(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (18th - 24th January 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (18th - 24th January 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • दल-बदल विरोधी कानून के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बताई समीक्षा की ज़रूरत। कहा इसका उल्लंघन करने वाले सदस्यों का समाप्त होना चाहिए पद
  • दिल्ली में लगा हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 । इस क़ानून के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी भी व्यक्ति को है हिरासत में लेने का अधिकार
  • NIA एक्ट के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया केंद्र सरकार को नोटिस। छत्तीसगढ़ सरकार के मुताबिक़ एनआईए एक्ट राज्य के अधिकार क्षेत्र में कर रहा अतिक्रमण
  • ठन्डे बस्ते में पड़ सकती है महाराष्ट्र में प्रस्तावित हायपरलूप परियोजना। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने कहा दुनिया में कहीं भी नहीं पहनाया जा सका है इस तकनीकि को अमली जामा
  • WEF ने जारी किया सामाजिक गतिशीलता सूचकांक। 82 देशों की सूची में मिला भारत को 76 वां स्थान
  • संयुक्त अरब अमीरात को घोषित किया गया भारत का रेसिप्रोकेटिंग टेरेटरी। अब संयुक्त अरब अमीरात अदालतों के दीवानी फ़ैसले होंगे भारत में लागू
  • राजस्थान में चल रही है पहले जैव प्रौद्योगिकी पार्क बनाए जाने की योजना। जैव प्रौद्योगिकी पार्क से मिलेगा राज्य में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा

खबरें विस्तार से:

1.

सर्वोच्च न्यायालय ने बीते दिनों दल-बदल विरोधी कानून की समीक्षा की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यदि कोई सांसद या विधायक दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन करता है तो उसे एक दिन भी पद पर रहने का हक नहीं है। कोर्ट ने ये भी कहा है कि लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष को बिना समय गंवाए दल-बदल विरोधी कानून का उल्लंघन करने वाले सदस्य की अयोग्य घोषित करने का फैसला लेना चाहिए। इसके अलावा ऐसे मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र इकाई भी बननी चाहिए।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि संसद को दल-बदल विरोधी कानून विचार करना होगा कि क्या किसी सदस्‍य को अयोग्‍य ठहराने की याचिकाओं पर फैसला करने का अधिकार लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष को अर्द्धन्‍यायिक प्राधिकारी यानी Semi judicial authority के रूप में दिया जाना चाहिये। इसके अलावा सर्वोच्च न्‍यायालय ने ये भी कहा कि लोकसभा और विधानसभा अध्यक्ष राजनीतिक दल से जुड़े होते हैं। ऐसे में ये सदस्यों की अयोग्यता का फैसला करते वक़्त राजनीतिक पूर्वाग्रहों से भी ग्रसित हो सकते हैं। सर्वोच्च न्‍यायालय का कहना है कि किसी सदस्‍य को अयोग्‍य ठहराने का अधिकार लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष की बजाय एक संसदीय ट्रिब्‍यूनल को देने के लिये संविधान संशोधन पर संसद को गंभीरता से विचार करना चाहिये।

संसदीय ट्रिब्‍यूनल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया है कि इस ट्रिब्‍यूनल की अध्‍यक्षता उच्‍चतम न्‍यायालय के अवकाश प्राप्‍त न्यायाधीश या किसी उच्‍च न्‍यायालय के अवकाश प्राप्‍त मुख्‍य न्यायाधीश के द्वारा की जा सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि संसद किसी और भी वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार कर सकती है जिससे पारदर्शी और तीव्र गति से फैसला लिया जा सकें।

यदि कोई विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जा कर दूसरी पार्टी का समर्थन करता है तो उसकी इस प्रक्रिया को दल-बदल माना जाता है। ऐसे में उस विधायक की सदस्यता समाप्त कर दी जाती है। दल-बदल कानून भारत में 1 मार्च 1985 से लागू हो गया था। ये कानून संविधान में 10वीं अनुसूची के रूप में डाला गया था। कानून संसद और राज्य विधानसभा दोनों पर लागू होता है।

इसके अलावा किसी विधायक को दाल बदल क़ानून के तहत इन परिस्थितियों में अयोग्य घोषित किया जाता है। इनमें यदि किसी राजनैतिक दल का विधायक अपनी इच्छा से अपनी पार्टी छोड़ दे; या कोई विधायक सदन में अपनी पार्टी के निर्देशों से विपरीत जा कर मत दे, या मतदान में अनुपस्थिति रहे या फिर 15 दिनों के अंदर उसे अपने पार्टी से क्षमादान ना मिल पाए तो ऐसे हालात में किसी सांसद या विधायक को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ और भी परिस्थितियां हैं जिसके तहत भी अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इनमें यदि कोई निर्दलीय सदस्य, बिना किसी राजनैतिक दल का उम्मीदवार होते हुए चुनाव जीत जाए और उस चुनाव के बाद किसी राजनैतिक दल की सदस्यता ग्रहण कर ले, तो ये विधायक अयोग्य हो जाता है। या फिर, यदि कोई नाम-निर्देशित सदस्य सदन में अपने शपथ ग्रहण के 6 महीने बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता धारण कर ले तो भी उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।

2.

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने एक अधिसूचना जारी की है। ये अधिसूचना राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी नेशनल सिक्योरिटी एक्ट 1980 से जुड़ी है। दरअसल रासुका से जुड़ी इस अधिसूचना के तहत दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार है। उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से दिए गए इस आदेश में दिल्ली पुलिस आयुक्त अब अगले तीन महीने तक किसी भी व्यक्ति को के लिए NSA के तहत हिरासत में ले सकती है। इससे पहले भी ऐसा ही एक आदेश दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने दिया था।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 की धारा तीन की उपधारा (3) का इस्तेमाल करते हुए 19 जनवरी से 18 अप्रैल तक दिल्ली पुलिस आयुक्त को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार दिया है। आपको बता दें कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980, देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से जुड़ा एक कानून है। यह कानून सरकार को किसी संदिग्घ व्यक्ति की गिरफ्तारी की शक्ति देता है। सरकार को यदि लगता है कि कोई शख़्स देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कामों को करने से उसे रोक रहा है तो वो उस शख़्स को गिरफ्तार करवा सकती है। देखा जाए तो इस कानून के अंतर्गत जमाखोरों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है। इस कानून का इस्तेमाल जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, राज्य सरकार अपने सीमित दायरे में भी कर सकती है। अगर सरकार को ये लगे तो कोई व्यक्ति बिना किसी मतलब के देश में रह रहा है और उसे गिरफ्तार किए जाने की ज़रूरत तो सरकार उसे भी गिरफ्तार करवा सकती है।

इस क़ानून की पृष्ठिभूमि की बात करें तो 1980 में दोबारा सत्ता में आई इंदिरा गांधी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को संसद से पास किया गया था। इस क़ानून के अन्य पहलुओं का ज़िक्र करें तो यह कानून ऐसे व्यक्ति को एहतियातन महीनों तक हिरासत में रखने का अधिकार देता है, जिससे प्रशासन को राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा महसूस होता है । इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को पहले तीन महीने के लिए गिरफ्तार किया जा सकता है। उसके बाद ज़रूरत के मुताबिक़ तीन-तीन महीने के लिए गिरफ्तारी की समय सीमा बढ़ाई जा सकती है।

रासुका के तहत किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के बाद सम्बंधित अधिकारी को राज्य सरकार को ये बताना होता है कि उसने किस आधार पर ये गिरफ्तारी की है। अगर रिपोर्ट को राज्य सरकार मजूरी दे देती है तो इसे सात दिन के भीतर केंद्र सरकार को भेजना होता है। इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र करना ज़रूरी होता है कि किस आधार पर यह आदेश जारी किया गया है। साथ ही राज्य सरकार का इस पर क्या विचार है और यह आदेश जरूरी क्यों है।

3.

छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते दिनों NIA एक्ट में संशोधन के खिलाफ एक मुक़दमा सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था। 2019 में संशोधित हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार ने तर्क दिया कि एनआईए एक्ट राज्य के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण कर रहा है। अब NIA एक्ट में संशोधन के खिलाफ दाखिल दायर छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। दरअसल संविधान की 7 वीं अनुसूची के तहत पुलिस और क़ानून व्यवस्था राज्य सूची का विषय है। ऐसे में ये अधिनियम केंद्र को जांच के लिए एक एजेंसी बनाने की अनुमति देता है, जो कि राज्य पुलिस का काम है। छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी याचिका में ये भी कहा है कि इस संशोधन के पारित होने के बाद के बाद केंद्र सरकार अपने इशारे पर इस केंद्रीकृत एजेंसी के ज़रिए अपने कामों को अंजाम देगी।

आतंकवाद दुनिया की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है । अलग -अलग देशों ने आतंकवाद की समस्या को सुलझाने के लिए कई सख्त कानून अथवा संगठनों का निर्माण किया है। इसी आतंकवाद की समस्या से निपटने और आतंकवाद से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए भारत में भी साल 2008 में हुए मुंबई बम धमाकों के बाद NIA यानी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी का गठन किया गया। देखा जाए तो NIA भारत सरकार द्वारा गठित एक जांच एजेंसी है । मौजूदा वक़्त में NIA भारत में केंद्रीय काउंटर टेररिज्म लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी के रूप में काम कर रही है।

NIA का मक़सद अंतर्राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के मानकों पर काम करते हुए एक अच्छी और पेशेवर जांच एजेंसी के रूप में काम करने का है ।

पिछले साल मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की शक्ति में विस्तार करने वाला एक संशोधन अधिनियम संसद द्वारा पारित किया गया। देखा जाए तो इस क़ानून में जो बदलाव हुआ है वो ये है कि अब मानव तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री और साइबर आतंकवाद जैसे अपराधों की जांच विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत की जा सकती है। इसके अलावा इस क़ानून में एक और महत्वपूर्ण संशोधन ये भी हुआ है कि कोई NIA अधिकारी अब राज्य के पुलिस महानिदेशक की इजाज़त के बग़ैर ही आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े किसी भी शख़्स के यहां छापा मारने और उसकी संपत्तियों को जब्त करने की अनुमति देता है, जिन पर NIA को संदेह है। इस काम के लिए NIA के जांच अधिकारी को केवल NIA के महानिदेशक से मंजूरी की ज़रूरत होगी। साथ ही 2019 का संशोधन केंद्र सरकार को एनआईए परीक्षणों के लिए विशेष अदालतों के रूप में सत्र अदालतों को नामित करने में भी सक्षम बनाता है।

मौजूदा वक़्त में दाखिल याचिका इस बात पर ज़ोर डाल रही है कि इस क़ानून में हुआ संशोधन सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को प्रभावित कर रहा है। साथ ही प्रावधानों में शामिल मनमानी और अंतर्निहित अस्पष्टता के कारण भी ये संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन कर रहा है। याचिका में कहा गया है कि एक ओर जहां ये अधिनियम राज्य को पुलिस के ज़रिए जाँच कराने की उसकी शक्ति का अतिक्रमण करता है, तो वहीं जबकि केंद्र की विवेकाधीन और मनमानी शक्तियों का ज़िक्र करता है और राज्य की संप्रभुता का उल्लंघन करता है। आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ये याचिका संविधान के अनुच्छेद 131 का इस्तेमाल करते हुए दायर की है। संविधान का अनुच्छेद 131 के तहत सुप्रीम कोर्ट राज्य बनाम राज्य या फिर राज्य बनाम केंद्र के मामलों की सुनवाई कर सकता है और उस पर अपना फैसला दे सकता है।

4.

पुणे से मुंबई के बीच प्रस्तावित हाइपर लूप परियोजना को मौजूदा महाराष्ट्र राज्य सरकार ठन्डे बस्ते में डाल सकती है। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने बताया है कि ये परियोजना अभी भी प्रायोगिक चरण में है और दुनिया में कहीं भी इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है। आपको बता दे हाइपरलूप एक अल्ट्रा - मॉडर्न तकनीकि वाला परिवहन व्यवस्था है। इसके ज़रिए पुणे से मुंबई जाने में लगने वाला 2 -3 घंटों का समय घटकर महज़ 25 मिनट रह जायेगा । इससे पहले महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने इस तकनीक को अपनाने के लिए मंजूरी दे दी थी।

हाइपरलूप एक कैप्सूल रूपी चुंबकीय ट्रेन है। बताया ये जाता है कि ये बुलेट ट्रेन से भी दोगुनी रफ्तार से दौड़ने में सक्षम है। इसके अलावा हाइपरलूप तकनीकि के ज़रिए हर घंटे में 1 हजार से 1200 किलोमीटर दूरी तय की जा सकती है। हाइपरलूप तकनीक का विचार सबसे पहले टेस्ला मोटर्स कंपनी के सीईओ और सह-संस्थापक इलोन मस्क को 2013 में आया था। उन्होंने इसे परिवहन का पाँचवां मोड़ भी बताया है। टेस्ला मोटर्स कंपनी का कहना ये भी है कि इसका किराया हवाई जहाज के किराए से भी कम होगा।

आपको बता दें कि हाइपरलूप ट्यूब ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी है। एक तरीके से समझें तो ये यात्रा सुरोंगों के भीतर होगी। इस तकनीकी में बड़े - बड़े पाइपों के भीतर वैक्यूम जैसा माहौल तैयार किया जाता है। इस तकनीक में कैप्सूल या पॉड्स का इस्तेमाल किया जाता है। इन कैप्सूल्स या पॉड्स को ज़मीन के ऊपर बड़े-बड़े पारदर्शी पाइपों में इलेक्ट्रिकल चुंबक पर चलाया जाता है। चुंबकीय प्रभाव से ये पॉड्स ट्रैक से कुछ ऊपर उठ जाते हैं, जिससे गति ज़्यादा हो जाती है और घर्षण भी कम लगता है।

हाइपरलूप तकनीकि के फायदों की बात करें तो मौजूदा वक़्त में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये तेज़, सस्ते, सुरक्षित और बेहतर परिवहन साधनों की ज़रूरत है। हाइपरलूप तकनीकि के आने से सड़कों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर मौजूद भीड़ से निजात मिलेगी। इसके अलावा इसमें बिजली खपत भी कम लगेगी और ये प्रदुषण मुक्त भी है।

साथ ही हाइपरलूप शून्य उत्सर्जन के साथ टिकाऊ है। ये सौ फीसदी विद्युत् मार्ग पर आधारित है, जिससे 30 सालों में क़रीब 86 हज़ार टन ग्रीन हॉउस गैसों के उत्सर्जन को कम कर सकता है। हाइपरलूप तकनीकि से जहां कुछ फायदे हैं, तो वहीं इससे कुछ खतरों का भी डर रहता है। दरअसल 1000 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ़्तार से चलने वाली इस तकनीकि मे इमरजेंसी ब्रेक लगाना सबसे बड़ी समस्या होगी। इसके अलावा फिलहाल तक मानव-युक्त हाइपरलूप तकनीकि का परीक्षण भी नहीं किया गया है। वाहनों रास्तों पर इसका संचालित इस तकनीकि को मुश्किल बना सकता है। साथ ही पॉड्स की चौड़ाई कम होने से यात्रियों को इसमें बैठने में भी हो सकती है।

5.

देश में आजादी से लेकर अब तक लोगों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कई सारी योजनाएं और नीतियां बनाई गई हैं। लोगों की सामाजिक और आर्थिक बेहतरी को लेकर भी काफी सारे दावे किए गए हैं। लेकिन हाल में आई एक रिपोर्ट देश की सामाजिक गतिशीलता पर भारतीय नीतियों पर सवाल खड़े कर रही है। दरअसल बीते दिनों विश्व आर्थिक मंच WEF ने एक इंडेक्स जारी किया है। ये इंडेक्स सामाजिक गतिशीलता सूचकांक से जुड़ा है और भारत को इस सूचकांक में 82 देशों की सूची में 76 वां स्थान मिला है। आइये समझते हैं क्या है विश्व आर्थिक मंच WEF द्वारा जारी इस सूचकांक की ख़ासियत जिसे पहली बार जारी किया गया है।

सामाजिक गतिशीलता से मतलब किसी व्यक्ति विशेष का अपने माता-पिता के संदर्भ में ऊपर या नीचे की ओर सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता से है। आसान शब्दों में समझें तो सामाजिक गतिशीलता से मतलब एक बच्चे को अपने माता पिता से बेहतर जीवन का अवसर प्राप्त करने की क्षमता से है। आधुनिक जीवन में सामाजिक गतिशीलता एक ज़रूरी विषय है। अक्सर सामाजिक गतिशीलता में कमी की इस बिगड़ती स्थिति के लिए भूमंडलीकरण और प्रौद्योगिकी को दोषी माना जाता है। हालाँकि विश्व आर्थिक मंच WEF द्वारा जारी इस रिपोर्ट में कई अन्य कारणों का भी ज़िक्र है। जैसे अकुशल नीति और इनका अकुशल कार्यान्वयन।

इस सूचकांक के कुछ प्रमुख मानक रहे हैं। इनमें 1. स्वास्थ्य, 2. शिक्षा (जिसमें शिक्षा तक पहुंच शिक्षा की गुणवत्ता एवं शिक्षा में समानता शामिल है), 3. प्रौद्योगिकी, 4. कामकाज ( जिसमें कामकाज के अवसर, वेतन, काम करने की स्थिति शामिल है ) और 5. संरक्षण व संस्थान (जिसमे सामाजिक संरक्षण तथा समावेशी संस्थान शामिल हैं) जैसे मानक शामिल रहे हैं। इस सूचकांक में 85 अंकों के साथ डेनमार्क पहले पायदान पर है। इसके बाद नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और आइसलैंड जैसे देशों का नंबर आता है। जबकि भारत को कुल 82 देशों के इस सूची में भारत 76वें स्थान पर रखा गया है।

इस सूचकांक में जीवन और शिक्षा के मामले में भारत जहां 41वें स्थान पर है, तो वहीं कामकाज की परिस्थितियों के आधार पर भारत 53वें पायदान पर है। इसके अलावा भारत को जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सुधार करने की जरूरत है वो सामाजिक सुरक्षा और उचित वेतन का वितरण का है, क्योंकि इन में क्रमशः भारत को 76 वें और 79वें स्थान पर रखा गया है।

विश्व आर्थिक मंच की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक बदलाव में 10 फीसद वृद्धि से ना केवल सामाजिक एकता को लाभ होगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था 2030 तक करीब पांच फीसद बढ़ सकती है। इस रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि द कि उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और आजीवन शिक्षा का सामाजिक बदलाव में सबसे बड़ा योगदान है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्वीकरण और चौथी औद्योगिक क्रांति का जहां एक और लाभ मिला है तो वहीं दूसरी ओर इसने असमानता को भी बढ़ा दिया है। इस रिपोर्ट में भावी चुनौतियों से निपटने के लिए एक रोल मॉडल भी प्रस्तुत किया गया है और इसे दो भागों में बांटा गया है। इनमें पहला सरकार के लिए और दूसरा व्यवसाय के लिए। सरकार को दिए गए सुझावों में सामाजिक गतिशीलता के लिए नया वित्तीय मॉडल, धन के संकेंद्रण को रोकने वाली कराधान नीतियां, शिक्षा की गुणवत्ता में बढ़ोत्तरी, व्यक्ति के कौशल में वृद्धि के लिए नीतियां साथ ही शिक्षा के वित्त पोषण के मामले में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के तालमेल पर ज़ोर दिया गया है। इसके अलावा सरकार को दिए गए सुझाव में सामाजिक सुरक्षा अनुबंध जैसे कई मामलों में भी मॉडल प्रस्तुत किए गए हैं।

व्यवसाय को लेकर जो सुझाव दिए गए हैं उसमें चयन प्रक्रिया में योग्यता की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए व्यावसायिक शिक्षा प्रदान करना, रीस्किलिंग और अपस्किलिंग के साथ-साथ उचित वेतन देना शामिल है। इसके साथ ही प्रत्येक उद्योग के लिए विशिष्ट कार्य योजना भी बनाना शामिल है जो उद्योगों की परिस्थितियों में ध्यान रखते हुए हो।

6.

विश्‍व आर्थिक मंच का कहना है कि कम होती जैव विविधता और तेज़ी से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन से दुनिया की अर्थव्यवस्था को काफी नुक्सान की आशंका है। WEF द्वारा हाल ही में जारी नेचर रिस्क राइजिंग रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया के सकल घरेलू उत्‍पाद का आधे से अधिक हिस्‍सा प्रकृति पर ही निर्भर करता है। इस रिपोर्ट में इस बात की भी ज़िक्र है कि इंसानी गतिविधियों के चलते पृथ्‍वी की वनस्‍पति और जैविक प्रजातियों में से क़रीब 25 प्रतिशत के अस्तित्‍व पर खतरा है और कई लाख प्रजातियां लुप्‍त होने की कगार पर हैं।

डब्ल्यूईएफ ने ये नेचर रिस्क राइजिंग रिपोर्ट अपनी 50वीं वार्षिक बैठक से पहले जारी की है। नेचर रिस्क राइजिंग रिपोर्ट को देश के हिसाब से देखा जाए तो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की जीडीपी का ज्यादा हिस्सा प्रकृति पर निर्भर है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन, यूरोपीय यूनियन और अमेरिका में प्रकृति पर निर्भर उद्योगों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। चीन की अर्थव्यवस्था का 2.7 लाख करोड़ डॉलर हिस्सा प्रकृति पर निर्भर है। यूरोपीय यूनियन में 2.4 लाख करोड़ डॉलर और अमेरिका में 2.1 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था प्रकृति पर निर्भर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई अन्‍य उद्योग भी परोक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर हैं और प्रकृति को नुकसान होने की स्थिति में इन उद्योगों के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

मूल्य के आधार पर प्रकृति और इससे जुड़ी सेवाओं पर करीब 44 लाख करोड़ डॉलर के बराबर की निर्भरता है। प्रकृति से जुड़ी समस्याओं के कारण इस पूरे ढांचे पर बुरा असर पड़ सकता है। प्रकृति पर सर्वाधिक निर्भर क्षेत्रों में कंस्ट्रक्शन (चार लाख करोड़ डॉलर), कृषि (2.5 लाख करोड़ डॉलर) और खाद्य एवं पेय (1.4 लाख करोड़ डॉलर) जैसे क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इस तरह के उद्योग वनों, महासागरों से मिलने वाले संसाधनों उपजाऊ मिट्टी, स्वच्छ जल, परागण व स्थिर जलवायु जैसे अन्य कारकों पर निर्भर हैं। देखा जाए तो प्रकृति जैसे-जैसे अपनी तरफ से इस तरह की सेवाएं प्रदान करने में अक्षम होती जाएगी, इन उद्योगों पर काफी असर पड़ेगा। प्रकृति पर बहुत ज्यादा निर्भर उद्योगों का आकार करीब 13 लाख करोड़ डॉलर और कुछ कम निर्भर उद्योगों का आकार 31 लाख करोड़ डॉलर के बराबर है।

इसमें कहा गया है कि कई उद्योग ऐसे भी हैं जिनकी सप्लाई चेन परोक्ष रूप से प्रकृति पर काफी निर्भर है। प्रकृति को होने वाले नुकसान से इन उद्योगों पर अनुमान से ज्यादा दुष्प्रभाव पड़ सकता है। छह ऐसे उद्योग हैं जिनके कुल कारोबार का 15 फीसद से कम हिस्सा प्रकृति पर बहुत ज्यादा निर्भर है, लेकिन उनकी सप्लाई चेन का 50 फीसद से ज्यादा हिस्सा प्रकृति पर निर्भर है। इनमें केमिकल व मैटेरियल, उड्डयन व ट्रैवल एंड टूरिज्म, रियल एस्टेट, माइनिंग एंड मेटल, सप्लाई चेन व परिवहन तथा रिटेल, कंज्यूमर गुड्स व लाइफस्टाइल से जुड़े उद्योग शामिल हैं। डब्ल्यूईएफ ने पीडब्ल्यूसी यूके के साथ मिलकर यह रिपोर्ट तैयार की है।

7.

अब संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE अदालतों के दीवानी फ़ैसले भारत में भी लागू होंगे। बीते दिनों विधि और न्याय मंत्रालय ने इसको लेकर एक अधिसूचना ज़ारी की है। अधिसूचना के ज़रिए संयुक्त अरब अमीरात को भारत का व्यतिकारी राज्यक्षेत्र यानी Reciprocating Territory घोषित किया गया है। संयुक्त अरब अमीरात को Reciprocating Territory का दर्ज़ा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 44 A द्वारा मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दी गई है। ऐसे में अब UAE के कुछ प्रमुख न्यायालयों को वरीय न्यायालय यानी Superior Courts का दर्ज़ा दिया गया है। (संयुक्त अरब अमीरात - Reciprocating Territory)
रिपोर्ट - UAE के कुछ प्रमुख न्यायालयों जिन्हें वरीय न्यायालय यानी Superior Courts का दर्ज़ा दिया गया है। उनमें (1) फ़ेडरल कोर्ट में (a) फ़ेडरल सुप्रीम कोर्ट (b) अबू धाबी, शारजाह, अजमान, उम अल क्वेन और फुजैरा के फ़ेडरल, प्रथम दृष्ट्या और अपीली अदालत शामिल हैं। इसके अलावा (2) स्थानीय अदालतों में (a) अबू धाबी न्यायिक विभाग (b) दुबई की अदालतें (c) रास अल ख़ैमा के न्यायिक विभाग (d) अबू धाबी ग्लोबल मार्केट्स की अदालतें (e) दुबई इंटेरनेशल फ़ायनैन्शल सेंटर की अदालतें शामिल हैं

संयुक्त अरब अमीरात के अलावा, कई और भी देश हैं जिन्हें व्यतिकारी राज्यक्षेत्र यानी Reciprocating Territory घोषित किया गया है। इनमें यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, बांग्लादेश, मलेशिया, त्रिनिदाद और टोबैगो, न्यूजीलैंड, कुक आइलैंड्स (नीयू सहित), पश्चिमी समोआ, पापुआ न्यू गिनी, फिजी, और अदन जैसे देश शामिल हैं।

आपको बता दें कि व्यतिकारी राज्यक्षेत्र भारत की सीमा के बाहर मौजूद ऐसे देश या इलाक़े होते हैं जिनके न्यायालयों के निर्णय भारत में और भारत के न्यायालयों के फैसले उस देश या उस क्षेत्र में एक समान रूप से लागू होते हैं। यानी ऊपर संयुक्त अरब अमीरात के जिन न्यायालयों का ज़िक्र हुआ है उनके निर्णय अब भारत में भी वैसे ही लागू होंगे जैसे भारत के स्थानीय अदालतों के फैसले लागू होते हैं। हालाँकि ध्यान देने वाले बात ये है कि ये सभी प्रावधान सिर्फ दीवानी फैसलों पर ही लागू होंगे।

आपको बता दें कि धारा 44 ‘A’ के नियम कहते हैं कि विदेशी न्यायालयों के निर्णयों का साक्ष्यात्मक मूल्य भारतीय न्यायालयों में तब तक नहीं है जब तक कि उन्हें ऐसा क्षेत्र नहीं घोषित किया जाता है जो सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 44 ‘क’ के तहत भारतीय न्यायालयों के निर्णयों को लागू करने की घोषणा करते हैं।

Reciprocating Territory घोषित किए जाने के बाद इसके मायनों की बात करें तो ऐसा माना जाता है कि ये व्यवस्था दोनों देशों के बीच फैसलों को लागू करने में लगने वाले समय को कम करने में मददगार होगी। इसके अलावा यह अधिसूचना संयुक्त अरब अमीरात और भारत के बीच नागरिक और वाणिज्यिक मामलों में सहयोग से संबंधित वर्ष 1999 के समझौते का एकमात्र शेष भाग था, जो अब शुरू हो गया है। साथ ही भारत के न्यायालयों द्वारा दीवानी मामलों में दोष-सिद्ध व्यक्तियों को अब संयुक्त अरब अमीरात में सुरक्षित जगह नहीं हो पाएगी ।

8.

आंध्र प्रदेश में पिछले कई महीनों से इस बात पर विमर्श चल रहा है कि राज्य की तीन राजधानियां बनाई जाएं। ये प्रस्ताव विधायी राजधानी यानी Legislative capital, कार्यकारी राजधानी यानी Executive capital और न्यायिक राजधानी यानी Judicial capital बनाए जाने को लेकर चल रहा था। इस मामले पर क़दम बढ़ाते हुए आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने आंध्रप्रदेश विकेन्द्रीकरण और सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास विधेयक 2020 पास कर दिया है।हालांकि इस बिल को अभी आंध्र प्रदेश की विधान परिषद में भी पारित होना है जहाँ पर सत्ताधारी YSR Congress बहुमत में नही हे।

रिपोर्ट - आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री Y.S. Jagan Mohan Reddy दक्षिण अफ्रीका की तर्ज पर आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां बनाना चाहते हैं। इनमें अमरावती को विधायी राजधानी (Legislative capital) विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी (Executive capital) और कुर्नूल को न्यायिक राजधानी (Judicial capital) बनाने की बात कही गई है।

दक्षिण अफ्रीका में इसी तरह प्रशासनिक राजधानी प्रिटोरिया में राष्ट्रीय विधायिका केपटाउन में तथा न्यायिक राजधानी ब्लूमफान्टेन है। देखा जाए तो आंध्र प्रदेश के इतिहास में इसकी राजधानियाँ हमेशा से ही विवादों के घेरे में रही हैं। 1953 में जब पहली बार आंध्र राज्य की नींव इसके 11 जिलों के साथ पड़ी तो आंध्र राज्य की राजधानी कुर्नल को बनाया गया। बाद में हैदराबाद के इसमें मिल जाने के कारण 1956 में आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद कर दी गई। दरअसल आंध्र प्रदेश भाषायी आधार पर बनने वाला भारत का प्रथम राज्य था जिसे तेलगू बोलने वाले जिलों को मद्रास, हैदराबाद तथा रायल सीमा से काटकर बनाया गया था। एक बार फिर से 2014 में आंध्र प्रदेश को दो भागों में विभाजित कर एक नया राज्य तेलंगाना बनाया गया। लेकिन Andhra Pradesh Reorganisation Act 2014 के मुताबिक हैदराबाद को तेलंगाना की राजधानी बना दिया गया। ऐसे में एक बार फिर से आंध्र को अपनी नई राजधानी बनाने की जरूरत पड़ी।

हालांकि एक्ट के मुताबिक हैदराबाद 10 वर्षों तक दोनों राज्यों की राजधानी के रूप में कार्य करेगा। आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने इस तीन राजधानियों वाले फार्मुले के पीछे का कारण सभी क्षेत्रों का समान विकास बताया। सरकार के मुताबिक विकास को सिर्फ एक जगह पर केन्द्रीकृत कर देना अन्य क्षेत्रों के साथ अन्याय होगा।

इसके साथ ही सरकार ने प्रदेश के सभी क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित करने के लिये प्रदेश को चार जोन में बाँटने की बात भी कही है जिसके लिये Zonal Development Boards भी बनाये जायेंगे। राजधानियों के इस विवाद को लेकर आंध्र प्रदेश में कई दिनों से प्रदर्शन चल रहे हैं और लोक अमरावती को राजधानी बनाने की माँग कर रहे हैं।

9.

बीते दिनों वैश्विक गरीबी को ख़त्म करने के मकसद से एक रिपोर्ट जारी हुई है। टाइम टू केयर शीर्षक से जारी ये रिपोर्ट एक गैर-लाभकारी समूह ऑक्सफैम द्वारा जारी की गई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में आर्थिक असमानता के पीछे ज़रूरत से ज़्यादा गरीबी और सिर्फ कुछ लोगों के पास तक ही धन पर नियंत्रण होना ज़िम्मेदार है। इसके अलावा ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि साल 2019 में पूरी दुनिया के 2,153 अरबपतियों के पास 4.6 बिलियन लोगों से अधिक ज़्यादा संपत्ति है।

टाइम टू केयर शीर्षक से जारी ये रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के 22 सबसे अमीर पुरुषों के पास अफ्रीका की सभी महिलाओं की संपत्ति के मुक़ाबले ज़्यादा संपत्ति है। दुनिया के सबसे अमीर 1% लोगों के पास लगभग 6.9 बिलियन लोगों के मुक़ाबले में दोगुनी से ज़्यादा संपत्ति है। ये रिपोर्ट ये भी बताती है कि साल 2011-2017 के दौरान जी-7 देशों में औसत मज़दूरी 3% बढ़ी है, जबकि इस मामले में अमीर शेयरधारकों को 31% का मुनाफ़ा हुआ है। टाइम टू केयर रिपोर्ट कहती है कि यदि अगले 10 सालों में सबसे अमीर 1% लोगों की संपत्ति पर 0.5% का अतिरिक्त कर लगाया जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य और वृद्धजनों की देखभाल जैसे तमाम क्षेत्रों में क़रीब 117 मिलियन लोगों के लिये नौकरियों का सृजन हो सकेगा।

महिलाओं के मामले में ये रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक स्तर पर पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की गरीबी दर 4% अधिक है। ये रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में छह प्रतिशत पुरुषों की तुलना में महिलाओं की काम करने वाली करने वाली उनकी उम्र में क़रीब 42 प्रतिशत महिलाओं को नौकरी ही नहीं मिल पाती है क्योंकि वे सभी केवल देखभाल से जुड़े कामों में ही रह जाती हैं।

ये रिपोर्ट ये भी कहती है कि दुनिया भर में क़रीब 12.5 बिलियन घंटे तक महिलाएं और लड़कियां ऐसे कामों में लगी होती है जिनसे कोई वेतन नहीं मिलता है। देखा जाए तो ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में हर साल कम-से-कम 10.8 ट्रिलियन डॉलर के योगदान के बराबर है। टाइम टू केयर रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया भर में लगभग 67 मिलियन घरेलू श्रमिकों में 80% महिलाएँ हैं। इसके अलावा इनमें से लगभग 90% घरेलू श्रमिकों की पहुँच सामाजिक सुरक्षा जैसे-मातृत्व संरक्षण और लाभ तक नहीं है। दुनिया भर में 5-9 वर्ष आयु वर्ग और 10-14 वर्ष के आयु वर्ग की लड़कियाँ समान उम्र के लड़कों की तुलना में अवैतनिक देखभाल के काम पर क्रमशः 30% और 50% अधिक समय खर्च करती हैं।

ऑक्सफैम के बारे में आपको बताए तो ये 19 स्वतंत्र चैरिटेबल संगठनों का एक संघ है जो कि गैर-लाभकारी समूह है। इसकी स्थापना 1942 में हुई थी। इसका मुख्यालय केन्या की राजधानी नैरोबी में स्थित है। इसका मुख्य मक़सद वैश्विक गरीबी को कम करने पर है। साथ ही ये स्थानीय संगठनों के ज़रिए भी काम करता है।

10.

राजस्थान में पहले जैव प्रौद्योगिकी पार्क यानी Biotechnology Park की स्थापना की एक योजना बनाई जा रही है। ये पार्क भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग और राजस्थान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर दस्तख़त के बाद शुरू होगा। इस समझौते के तहत राजस्थान में जैव प्रौद्योगिकी पार्क के अलावा एक इनक्यूबेशन सेंटर भी बनाए जाएँगे। आपको बता दें कि जैव प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना से राज्य में जैव प्रौद्योगिकी को बढ़ावा मिलेगा और इससे औद्योगिक विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रगति होगी।

जैव प्रौद्योगिकी पार्क और इक्यूबेशन केंद्र को भारत सरकार की सरकारी कंपनी, बायरेक्स (BIRAC) यानी बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च अंसिस्टेंस कांउसिल) के सहयोग से बनाया जाएगा। इस पार्क की स्थापना से राज्य में बायो-इनफार्मेशन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग और नैनो मेडिसिन जैसे कई और भी क्षेत्रों में प्रगति होगी। इसके अलावा जैव प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना से राजस्थान में बायो टेक्नोलॉजी कोर्स संचालित करने वाले सभी विश्वविद्यालयों और इससे जुड़े स्टार्टअप को मदद मिलेगी। साथ ही पार्क और इनक्यूबेशन केंद्र की स्थापना से युवाओं को रोज़गार मिलने में भी आसानी होगी।

जैव प्रौद्योगिकी पार्क को छोटे और मध्यम जैव प्रौद्योगिकी उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिये बनाई गई सुविधाएँ हैं। यह पार्क एक निश्चित क्षेत्र में होता है। इस क्षेत्र मे एक प्रयोगशाला होती है। इस प्रयोगशाला का मकसद उद्यमियों को उनके उद्यम क्षेत्र और अन्य सभी बुनियादी सुविधाएँ और खोजों के वित्तपोषण में सहायता मिले सके। इसके अलावा इनक्यूबेशन केंद्र के बारे में आपको बताए तो ये नए स्टार्टअप को सफल बनाने में मदद करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. 20 -24 जनवरी के बीच दावोस में आयोजित हुई विश्व आर्थिक मंच की 50वीं बैठक। भारत की ओर से केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग एवं रेल मंत्री, पीयूष गोयल ने की शिरकत

विश्व आर्थिक मंच सार्वजनिक और निजी सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था है। इस संस्था का मक़सद दुनिया के प्रमुख व्यावसायिक, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों तथा अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अग्रणी लोगों के लिये एक मंच के रूप में काम करना है। यह स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक गैर-लाभकारी संस्था है और इसका मुख्यालय जिनेवा में है। इस फोरम की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबंधन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम. श्वाब ने की थी।

2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने किया बिराटनगर एकीकृत चेक-पोस्ट का उद्घाटन। पीएम ने दिया क्रॉस बॉर्डर कनेक्टिविटी पर दिया जोर। मित्र देशों के साथ आवागमन, व्यापारिक, सांस्कृतिक समेत कई क्षेत्रों में संपर्क को और सुगम बनाने की जताई प्रतिबद्धता।

इस चेकपोस्ट को 260 एकड़ जमीन पर करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। जोगबनी-विराट नगर अंतरराष्ट्रीय व्यापार केन्द्र दोनों देशों के बीच व्यापार का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां विदेशी नागरिकों के आव्रजन, माल के निर्यात और आयात संबंधी सभी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।

3. ग्लोबल लोकतंत्र सूचकांक में 10 अंक नीचे फिसला भारत। द इकोनॉमिस्ट ग्रुप’ की इकोनॉमिक इंटेलीजेंस यूनिट द्वारा जारी 2019 की सूची में भारत को मिला है 51वां स्थान

ये सूचकांक ब्रिटिश संस्थान द इकोनॉमिस्ट ग्रुप की ओर से जारी किया गया है। ये वैश्विक सूची 165 स्वतंत्र देशों और दो क्षेत्रों में लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति का एक खाका पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति एक साल में कम हुई है। लोकतांत्रिक सूची में कमी देश में नागरिक स्वतंत्रता के ह्रास के कारण आई है। सूची में चीन 153वें स्थान पर है। इसके अलावा नार्वे शीर्ष पर जबकि उत्तर कोरिया सबसे नीचे है। ये सूचकांक सरकार के कामकाज, चुनाव प्रक्रिया व बहुलतावाद, राजनीतिक भागीदारी, राजनीतिक संस्कृति और नागरिक स्वतंत्रता पर आधारित है।

4. संपन्न हुआ खेलो इंडिया युवा खेल। 256 मेडल के साथ महाराष्ट्र बना चैंपियन

खेलो इंडिया युवा खेल में महाराष्ट्र को 78 स्वर्ण सहित 256 पदक मिले हैं जबकि हरियाणा कुल 200 पदकों के साथ इस सूची में दूसरे पायदान पर रहा है।

5. यूनान की संसद ने पहली महिला राष्ट्रपति को चुना

यूनान की संसद ने बुधवार को देश के इतिहास में पहली बार किसी महिला को निर्वाचित किया गया है राष्ट्रपति। 63 वर्षीय एकातेरिनी सकेलारोपोउलोउ हैं यूनान की पहली महिला राष्ट्रपति

6. ग्लोबल प्रतिभा प्रतिस्पर्धात्मक सूचकांक में भारत को मिली आठ अंकों की बढ़त भारत। साल 2020 के वैश्विक प्रतिभा प्रतिस्पर्धात्मक सूचकांक में भारत ने हासिल किया 72वां स्थान

ये रिपोर्ट विश्व आर्थिक मंच द्वारा जारी की गई है। इस सूचकांक में दुनिया के 132 देशों को शामिल किया गया है। इस सूची में स्विट्जरलैंड सबसे शीर्ष पर है, जबकि उसके बाद अमेरिका और सिंगापुर को जगह मिली है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के लिए और काम करने की जरूरत है, उसकी सबसे बड़ी मजबूती उसकी बढ़ती प्रतिभा है।

7. ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर मेसियास बोलसोनारो हैं 71 वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि। चार दिवसीय भारत की यात्रा पर आए हैं ब्राज़ील के राष्ट्रपति

8. स्पेन की नयी सरकार ने घोषित किया जलवायु आपातकाल। कार्यकाल के पहले 100 दिन के भीतर नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने के लिए एक मसौदा विधेयक पेश करेगी स्पेन की नयी सरकार

9. रिवर लेडी आरुषि निशंक को मिला चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्ड। सुप्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना, फिल्म निर्मात्री, कवित्री, व्यवसायी, पर्यावरणविद्, समाज सेविका व नमामि गंगे परियोजना की प्रमोटरहैं आरुषि निशंक

बायोलॉजिकल कंज़र्वेशन पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन मुताबिक़ जलवायु परिवर्तन के कारण ऑस्ट्रेलिया में विलुप्त के कगार पर है प्लैटिपस। आस्ट्रेलिया में पड़ने वाला विनाशकारी सूखे है इसकी वजह
आपको बता दें कि प्लैटिपस पूर्वी ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया में पाया जाता है। यह एक स्तनधारी जीव है जो बच्चे को जन्म देने के बजाय अंडे देता है। यह मोनोट्रेम (Monotreme) की पाँच विलुप्त प्रजातियों में से एक है।

10. राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थानNBRI के वैज्ञानिकों ने विकसित की गुलदाउदी की एक नई किस्म 'शेखर' । इस नई किस्म को गामा विकिरण द्वारा उत्परिवर्तन प्रेरण (Mutation Induction) प्रक्रिया से किया गया है विकसित

11. वैज्ञानिकों ने दिया ऑस्ट्रेलियाई में मच्छरों में पाए गए एक नए वायरस को यादा यादा वायरस का नाम। ये एक अल्फावायरस है यादा यादा वायरस ।

अल्फावायरस, पाज़िटिव-सेंस सिंगल-स्ट्रेंडेड आरएनए वायरस के एक जीनोम के साथ छोटे, गोलाकार, आवरण युक्त विषाणु होते हैं।

12. संयुक्त राज्य अमेरिका के वैज्ञानिकों ने बनाया दुनिया का पहला जीवित रोबोट। ज़ेनोबोट्स’ है इस जीवित रोबोट का नाम

इस जीवित रोबोट का निर्माण नोकदार पंजे वाले अफ्रीकी मेंढक की कोशिकाओं से किया गया है। वैज्ञानिकों ने मेंढक के भ्रूण से स्क्रैप की गई जीवित कोशिकाओं को फिर से तैयार किया है और उन्हें पूरी तरह से नया रुप दिया है। इस रोबोट का नाम नाइजीरिया औरसूडान से दक्षिण अफ्रीका तक के उप-सहारा अफ्रीकी क्षेत्र में पाए जाने वाले जलीय मेंढक की प्रजाति ज़ेनोपस लाविस (Xenopus laevis) के नाम पर रखा गया है।

13. नासा के उपग्रहों से प्राप्त आँकड़ों से पता चला है कि माउंट एवरेस्ट की 20,000 फीट की ऊँचाई पर घास और झाड़ियों की मात्र में हुई है वृद्धि। जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदूकुश हिमालय में तेजी से आ रहा है बदलाव

कभी बर्फ की सफेद चादर में ढंके रहने वाले इस क्षेत्र पर अब घास और झाड़ियाँ नजर आने लगी हैं जोकि स्पष्ट रूप से इशारा करता है कि जलवायु में आ रहा परिवर्तन इस पर्वत शृंखला पर विनाशकारी असर डाल रहा है। आपको बता दें कि हिन्दूकुश हिमालय क्षेत्र 42 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है जोकि एशिया के दस सबसे बड़ी नदियों को पोषित करता है। साथ ही 140 करोड़ लोगों की जल सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करता है।

14. 24 जनवरी को मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस। संयुक्त राष्ट्र ने 3 दिसम्बर, 2018 को प्रस्ताव पारित करके 24 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप घोषित करने का निर्णय लिया था।

इसका मक़सद शान्ति व विकास में शिक्षा की भूमिका को रेखांकित करना है। अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के लिए इस प्रस्ताव को नाइजीरिया समेत 58 देशों ने तैयार किया था। यह अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस का दूसरा संस्करण है।

15. भष्टाचार अवधारणा सूचकांक में भारत को मिला 80वां स्थान। इस सूचकांक को दावोस में विश्व आर्थिक फोरम की वार्षिक बैठक के दौरान किया गया है जारी

इसमें कुल 180 देश शामिल हैं। इस सूचकांक में डेनमार्क और न्यूजीलैंड शीर्ष पर हैं। भारत, चीन, बेनिन, घाना और मोरक्को एक ही रैंक पर हैं।

16. मध्य प्रदेश के भोपाल में खोली गई देश की पहली ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरा क्लिनिक। इस क्लिनिक में इलेक्ट्रॉनिक कचरे का किया जाएगा इकठ्ठा ,

इस ई-वेस्ट क्लिनिक की स्थापना केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और भोपाल म्युनिसिपल कारपोरेशन द्वारा किया गया है। इस क्लिनिक को ट्रायल बेसिस पर शुरू किया गया है, इसका संचालन तीन महीने तक किया जाएगा। इसके अलावा इलेक्ट्रानिक कचरा का मतलब किसी वैद्युत या इलेक्ट्रानिक उपकरण से है जो टूटा-फूटा, पुराना,खराब या बेकार होने के कारण फेंक दिया गया हो।

17. मशहूर भारतीय अभिनेत्री दीपिका पादुकोण को मिला क्रिस्टल अवार्ड। विश्व आर्थिक फोरम द्वारा दिया जाता है ये एवार्ड

उन्हें यह सम्मान मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए दिया गया है। दीपिका पादुकोण ‘लिव लव लाफ’ नामक एक फाउंडेशन चलाती हैं, जिसके द्वारा स्कूलों में जागरूकता सम्बन्धी कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

18. उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने लांच की ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना। दुर्घटना के कारण किसान की मृत्यु हो जाने या शारीरिक अक्षमता की स्थिति में किसानों मिलेगा को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता

इस योजना के तहत 18 से 70 आयुवर्ग के किसानों को कवर किया जाएगा।

19. ग्रीनपीस इंडिया नामक NGO की रिपोर्ट के मुताबिक झारखण्ड का झरिया शहर है भारत का सबसे प्रदूषित शहर। इस सूची में झारखण्ड का धनबाद शहर है दूसरे स्थान पर।

इस रिपोर्ट के मुताबिक देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। मिजोरम का लुंगलेई शहर देश का सबसे कम प्रदूषित शहर है। इसके लिए ग्रीनपीस इंडिया ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का डाटा इस्तेमाल किया है।

20. साल 2019 के लिए भारतीय बाल कल्याण परिषद् ने प्रदान किया राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार। इस वर्ष 22 बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है, इसमें 10 बालिकाएं भी हैं शामिल ।

21. कृषि मंत्रालय द्वारा जारी डाटा के मुताबिक 2018-19 में पश्चिम बंगाल में हुआ है सर्वाधिक सब्जियों का उत्पादन। बंगाल में सर्वाधिक 29.55 मिलियन टन सब्जियों का किया गया है उत्पादन

बंगाल में उत्पादन देश के कुल सब्जी उत्पादन का 15.9% था। 2017-18 में सब्जियों के उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे आगे था, इस वर्ष उत्तर प्रदेश 27.71 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर है।

22. अमेरिका की निजी अन्तरिक्ष एजेंसी स्पेस एक्स ने किया क्रू कैप्सूल का अति महत्वपूर्ण परीक्षण। स्पेस एक्स ने राकेट के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में अन्तरिक्षयात्रियों को पृथ्वी पर सुरक्षित उतारने के लिए किया है ये परीक्षण

यह परीक्षण सफल रहा है। इस परीक्षण में स्पेस एक्स ने फाल्कन-9 राकेट का इस्तेमाल किया था। स्पेस एक्स के बारे में बताएं तो ये स्पेस एक्स एक निजी अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी है। इसकी स्थापना एलोन मस्क द्वारा 6 मई, 2002 को की गयी थी। एलोन मस्क स्पेस एक्स के वर्तमान सीईओ हैं।

23. भारत ने किया K-4 परमाणु मिसाइल का सफल परीक्षण। 3,500 किलोमीटर है मिसाइल की रेंज ।

इस मिसाइल का उपयोग अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी में किया जाएगा। अरिहंत स्वदेशी रूप से निर्मित प्रथम परमाणु पनडुब्बी है।

24. K-4 मध्यम दूरी की पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है। के-श्रृंखला की मिसाइलों का नाम देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। यह मिसाइलें अग्नि मिसाइलों से काफी तेज़ हैं। DRDO द्वारा K-5 तथा K-6 मिसाइलों का विकास किया जा रहा है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।