता है। अन्य दो देश अमेरिका और रूस हैं...2018 में, भारत और फ्रांस ने “अंतरिक्ष सहयोग के लिए संयुक्त विजन” जारी किया था।

वहीँ अब तक, 42 बयालीस शुक्र मिशनों को शुक्र ग्रह के लिए पृथ्वी पर भेजा गया है। जापान का अकात्सुकी वर्तमान में शुक्र गृह के चारों ओर उड़ रहा है...

सितंबर 2020 में, अंतर्राष्ट्रीय खगोलविदों की एक टीम ने शुक्र के वातावरण में फॉस्फीन गैस की उपस्थिति की खोज की। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के मिशन वीनस एक्सप्रेस ने इससे पहले 2011 में शुक्र के ऊपरी वायुमंडल में ओजोन के संकेत पाए थे....इन्हें बायोमार्कर माना जाता है, यानी ग्रह में जीवन रूपों की उपस्थिति की संभावना है...

शुक्र्यान का उद्देश्य वायुमंडलीय रसायन विज्ञान, संरचनागत विविधताओं और ग्रह शुक्र की गतिशीलता का अध्ययन करना है....पहले यह मिशन 2023 में लांच होने वाला था...

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. भारत और नीदरलैंड ने किये डीकार्बोनाइजेशन के समर्थन में स्टेटमेंट ऑफ़ इंटेंट पर हस्ताक्षर

भारत के नीति आयोग और नीदरलैंड के दूतावास, नई दिल्ली ने स्वच्छ और अधिक ऊर्जा को हासिल करने के लिए डीकार्बोनाइजेशन और ऊर्जा संक्रमण एजेंडा का समर्थन करने के लिए SOI (स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर किए हैं. इन दोनों देशों के द्वारा ये हस्ताक्षर इस 28 सितंबर, 2020 को किए गये थे. इस SOI पर नीति आयोग के CEO, श्री अमिताभ कांत और भारत में नीदरलैंड के राजदूत मार्टन वैन डेन बर्ग ने हस्ताक्षर किए थे. इन दोनों देशों के बीच इस साझेदारी का फोकस दोनों देशों की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर नवीन तकनीकी समाधानों का सह-निर्माण करना है.

2. भारत के रक्षा मंत्री ने शुरू किया डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज - 4

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस 29 सितंबर, 2020 को iDEX के लिए परियोजना प्रबंधन दृष्टिकोण (PMA) दिशानिर्देश (इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस) जारी किये. डिफेंस इंडिया स्टार्टअप चैलेंज - 4 (DISC 4), iDEX 4 Fauji पहल के लॉन्च समारोह के दौरान ये दिशानिर्देश जारी किए गए थे.

केंद्रीय मंत्री ने इस लॉन्च के दौरान यह बताया कि, DISC-4 चैलेंज अपने पहले संस्करणों से आगे बढ़ेगा और देश में विकास और नवाचार को बढ़ावा देगा. जबकि iDEX4 Fauji पहल भारत के सशस्त्र कर्मियों की इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करेगी.

3. महाराष्ट्र में कोरोना महामारी के बीच कांगो बुखार का कहर, जानें कैसे फैलती है बीमारी, क्या हैं इसके लक्षण

कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र के पालघर जिले में अधिकारियों को कांगो बुखार के संभावित प्रसार को लेकर सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है. ऐसा माना जा रहा है कि यह पशुओं से मानव में फैला है.

कोरोना महामारी संकट के बीच वायरल फ्लू, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से तो लोग जूझ ही रहे हैं, अब कांगो बुखार ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है. यह टिक (किलनी) के जरिये मनुष्य में फैलता है. जिला प्रशासन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पशुपालकों, मांस विक्रेताओं और पशुपालन अधिकारियों के लिये यह चिंता का विषय है.

कांगो बुखार एक वायरल बीमारी है. यह एक विशेष प्रकार की किलनी के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है. इस बीमारी से संक्रमित पशुओं के खून से या फिर उनका मांस खाने से यह बीमारी मनुष्यों में फैलती है. यह वायरल बीमारी एक विशेष प्रकार की किलनी के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है.

4. JIMEX-2020: भारत और जापान ने किया तीन दिन का नौसैनिक अभ्यास

जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (JMSDF) और भारतीय नौसेना के बीच भारत-जापान समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास - JIMEX इस 28 सितंबर, 2020 को 3 दिनों का अभ्यास चौथी बार पूरा किया गया.

इन दोनों देशों के बीच यह नौसैनिक अभ्यास उत्तरी अरब सागर में 26 सितंबर से 28 सितंबर, 2020 तक आयोजित किया गया था और इसका नेतृत्व CCF2 एवं FOCWF ने किया था. ये अभ्यास ‘कोई संपर्क नहीं’ प्रारूप में आयोजित किए गए थे और इस अभ्यास में भाग लेने वाले जहाजों ने अलग होने से पहले एक दूसरे को अलविदा विदाई दी.

5. वोडाफोन ने जीती भारत के खिलाफ पूर्वव्यापी कर मामले में 20,000 करोड़ रुपये की मध्यस्थता

वोडाफोन ग्रुप PLC ने हेग रूलिंग में स्थायी मध्यस्थता न्यायालय में भारत के खिलाफ दर्ज, लंबे समय से लंबित मध्यस्थता जीत ली है जिसमें भारतीय आयकर अधिकारियों ने नीदरलैंड के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि के प्रावधानों का उल्लंघन किया था और कर और दंड के तौर पर 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की मांग करने के लिए कानून में संशोधन किया था.

हेग में स्थाई न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है कि, यह कर की मांग द्विपक्षीय निवेश संरक्षण समझौते (BIPA) के तहत प्रदान किए गए "न्यायसंगत और उचित व्यवहार मानक" के उल्लंघन में थी. दरअसल, इस मामले में मूल कर की मांग 8,000 करोड़ रुपये से कम थी, लेकिन कर विभाग द्वारा दावा किए गए ब्याज और दंड के कारण इसे बढ़ाकर 22,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था.

6. भारत - श्रीलंका द्विपक्षीय आभासी शिखर सम्मेलन

भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय आभासी शिखर सम्मेलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के बीच आयोजित किया गया. प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच आभासी शिखर सम्मेलन के लिए अपने द्वारा भेजे गये निमंत्रण को स्वीकार करने के लिए प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को धन्यवाद देते हुए इस शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन की शुरुआत की.

प्रधानमंत्री ने श्रीलंकाई संसदीय चुनाव 2020 में अपनी पार्टी की जीत पर श्रीलंका के प्रधानमंत्री को बधाई भी दी. इन दोनों नेताओं ने इस आभासी मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों और आपसी चिंता के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की.

7. केरल ने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए जीता संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार

केरल ने गैर-संचारी रोगों से संबंधित सतत विकास लक्ष्यों के लिए अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए इस 24 सितंबर, 2020 को यह संयुक्त राष्ट्र पुरस्कार जीता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेयस ने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संयुक्त राष्ट्र इंटर-एजेंसी टास्क फोर्स (UNIATF) 2020 पुरस्कार की घोषणा की.

WHO के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेयस, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, इथियोपिया के प्रेसिडेंट साहले-वर्क ज़ेव्डे और महासभा के अध्यक्ष तिजानी मुहम्मद-बंदे, इस कार्यक्रम के दौरान अन्य वक्ताओं में शामिल थे.

8. पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन

पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह का 27 सितम्बर 2020 को सुबह निधन हो गया. वे काफी समय से बीमार चल रहे थे. वे 82 साल के थे. वे पिछले छह साल से कोमा में थे. उनकी कोरोना रिपोर्ट नेगेटिव थी.वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूर्व मंत्री के निधन पर शोक व्यक्त किया है. जसवंत सिंह साल 1960 में सेना में मेजर के पद से इस्तीफा देकर राजनीति के मैदान में उतरे थे. अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में वह अपने करियर के शीर्ष पर थे. साल 1998 से साल 2004 तक राजग के शासनकाल में जसवंत ने वित्त, रक्षा और विदेश मंत्रालयों का नेतृत्व किया.

9. MECL ने कोलार में 16 साल बाद सोने का खनन शुरू किया

MECL (Mineral Exploration Corporation Limited) ने हाल ही में कोलार गोल्ड फील्ड अन्वेषण 16 साल बाद शुरू किया।

पृष्ठभूमि

कोलार स्वर्ण खदानें बेंगलुरु से लगभग 100 किमी दूर स्थित हैं। सोने की कीमतों में गिरावट के कारण उन्हें 2001 में बंद कर दिया गया था। इन खानों में पाइरोक्लास्टिक और पिलो लावा को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक घोषित किया गया था। यह जियो-पर्यटन के संरक्षण, रखरखाव और प्रोत्साहन के लिए किया गया था।

शिवानसमुद्र, मांड्या में बिजली उत्पादन इकाइयों को 1889 में खनन कार्यों का समर्थन करने के लिए बनाया गया था। 1956 में कोलार गोल्ड माइंस का राष्ट्रीयकरण किया गया था। 2001 में केंद्र सरकार द्वारा खनन कार्यों को बंद कर दिया गया था।

10. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी.डी. वाघेला को TRAI का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

28 सितंबर, 2020 को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पी.डी. वाघेला को ट्राई (भारतीय दूरसंचार नियामक) के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने आर.एस. शर्मा का स्थान लिया है। पी.डी. वाघेला वह गुजरात-कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। वह वर्तमान में फार्मास्यूटिकल्स विभाग में है जो रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत संचालित होता है। इससे पहले, वह गुजरात में वाणिज्यिक कर आयुक्त थे। उन्होंने जीएसटी, 2017 के रोल आउट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

11. 30 सितम्बर : हरिजन सेवक संघ स्थापना दिवस

हरिजन सेवक संघ की स्थापना 30 सितंबर, 1932 को हुई थी। इसकी स्थापना गांधीजी ने की थी। उन्होंने इसकी स्थापना तब की जब वे पुणे के येरवदा जेल में थे। पृष्ठभूमि गांधीजी ने एक अलग समूह में हिंदू समुदाय के दबे हुए वर्गों के अलगाव का विरोध किया। यह 1931 में लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में किया गया था। बी.आर. अंबेडकर ने ब्रिटिश सरकार को दलित वर्ग को सांप्रदायिक आधार पर प्रतिनिधित्व प्रदान करने की सिफारिश की थी। गांधीजी के अनुसार, हिंदू समुदाय में विभाजन पैदा करने के लिए यह कदम उठाया गया था। उनका मत था कि यह अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति का हिस्सा था।

12. ईश्वर चंद्र विद्यासागर

26 सितंबर, 2020 को देश भर में समाज सुधारक और शिक्षाविद ईश्वर चंद्र विद्यासागर की 200वीं जयंती मनाई गई। ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जन्म 26 सितंबर, 1820 को पश्चिम बंगाल के एक गाँव में हुआ था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे कलकत्ता चले गए और वहाँ वर्ष 1829 से वर्ष 1841 के बीच संस्कृत विश्वविद्यालय से वेदांत, व्याकरण, साहित्य, अलंकार शास्त्र और नीतिशास्र में निपुणता हासिल की, इस दौरान वर्ष 1839 में उन्हें संस्कृत और दर्शन में विशेषज्ञता के लिये विद्यासागर की उपाधि दी गई। विद्यासागर का शाब्दिक अर्थ है 'ज्ञान का महासागर'। इक्कीस वर्ष की आयु में ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने फोर्ट विलियम कॉलेज में संस्कृत विभाग के प्रमुख के रूप में शामिल हो गए। ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बंगाली शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाने और बंगाली भाषा को लिखने और सीखने के तरीके का विकास करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। उनकी बंगाली पुस्तक ‘बोर्नो पोरिचोय’ को आज भी बंगाली अक्षर सीखने के लिये एक परिचयात्मक पुस्तक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह उनके अथक संघर्ष का ही परिणाम था कि भारत की तत्कालीन सरकार ने वर्ष 1856 में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया।

13. 28 सितम्बर को मनाई गयी सरदार भगत सिंह की 113वीं जयंती

भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को बंगा (पंजाब, पाकिस्तान) में हुआ था। भगत सिंह को शहीद-ए-आज़म के नाम से भी जाना जाता है। उनके पिताजी का नाम किशन सिंह तथा उनकी माता जी का नाम विद्यावती था।

साइमन कमीशन के आगमन के समय सभी दलों ने साइमन कमीशन का विरोध करते हुए देश भर में प्रदर्शन किये। लाला लाजपत राय ने भी 30 अक्टूबर, 1928 को साइमन कमीशन के विरोध में लाहौर में प्रदर्शन किया, इस विरोध प्रदर्शन में लाठीचार्ज के बाद उनकी मृत्यु हो गयी।

लाला लाजपत राय की मृत्यु के प्रतिशोध में भगत सिंह, राज गुरु, जय गोपाल तथा सुख देव ने ब्रिटिश पुलिस चीफ स्कॉट की हत्या की योजना बनायीं। परन्तु उन्होंने DSP जे.पी. सौन्ड़ेर्स पर गोली चलायी, जिसमे उसकी मृत्यु हो गयी। बाद उन्हें दिल्ली असेंबली में बम फेंकने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

लाहौर षड़यंत्र केस में इन महान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए 24 मार्च, 1931 को मृत्युदंड का आदेश दिया गया था। परन्तु उन्हें 23 मार्च, 1931 को शाम 7 बजे फांसी दे दी गयी थी।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।