(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (22nd - 28th May 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (22nd - 28th May 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • LAC पर एक बार फिर सामने आये भारत और चीन...सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना के कमांडरों का सम्मेलन....तो वहीँ भारत की रणनीति पर नर्म पड़ा चीन....भारत में चीन के राजदूत ने मतभेदों को बातचीत से निपटाने पर दिया जोर.....
  • राजस्थान, हरियाणा और यूपी में आतंक मचा रही है टिड्‌डीयां...राज्यों ने इस संकट से निपटने की तैयारियां कर ली शुरू....अधिकारियों और किसानों को किया अलर्ट..यह समस्या कोरोना वायरस के बाद बनी दूसरा सबसे बड़ा चिंता का विषय....
  • WHO द्वारा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर लगई रोक....पर ICMR का जवाब- हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोई प्रमुख दुष्प्रभाव सामने नहीं....कर सकते है कोविड-19 के लिए इस्तेमाल....
  • केंद्रीय सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 26 मई 2020 को चारधाम संपर्क परियोजना के तहत चम्‍बा में बनाई गई 440 मीटर लम्‍बी सुरंग का उद्घाटन किया. इस सुरंग से चारधाम राजमार्ग के ऋषिकेश-धारसू और गंगोत्री मार्ग के यात्रियों के समय में काफी बचत होगी...इसे महामारी के दौरान राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक ‘असाधारण उपलब्धि' करार दिया.
  • उत्तराखंड में जलते जंगलों की फेक तस्वेर्रों से धधक रहा है social MEDIA.....राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने खुद ट्वीट कर FOREST FIRE की तस्वीरों को बताया गलत....फोटोज और VIDEO को पुरानी और विदेशी बताया... (उत्तराखंड में जंगलों की फेक तस्वीरों से धधक रहा सोशल मीडिया )
  • उत्तराखंड ने दुर्लभ पौधों को विलुप्त होने से बचाने के लिए उठाया कदम.....अपने संरक्षण प्रयासों को उजागर करने वाली जारी की एक रिपोर्ट...ऐसी रिपोर्ट जारी करने वाला बन पहला राज्य....
  • ISRO ने हासिल की एक और कामयाबी...भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को चाँद जैसी मिटटी बनाने का मिला पेटेंट..

खबरें विस्तार से:

1.

LAC पर एक बार फिर सामने आये भारत और चीन...सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना के कमांडरों का सम्मेलन....तो वहीँ भारत की रणनीति पर नर्म पड़ा चीन.... भारत में चीन के राजदूत ने मतभेदों को बातचीत से निपटाने पर दिया जोर....

भारत और चीनी सैनिकों में तनाव बढ़ने के बीच मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सुरक्षा चक्र के 'टॉप 5' से बातचीत की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ बैठक हुई, ...

मीटिंग का एजेंडा वैसे तो मिलिट्री रिफॉर्म्‍स और भारत की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने पर था। मगर चीन की लद्दाख में हरकत ने मीटिंग का रुख मोड़‍ दिया...अधिकारियों ने पीएम मोदी को लद्दाख के ताजा हालात से रूबरू कराया....यह तय हुआ है कि बॉर्डर पर जो डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं, वे नहीं रुकेंगे...चीन ने निर्माण रोकने की शर्त रखी है जिसे भारत मानने को तैयार नहीं। भारत ने चीन से साफ कहा है कि वह बॉर्डर पर यथास्थिति बनाए रखे...

भारतीय सेना के कमांडरों की बैठक शुरू

इस बीच सीमा पर तनातनी के बीच भारतीय सेना के कमांडरों का सम्मेलन बुधवार को नई दिल्ली में शुरू हो गया है, जहां सिक्किम, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा के संबंध में गहन चर्चा की जाएगी. पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ तनाव से पहले इस सम्मेलन की योजना बनाई गई थी. सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवने सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे हैं. भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बल के शीर्ष कमांडर बैठक में भाग ले रहे हैं. इस बैठक में लद्दाख में चीन के कारण उपजे हालात सहित सभी सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा होगी.

आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों के लिए होता है, जिसमें शीर्ष स्तर के अधिकारी शामिल होते हैं. यह अप्रैल 2020 के लिए निर्धारित था, मगर कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गया था. इसे अब दो चरणों में आयोजित किया जाएगा. सम्मेलन का पहला चरण बुधवार यानी 27 मई को शुरू हुआ और 29 मई, 2020 तक जारी रहेगा. इसके बाद दूसरा चरण जून 2020 के अंतिम सप्ताह में शुरू होगा.

भारतीय सेना का शीर्ष स्तर का नेतृत्व मौजूदा उभरती सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों पर विचार-मंथन करेगा और भारतीय सेना के लिए भविष्य के पाठ्यक्रम को निर्धारित किया जाएगा. इसमें सेना कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों सहित कॉलेजिएट प्रणाली के माध्यम से निर्णय लिया जाता है.

साउथ ब्लॉक में शुरू पहले चरण के सम्मेलन दौरान, परिचालन और प्रशासनिक मुद्दों से संबंधित विभिन्न पहलुओं जिसमें रसद और मानव संसाधन से संबंधित अध्ययन शामिल हैं, पर चर्चा की जाएगी. इसमें चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ उभरती स्थिति भी शामिल है.

इसी बीच भारत-चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विवाद के बीच बुधवार को चीन का रुख नरम पड़ गया...बतातें चले की मंगलवार को किसी देश का नाम लिए बिना राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेना को तैयारी का निर्देश दिया था....वहीं बुधवार को पहले चीनी विदेश मंत्रालय ने सीमा पर भारत के साथ स्थिति को स्थिर और नियंत्रण में बताया...उसके बाद भारत में चीन के राजदूत ने मतभेदों को बातचीत से निपटाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चाइनीज ड्रैगन और भारतीय हाथी साथ नृत्य कर सकते हैं...

पीछे नही हटेगा भारत

भारत ने पूर्वी लद्दाख के तनाव वाले इलाके में चीन के साथ गतिरोध से अब पीछे न होने का फैसला कर लिया है। काराकोरम दर्रा और इस क्षेत्र में तैनात चीनी सैनिकों का मुकाबला करने के लिए भारत ने सैनिकों को तैनात कर दिया है।

सूत्रों की मानें तो भारत ने यह फैसला भारतीय क्षेत्र में किसी भी तरह की चीनी घुसपैठ और भारतीय इलाके में स्थिति परिवर्तन की कोशिशों को नाकाम करने के उद्देश्य से लिया है। मजबूती और संयम के साथ चीनी चुनौती का सामना करने के लिए ही भारत ने भी अपनी सेना की संख्या बढ़ा दी है..

दोनों पक्षों के बीच करीब 20 दिन तक चले गतिरोध के मद्देनजर भारतीय सेना ने उत्तर सिक्किम, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में अपनी मौजूदगी उल्लेखनीय ढंग से बढ़ाई है और यह संदेश दिया है कि भारत चीन के किसी भी आक्रामक सैन्य रुख के आगे रुकने वाला नहीं है।

भारतीय सेना ने लद्दाख में बॉर्डर से सटे कई सेक्‍टर्स में प्रजेंस बढ़ा दी है ताकि चीन कोई उलटी हरकत ना कर सके। चीन ने LAC पर बड़ी तेजी से कंस्‍ट्रक्‍शन शुरू किया है और टेंट वगैरह गाड़ दिए थे। भारत ने भी पैंगोंग झील और गलवां घाटी में चीन को उसी तरह जवाब दिया है। दौलत बेग ओल्‍डी में सेना की 81 इक्यासी और 114वीं ब्रिगेड तैनात है।

भारत ने सैनिकों, क्षमता और संसाधनों के मामले में चीन के खिलाफ डटकर खड़े होने का फैसला किया है। बता दें कि लद्दाख सेक्टर में चीन ने अपनी ओर से करीब 5,000 सैनिकों को तैनात किया है। हालांकि, भारत ने भी सीमा पर सैनिकों की संख्या में इजाफा किया है।

एक नज़र डालते है उन वजहों पर जिनसे चीन भारत से इतना चिड़ा हुआ है

भारत LAC के ऊंचाई वाले विवादित क्षेत्रों में रोड और एयर कनेक्टिविटी के मामले में चीन के दबदबे को लगातार चुनौती दे रहा है...पूर्वी लद्दाख में चीन के तनाव बढ़ाने वाली हरकतों के पीछे भारत का बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में आक्रामक होना है...255 किलोमीटर लंबे दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DBO) यानी DSDBO रोड पर 37 सैंतीस पुलों का निर्माण हुआ है...भारत ने सीमाई इलाकों में एयर फोर्स के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चरों को और मजबूत करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है...यह कहना गलत नही होगा की भारत के बढ़ते कद को देखर चीन घबरा गया है...

डोकलाम विवाद भी कारण

दरअसल, उम्मीद की जा रही थी कि पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद यह सबसे बड़ी सैन्य तनातनी का रूप ले सकती है।..... चीन चोरी-चुपके धीरे-धीरे अस्थायी निर्माण को मजबूत कर रहा है। डोकलाम विवाद 18 जून 2017 में हुआ था, जब करीब 270 से 300 भारतीय सैनिकों डटकर मुकाबला कर चीन के सड़क निर्माण को रोक लिया। चीनी सेना के साथ 73 तिहात्त्र्र दिनों तक यह गतिरोध जारी रहा था और भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों के मंसूबों पर पानी फेरा था...

2.

राजस्थान, हरियाणा और यूपी में आतंक मचा रही है टिड्‌डीयां...राज्यों ने इस संकट से निपटने की तैयारियां कर ली शुरू....अधिकारियों और किसानों को किया अलर्ट..यह समस्या कोरोना वायरस के बाद बनी दूसरा सबसे बड़ा चिंता का विषय....

पाकिस्तान से राजस्थान के रास्ते देश में घुसे टिड्डी दल ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। देश के 9 राज्यों में टिडि्डयों का खतरा बढ़ रहा है...इनमें राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं... राज्यों ने इस संकट से निपटने की तैयारियां कर ली हैं। साथ ही अधिकारियों और किसानों को अलर्ट कर दिया है...इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आइसीएआर) के महानिदेशक डॉक्टर टी महापात्र का कहना है कि इन टिड्डी दलों के प्रकोप का कोई असर रबी सीजन की गेहूं, दलहन व तिलहन वाली फसलों पर नहीं हुआ है। डॉक्टर महापात्र ने कहा कि जून व जुलाई के दौरान मानसून के आने से उनका प्रजनन बहुत बढ़ जाएगा, जो खरीफ की फसलों के लिए बड़ा खतरा है। मानसून से पहले इन्हें खत्म करना जरूरी है। इस समय इन क्षेत्रों में 700 से अधिक ट्रैक्टरों को कीटनाशकों के छिड़काव के लिए लगा दिया गया है। अब तक इन टिड्डी दलों ने 40 हजार हेक्टेयर से ज्यादा खेतों पर हमला किया है....

इसलिए तेजी से आगे बढ़ रहीं टिड्ड‍ियां

कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें टिड्डी दलों के भारतीय सीमा में प्रवेश से पहले ही रबी सीजन की फसलों की कटाई लगभग पूरी हो चुकी थी, लिहाजा कोई नुकसान नहीं हुआ है। राजस्थान व गुजरात में टिड्डी दलों को कुछ हरी वनस्पतियां नहीं मिलने की दशा में उनका दल तेजी से आगे बढ़ा है। तेज हवाओं से उनके उड़ने की रफ्तार बढ़ जाती है। यही कारण है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के जिलों तक दिखने लगे हैं। केंद्रीय व राज्य एजेंसियां इस दिशा में कारगर तरीके से काम कर रही हैं। वहीं लोकस्ट वार्निग ऑर्गनाइजेशन (एलडब्ल्यूओ) के अधिकारियों का कहना है कि उत्तरी राज्यों में सक्रिय टिड्डी दलों का सफाया जल्दी ही कर लिया जाएगा। टिड्डियों के एक बड़े दल ने अप्रैल में पाकिस्तान से भारत में प्रवेश किया और ये तब से ये फसलों को चट कर रहे हैं. बताया जा रहा है कि पिछले 26 सालों में भारत पर ये टिड्डी दल का सबसे खतरनाक हमला है.

यह टिड्डी दल अफ्रीका के सींग से फैलकर यमन तक गया, फिर ईरान और पाकिस्तान. पाकिस्तान में कई हेक्टेयर में फैले कपास के खेतों पर हमला करने के बाद इन्होंने भारत को निशाना बनाया. एक अकेला दल एक वर्ग किलोमीटर तक के क्षेत्र में फैला हो सकता है. 8 से 15 करोड़ के करीब टिड्डियां 35,000 पैंतीस से ज्यादा लोगों के लिए पर्याप्त फसल को तबाह कर सकती हैं....

इनके पास प्रजनन करने की असाधारण क्षमता होती है, और ये लंबी उड़ान भरने में माहिर होती हैं. एक ही दिन में, ये करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय कर लेते हैं. सर्दियों से ही इन कीटों ने किसानों के रातों की नींदें हराम कर रखी हैं.

पिछले एक साल में, टिड्डियों से प्रभावित ज्यादातर खेतों में एक तिहाई से अधिक फसल बर्बाद हो चुकी है. ये गर्मियों की फसल खाने के लिए अक्सर जून के आसपास भारत आते हैं, लेकिन इस साल ये अप्रैल में आ गए.

इसने कई राज्यों की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्थाओं को खतरे में डाल दिया है और टिड्डी दल के हमले से बचने का कोई रास्ता नहीं है. कीटनाशकों से भरे ट्रकों को देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जा रहा है लेकिन इन कीटों को केवल रात में ही नष्ट किया जा सकता है जब वे पेड़ों पर आराम करते हैं.

इस समस्या से लड़ने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. लेकिन दुर्भाग्य से ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इनकी संख्या बहुत ज्यादा है. ये तेज गर्मियों से लेकर सर्दियों तक टिड्डियां प्रजनन कर सकती हैं.

एक्सपर्ट के अनुसार टिड्‌डी हमले या टिड्‌डी दलों की बहुतायत के पीछे ग्लोबल वार्मिंग है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के प्रभारी अधिकारी डॉ. संजीव कुमार की मानें तो टिड्‌डी का यह विकराल रूप ग्लोबल वार्मिंग की ही देन है। करीब 27 सत्ताईस साल पहले 1993 तिरानवे के बाद पिछले साल टिड्‌डी हमले बड़ी परेशानी बने। और अब वर्तमान में भी टिड्‌डी ने खाड़ी देशों से पाकिस्तान और अब भारत को अपना ठिकाना बना लिया है। इस समस्या को आसानी से दूर नहीं किया जा सकता और इसपर कोरोना वायरस की तरह ही ध्यान देने की आवश्यकता है...

तो अपने आप मर जाती हैं टिड्‌डी

टिड्‌डी की उम्र महज 90 दिन होती है। एक टिड्‌डी एक दिन में अपने वजन के बराबर खाना खाती है और हवा में 5000 फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है। राजस्थान में बड़े-बड़े टिड्‌डी दल या झुंड दिख रहे हैं। एक्सपर्ट रिपोर्ट के अनुसार एक दल 740 वर्ग किलोमीटर तक बड़ा हो सकता है। इनसे दुनिया के करीब 60 देश प्रभावति हैं...

3.

WHO द्वारा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के ट्रायल पर लगई रोक....पर ICMR का जवाब- हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोई प्रमुख दुष्प्रभाव सामने नहीं....कर सकते है कोविड-19 के लिए इस्तेमाल....

REPORT- कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) की दवा के इस्तेमाल को लेकर WHO ने शंका जताई है....साथ ही कहा है कि ये दवा कोरोना वायरस के इलाज लिए सुरक्षित नहीं है. लेकिन इस बार भारत ने अपना कड़ा रुख अपना लिया है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने कहा कि भारत में हुए अध्ययनों में मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) का कोई प्रमुख दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है और इसका प्रयोग कोविड-19 के एहतियाती इलाज में सख्त चिकित्सा पर्यवेक्षण में जारी रखा जा सकता है.

अभी और बढ़ सकता है विरोध

मामले से जुड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि पिछले पांच महीनों से WHO के दिशा-निर्देश कई मामलों में गलत साबित हुए हैं. इसी वजह से अब भारत ने किसी भी अन्य संगठन की सलाह या निर्देश पर काम करने की बजाए खुद इलाज का रास्ता ढूंढने का फैसला किया है. भारत सरकार अब कोरोना वायरस से निबटने के लिए अपनी जांच और शोध पर ही भरोसा करना चाहती है. फिलहाल मंत्रालय ने सिर्फ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन मामले में ही WHO की सिफारिश मानने से इंकार किया है. लेकिन आने वाले समय में WHO के साथ कई मामलों में मतभेद सामने आ सकते हैं...

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के देश में कोविड-19 के संबंध में अब तक ट्रायल से किसी बड़े साइड इफेक्ट की पुष्टि नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार रात को वैश्विक स्वास्थ्य संस्था को ई-मेल भेजा। सूत्रों ने बताया, 'डब्ल्यूएचओ से कहा गया कि जांच स्थगित करने से पहले शायद सभी रिपोर्टों पर विचार नहीं किया गया। उन दूसरी दवाइयों के ट्रायल को लेकर भी यही सचाई हो सकती है जिन पर अलग-अलग रिपोर्ट आ रही हैं....

जिंक के साथ HCQ ले रहे हैं ट्रंप

ध्यान रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी महीने की शुरुआत में भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के निर्यात पर पाबंदी हटाने की मांग की थी। इसी हफ्ते उन्होंने बताया कि वो कोरोना वायरस से बचाव के लिए जिंक (Zinc) के साथ मलेरिया रोधी दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन ले रहे हैं। भारत ने कई देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को मंजूरी दी है...

4.

चार धाम परियोजना : सभी मौसम में चार धाम पहुंचना जल्द होगा आसान... चम्बा में बनाई गई 440 मीटर लम्बी सुरंग का हुआ उद्घाटन किया.....इस सुरंग से चारधाम राजमार्ग के ऋषिकेश-धारसू और गंगोत्री मार्ग के यात्रियों के समय में होगी काफी बचत ....

केंद्रीय सडक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 26 मई 2020 को चारधाम संपर्क परियोजना के तहत चम्‍बा में बनाई गई 440 मीटर लम्‍बी सुरंग का उद्घाटन किया. इस सुरंग से चारधाम राजमार्ग के ऋषिकेश-धारसू और गंगोत्री मार्ग के यात्रियों के समय में काफी बचत होगी...इसे महामारी के दौरान राष्ट्र-निर्माण की दिशा में एक ‘असाधारण उपलब्धि' करार दिया.

चम्‍बा में भीडभाड से राहत मिलेगी

इस परियोजना से चम्‍बा में भीडभाड से राहत मिलेगी और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी बढावा मिलेगा. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि यह परियोजना निर्धारित समय से तीन महीने पहले अक्टूबर में पूरी होगी. चारधाम परियोजना के तहत लगभग आठ सौ नवासी किलोमीटर लम्‍बे राष्‍ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाना है. गंगोत्री और बद्रीनाथ से लगे ढाई सौ किलोमीटर लम्‍बे सड़क मार्ग के निर्माण का कार्य सीमा सड़क संगठन को सौंपा गया है.

मुख्य बिंदु

चम्‍बा सुरंग के निर्माण में नवीनतम ऑस्ट्रियाई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है. नितिन गडकरी ने कहा कि निर्धारित तिथि से तीन महीने पहले ही अक्टूबर 2020 में सुरंग से यातायात शुरू हो जाएगा. सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि बीआरओ ने सुरंग के उत्तरी छोर पर काम जनवरी 2019 में शुरू किया, लेकिन सुरक्षा चिंताओं और क्षतिपूर्ति मुद्दों के कारण दक्षिण छोर पर अक्टूबर 2019 के बाद ही काम शुरू हो सका. बीआरओ लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत वाली 900 किलोमीटर लंबी चारधाम परियोजना के तहत गंगोत्री और बद्रीनाथ के पवित्र मंदिरों की ओर जाने वाले 250 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कर रहा है.

चारधाम परियोजना क्या है?

चारधाम महामार्ग या ऑल वेदर एक्सप्रेसवे उत्तराखंड राज्य में एक प्रस्तावित एक हाईवे परियोजना है. इसके अंतर्गत राज्य में स्थित चार धाम तीर्थस्थलों को एक्सप्रेस राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से जोड़ा जायेगा. परियोजना के तहत कम से कम 10-15 मीटर चौड़े दो-लेन (प्रत्येक दिशा में) राष्ट्रीय राजमार्ग बनाये जायेंगे. इस परियोजना के अंतर्गत कुल 900 किमी सड़कों का निर्माण होगा. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी द्वारा दिसंबर 2016 में इस परियोजना की आधारशिला रखी गयी थी.

5.

उत्तराखंड में जलते जंगलों की फेक तस्वेर्रों से धधक रहा है social MEDIA.....राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने खुद ट्वीट कर FOREST FIRE की तस्वीरों को बताया गलत....फोटोज और VIDEO को पुरानी और विदेशी बताया...

पहाड़ी राज्यों में हर साल गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं पर्यावरण के लिए चिंता का विषय बन गई हैं...जहाँ उत्तराखंड के जगलों में भी आग की घटना सामने आई है...लेकिन उससे उलट जो social मीडिया पर दिखाया जा रहा है....

उत्तराखंड वन विभाग के मुताबिक 2019 में 25 मई तक 1590 हेक्टेयर जंगल में आग लगी थी। 2020 में 25 मई तक केवल 71.46 हेक्टेयर वन भूमि ही आग की चपेट में आई है। गढ़वाल और कुमाऊं के संरक्षित क्षेत्रों में 26 मई तक कुल 37 घटनाएं सामने आईं। इसमें गढ़वाल मंडल में 12, कुमाऊं मंडल में 15 और वन्यजीव क्षेत्र की 10 घटनाएं हैं।

अभी तक जंगल की आग का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। सिविल क्षेत्र में 25 मामले सामने आए। वनाग्नि से करीब 81 इक्यासी हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है और 2.18 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है।

उत्तराखंड में क़रीब 38 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। वन अधिकारियों के अनुसार इसमें से 15 से 20 प्रतिशत चीड़ के जंगलों वाला इलाका है। इन्हीं जंगलों में आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं..एक तो तेज़ गर्मी जहाँ चीड़ की पत्तियां इस आग में घी का काम करती हैं। यह पत्तियां जिन्हें पाईन नीडल भी कहा जाता है, मार्च से गिरना शुरू होती हैं और करीब 15 लाख मीट्रिक टन बायोमास बनकर पूरे जंगल में बिछ जाती है। पहाड़ी भाषा में इन्हें पिरूल कहते हैं। सूखे हुए चीड़ के पत्तों में आग जल्दी लगती है और तेजी से फैलती भी है। चीड़ के पेड़ में 20 से 25 सेमी लम्बे नुकीले पत्ते होते हैं

इसके दो नुकसान हैं। एक तो यह पत्तियां जहां भी गिरती हैं वहां कोई अन्य पेड़-पौधा नहीं उग पाता। दूसरा, इन पत्तियों में रेजिन होता है जिसके चलते ये बेहद ज्वलनशील होती हैं और हल्की चिंगारी मिलने पर भी भभक कर जलने लगती हैं। हवा के साथ यह आग अनियंत्रित फैलती और देखते ही देखते पूरे जंगल को चपेट में ले लेती है..

हर साल लगने वाली वनाग्नि को रोकने के लिए वन विभाग क्या कर रहा है?

उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रदेश स्तर पर इस दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल फरवरी महीने में ‘वन अग्नि सुरक्षा सप्ताह’ मनाया जाता है। इस दौरान वन विभाग के अधिकारी गांव-गांव में जाकर पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से लोगों को वनाग्नि से बचने के बारे में बताते हैं।

हर साल प्री फायर प्लानिंग होती है

इसके अलावा हर साल गर्मी शुरू होने से पहले प्री-फायर प्लानिंग भी विभाग करता है जिसके तहत फायर लाइन सही की जाती हैं। फायर लाइन यानी जंगलों में ऐसे बफर इलाके बनाना जो आग के फैलते क्रम को तोड़ सकें। ऐसे में आग यदि लगती भी है तो फायर लाइन से आगे नहीं बढ़ पाती। अधिकारी बताते हैं कि वन विभाग हर साल महिला मंगल दल और वन पंचायतों के साथ मिलकर ये काम कर रहा है।

इससे बचने का स्थायी समाधान क्या है?

प्रदेश के रुद्रप्रयाग ज़िले में इस समस्या के समाधान का एक मॉडल तैयार हुआ है। यहां कोट मल्ला नाम का एक गांव है, जहां के रहने वाले जगत सिंह ‘जंगली’ ने वनाग्नि से छुटकारा पाने का कारगर समाधान निकाला है। जगत सिंह ने अपने गांव के पास मिश्रित वन तैयार किया है। इसमें हर तरह के पेड़ होने के चलते मिट्टी में नमी कहीं ज्यादा होती है और चीड़ का मोनोकल्चर को नुकसान करता है, उससे निजात मिल जाती है।

वर्ष 2016 में, पूरे उत्तराखण्ड में 2069 से अधिक स्थानों पर वनाग्नि की घटनायें पायी गई। अल्मोड़ा, चमोली, नैनीताल, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों को बुरी तरह से प्रभावित घोषित किया गया। वर्ष 2016 में 5 महीने की आग की 2069 घटनाओं ने 4,424 हेक्टेयर हरित वन क्षेत्र को अभिशप्त कर दिया....

6.

उत्तराखंड ने दुर्लभ पौधों को विलुप्त होने से बचाने के लिए उठाया कदम.....अपने संरक्षण प्रयासों को उजागर करने वाली जारी की एक रिपोर्ट...ऐसी रिपोर्ट जारी करने वाला बन पहला राज्य....

उत्तराखंड 1,100 से अधिक दुर्लभ पौधों को विलुप्त होने से बचाने के लिए अपने संरक्षण प्रयासों को उजागर करने वाली एक अनूठी रिपोर्ट जारी करने वाला पहला राज्य बन गया है। वर्तमान में कोरोनोवायरस का संभावित इलाज खोजने के लिए वैज्ञानिकों के शोध का हिस्सा बनीं 'अश्वगंधा', 'गिलोय', 'कालमेघ' और 'चित्रक' जैसी जड़ी-बूटियों को इस संरक्षण में शामिल है.....आपको बता दें , ये कार्य्रकम वन सेवा अधिकारी संजीव चतुर्वेदी द्वारा किया जा रह है

लगभग 1,145 पैंतालिस पौधों की प्रजातियों का संरक्षण किया गया है, जिनमें से 46 छियालीस प्रजातियाँ उत्तराखंड के लिए स्थानिक हैं और 68 अडसठ प्रजातियाँ दुर्लभ, लुप्तप्राय या खतरे में हैं... ये सभी प्रजातियाँ अंतर्राष्ट्रीय संघ (IUCN) या राज्य जैव विविधता बोर्ड की लाल सूची के तहत आते है....

स्थानिक प्रजातियों के संरक्षण को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि वे केवल एक भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद हैं,,...

‘ब्रह्मकमल’, एक लुप्तप्राय पौधा जिसका नाम हिंदू भगवान ब्रह्मा के नाम पर रखा गया है, और पौराणिक jसंजीवनी ’जड़ी बूटी जिसे इस कार्यक्रम के तहत संरक्षित फूलों में शामिल हैं...

ब्रह्मकमल (वैज्ञानिक नाम: Saussurea obvallata), हिमालय क्षेत्र में चीन की सीमा से 12,000 फीट की ऊंचाई पर पाया जाता है, उत्तराखंड का राज्य फूल है और एक बहुत ही पवित्र फूल माना जाता है...इसमें जबरदस्त औषधीय गुण होने के साथ साथ इसका उपयोग एंटीसेप्टिक के रूप में और अन्य बीमारियों के उपचार के लिए किया जाता है..

वहीँ संजीवनी (सेलाजिनेला ब्रायोप्टेरिस) एक और दुर्लभ जड़ी बूटी है जिसका रामायण में उल्लेख मिलता है। इसी प्रकार, थुनेर (टैक्सीसबैकाटा), एक पेड़ है जो हिमालय क्षेत्र में बहुत अधिक ऊंचाई पर पाया जाता है ...

चुकी इनसे TAXOL निकाला जाता इसिलए यह विलुप्त होने की कगार पर है, TAXOL एक पदार्थ है जिसका उपयोग स्तन कैंसर के इलाज में किया जाता है,

भोजपात्र - एक पवित्र और प्राचीन वृक्ष है...इन्हें की छाल पर शास्त्र लिखे गए थे – ये इस तरह के पेड की आखिरी प्रजाति है...जिन्हें उत्तराखंड वन विभाग द्वारा भी संरक्षण किया जाता है।.. भोजपात्र (बेतुलुतिलिस जो लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है..

संरक्षण कार्यक्रम में पौधों के सभी वर्ग शामिल हैं –

पेड़, झाड़ी, जड़ी बूटी, बांस, वाइल्ड क्लयिमबर्स, फ़र्न, आर्किड, घास, बेंत, अल्पाइन फूल, ताड़, साइकाड, कैक्टस, रसीला, जलीय प्रजातियाँ, कीटभक्षी पौधे और यहाँ तक कि निचले पौधों जैसे कई पौधे शामिल है...जैसे लिचेन और शैवाल, जिन्हें पहली बार रिपोर्ट में वर्गीकृत और संरक्षित किया गया है।

इन संरक्षित प्रजातियों पर तैयार 196 छियानवे पृष्ठों की रिपोर्ट में नौ मापदंडों पर प्रत्येक पौधे की विस्तृत जानकारी दी गई है ....शोध प्रतिष्ठान में परिवार का नाम, वैज्ञानिक नाम, स्थानीय नाम, स्थानिकवाद, संरक्षण की स्थिति, संख्या और स्थान, उपयोग और थंबनेल आकार की तस्वीर। संरक्षित 386 छियासी प्रजातियों के पास औषधीय गुण हैं... चंदन, रक्ताचंदन, रीठा, वज्रदंती, जटामासी, धोप, बद्रीतुलसी, सीता अशोक, मिथविश, सर्पसंध, ब्राह्मी, सालमपंजा (आर्किड), कालमेघ, और बुरहान...यह सभी संरक्षित प्रसिद्ध और लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों में से एक है...

रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य आम जनता के बीच पौधों की प्रजातियों के संरक्षण को बढ़ावा देना है ताकि plant blindness को समाप्त किया जा सके, आपको बता दें 1998 अठानवे में अमेरिकी वनस्पतिशास्त्री एलिजाबेथ शसलर और जेम्स वांडरसी द्वारा यह शब्द को निकाला गया....इस शब्द का अर्थ है...अपने आस पास के वातावरण में मौजूद पैड पोधों को देखने या NOTICE करने में असमर्थता

शायद 'प्लांट ब्लाइंडनेस' ही वो कारण है.....जो ज्यादातर संरक्षण प्रयासों के बावजूद.....पैड पोधों के संरक्षण की और किसीका का ध्यान नही जाता...यह जानने के बावजूद की ये एक बेहद ही महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका निभाते हैं...

7.

ISRO ने हासिल की एक और कामयाबी...भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को चाँद जैसी मिटटी बनाने का मिला पेटेंट..

18 मई को भारतीय पेटेंट कार्यालय ने इसरो को चाँद जैसी मिटटी बनाने का पेटेंट मिला है....इसरो ने पेटेंट के लिए 15 मई 2014 को आवेदन किया था। पेटेंट आवेदन करने की तारीख से 20 साल तक के लिए मान्य रहेगा।

इन वैज्ञानिकों ने खोजी थी तकनीक

चंद्रमा जैसी मिट्‌टी बनाने की तकनीक खोजने में इसरो के शोधकर्ता आई वेनुगोपाल, एसए कन्नन, शामराओ, वी चंद्र बाबू की बड़ी भूमिका थी। शोध टीम में तमिलनाडु की पेरियार यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ जियोलॉजी से एस अनबझगन, एस अरिवझगन, सीआर परमशिवम और एम चिन्नामुथु तिरुचिरपल्ली के नेशनल इस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मुथु कुमारन शामिल थे।

अमेरिका से खरीदना बहुत महंगा सौदा होता

इसरो के यूआर सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी) के डाइरेक्टर रह चुके एम अन्नादुरई ने न्यूज एजेंसी को बताया, ‘‘चांद और पृथ्वी की सतह बिल्कुल अलग है। इसलिए हमें लैंडर और रोवर की टेस्टिंग के लिए आर्टिफिशियल मिट्‌टी बनानी बड़ी, जो बिल्कुल चांद की सतह जैसी दिखती हो।

उन्होंने बताया कि अमेरिका से चांद की मिट्‌टी जैसे पदार्थ खरीदना बहुत महंगा सौदा साबित होता और इसरो को करीब 70 टन मिट्‌टी की जरूरत थी। इसलिए एक स्थायी समाधान निकालना जरूरी था।’’

तमिलनाडु के सालेम की मिट्‌टी का इस्तेमाल किया

अन्नादुरई ने बताया कि तमिलनाडु के सालेम में एनॉर्थोसाइट नाम की चट्‌टानें हैं, जो चांद पर मौजूद चट्‌टानों से मेल खाती हैं। वैज्ञानिकों ने पहले उन चट्‌टानों को पीसा फिर उसे बेंगलुरु लेकर आए। यहां पर इसे चांद की सतह के लिहाज से बदला गया और फिर टेस्टिंग साइट तैयार की। यह मिट्‌टी चांद की सतह से बिल्कुल मिलती है और अपोलो-16 के जरिए चांद से लाए गए सैंपलों से भी मेल खाती है।

चंद्रमा पर दो तरह की सतह है

चंद्रमा की सतह दो तरह की है। पहली को हाईलैंड कहते हैं। इसकी जैसी मिट्‌टी इसरो ने तैयार की थी। चंद्रमा का 83 प्रतिशत भाग हाईलैंड का ही है। इस सतह में एल्युमिनियम और कैल्शियम ज्यादा होता है।

दूसरी है मेयर....चंद्रमा पर दिखने वाले काले गड्‌ढों के भीतर की सतह को मेयर कहते हैं। इसमें आयरन, मैग्नीशियम और टाइटेनियम होता है। बहुत कम देश हैं, जिन्होंने चंद्रमा की हाईलैंड सतह को आर्टिफिशयल तौर पर अपने देश में बनाया है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. 28 मई 2020 को मनाई गयी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी और राष्ट्रवादी नेता वीर सावर कर की जयंती भारतीय स्वतंत्रता के सिपाही और राष्ट्रवादी नेता वीर सावरकर की 28 मई को 137वीं सैंतीस जयंती मनायी गयी.... भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महान क्रांतिकारियों में से एक विद्वान, अधिवक्ता और लेखक विनायक दामोदर सावरकर का नाम बड़े गर्व और सम्मान के साथ लिया जाता है. सावरकर को 'वीर' सावरकर के नाम से बुलाया जाता है...वीर सावरकर का जन्म महाराष्ट्र में नासिक जिले के भगूर ग्राम में 28 मई 1883 तिरासी को हुआ था

2. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार ने Lockdown के दौरान बांटे 19,100 करोड़ रुपये...यह राशि 24 मार्च 2020 से लेकर के अभी तक किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की गई है. इस योजना से फिलहाल देश के 9.55 करोड़ किसान परिवारों को लाभ हुआ है...केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने हाल ही में कहा कि इस दौरान सरकार ने किसानों को बीज उपलब्ध कराए गए हैं. इसके साथ ही रबी फसलों की खरीद भी जोर-शोर से जारी है. किसान इस बार बारिश के मौसम में 34.87 चौंतीस लाख हेक्टेयर जमीन पर चावल बोएंगे.

3. भारत और इज़राइल ने कोविड -19 के निदान हेतु संयुक्त अनुसंधान और विकास पर चर्चा की भारत और इज़राइल ने 25 मई को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक और बिग डेटा के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान और विकास पर चर्चा की. भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनके इज़राइल समकक्ष के दृष्टिकोण के अनुरूप दोनों देशों के बीच चर्चा हुई जिसमें दोनों देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग का विस्तार करने के लिए विचार-विमर्श किया गया.....इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले मार्च 2020 में कोविड -19 महामारी के प्रकोप के साथ-साथ इज़राइल में आपूर्ति लाइनों पर इसके संभावित प्रभाव के संबंध में भी चर्चा की थी.

4. हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण सभी निजी अस्पतालों को अपने अधिकार में ले लिया महाराष्ट्र में निरंतर बढ़ती कोरोना रोगियों की संख्या को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी निजी अस्पतालों को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया है. इन अस्पतालों के 80 फीसद बिस्तरों का उपयोग राज्य सरकार कोविड-19 के रोगियों के लिए कर सकती है. सरकार ने न सिर्फ निजी अस्पतालों को अपने अधिकार क्षेत्र में लिया है, बल्कि वहां काम करनेवाले चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ पर भी अत्यावश्यक सेवा कानून (मेस्मा) लागू करने का निर्णय किया है. यानी इन अस्पतालों के स्टाफ को अपनी सेवाएं देना अनिवार्य होगा. इसके अलावा कोविड और नॉन कोविड रोगियों के लिए इन अस्पतालों में लिया जानेवाला शुल्क भी सरकार ने निर्धारित कर दिया है. ताकि रोगियों को अस्पतालों की मनमानी से बचाया जा सके.

5. विश्व इस्पात संघ ने वर्ल्ड स्टील रिपोर्ट जारी की इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में क्रूड स्टील में 65 प्रतिशत पैंसठ की गिरावट आई है अप्रैल 2020 के दौरान, भारत का इस्पात उत्पादन 3.13 मिलियन टन था. अप्रैल 2019 में भारत ने 9.02 मिलियन टन का उत्पादन किया. मार्च 2020 में, भारत को मार्च 2019 की तुलना में 14 प्रतिशत इस्पात उत्पादन में गिरावट का सामना करना पड़ा. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक इस्पात उत्पादन में 13 प्रतिशत की गिरावट आई है. अप्रैल 2019 में, वैश्विक इस्पात उत्पादन 157.67 सत्तावन मिलियन टन था.

6. छतीसगढ़ ने हाल ही में लाख की खेती (Lac Farming) को कृषि गतिविधि घोषित करने के वन विभाग के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अनुसार, इस प्रकार का निर्णय राज्य के किसानों के लिये काफी लाभदायक साबित होगा. विदित हो कि राज्य में लाख की खेती को कृषि का दर्जा मिलने के बाद, लाख उत्पादन से जुड़े किसान भी अन्य किसानों की तरह सहकारी समितियों के माध्यम से आसान ऋण प्राप्त कर सकेंगे. छत्तीसगढ़, भारत में लाख के प्रमुख उत्पादक राज्यों में से एक है. छत्तीसगढ़ में लाख की खेती की अपार संभावनाएँ हैं

7. उत्तर प्रदेश में प्रवासी श्रमिकों के कौशल की पहचान करने और रोजगार प्रदान करने के लिए एक प्रवासन आयोग का गठन किया गया उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार ने घोषणा की है कि वह प्रवासी श्रमिकों के कौशल की पहचान करने और उन्हें रोजगार प्रदान करने के लिए एक प्रवासन आयोग का गठन करेगी। सरकार ने वापसी करने वाले श्रमिकों को बीमा और एक नौकरी सुरक्षा योजना प्रदान करने की भी योजना बनाई है। इस घोषणा के दौरान, 23 लाख श्रमिक और प्रवासी राज्य लौट आए हैं। प्रस्तावित प्रवासन आयोग प्रवासियों, उनके कौशल की जानकारी हासिल करेगा और प्रशिक्षण, रोजगार और ऋण सुविधाएं प्रदान करेगा।

8. भारतीय सेना में अफसर और महिला शांतिदूत उत्तराखंड की मेजर सुमन गवानी को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) सैन्य जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर के अवॉर्ड से सम्मानित करेगा यह पहली बार है जब किसी भारतीय शांति रक्षक को इस अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा. सैन्य पर्यवेक्षक सुमन यूएन मिशन के तहत दक्षिण सुडान में तैनात थीं. हाल ही में उन्होंने अपना मिशन पूरा किया है. उनके साथ ब्राजील की सैन्य कमांडर कर्ला मोंटेइरो डे कास्त्रो अराउजो को भी यह सम्मान मिला है. यह लगातार दूसरा साल है जब ब्राजील के शांतिदूत को यह सम्मान मिला है.

9. दक्षिण एशिया के लिए जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए विश्व बैंक के प्रैक्टिस मेनेजर के रूप में आभास झा को नियुक्त किया गया भारतीय अर्थशास्त्री आभास झा को विश्व बैंक ने दक्षिण एशिया के लिए जलवायु परिवर्तन और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए प्रैक्टिस मेनेजर के रूप में नियुक्त किया है। यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण समय पर की गई है जब भारत में पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और बांग्लादेश में अम्फान चक्रवात आया है। आभास झा दक्षिण एशिया क्षेत्र (SAR) की आपदा जोखिम प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन टीम का नेतृत्व और प्रोत्साहन करेंगे

10. 20 मई को मनाया जाता है विश्व मौसम विज्ञान दिवस (World Metrology Day) विश्व मेट्रोलोजी दिवस प्रत्येक साल 20 मई को मनाया जाता है. यह 17 देशों के प्रतिनिधियों द्वारा 20 मई 1875 पचहतर को मीटर कन्वेंशन के हस्ताक्षर की स्मृति में मनाया जाता है. इस वर्ष, विश्व मेट्रोलोजी दिवस 2020 की थीम ‘वैश्विक व्यापार के लिए माप’ है. उत्पादों के मानकों और नियमों को सुनिश्चित करने, निष्पक्ष वैश्विक व्यापार को सुविधाजनक बनाने में माप की भूमिका के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए इस थीम को चुना गया था.

11. एनकेसिंह की अध्यक्षता में हुई राजकोषीय एकीकरण रोडमैप पर 15 वें वित्त आयोग समिति की पहली बैठक 15 वें वित्त आयोग की पहली बैठक (XVFC) समिति की राजकोषीय समेकन रोडमैप पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से आयोजित की गई थी। नंद किशोर (एनके) सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने वित्तीय घाटे के विमुद्रीकरण पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के निर्णय की सिफारिश की है , क्योंकि आरबीआई सरकार का मुख्य ऋण प्रबंधक है। समिति ने वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी वृद्धि को -6% से 1% करने का अनुमान लगाया । नाममात्र जीडीपी FY2021-22 में 4-5% तक बढ़ जाएगा।

12. एके सीकरी ने किया भारतीय व्यक्ति विवाद समाधान केंद्र (IDRC) का उद्घाटन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एके सीकरी, इंटरनेशनल जज, सिंगापुर इंटरनेशनल कमर्शियल कोर्ट ने भारतीय विवाद समाधान केंद्र (IDRC) का उद्घाटन किया, जो ई-पंचाट के माध्यम से ऑफ़लाइन और ई-एडीआर सुविधा प्रदान करने के लिए अपने तरह के संस्थागत वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) केंद्र का पहला, ई- मध्यस्थता और ई-कॉन्सिलिएशन सॉफ्टवेयर पोर्टल प्रदान करता है ।

13. आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत केन्द्र सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ आवंटित किया गया सरकार ने आत्मनिर्भर अभियान के तहत मधुमक्खी पालन के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए । सरकार किसानों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है .

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।