(India This Week) Weekly Current Affair (2nd October - 8th October 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • रवि चोपड़ा समिति ने लगाया चारधाम सड़क परियोजना में अदालत के आदेश का उल्लंघन करने का आरौप....परिकल्पित टू-लेन राजमार्गों की प्रस्तावित चौड़ाई को लेकर उठा विवाद....
  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया RAISE 2020 पर पांच दिवसीय वैश्विक वर्चुअल शिखर सम्मेलन का उद्घाटन... इसका आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा आयोजित किया गया..
  • हाथरस कांड मामले में पुरे देश में लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद...योगी सरकार का कड़ा फैसला...आरोपियों के साथ-साथ पीड़ित पक्ष का भी कराया जायेगा पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट..जांच करने वाली पुलिस टीम भी नार्को टेस्ट रडार में.
  • केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, ट्रैक्टरों के लिए नए प्रदूषण मानक की समय सीमा बढ़ाई….नए मानक के ट्रैक्टर पर या अन्य निर्माण उपकरण वाहन पर मिल गई और मोहलत..
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भण्डार के आंकड़े किये जारी....25 सितंबर को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में आई गिरावट....इससे पहले हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहु्ंच गया था..
  • रिलायंस लाइफ साइंसेज ने विकसित की आरटी-पीसीआर किट... अब दो घंटे में मिलेगा Covid-19 टेस्ट का रिजल्ट,...रिलायंस के वैज्ञानिकों ने दिया इसे आर-ग्रीन किट नाम .
  • आर्टिफिशल इंटेलिजेंस सुपरकम्प्यूटिंग की वैश्विक दुनिया में परम सिद्धि भारत का सबसे तेज़ सुपरकम्प्युटर घोषित..सुपरकम्प्युटर के चलते साइबर सुरक्षा , शिक्षा , स्वास्थ्य , अंतरिक्ष , कृषि और संचार के क्षेत्र में तेज़ी आएगी.
  • भारत ने किया शौर्य मिसाइल के नए संस्करण का सफल परिक्षण.... शौर्य मिसाइल के आने से मौजूदा मिसाइस सिस्टम को और मजबूती मिलेगी..

खबरें विस्तार से:

1.

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने चारधाम सड़क परियोजना के निष्पादन में न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन का आरोप लगाया है...विवाद का कारण परिकल्पित टू-लेन राजमार्गों की प्रस्तावित चौड़ाई थी...दरहसल शीर्ष अदालत ने पिछले माह फैसला सुनाया था चारधाम परियोजना के तहत निर्मित सड़कों की चौड़ाई 5.5 मीटर होगी...पहाड़ की सड़कों के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की सिफारिश के आधार पर यह फैसला सुनाया गया...वहीँ दूसरी और भारत सरकार ने सड़क की चौड़ाई 10-12 मीटर मंज़ूर की थी....

जहाँ सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 700 कि.मी. की सड़क परियोजना को 10-मीटर चौड़ाई के साथ जारी रखने की अनुमति दी है...समिति के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है...

गोरतलब हो की चारधाम परियोजना का उद्देश्य चार हिंदू तीर्थस्थलों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को कनेक्टिविटी प्रदान करना है...इस परियोजना की अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रुपये है.....इस परियोजना को ईपीसी मोड के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है...बतातें चलें ईपीसी मोड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन मोड है...इस मोड के तहत, लागत पूरी तरह से सरकार द्वारा वहन की जाती है...

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में एक याचिका दायर की गई थी....याचिका में कहा गया है कि परियोजना ने पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 का उल्लंघन किया है...दूसरी ओर, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, राजमार्गों की लंबाई 100 कि.मी. से कम है और इसलिए इसे पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता नहीं है... परियोजना को 57 भागों में विभाजित किया गया है और प्रत्येक भाग 100 किमी से कम है। इस प्रकार, एनजीटी ने परियोजना को मंजूरी दे दी....

हालांकि, परियोजना को सर्वोच्च न्यायालय ने रोक दिया....शीर्ष अदालत ने रवि चोपड़ा समिति का गठन भी किया था ताकि पर्यावरण के उल्लंघन का आकलन किया जा सके....बतातें चलें की रवि चोपड़ा देहरादून पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं....

2.

Responsible AI for Social Empowerment (RAISE) 2020 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक आभासी वैश्विक शिखर सम्मेलन है...बतातें चलें RAISE 2020 नेताओं, नीति निर्माताओं, इनोवेटर्स और अन्य हितधारकों की एक रोमांचक लाइन-अप की मेजबानी की गई... जो पूरे डोमेन पर सार्वजनिक भलाई को बढ़ावा देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता में योगदान देते हैं...इसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, गतिशीलता और कृषि शामिल है....

RAISE 2020 पर यह वैश्विक आभासी शिखर सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा आयोजित किया गया...

जहाँ उद्घाटन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद, प्रख्यात वैश्विक एआई विशेषज्ञ प्रोफेसर राज रेड्डी, आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष मुकेश अंबानी मौजूद रहे......

वहीँ 6 अक्टूबर को प्रोफेसर राज रेड्डी ने भाषाई बाधाओं को दूर करने वाली वौइस्-इनेबल्ड एआई विकसित करने के बारे में एक सत्र भी आयोजित किया...

इस सत्र में इंफोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पाई और माइक्रोसॉफ्ट ग्लोबल के अध्यक्ष और कानूनी प्रमुख ब्रैड स्मिथ ने भी भाग लिया...

RAISE 2020 में एक समावेशी AI के निर्माण पर एक समर्पित सत्र हुआ...जो एक अरब से अधिक भारतीयों को सशक्त करने में सक्षम है...

3.

चर्चित हाथरस कांड मामले में आरोपियों के साथ-साथ पीड़ित पक्ष का भी पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराया जाएगा। सरकार ने इस बात का फरमान एसआईटी की पहली रिपोर्ट मिलने के बाद किया है। ऐसा पहली बार होगा कि किसी मामले की जांच करने वाली पुलिस टीम का भी पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराया जाएगा... बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले में अधिकारियों से बेहद नाराज़ है।

नार्को टेस्ट क्या है?

नार्को टेस्ट में सोडियम पेंटोथल नामक दवा का इंजेक्शन दिया जाता है, जो एक कृत्रिम निद्रावस्था या बेहोशी की अवस्था को प्रेरित करता है। इससे सम्बंधित व्यक्ति की कल्पना-शक्ति बेअसर हो जाती है, और यह आशा की जाती है की वह सत्य जानकारी उपलब्ध कराएगा/ कराएगी।

इस संदर्भ में “सच का प्याला” (ट्रुथ सीरम) के रूप में संदर्भित दवा का उपयोग सर्जरी के दौरान निश्चेतना के लिए बड़ी खुराक में किया जाता था एवं ऐसा कहा जाता है कि इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान खुफिया अभियानों के लिए भी किया जाता था।

पॉलीग्राफ या लाई डिटेक्टर टेस्ट: यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत शरीर में होने वाले कई संकेतकों की जांच की जाती है। इन शारीरिक संकेतकों में रक्तचाप, नाड़ी, श्वसन और त्वचा की चालकता को मापा जाता है और इसे रिकॉर्ड किया जाता है । इस परीक्षण के तहत व्यक्ति से कुछ सवाल पूछे जाते हैं और इन सवालों के जवाबों को रिकॉर्ड किया जाता है।

आम तौर पर देखा गया है की जब कोई व्यक्ति झूठ बोलता है तो उसमे कई शारीरिक प्रतिक्रियाएं होने लगती हैं। इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर व्यक्ति के हाव भाव और उसके शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज़ कर उसके झूठ का पता लगाया जाता है

हर इंसानी प्रतिक्रिया के लिए एक संख्यात्मक मान दिया जाता है ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि व्यक्ति सच कह रहा है, धोखा दे रहा है या अनिश्चित है।

पॉलीग्राफ टेस्ट पहली बार 19 वीं शताब्दी में इतालवी अपराधी साइसेर लोम्ब्रोसो के खिलाफ किया गया था, जिनकी पूछताछ के दौरान रक्तचाप में बदलाव को मापने के लिए एक मशीन का उपयोग किया था।

इन तरीकों में से कोई भी वैज्ञानिक तौर से 100 फीसदी कारगर साबित नहीं हुआ है, और चिकित्सा क्षेत्र में भी विवादास्पद बना हुआ है।

समाज के कमजोर वर्गों के लोग जो अपने मौलिक अधिकारों से अनभिज्ञ हैं और कानूनी सलाह लेने के काबिल नहीं हैं, के व्यक्तियों पर ऐसे परीक्षणों के परिणाम प्रतिकूल हो सकते हैं।

ऐसे परीक्षण को आने वाले वक़्त में गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मीडिया द्वारा भी इसका गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

कानूनी और संवैधानिक पहलू:

सेल्वी बनाम कर्णाटक राज्य मामले (2010) में, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि आरोपियों की सहमति के बिना कोई लाई डिटेक्टर परीक्षण नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा वो व्यक्ति जो इस टेस्ट के लिए हामी भी भरता है उसके पास उसका वकील होना चाहिए। इसके अलावा ऐसे व्यक्ति को पुलिस और वकील द्वारा इस टेस्ट के शारीरिक, मानसिक और कानूनी पक्ष भी पूरी तरह से बताये जाने चाहिए।

सर्वोच्च न्यायलय ने संविधान के अनुच्छेद 20 के भाग 3 का हवाला देते हुए ये स्पष्ट किया है की किसी भी व्यक्ति को खुद के खिलाफ गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

डी के बासु बनाम बंगाल राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायलय ने ये फैसला दिया की पॉलीग्राफ और नार्को पर्रीक्षण को बिना किसी सहमति के करना संविधान के अनुच्छेद 21 या जीवन के अधिकार का सरासर उल्लंघन है और ये अमानवीय है।

इसके अलावा ये व्यक्ति की निजता के भी अधिकार का उल्लंघन है जो की व्यक्ति के गरिमा पूर्ण जीवन के अधिकार के तहत ही आता है

इसके अलावा इसके तहत पेश किये गए सबूत या परिणाम भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1871 के तहत भी अमान्य हैं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने साल 1999 में पॉलीग्राफ टेस्ट के परीक्षण के लिए कुछ दिशा निर्देश जारी किये थे

जिनमे व्यक्ति की सहमति और परीक्षण की रिकॉर्डिंग आदि शामिल थे।

4.

केंद्र सरकार ने हाल ही में निर्माण उपकरण वाहनों और ट्रैक्टरों के लिए नए उत्सर्जन मानदंडों को अमल में लाने की समय सीमा अगले साल तक बढ़ा दी है...नए मानक के ट्रैक्ट पर या अन्य निर्माण उपकरण वाहन पर अभी और मोहलत मिल गई है....जो क्रमशः अप्रैल 2021 और अक्टूबर 2021 कर दी गयी है...आपको बतादें पहले ये मानदंड इसी अक्टूबर से लागू होने थे...

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की और से यह कहा गया कि मंत्रालय ने सीएमवीआर 1989 नवासी में संशोधन को अधिसूचित किया है जिसमें ट्रैक्टरों (टीआरईएम स्टेज- IV) के लिए उत्सर्जन मानदंडों के अगले चरण को लागू करने की तारीख को इस साल अक्टूबर से हटा कर अगले साल अक्टूबर कर दिया गया है....

वहीँ उन्होंने कहा कि ये संशोधन, अन्य मोटर वाहनों के उत्सर्जन मानदंड (जो बीएस के मानदंड से परिचालित है) और कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण वाहनों और ऐसे अन्य उपकरणों के लिए प्रदूषण मानकों के बीच भ्रम से बचाने का भी प्रयास करता है.....संशोधन में कृषि मशीनरी (कृषि ट्रैक्टर, पावर टिलर और संयुक्त हार्वेस्टर) और निर्माण उपकरण वाहनों के लिए अलग-अलग उत्सर्जन मानदंड शामिल हैं....आपको बता दें कि देश में चलने वाली गाड़ी या मशीनरी का एक उत्सर्जन मानक होता है. इसे सरकार तय करती है. इसका मुख्य उद्देश्य वाहनों द्वारा उत्सर्जित किये जाने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना होता है.....

वहीं हाल ही में देशभर में कार समेत अन्य वाहनों के लिए बीएस 6 उत्सर्जन मानक लागू किया गया है...अब सरकार की ओर से कृषि मशीनरी (ट्रैक्टर, पावर टिलर और कम्बाइंड हार्वेस्टर) और निर्माण उपकरण वाहनों के लिए अलग उत्सर्जन नियम लागू किया जाना है.

5.

25 सितम्बर, 2020 को खत्म हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3.017 बिलियन डॉलर की कमी के साथ 542बयालीस .021 अरब डॉलर तक पहुँच गया है...

वहीं भारत विश्व में सर्वाधिक विदेशी मुद्रा भंडार वाले देशों की सूची में 5वें स्थान पर है, जहाँ इस सूची में चीन पहले स्थान पर है....पिछले कुछ समय से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में काफी वृद्धि हुई है....दरअसल पिछले कुछ समय में लॉकडाउन के चलते भारत के आयात में भी काफी कमी आई है, जिसके कारण भारत की विदेशी मुद्रा की काफी बचत हुई है...

विदेशी मुद्रा भंडार पर एक नज़र - इसे फोरेक्स रिज़र्व या आरक्षित निधियों का भंडार भी कहा जाता है भुगतान संतुलन में विदेशी मुद्रा भंडारों को आरक्षित परिसंपत्तियाँ’ कहा जाता है और ये पूंजी खाते में होते हैं...ये किसी देश की अंतर्राष्ट्रीय निवेश स्थिति का एक महत्त्वपूर्ण भाग हैं....इसमें केवल विदेशी रुपये, विदेशी बैंकों की जमाओं, विदेशी ट्रेज़री बिल और अल्पकालिक अथवा दीर्घकालिक सरकारी परिसंपत्तियों को शामिल किया जाना चाहिये लेकिन इसमें विशेष आहरण अधिकारों , सोने के भंडारों और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की भंडार अवस्थितियों को शामिल किया जाता है...इसे आधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय भंडार या अंतर्राष्ट्रीय भंडार की संज्ञा देना ज्यादा सही है... ...

25 सितम्बर, 2020 को विदेशी मुद्रा भंडार की बात करें तो विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए) : $499.941 बिलियन

वहीं गोल्ड रिजर्व: $ 35 पैंतीस .999 बिलियन

आईएमएफ के साथ एसडीआर: $ 1.472 बिलियन

आईएमएफ के साथ रिजर्व की स्थिति: $ 4.604 बिलियन रही...

6.

वैसे तो आरटी-पीसीआर कोविड-19 के लिए सबसे सटीक परीक्षण हैं...लेकिन इस परीक्षण में एकमात्र कमी है की इसको परिणाम तैयार करने में छह से आठ घंटे लगते हैं...वहीँ आर-ग्रीन किट में केवल दो घंटे लगते हैं....

आर-ग्रीन किट कोविड-19 वायरस के आर-जीन, ई-जीन, एडेप जीन का पता लगा सकती है...यह आंतरिक नियंत्रण के रूप में एक्टिन जो एक प्रकार का प्रोटीन है उसका इस्तेमाल करती है... ICMR के मुताबिक परीक्षण किट 98.7% संवेदनशीलता और 98.8% विशिष्टता दिखाती है....

यह किट संचालित करने के लिए सरल है....RT-PCR किट को आमतौर पर COVID-19 वायरस के परीक्षण के लिए तीन से चार विशेषज्ञों की जरूरत होती है...इसके अलावा, परीक्षण करने की प्रक्रिया व्यापक है...आर-ग्रीन किट द्वारा इन कमियों को दूर किया गया है...

गोरतलब है की COVID-19 की मृत्यु दर वायरस के दो प्रोटीनों के उत्परिवर्तन से निकटता से संबंधित है..जो सरफेस ग्लाइकोप्रोटीन और NSP6 हैं....

क्लस्टर II देशों यानी यूएसए की उत्परिवर्तन दर क्लस्टर I देशों भारत और बांग्लादेश और क्लस्टर III देशों न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की तुलना में कम है....

इसी तरह क्लस्टर II देशों में मृत्यु दर क्लस्टर I और क्लस्टर III देशों की तुलना में ज्यदा होगी....वहीँ दूसरे शब्दों में, क्लस्टर I और क्लस्टर III देशों की रिकवरी और प्रसार क्लस्टर II देशों की तुलना में ज्यादा होगी....

7.

5 अक्टूबर, 2020 को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (C-DAC) ने सबसे बड़े HPC-AI सुपरकंप्यूटर को कमीशन किया गया। एचपीसी-एआई का पूर्ण स्वरुप High Performance Computing and Artificial Intelligence है...

PARAM-Sidhi ने वैश्विक AI सुपरकंप्यूटिंग रिसर्च और इनोवेशन में भारत को शीर्ष देशों में खड़ा कर दिया है....यह सुपरकंप्यूटर साइबर सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, अंतरिक्ष, कृषि और मोटर वाहन को गति देगा....यह MSMEs, स्टार्ट अप्स, एकेडेमिया और इंडस्ट्रीज के साथ साझेदारी को उत्प्रेरित करने में मदद करेगा...

बतातें चलें भारत 70 सुपर कंप्यूटरों का नेटवर्क बनाने के लिए राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन को लागू कर रहा है।

पहला सुपर कंप्यूटर जो राष्ट्रीय सुपर कंप्यूटिंग मिशन के तहत बनाया गया था, उसे “परम शिवाय” नाम दिया गया था....इसका निर्माण भी C-DAC द्वारा किया गया था...परम शिवाय ने 1,20,000 से अधिक गणना कोर और 833 टीफ्लॉप्स का उपयोग किया....यह TeaFlop कंप्यूटर की प्रोसेसिंग स्पीड का एक पैमाना है...आपको बतादें आईआईटी-खड़गपुर राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत सुपरकंप्यूटिंग सुविधा प्राप्त करने वाला पहला संस्थान था...

दुनिया में सुपर कंप्यूटर्स को उनकी गति के आधार पर रैंक किया गया है...जहाँ भारतीय सुपर कंप्यूटर प्रत्यूष 39वें स्थान पर है और 4,006 टीएफएलओपी / सेकंड की गति के तहत संचालित है....बतातें चलें यह भारतीय मौसम विज्ञान संस्थान में स्थित है....

वहीँ मिहिर जो 66वें स्थान पर है यह 2,808 TFlop/sec की गति से संचालित होता है...यह नेशनल सेंटर फॉर मीडियम रेंज वेदर फोरकास्टिंग में स्थित है...

InC1 को 206वीं रैंक पर रखा है....जो 1,413 TFlop/sec की गति से संचालित होता है...

वहीँ SERC जिसका मतलब है Supercomputer Education Research Centre at Indian Institute of Science...इस सुपर कंप्यूटर की रैंक 327 है और यह 1,244 TFlop/sec पर काम कर रहा है....

और वहीँ iDataPlex को 496 वीं रैंक पर रखा गया है...जिसकी 790 TFlop/sec की गति है...

वहीँ अगर दुनिया की बात करें तो दुनिया का सबसे तेज़ सुपर कंप्यूटर जापान का फुगाकू है....फुगाकू की परिचालन गति 415 पेटाफ्लॉप्स है.....पेटा 1015 (एक हजार मिलियन मिलियन) है...

आपको बतादें राष्ट्रीय सुपर कम्प्यूटिंग मिशन का लक्ष्य 70 से अधिक उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं के साथ विशाल सुपरकंप्यूटिंग ग्रिड स्थापित करके देश भर में फैले राष्ट्रीय अनुसंधान और विकास संस्थानों को विकसित करना है...यह मिशन सी-डैक द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है....

8.

भारत ने बीते 03 अक्टूबर को शौर्य मिसाइल के नए संस्करण का सफल परीक्षण किया...यह मिसाइल सतह से सहत पर मार करने वाली परमाणु क्षमता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल है....इस मिसाइल का परीक्षण तटीय ओडिशा के बालासोर में किया गया.

आपको बता दें इस मिसाइल की खास बात ये भी है कि यह संचालित करने में हल्की और आसान होगी....शौर्य मिसाइल के आने से मौजूदा मिसाइस सिस्टम को मजबूती मिलेगी....यह मिसाइल पनडुब्बी से लॉन्च की जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल का जमीनी रूप है...

यह मिसाइल 40 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने से पहले आवाज की छह गुना रफ्तार से चलती है...शौर्य मिसाइल के इस नए संस्करण के जरिए 800 किमी दूर स्थित लक्ष्य पर भी निशाना लगाया जा सकता है.

शौर्य मिसाइल के आने से मौजूदा मिसाइस सिस्टम को मजबूती मिलेगी और यह मिसाइल संचालित करने में हल्की और आसान होगी.....मिसाइल की रफ्तार इतनी तेज है कि सीमा पर बैठे दुश्मन के रडार को इसे डिटेक्टिव ट्रैक करने और इंटरसेप्ट करने के लिए 400 सेकेंड से भी कम का वक्त मिलेगा.

शौर्य मिसाइल को एक मिश्रित कनस्तर में संग्रहित किया जाता है, जो लंबे समय तक रखरखाव के बिना स्टोर करने और परिवहन करने के लिए बहुत आसान बनाता है. उड़ान भरने पर लगभग 50 किमी की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद यह मिसाइल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल की तरह उड़ने लगती है.

वहीँ इससे पहले, भारत ने 30 सितम्बर 2020 को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जो 400 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक टारगेट को ध्वस्त कर सकती है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने ओडिशा के बालासोर में जमीन से पीजे-10 प्रोजेक्ट के तहत मिसाइल का परीक्षण किया और मिसाइल को स्वदेशी बूस्टर के साथ लॉन्च किया गया....

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन

केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के मद्देनज़र पंजाब में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ आंदोलन (‘Pagri Sambhal Jatta’ Movement) फिर से सुर्ख़ियों में आया। पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन सरदार अजीत सिंह संधू (Sardar Ajit Singh Sandhu) की अगुवाई में हुआ था। गौर तलब है की सरदार अजित सिंह संधू महान क्रांतिकारी भगत सिंह के चाचा थे। अजित सिंह ने ग़दर आंदोलन में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।

साल 1879 में अंग्रेज़ों ने लायलपुर इलाके में निर्जन क्षेत्रों में बस्तियाँ के निर्माण के लिए चिनाब नदी से पानी खींच कर लायलपुर तक ले जाने के लिये अपर बारी दोआब नहर बनायी थी।यहां पर ये बता दे की लायलपुर अब पाकिस्तान में फैसलाबाद इलाके के तहत आता है। ब्रिटिश सरकार ने मुफ्त ज़मीन का वायदा कर जालंधर, अमृतसर और होशियारपुर में रहने वाले किसानों एवं पूर्व सैनिकों को इस इलाके में बसने का न्योता दिया

इसका असर ये हुआ की इन ज़िलों के कई किसान अपनी ज़मीन जायदाद छोड़कर इन इलाकों में बस गए। किसानों ने अपना खून पसीना बहाकर इस बंजर धरती को हरा भरा कर दिया। लेकिन इसके बाद अँगरेज़ अपनी बात से मुकर गए और उन्होंने किसानों को कई सहूलियतों मसलन ज़मीन और इसपर मालिकाना हक़ से वंचित कर दिया। कई कानून बना दिए गए जिससे किसानों में असंतोष पैदा हुआ और उन्होंने सरदार अजीत सिंह की अगुवाई में पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन का बिगुल बजा दिया

2. रामविलास पासवान का निधन

बीते 8 अक्टूबर, 2020 को केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री श्री रामविलास पासवान का निधन हो गया। वे 74 साल के थे । हाल ही में उनकी दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ह्रदय की सर्जरी हुई थी।

श्री रामविलास पासवान ने साल 2004 में लोक जनशक्ति पार्टी की नीव रखी थी । श्री पासवान भारत के मशहूर दलित नेताओं में से एक थे। वे खगड़िया के शाहरबनी गाँव से तालुक रखते थे । कानून की डिग्री लेकर उन्होंने बिहार सिविल सेवा परीक्षा पास की थी। उन्हें सिविल सेवा में पुलिस उपाधीक्षक के लिए चुना गया था । हालांकि उन्होंने यह पद छोड़कर राजनीति में अपना सफर शुरू किया। 1975 में लगे आपातकाल के दौरान पासवान को जेल जाना पड़ा था। पहली बार लोकसभा में वे जनता पार्टी के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए थे। उन्होंने आठ बार लगातार लोक सभा के संसद रहने का गौरव प्राप्त हुआ था। पासवान ने केंद्रीय मंत्री के रूप में सभी राष्ट्रीय गठबंधन के पांच प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया है। वन राशन कार्ड योजना उन्ही के नेतृत्व में लागू की जा रही थी।

3. स्टबल बर्निंग का मुकाबला करने के लिए बायो-डीकम्पोजर का छिड़काव

6 अक्टूबर, 2020 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की कि दिल्ली सरकार स्टबल बर्निंग का मुकाबला करने के लिए बायो-डीकम्पोजर का छिड़काव का उपयोग करेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा के वैज्ञानिकों ने एक कम लागत वाली तकनीक बायो-डीकंपोजर छिड़काव का आविष्कार किया गया है। दिल्ली सरकार 11 अक्टूबर से इस समाधान को अपनाएगी। वैज्ञानिकों ने बायो-डीकंपोजर कैप्सूल की खोज की है। फसल के अवशेषों पर छिड़काव करने पर ये कैप्सूल उन्हें खाद में बदल देंगे। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और उर्वरकों का उपयोग कम होता है। दिल्ली सरकार के अनुमान के अनुसार, इस विधि के माध्यम से 700 हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों के अवशेष का प्रबंधन करने के लिए केवल 20 लाख रुपये की आवश्यकता है। इस लागत में तैयारी, परिवहन और छिड़काव की लागत शामिल है।

पड़ोसी राज्यों से जलने वाले फसल अवशेष का दिल्ली के प्रदूषण में 44% योगदान है। फसल के बाद बचे हुए अवशेष को जलाना स्टबल बर्निंग कहलाता है। मानसून की फसल (खरीफ की फसल) के बाद अगली सर्दियों की फसल (रबी की फसल) बोने के लिए अपने खेत को तैयार करने के लिए किसानों के पास बहुत कम अवधि होती है। इस प्रकार, वे फसल के बाद फसल अवशेषों में को जला देते हैं। यह धुआं वायु के द्वारा पंजाब और हरियाणा राज्यों से दिल्ली तक पहुंचता है। दिल्ली में इमारतों के कारण यह धुआं यहीं रुक जाता है। इससे सर्दियों के दौरान स्मॉग होता है।

4. रवि चोपड़ा समिति : चारधाम परियोजना में सर्वोच्च न्यायालय आदेशों का उल्लंघन किया गया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त रवि चोपड़ा समिति ने आरोप लगाया है कि चारधाम सड़क परियोजना ने अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि चारधाम परियोजना के तहत निर्मित सड़कों की चौड़ाई 5.5 मीटर होगी। पहाड़ की सड़कों के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की सिफारिश के आधार पर यह फैसला सुनाया गया। इसके विपरीत, भारत सरकार ने सड़क की चौड़ाई 10-12 मीटर स्वीकृत की थी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 700 कि.मी. की सड़क परियोजना को 10-मीटर चौड़ाई के साथ जारी रखने की अनुमति दी है। समिति के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। चारधाम परियोजना का उद्देश्य चार हिंदू तीर्थस्थलों केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री को कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 12,000 करोड़ रुपये है।

5. कोझीकोड-वायनाड सुरंग परियोजना

5 अक्तूबर, 2020 को केरल के मुख्यमंत्री ने एक सुरंग परियोजना की शुरुआत की जो कोझीकोड को वायनाड से जोड़ेगी।7 किलोमीटर लंबी यह सुरंग जिसे देश की तीसरी सबसे लंबी सुरंग बताया जा रहा है, पश्चिमी घाट के संवेदनशील वनों एवं पहाड़ियों को काटकर बनाई जाने वाली 8 किलोमीटर लंबी सड़क का भाग है। इस सुरंग के समापन बिंदु मारिपुझा, थिरुवमबदी (Thiruvambady) ग्राम पंचायत (कोझिकोड) और कल्लडी (Kalladi), मेपाडी पंचायत (वायनाड) में हैं। वर्तमान में वायनाड पठार चार सड़कों के माध्यम से केरल के बाकी हिस्सों से जुड़ा हुआ है, इनमें से एक कोझीकोड-मैसूर (NH 766) के साथ 13 किमी. लंबी थमारास्सेरी घाट रोड (Thamarassery Ghat Road) है। यह सुरंग एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी क्योंकि थामरस्सेरी घाट सड़क अत्यधिक भीड़भाड़ वाली है और भारी मानसून के दौरान भूस्खलन से अवरुद्ध हो जाती है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के पास इस सड़क को चौड़ा करने का एक प्रस्ताव लंबित है।वन विभाग ने प्रस्तावित मार्ग की पहचान सदाबहार एवं अर्द्ध-सदाबहार

वन, दलदली भूमि एवं शोला वनों से युक्त अति संवेदनशील क्षेत्र के रूप में की है। यह क्षेत्र वायनाड और तमिलनाडु में नीलगिरि पहाड़ियों के बीच फैले एक हाथी कॉरीडोर का हिस्सा है।

6. सित्तवे बंदरगाह के संचालन पर सहमति

भारत और म्यांमार ने वर्ष 2021 की प्रथम तिमाही तक सित्तवे बंदरगाह के परिचालन को प्रारंभ करने पर सहमति जताई है। सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने म्यामांर की यात्रा के दौरान स्टेट काउंसलर ‘आंग सान सू की’ और कमांडर इन चीफ ऑफ डिफेंस सर्विसेज़ सीनियर जनरल मिन आंग हलिंग से मुलाकात की। भारतीय पक्ष ने उग्रवादी गुट के 22 कैडरों को सौंपने के लिये भी म्यांमार की प्रशंसा की। यह पहल मिज़ोरम और म्यांमार के बीच संपर्क को बेहतर बनाने में सहायक होगी। पूर्वोत्तर के राज्यों से संपर्क को और मजबूत करने हेतु भारत चाबहार बंदरगाह के तर्ज पर म्यांमार के सित्तवे बंदरगाह को विकसित कर रहा है। इस बंदरगाह की सहायता से मिज़ोरम और मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह बंदरगाह म्यांमार के रखाइन प्रांत में स्थित है।

जन आन्दोलन : पीएम मोदी ने लांच किया “COVID-19 उचित व्यवहार” अभियान 7 अक्टूबर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन आंदोलन शुरू किया। यह कोविड-19 उचित व्यवहार के लिए एक अभियान है। इस अभियान का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर से किया। यह अभियान एक उच्च-तीव्रता, कम लागत वाला अभियान है जो सामाजिक संदेश, मास्क पहनने के महत्व और हाथ स्वच्छता के महत्वपूर्ण संदेश प्रदान करता है। इसे आगामी

त्योहारी सीजन के मद्देनजर लॉन्च किया जा रहा है। लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान में वाल पेंटिंग, होर्डिंग्स, सरकारी परिसरों में इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड और सोशल मीडिया द्वारा जागरूकता फैलाना शामिल हैं। इसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक तक संदेश पहुंचाना है।

7. पर्यटन संजीवनी योजना

असम में कोरोना वायरस महामारी से प्रभावित हुए पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिये असम सरकार ने पर्यटन संजीवनी योजना (Paryatan Sanjeevani Scheme) की घोषणा की है, जिसके तहत पर्यटन उद्योग के इच्छुक उद्यमियों को 1 लाख रुपए से 20 लाख रुपए तक की ऋण राशि प्रदान की जाएगी। इस संबंध में घोषणा करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में पर्यटन से जुड़े उद्यमियों का सशक्तीकरण करना है, ताकि राज्य के पर्यटन उद्योग को एक नई दिशा दी जा सके। इस योजना के हिस्से के रूप में लाभार्थियों को कुल पाँच वर्ष की अवधि के लिये ऋण प्रदान किया जाएगा, जबकि उन्हें शुरुआती एक वर्ष में किसी भी प्रकार का ब्याज का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। पहले वर्ष का ब्याज भुगतान स्वयं सरकार द्वारा किया जाएगा। मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने ‘पर्यटन सारथी’ नाम से एक योजना का भी उद्घाटन किया है, जो कि असम पर्यटन के बारे में संपूर्ण जानकारी जैसे- बुकिंग, टूर पैकेज और होटल आदि की सूचना प्रदान करेगी।

8. डेयरिंग सिटीज़ 2020

दिल्ली सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 7 अक्तूबर, 2020 को प्रतिष्ठित ’डेयरिंग सिटीज़ 2020’ (Daring Cities 2020) सम्मेलन में बोलने वाले दुनिया भर के पाँच नेताओं में से एक होंगे।इस सम्मेलन को जर्मन सरकार के समर्थन से ICLEI और जर्मनी के सिटी ऑफ बॉन (City of Bonn) द्वारा आयोजित किया जा रहा है।

आईसीएलईआई - स्थिरता के लिये स्थानीय सरकारें (ICLEI – Local Governments for Sustainability):

यह स्थानीय एवं क्षेत्रीय सरकारों का एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसने स्थायी विकास के लिये अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखा है।

इस संगठन की स्थापना वर्ष 1990 में की गई थी। पूर्व में इसे स्थानीय पर्यावरण पहल के लिये अंतर्राष्ट्रीय परिषद (International Council for Local Environmental Initiatives) के रूप में जाना जाता था। इस संगठन की स्थापना सितंबर, 1990 में संयुक्त राष्ट्र में 43 देशों की 200 से अधिक स्थानीय सरकारों ने एक सतत् भविष्य के लिये स्थानीय सरकारों की विश्व काॅन्ग्रेस (World Congress of Local Governments for a Sustainable Future) के उद्घाटन सम्मेलन की गई थी। विशेषकर COVID-19 महामारी के संदर्भ में ‘डेयरिंग सिटीज़’ जलवायु आपातकाल से निपटने वाले शहरी नेताओं के लिये जलवायु परिवर्तन पर एक वैश्विक मंच है।

9. बोंगोसागर

03 अक्तूबर, 2020 से भारतीय नौसेना और बांग्लादेशी नौसेना के बीच द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'बोंगोसागर' (BONGOSAGAR) के दूसरे संस्करण का आयोजन बंगाल की खाड़ी में शुरू हो रहा है।

इसका उद्देश्य व्यापक समुद्री अभ्यास एवं संचालन के माध्यम से अंतर-संचालन एवं संयुक्त परिचालन कौशल विकसित करना है।

बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास का पहला संस्करण वर्ष 2019 में आयोजित किया गया था। बोंगोसागर नौसैनिक अभ्यास के इस सत्र में दोनों देशों की नौ-सेनाओं के पोत सतह युद्ध अभ्यास, नाविक कला विकास (Seamanship Evolutions) और हेलीकॉप्टर संचालन में भाग लेंगे। भारतीय नौसेना की तरफ से स्वदेशी तौर पर निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर कार्वेट (Anti-Submarine Warfare Corvette) आईएनएस किल्टान (INS Kiltan) और स्वदेश में ही निर्मित गाइडेड-मिसाइल कार्वेट (Guided-Missile Corvette) आईएनएस खुकरी (INS Khukri) इसमें भाग ले रहे हैं। वहीं बांग्लादेशी की तरफ से बीएनएस अबू बक्र (BNS Abu Bakr) और बीएनएस प्रेटॉय (BNS Prottoy) इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।