(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (17th July - 23rd July 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (17th July - 23rd July 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • केंद्र सरकार का फैसला....उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा, के लिए...लागू किया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019...इन अधिकारों को लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना करना भी शामिल.
  • भारत सरकार के आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मनोदर्पण अभियान की शुरुआत.... स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखनें एवं छात्रों की समस्याओं को सुलझाने है उद्देश.
  • भारतीय युवाओं में स्वयंसेवा को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ के साथ खेल मंत्रालय की भागीदारी.... YuWaah के साथ इस साझेदारी के तहत काम करने के लिए एक 'इरादे का बयान' पर किये हस्ताक्षर..
  • कोविड 19 महामारी के दौरान सर्कस के जानवरों की स्थिति जोखिम में... दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पशु कल्याण बोर्ड को सर्कस में रखे गये जानवरों की संख्या का पता लगाने के लिये तत्काल एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया.
  • आपातकालीन राहत कार्यो में सरकार तथा बहुपक्षीय एजेंसियों द्वारा अनदेखी किये जाने के विरुद्ध..... GFATM में याचिका दायर.... COVID-19 राहत कोष से सहायता की मांग...सरकार से किया दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह..
  • ऑस्ट्रेलिया को नौसेना अभ्यास में सम्मिलित किये जाने के मिले संकेत.... भारत के रक्षा मंत्रालय द्वारा, होने वाले त्रिपक्षीय 'मालाबार नौसेना अभ्यास' में ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करने के विषय पर चर्चा की गयी..
  • असम में कुदरत की सबसे बड़ी मार पड़ी है...बाढ़-आपदा के कारण खतरे की स्थिति में फंसा असम....बाढ़ में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 85 पचासी प्रतिशत क्षेत्र हुआ जलमग्न.

खबरें विस्तार से:

1.

बीते इस 20 जुलाई, 2020 से उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू हो गया है. केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, रामविलास पासवान ने कहा कि, यह नया कानून उपभोक्ताओं को सशक्त बनायेगा....

यह नया कानून अपने अधिसूचित नियमों और उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगों, उपभोक्ता संरक्षण परिषदों, उत्पाद देयता, मध्यस्थता और मिलावटी सामान से बने उत्पादों के निर्माण या बिक्री के लिए सजा जैसे विभिन्न प्रावधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करेगा.

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि इस अधिनियम में उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा, संवर्धन और इन अधिकारों को लागू करने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की स्थापना करना भी शामिल है.

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019: मुख्य विशेषताएं

ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों द्वारा अनुचित व्यापार प्रथाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक नियम इस अधिनियम के तहत कवर किए जाएंगे...प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई को धनवापसी, वापसी, वारंटी और गारंटी, विनिमय, वितरण और शिपमेंट, शिकायत निवारण तंत्र, भुगतान के तरीके, भुगतान के साधन, भुगतान के तरीकों की सुरक्षा और शुल्क-वापसी के विकल्प सहित संबद्ध वस्तु के मूल देश के बारे में जानकारी देनी होगी, जो उपभोक्ताओं को उनके प्लेटफॉर्म पर खरीद के पहले चरण में सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए आवश्यक होगा.

मध्यस्थता प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इस नए अधिनियम के तहत मध्यस्थता का एक वैकल्पिक विवाद तंत्र भी प्रदान किया गया है. मध्यस्थता के लिए एक उपभोक्ता आयोग को शिकायत सौंपी जायेगी, जहां शुरुआती निपटान की गुंजाइश मौजूद होगी और दोनों/ सभी पार्टियां इसके लिए सहमत हों....उपभोक्ता आयोगों के तहत स्थापित विभिन्न मध्यस्थता सेल्स में यह मध्यस्थता वार्ता की जाएगी. ऐसी मध्यस्थता के माध्यम से निपटान के खिलाफ कोई अपील नहीं होगी...उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के नियमों के अनुसार, कुल 5 लाख रुपये तक के मामले दर्ज करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा.

CCPA का उद्देश्य:

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ संस्थान के मुकदमों या शिकायतों की जांच करने का भी अधिकार होगा. यह भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने का आदेश भी दे सकता है, असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं की वापसी का आदेश दे सकता है, निर्माताओं या प्रकाशकों या भ्रामक विज्ञापनों के समर्थन करने वालों पर जुर्माना भी लगा सकता है.

उपभोक्ताओं को लाभ

सभी उत्पादों में मिलावट और भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए कठोर सजा का प्रावधान....केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले तीव्र क्रियान्वयन उपाय....उत्पाद दायित्व का प्रावधान निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को अपूर्ण सेवाओं और दोषपूर्ण उत्पाद उपलब्ध करवाने से रोकना है....उपभोक्ता आयोगों में अपील करना आसान होगा और अधिनिर्णयन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है...इस कानून के तहत, मध्यस्थता के माध्यम से विभिन्न मामलों के शीघ्र निपटान की गुंजाइश है....नए युग के उपभोक्ता मुद्दों जैसेकि, प्रत्यक्ष बिक्री और ई-कॉमर्स के लिए नियमों का भी प्रावधान है...

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 पिछले उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को निरस्त और प्रतिस्थापित करता है. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री, राम विलास पासवान ने पहली बार 8 जुलाई, 2019 को लोकसभा में एक उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 पेश किया था.

इस विधेयक को 30 जुलाई, 2019 को लोकसभा में और फिर, 6 अगस्त, 2019 को राज्यसभा में पारित किया गया. इस विधेयक को 9 अगस्त, 2019 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की सहमति प्राप्त हुई, और उसी तारीख को भारत के राजपत्र में भी इसे अधिसूचित किया गया था.

2.

स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखनें एवं छात्रों की समस्याओं को सुलझाने के उद्देश्य से भारत सरकार के आत्मनिर्भर अभियान के अंतर्गत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मनोदर्पण अभियान की शुरुआत की गयी है। केंद्रीय मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा विभाग एवं उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से शुरु किये गये मनोदर्पण अभियान को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री, डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने 22 जुलाई 2020 ऑनलाइन लांच किया....

साथ ही, मनोदर्पण अभियान के अंतर्गत टेली काउंसलिंग हेल्पलाइन नंबर 844844032 लांच किया गया, जिस पर देश भर के छात्र सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे के बीच फोन करके से अधिक 500 काउंसलर्स से मदद ले सकते हैं....मानव संसाधन और विकास मंत्रालय का मानना है कि शैक्षणिक महत्व के साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। इससे देश में मानव पूंजी आधार को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, इस पहल से देश में कामकाजी आयु की कुल उत्पादकता में वृद्धि होगी....

“एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय 264 मिलियन से अधिक लोग अवसाद से पीड़ित हैं और लगभग 8 लाख मामले रोजाना आते हैं। इनमें 15 से 29 वर्ष से की आयु के लोग, यानि छात्र होते हैं। हालांकि, ये आकड़े वैश्विक हैं लेकिन महामारी के बीच भारत में काफी मामले उभरते जा रहे हैं,” डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने मनोदर्पण अभियान लांच की शुरुआत करते हुए कहा। “मनोदर्पण पहल के अंतर्गत वेबसाइट, manodarpan.mhrd.gov.in पर मानसिक स्वास्थ्य से सम्बन्धित सामग्री और परामर्शदाता उपलब्ध कराये गये हैं। इससे छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ-साथ आमजन भी मदद ले सकते हैं।“

क्या है मनोदर्पण अभियान?

मनोदर्पण अभियान एक आईटी एवं टेली काउंसलिंग इनिशिएटिव है, जिसके बारे में केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत शुरु किये जाने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 मई को की गयी थी। मनोदर्पण अभियान के माध्यम से 3.75 करोड़ उच्च शिक्षा के छात्रों, 6.3 करोड़ 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों और विद्यालयी शिक्षा के छात्रों के मेंटल हेल्थ, फिजिकल हेल्थ, सोशल हेल्थ और इमोशनल हेल्थ को बनाये रखने के लिए जानकारियां एवं प्रशिक्षित काउंसलर्स के जरिए नि:शुल्क परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा। मनोदर्पण अभियान के अंतर्गत बाद में लाइव चैट और वेबीनार जल्द ही शुरु किया जाएगा। साथ ही, मनोदर्पण अभियान के तहत लाइफ स्किल्स को स्कूलों एवं कॉलेजों के माध्यम से जोड़ा जाएगा और इन लाइफ स्किल्स में छात्रों की पर्फार्मेंस को उनके स्कोर कार्ड में भी जोड़ा जाएगा...

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत को आत्मनिर्भर बनाना है। इसे प्राप्त करने के लिए, भारत सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। आवंटित धन का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाना है जो भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। इसमें कृषि, एमएसएमई, मत्स्य पालन, पशुपालन, डायरी उद्योग आदि शामिल हैं।

भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए, कार्यबल मजबूत और उच्च कुशल होना चाहिए। इस पहल के माध्यम से, भारत अपने भविष्य के कार्यबल को मजबूत करेगा, खासकर COVID-19 के दौरान। छात्रों को शिक्षा के प्रति प्रेरित और केंद्रित रखा जाना चाहिए। इस प्रकार, यह पहल देश को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी...

3.

भारतीय युवाओं के बीच स्वयंसेवा को बढ़ावा देने के लिए युवा मामले और खेल मंत्रालय (MYAS) ने, यूनिसेफ द्वारा गठित एक बहु-हितधारक मंच, यूवाह (YuWaah) के साथ इस साझेदारी के तहत काम करने के लिए एक 'इरादे का बयान' पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस साझेदारी का उद्देश्य भारतीय युवाओं को उत्पादक कार्यों के शिक्षण और प्रशिक्षण के साथ उनका कौशल बढ़ाकर उन्हें एक सक्रिय नागरिक बनाना है. इस कदम से किरेन रिजिजू के भारत में एक करोड़ युवा स्वयंसेवकों को जुटाने और पीएम मोदी के आत्मानिर्भर भारत के आह्वान में योगदान करने में मदद मिलेगी.

भारत और यूनिसेफ के बीच इस साझेदारी का शुभारंभ युवा मामले और खेल मंत्री किरेन रिजिजू की उपस्थिति में सचिव, युवा मामले, उषा शर्मा और भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने किया.

भारतीय युवाओं का प्रोत्साहन

इस आयोजन में, उषा शर्मा ने कहा कि युवा मामले और खेल मंत्रालय में YuWaah को एक अनोखे अवसर के रूप में देखा जाता है, जो युवाओं के लिए और युवाओं के साथ युवाओं के सपनों और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एक मंच प्रदान कर सकता है...

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी NSS, NYKS स्वयंसेवकों को एक बड़ा मंच देती है क्योंकि उन्हें वैश्विक प्रयासों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलता है.

भारत में यूनिसेफ के प्रतिनिधि ने यह भी दावा किया है कि, भारत में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों तथा युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के बीच इस साझेदारी के माध्यम से YuWaah भारत के युवा लोगों को अपने एजेंडा का निर्माण और विकास का नेतृत्व करने के द्वारा अपना समर्थन देगा.

यूनिसेफ और MYAS के बीच भागीदारी

इस नई साझेदारी से संयुक्त राष्ट्र और खेल मंत्रालय को लाभ होगा कि वे युवाओं के साथ मिलकर काम करें और भारत में युवाओं के लिए शिक्षा तथा बेरोजगारी जैसी चुनौतियों से निपटने के साथ इन युवाओं को कुशल बनाने के लिए विभिन्न समाधानों को सह-निर्मित और लागू करें.

इस भागीदारी में भारतीय युवाओं को उद्यमिता में सहयोग देना, उनका कौशल बढ़ाना, आकांक्षात्मक सामाजिक-आर्थिक अवसरों के साथ संबंध बनाना, युवाओं को करियर मार्गदर्शन सहायता प्रदान करना, युवा लोगों के बीच नागरिक भागीदारी, नीति हितधारकों और युवा लोगों के बीच प्रतिक्रिया तंत्र की स्थापना, प्रत्यक्ष संवाद का समर्थन, और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए NSS और NYKS कैडर और स्वयंसेवक बल की क्षमता का निर्माण करने के लिए सहयोग शामिल होगा.

किरन रिजिजू ने इस साझेदारी पर टिप्पणी करते हुए यह कहा है कि, इस चुनौतीपूर्ण समय में यह बहुत उपयुक्त है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि, उन्हें भरोसा है कि यह हमारी मौजूदा नीतियों पर पूरा ध्यान देगा. भारत सरकार युवाओं की राय और विचारों को सुनने के लिए प्रतिबद्ध है और सोचने के ये नए तरीके ऐसे हैं जो भारत की आगामी चुनौतियों का समाधान करने में हमारी बहुत सहायता करेंगे.

4.

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पशु कल्याण बोर्ड (Animal Welfare Board– AWB) को सर्कस में रखे गये जानवरों की संख्या का पता लगाने के लिये तत्काल एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया है....कोविड-19 महामारी के कारण प्रदर्शन करने में असमर्थ होने पर उन्हें नजदीक के प्राणि उद्यानों में भेजे जाने पर भी विचार करने के लिए कहा गया है....न्यायालय ने अन्य संबंधित हितधारकों को भी नोटिस जारी किया है तथा उन्हें दो सप्ताह की अवधि में उत्तर देने का निर्देश दिया है....

आपको बता दें अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया...याचिका में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के दौरान सर्कस के दिवालिया हो जाने के कारण वहां जानवर जोखिम में हैं..

यह याचिका 'फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल्स प्रोटेक्शन' (Federation of Indian Animals Protection– FIAPO) द्वारा दायर की गई थी। यह फेडरेशन जीव अधिकारों पर एक दशक से अधिक समय से काम कर रहे 100 से अधिक संगठनों का एक समूह है....

याचिका में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 21 और 27 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। ये धाराएं सर्कस से जुड़े कार्यों के लिये जानवरों के प्रदर्शन तथा उनके प्रशिक्षण से सम्बन्धित हैं...इसके अतिरिक्त याचिकाकर्ताओं ने, सर्कस में 'कलाकार जानवरों' के रूप में जानवरों के पंजीकरण की अनुमति देने तक 'पशु प्रदर्शन नियम (Performing Animal Rules) 1973 तिहात्र , तथा 'पशु प्रदर्शन (पंजीकरण) नियम, 2001' को भारत के संविधान तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के विरुद्ध घोषित किये जाने की मांग की है...

COVID-19 महामारी के कारण, पूरे देश में सर्कस भी काफी बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं, कई मालिकों ने सर्कसों को उनके हाल पर छोड़ दिया है, जिससे इन सर्कसों के जानवरों की स्थिति बहुत ख़राब हो चुकी है...स्थिति को देखते हुए, सक्षम अधिकारियों के लिए, सर्कसों से इन जानवरों को मुक्त कराने, स्वास्थ्यलाभ कराने तथा इसकेलिए पुनर्वास हेतु उपयुक्त योजना तैयार करनी चाहिए...

अंतरिम राहत के रूप में, भारत में संचालित सभी सर्कसों से सभी जानवरों को अधिकारियों द्वारा हिरासत में लेना चाहिए तथा उनके स्थानांतरण और कल्याण हेतु उचित व्यवस्था की जानी चाहिए...

बताते चलें की भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन, वर्ष 1962 बासठ में पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 4 के तहत किया गया था....यह एक वैधानिक सलाहकार निकाय है, तथा यह भारत सरकार को पशु कल्याण विधानों पर परामर्श प्रदान करता है...भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का आरम्भ प्रसिद्ध मानवतावादी श्रीमति रुक्मिणी देवी अरुंडेल के नेतृत्व में किया गया था...

5.

कोरोनावायरस महामारी के दौरान, यौनकर्मी, ट्रांसजेंडर, समलैंगिक एवं उभयलैंगिक, एचआईवी / एड्स से पीड़ित व्यक्तियों ने आजीविका श्रोतों से वंचित होने तथा COVID-19 आपातकालीन राहत कार्यो में सरकार तथा बहुपक्षीय एजेंसियों द्वारा अनदेखी किये जाने के विरुद्ध 'एड्स, तपेदिक और मलेरिया से लड़ने हेतु वैश्विक कोष' (Global Fund to Fight AIDS, Tuberculosis and Malaria- GFATM) में याचिका दायर की है...याचिकाकर्ताओं ने GFATM से, आपातकालीन स्थिति में जीवित रहने हेतु आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए COVID-19 राहत कोष से सहायता प्रदान करने हेतु सरकार के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।

GFTAM क्या है

GFTAM को आमतौर पर 'ग्लोबल फंड' के रूप में जाना जाता है। इसका उद्देश्य, संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायता करने हेतु 'एचआईवी / एड्स, तपेदिक और मलेरिया' महामारी को समाप्त करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों को आकृष्ट करना, उपयोग करना तथा निवेश करना है..

वर्ष 2002 में स्थापित, ग्लोबल फंड सरकारों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र तथा बीमारियों से प्रभावित लोगों के मध्य एक साझेदारी है...GFTAM का सचिवालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है..वर्ष 2001 में हुए अपने शिखर सम्मेलन में G8 समूह ने औपचारिक रूप से ग्लोबल फंड के निर्माण की आवश्यकता का समर्थन किया था।

ग्लोबल फंड का गठन, जनवरी 2002 में, स्विस कानून के तहत एक स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संस्था के रूप में किया गया था, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इसके प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया था।

जनवरी 2009 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रशासनिक सेवाओं को समाप्त कर दिया गया, इसके पश्चात से 'ग्लोबल फंड' प्रशासनिक रूप से स्वायत्त संगठन के रूप में कार्य कर रहा है।

'ग्लोबल फंड' एक कार्यान्वयन एजेंसी से अधिक एक वित्तपोषण तंत्र है....इसके कार्यक्रमों को सदस्य देशों के स्वास्थ्य मंत्रालयों द्वारा कार्यान्वित किया जाता है, तथा ग्लोबल फंड सचिवालय इन कार्यक्रमों की निगरानी करता है।

ग्लोबल फंड आवश्यकताओं के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र, सदस्य देशों के हितधारकों, बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों आदि को मिलाकर बनायी गई समन्वय समितियों, तथा देश-स्तरीय समितियों द्वारा कार्यान्वयन की देखरेख करता है।

अनुदान संचयन (Fundraising):

इस कोष में, सार्वजनिक क्षेत्र का योगदान लगभग 95 प्रतिशत है; शेष 5 प्रतिशत का योगदान निजी क्षेत्र अथवा 'प्रोडक्ट रेड' जैसी वित्तीय पहलों के माध्यम से किया जाता है।

6.

हाल ही में, भारत के रक्षा मंत्रालय द्वारा, इस साल के अंत में, बंगाल की खाड़ी में होने वाले 'जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका' के साथ होने वाले त्रिपक्षीय 'मालाबार नौसेना अभ्यास' में ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करने के विषय पर चर्चा की गयी..हालांकि, अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है,लेकिन ऑस्ट्रेलिया को नौसेना अभ्यास में सम्मिलित किये जाने के संकेत मिले हैं।

साल 2007 के बाद पहली बार 'क्वाड समूह' (Quad group) के सभी सदस्य राष्ट्र संयुक्त सैन्याभ्यास में भाग लेंगे, यह प्रत्यक्ष रूप से चीन के विरुद्ध शक्ति प्रदर्शन होगा...

Quad यानी क्वड्रीलेटरल सिक्टोरिटी डायलॉग. इसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका शामिल हैं. इसका मकसद है कि एशिया-प्रशांत में शांति स्थापित हो. किसी तरह का युद्ध न हो... बतातें चलें मालाबार युद्धाभ्यास का आरंभ भारत और अमेरिका के मध्य वर्ष 1992 बयानवे में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुआ था, वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान को सामिलित किया गया और इसके पश्चात यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया...

'क्वाड समूह' के प्रति चीन की आशंकाएं

एक report के मुताबिक बीजिंग, काफी समय से भारत-प्रशांत क्षेत्र में इन लोकतांत्रिक देशों के गठबंधन का विरोध करता रहा है...चीन, इसे एशियाई-नाटो (Asian-NATO) चतुष्पक्षीय गठबंधन के रूप में देखता है, जिसका उद्देश्य चीन के उत्थान को रोकना है...इसके अतिरिक्त, वर्तमान में भारत तथा चीन संबंध तनावपूर्ण हैं, ऐसे में 'मालाबार युद्धाभ्यास' में ऑस्ट्रेलिया को सम्मिलित करना, चीन के विरुद्ध भारत का एक कदम माना जा सकता है।

भारत के लिए चुनौतियां:

हाल ही में लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ हुई मुठभेड़ के बाद , कई भारतीय विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत के लिए समुद्री क्षेत्र में अपनी पारंपरिक आत्मरक्षात्मक नीति को छोड़ देने का सही समय है...

भारतीय यथार्थवादी, हिंद महासागर में चीन की चालों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ गठबंधन का समर्थन करते हैं..हालांकि, 'चीन पर अधिक दबाव डालना' तथा 'हिंद महासागर' एवं 'दक्षिण प्रशांत क्षेत्र' में अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना, भारत के लिए भारी भी पड़ सकता है..

वर्तमान में, भारत और चीन के मध्य पूर्वी लद्दाख में सीमा पर शांति बहाली के लिए वार्ता जारी है, ऐसे में नई दिल्ली द्वारा मालाबार युद्धाभ्यास में सम्मिलित होने के लिए ऑस्ट्रेलिया को निमंत्रित करना, बीजिंग के लिए विपरीत संकेत भेज सकता है...अगर चीन प्रत्युत्तर में, पूर्वी हिंद महासागर में अभद्र तरीके से आक्रामक रूख अपनाता है, तो इससे भारत-चीन विवादों में एक नया मोर्चा खुल सकता है...

इसके अलावा बिना सामरिक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के, अमेरिका और जापान के साथ सहयोग से, हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) में भारतीय नौसेना की निवारक क्षमता (deterrence potential) में सुधार नहीं होगा...परिचालनात्मक रूप से भी, क्वाड सदस्यों के साथ बहुपक्षीय संबंधो को प्रारंभ करना दिल्ली के लिए असामयिक हो सकता है...पूर्वी एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में यू.एस. और चीन के बीच सामरिक स्थिति उत्तेजनात्मक है, ऐसी परिस्थितियों में, क्वाड सैन्य गठबंधन का उपयोग एशिया-प्रशांत सुरक्षा गातिकी में भारत को सम्मिलित करने के लिए किया जा सकता है..

7.

असम में कुदरत की सबसे बड़ी मार पड़ी है...असम बाढ़-आपदा के कारण खतरे की स्थिति में फंसा हुआ है, असम में प्रति वर्ष बड़ी बाढ़ आती है और हर बार कई जाने जाती है, लाखों लोग विस्थापित होते हैं, गाँव, फसलें, बुनियादी ढाँचा आदि सब तबाह हो जाते हैं... इस साल की बाढ़ में, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का लगभग 85 पचासी प्रतिशत क्षेत्र जलमग्न हो गया है...पिछले साल की बाढ़ की तुलना में वर्तमान बाढ़ की स्थिति बेहद ही खराब है...

बतादें चले काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान' असम राज्य के दो जिलों के अंदर बसा एक राष्ट्रीय उद्यान है...इनमें एक जिला एक असम राज्य के नौगांव जिले का कलियाबोर उपखंड तथा दूसरा गोलाघाट जिले का बोकाघाट उपखंड शामिल है...काजीरंगा उद्यान, 378 अठाहत्र वर्ग किमी (146 वर्ग मील) को कवर करता है...यह एक वैश्विक विरासत स्थल है....इस पार्क में एक सींग वाले गैंडों की विश्व की दो-तिहाई आबादी यहां निवास करती है...काजीरंगा में वैश्विक बाघों के संरक्षित क्षेत्रों के बीच सर्वोच्च घनत्व है और 2006 में इसे एक टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था...

साल 1988 अठासी, 1998 अठानवे तथा 2004 की बाढ़ सबसे भयावह थी; वर्ष 2004 की बाढ़ से 12.4 मिलियन लोगों का जीवन प्रभावित हुआ तथा 251 इक्यावन लोगों की मौत हुई थी...वर्तमान बाढ़, अब तक 57 सत्तावन लाख लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है, और विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ की सबसे खराब स्थिति आना अभी बाकी है...

असम में बाढ़ आने के प्रमुख कारण

ब्रह्मपुत्र नदी कुछ स्थानों को छोड़कर शेष असम में कई शाखाओं में विभाजित है, तथा अपनी प्रकृति में अस्थिर है। नदी की अस्थिरता का मुख्य कारण नदी में गाद का भारी मात्रा में जमाव तथा खड़ी ढलान हैं।

भूकंप/ भूस्खलन: असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के कुछ अन्य हिस्सों में प्रायः भूकंप आते रहते हैं, जिससे काफी मात्रा में भूस्खलन होता है। भूकंप तथा परिणामी भूस्खलन से नदियों में बहुत अधिक मलबा पहुँचता हैं, जिस कारण नदी का तल ऊँचा हो जाता है।

तट अपरदन (Bank Erosion): असम को ब्रह्मपुत्र तथा बराक नदियों के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों के तटीय कटाव का सामना करना पड़ता है। अनुमानतः प्रतिवर्ष लगभग 8000 हेक्टेयर भूमि कटाव से नष्ट हो जाती है।

बाँध (Dams): मानव निर्मित कारणों में, ऊंचाई पर निर्मित किये गए बांधो से पानी का छोड़ा जाना, असम क्षेत्र में बाढ़ का प्रमुख कारण है।

गुवाहाटी की स्थलाकृति– इसकी आकृति एक कटोरे के समान है – यह जल भराव के लिए अतिसंवेदनशील स्थिति है।

शहरी क्षेत्रों के अनियोजित विस्तार

नदियों का मार्ग परिवर्तन

बाढ़ नियंत्रण के लिए किये गए सरकारों द्वारा प्रयास

मानसून के दौरान असम में बार-बार बाढ़ आना एक सामान्य घटना है। पारिस्थितिकीविदों का कहना है कि बाढ़ के पानी से राज्य के जलोढ़ क्षेत्रों में फसली और उपजाऊ मृदा पुनर्युवनित (rejuvenated) हुई है..

राज्य, मुख्य रूप से बाढ़-नियंत्रण के लिए तटबंधों पर निर्भर रहते है। बाढ़ नियंत्रण का यह उपाय, असम में 1950 के दशक की शुरुआत में पेश किया गया था, उस समय तक ब्रह्मपुत्र तथा अधिकांश भारतीय नदियों के जल-विज्ञान (Hydrology) को समुचित रूप से नहीं समझा गया था...इस साल अब तक राज्य के कई तटबंध बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. जारी किया गया पीएम स्‍वनिधि एप

रेहड़ी-पटरी तथा फेरी लगाने वाले दुकानदारों को आसानी से लघु ऋण की सुविधा देने हेतु प्रधानमंत्री स्‍ट्रीट वेंडर्स आत्‍मनिर्भर निधि (पीएम स्‍वनिधि) योजना का मोबाइल एप जारी किया गया है। पीएम स्‍वनिधि मोबाइल एप का उद्देश्‍य छोटे दुकानदारों के लिये ऋण आवेदन की प्रक्रिया को आसान बनाना और संबंधित संस्‍थानों तक सरल पहुँच प्रदान करना है। इस मोबाइल एप के माध्यम से योजना को बेहतर तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी और लघु ऋण तक छोटे दुकानदारों की पहुँच आसान होगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) की शुरुआत छोटे दुकानदारों और फेरीवालों (Street Venders) को आर्थिक रूप से सहयोग प्रदान करने हेतु की गई थी। इस योजना के तहत छोटे दुकानदार 10,000 रुपए तक के ऋण के लिये आवेदन कर सकते हैं। ऋण प्राप्त करने के लिये आवेदकों को किसी प्रकार की ज़मानत या कोलैट्रल (Collateral) की आवश्यकता नहीं होगी। इस योजना के तहत प्राप्त हुई पूंजी को चुकाने के लिये एक वर्ष का समय दिया जाएगा, विक्रेता इस अवधि के दौरान मासिक किश्तों के माध्यम से ऋण का भुगतान कर सकेंगे।

2. साइबर सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग के लिये भारत-इज़राइल समझौता

भारत और इज़राइल ने कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण तेज़ी से हो रहे डिजि टली करण के बीच साइबर खतरों से निपटने में सहयोग के लिये एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। यह समझौता दोनों पक्षों के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर सहयोग को मज़बूत करने और साइबर खतरों से संबंधित सूचना के आदान-प्रदान के दायरे को विस्तृत करने में अहम् भूमिका निभाएगा। इस समझौते के अंतर्गत साइबर सुरक्षा पर वार्ता, क्षमता निर्माण में सहयोग और साइबर सुरक्षा से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिये एक रूपरेखा निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इज़राइल यात्रा के दौरान साइबर सुरक्षा को सहयोग के एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया था और अगले वर्ष इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) की भारत यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच इस विषय को लेकर एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किये गए थे।

3. भारत और भूटान के बीच खोला गया जयगाँव-पसाखा व्यापार मार्ग

हाल ही में भारत और भूटान द्वारा पश्चिम बंगाल में जयगाँव (भारत) और भूटान के पासाखा के बीच एक नया व्यापार मार्ग खोला गया। यह नया व्यापार मार्ग मौजूदा COVID-19 महामारी के दौर में दोनों देशों के संबंधों खास तौर पर व्यापार संबंधों को मज़बूत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही इस नए मार्ग के खुलने से पहले से मौजूदा मार्ग पर वाहनों के दबाव को कम किया जा सकेगा। गौरतलब है कि भारत और भूटान के बीच राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1968 अडसठ में थिम्पू (Thimphu) में भारत के प्रतिनिधि की नियुक्ति के साथ हुई थी, हालाँकि साल 1949 उनचास में ही दोनों देशों के मध्य मित्रता और सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे...भारत-भूटान व्यापार और पारगमन समझौता, 1972 बहत्र्र (India-Bhutan Trade and Transit Agreement,1972) दोनों देशों के मध्य मुक्त-व्यापार प्रणाली की स्थापना करता है, इस समझौते को आखिरी बार साल 2016 में नवीनीकृत किया गया था।

4. लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए शुरू किया गया प्रधानमंत्री पुरस्कार 2020

लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए नए संशोधित प्रधानमंत्री पुरस्कारों का आरंभ किया गया है। पुरस्कार नामांकन के लिए चार प्रमुख श्रेणियों- जिला प्रदर्शन संकेतक कार्यक्रम, नवाचार सामान्य श्रेणी, आकांक्षी जिला कार्यक्रम और नमामि गंगे कार्यक्रम, का निर्धारण किया गया है...योजना में पहली बार, नमामि गंगे कार्यक्रम हेतु जिला स्तर के अधिकारियों के प्रयासों को सम्मिलित किया गया है। भारत सरकार द्वारा 'लोक प्रशासन में उत्कृष्टता हेतु प्रधानमंत्री पुरस्कार' की स्थापना वर्ष 2006 में की गयी थी। साल 2014 में, प्राथमिकता आधारित कार्यक्रमों, जिला कलेक्टरों के प्रदर्शन को मान्यता देने हेतु इस योजना का पुनर्गठन किया गया था। वर्ष 2020 में जिलों के आर्थिक विकास के सन्दर्भ में जिला कलेक्टरों के प्रदर्शन को मान्यता प्रदान करने के लिए यह योजना पुनः संशोधित की गयी है।

5. भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के जोनल मास्टर प्लान को मंज़ूरी

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र की अधिसूचना के लिए जोनल मास्टर प्लान (Zonal Master Plan– ZMP) को मंजूरी प्रदान कर दी गई है। यह जोनल मास्टर प्लान 'गौमुख से उत्तराकाशी' तक 4179 उनासी.59 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। इस मंजूरी से चारधाम परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाने का रास्ता भी खुलेगा। जोनल मास्टर प्लान (ZMP), वाटरशेड के नज़रिये पर आधारित है और इसमें वन एवं वन्यजीव, जल प्रबंधन, सिंचाई, ऊर्जा, पर्यटन, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, सड़क अवसंरचना आदि क्षेत्रों में प्रशासन भी सम्मिलित है....अधिसूचित भागीरथी पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (Bhagirathi Eco- Sensitive Zone) ऊपरी हिमालय में स्थित, संवेदनशील गंगा- हिमालय बेसिन है। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र गढ़वाल मध्य हिमालय (lesser Himalayas) तथा वृहत हिमालय (Great Himalaya) के अंतर्गत आता है।

6. “मेडिकैब”: IIT मद्रास द्वारा पोर्टेबल अस्पताल विकसित

आईआईटी-मद्रास समर्थित स्टार्टअप मॉड्यूलस हाउसिंग ने पोर्टेबल अस्पताल इकाई विकसित की है। इस यूनिट को कहीं भी ले जाया जा सकता है और 2 घंटे के भीतर स्थापित किया जा सकता है। इस पोर्टेबल अस्पताल को “मेडिकैब” नाम दिया गया है। यह पोर्टेबल अस्पताल केरल के वायनाड जिले में लांच किया जा रहा है, जहां इन इकाइयों को COVID-19 रोगियों के इलाज के लिए तैनात किया जा रहा है। मेडिकैब फोल्डेबल है और इसमें मेडिकल जोन, आइसोलेशन रूम, डॉक्टर्स रूम और ट्विन बेड आईसीयू जैसे चार जोन है। इस परियोजना को आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल द्वारा समर्थित किया गया था।

7. भारत-अमेरिका आयोजित कर रहे हैं PASSEX अभ्यास

20 जुलाई, 2020 को अमेरिकी नौसेना के वाहक यूएसएस निमित्ज ने मध्य पूर्व में भारतीय युद्धपोतों के साथ समुद्री अभ्यास किया। PASSEX अभ्यास एक ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव है।भारतीय नौसेना ने जापान मैरिटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स और फ्रांसीसी नौसेना के साथ इसी तरह का PASSEX संचालित किया है। PASSEX एक Passage Exercise है।यूएसएस निमित्ज (दुनिया का सबसे बड़ा विमान वाहक) दक्षिण चीन सागर से अपने रास्ते पर था। नौसैनिक वाहक ने हाल ही में यूएसएस रोनाल्ड रीगन के साथ दक्षिण चीन सागर में आयोजित सैन्य अभ्यास में भाग लिया था

8. भारत के पहले चार्जिंग प्लाजा का किया गया उद्घाटन

20 जुलाई, 2020 को बिजली, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आरके सिंह ने नई दिल्ली में चेल्म्सफोर्ड क्लब में पहले सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्लाजा का उद्घाटन किया। चार्जिंग प्लाजा के साथ, मंत्री ने RAISE का भी उद्घाटन किया। RAISE का पूर्णस्वरुप Retrotrofit of Air-conditioning to improve Indoor Air Quality for Safety and Efficiency है। यह ईईएसएल और यूएसएआईडी की संयुक्त पहल है। चार्जिंग प्लाजा की स्थापना EESL (एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड) और NDMC (नई दिल्ली नगरपालिका परिषद) द्वारा की गई थी। प्लाजा में विभिन्न विशिष्टताओं के पांच इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर्स हैं।RAISE पहल पूरे देश में कार्यक्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता के मुद्दों को दूर करेगी। RAISE को यू.एस. एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) मैत्री कार्यक्रम की साझेदारी में लॉन्च किया गया था। RAISE ने हवा की गुणवत्ता के मापदंडों में 80% सुधार दिखाया है।

9. दिल्ली में लॉंच की गई मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना

21 जुलाई, 2020 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने “मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना” लॉंच की। इस योजना का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को घर पर राशन पहुंचाने में मदद करना है। यह योजना 6-7 महीने तक चलाई जाएगी। इस योजना के तहत दिल्ली सरकार गेहूं, चावल, आटा और चीनी को हाइजीनिक रूप से भरे बैग में डिलीवर करेगी। पैकेट लोगों के दरवाजे पर पहुंचाए जायेंगे। दिल्ली सरकार इसके साथ वन नेशन वन राशन कार्ड योजना और मुख्‍यमंत्री घर घर राशन योजना भी शुरू करेंगी। इस योजना से राजधानी के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत रियायती राशन प्रदान किया जा रहा है।

10. गृह मंत्री अमित शाह ने लांच किया 'वृक्षारोपण अभियान'

23 जुलाई, 2020 को गृह मंत्री अमित शाह ने “वृक्षारोपण अभियान” को लांच किया। उन्होंने 38 अड़तीस जिलों में फैले 130 से अधिक स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से योजना का शुभारंभ किया। इस योजना में खनन क्षेत्रों में पेड़ पौधे लगाकर हरित स्थान बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इस योजना का शुभारंभ केंद्रीय कोयला और खान मंत्री श्री प्रहलाद जोशी की उपस्थिति में किया गया। श्री अमित शाह ने छह इको पार्क और पर्यटन स्थलों का शिलान्यास भी किया। पर्यटन स्थल और इको पार्क आस-पास के क्षेत्रों में साहसिक, मनोरंजन, वाटर स्पोर्ट, बर्ड वॉचिंग आदि के लिए मार्ग दर्शन प्रदान करेंगे। ये स्थान राजस्व उत्पन्न करेंगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार भी पैदा करेंगी। कोयला मंत्रालय द्वारा वृक्षारोपण अभियान लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत खानों, कार्यालयों, कॉलोनियों और लिग्नाइट और कोयला सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य स्थायी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जायेगा।

11. अभिनेता सोनू सूद ने लांच किया “प्रवासी रोज़गार एप्प”

22 जुलाई, 2020 को अभिनेता सोनू सूद ने “प्रवासी रोज़गार एप्प” लॉन्च की। यह एप्लीकेशन नौकरियों को खोजने और विशिष्ट नौकरी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पेशकश करने के लिए सभी आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। सोनू सूद लॉकडाउन के दौरान से प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं। “प्रवासी रोज़गार” एप्लीकेशन सही नौकरी के अवसर खोजने के लिए श्रमिकों के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा। यह एप्प नि: शुल्क है। यह नौकरियों को खोजने के लिए सभी आवश्यक लिंकेज और जानकारी प्रदान करेगा। इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में 500 से अधिक कंपनियां हैं जो परिधान, निर्माण, हेल्थ केयर, बीपीओ, इंजीनियरिंग, ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स, आदि से संबंधित हैं। एक टोल फ्री नंबर भी लॉन्च किया गया है...जिसे 24/7 संचालित किया जायेगा...सोनू सूद ने बसों, ट्रेनों और उड़ानों के माध्यम से फंसे हुए प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचने में मदद की है।

12. प्रधानमंत्री ने शुरू की मणिपुर जलापूर्ति परियोजना

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मणिपुर के लिये एक जलापूर्ति परियोजना (Water Supply Project) की आधारशिला रखी। गौरतलब है कि इस परियोजना केज़रिये राज्य के लगभग 25 शहरों और 1700 गाँवों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इस परियोजना को न केवल वर्तमान बल्कि आगामी 20-22 वर्षों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इस परियोजना से न केवल लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा, बल्कि हज़ारों लोगों को रोज़गार भी मिलेगा। इस संबंध जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मणिपुर जलापूर्ति परियोजना वर्ष 2024 तक 'हर घर जल' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये राज्य सरकार के ठोस प्रयासों में एक अहम कदम है। गौर तलब है की केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में 'जल जीवन मिशन' की घोषणा की थी, इस मिशन का प्रमुख उद्देश्य साल 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में पाइप जलापूर्ति (हर घर जल) सुनिश्चित करना है।

13. उत्तराखंड सरकार ने शुरू की वेस्ट टू एनर्जी' पहल

उत्तराखंड सरकार ने 'वेस्ट टू एनर्जी' नाम से एक पहल की शुरुआत की है, जिसके तहत राज्य सरकार राज्य में उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट को बिजली में बदलने का कार्य करेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर नीति का एक मसौदा तैयार कर लिया है और जल्द ही इस मुद्दे को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की एक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें इस पहल की आगे की रणनीति तय की जाएगी। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में उत्तराखंड में प्रतिदिन 900 टन अपशिष्ट पैदा होता है। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के अनुसार, राज्य में उत्पन्न अपशिष्ट के माध्यम से लगभग 5 मेगावाट बिजली पैदा की जा सकती है और राज्य में प्रदूषण पर अंकुश लगाया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में ठोस अपशिष्ट के निपटान के लिये लैंडफिल की अनुपलब्धता की समस्या को भी हल करना है। बीते माह UEPPCB ने आगामी वाले वर्षों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिये राज्य ईंधन नीति को भी मंज़ूरी दी थी, जिसमें आगामी कुछ वर्षों में ईंधन के रूप में पेट्रोलियम कोक (Petroleum Coke) के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना शामिल था, जिसका वायु प्रदूषण पर बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ता है। इससे पूर्व इसी वर्ष जनवरी माह में देहरादून शहर को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के निर्धारित मानकों से लगभग 11 गुना अधिक प्रदूषित पाया गया था।

14. करंजा सौर ऊर्जा संयंत्र का किया गया उद्घाटन

हाल ही में वाइस एडमिरल अजीत कुमार ने पश्चिमी नौसेना कमान के लिये दो मेगावाट क्षमता वाले पहले सौर ऊर्जा संयंत्र का ई-उद्घाटन किया है। इस संयंत्र की स्थापना नौसेना स्टेशन करंजा में की गई है और इस क्षेत्र के लिये यह सबसे बड़े सौर उर्जा संयंत्रों में से एक है। इस सौर उर्जा संयंत्र में 100 प्रतिशत स्वदेशी रूप से विकसित किये गए सौर पैनल, ट्रैकिंग टेबल और इनवर्टर लगे हुए हैं। यह संयंत्र कंप्यूटरीकृत निगरानी और नियंत्रण के साथ-साथ, नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए ग्रिड के साथ परस्पर जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि भारतीय नौसेना की यह परियोजना नौसेना स्टेशन में बिजली आपूर्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों का उपयोग करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।