(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (13th - 19th March 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (13th - 19th March 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • यूपी सरकार ने 13 मार्च को कैबिनेट की बैठक में सार्वजनिक संपत्ति क्षतिपूर्ति अध्यादेश के ड्राफ्ट पर लगायी मुहर....अब सरकारी व निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वालों पर होगी कार्यवाई..
  • POCSO – 2020 नियमों को लागू करने के लिए अधिसूचना हुई जारी ....9 मार्च से नए POCSO नियम होंगे प्रभावी...
  • पुरे विश्व में मनाया गया....विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस.. उद्देश्य उपभोक्ताओं को उनके कन्ज्यूमर राइट्स और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरुक करना..
  • संसद में फिर उठी, देश में बढ़ती आबादी और घटते संसाधन के मद्देनजर प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग..
  • सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब नौसेना में भी महिलाओं को मिलेगा स्थाई कमीशन...महिलाओं पर नहीं लगायी जा सकती लैंगिक आधार पर रोक
  • भारत के अपने लड़ाकू विमान तेजस ने फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस हेतु भारत के के लिए भरी पहली उड़ान.... पूरी तरह मानक पर सफल रहा..
  • तीन संस्कृत संस्थानों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का रास्ता साफ, राज्यसभा से भी मिली मंजूरी...

खबरें विस्तार से:

1.

दंगा फसाद आगज़नी, ये सब सुनते ही आम जनता सिहर उठती है…जहाँ ये सब घटनाएं रोज़मर्रा की आम गतिविधियों पर बुरा असर डालती हैं, तो वहीं इसकी आमद से सार्वजनिक सम्पत्तियों, बुनियादी सेवाओं पर बुरा असर डालती हैं । दंगे फसाद में उग्र भीड़ कई सरकारी सम्पत्तियों को नुक्सान पहुंचाती है तो वहीं निजी सम्पत्तियां भी इससे अछूती नहीं रहती हैं । सरकारी और निजी सम्पत्तियों के नुक्सान से हरसाल सरकार को जहाँ लाखों रुपये का नुक्सान होता है वहीं ये घटनाएं कानून व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल उठाती हैं ।

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए, मकानों दुकानों और कई सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुक्सान पहुँचाया गया । लेकिन अब उत्तर प्रदेश की सरकार ने इन गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कमर कास ली है ।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जुलूस, प्रदर्शन, हड़ताल व बंद के दौरान सरकारी व निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने वालों पर अब नकेल कसी जाएगी । इन लोगों को अब इन सम्पातियों को नुक्सान पहुँचाने के लिए क्षतिपूर्ति देनी होगी। आपको बता दें की यूपी सरकार ने 13 मार्च को कैबिनेट की बैठक में धरना, प्रदर्शन और बंद के नाम पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई करने वाले अध्यादेश के ड्राफ्ट पर मुहर लगा दी। उत्तर प्रदेश रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक एंड प्राइवेट प्रॉपर्टी) अध्यादेश 2020 में ये प्रावधान किया गया है कि, प्रदर्शन के नाम सरकारी या निजी संपतियों की तोड़फोड़, आगजनी से होने वाले नुकसान की भरपाई प्रदर्शन करने वाले दोषी व्यक्तियों से की जायेगी। हालांकि अभी विधानसभा सत्र नहीं है लिहाजा यूपी सरकार ने अध्यादेश के ज़रिये इस कानून पर अपनी मोहर लगाई है । गौरतलब है लखनऊ में CAA के खिलाफ प्रदर्शन में हिंसा फैलाने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए पोस्टर उत्तर प्रदेश सरकार ने पोस्टर लगाए थे जिस पर उच्च न्यायलय ने उत्तर प्रदेश सरकार पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी ।हाईकोर्ट के आदेश और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार अब कानून बनाने की दिशा में बढ़ रही है….

इस अध्यादेश के मुताबिक़ राज्य सरकार एक सेवा निवृत्त जिला जज की अध्यक्षता में क्लेम ट्रिब्यूनल बनाएगी। इसके फैसले को किसी भी अन्य न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इतना ही नहीं, ट्रिब्यूनल को आरोपी की संपत्ति ज़ब्त करने का अधिकार होगा। साथ ही वह अधिकारियों को आरोपी का नाम, पता व फोटोग्राफ प्रचारित-प्रसारित करने का आदेश दे सकेगा कि आम लोग उसकी संपत्ति की खरीदारी न कर सकें …

अध्यादेश के मुताबिक ट्रिब्यूनल में अध्यक्ष के अलावा एक सदस्य भी होगा। यह सहायक आयुक्त स्तर का अधिकारी होगा। ट्रिब्यूनल नुकसान के आकलन के लिए क्लेम कमिश्नर की तैनाती कर सकेगा। वह क्लेम कमिश्नर की मदद के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक सर्वेयर भी नियुक्त कर सकता है, जो नुकसान के आकलन में तकनीकी विशेषज्ञ की भूमिका निभाएगा।

इस ट्रिब्यूनल को दीवानी न्यायालय का पूरा अधिकार होगा और यह भू-राजस्व की तरह क्लेम वसूली का आदेश दे सकेगा। उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार इस अध्यादेश के कानून बनने से सार्वजनिक संपत्ति व निजी संपत्ति की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

जुर्माना लगाने से मुआवजा देने तक का अधिकार

अध्यादेश में हड़ताल, बंद, दंगा, सार्वजनिक हंगामा, विरोध या इस संबंध में सार्वजनिक या निजी संपत्ति को क्षति पहुंचाने की रोकथाम से लेकर जुर्माना, संपत्ति के दावों को लागू करने, न्यायाधिकरण को नुकसान की जांच और वहां से संबंधित मुआवजा देने का प्रावधान है।

अध्यादेश के कानूनी पहलुओं पर सवालिया निशान

इस अध्यादेश में कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन पर अभी भी संज्ञान लेने की ज़रुरत महसूस की जा रही है । इस पर सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जब उत्तर प्रदेश सरकार ने दोषियों के पोस्टर लगाने की कार्रवाई की तब इसे आधार देने के लिए कोई कानून मौजूद नहीं था। इसी मुद्दे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार के इस कदम को सवालों के घेरे में लिया था । इसके अलावा यह सवाल सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया गया । इन्ही सब सवालों के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यादेश का सहारा लिया है । लेकिन संविधान के अनुच्छेद 20 का खंड (1) एक्स पोस्ट फैक्टो कानून के खिलाफ व्यक्तियों की सुरक्षा करता है, जिसका मतलब है कि इस कानून के अधिनियमन से पहले किए गए कार्यों के लिए किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।जब उत्तर प्रदेश सरकार ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की थी तो उस समय ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं थे जिसके चलते अब सरकार को कानून बनने के बाद दोषियों को कानून बनने के बाद कार्रवाई करने में कानूनी अड़चन हो सकती है ।

पार्लियामेंट व असेंबली को कानून लाने का अधिकार है। किसी भी अपराध में दंड अपराध के समय प्रभावी कानून के तहत निर्धारित होता है। अधिसूचना जारी होने की तारीख से ही नए कानून को प्रभावी माना जाता है ।

हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम कानून व्यवस्था को कायम करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।

2.

कई खूबसूरत और रंग बिरंगी यादों को अगर किसी पन्ने पर उतारा जाए तो जो तस्वीर बनती है उसे बचपन कहते हैं…. लेकिन इस बचपन को तब ग्रहण लग जाता है जब समाज और अपनों के बीच में ही मौजूद कुछ दरिंदे वहशीपन के चलते इन मासूम ज़िन्दगियों से खिलवाड़ करते हैं, उनका यौन शोषण करते हैं....इन दरिंदों की है वानियत के चलते ये फूल खिलने से पहले ही मुरझा जाते हैं ...पूरी ज़िंदगी उन्हें इस बदनुमा दाग और कड़वी यादों के सहारे जीना पड़ता है.... बचपन पर इस ग्रहण को रोकने और बच्चों के यौन शोषण और उत्पीड़न को रोकने के लिए साल 2012 में पॉस्को एक्ट लागू किया गया.....लेकिन इसके बावजूद देश में बच्चों के साथ बढ़ती दरिंदगी को देखते हुए.... पॉक्सो एक्ट 2012 में बदलाव करने के लिए पॉक्सो संशोधन विधेयक 2019 लाया गया....और आज फिर इस एक्ट में बदलाव और कड़े प्रावधान की ज़रूरत महसूस की गयी....

हाल ही में केंद्र सरकार ने बच्चों के यौन शोषण के मामलों में सजा को और कड़ा करने वाले नए पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्चुअल ऑफेनसेज रूल्स,2020) नियमों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। नए पोक्सो नियम 9 मार्च से प्रभावी हो गए हैं। नए पोक्सो संशोधन कानून में कुछ नए नियम भी शामिल किए गए हैं। इनके तहत स्कूलों और केयर होम्स के स्टाफ का पुलिस वैरीफिकेशन ज़रूरी कर दिया गया है। पोर्नोग्राफी या यौन उत्पीड़न संबंधी सामग्री की शिकायत करने की प्रक्रिया, बाल अधिकारों की शिक्षा और अन्य प्रावधानों को भी इस संशोधन कानून के तहत सख्त किया गया है।

चाइल्ड प्रोर्नोग्राफी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए नए नियम के तहत जिस किसी को भी किसी बच्चे से जुड़ी पोर्न सामग्री मिलती है या ऐसी किसी सामग्री के बारे में जानकारी मिलती है, जिसे स्टोर किया गया है, तैयार किया गया है या फिर बांटा, दिखाया या प्रसारित-प्रचारित किया जा रहा है, उसकी जानकारी तत्काल प्रभाव से विशेष जेव्युनाइल पुलिस यूनिट (एसजेपीयू) या पुलिस या साइबरक्राइम पोर्टल को दी जाएगी

इन नियमों के तहत राज्य सरकारों को बच्चों के खिलाफ हिंसा को बिल्कुल भी बर्दाश्त न करने के लिए बाल संरक्षण नीति बनाने के लिए भी कहा गया है। इस नीति को बच्चों के संबंध में काम कर रहे सभी संस्थानों, संगठनों या अन्य एजेंसियों को भी लागू करना होगा। केंद्र और राज्य सरकारों को आयु के हिसाब से शैक्षिक सामग्री और बच्चों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए भी कहा गया है। इन पाठ्यक्रमों में बच्चों को निजी सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी जाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

यही नहीं इसके साथ ही टोल फ्री नंबर 1098 के जरिए चाइल्डलाइन हेल्पलाइन सेवाओं की जानकारी देने के लिए भी कहा गया है। अब नए नियमों के मुताबिक, स्कूलों, क्रैच, खेल अकादमियों या बच्चों के लिए किसी अन्य केंद्र समेत बच्चों के नियमित संपर्क में आने वाले किसी भी संस्थान को सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन कराना होगा।

वर्ष 2012 में एक विशेष कानून "पॉस्को एक्ट" बनाया। इस कानून के तहत दोषी व्यक्ति को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। क्योंकि यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है। खास बात यह कि वर्ष 2018 में इस कानून में संशोधन किया गया, जिसके बाद 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म के दोषियों को मौत की सजा देने का प्रावधान किया गया है। इससे 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस' यानी पॉक्सो (पीओसीएसओ) एक्ट को काफी मजबूती मिली है।

पॉक्सो शब्द संक्षिप्त अंग्रेजी वर्ण समूह है जो "प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012" से बना है। हिंदी में इसे "लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012" कहते हैं।इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है। इसलिए यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है।

वर्ष 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत अलग-अलग प्रकृति के अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है, जिसका कड़ाई से पालन किया जाना भी सुनिश्चित किया गया है। बावजूद इसके, जब नाबालिगों के प्रति जारी यौन हिंसा में कमी नहीं आई तो ठीक छह साल बाद वर्ष 2018 में इसमें संशोधन करके यह स्पष्ट कर दिया गया कि 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म करने के दोषियों को सजा-ए-मौत भी दी जा सकती है।

2012 में बने पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं पर नजर दौड़ाएंगे तो यह पाएंगे कि इस अधिनियम की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो। इस प्रकृति के मामले में सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है। वहीं, पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले लाए जाते हैं जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो। ऐसे मामले में दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इसी तरह, पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है। इस प्रकार की धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना दोनों हो सकता है। वहीं, पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है, जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है।

3.

अक्सर हमारे साथ ऐसा होता की हम बाज़ार से कोई चीज़ खरीदते है...लेकिन बाद में इस्तेमाल करने पर हमे लगता है की वो चीज उतनी कारगर नही है...जितने आपने उसकी कीमत अदा की है...और आप आपने आपको ठगा सा महसूस करते हो.....ऐसे में आप दुकानदार के पास जाकर उस चीज की शिकायत करते है....और इसे ही उपभोक्ता जागरुकता कहा जाता है....चुकी आप उपभोगता है तो आपके कुछ अधिकार है....और इन्ही अधिकारों के बारे में आपको जागरूक करने के लिए विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है....आईये इस रिपोर्ट में समझने की कोशिश इस अधिकार के बारे में...और जानते है इससे जुडी कुछ बातों को....

उपभोक्ताओं को उनके कन्ज्यूमर राइट्स अथवा उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए विश्व भर में हर साल 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाता है.....जहां इस बार भी ये दिवस 15 मार्च को मनाया गया.... इस दिवस को मनाये जाने का उद्देश्य ग्राहकों को किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचाना और उन्हें जागरुक बनाना है... इस साल विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2020 की थीम ‘The Sustainable Consumer' अर्थात् सतत ग्राहक रही..... यह थीम विश्व स्तर पर स्थायी उपभोग की आवश्यकता और उपभोक्ता अधिकारों और संरक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालती है....इस दिवस के लिए हर साल एक अलग विषय चुना जाता है..... विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2020 की थीम का उद्देश्य पर्यावरण को हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को बताना और वैश्विक जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता फैलाना है.....

पहली बार अमेरिका में रल्प नाडेर द्वारा उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत की गई, जिसके फलस्वरूप 15 मार्च 1962 को अमेरिकी कांग्रेस में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी द्वारा उपभोक्ता संरक्षण पर पेश किए गए विधेयक पर अनुमोदन दिया...जिसके बाद भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत 1966(छियासठ ) में मुंबई से हुई थी.....साल 1974(चौहत्तर) में पुणे में ग्राहक पंचायत की स्थापना के बाद अनेक राज्यों में उपभोक्ता कल्याण हेतु संस्थाओं का गठन किया गया जिसके बाद यह आंदोलन बढ़ता गया. ....9 दिसंबर 1986(छियासी) को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पहल पर उपभोक्ता संरक्षण विधेयक पारित किया गया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बार देशभर में लागू हुआ.....इसके बाद 24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया....आपको बता दें अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अलावा भारत में 24 दिसम्बर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है....

4.

देश में जातिगत जनगणना और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग फिर संसद में उठी...राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के विशंभर प्रसाद निषाद ने 2021 की जनगणना जातिवार कराए जाने और ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा खत्म करने की मांग की.....आईये जानते है इससे जुडी ख़ास बातें...

भारत में आखिरी बार जातिगत जनगणना 1931 (इकतीस)में हुई थी.... जहाँ 1951(इक्यावन ) की बात की जाए तो इस वश देश की आबादी 10 करोड़ 38 लाख थी जो 2011 में 121 करोड़ के पार पहुंच गई और 2025 तक 150 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है....जनसंख्या गुणांक में बढ़ती है जबकि संसाधनों में कम बढ़ोतरी होती है।...सरकार को ऐसा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए जो ‘हम दो हमारे दो' पर आधारित हो और इसका पालन नहीं करने वालों को हर तरह की सुविधाओं से न सिर्फ वंचित करना चाहिए बल्कि किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से भी रोका जाना चाहिए...आईये आपको उन राज्यों से रूबरू कराते है जहाँ दो बच्चों की नीतियांलागू है....

  1. असमः एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
  2. ओडिशाः दो से अधिक बच्चे वालों को शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं।
  3. बिहारः दो बच्चों से ज्यादा होने पर नगर पालिका का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।
  4. उत्तराखंडः टू चाइल्ड पॉलिसी सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक सीमित रखी गई है।
  5. महाराष्ट्रः दो से अधिक बच्चों पर ग्राम पंचायत और नगर पालिका चुनाव लड़ने पर रोक। सरकार में कोई पद भी नहीं मिल सकता। दो से ज्यादा बच्चे वालों को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के फायदे भी नहीं।
  6. आंध्र प्रदेशः 1994 में पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से ज्यादा बच्चे होने पर किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकते।
  7. तेलंगानाः पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव नहीं लड़ सकते।
  8. राजस्थानः दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य। दो से अधिक बच्चे वाले तभी चुनाव लड़ सकते हैं, अगर दो में से कोई एक दिव्यांग हो ।
  9. गुजरातः दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और नगर पालिका के चुनाव नहीं लड़ सकते।
  10. मध्य प्रदेशः 2001 में टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में पॉलिसी लागू।
  11. छत्तीसगढ़ः दो बच्चों से ज्यादा होने पर सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। हालांकि सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में यह लागू है।

5.

सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च 2020 को नौसेना में महिला अधिकारियों के स्थाई कमिशन मामले में अपना फैसला सुना दिया है..... आपको बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी महीने में भारतीय सेना में महिला अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था.....जहाँ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि मानसिकता बदलनी होगी...सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए महिला अधिकारियों को सेना में स्थाई कमीशन पर मुहर लगा दी. ...

महिलाओं और पुरुष अधिकारियों में कोई भेदभाव ना हो इसकेलिए...सुप्रीम कोर्ट ने नौसेना में महिला अधिकारियों के स्थाई कमिशन मामले में अपना फैसला सुना दिया है ....कोर्ट के आदेश के अनुसार नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमिशन दिया जायेगा....

केंद्र सरकार की याचिका खारिज

आपको बता दें...सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं पर लैंगिक आधार पर रोक नहीं लगाई जा सकती है... सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें महिला अधिकारियों की शारीरिक सीमाओं का हवाला दिया गया था...

स्थाई कमीशन का मतलब क्या है?

स्थाई कमिशन का मतलब है कि कोई अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक सेना में काम कर सकता है और इसके बाद वह पेंशन का भी हकदार होगा....इसके तहत वे अधिकारी भी स्थयी कमिशन में जा सकती हैं जो अभी शॉर्ट सर्विस कमिशन में काम कर रही हैं...शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत अधिकारियों को चौदह साल में रिटायर कर दिया जाता है और उन्हें पेंशन भी नहीं मिलती है.....वहीँ आपको बता दें इससे पहले महिलाएं केवल दस साल तक ही नौकरी कर पाती थीं...

शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू क्यों किया गया था?

सेना में अधिकारियों की कमी पूरी करने के लिए शॉर्ट सर्विस कमिशन शुरू किया गया था. इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों को ही शामिल किया जाता था...लेकिन स्थाई कमिशन हेतु केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते थे....लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद महिला अधिकारीयों को भी वो सारे हक़ मिलेंगे...जिनसे वो अभी तक महरूम थीं....

6.

एयरफोर्स के जंगी बेड़े में भारत का अपना लड़ाकू विमान 'तेजस' या लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट शामिल है.....जिसने ऑपरेशनल क्लियरेंस को लेकर अपनी पहली उड़ान भरी है.....आपको बता दें ये उड़ान 17 मार्च को भरी गयी....जहाँ तेजस ने अपना पहला परीक्षण पूरा किया....हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के अनुसार, इस दौरान तेजस की उड़ान पूरी तरह मानक पर सफल रही है....

17 मार्च 2020 को फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (एफओसी) के लिए तेजस ने अपनी पहली उड़ान भरी...इस उड़ान में तेजस करीब 40 मिनट तक हवा में रहा....आपको बता दें इस फाइटर जेट के एसपी-21 वैरियंट को एयर कमोडोर के.ए मुथाना (रिटायर्ड) उड़ा रहे थे....एयर कमोडोर के ए मुथाना टेस्ट फ्लाइंग (फिक्स्ड विंग) के चीफ हैं....आपको बता दें एलसीए तेजस की यह पहली उड़ान बैंगलोर में आयोजित की गई थी....जहाँ एचएएल ने 12 महीने के रिकॉर्ड समय में इस काम को हासिल किया.,..एचएएल के सीएमडी आर. माधवन के अनुसार, इस उड़ान में एलसीए तेजस कार्यक्रम के विभिन्न हितधारकों एचएएल, वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस और सर्टिफिकेशन, भारतीय वायुसेना व एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी के सराहनीय टीम वर्क का योगदान रहा....

15 अन्य तेजस के निर्माण

एचएएल के अनुसार, तेजस की इस उड़ान के बाद 15 और तेजस विमानों के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है...जहाँ इन विमानों को अगले वित्त वर्ष में भारतीय वायुसेना को सौंप दिए जाने की योजना है....आपको बता दें भारत में बने तेजस विमान का निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने किया है...

तेजस की ख़ास बात

एचएएल के अनुसार, एफओसी-स्टैंडर्ड तेजस में एयर-टु-एयर रीफिलिंग, बियॉन्ड विजुअल रेंज मिसाइल सिस्टम जैसे अडवांस फीचर मौजूद हैं....शुरुआत में तैयार हुए तेजस को लेकर वायुसेना फ्लीट की ओर से कई सारे सुझाव सामने आए थे. इन सुझावों के आधार पर इस जेट के कई हिस्सों में सुधार करके इसे और बेहतर बनाया गया है.

7.

राज्यसभा से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, 2019....ध्वनिमत से पारित हो गया... आपको बता दें ये विधेयक लोकसभा से दिसंबर में ही पारित हो चुका है....आपको बता दें यह राज्यसभा में मानव संसाधन विकास मंत्री, रमेश पोखरियाल 'निशंक' द्वारा पेश किया गया था....जहाँ केंद्रीय दर्जा मिलने से इन विश्वविद्यालयों में सभ्यता और संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा....वहीँ संस्कृत भाषा को अपनी एक अलग पहचान मिलेगी...

राज्य सभा ने 16 मार्च 2020 को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक 2019 पारित किया.....यह विधेयक भारत में तीन विश्वविद्यालयों को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करेगा..... जहाँ मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में कहा कि संस्कृत साहित्य का सबसे बड़ा भंडार और भारत की ऐसी अमूल्य धरोहर है, जिसकी एक अलग पहचान है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने समूचे विश्व को संस्कृत के माध्यम से ज्ञान दिया है....

विधेयक का उद्देश्य

इस विधेयक का उद्देश्य भारत के तीन मानद विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में बदलना है....आपको बता दें भारत में उन उच्‍चतर शिक्षा संस्थाओं को मानद विश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) कहते हैं जिन्हें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सलाह पर भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस प्रकार की मान्यता दी जाती है...

तीन संस्कृत विश्वविद्यालय

विधेयक तीन विश्वविद्यालयों को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के रूप में उन्नत करने में सक्षम होगा...जहाँ राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान दिल्ली, श्री लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ दिल्ली और राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरुपति की पहचान अब केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में होगी...

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय विधेयक, 2019 पर सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि हम सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त करने के पक्षधर हैं....हम प्रत्येक भारतीय भाषा के ज्ञान के भंडार का उपयोग करेंगे. यदि संस्कृत सशक्त होगी तो सभी भारतीय भाषाएं भी सशक्त होंगी. इस विधेयक के कानून बनने के बाद दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लाल बहादुर शास्त्री विद्यापीठ और तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा.

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. भारत में फैलता कोरोना वायरस का खतरा

भारत में कोरोना वायरस तेजी से बढ़ता जा रहा है...देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 175(पचहतर) हो गई है...जो आगे भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है...जहाँ कोरोना के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मार्च को देशवासियों को संबोधित किया...वहीं, भारतीय रेलवे ने 168 (अडसठ)ट्रेनों को रद कर दिया है। उत्तर प्रदेश कोरोना वायरस के ताज़ा तीन मामले सामने आए हैं..वहीँ छत्तीसगढ़ और चंडीगढ़ में पहले संक्रमित मरीज की पुष्टि हुई है।

2. जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल जी.सी. मुर्मू का सलाहकार किया गया नियुक्त

बशीर अहमद खान को जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल जी.सी. मुर्मू का सलाहकार नियुक्त किया गया है.... इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय में उप सचिव (जम्मू-कश्मीर और लदाख विभाग) आनंदी वेंकटेश्वरन द्वारा यह आदेश जारी किया गया...आपको बता दें बशीर अहमद खान 2000 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और वर्तमान में कश्मीर के संभागीय आयुक्त के पद पर तैनात हैं....

3. भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को हाल ही में राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया गया..

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामांकित किया है...भारत के 46 वें (छियालीस वें )मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई पिछले साल 17 नवंबर को पद से सेवानिवृत्त हुए थे...रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट की उस पांच सदस्यीय पीठ के अध्यक्ष थे जिसने पिछले साल नौ नंवबर को संवेदनशील अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया था.

4. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिय सरकार का बड़ा कदम

देश में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए केंद्र सरकार लगातार कोशिश में जुटी हुई है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस पर लगाम को लेकर कई जरूरी निर्देश दिए हैं. केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए धार्मिक नेताओं से अपील की है कि वे ऐसे आयोजनों से बचें. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस को लेकर नया हेल्पलाइन नंबर 1075 जारी किया है. इसके साथ ही पुराना हेल्पलाइन नंबर 011-23978046 पहले से ही सक्रिय है...

5. उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल सतरंग योजना का किया शुभारंभ

उत्तर प्रदेश के युवाओं के विकास, रोजगार, स्वरोजगार, प्रशिक्षण को कौशल युक्त श्रमशक्ति के रूप में विकसित करने तथा रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए कौशल सतरंग योजना का शुभारंभ किया गया. मुख्यमंत्री अपरेंटिसशिप प्रमोशन योजना के तहत, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के लिए 100 करोड़ और कौशल प्रशिक्षण और 2500 रुपये प्रति माह वजीफे के रूप में प्रदान करने का प्रावधान किया है...

6. SAARC Covid-19 इमरजेंसी फंड’ के लिए भारत ने बढाया कदम

कोरोना वायरस (COVID -19) से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर सार्क देशों द्वारा SAARC Covid-19 इमरजेंसी फंड’ बनाए जाने की घोषणा की गई है...इस फंड में भारत की तरफ से शुरुआती सहयोग के रूप में 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर देने की घोषणा की गई है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, COVID-19 में CO का तात्पर्य कोरोना से है, जबकि VI विषाणु को, D बीमारी को और संख्या-19 वर्ष 2019 (बीमारी के पता चलने का वर्ष) को चिह्नित करती है...

7. चैत्र जात्रा उत्सव को COVID -19 की वजह से किया रद्द

ओडिशा के तारा तारिणी पहाड़ी मंदिर में 17 मार्च, 2020 को आयोजित होने वाले प्रसिद्ध वार्षिक चैत्र जात्रा उत्सव को COVID -19 की वजह से रद्द कर दिया गया है. यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने के प्रत्येक मंगलवार को ओडिशा के तारा तारिणी पहाड़ी मंदिर में मनाया जाता है. भारतीय नौसेना की नौका आईएनएसवी तारिणी का नाम भी इसी तारा तारिणी पहाड़ी मंदिर के नाम पर रखा गया था.

8. लोकसभा ने पारित किया 'गर्भ का चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक 2020'

लोकसभा ने 17 मार्च 2020 को 'गर्भ का चिकित्सकीय समापन संशोधन विधेयक 2020' (The Medical Termination of Pregnancy (Amendment) Bill-2020) पारित कर दिया....इस विधेयक में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट-1971 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है.... इसमें गर्भपात की सीमा बढ़ाकर 24 हफ्ते करने का प्रवाधान है. इससे पहले महिलाएं अधिकतम 20 हफ्ते तक ही गर्भपात करा सकती थीं...यह प्रावधान विशेष वर्ग की महिलाओं के लिए किया गया है. इस प्रावधान में दुष्कर्म पीड़िता, सगे-संबंधियों की बुरी नजर की शिकार पीड़िताएं, दिव्यांग और नाबालिग शामिल हैं. चिकित्सकीय, मानवीय और सामाजिक आधार पर इस प्रावधान को लागू किया जा सकता है.

9. पारित हुआ वायुयान (संशोधन) विधेयक, 2020

लोकसभा ने 17 मार्च 2020 को वायुयान (संशोधन) विधेयक, 2020 को ध्वनिमत से पारित कर दिया. इससे पहले नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विमान अधिनियम, 1934 (चौतीस) में संशोधन का विधेयक संसद में प्रस्तुत किया...इसमें नियमों के उल्लंघनों के मामले में जुर्माने की अधिकतम सीमा को वर्तमान 10 लाख रूपये से बढ़कर एक करोड़ रूपये कर दिया गया है..नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि विमान ईंधन को जीएसटी के अंतर्गत लाया जायेगा, ताकि ईंधन पर शुल्‍क को तार्किक बनाया जा सके. उन्‍होंने कहा कि विमान उड़ाने की कुल लागत का 40 फीसदी विमान ईंधन पर खर्च होता है. इसलिए वित्‍त मंत्रालय से इसे जीएसटी के अंतर्गत लाने हेतु विशेष बैठक बुलाने का अनुरोध किया गया है...

10. भारत में ‘इनोवेट फॉर एक्सेसिबल इंडिया’ नामक अभियान किया लॉन्च

NASSCOM फाउंडेशन ने माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के साथ मिलकर ‘इनोवेट फॉर एक्सेसिबल इंडिया’ अभिया लांच किया है....यह अभियान भारत में दिव्यांग लोगों के सशक्तिकरण के लिए आरंभ की गई पहल है..इसके तहत विशेष प्रकार की तकनीकी सहायता दी जाएगी, जिससे दिव्यांगजनों को अपने जीवन में बेहतर अनुभूति हो...माइक्रोसॉफ्ट का मानना है कि दिव्यांग व्यक्तियों को आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के माध्यम से सशक्त बनाया जा सकता है....

11. डीएसी ने भारतीय वायुसेना हेतु 83 (तिरासी )स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान की खरीद को दी मंजूरी

रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में भारतीय वायुसेना हेतु 83 (तिरासी)स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान हासिल करने को मंजूरी दे दी है. यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने लिया है. यह अब प्रस्ताव मंजूरी के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी के सामने रखा जाएगा. डीएसी ने घातक रक्षा उपकरण हासिल करने हेतु 1300 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह रकम वायुसेना के हॉक एमके-32 विमानों के ट्विन डोम स्टीम्यूलेटर तथा एरियल फ्यूज खरीदने में खर्च की जाएगी.

12. महारष्ट्र ने अंग दान तथा प्रत्यारोपण में तमिलनाडु और तेलंगाना को पीछे छोड़

पुणे, नागपुर और औरंगाबाद अंग दान के क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले नगर हैं....महाराष्ट्र को राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन द्वारा मृतक अंग दान के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ राज्य का पुरस्कार प्रदान किया गया था. अंग प्रत्यारोपण का अभिप्राय सर्जरी के माध्यम से एक व्यक्ति के स्वस्थ अंग को निकालने और उसे किसी ऐसे व्यक्ति में प्रत्यारोपित करने से है जिसका अंग किन्हीं कारणों से विफल हो गया है.
 

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।