(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (19th September - 25th September 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक, 2020 किया पारित...इस विधेयक के तहत डोगरी, कश्मीरी और हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाएँ होगी...
  • किसान बिलों पर हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने गेहूं समेत 6 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा की... सरकार ने गेहूं, चना, जौ, सरसों, मसूर और रेपसीड पर एमएसपी बढ़ाई....
  • राज्यसभा में पास हुआ बैंकिंग विनियमन संशोधन विधेयक-2020..इस विधेयक के ज़रिये किया गया 1949 उनचास के बैंकिंग विनियमन अधिनियम में संशोधन..इसमें बैंकों के लाइंलेंस, प्रबंधन और संचालन जैसे विभिन्‍न पहलुओं का विवरण उपलब्‍ध कराया गया है
  • राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना के तहत ICMR द्वारा कृतज्ञ हैकाथॉन का किया गया शुभारंभ.... देश भर के किसी भी विश्वविद्यालय , तकनीकी संस्थान के छात्र, संकाय और उद्यमी, समूह बनाकर इस कार्यक्रम में आवेदन कर भाग ले सकते हैं....
  • मौजूदा सत्र में, केंद्र सरकार ने लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2020 किया पेश... इसके जरिए औद्योगिक क़ानूनों में बदलाव का प्रस्ताव किया गया...
  • सेना को मिली नई आसमानी ताकत, स्वदेशी ड्रोन 'अभ्यास' का किया सफल परीक्षण... भारतीय सशस्त्र बलों को अभ्यास लड़ाकू ड्रोन का मिलेगा काफी लाभ...
  • 2022 में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को कमीशन किया जायेगा… इस रिएक्टर का निर्माण तमिलनाडु के चेन्नई में कलपक्कम परमाणु ऊर्जा स्टेशन में किया जा रहा है….

खबरें विस्तार से:

1.

विरोध के बावजूद ध्वनिमत से जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक, 2020 पारित किया गया...इसमें पंजाबी और गोजरी को शामिल न किये जाने के कारण इसका विरोध किया जा रहा है... इससे पहले, मतलब धारा 370 को निरस्त करने से पहले उर्दू और अंग्रेजी राज्य की आधिकारिक भाषा थी। अब हिंदी, डोगरी और कश्मीरी को भी जोड़ा गया है। इस अनुमोदन तक, डोगरी और कश्मीरी भारत में किसी भी राज्य में आधिकारिक भाषा नहीं थी, हालांकि उन्हें आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। इन दोनों के अलावा, सिंधी अभी तक किसी राज्य में एक आधिकारिक भाषा नहीं है, हालांकि इसे आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया है...

अनुच्छेद 343 तैंतालीस : यह अनुच्छेद कहता है कि देवनागरी लिपि में संघ की आधिकारिक भाषा हिंदी होगी। यह भी कहता है कि अंकों का उपयोग अंतर्राष्ट्रीय रूप में किया जाएगा इस अनुच्छेद में कहा गया है कि संविधान के प्रारंभ के 15 वर्षों तक, अंग्रेजी भाषा आधिकारिक भाषा के रूप में बनी रहेगी। 15 वर्षों के बाद, आधिकारिक भाषा के अलावा हिंदी का उपयोग करने के राष्ट्रपति के आदेश द्वारा इसमें परिवर्तन किया जा सकता है। आज भारत सरकार आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी और अंग्रेजी दोनों का उपयोग करती है।

आठवीं अनुसूची : भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 अनुसूचित भाषाओं को राज्यों की आधिकारिक भाषाओं के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। राज्यों को अनुसूचित भाषाओं से अपनी आधिकारिक भाषा चुनने के लिए बाध्य नहीं किया गया है।

संसदीय कार्यवाही : संविधान के अनुसार संसदीय कार्यवाही हिंदी या अंग्रेजी में की जायेगी। संविधान व्यक्ति को अपनी मातृभाषा में स्वयं को व्यक्त करने की भी अनुमति देता है अगर व्यक्ति हिंदी या अंग्रेजी में व्यक्त करने में असमर्थ है। हालांकि, इसके लिए सदन के स्पीकर की अनुमति की आवश्यकता होती है।

वहीँ संविधान कहता है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में कार्यवाही अंग्रेजी में होगी। हालाँकि, कुछ उच्च न्यायालयों ने राष्ट्रपति से सहमति के बाद हिंदी का विकल्प प्राप्त कर लिया है। इसमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार शामिल हैं। संसद के पास कानून द्वारा इसे बदलने की शक्तियां हैं। हालाँकि, अब तक ऐसा नहीं किया है...

2.

केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के रबी सीजन के 6 रबी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की घोषणा की है…...गोरतलब है की भारत में रबी फसलें उन कृषि फसलों को कहा जाता है जिन्हे सर्दी में बोया जाता है और बसंत में काट लिया जाता है..रबी की फसलों में गेंहू ,जौ, सरसों अदि की फसलें आती हैं...

गेंहू ,जौ ,चना ,मसूर ,सूरजमुखी ,अलसी और सरसों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया गया हैं....हालांकि साल 2020 -21 के मुकाबले बढाई गयी कीमतों के मुकाबले ये बढ़ोत्तरी कम मानी जा रही है। गेंहू के न्यूनतम समर्थन मूल्य में महज़ 6 फीसदी की बढ़त की गयी जो पिछले 11 सालों में की गयी सबसे कम बढ़ोत्तरी है। एम.एस.पी में की गयी वृद्धि इस सिद्धांत पर आधारित है की पूरे भारत में उत्पादन की लागत का डेढ़ गुना एम एस पी होनी चाहिए जैसा की संघीय बजट 2018 -19 में घोषणा की गयी थी...एम एस पी में बढ़ोत्तरी का एलान ऐसे वक़्त पर किया गया है जब पूरे देश के किसान सड़कों पर है।

नए कृषि सुधार से दिक्कतें

किसानों ने हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित किये गए तीन विधेयकों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया इन तीन बिलों में पहला है किसानों से संबंधित कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक, 2020, दूसरा है कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और तीसरा है आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 संक्षेप में समझें तो इन विधेयकों का मकसद कृषि व्यापार में सरकार का दखल ख़त्म करके ऐसे व्यापार क्षेत्रों का गठन करना है जो बिचौलियों से मुक्त हों और जिन पर किसी भी तरह का सरकारी कर न लगे...

किसानो की माने नयी व्यवस्था में निजी कंपनियों को ज़्यादा फायदा मिलेगा क्यंकि कृषि उत्पादों के दाम बाज़ार के ज़रिये तय किये जाएंगे और सरकारी दखल ख़त्म होने से कम्पनिया किसानों को दाम कम करने के लिए मज़बूर करेंगी।

कई ऐसी फसलें जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य आधारित खरीद का वज़ूद नहीं है वहाँ किसानों की उपज का दाम लगातार गिरा है। सरकारी दखल के बगैर कई नकदी फसलें जैसे कपास के दामों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है।

खेती में लागत दाम बढ़ने के बावजूद किसानों को बाज़ार से अपनी उपज के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। किसानों का कहना है की सरकार का दखल ख़त्म होना और बाज़ार का कीमतें निर्धारित करना किसी भी तरह किसानों के हित में नहीं है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य

न्यूनतम समर्थन मूल्य वो मूल्य है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है। केंद्र सरकार कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP-Commission for Agricultural Costs and Prices) की सिफारिश पर कुछ फसलों के बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है. इससे किसानों को यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाजार में उनकी फसल की कीमतें गिरने के बावजूद सरकार उन्हें तय मूल्य देगी. इसके जरिए सरकार उनका नुकसान कम करने की कोश‍िश करती है.हालांकि, सभी सरकारें किसानों को इसका लाभ नहीं देतीं. इस वक्त बिहार और मध्य प्रदेश में सबसे बुरा हाल है, जहां किसानों को एमएसपी नहीं मिल पा रहा है. वैसे भी शांता कुमार समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि महज 6 फीसदी किसानों को ही एमएसपी का लाभ मिलता है. यानी 94 फीसदी किसान मार्केट पर डिपेंड हैं.

एमएसपी तय करने का आधार

कृषि लागत और मूल्य आयोग न्यूनतम समर्थन मूल्य की सिफारिश करता है वह कुछ बातों को ध्यान में रखकर दाम तय किया जाता है...जैसे उत्पाद की लागत क्या है, फसल में लगने वाली चीजों के दाम में कितना बदलाव आया है, बाजार में मौजूदा कीमतों का रुख, मांग और आपूर्ति की स्थ‍िति, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्थ‍ितियां कैसी है,

फसल लागत नि‍कालने के फार्मूले,

ए-2: कि‍सान की ओर से किया गया सभी तरह का भुगतान चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्‍तु की शक्‍ल में, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च जोड़ा जाता है.

ए2+ एफएल: इसमें ए2 के अलावा परि‍वार के सदस्‍यों द्वारा खेती में की गई मेहतन का मेहनताना भी जोड़ा जाता है.

सी-2 (Comprehensive Cost): यह लागत ए2+एफएल के ऊपर होती है. लागत जानने का यह फार्मूला किसानों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इसमें उस जमीन की कीमत (इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कॉस्‍ट) भी जोड़ी जाती है जिसमें फसल उगाई गई. इसमें जमीन का कि‍राया व जमीन तथा खेतीबाड़ी के काम में लगी स्‍थायी पूंजी पर ब्‍याज को भी शामि‍ल कि‍या जाता है. इसमें कुल कृषि पूंजी पर लगने वाला ब्याज भी शामिल किया जाता है. गोरतलब है की भारत में खाद्यान्नों, दलहानी और तिलहनी फसलों और नकदी फसलों की बुआई के मुख्यतः तीन सीजन होते हैं, खरीफ, रबी और ग्रीष्म...इसमें रबी सीजन सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में कुल कृषि उत्पादन में आधी हिस्सेदारी रबी सीजन की होती है...

3.

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 जो कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 उनचास में संशोधन है, इसे संसद में पारित किया गया है। यह विधेयक बैंकिंग नियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2020 की जगह लेगा जिसे 26 जून, 2020 को प्रख्यापित किया गया था...

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

यह विधेयक आरबीआई को शक्ति प्रदान करता है कि बिना किसी स्थगन के पुनर्निर्माण या समामेलन के लिए योजना शुरू की जा सके...विधेयक यह प्रावधान करता है कि किसी भी व्यक्ति के पास सहकारी बैंक द्वारा जारी किए गए शेयरों के समर्पण के लिए भुगतान की मांग करने की शक्ति नहीं होगी..इस विधेयक के अनुसार, एक सहकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा निर्दिष्ट किए जाने तक अपनी शेयर पूंजी को वापस लेने या घटाने का हकदार नहीं होगा...इस विधेयक में कहा गया है कि, सहकारी बैंक उस व्यक्ति को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त नहीं कर सकते हैं, जो दिवालिया हो या नैतिक अपराध में शामिल अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो...इस विधेयक के अनुसार, RBI एक सहकारी बैंक या सहकारी बैंकों के एक वर्ग को अधिसूचना के माध्यम से अधिनियम के कुछ प्रावधानों से छूट दे सकता है...

विधेयक के तहत प्रतिबंध

जिन पर यह विधेयक लागू नहीं होगा : प्राथमिक कृषि साख समितियां और सहकारी समितियां जिनका प्राथमिक व्यवसाय कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्तपोषण है...वहीँ की सहकारी समितियाँ अपने नाम में ‘बैंक’, ‘बैंकर’ या ‘बैंकिंग’ शब्दों का उपयोग नहीं कर सकती हैं...

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 उनचास

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 उनचास भारत में सभी बैंकिंग फर्मों को विनियमित करने वाला एक कानून है। यह 1949 उनचास में पारित किया गया था और 16 मार्च 1949 उनचास से लागू हुआ था। यह उस रूपरेखा को निर्धारित करता है जिसके तहत भारत में वाणिज्यिक बैंकिंग की देखरेख और विनियमन किया जाता है। यह कंपनी अधिनियम, 1956 छप्पन का पूरक है...यह अधिनियम RBI को बैंकों को लाइसेंस देने, संचालन को विनियमित करने और बोर्डों और प्रबंधन की नियुक्ति का देखरेख करने का अधिकार देता है...

4.

कृतज्ञ हैकाथॉन महिला अनुकूल उपकरणों पर विशेष जोर देगा...साथ ही साथ कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ाने के लिए संभावित प्रौद्योगिकी समाधान को भी बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया है...बतातें चलें की देश भर के किसी भी विश्वविद्यालय , तकनीकी संस्थान के छात्र, संकाय और नवप्रवर्तक , उद्यमी, समूह बनाकर इस कार्यक्रम में आवेदन कर भाग ले सकते हैं.

इस हैकाथॉन का उद्देश्य कृषि मशीनीकरण में नवाचार को बढ़ाकर कृषि उत्पादकता और लाभजनकता को बढ़ाना है..यह कार्यक्रम छात्रों, संकायों, उद्यमियों और अन्य हितधारकों को भारत में कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए अपने नवीन दृष्टिकोण और तकनीकी समाधान प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान कर रहा है...हैकाथॉन उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा के अनुरूप है जो समानता प्रदान करती है और समावेश को सुनिश्चित करती है जैसा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का लक्ष्य है।

बतातें चलें की राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना 2019 में शुरू की गई थी...इस परियोजना की कुल लागत 1100 करोड़ रुपये है....विश्व बैंक इस परियोजना को वित्त पोषण सहायता प्रदान कर रहा है... भारत सरकार और विश्व बैंक के बीच फंड का हिस्सा 50:50 के अनुपात में है.... यह कार्यक्रम आईसीएमआर और भाग लेने वाले कृषि विश्वविद्यालयों का समर्थन करता है। इस परियोजना के तहत कृषि, बागवानी, मत्स्य और वानिकी में चार साल की डिग्री एक पेशेवर डिग्री मानी जाएगी...राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय को डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड किया गया।यह पूर्वी और उत्तर पूर्व भारत में हरित क्रांति लाने के लिए सरकार के प्रयास को मजबूत करने के लिए किया गया था...भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) की स्थापना बरही, झारखंड और असम में की जा रही है....

5.

मौजूदा सत्र में, केंद्र सरकार ने लोकसभा में औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक, 2020 पेश किया.

इसके जरिए औद्योगिक क़ानूनों में बदलाव का प्रस्ताव किया गया है. इसके अलावा सरकार ने दो और विधेयक - सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य शर्त संहिता विधेयक, 2020 - भी लोकसभा में पेश किया.

ग़ौरतलब है कि सरकार मौजूदा 44 श्रम कानूनों की जगह सिर्फ 4 कानून रखना चाहती है। इसमें वेतन संहिता को पहले ही संसद की मंजूरी मिल चुकी है।

इस संहिता में क्या-क्या नए प्रस्ताव हैं?

इस विधेयक में ‘निश्चित अवधि के रोज़गार’ की बात कही गई है। विधेयक के लागू होने के बाद कंपनियाँ श्रमिकों को प्रत्यक्ष तौर पर एक निश्चित अवधि के लिये अनुबंधित कर सकेंगी।

‘निश्चित अवधि के रोज़गार’ के तहत कंपनियों को अनुबंधित कर्मचारियों को निकालने से पहले किसी तरह की कोई नोटिस देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. साथ ही, छँटनी किए जाने पर किसी तरह के मुआवज़े का भुगतान भी नहीं किया जाएगा।

किसी ऐसी कंपनी, जिसमें 300 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हों, को छँटनी करने से पहले सरकार की इजाज़त लेनी जरूरी होगी। हालाँकि, कर्मचारियों की इस संख्या में सरकार एक अधिसूचना के जरिए बदलाव कर सकती है।

इस विधेयक के मुताबिक किसी औद्योगिक प्रतिष्ठान में कार्यरत कोई भी श्रमिक 60 दिन के एडवांस नोटिस के बिना हड़ताल पर नहीं जा सकता. साथ ही, अगर अधिकरण या राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण के समक्ष मामले पर कार्यवाही चल रही हो तो इस अवधि के दौरान और ऐसी कार्यवाही खत्म होने के साठ दिनों के बाद भी श्रमिक हड़ताल पर नहीं जा सकता।

ऐसे विवाद जिनमें दंड के रूप में जुर्माने का प्रावधान है, अदालतों पर बोझ कम करने के लिये उन पर फैसला लेने का अधिकार सरकारी अधिकारियों को दिया जाएगा।

विधेयक के आलोचक क्या कहते हैं?

विधेयक के आलोचकों का कहना है कि नए प्रावधानों की वजह से श्रमिकों के अधिकार काफी संकुचित हो जाएंगे।

इस विधेयक में जिस तरह के प्रावधान किए गए हैं उनके मुताबिक लगभग 15 फ़ीसदी कंपनियां ही इसके दायरे में आएंगी.

इसका मतलब यह हुआ कि 80 से 85 फ़ीसदी कंपनियां इस कानून के दायरे से बाहर रह जाएंगी. इस तरह श्रम सुधार का असल मकसद पूरा होता नहीं दिख रहा है.

मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक अगर किसी कंपनी में 100 से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे हैं तो कंपनी द्वारा छंटनी करने के लिए उसे सरकार से अनुमति लेनी होती है. लेकिन अगर इसकी जगह नया प्रावधान आता है तो यह नियम सिर्फ ऐसी कंपनियों पर लागू होगा, जिसमें 300 से अधिक श्रमिक काम कर रहे हों. ऐसे में श्रमिकों की असुरक्षा बढ़ सकती है।

इसके अलावा, हड़ताल को लेकर जो नए प्रावधान जोड़े गए हैं इसकी वजह से श्रमिक अपना विरोध भी प्रभावी ढंग से नहीं दर्ज करा पाएंगे और कंपनियों की मनमानी बढ़ सकती है।

नए श्रम क़ानूनों की ज़रूरत क्यों है?

भारत में ढेर सारे श्रम कानूनों के चलते जटिलता बढ़ गई है और इसके कारण औद्योगिक विकास में बाधा पैदा होने लगी है। साथ ही, इससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस प्रभावित होता है.

तमाम अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सख़्त कानूनों के चलते रोजगार वृद्धि में कमी देखी जा रही है। मौजूदा श्रम कानून रोजगार की सुरक्षा की बात तो करते हैं लेकिन रोजगार को प्रोत्साहित करने के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं। यही कारण है कि टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है और श्रम प्रधान उद्योगों से उद्यमियों का मोहभंग हो रहा है।

कौशल विकास में उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जबकि मौजूदा श्रम क़ानूनों के कारण कंपनियां ज़्यादातर कॉट्रैक्ट वर्कर्स को ही काम देती हैं। ऐसे में, ये कंपनियां कॉट्रैक्ट वर्कर्स के कौशल विकास और प्रशिक्षण में बहुत ज़यादा रूचि नहीं लेती हैं।

आगे क्या किया जाना चाहिए?

श्रम कानूनों को कुछ इस तरह से बनाना होगा कि 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े, क्योंकि सख्त श्रम कानूनों के कारण औद्योगिक विकास नहीं हो पाता। ऐसे में, रोज़गारहीनता बढ़ जाती है। इसके अलावा हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि श्रमिक हित पर कोई बुरा प्रभाव न पड़े.

6.

बतातें चलें की ABHYAS-HEAT एक हवाई वाहन है...यह ट्विन अंडरस्लंग बूस्टर का उपयोग करता है....ABHYAS को DRDO के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया था। यह एक छोटी गैस टरबाइन द्वारा संचालित है और इसमें MEMS आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम है। इसमें नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिए फ्लाइट कण्ट्रोल कंप्यूटर भी है…इस परीक्षण के दौरान, 5 किमी की ऊंचाई, परीक्षण वाहन की 2g टर्न क्षमता और 0.5 मैक की गति प्राप्त की गई…आपको बतादें इस परियोजना की लागत 150 मिलियन रुपये है।

गोरतलब है की ABHYAS-HEAT को DRDO के ‘Lakshya’ को अपनाकर विकसित किया गया था..‘लक्ष्य’ डीआरडीओ द्वारा विकसित एक उच्च गति टारगेट ड्रोन प्रणाली है..ABHYAS का पहला प्रक्षेपण 2012 में चित्रदुर्ग एयरोनॉटिकल टेस्टिंग रेंज में हुआ था...

एक नज़र रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) पर इसकी स्थापना 1958 अट्ठावन में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। गोरतलब है की DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 बावन प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है...

7.

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड और इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च द्वारा किया जा रहा है...यह रिएक्टर एक बार चालू होने के बाद राष्ट्रीय ग्रिड में 500 मेगावाट बिजली जोड़ेगा...आपको बता दें इस रिएक्टर का निर्माण तमिलनाडु के चेन्नई में कलपक्कम परमाणु ऊर्जा स्टेशन में किया जा रहा है.. गोरतलब है की रिएक्टर को 2012 में चालू करने की योजना थी लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण इसमें देरी हो रही है।

एक नज़र में समझते है रिएक्टर की विशेषताओं को

यह रिएक्टर एक पूल-प्रकार का रिएक्टर है जिसका कोर तरल (पानी) में डूबा हुआ है...रिएक्टर में नकारात्मक शून्य गुणांक होता है इसलिए यह उच्च स्तर की परमाणु सुरक्षा प्रदान करता है...रिएक्टर के अधिक गर्म होने पर विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की गति अपने आप कम हो जाती है, यह तापमान और शक्ति के स्तर को कम करता है...इस रिएक्टर में तरल सोडियम कूलैंट है... इसे होमी भाभा ने भारत के तटीय क्षेत्रों के मोनाजाइट रेत में पाए जाने वाले थोरियम और यूरेनियम के भंडार का उपयोग करके शुरू किया था। इस में ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत में थोरियम भंडार का उपयोग किया जाता है। इस कार्यक्रम में तीन स्टेज शामिल हैं

पहला स्टेज- प्रेशराइज्ड हैवी वाटर रिएक्टर, दूसरा स्टेज - फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और तीसरा स्टेज थोरियम बेस्ड रिएक्टर....आपको बतादें मोजूदा वक्त में भारत अपने कार्यक्रम के तीसरे चरण में है....

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. भारत सरकार ने MSME क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए पांच टास्क फोर्सेज का गठन किया

23 सितंबर, 2020 को भारत सरकार ने देश में एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पांच अलग-अलग प्रमुख क्षेत्रों में पांच टास्क फोर्स का गठन किया। यह टास्क फ़ोर्स सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को भविष्य के लिए तैयार करेंगे। यह देश को एक प्रमुख निर्यातक बनाने में ठोस रणनीति बनाएगा। यह टास्क फोर्स को एक महीने के लिए काम करेंगे और इनका निर्माण विभिन्न मंत्रालयों के तहत किया गया है। पहली टास्क फ़ोर्स उद्योग 4.0 (Industry 4.0) है। दूसरी टास्क फ़ोर्स ‘निर्यात संवर्धन और आयात निम्नीकरण’। तीसरी टास्क फ़ोर्स री-इंजीनियरिंग पर चौथी टास्क फोर्स प्रौद्योगिकी केंद्रों को एकीकृत करने के लिए और पांचवां टास्क फोर्स LEAN, ZED (जीरो डिफेक्ट एंड ज़ीरो इफेक्ट) जैसी कई आधुनिकीकरण योजनाओं पर कार्य करेगी।

2. भारत ने पृथ्वी II मिसाइल का सफल परीक्षण किया

भारत ने हाल ही में पृथ्वी II मिसाइल का सफल परीक्षण किया, जो स्वदेशी रूप से विकसित की गयी है। यह परीक्षण ओडिशा की चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में आयोजित किया गया। इस मिसाइल ने 350 किमी की दूरी तय की। यह परीक्षण नियमित अभ्यास का हिस्सा था। मिसाइल के प्रक्षेपवक्र को डीआरडीओ के इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री स्टेशनों द्वारा ट्रैक किया गया था। प्रक्षेपण गतिविधि सेना के सामरिक बल कमान और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन के वैज्ञानिकों द्वारा की गई थी।

3. अन्‍त्‍योदय दिवस

25 सितम्बर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म वर्षगाँठ के उपलक्ष्य पर देश भर में अन्तोदय दिवस के रूप में मनाया जाता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, इतिहासकार तथा राजनीतिक कार्यकर्ता थे। अन्‍त्‍योदय का अर्थ समाज के कमजोर वर्गों को ऊपर उठाना है। इस अवसर पर देश में रक्त दान शिविर, संगोष्ठी तथा सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर, 1916 को हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक प्रसिद्ध राजनीतिक व्यक्तित्व तथा विचारक थे। वे जन संघ के समन्वयक तथा नेता थे, जन संघ से ही भारतीय जनता पार्टी की उत्पत्ति हुई थी।

4. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का 46वां स्थापना दिवस

सरकार ने 24 सितंबर, 2020 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 46वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में एक वेबिनार आयोजित किया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत एक वैधानिक संगठन है। इसका गठन सितंबर, 1974 में किया गया था। यह वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत शक्तियों और कार्यों को सौंपता है। यह पर्यावरण और वन मंत्रालय को पर्यावरण(संरक्षण) अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत तकनीकी सेवाएं प्रदान करता है। यह पर्यावरण अनुसंधान, निगरानी और विनियमन करने के लिए सरकार का एक तकनीकी विंग है।

5. 24 सितम्बर को मनाया गया विश्व समुद्री दिवस

सितम्बर के अंतिम बृहस्पतिवार को प्रतिवर्ष विश्व समुद्री दिवस (World Maritime Day) के रूप में मनाया जाता है। इसके द्वारा शिपिंग सुरक्षा के महत्व, समुद्री सुरक्षा तथा समुद्री वातावरण की सुरक्षा तथा समुद्री उद्योग पर प्रकाश डाला जाता है। इस वर्ष विश्व समुद्री दिवस की थीम “सतत गृह के लिए सतत शिपिंग” (Sustainable Shipping for a Sustainable Planet)। विश्व समुद्री दिवस 1958 में अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) सम्मलेन के अनुकूलन की तिथि चिन्हित करता है। इस दिवस को पहली बार 1978 में मनाया गया था। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) का शुरूआती नाम अंतरसरकारी समुद्री सलाहकार संगठन था, इसे 1982 में बदलकर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) कर दिया गया।

6. 22 सितंबर को मनाया गया विश्व राइनो दिवस

हर साल विश्व राइनो (गैंडा) दिवस विश्व वन्यजीव कोष और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा 22 सितंबर को मनाया जाता है। यह दिवस एशिया और अफ्रीका में रहने वाले 5 गैंडों की प्रजातियों के खतरों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है। 2010 में विश्व वन्यजीव कोष दक्षिण अफ्रीका द्वारा पहले विश्व राइनो दिवस की घोषणा की गई थी। इस वर्ष विश्व राइनो दिवस थीम थी : फाइव राइनो स्पीशीज फॉरएवर। केंद्रीय मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने देश में विश्व राइनो दिवस मनाने के अवसर पर एक बैठक की अध्यक्षता की। मंत्री के अनुसार, भारत दुनिया में एक सींग वाले गैंडों की सबसे बड़ी संख्या का घर है। भारत में लगभग 3000 एक सींग वाले गैंडे हैं। ये असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश राज्यों में फैले हुए हैं।

7. VAIBHAV: वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक शिखर सम्मेलन २०२०

वर्चुअल वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (VAIBHAV) शिखर सम्मेलन का उद्घाटन 2 अक्टूबर 2020 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। यह शिखर सम्मेलन लगभग एक महीने के विचार-विमर्श सत्र के बाद होगा जो कि 3 अक्टूबर से 25 अक्टूबर 2020 तक चलेगा। इसे एक वेबिनार के माध्यम से शोधकर्ताओं के बीच आयोजित किया जायेगा। वैश्विक भारतीय वैज्ञानिक (VAIBHAV) शिखर सम्मेलन S&T और Academic Organizations of India की एक पहल है ताकि विचार प्रक्रिया, प्रथाओं और अनुसन्धान व विकास संस्कृति पर विचार-विमर्श किया जा सके। इस पहल का उद्देश्य उभरती और चल रही चुनौतियों को हल करने के लिए वैश्विक भारतीय शोधकर्ता की विशेषज्ञता और ज्ञान का उपयोग करने के लिए व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करना है।

8. ओ-स्मार्ट योजना: 25 हिंद महासागर देशों में सेवाएं प्रदान करने वाली सुनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने हाल ही में राज्यसभा में एक लिखित जवाब दिया। उनके उत्तर के अनुसार, भारतीय सूनामी प्रारंभिक चेतावनी केंद्र वर्तमान में 25 भारतीय महासागर देशों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की O-SMART योजना के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है। O-SMART का पूर्ण स्वरुप Ocean Services, Modelling, Applications, Resources and Technology scheme है। यह प्रणाली भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र में समुद्री जीवन संसाधनों पर जानकारी मुहैया कराती है।

यह प्रणाली मुक्त जल प्रदूषकों की निगरानी करती है। यह समुद्र अवलोकन प्रणालियों की विस्तृत श्रृंखला विकसित करती है। ये प्रणालियां भारत में समुद्र से वास्तविक समय के डेटा को प्राप्त करने में मदद करती हैं।

9. बिहार में ‘घर तक फाइबर’ योजना लांच की गई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 सितंबर, 2020 को बिहार में ‘घर तक फाइबर’ योजना की शुरुआत की है। ‘घर तक फाइबर’ योजना के तहत, घरों में ऑप्टिकल फाइबर सेवाएं प्रदान की जाएंगी। गाँव और ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हर घर में ऑप्टिकल फाइबर सक्षम इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। पीएम मोदी ने 74वें स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा था कि इस योजना के तहत 2014 के बाद डेढ़ लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर कनेक्शन मिले हैं। यह योजना भारत नेट कार्यक्रम के तहत डिजिटल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करती है।

10. मध्य प्रदेश में लांच होगी मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना

मध्य प्रदेश सरकार केंद्र सरकार की योजना प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तर्ज मुख्‍यमंत्री किसान कल्याण योजना लांच करने जा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के मौजूदा लाभार्थी जिन्हें 6,000 रुपये प्रति वर्ष प्राप्त हो रहे हैं, उन्हें इस योजना के तहत 4000 रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी मिलेगी। इस प्रकार, कुल मिलाकर किसानों को 10,000 रुपये की वार्षिक वित्तीय सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना से लगभग 80 लाख किसान लाभान्वित होंगे। राज्य सरकार ने किसान-हितैषी योजनाओं को एकीकृत करने की योजना बनाई है। यह घोषणा सबको साख-सबका विकास कार्यक्रम में की गई थी जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भाग लिया था। 22 सितंबर, 2020 को भोपाल में गरीब कल्याण सप्ताह के तहत सबको साख-सबका विकास कार्यक्रम आयोजित किया गया था। राज्य के मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित किया और सहकारी बैंकों और सोसायटियों के खातों में 800 करोड़ रुपये जमा किये। उन्होंने किसानों को क्रेडिट कार्ड और ऋण वितरित किए।

11. केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगडी का निधन

केंद्रीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी का कोरोना वायरस (COVID-19) के कारण 65 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। 01 जून, 1955 को कर्नाटक के बेलगाम ज़िले में जन्मे सुरेश अंगडी बेलगाम 17वीं लोकसभा के लिये निर्वाचित हुए थे और उन्हें रेल राज्‍य मंत्री का पदभार सौंपा गया था। कर्नाटक के एक कॉलेज से स्‍नातक करने के बाद उन्होंने राजा लखमगौड़ा लॉ कॉलेज, बेलगाम से कानून की पढ़ाई की थी। वर्ष 1996 में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बेलगाम इकाई के उपाध्यक्ष बने थे और वर्ष 1999 तक वे इसी पद पर रहे। वर्ष 2004 में वे 14वीं लोकसभा के लिये पहली बार निर्वाचित हुए थे और उन्हें खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण संबंधी स्थायी समिति का सदस्य बनाया गया था। इसके बाद वे वर्ष 2009, वर्ष 2014 और वर्ष 2019 में भी लोकसभा के लिये निर्वाचित हुए।

12. युवाह: युवा कौशल पहल

20 जुलाई, 2020 को भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (United Nations Children Fund- UNICEF) ने भारत में वैश्विक मल्टी-स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म ‘युवाह: जनरेशन अनलिमिटेड’ (YuWaah: Generation Unlimited- GenU) की स्थापना करने के लिये ‘स्टेटमेंट ऑफ इंटेंट’ (Statement of Intent) पर हस्ताक्षर किये थे।

इस योजना का मकसद युवा उद्यमियों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिये सफल उद्यमियों एवं विशेषज्ञों के ज़रिये उद्यमिता कक्षाएँ (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन) आयोजित कराकर युवाओं का उत्साह बढ़ाना है

21वीं सदी के कौशल, जीवन कौशल, डिजिटल कौशल पर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन चैनलों के माध्यम से युवा लोगों को अपग्रेड करना और उनके उत्पादक जीवन एवं भविष्य में कार्य करने के लिये स्व-शिक्षण के माध्यम से उनका समर्थन करना। स्वरोज़गार को बढ़ावा देने के साथ रोज़गार के अवसरों से युवाओं को जोड़ने के लिये आकांक्षी आर्थिक अवसरों के साथ संबंध विकसित करना। इसके लिये अभिनव समाधान एवं प्रौद्योगिकी प्लेटफाॅर्मों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देना।

युवाओं को कैरियर पोर्टल के साथ-साथ नौकरी पोर्टल के द्वारा आत्म-अन्वेषण सत्रों के माध्यम से कैरियर मार्गदर्शन सहायता प्रदान करना।

13. शुचि योजना : कर्नाटक सरकार ने बंद किया धन आवंटन

COVID-19 के मद्देनज़र कर्नाटक सरकार द्वारा शुचि योजना (Shuchi Scheme) जो एक प्रकार की मासिक धर्म स्वच्छता परियोजना (Menstrual Hygiene Project) है, के लिये कोई धनराशि आवंटित नहीं किये जाने के कारण इस योजना का क्रियान्वयन नहीं हो सका। इस वर्ष COVID-19 के मद्देनज़र कर्नाटक सरकार द्वारा शुचि योजना के तहत वितरित किये जाने वाले सेनेटरी नैपकिन (Sanitary Napkins) का वितरण रुक गया है। गौरतलब है की 5 मार्च, 2020 को कर्नाटक सरकार द्वारा लाए गए राज्य के बजट में शुचि योजना के लिये कोई धनराशि आवंटित नहीं की गई थी जिसके कारण अब कर्नाटक के स्कूल एवं कॉलेज की 17 लाख से अधिक लड़कियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

शुचि योजना (Shuchi Scheme) साल 2013-14 में शुरू की गई थी। यह योजना शुरूआत में केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित थी। हालाँकि, साल 2015-16 में केंद्र सरकार ने राज्यों को से पूरी तरह से इस योजना की ज़िम्मेदारी उठाने के लिये कहा था। शुचि योजना का मकसद ग्रामीण इलाकों की लड़कियों में मासिक धर्म स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाना था। हर साल कर्नाटक सरकार इस योजना पर 49 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर रही है।

14. हाइफा दिवस

हर साल 23 सितंबर को भारतीय सेना हाइफा दिवस मनाती है । हाइफा दिवस का मकसद हाइफा के युद्ध में लड़ने वाले भारतीय सैनिकों के प्रति सम्मान प्रकट करना है। गौरतलब है की हाइफा का युद्ध 23 सितंबर, 1918 को हुआ था जिसमें जोधपुर, मैसूर तथा हैदराबाद के सैनिकों ने हिस्सा लिया था। ये सभी सैनिक 15 इंपीरियल सर्विस कैवलरी ब्रिगेड का हिस्सा थे। इन्होने मित्र राष्ट्रों की ओर से प्रथम विश्वयुद्ध में भाग लेकर जर्मनी व तुर्की के कब्ज़े वाले इज़राइल के हाइफा शहर को आज़ाद करवाया था। इस युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को सम्मान देते हुए भारत सरकार ने दिल्ली स्थित विख्यात तीन मूर्ति मेमोरियल को तीन मूर्ति हाइफा मेमोरियल के रूप में पुनः नामित किया है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।