(India This Week) Weekly Current Affair (14th November - 20th November 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  1. रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन की अध्यक्षता में हुआ 12वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का वर्चुअल आयोजन....प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए किया संबोधित....बैठक में अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत को सौंपी गई.
  2. केरल के पत्रकार की हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस भेजा... कहा अदालत अनुच्छेद 32 के साथ आने वाली याचिकाओं को ऐसा करने से कर रही है हतोत्साहित.
  3. देश में गिद्धों का संरक्षण के लिए....केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने किया गिद्ध कार्य योजना 2020-25 का शुभारम्भ.
  4. लोनार झील और सूर सरोवर झील को किया गया रामसर स्थल घोषित....रामसर संरक्षण संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि स्थल के रूप में चुना गया.
  5. विशाखापट्टनम की भू विरासत को बचाने की ज़द्दोज़हद....INTACH कर रहा है विशाखापट्टनम में एक भू पार्क को नयी पहचान दिलाने की कोशिश..
  6. चीन सहित एशिया-प्रशांत के 15 देशों ने दुनिया के सबसे बड़े व्यापार समझौते पर किये हस्ताक्षर...भारत नही हुआ शामिल... पिछले साल समझौते की वार्ताओं से गया था हट.
  7. विश्व स्वास्थ्य संगठन बनाएगा भारत में पारम्परिक चिकित्सा केंद्र... विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा उठाया गया ये कदम वैश्विक स्वास्थ्य की तरफ हो सकता है एक बेहतर पहल साबित.
  8. स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ चलेगा अवमानना का केस, भारत के महान्यायवादी के के वेणुगोपाल ने दी आपराधिक मामला दर्ज़ करने की अनुमति

खबरें विस्तार से:

1.

17 नवम्बर को आयोजित इस ब्रिक्स सम्मेलन की थीम 'वैश्विक स्थिरता, साझा सुरक्षा और अभिनव विकास' थी....इस सम्मेलन में सदस्य देशों के नेताओं ने वैश्विक परिदृश्य के प्रमुख मुद्दों और आपसी सहयोग पर चर्चा की...जिसमें कोविड-19 महामारी के प्रभाव को कम करने के लिए बहुपक्षीय प्रणाली के उपायों में सुधार भी शामिल हैं...इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि “भारत और चीन दोनों देश रूस की वैक्सीन स्पुतनिक-पांच का उत्पादन शुरू कर सकते हैं और कोरोना से संघर्ष में भारत और चीन दोनों देश मिलकर रूस के साथ पूरी दुनिया को वैक्सीन दे सकते हैं।”...इसके अलावा शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ जंग में सहयोग, व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा और आदान-प्रदान पर भी चर्चा की गयी।

वहीं बैठक में अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता भारत को सौंपी गई। भारत 2021 में होने वाले 13वें ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। 2021 में ब्रिक्स के 15 वर्ष भी पूरे हो रहे है...इससे पहले भारत ने 2012 और 2016 में ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता की है...

बतातें चलें की ब्रिक्स देशों की कल्पना वर्ष 2001 में सर्वप्रथम गोल्डमैन सैक (Goldman Sachs) के अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने अपने शोधपत्र ‘बिल्डिंग बेटर ग्लोबल इकोनॉमिक ब्रिक्स’ में किया था..... इस कल्पना में ब्राजील, भारत और चीन शामिल थे...ब्रिक्स दुनिया की पाँच सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से मिलकर बना एक समूह है। दरअसल ब्रिक्स इन पांचों देशों के नाम के पहले अक्षर B, R, I, C, S के लिये प्रयोग किया जाने वाला एक संक्षिप्त शब्द है....

इसकी औपचारिक स्थापना जुलाई 2006 में रूस के सेंट्स पीटर्सबर्ग में जी-8 देशों के सम्मेलन के अवसर पर रूस, भारत और चीन के नेताओं की बैठक के बाद हुई। बाद में, सितंबर 2006 में न्यूयॉर्क में UNGA की एक बैठक के (बैठक से इतर) अवसर पर BRIC देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई और इसी में BRIC की औपचारिक शुरुआत हुई....

गोरतलब हो की वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका, चीन और रूस एक दूसरे के लिये न केवल आर्थिक प्रतिद्वन्दी हैं बल्कि वैचारिक रूप से भी इनमें काफी भिन्नता है। वैश्विक बाजार में इन तीनों देशों की पकड़ बहुत मजबूत है। हाल ही में अमेरिका और रूस के बढ़ते विवाद के कारण कई तरह की आशंकाएँ व्यक्त की जा रही थीं। अतः भारत इन जटिल संबंधों को सुलझाने के लिए एक मंच के रूप में ब्रिक्स का उपयोग कर सकता है।

2.

अनुच्छेद 32 यह मूल अधिकारों के तहत संविधान में रखा गया एक अनुच्छेद है जिसके तहत हर नागरिक को संवैधानिक उपचार का अधिकार मुहैया कराया जाता है। इसके अलावा संविधान में वर्णित मूल अधिकारों की रक्षा हेतु भी नागरिकों को सर्वोच्च न्यायलय जाने का अधिकार देती है। इस अनुच्छेद के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के पास निर्देश या आदेश या रिट जारी करने का अधिकार होता है जिसमे बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेक्षण और अधिकार पृच्छा शामिल हैं।

किसी भी मूल अधिकार का हनन होने की दशा में सर्वोच्च न्यायालय इनमे से किसी भी रिट को जारी करने का आदेश दे सकती है। इस अनुच्छेद के तहत दिए गए अधिकार को किसी भी दशा में निलंबित नहीं किया जा सकेगा जब तक की संविधान में इसका कोई भी प्रावधान न दिया जाये...

अनुच्छेद 32 को संविधान के भाग 3 के तहत रखा गया है जिसमे कई और भी मूल अधिकारों को जगह दी गयी है जिसमे समानता का अधिकार,भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतनत्रता, जीवन और व्यक्तिगत स्वतन्त्रता का अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार भी शामिल हैं। इनमे किसी भी अधिकार का उल्लंघन होने की ही दशा में इन्सान अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायलय का दरवाज़ा खटखटा सकता है....

संविधान सभा में दिसंबर 1948 अड़तालीस में जारी मूल अधिकारों की बहस के दौरान डा बी आर आंबेडकर ने कहा था की अगर संविधान में सबसे अहम् अनुच्छेद की बात की जाए जिसके बगैर संविधान का कोई वज़ूद नहीं होगा तो मैं बेशक इसी अनुच्छेद को वरीयता दूंगा। यह अनुच्छेद संविधान की ह्रदय और आत्मा के सामान है। उन्होंने कहा की सर्वोच्च न्यायालय इस अनुच्छेद के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा की नागरिकों के मूल अधिकारों को न तो छीना जा सकेगा न ही उनका खंडन किया जा सकेगा जब तक की संविधान में इसके मातहत कोई बदलाव या संशोधन नहीं किया जाये।

ड्राफ्टिंग समिति के अन्य सदस्यों का कहना था की चूँकि यह अनुच्छेद मूल अधिकारों का उल्लंघन होने पर व्यक्ति को सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है इसलिए यह अधिकार सभी मूल अधिकारों में सबसे ज़्यादा वरीयता रखता है। संविधान सभा में इस बात पर भी बहस हुई की क्या इस अधिकार और बाकी मूल अधिकारों को आपातकाल के दौरान निलंबित या सीमित किया जा सकता है या नहीं। आपातकाल के अलावा इस अनुच्छेद को बाकी दशाओं में न तो निलंबित किया जा सकेगा न ही इसे सीमित किया जा सकेगा...

उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय दोनों में ही मूल अधिकारों के उल्लंघन की दशा में रिट दायर की जा सकती है। अनुच्छेद 32 के अनुसार उच्च और सर्वोच्च न्यायालय 5 तरह की रिट जारी करती है. उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ऐसी रिट जारी कर सकते हैं. उच्चतम न्यायालय पूरे देश के लिए रिट जारी कर सकता है.

3.

भारत में गिद्धों की 9 प्राजातियां पायी जाती हैं ओरिएण्टल वाइट बैक्ड,लॉन्ग बिल्ड़,स्लेंडर बिल्ड़,हिमालयी, रेड हेडेड, इजिप्शियन, बीर्डेड, सिनेरियस और यूरेशियन ग्रिफन....

जहाँ भारत में तीन प्रजातियां ख़ास तौर पर गंभीर तौर पर संकटापन्न हैं जिनमे ओरिएंटल व्हाइट-बैक, लॉन्ग-बिल्ड, स्लेंडर-बिल्ड शामिल हैं। इनकी तादाद में 99 फीसदी तक की गिरावट दर्ज़ की गई है।

रेड-हेडेड गिद्ध को भी गंभीर रूप से संकटग्रस्त (Critically-Endangered) श्रेणी में रख दिया गया है। इनकी संख्या में भी 91 इक्यानवे फीसदी की गिरावट आई है, जबकि इजिप्टियन गिद्धों पहले के मुकाबले 80 फीसदी कम हो गए हैं इन्हे संकटग्रस्त सूची में रखा गया है।

हिमालयन, बियर्ड और सिनेरियस गिद्धों को भी ‘निकट संकटग्रस्त’ (Near Threatened) श्रेणी में डाल दिया गया है... साल 2004 में वैज्ञानिकों ने इस गिरावट के पीछे डिक्लोफिनेक (Diclofenac) को वजह बताया। यह डिक्लोफ़ैनेक पशुओं के शवों को खाते वक़्त गिद्धों के शरीर में पहुँच जाती है।

डिक्लोफिनेक का इस्तेमाल पशुओं के इलाज़ में होता है। इसका इस्तेमाल आम तौर पर पशुओं में बुखार या उत्तेजना जैसी बीमारियों को दूर करने में किया जाता था। गिद्धों की घटती आबादी के मद्देनज़र साल 2006 में डिक्लोफ़ैनेक को प्रतिबंधित कर दिया गया।

डिक्लोफिनेक दवा के असर से गिद्धों के गुर्दे या किडनी काम करना बंद कर देते हैं जिसकी वजह से उनकी मौत हो जाती है। इस दवा के खतरे का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है को डिक्लोफिनेक से प्रभावित जानवरों के शवों का सिर्फ 0.4-0.7% हिस्सा ही गिद्धों की 99 फीसदी आबादी को ख़त्म करने के लिए काफी है ।

‘गिद्ध कार्य योजना 2020-25’ का मकसद पशु चिकित्सा संबंधी NSAIDs (Nonsteroidal Anti-inflammatory Drug) की खरीद फरोख्त का विनियमन करना है। इसके अलावा इसका मकसद ये भी तय करना है कि मवेशियों का इलाज केवल काबिल पशु चिकित्सकों द्वारा किया जाए।

MoEFCC ने गिद्धों में मौजूद NSAIDs का परीक्षण करने और नए NSAIDs को विकसित करने की योजना बनाई है ताकि इसका प्रभाव गिद्धों पर न पड़े।

उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु से प्राप्त नमूनों एवं सूचनाओं के आधार पर मौजूद गिद्ध संरक्षण केंद्रों के साथ-साथ देश भर में अतिरिक्त संरक्षण प्रजनन केंद्रों की स्थापना की भी योजना बनाई जा रही है।

उत्तर भारत में पिंजौर (हरियाणा), मध्य भारत में भोपाल, पूर्वोत्तर में गुवाहाटी और दक्षिण भारत में हैदराबाद जैसे विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिये चार बचाव केंद्र प्रस्तावित हैं।

‘गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र कार्यक्रम’ को देश में गिद्धों की आबादी वाली 8 जगहों पर लागू किया जा रहा है। इन 8 जगहों में से दो जगहें उत्तर प्रदेश में हैं।

‘गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र’ के तहत डिक्लोफिनेक का कम से कम इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाता है ताकि गिद्धों की आबादी को कोई खतरा न रहे। किसी इलाके को गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र तब बनाया जाता है जब लगातार दो सालों तक ‘अंडरकवर फार्मेसी एवं मवेशी शव सर्वेक्षण’ (Undercover Pharmacy and Cattle Carcass Surveys) में कोई ज़हरीली दवा नहीं मिलती है और गिद्धों की आबादी स्थिर हो तथा घट नहीं रही हो।

4.

लोनार झील दक्कन पठार के बेसाल्ट से बनी चट्टानों में स्थित है। इसका निर्माण 34 हज़ार से 50 हज़ार साल पहले एक उल्का पिंड के धरती से टकराने की वजह से हुआ था।

लोनार झील लोनार वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है। यह मेलघाट बाघ अभ्यारण्य के नियंत्रण में आने वाला क्षेत्र है। इसे लोनार क्रेटर के नाम से भी जाना जाता है। इसे एक राष्ट्रीय भू विरासत स्मारक का दर्ज़ा मिला हुआ है। भू विरासत उन भूगर्भीय संरचनाओं को कहा जाता है जो सांस्कृतिक रूप से काफी अहम् होती हैं और जो पृथ्वी के क्रमिक विकास और उसके इतिहास से जुडी अहम् जानकारी मुहैया कराते है। इनसे मिली जानकारी से विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में काफी मदद मिलती है।

महाराष्ट्र में लोनार झील दूसरी रामसर स्थल है। रामसर आर्द्रभूमि के तौर पर चिन्हित पहला स्थल नंदुर मधमेशवर पक्षी अभ्यारण्य है,यह महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में स्थित है।

लोनार झील का पानी काफी खारा और लवणीय है। इसमें अतिसूक्ष्म जीव जैसे अनरोबेस, साइनोबैक्टीरिया और फाइटो प्लैंकटन रहते हैं।

सूर सरोवर झील को कीठम झील के नाम से भी जाना जाता है। यह सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य में स्थित है। इसे साल 1991 में पक्षी अभ्यारण्य घोषित किया गया था।

सूर सरोवर झील उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िले में यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह झील तकरीबन 8 वर्गकिलोमीटर इलाके में फ़ैली हुई है। इस झील पर प्रवासी पक्षियों की 165 प्रजातियां पायी जाती हैं। यहां एक भालू बचाव केंद्र भी बनाया गया है।

क्या है रामसर स्थल दर्ज़े के फायदे

किसी आर्द्र भूमि को रामसर स्थल का दर्ज़ा मिलने से अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर यह आर्द्रभूमि चर्चित हो जाता है। इन आर्द्रभूमियों को रामसर समझौते के तहत आर्थिक अनुदान भी दिया जाता है। इसके अलावा इस स्थल पर जानकारों का सुझाव और इससे जुडी दिक्कतों का भी निदान होता रहता है।

रामसर समझौता आर्द्रभूमि पर किया गया एक अंतरसरकारी समझौता था जिसे साल 1971 में अमल में लाया गया था। यह समझौता ईरान के शहर रामसर में संपन्न हुआ था। रामसर शहर कैस्पियन सागर के दक्षिणी किनारे पर मौजूद है।

भारत में इस समझौते को 1 फरवरी 1982 में अपनाया गया था। वो आर्द्रभूमियाँ जो दुनिया में काफी अहमियत रखती है उन्हें रामसर स्थल का दर्ज़ा दिया जाता है।

रामसर समझौते का मकसद आर्द्रभूमियों का संरक्षण और उनका सही ढंग से इस्तेमाल करना है। इसके लिए स्थानीय राष्ट्रिया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मदद मुहैया कराई जाती है।

मौजूदा वक़्त में भारत की 2 आर्द्रभूमि मोंट्रेक्स रिकॉर्ड में दर्ज़ हैं जिनमे राजस्थान में स्थित केओलादेव राष्ट्रिय पार्क और मणिपुर राज्य में स्थित लोकटक झील है। ओडिषा में स्थित चिल्का झील को भी इस रिकॉर्ड में रखा गया था लेकिन अब इसे हटा दिया गया है।

5.

एर्रा मट्टी डिब्बेलु लाल रेत के टीले हैं जो विशाखापट्टनम और भीमुनिपत्तनम के बीच मौजूद हैं। 200 मीटर से लेकर 2 किलोमीटर की चौड़ाई वाले ये टीले तट के किनारे 5 किलोमीटर तक फैले हैं। इस इलाके के अलावा पूरे दक्षिण एशिया में इस तरह के टीले केवल तमिलनाडु में तेरी सेंड्स और श्रीलंका के रेड कोस्टल सेंड्स में मौजूद हैं।

इसे भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण' (GSI) द्वारा अधिसूचित 34 चौंतीस 'राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक विरासत स्मारक स्थलों' में से एक माना गया है।

भू-वैज्ञानिक विरासत ऐसी संरचनाएं होती हैं जो सौंदर्य, विज्ञान और शिक्षा की दृष्टि से बेहद अहम् होती हैं। इन संरचनाओं की मदद से पृथ्वी की उत्पत्ति और उसके क्रमिक विकास से जुड़े तथ्यों को समझने में मदद मिलती है।

क्या होते हैं वैश्विक भू पार्क

ग्लोबल जियो पार्क ऐसे इलाके होते हैं जहां दुनिया के भू-गर्भीय दृष्टि से अहम् स्थलों व परिदृश्यों का इस से रखरखाव और प्रबंधन किया जाता है ताकि वो महफूज़ रहे और शिक्षा और सतत विकास की दृष्टि से भी अपना महत्त्व न खोएं। इसके तहत उन सभी लोगों और संस्थाओ को शामिल किया जाता है जो इस इलाके से ताल्लुक रखते हैं जैसे सामुदायिक समूह, पर्यटन से जुड़े लोग आदि। स्थानीय जनता को शामिल करके न सिर्फ जैव विविधता बल्कि भू विविधता की भी रक्षा की जाती है।

इनका प्रबंधन एक ऐसी संस्था करती है जिसका निर्माण राष्ट्रिया कानून के तहत किया जाता है। यहाँ पर यह गौर करने लायक बात है की गोबल जियो पार्क के भीतर किसी तरह की आर्थिक गतिविधि पर कोई बंदिश नहीं होती। लेकिन यह गतिविधि स्थानीय,क्षेत्रीय या राष्ट्रिया कानून के हिसाब से ज़रूर होनी चाहिए।

जियो पार्क की देखभाल के लिए धन यहां होने वाली भू पर्यटन गतिविधियों के ज़रिये उपलब्ध कराया जाता है।

ग्लोबल जियो पार्क नेटवर्क एक वैधानिक संस्था है जिसे साल 2004 में बनाया गया था। यूनेस्को के तहत दर्ज़ ग्लोबल जियो पार्क के लिए इसकी सदस्यता ज़रूरी है। इसके सदस्यों से सालाना शुल्क भी लिया जाता है।

ङेस्क वैश्विक जियो पार्क को यह दर्ज़ा 4 सालों के लिए दिया जाता है। समय सीमा ख़त्म होने के बाद इन्हे फिर से जांचा परखा जाता है ताकि इन्हे दुबारा यह दर्ज़ा दिया जा सके।

6.

ऑस्ट्रेलिया, न्यू ज़ीलैण्ड और आसियान के 10 देशों समेत 15 देशों के शीर्षस्थ अधिकारियों ने रीजनल कम्प्रेहैन्सिव इकनोमिक पार्टनरशिप या RCEP समझौते पर दस्तखत किये थे...इस मसौदे पर वियतनाम के द्वारा आभासी तौर पर आयोजित 37 सैंतीस वीं आसियान सम्मेलन के दौरान ये दस्तखत किये गए थे।

इस समझौते का संपन्न होना इस बात को दर्शाता है की बहुपक्षीय व्यापार समझौते पर सहमति देने में आसियान की बड़ी भूमिका है। इस समझौते से महामारी के दौरान देशों की आपूर्ति श्रृंखला को फिर से बहाल करने और आर्थिक हालात सुधारने में बेहद मदद मिलेगी।

RCEP को कार्यकारी बनाने के लिए इस समझौते पर कम से कम 6 एशियाई देशों की साथ साथ तीन गैर एशियाई देशों को इस समझौते पर दस्तखत करने होंगे।

व्यापार समझौते के समर्थकों का कहना है की इस समझौते से टैरिफ में कटौती, श्रृंखला आपूर्ति की मज़बूती और नए ई कॉमर्स नियमों को लागू करके महामारी से कमज़ोर पडी दुनिया के कई देशों की अर्थव्यस्थाओं को राहत मिलेगी।

समझौते के फायदों में समझौते में शामिल देशों के बीच व्यापार वस्तुओं पर तकरीबन 92 बानबे फीसदी टैरिफ का खात्मा, गैर टैरिफ प्रावधानों के लिए कड़े प्रावधान और ऑनलाइन उपभोक्ता और निजी सूचना सम्बन्धी सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किये जाने वाले उपाय शामिल हैं। इसके अलावा इसके तहत कस्टम प्रक्रिया को सुगम बनाना और कम से कम 65 फीसदी सेवा क्षेत्र को विदेशी शरहोल्डिंग की सीमा बढ़ाने के लिए खोलने जैसे प्रावधान शामिल किये गए हैं।

मालूम हो कि भारत पिछले साल समझौते की वार्ताओं से हट गया था, क्योंकि ऐसी आशंका है कि शुल्क समाप्त होने के बाद देश के बाजार आयात से पट जाएंगे, जिससे स्थानीय उत्पादकों को भारी नुकसान होगा हालांकि, अन्य देश पूर्व में कहते रहे हैं कि आरसीईपी में भारत की भागीदार के द्वार खुले हुए हैं। खुला रखा गया है। समझौते के तहत अपने बाजार को खोलने की अनिवार्यता के कारण घरेलू स्तर पर विरोध की वजह से भारत इससे बाहर निकल गया था। यहां उल्लेखनीय है कि आरसीईपी में चीन प्रभावशाली है। आरसीईपी का सबसे पहले प्रस्ताव 2012 में किया गया था।

बतातें चलें की इस समझौते में आसियान के 10 देशों (इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलयेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, ब्रुनेई, कंबोडिया, म्यांमार और लाओस) के अलावा चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। अमेरिका भी इस समझौते में शामिल नहीं है।

7.

WHO के निदेशक टेड्रोस अधनोम ग्रेबेसियस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जयपुर और जामनगर में आयुर्वेदा संस्थान के उद्घाटन के दौरान आभासी तौर पर उपस्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने 5 वे आयुर्वेद दिवस के मौके पर इन दोनों संस्थानों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिये देश को समर्पित किया था।

आयुर्वेद में शिक्षण और अनुसंधान संस्थान की स्थापना जामनगर में की गई थी। इस संस्थान को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा मिला हुआ है। जयपुर में मौजूद राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को ‘इंस्टीट्यूशन डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ के रूप में नामित किया गया है। इन संस्थानों को यह दर्ज़ा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यु जी सी ) द्वारा दिया गया है।

इन नए केंद्रों के ज़रिये विश्व स्वास्थ्य संगठन की पारम्परिक चिकित्सा रणनीति 2015–2023 को मदद मिलेगी जिसका मकसद देशों में पारम्परिक चिकित्सा से सम्बंधित नीतियों के विकास और भूमिका को बढ़ावा देना है जिससे स्वास्थ्य सुविधाओं को सभी लोगों के लिए आसानी से मुहैया कराया जा सके। पारम्परिक चिकित्सा जैसे आयुर्वेद के ज़रिये इंसानी सेहत और स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर किया जा सकता है हालांकि अभी तक आयुर्वेद से जुडी जानकारियां कई लोगों की पहुँच से बाहर हैं।

आज आयुर्वेद के ज्ञान को किताबों ग्रंथों और घरेलु नुस्खों के दायरे से बाहर लाने पर ज़ोर देने की ज़रुरत है और इसे मौजूदा ज़रूरतों के हिसाब से ढालने की ज़रुरत है। आज से 3 साल पहले साल 2017 में भारतीय आयुर्वेद संस्थान की नीव रखी गयी थी। इसके अलावा लेह में राष्ट्रीय सोवा रिग्पा संस्था की भी नीव रखी गयी थी।

कोरोना वैश्विक महामारी के चलते आयुर्वेदिक उत्पादों की भी मांग पूरी दुनिया में बड़ी है। भारत से निर्यात होने वाले आयुर्वेदिक सामानों में पिछले साल के मुकाबले 45 पैंतालिस फीसदी का इज़ाफ़ा हुआ है कई मसालों के निर्यात में भी इस दौरान इज़ाफ़ा देखा गया है जिसमे कई रोग

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले मसाले भी शामिल है। इनमे हल्दी अदरक जैसे मसाले ख़ास तौर पर शामिल हैं।

कई देशों में हल्दी से जुड़े पेय पदार्थों की भी मांग में इज़ाफ़ा देखा गया है। इसके अलावा दुनिया के कई मेडिकल जर्नल में भी आयुर्वेदा में उम्मीद की नयी किरण देखी जा रही है।

भारत में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान समेत कई जगहों पर आयुर्वेद के रोग प्रतिरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर शोध चल रहे हैं। दिल्ली पुलिस के 80 हज़ार लोगों पर अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने शोध किया जिसमे आयुर्वेद का रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर देखा गया।

8.

न्यायालय की अवमानना कानून 1971 के तहत न्यायलय की अवमानना दो तरह की हो सकती है जिसमे सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना शामिल हैं।

सिविल अवमानना के तहत किसी फैसले, निर्देश, आदेश याचिका या अदालत की किसी भी प्रक्रिया को जानबूझकर न मानना या अनजाने में उसका उल्लंघन करना आता है।

आपपराधिक अवमानना के तहत अदालत के खिलाफ लिखित, मौखिक या किसी चित्र के ज़रिये किसी ऐसी बात किए जानेउसे प्रकाशित करना है जिससे अदालत का अपमान होता,है अवमानना होती हो।

इसके तहत किसी अदालत को स्कैंड्लाइज़ करने या इसकी कोशिश करने या अदालत की गरिमा भांग करना या इसकी कोशिश करना... किसी न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना या डालने की कोशिश करना न्यायिक प्रशासन में हस्तक्षेप करना या करने की कोशिश करना या किसी और तरीके से इसमें बाधा डालना...साल 2006 में सरकार इस कानून में एक संशोधन लेकर आयी....

बतातें चलें की न्यायलय की अवमानना कानून 1971 की धारा 15 के भाग 1 के तहत धारा 14 में वर्णित अवमानना से इतर आपराधिक अवमानना की सूरत में सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायलय अपनी मर्ज़ी से या एडवोकेट जनरल या किसी और व्यक्ति जिसे एडवोकेट जनरल ने सहमति दी हो के निवेदन पर कार्रवाई कर सकता है।

इसी साल अगस्त महीने में महान्यायवादी वेणु गोपाल ने अनुज सक्सेना को अपनी सहमति देने से मना कर दिया था। अनुज सक्सेना ने अभिनेत्री स्वरा भास्कर के खिलाफ न्यायलय की प्रक्रिया में आपराधिक अवमानना का मामला दायर करने की इज़ाज़त माँगी थी। स्वरा भासकर पर सर्वोच्च न्यायलय के खिलाफ भद्दे और लज्जापूर्ण बयान देने का आरोप था.....

गोरतलब हो की कानून के मुताबिक़ न्यायलय की अवमानना करने पर 6 महीने क़ैद या 2 हज़ार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकता है... हालांकि अपराधी के माफी मांगने पर न्यायलय द्वारा इस सज़ा को माफ़ या कम किया जा सकता है....

सर्वोच्च न्यायलय ने हाल ही में कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषन को अपने दो विवादास्पद ट्वीट को लेकर न्यायालय अवमानना का दोषी पाया था। प्रशांत भूषन पर न्यायालय से माफी न मांगने पर 1 रुपये का मामूली जुर्माना लगाया गया था।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. पीएम मोदी और भूटान के प्रधानमंत्री ने लॉन्च किया रुपे कार्ड का दूसरा संस्करण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-भूटान रुपे कार्ड (RuPay Card) के दूसरे चरण की 20 नवंबर 2020 को शुरुआत की. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सभी भारतीयों की तरह मेरे मन में भी भूटान के लिए विशेष प्यार और मित्रता है. जब भी आपसे मिलता हूं तो एक खास अपनेपन की अनुभूति होती है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज हम रुपे कार्ड का दूसरा चरण शुरू कर रहे हैं. भूटान नेशनल बैंक द्वारा जारी रुपे कार्ड से भारत में एटीएम से एक लाख रुपये और प्वाइंट सेल टर्मिनल्स पर 20 लाख रुपये तक का लेनदेन कर सकेंगे. यह भारत में आने वाले भूटानी पर्यटकों के लिए पर्यटन, शॉपिंग और अन्य लेनदेन हो सकेगा.

2. भारत और कनाडा के बीच हुआ तीसरा भारत-कनाडा ट्रैक 1.5 संवाद, विदेश मंत्री ने लिया हिस्सा

इस 17 नवंबर, 2020 को केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके कनाडाई समकक्ष फ्रेंकोइस- फिलिप शैम्पेन ने तीसरे भारत-कनाडा ट्रैक 1.5 संवाद में भाग लिया.

विदेश मंत्री ने जिस बातचीत में भाग लिया, उसकी मेजबानी ओंटारियो स्थित सेंटर फॉर इंटरनेशनल गवर्नेंस इनोवेशन एंड गेटवे हाउस: इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशंस ने की थी.

इन दोनों देशों ने कोविड -19 महामारी के संबंध में सहयोग पर चर्चा की और मजबूत निवेश एवं वाणिज्यिक संबंधों पर एक साथ काम करना सुनिश्चित किया.

3. WEF के 36 स्मार्ट सिटी रोड मैप शहरों में 4 भारतीय शहर,

नई तकनीकों को सुरक्षित तरीके से अपनाने हेतु बेहतरीन रोडमैप तैयार करने वाले 36 वैश्विक शहरों की सूची में चार भारतीय शहरों को भी जगह दी गई है. बेंगलुरु, फरीदाबाद, इंदौर और हैदराबाद को विश्‍व के उन 36 शहरों में शामिल किया गया है, जिन्‍होंने नई तकनीक को सुरक्षित तरीके से अपनाने के लिए एक शानदार रोडमैप तैयार किया है.

यह सूची विश्व इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ओर से जारी की गई है. बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान पैदा हुए हालात में तकनीक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. डब्ल्यूईएफ की तरफ से कहा गया कि कोविड-19 ने शहरों द्वारा नई तकनीकों को अपनाने की गति में तेजी ला दी है, क्योंकि सरकारें सीमित संसाधनों के जरिये बढ़ती महामारी का प्रबंधन करने में संघर्ष कर रही हैं.

4. भारत ने सतह से हवा में मार करने वाली क्विक रिएक्शन मिसाइल का किया सफल परीक्षण

भारत ने अपनी रक्षा शक्ति में इजाफा करते हुए 17 नवंबर 2020 को एक शानदार और तेज हथियार का सफल परीक्षण किया. भारत ने क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (Quick Reaction Surface to Air Missile) का सफल परीक्षण किया. क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल ने हवा में मौजूद एक मानवरहित विमान को निशाना बनाया.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट करके रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मिसाइल के सफल परीक्षण के लिए बधाई दी है. राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ ने क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल लॉन्च करके एक मील का पत्थर हासिल किया है. यह मिसाइल जमीन से हवा में मार करने वाला हथियार है.

5. रक्षा मंत्री ने भूमि प्रबंधन प्रणाली के लिए पोर्टल लॉन्च किया

19 नवंबर, 2020 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा भूमि प्रबंधन प्रणाली के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया। यह प्रणाली भूमि प्रबंधन से निपटने में पारदर्शिता, गति और दक्षता लाएगी। इस पोर्टल को जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित उपकरणों के साथ एकीकृत किया गया है। इससे हितधारकों के बीच अनावश्यक संचार को हटाकर निर्णय लेने की प्रक्रिया में सुधार होगा।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र तीन राज्य हैं जिन्होंने तीन साल (2017-20) में रक्षा भूमि पर सबसे अधिक अतिक्रमण की सूचना दी है। इन राज्यों के बाद असम, सिक्किम और आंध्र प्रदेश आते हैं।

6. गोवा राज्य की पूर्व राज्यपाल मृदुला सिन्हा का 18 नवंबर को निधन हो गया

गोवा की पूर्व राज्यपाल, साहित्यकार और बीजेपी नेता मृदुला सिन्हा का 18 नवंबर 2020 को निधन हो गया. वे 77 साल की थे. वे एक कुशल लेखिका भी थीं, जिन्होंने साहित्य और संस्कृति की दुनिया में व्यापक योगदान दिया था. मृदुला सिन्हा का जन्म 27 नवंबर 1942 बयालीस को मुजफ्फरपुर में हुआ था. बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली मृदुला सिन्हा 2014 से 2019 तक गोवा की राज्यपाल रहीं थी.

7. विंड-सोलर हाइब्रिड पार्क : भारत सरकार ने नई योजना पेश की

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने पवन-सौर हाइब्रिड पार्कों को विकसित करने के लिए एक नई योजना का प्रस्ताव दिया है। इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं द्वारा सामना किए जाने वाले प्रमुख मुद्दों को संबोधित करना है।

पवन-सौर हाइब्रिड पार्क बिजली परियोजनाओं का एक केंद्रित क्षेत्र होगा। यह आवश्यक बुनियादी ढांचे के साथ एक क्षेत्र प्रदान करेगा। इसमें निकासी की सुविधाएं भी शामिल होंगी। सौर संकर पार्कों को विकसित करने के लिए स्थलों का चयन राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान द्वारा किया जायेगा।

8. भारत-लक्ज़मबर्ग वर्चुअल समिट : मुख्य तथ्य

19 नवंबर, 2020 को, भारत और लक्ज़मबर्ग ने दो दशकों में पहला स्टैंड अलोन शिखर सम्मेलन आयोजित किया।

लक्ज़मबर्ग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा 2019 में चार लक्ज़मबर्ग के उपग्रहों के प्रक्षेपण की सराहना की। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के लक्ज़मबर्ग के फैसले का स्वागत किया। लक्ज़मबर्ग संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (2021-22) में अपने कार्यकाल के दौरान भारत को अपना पूर्ण समर्थन देने के लिए सहमत हुआ है। अमेरिका और मॉरीशस के बाद लक्ज़मबर्ग विदेशी पोर्टफोलियो का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत है। भारत के एफपीआई का लक्ज़मबर्ग का योगदान 5% है।

लक्ज़मबर्ग दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र है।लक्समबर्ग स्टॉक एक्सचेंज पर ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट के माध्यम से भारतीय कंपनियां बड़ी पूंजी जुटा रही हैं।

9. सफाईमित्र सुरक्षा चैलेंज : खतरनाक सीवर सफाई को रोकने के लिए 243 शहरों में शुरू किया गया

19 नवंबर, 2020 को, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने “सफाइमित्र सुरक्षा चैलेंज” लॉन्च किया। इस चुनौती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सफाई के दौरान सेप्टिक टैंक या सीवर क्लीनर के जीवन की हानि न हो। यह चुनौती इस तथ्य पर बल देती है कि स्वच्छता कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और गरिमा स्वच्छ भारत मिशन का मूल है। इस चैलेंज को विश्व शौचालय दिवस के मौके पर लॉन्च किया गया था। स्वतंत्रता दिवस पर इस चुनौती के परिणामों की घोषणा की जायेगी। यह चुनौती मशीनीकृत सफाई को बढ़ावा देगी। भाग लेने वाले शहरों को पुरस्कार तीन उप-श्रेणियों में इस प्रकार प्रदा

10. ऑपरेशन कैलिप्सो :

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने हाल ही में ऑपरेशन कैलिप्सो लॉन्च किया है। इस ऑपरेशन के तहत, 504 ग्राम कोकीन जब्त की गई और एक ट्रांसनैशनल ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया गया। गिरोह ने सफलतापूर्वक मुंबई में 3.3 किलोग्राम से अधिक कोकीन की तस्करी की है। तस्करी वाली कोकीन की कीमत 20 करोड़ रुपए आंकी गई है।

11. भारत-न्यू डेवलपमेंट बैंक ने 500 मिलियन अमरीकी डालर के समझौते पर हस्ताक्षर किए

19 नवंबर, 2020 को भारत और न्यू डेवलपमेंट बैंक ने 500 मिलियन अमरीकी डालर के समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, न्यू डेवलपमेंट बैंक दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम परियोजना को लागू करने के लिए धनराशि उधार देगा। इस फंड का उपयोग क्षेत्र में विश्वसनीय, तेज, सुरक्षित और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदान करने के लिए किया जाएगा।

न्यू डेवलपमेंट बैंक को आमतौर पर ब्रिक्स बैंक कहा जाता है। इस बैंक का मुख्यालय चीन के शंघाई में स्थित है। न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना का प्रस्ताव भारत द्वारा 2012 में नई दिल्ली में आयोजित चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में किया गया था। इस बैंक के शेयर सदस्यों के बीच समान रूप से वितरित किए गए हैं। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के पास बैंक के 20-20% शेयर हैं।

12. एनजीटी का बड़ा फैसला, खराब वायु गुणवत्ता वाले राज्यों में 30 नवंबर तक पटाखों पर प्रतिबंध

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए दिवाली के मौके पर पटाखे पर बैन लगाने का बड़ा फैसला लिया है. एनजीटी ने बड़ा फैसला करते हुए दिल्ली- एनसीआर में 30 नवंबर तक पटाखों के जलाने पर रोक लगा दी है. इसके अतिरिक्त, जिन अन्य राज्यों में वायु गुणवत्ता खराब स्तर की है, वहां पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा. एनजीटी के आदेश के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर में सभी प्रकार के पटाखों की बिक्री या उपयोग पर 09 नवंबर की मध्यरात्रि से 30 नवंबर की मध्यरात्रि तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है. पटाखों पर एनजीटी प्रतिबंध देश के सभी शहरों/कस्बों पर लागू होगा जहां नवंबर के दौरान वायु की गुणवत्ता 'खराब' और इससे ऊपर की श्रेणी में आती है.

13.आरबीआई ने लगाया लक्ष्मी विलास बैंक पर अधिस्थगन

भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में तीस दिनों की अवधि के लिए लक्ष्मी विलास बैंक ऑफ इंडिया पर स्थगन (moratorium) लगाया है। शीर्ष बैंक ने बैंक के विलय के लिए एक योजना का मसौदा भी तैयार किया है। इस योजना के तहत, लक्ष्मी विलास बैंक को डीबीएस बैंक ऑफ सिंगापुर के साथ मिलाया जायेगा। अधिस्थगन दरअसल मे मुद्दों के हल होने तक यह वित्तीय गतिविधियों का अस्थायी निलंबन है। चेन्नई बेस्ड इस बैंक की 563 तिरिसत शाखाओं का नेटवर्क है। इसके पास 20,973 तिहत्तर करोड़ रुपये जमा हैं। बैंक ने पिछले तीन वर्षों में लगातार गिरावट दर्ज की थी। यह जमा की निरंतर निकासी और तरलता के बहुत कम स्तर का अनुभव कर रहा है। बैंक अपने मुद्दों को संबोधित करने के लिए पर्याप्त पूंजी जुटाने में विफल रहा। वित्त वर्ष 2020-21 की सितंबर तिमाही में बैंक ने जून तिमाही में 112 करोड़ रुपये के मुकाबले 397 सत्तानवे करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। लगभग एक-चौथाई बैंक अग्रिम खराब संपत्ति में बदल गए हैं। इसके अलावा, बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां सितंबर तिमाही में इसकी अग्रिम संख्या का 25.4% थीं। आरबीआई ने बैंक से निकासी पर 25,000 रुपये की सीमा लगाई है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।