(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (15th - 21st May 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (15th - 21st May 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग.... मीटिंग में आत्मनिर्भर पैकेज को मिली हरी झंडी...प्रधानमंत्री आवास योजना योजना, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों जैसे अन्य योजनाओं को मिली औपचारिक मंजूरी....
  • सीमा पर भारतीय और चीन सैनिकों के बीच हुई झड़प... अब पांगोंग त्सो लेक में दोनों देशों के सैनिकों में ठनी.. चीनी सैनिकों ने पांगोंग लेक में अपनी बोट-पैट्रोलिंग बधाई....
  • अम्फान तूफ़ान ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मचाई तबाही....जान माल का हुआ नुक्सान...प्रभावित राज्यों में काफी तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया..
  • स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई वर्ल्ड हेल्थ असेंबली की 73वीं बैठक….कोविड 19 की जाँच के प्रस्ताव को मंजूरी... कार्यकारी मंडल का सदस्य चुना गया भारत... करीब एक साल के लिए भारत के हाथ होगी अध्यक्षता....
  • भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख और कालापानी को लेकर बढ़ा विवाद ...लिपुलेख के रास्ते भारत-चीन सड़क मार्ग के उद्घाटन के बाद से बौखलाया नेपाल... जारी किया नया राजनीतिक नक्शा, लिपुलेख और कालापानी को भी जोड़ा...
  • नाबार्ड ने खरीफ और प्री-मानसून संचालन के लिए 20,500 करोड़ रुपये के फंड जारी किए....यह फण्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण विकास बैंकों के लिए फ्रंट-लोडिंग संसाधनों के रूप में कार्य करेगा...
  • भविष्य की हर तरह की चुनौती से निपटने की तैयारी में भारत.....भारतीय तटरक्षक बल के 'सचेत' और दो इंटरसेप्टर पोतों का किया जलावतरण... समुद्री क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच इनकी तैनाती ..भारत की सुरक्षा को मजबूती देगी

खबरें विस्तार से:

1.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए....प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के इस दौर में भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान किया था.... आत्मनिर्भर भारत अभियान में मोदी सरकार ने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हाथ में अधिक पैसे पहुंचाने की कोशिश की है.

20 मई, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में शुरू किए गए आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत कई पहलों को मंजूरी दी...

खाद्यान्न का आवंटन

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 करोड़ से अधिक प्रवासियों को केंद्रीय पूल से खाद्यान्न आवंटित करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। प्रवासियों को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलोग्राम अनाज प्रदान किया जायेगा। यह कार्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत किया जायेगा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने भारत सरकार को ऐसा कदम उठाने का अधिकार दिया है...प्रवासियों को मई और जून के महीनों के लिए प्रणाली के तहत खाद्यान्न प्रदान किया जायेगा।.. इस योजना को लागू करने के लिए भारत सरकार ने 2,982 बयासी करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

कोयला नीलामी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने आत्म निर्भर भारत अभियान के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए कोयला नीलामी विधि की घोषणा की। इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है..यह नई विधि पर्याप्त प्रतिस्पर्धा की अनुमति देती है जो कोयला ब्लॉकों के तेजी से विकास में मदद करेगी...नई विधि ने कोल बेड मीथेन के उपयोग की भी अनुमति दी है। कोकिंग कोल लिंकेज का कार्यकाल बढ़ाकर 30 साल कर दिया गया है..

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन द्वितीय आदेश, 2020

इस आदेश के अनुसार राज्य में सभी स्तर की नौकरियों के लिए अधिवास की स्थितियों को बदल दिया गया है।

विशेष तरलता योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में चलनिधि प्रवाह को बढ़ाने के लिए आवास वित्त निगमों और गैर-बैंकिंग वित्त निगमों के लिए विशेष तरलता योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत, एक ‘स्पेशल पर्पज व्हीकल स्थापित किया जायेगा जो स्ट्रेस्ड एसेट फंड का प्रबंधन करेगा।

प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना के तहत उपायों को लागू करने के लिए अपनी मंजूरी दे दी है। यह योजना नीली क्रांति लाएगी। इसे 5 साल की अवधि के लिए लागू किया जायेगा..

यह योजना 20,050 करोड़ की अनुमानित राशि के साथ केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है। इसका उद्देश्य मछली, बुनियादी ढांचे और नियामक ढांचे की उत्पादकता को बढ़ाना है।

सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के गठन की योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत भारत सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसका व्यय केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में साझा किया जायेगा।

इस योजना का उद्देश्य सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों तक वित्त की पहुंच को बढ़ाना है। यह आदिवासी जिलों में लघु वन उपज पर भी ध्यान केंद्रित करेगा…

प्रधानमंत्री वय वंदना योजना को तीन साल बढ़ाकर मार्च 2023 तक करने की मंजूरी दे दी गई। यह स्कीम इस साल 31 मार्च को खत्म हो गई थी...छोटे उद्योगों (एमएसएमई) के लिए 3 लाख करोड़ रुपए का एक्स्ट्रा फंड भी मंजूर कर दिया गया। कोविड-19 रिलीफ पैकेज के में सरकार ने पिछले दिनों इसकी घोषणा की थी…ये स्कीम 60 साल और ज्यादा उम्र के लोगों के लिए है। इसके तहत सीनियर सिटीजन 10 साल के लिए निवेश कर मासिक या सालाना पेंशन का विकल्प ले सकते हैं...

2.

भारत और चीन के बीच मौजूद सीमा जिसे लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल या एल ऐ सी के नाम से भी जाना जाता है दशकों से विवाद की वजह रही है। एल ऐ सी को तीन हिस्सों में बांटकर देखा जाता है पश्चिमी ,मध्य और पूर्वी क्षेत्र। ऐसे कई इलाके है जहां दोनों देशों के बीच एल ऐ सी की बिलकुल सही स्थिति को लेकर विवाद है। भारत का दावा है की एल ऐ सी की लम्बाई 3488 अट्ठासी किलोमीटर है जबकि चीन का मानना है यह महज़ 2000 किलोमीटर लम्बी है..

दोनों ओर की सेनाएं अपने हिसाब से एल ऐ सी की सीमा के मुताबिक़ गश्त के ज़रिये इस इलाके में ज़ोर आजमाइश की फ़िराक में रहती हैं...इसके मद्देनज़रदोनों देशों के बीच छोटे मोठे विवाद जन्म लेते रहते हैं। इसकी मिसाल हाल ही में सिक्किम के नाकु ला इलाके में हुई झड़प के तौर पर दी जा सकती है

यूँ तो एल ऐ सी का ज़्यादातर हिस्सा ज़मीन से होकर गुज़रता है लेकिन इसका कुछ हिस्सा पांगोंग सो झील से भी होकर गुज़रता है। पानी में मौजूद एल ऐ सी का ज़्यादातर हिस्सा ऐसा है जिसको लेकर चीन और भारत में अभी भी विवाद बना हुआ है।

एलएसी को लेकर दोनों देशों की अपनी अपनी समझ है और इस वजह से दोनों के बीच टकराव होते रहते हैं. लद्दाख एलएसी करीब 134 चौंतीस किलोमीटर पांगोंग सो झील के बीच से गुजरती है और भारतीय सेना झील में करीब 45 पैंतालिस किलोमीटर के इलाके पर पहरा देती है. भारतीय सेना का कहना है कि चीनी सिपाही हर साल सैकड़ों बार एलएसी का उल्लंघन कर भारत की सीमा में घुस आते हैं. कई बार स्थिति गंभीर भी हो जाती है.

क्यों है पांगोंग सो झील इतनी अहम्

तिब्बती में सो का अर्थ झील होता है। पांगोंग सो लद्दाख में 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित एक लंबी, संकरी और गहरी झील है। यह चारों तरफ से जमीन से घिरी हुई है। यह झील रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों देश लगातार इस झील में पट्रोलिंग करते रहते हैं।पैंगोंग सो झील 1962 बासठ के बाद से ही जब-तब दोनों देशों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहती है। 1962 बासठ में चीन ने इसी इलाके में भारत पर मुख्य हमला बोला था।अगस्त 2017 में पैंगोंग सो के किनारे भारत और चीन के सैनिक भिड़ गए थे।

झील की भौगौलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद अहम बनाती है। ये झील चुशूल के रास्ते में पड़ती है, जो कि भारत का अहम हिस्सा है. चुशूल एक गांव है, जो बॉर्डर से 15 किलोमीटर दूर है. आर्मी की पोस्ट है यहां पर. झील के उत्तरी और दक्षिणी किनारे को ‘चुशूल अप्रोच’ कहते हैं, जिसका इस्तेमाल चीन भारत में घुसने में कर सकता है. 1962 बासठ के युद्ध में चुशूल में ही चीन ने सबसे बड़ा हमला किया था. रेज़ांग ला पर भारतीय सेना डटकर लड़ी.....13 कुमाऊं की अहीर रेजिमेंट के मेजर शैतान सिंह शहीद हो गए थे.

जानकारों के मुताबिक चीन अगर भविष्य में कभी भारतीय क्षेत्र पर हमले की हिमाकत करता है तो चुशुल अप्रोच का इस्तेमाल करेगा क्योंकि इसका रणनीतिक महत्व है। पांगोंग झील तिब्बत से लेकर भारतीय क्षेत्र तक फैली है। इसका पूर्वी हिस्सा तिब्बत में है। इसके 89 नवासी किलोमीटर यानी करीब 2 तिहाई हिस्से पर चीन का नियंत्रण है। झील के 45 पैंतालिस किलोमीटर पश्चिमी हिस्से यानी करीब एक तिहाई हिस्से पर भारत का नियंत्रण है।चीन ने पैंगोंग सो झील के आस-पास मजबूत सैन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर बना लिया है। झील के किनारों से सटे ऐसे सड़क बना लिए हैं जिनमें भारी और सैन्य वाहन भी आ-जा सकते हैं।

9 मई को नॉर्थ-ईस्ट में सिक्किम के नाकू ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों में झड़प हो गई थी जिसमे सैनिक चोटिल हो गए. हालांकि बाद में बातचीत से मसला सुलझा लिया गया. लेकिन ये कोई नई बात नहीं है. अक्सर उत्तर में लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम की सीमा पर ऐसे तनाव देखने को मिलते हैं. असल में यहां भारत की सीमाएं तिब्बत से लगती हैं. 1914 के शिमला समझौते में ब्रिटिश हुकूमत और तिब्बत के बीच नॉर्थ-ईस्ट के लिए सीमा तय हुई थी, जिसे मैकमोहन रेखा कहते हैं लेकिन चीन इसे मानता नहीं है. चीन का कहना है कि ये समझौता तिब्बत-ब्रिटेन के बीच हुआ था. इसलिए चीन भारत में घुसपैठ करता रहता है. 1962 बासठ के भारत-चीन युद्ध के पीछे सीमा का यही संघर्ष था. थोड़ा पीछे जाएं तो युद्ध की भूमिका तब से ही बन रही थी, जब जवाहरलाल नेहरू ने तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा को भारत में शरण दी थी....

सीमा तय ना होने की वजह से इस तरह के टकराव पहले भी होते रहे हैं। जून-अगस्त, 2017 में भूटान की सीमा पर डोकलाम विवाद चरम पर था। उस साल भारत के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी चीन के सैनिकों ने भाग लेने से मना कर दिया था. ऐसा 2005 के बाद पहली बार हुआ. एक और समारोह, जो 1 अगस्त को चीन में पीपल्स लिबरेशन आर्मी के फाउंडिंग डे पर हुआ करता है, वो भी नहीं हुआ. 19 अगस्त, 2017 को पांगोंग झील पर पथराव-मारपीट की घटना हुई. इसका एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर दोनों तरफ के सैनिक झगड़ते दिखे.

चीन और भारतीय सेनाओं के बीच इस तरह के टकराव आये दिन देखने को मिलते हैं लेकिन इन्हे सुलझाना सिर्फ बातचीत से संभव है। भारत को चाहिए की चीन से पांगोंग त्सो झील में आने वाले एल ऐ सी के हिस्से का निर्धारण करे ताकि सीमा पर सेनाओं के दरमियान विवाद को रोका जा सके। ऐसे समय में जब दोनों देश वैश्विक महामारी के दौर से गुज़र रहे हैं उन्हें सीमा विवाद से अलग हटकर आपस में वैश्विक महामारी के खिलाफ साझा कदम उठाने के बारे में सोचना चाहिए। दोनों देश दक्षिण एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं जिन पर वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाने का दारोमदार भी सबसे ज़्यादा है।

3.

ओडिशा और पश्चिम बंगाल में अम्फान चक्रवात ने जनजीवन तबाह कर दिया ... 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले अम्फान तूफान ...चक्रवाती तूफान अम्फन ने पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा तबाही मचाई. इसकी वजह से बंगाल में करीब दर्जनों लोगों की मौत की खबर है....तूफान ने हजारों घरों को तहस-नहस कर दिया. बड़ी इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा ..हजारों पेड़ उखड़ गए. दीघा, सुंदरवन और उत्तर 24 परगना, दक्षिणी 24 परगना, मिदनापुर और कोलकाता में रहा. .. तूफान के गुजरने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पानी में डूबा नजर आया.....

इस बीच एनडीआरएफ यानी नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फ़ोर्स साथ ही तीनो सेनाओं का कार्य सराहनीय है.......एनडीआरएफ ने सड़कों से पेड़ हटाने से लेकर...प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और दूरसंचार सेवाओं को बहाल करने....

अम्फान की तबाही के बाद अब प्रभावित राज्यों में काफी तेजी से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है....

आपको बता दें पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 19 टीमों को तैनात किया गया...दक्षिण-24 परगना में 6 टीमें, पूर्वी मिदनापुर और कोलकाता में 4 टीमें, उत्तर-24 परगना में 3 टीमें, हुगली और हावड़ा में 1 टीम तैनात किया गया है....

चक्रवात अम्फान के लिए राहत कार्यों में भारतीय वायुसेना की ओर से सहायता बचाव प्रयासों के लिए नोडल केंद्रों पर तुरंत कार्रवाई की.....C130-J, An-32, Mi-17V5, और ALH मालवाहक विमान और हेलीकॉप्टर तैयार किये...

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बारे में

  • NDMA, भारत में आपदा प्रबंधन के लिए शीर्ष प्राधिकरण है. इसकी स्थापना 27 सितंबर 2006 को आपदा अधिनियम, 2005 के माध्यम से की गई थी.
  • NDMA, भारत में आपदा प्रबंधन के लिए नीतियों को लागू करता है. राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), भारत में आपदा प्रबंधन के लिए नीतियां बनाने, दिशानिर्देशों को जारी करने और भारत में आपदाओं से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (SDMAs) के साथ समन्वय का काम करता है.
  • भारत में आपदाओं के प्रबंधन के लिए राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं. भरत सरकार, प्रभावित राज्यों को आर्थिक सहायता और मानव सहायता प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है. जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), सशस्त्र बल और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती शामिल है

एक नज़र राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) पर

भारत में प्रत्येक वर्ष कोई न कोई प्राकृतिक आपदा आती रहती है, इन्ही नेचुरल कैलेमिटीज़ से जनता के जान-माल की रक्षा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2006 में नेशनल डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स (एनडीआरएफ) की स्थापना की जिसका हेड क्वार्टर अंत्योदय भवन, नई दिल्ली में है. एनडीआरएफ लोकल, स्टेट और नेशनल लेवल पर प्राकृतिक और मानव निर्मित हरेक आपदा या डिजास्टर का सामना करने के लिए दिन-रात तैयार रहता है...इस संगठन का मुख्य कार्य आपदा प्रभावित क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना है...

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 का उद्देश्य और इसका मकसद, आपदाओं का प्रबंधन करना है, जिसमें शमन रणनीति, क्षमता-निर्माण और अन्य चीज़ें शामिल है..

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 2 (डी) के अनुसार, "आपदा का अर्थ किसी भी क्षेत्र में प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से होने वाली घटना, दुर्घटना, आपदा या गंभीर घटना, या दुर्घटना या लापरवाही से है जिसके परिणाम स्वरूप मानव जीवन का पर्याप्त नुकसान होता है या मानव पीड़ा या क्षति, और संपत्ति का विनाश, या क्षति, या पर्यावरण का क्षरण होता है तथा वह घटना ऐसी प्रकृति और परिमाण की हो जिस से उभर पाना प्रभावित क्षेत्र के समुदाय की क्षमता से परे हो."

4.

विश्व स्वास्थ्य सभा ने कोरोना वायरस के स्रोत की पड़ताल करने और इस वायरल संक्रमण के दौरान डब्ल्यूएचओ के कामकाज का स्वतंत्र-निष्पक्ष आकलन किए जाने को सर्वसम्मित से मंजूरी दे दी....स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई वर्ल्ड हेल्थ असेंबली की 73वीं तिहत्तर वीं बैठक में प्रचंड अंतरराष्ट्रीय समर्थन के बीच चीन को भी इन सवालों पर मौन स्वीकृति देनी पड़ी जिनसे वो अब तक कतरा रहा था....

विश्व स्वास्थ्य सभा की बैठक में जिन देशों को कार्यकारी मंडल का सदस्य चुना गया उनमें भारत का भी नाम है. यह कार्यकारी मंडल विश्व स्वास्थ्य संगठन का दिशा-निर्देशन करने वाली संस्था है.....

भारत के पास चेयरमैन पद एक साल तक रहेगा

अधिकारियों के मुताबिक, 22 मई को एग्जीक्यूटिव बोर्ड की बैठक होनी है। इसमें भारत की और से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का चुना जाना तय है। बोर्ड के चेयरमैन का पद कई देशों के अलग-अलग ग्रुप में एक-एक साल के हिसाब से दिया जाता है। पिछले साल तय हुआ था कि अगले एक साल के लिए यह पद भारत के पास रहेगा। हर्षवर्धन एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मीटिंग की अध्यक्षता करेंगे। यह मीटिंग साल में दो बार होती है। पहली जनवरी और दूसरी मई के आखिर में.

वर्ल्ड हेल्थ असेंबली से चुने जाते हैं बोर्ड के मेंबर

डब्ल्यूएचओ के एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल 34 चौंतीस सदस्य स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुशल जानकार होते हैं। जिन्हें 194 चौरानवे देशों की वर्ल्ड हेल्थ असेंबली से 3 साल के लिए बोर्ड में चुना जाता है। फिर इन्हीं सदस्यों में से एक-एक साल के लिए चेयरमैन बनता है। इस बोर्ड का काम हेल्थ असेंबली में तय होने वाले फैसले और नीतियों को सभी देशों में ठीक तरह से लागू करना होता है।

महत्वपूर्ण है कि कोरोना संकट के बीच 18 और 19 मई को हुई विश्व स्वास्थ्य सभा में पारित प्रस्ताव पर क्रियान्वयन की रिपोर्ट को अगली वर्ल्ड हेल्थ असेंबली बैठक के सामने रखने की जिम्मेदारी कार्यकारी बोर्ड पर ही है...ऐसे में भारत की अगुवाई में काम करने वाले बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. बोर्ड के अधिकतर देश उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वालों में शामिल थे जो इस मामले की मुकम्मल पड़ताल चाहते हैं.
विश्व स्वास्थ्य सभा में पारित प्रस्ताव के मुताबिक इस बात की जांच होनी चाहिए कि आखिर कोरोना वायरस का के स्रोत क्या है और यह इंसानों के बीच कैसे आया. इस वायरस के वाहकों की भी जांच होनी चाहिए. इसके लिए एक सेहत नीति के तहत सभी देश जानवरों की सेहत की निगरानी करने वाले वर्ल्ड ऑर्गेनाइजेशन फॉर एनिमल हेल्थ, फूड एंड एग्रीकल्चर समेत अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम पर सबने सहमति जताई. प्रस्ताव के मुताबिक, कोरोना वायरस के संक्रमण स्रोत की जांच से भविष्य में ऐसे जूनेटिक वायरसों के वाहकों की रोकथाम में मदद मिलेगी.

100 से अधिक देशों की तरफ से रखे गए प्रस्ताव में कोरोना संक्रमण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के कामकाज की स्वतंत्र, निष्पक्ष और चरणबद्ध समीक्षा की भी बात कही गई है. साथ ही कोरोना संकट के पूरे घटनाक्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिक्रियाओं के आकलन का भी उल्लेख किया गया. इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वालों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, रूस, ब्रिटेन, तुर्की, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया,अफ्रीकी समूह के देश और यूरोपीय संघ के मुल्क शामिल हैं.

WHO के खिलाफ बनाए गए ड्राफ्ट में पांच प्रमुख बिंदु

  • कोरोना वायरस महामारी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुभवों और सीखों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और विस्तृत जांच हो।
  • WHO के स्तर पर मौजूद मैकेनिज्म ने कितना काम किया।
  • इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशंस कितने लागू हुए और उनकी क्या स्थिति है।
  • संयुक्त राष्ट्र के स्तर पर किए जा रहे कार्यों में WHO का कितना योगदान है।
  • कोविड-19 को लेकिर WHO की कार्यों और टाइमलाइन की जांच होनी चाहिए।

5.

भारत की ओर से लिपुलेख तक सड़क बनाने के बाद से तल्ख तेवर दिखा रहे नेपाल ने सीमा विवाद के बीच दुस्साहस दिखा नया नक्शा जारी किया है, जिसमें भारत के कालापानी, लिंपियाधूरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया है.... लिपुलेख पर अपना आधिकारिक हक बताते हुए नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया है। भूमि प्रबंधन मंत्री पद्मा आर्याल ने सोमवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह नया नक्शा पेश किया जिस पर कैबिनेट में सहमति भी बनी....माना जा रहा है कि यह नक्शा अब आधिकारिक तौर पर नेपाल के स्कूली पाठ्यक्रमों के अलावा सभी जगह इस्तेमाल होगा..

नेपाल में राजनीतिक विश्लेषकों ने भारत के साथ लिपुलेख और कालापानी सीमा विवाद के कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है और इस मुद्दे पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की हालिया टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की....लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है, जो नेपाल और भारत के बीच एक विवादित सीमा है....भारत और नेपाल दोनों ही कालापानी के अपना अभिन्न हिस्सा होने का दावा करते हैं...भारत इसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा मानता है, जबकि नेपाल इसे धारचुला जिले का हिस्सा बताता है....

जनरल नरवणे ने कहा था कि यह विश्वास करने के कारण हैं कि भारत द्वारा लिपुलेख दर्रे को उत्तराखंड में धारचुला से जोड़ने वाली भारत की नई सड़क पर नेपाल ने 'किसी और के' इशारे पर आपत्ति जताई....उनका इशारा इस मामले में चीन की संदिग्ध भूमिका को लेकर था...

लिपुलेख दर्रे से धारचुला को जोड़ने वाली सड़क

भारतीय चौकियों तक पहुंचना अब बेहद आसाना हो जाएगा...17000 फुट की ऊंचाई पर लिपुलेख दर्रा आसानी उत्तराखंड के धारचूला से जुड़ जाएगा। इस सड़क की लंबाई 80 किलोमीटर है। मानसरोवर लिपुलेख दर्रे से करीब 90 किलोमीटर दूर है। पहले वहां पहुंचने में तीन हफ्ते का समय लगता था। अब कैलाश-मानसरोवर जाने में सिर्फ सात दिन लगेंगे। बूंदी से आगे तक का 51 इक्यावन किलोमीटर लंबा और तवाघाट से लेकर लखनपुर तक का 23 किलोमीटर का हिस्सा बहुत पहले ही निर्मित हो चुका था लेकिन लखनपुर और बूंदी के बीच का हिस्सा बहुत कठिन था और उस चुनौती को पूरा करने में काफी समय लग गया।

इस रोड के चालू होने के बाद भारतीय थल सेना के लिए रसद और युद्ध सामग्री चीन की सीमा तक पहुंचाना आसान हो गया है। लद्दाख के पास अक्साई चीन से सटी सीमा पर अक्सर चीनी सैनिक घुसपैठ करते आए हैं। अगर तुलना की जाए तो लिंक रोड के बनने से लिपुलेख और कालापानी के इलाके में भारत सामरिक तौर पर भारी पड़ सकता है। दो साल पहले चीनी सेना ने पिथौरागढ़ के बाराहोती में घुसपैठ की कोशिश की थी। इस लिंक रोड के बनने के बाद चीनी सेना ऐसी गुस्ताखी नहीं कर पाएगी।

नेपाल का दृष्टिकोण

नेपाल का मानना है कि सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्व का इलाका, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख नेपाल का है। उसका कहना है, 'नेपाल सरकार ने कई बार पहले और हाल में भी कूटनीतिक तरीके से भारत सरकार को उसके नया राजनीतिक नक्शा जारी करने पर बताया था। सुगौली संधि के तहत ही नेपाल कालापानी को अपना इलाका मानता है। पिछले साल जब जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के तहत इसे दो अलग-अलग भागों में बांट दिया गया तब आधिकारिक तौर पर नया नक्शा जारी किया गया था। उस समय भी नेपाल ने आपत्ति जताई और कालापानी को अपना हिस्सा बताया। कालापानी 372 बहत्तर वर्ग किलोमीटर में फैला इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है।

क्या है सुगौली संधि?

नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। सुगौली बिहार के बेतिया यानी पश्चिम चंपारण में नेपाल सीमा के पास एक छोटा सा शहर है। इस संधि में तय हुआ कि काली या महाकाली नदी के पूरब का इलाका नेपाल का होगा। बाद में अंग्रेज सर्वेक्षकों ने काली नदी का उदगम स्थान अलग-अलग बताना शुरू कर दिया। दरअसल महाकाली नदी कई छोटी धाराओं के मिलने से बनी है और इन धाराओं का उदगम अलग-अलग है। नेपाल का कहना है कि कालापानी के पश्चिम में जो उदगम स्थान है वही सही है और इस लिहाज से पूरा इलाका उसका है। दूसरी ओर भारत दस्तावजों के सहारे साबित कर चुका है कि काली नदी का मूल उदगम कालापानी के पूरब में है।

क्यों महत्वपूर्ण है कालापानी

भारतीय सेना के लिए चीन के पैंतरे पर निगाह रखना जरूरी है। इस लिहाज से कालापानी सामरिक तौर पर बहुत ही अहम है। 1962 बासठ की लड़ाई के बाद से ही यहां इंडो तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) पेट्रोलिंग करती है। चीन बहुत पहले ही अपनी सीम तक सड़क बना चुका है। हिमालय को काट कर सीमा तक बुनियादी संरचना विकसित करने पर चीन ने काफी पैसा बहाया है। इसे देखते हुए भारत के लिए भी जरूरी है कि वो सीमा पर सैन्य संतुलन कायम करने के जरूरी उपाय करे। भारत के साथ दोस्ती के बावजूद हाल के दिनों में नेपाल और चीन करीब आए हैं। ऐसी स्थिति में कालापानी पर मजबूत पकड़ भारत के लिए और जरूरी है।

हिमालय की गोद से निकलने वाली नदियां धारा बदल लेती है। ये भी अंतरराष्ट्रीय विवाद का कारण बनता है। कालापानी के अलावा सुस्ता इसका एक और उदाहरण है। सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को को भारत-नेपाल के बीच की सीमा मान लिया गया। उसी समय गंडक ने धारा बदली और सुस्ता नदी के उत्तर में आ गया। इस लिहाज से यह भारत का हिस्सा है लेकिन नेपाल इस पर भी दावा करता रहा है। हालांकि दोनों देशों में सीमा विवाद खत्म करने पर सहमति बनी हुई है। इसे आपसी बातचीत से हल करना है।

6.

18 मई, 2020 को नेशनल बैंक ऑफ एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने 20,500 करोड़ रुपये जारी किए। यह फण्ड सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण विकास बैंकों (आरआरबी) के के लिए फ्रंट-लोडिंग संसाधनों के रूप में कार्य करेगा।

खरीफ संचालन में किसानों की मदद करने और उनकी प्री-मानसून तैयारियों के लिए यह धनराशि जारी की गई है। आवंटित राशि में से 15,200 करोड़ रुपये सहकारी बैंकों के माध्यम से और 5,300 करोड़ रुपये आरआरबी के माध्यम से प्रदान किए जायेंगे।

भारतीय मौसम विभाग ने हाल ही में घोषणा की कि भारतीय मानसून 5 जून से शुरू होगा। इसलिए, धनराशि जारी करने से किसानों को आरआरबी और सहकारी बैंकों से ऋण प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

किसान क्रेडिट कार्ड

बैंकों ने किसान क्रेडिट कार्ड योजना शुरू की है। लॉकडाउन के महीनों के दौरान, किसानों को लगभग 12 लाख नए क्रेडिट कार्ड प्रदान किए गए।

यह योजना 1998 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को पर्याप्त ऋण सहायता प्रदान करना है। इसे 2004 में गैर-कृषि गतिविधियों के लिए बढ़ाया गया था। इस योजना को आरआरबी, वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों और सहकारी संस्थाओं द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

आत्म निर्भर भारत अभियान

ध्यान दिया जाना चाहिए कि हाल ही में पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए आत्म निर्भर भारत अभियान में नाबार्ड के लिए 30,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे..

भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना वायरस की मार से उबारने के लिए दिनांक 12 मई 2020 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक राहत पैकेज, आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गई है, PM Modi द्वारा इस आत्मनिर्भर भारत अभियान 2020 के तहत 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई है, जो देश की जीडीपी का लगभग 10% है है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत सरकार देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान देने वाले सभी श्रमिक / दिहाड़ी मजदूर, किसान, वे लोग जो छोटी-छोटी दुकान लगाते हैं, रेहड़ी – रिक्शा वाले, कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, हमारे लघु-मँझले उद्योग, सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs), मध्यम वर्ग के लोग और उच्च वर्ग के सभी लोगों के लिए किसी न किसी प्रकार की राहत लेकर आई है...

कोरोना वायरस के लॉकडाउन के दूसरे चरण में केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना 2020 शुरू की गई थी जिसके लिए 1 लाख 70 हजार करोड़ के पैकेज का ऐलान किया था इतने ही करोड़ के पैकेज की घोषणा रिजर्व बैंक ने भी करी थी। आत्मनिर्भर भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य भारत को निर्माण, व्यावसायिक हब बनाना है जहां पर निर्यात के साथ स्वदेशी को भी ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा देना है।

7.

भारतीय समुद्री इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी पोत का जलावतरण कोविड-19 महामारी के कठोर प्रोटोकॉल और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे एहतियाती कदमों को ध्यान में रखकर डिजिटल माध्यम से किया गया….

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 15 मई 2020 को गोवा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय तटरक्षक बल के 'सचेत' और दो अवरोधक (इंटरसेप्टर) पोतों आइबी सी 450 और सी 451 का जलावतरण किया. समुद्री क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच इनकी तैनाती भारत की सुरक्षा को मजबूती देगी...जहाँ देश एक ओर कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी जैसी चुनौती से लड़ रहा है, तो दूसरी ओर भविष्य की हर तरह की चुनौती से निपटने की तैयारी भी कर रहा है.

आईसीजी के प्रवक्ता ने क्या कहा?

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के प्रवक्ता ने कहा कि पांच अपतटीय गश्ती जहाजों (ओपीवी) की श्रृंखला के तहत पहले पोत को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) द्वारा डिजाइन और निर्मित किया गया है. इसे अत्याधुनिक नेविगेशन और संचार उपकरण, सेंसर और मशीनरी से सुसज्जित किया गया है.

राजनाथ सिंह रहे मौजूद

इस अवसर पर राजनाथ सिंह के साथ, रक्षा सचिव, अजय कुमार और आईसीजी के महानिदेशक डी. कृष्णस्वामी नटराजन भी उपस्थित थे. कमीशन के समय रक्षा राज्य मंत्री श्रीपद नाइक गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के वास्को सुविधा में मौजूद थे.

आईसीजीएस सचेत के बारे में

अत्याधुनिक नौवहन और संचार उपकरणों से सुसज्जित 'सचेत' का निर्माण और डिजाइन स्वदेशी कंपनी गोवा शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है. यह पांच अपतटीय निगरानी वाहनों में से एक है. 105 मीटर लंबा सचेत 2350 टन का है. यह लगभग 50 किलोमीटर रफ्तार से 11,112 किलोमीटर तक जा सकता है..

इस युद्धपोत में दो हेलीकॉप्टर, चार हाई स्पीड बोट और राहत और बचाव अभियान के लिए एक इनफ्लैटएबल बोट की व्यवस्था है. इसमें प्रदूषण रिस्पांस उपकरण भी है जो समुद में प्रदूषण के रिसाव पर नजर रखता है.

आइसीजीएस सचेत की कमान उप महानिरीक्षक राजेश मित्तल संभालते हैं। इसमें 11 अधिकारी और अन्य 110 लोग तैनात है. इस पोत में 9,100 किलोवॉट के दो इंजन लगे हुए हैं.

इन्टरसेप्ट बोट सी-450 और सी-451 को एलएंडटी शिपयार्ड, हजीरा (गुजरात) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है. इसे नवीनतम नेविगेशन और संचार उपकरणों से सुसज्जित किया गया है....30 मीटर लंबी दो नौकाएं 45 पैंतालिस समुद्री मील (नॉट) से भी अधिक गति प्राप्त करने में सक्षम हैं. इन्हें उच्च गति से अवरोधन, तट के निकट गश्ती एवं कम तीव्रता के समुद्री अभियानों के लिए तैयार किया गया है.

आईबी की त्वरित जवाबी कार्रवाई क्षमता किसी भी उभरती समुद्री परिस्थिति से निपटने और उसे विफल करने की दृष्टि से इसे एक आदर्श प्‍लेटफॉर्म बनाती है. इन नौकाओं की कमान सहायक कमांडेंट गौरव कुमार गोला और सहायक कमांडेंट अकिन जुत्शी संभाल रहे हैं.

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. जम्मू-कश्मीर में विरोध के बीच लागू हुआ नया डोमिसाइल ऐक्ट

नए डोमिसाइल नियमों के मुताबिक, कोई व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में कम से कम 15 साल रहा है और 10वीं या 12वीं का एग्जाम यहां के किसी संस्थान से पास कर चुका है, तो वह जम्मू-कश्मीर का निवासी कहलाने का हकदार होगा....जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नए डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसीजर) रूल्स 2020 को लागू कर दिया है। इसी के साथ प्रदेश में स्थानीय नागरिक प्रमाण पत्र (पीआरसी) की जगह डोमिसाइल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है। पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी, सफाई कर्मचारी और दूसरे राज्यों में शादी करने वाली महिलाओं के बच्चे भी अब डोमिसाइल के हकदार होंगे.... आवेदक को इसके लिए राशन कार्ड, शिक्षण रिकॉर्ड आदि पेश करने होंगे।

2. भारतीय वायु सेना ने 8000 करोड़ रुपये की तीन बड़ी अधिग्रहण परियोजनाओं को रोकने का निर्णय लिया…

वायु सेना प्रमुख आरकेएस भदौरिया ने 18 मई को सूचित किया कि सेना अतिरिक्त पिलाटस बेसिक ट्रेनर विमान खरीदने की अपनी इस योजना को अब आगे नहीं बढ़ेगी. अतिरिक्त हॉक (ट्रेनर विमान) खरीदने की भी योजना थी लेकिन फिलहाल इस खरीद को भी रोक दिया गया है. एक अन्य जगुआर रि-इंजनिंग योजना भी थी जो पूरी तरह से आयात पर निर्भर थी, लेकिन वायु सेना ने इस परियोजना को भी रोकने का फैसला किया है. इस योजना के तहत जगुआर लड़ाकू विमानों को अमेरिका के हनीवेल कॉर्पोरेशन के नए इंजनों से लैस किया जाना था.

3. विश्व बैंक और भारत सरकार ने हाल ही में 750 मिलियन डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं..

विश्व बैंक ने भारत के COVID-19 सामाजिक सुरक्षा प्रतिक्रिया कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए 1 बिलियन डॉलर की सहायता का आश्वासन दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य COVID-19 महामारी के कारण प्रभावित होने वाले कमजोर परिवारों की रक्षा करना है. इस कार्यक्रम ने भारत के प्रति विश्व बैंक की कुल प्रतिबद्धता को 1 बिलियन डालर से बढ़ाकर 2 बिलियन डॉलर कर दिया है. विश्व बैंक ने अप्रैल 2020 में 1 बिलियन अमरीकी डॉलर के वित्तीय समर्थन की घोषणा की थी.

4. भारत ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के कल्याण हेतु काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी को 2 मिलियन अमरीकी डॉलर की सहायता राशि प्रदान की है

यह सहायता कोरोनोवायरस की संकट की परिस्थिति के दौरान शिक्षा और स्वास्थ्य सहित संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी के प्रमुख कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए दी गई है. संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी (UNRWA) ने अपनी बुनियादी सेवाओं को संचालित करने के लिए भारत के समर्थन की सराहना की है, यह सहायता ऐसे समय की जा रही जब पूरी दुनिया कोविड -19 महामारी द्वारा उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर रही है.

5. भारतीय इस्पात संघ ने हाल ही में दिलीप उम्मेन को अपना नया अध्यक्ष नियुक्त किया है

भारतीय इस्पात संघ ने दिलीप उम्मेन को अपना नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनका कार्यकाल तत्काल शुरू हो गया है. इससे पहले इस पद पर टाटा स्टील के सीईओ टी वी नरेंद्रन का कार्यकाल अगस्त में समाप्त होने वाला था. उन्होंने उससे पहले एक मई को अध्यक्ष पद से हटने का फैसला किया.दिलीप उम्मेन को सर्वसम्मति से दो वर्ष के लिए अध्यक्ष चुना गया है. भारतीय इस्पात संघ के बयान में कहा गया है कि दिलीप उम्मेन का इस्पात उद्योग में 37 सैंतीस साल से अधिक का अनुभव है. वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर से पढ़े हुए हैं.

6. 21 मई को मनाया जाता है आतंकवाद विरोधी दिवस

देश में 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है. इस बार यह दिवस कोरोना वायरस महामारी के बीच मनाया जा रहा है. हर साल 21 मई को मनाए जाने वाले आतंकवाद विरोधी दिवस पर युवाओं सहित समाज के अन्य वर्गों को आतंकवाद विरोधी शपथ दिलाई जाती है. 21 मई 1991 इक्यानवे को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी. उनकी हत्या के बाद ही 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया गया था.

7. कोविड-19 का टीका बनाने के लिए भारत बायोटेक और अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित थॉमस जेफरसन विश्वविद्यालय के बीच समझौता हुआ है...

इस टीके का विकास जेफरसन कंपनी ने किया है. भारत बायोटेक ने यह घोषणा की. इस टीके को वर्तमान में निष्क्रिय हो चुके रैबीज के टीके का इस्तेमाल कर विकसित किया गया है. यह कोरोना वायरस प्रोटीन के वाहक के रूप में काम करेगा.

8. मध्य प्रदेश से गुजरने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए ‘चरण पादुका’ अभियान शुरू किया गया

मध्य प्रदेश द्वारा राज्य में पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों के लिए ‘चरण पादुका’ नामक अभियान शुरू किया गया है. इस अभियान के अंतर्गत नंगे पांव जा रहे मजदूरों को जूते और चप्पल दिए जाएंगे ताकि उनके दर्द को कुछ कम किया जा सके. चरण पादुका अभियान मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है. चप्पल प्रदान करके प्रवासी श्रमिकों की सहायता की जा रही है. भारत सरकार प्रवासी श्रमिकों को उनके घर कस्बों में लौटने में मदद करने के लिए कई उपाय कर रही है.

9. छतीसगढ़ सरकार ने हाल ही में राज्य में फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राजीव गांधी किसान न्याय’ योजना शुरू करने का फैसला किया है..

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कोविड-19 महामारी को देखते हुए देशी और विदेशी शराब के विक्रय पर ‘विशेष कोरोना शुल्क‘ अधिरोपित करने का निर्णय लिया है. राजीव गांधी किसान न्याय योजना के अंतर्गत राज्य के किसानो को उनकी धान की फसल पर लाभ पहुंचाया जायेगा. इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के किसानो को धान के समर्थन मूल्य के अंतर की राशि का लाभ मुहैया कराई जाएगी. राज्य सरकार के मुताबिक, किसान न्याय योजना के द्वारा किसानो की आय में भी बढ़ोतरी होगी जिससे गरीबी के स्तर में कमी आएगी.

10. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में घरेलू रक्षा और एयरोस्पेस के लिए 400 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दे दी ...

इन केंद्रों में देश में विकसित और निर्मित सैन्य हार्डवेयर (उपकरणों) का परीक्षण किया जाएगा. रक्षा उपकरण परीक्षण योजना (डीटीआईएस) का मुख्य उद्देश्य देश में रक्षा एवं हवाई क्षेत्र के उत्पादन को बढ़ावा देना है. बयान के मुताबिक, यह योजना पांच साल की अवधि के लिए है और इस दौरान निजी उद्योगों की साझेदारी से छह से आठ नये परीक्षण केन्द्र स्थापित किए जाएंगे. रक्षा मंत्रालय ने आगे बताया कि इन योजनाओं के लिए सरकार अनुदान के रुप में 75 पचहतर प्रतिशत की राशि देगी और बाकि 25 प्रतिशत लागत निजी उद्योगों और राज्य सरकारों की ओर से दी जाएगी.

11. हाल ही में भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और ‘विश्व बैंक’ के मध्य पश्चिम बंगाल के ‘दामोदर घाटी कमान क्षेत्र’ में सिंचाई सेवाओं तथा बाढ़ प्रबंधन के लिये 145 पैंतालिस मिलियन डॉलर के एक ऋण समझौते पर अनुबंध किया गया

इस परियोजना से पश्चिम बंगाल के पाँच ज़िलों के लगभग 2.7 मिलियन किसानों को बेहतर सिंचाई सेवाओं का लाभ मिलेगा तथा इस क्षेत्र में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी. विश्व बैंक’ द्वारा, 145 पैंतालिस मिलियन डॉलर ‘एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक’ और 123.8 मिलियन डॉलर का पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा वित्तपोषण किया जा रहा है. अमेरिका की 'टेनेसी घाटी प्राधिकरण' के आधार पर ‘दामोदर घाटी परियोजना’ के तहत वर्ष 1948 अड़तालीस में ‘दामोदर घाटी निगम’ की स्थापना की गई थी...

12. 18 मई को मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस

समाज में संग्रहालय की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 18 मई को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस मनाया जाता है. इसे सबसे पहले साल 1983 तिरासी में मनाया गया था. इसके बाद से अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हर साल मनाया जाने लगा. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को संग्रहालय और पुरातन चीजों की महत्ता के प्रति जागरूक करना है. इसका आयोजन अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय परिषद करती है.

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।