(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (12th September - 18th September 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • भारत और अमेरिका ने किये रक्षा तकनीकी सहयोग पर स्टेटमेंट ऑफ़ इंटेंट पर हस्ताक्षर....इस बयान में भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास के अवसर पैदा करने के बारे में बात की गई ...
  • COVID-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज बीमा योजना का हुआ विस्तार....COVID-19 स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया गया...मार्च 2020 में शरू की गयी थी प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना
  • HL 3- राष्ट्र को मिली नई सौगात...प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किया गया कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन...रेल महासेतु शुरू होने से आसपास के क्षेत्र के लोगों का उत्तरपूर्वी क्षेत्रों के साथ संपर्क हो जायेगा काफी आसान.
  • कृषि फसल अवशेष को जलाने की समस्या को दूर करने के लिए पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी ने निकला समाधान ..पंजाब कृषि फसल अवशेष को बायोमास ईंधन में करेगा परिवर्तित.
  • जम्मू-कश्मीर सारकार ने स्वस्थ्य योजना की घोषणा की...जम्मू और कश्मीर के सभी निवासियों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करेगी.
  • लोकसभा में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020 हुआ पारित ...सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन के जरिये सरकार का लक्ष्य इनके कामकाज में सुधार लाना है.
  • वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह पर अलौकिक जीवन के संभावित संकेतों का पता लगाया...हो सकता है पृथ्वी के पड़ोसी में जीवाणुओं का वास

खबरें विस्तार से:

1.

भारत और अमेरिका ने 15 सितंबर, 2020 को 10वीं रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल की आभासी समूह बैठक के दौरान रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग पर बातचीत को मजबूत करने के लिए एक आशय बयान (स्टेटमेंट ऑफ़ इंटेंट) पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस बयान में सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास के अवसर पैदा करने की भी बात कही गई है. यूएस अंडर सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर Acquisition AND SUSTENESE एक्विजिशन एंड सस्टेनेन्स, श्री एलेन लॉर्ड और सचिव, रक्षा उत्पादन, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, श्री राज कुमार द्वारा इस स्टेटमेंट ऑफ़ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए थे.

श्री राज कुमार और श्री एलेन लॉर्ड ने इस आभासी बैठक की सह-अध्यक्षता की, जिसके दौरान दोनों पक्षों के समूहों ने उन्हें मौजूदा गतिविधियों और ऐसे सहयोगी अवसरों के बारे में सूचना दी, जिनमें कई पूर्ण-अवधि की परियोजनाओं को पूरा करने के लिए लक्ष्य भी शामिल हैं.

DTTI समूह का उद्देश्य

इस रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल (डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव - DTTI) समूह का उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा व्यापार संबंधों के लिए निरंतर अपने नेतृत्व का ध्यान केंद्रित करना और रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के अवसर पैदा करना है.

ये चार संयुक्त कार्य समूह वायु और विमान वाहक नौसेना, भूमि, प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित हैं जो रक्षा प्रौद्योगिकी और व्यापार पहल के तहत स्थापित किए गए हैं. इन प्रौद्योगिकियों को पारस्परिक रूप से सहमत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है.

मुख्य विशेषताएं

इस आभासी बैठक (वर्चुअल मीटिंग) के दौरान सह-अध्यक्षों ने यह उल्लेख किया कि, अक्टूबर, 2019 में हुई पिछली DTTI समूह बैठक के बाद से, DTTI के तहत सहकारी परियोजनाओं के विकास और पहचान के लिए एक DTTI मानक संचालन प्रक्रिया पूरी हो गई है.

DTTI के लिए ढांचे के तौर पर भी SPO सेवा कर रहा है और सफलता को परिभाषित करने के लिए दोनों पक्षों को आपसी समझ को हासिल करने और उसका दस्तावेजन करने की अनुमति देता है.

उद्योग के लिए DTTI के प्रारंभिक मार्गदर्शन के तौर पर इस प्रक्रिया के बयान के प्रमुख तत्वों के सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करने योग्य निष्कर्ष भी जुलाई में प्रकाशित किए गए हैं और इसलिए, अमेरिका और भारतीय उद्योग संघ के माध्यम से वितरित किए गए हैं.

DTTI के बारे में

डिफेंस टेक्नोलॉजी एंड ट्रेड इनिशिएटिव (DTTI) ग्रुप मीटिंग्स आमतौर पर हर साल दो बार संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत के बीच वैकल्पिक तौर से आयोजित की जाती हैं. हालांकि, इस साल मौजूदा कोरोना वायरस महामारी के बीच, इन दोनों ही देशों के अधिकारियों ने आभासी बैठक का संचालन करने का फैसला किया था.

2.

भारत सरकार ने हाल ही में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज बीमा योजना का विस्तार कर COVID-19 स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान किया है। इस योजना को मार्च 2020 में 90 दिनों की अवधि के लिए घोषित किया गया था। इसे अब एक और 180 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है।

COVID-19 लॉक डाउन के दौरान नागरिकों के जीवन को आसान बनाने में मदद करने के लिए प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना मार्च 2020 में शुरू की गई थी। यह बीमा योजना इस पैकेज का एक हिस्सा है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने COVID-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों को बीमा राशि प्रदान करने के लिए न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के साथ सहयोग किया है।

बीमा योजना के बारे में

यह योजना स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं को 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान करती है। लाभार्थियों में मुख्य रूप से स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं जो COVID-19 रोगियों के सीधे संपर्क में हैं। इसमें COVID-19 संक्रमण के कारण जीवन की आकस्मिक हानि भी शामिल है।

योजना की मुख्य विशेषताएं

श्रमिकों को प्रदान की जाने वाली बीमा राशि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा वहन की जाती है।

योजना के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं की गई है और कोई भी व्यक्ति योजना में नामांकन कर सकता है।

अब तक, भारत सरकार ने योजना के तहत 61 दावों का भुगतान किया है। न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की परीक्षा के तहत 156 दावे हैं।

लाभार्थियों को COVID-19 परीक्षण के प्रति सकारात्मक प्रमाण पत्र प्रदान करना आवश्यक है। हालांकि, COVID-19 संबंधित ड्यूटी के कारण जान-माल की हानि के मामले में प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।

कोन होंगे योजना के लाभार्थी

COVID-19 रोगियों के सीधे संपर्क में आने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता इस योजना में शामिल हैं। इन लाभार्थियों के अलावा, इस योजना में सेवानिवृत्त अस्पताल के कर्मचारी, कर्मचारी, स्वयंसेवक, दैनिक वेतन भोगी, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी, तदर्थ कार्यकर्ता, एम्स / आईएनआई कार्यकर्ता, स्वायत्त अस्पताल के कर्मचारी, राज्यों, केंद्रीय अस्पतालों, अस्पतालों में कार्यरत्त आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं।

3.

हाल ही में बीते 18 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र को समर्पित किया...इस दिन प्रधानमंत्री मोदी बिहार के लाभ के लिए यात्रियों की सुविधाओं से संबंधित 12 रेल परियोजनाओं का भी उद्घाटन किया...यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया गया...

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से जारी एक बयान में कहा गया कि वीडियो कॉन्फ्रेंस से होने वाले कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन बिहार के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण माना जाना रहा है...क्योंकि यह इस क्षेत्र को पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से जोड़ेगा....

2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी ने किया था शिलान्यास

सरायगढ़-निर्मली के बीच कोसी नदी पर रेल महासेतु का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था. इसे साल 2003-04 में 323.41 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया था. लेकिन समय गुजरने के साथ ही इस परियोजना पर 516 करोड़ रुपये खर्च हुए.

दूरी घटकर रह गई है 22 किमी

सरायगढ़-निर्मली के बीच पहले जाने के लिए सहरसा-मानसी-खगडिया- समस्तीपुर-दरभंगा होते हुए निर्मली जाना पड़ता था. जिसकी दूरी 298 अठानवे किमी होती थी. इस रेल महासेतु के निर्माण होने से इसकी दूरी मात्र 22 किमी में सिमट गई है. प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन के बाद सहरसा से चलने वाली पैसेंजर ट्रेन ही सुपौल-सरायगढ़ होते हुए आसनपुर कुपहा तक जाएगी और फिर वहीं से सरायगढ़ वापस होते हुए राघोपुर तक ट्रेन जाएगी.

इस ट्रेन के चलने से सुपौल-अररिया और सहरसा जिलों में रहने वालों को सीधा फायदा होगा. इस क्षेत्र के लोगों के लिए दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक जाने के लिए कनेक्टिंग ट्रेन लेना भी आसान हो जाएगा. इससे पहले पीएम मोदी ने बिहार में तीन पेट्रोलियम परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया था.

कोसी रेल महासेतु का महत्व

रेल महासेतु के शुरू होने से आसपास के क्षेत्र के लोगों का उत्तरपूर्वी क्षेत्रों के साथ संपर्क काफी आसान हो जाएगा. बता दें कि 1887 सत्तासी में निरमाली और भापतियही (सरायगढ़) के बीच मीटर गेज का निर्माण किया गया था. भारी बाढ़ और 1934 चौतीस में आए विनाशकारी भूंकप से यह रेल लिंक बह गया. सरकार ने साल 2003-04 को कोसी मेगा ब्रिज प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी थी. इस पुल से नेपाल सीमा पर भारत की स्थिति मजबूत होगी.

4.

पंजाब ऊर्जा विकास एजेंसी (PEDA) पंजाब सरकार के साथ मिलकर जल्द ही धान के भूसे के उपयोग के लिए एक विकल्प लेकर आ रही है। कृषि फसल अवशेष को जलाने की समस्या उत्तर भारत की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। पंजाब सरकार की अपनी एजेंसी; PEDA के माध्यम से इस समस्या को दूर करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

समस्या क्या है?

धान और गेहूं के खेत से बचा हुआ अवशेष आमतौर पर खेत में ही जलाया जाता है। इससे जलाने से पर्यावरण संबंधी समस्याओं के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा होती हैं। पंजाब में, लगभग बीस मिलियन टन धान का अवशेष उत्पन्न होता है, इनमें से केवल पांच प्रतिशत का उपयोग जैव ईंधन बनाने के लिए किया जाता है, शेष खेत में ही जला दिया जाता है। कृषि फसल अवशेष का जलाना दिल्ली में प्रदूषण और धुंध के सबसे बड़े कारणों में से एक है। इसके अलावा स्टब बर्निंग से मिट्टी की उर्वरता भी कम हो जाती है और इससे निकलने वाली गर्मी बैक्टीरिया को मार देती है और मिट्टी की नमी को कम कर देती है।

क्या है समाधान

PEDA, जो एक राज्य नोडल एजेंसी है, पिछले तीस वर्षों से अधिक समय से नवीकरणीय ऊर्जा के संवर्धन और विकास की दिशा में काम कर रही है। एजेंसी ने 11 बायोमास बिजली संयंत्र स्थापित किए हैं जहां 97सत्तानवे.50 मेगावाट बिजली (मेगावाट) उत्पन्न होती है। इन संयंत्रों में, कुल 20 मिलियन टन धान की कुल मात्रा का 5 प्रतिशत से भी कम, जो कि लगभग 8.80 लाख मीट्रिक टन धान के अवशेष है, का उपयोग प्रतिवर्ष बिजली पैदा करने के लिए किया जाता है। इनमें से अधिकांश संयंत्र 4-18 मेगावाट के हैं और सालाना 36,000 से 1,62 बासठ हज़ार ,000 मीट्रिक टन अवशेष का उपयोग कर रहे हैं।

उपरोक्त संयंत्र के अलावा, 14 मेगावाट क्षमता वाली दो और बायोमास बिजली परियोजनाएं विचाराधीन हैं और जून 2021 से पूरी तरह से यह काम करना शुरू कर देंगी। इन 14 मेगावाट के संयंत्र के संचालन के लिए प्रति वर्ष 1.26 लाख मीट्रिक टन धान अवशेष की आवश्यकता होगी। ये बायोमास बिजली परियोजनाएं अपेक्षाकृत कम CO2 और कण उत्सर्जन के कारण पर्यावरण के अनुकूल हैं और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन को भी विस्थापित करती हैं, यह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है।

5.

हाल ही में एक बड़ी घोषणा में, जम्मू और कश्मीर सरकार ने स्वास्थ्य योजना की घोषणा की जिसमें सरकार सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान करेगी।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा घोषित यह योजना केंद्र शासित प्रदेश के सभी निवासियों को कवर करेगी। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के संयोजन में उपराज्यपाल द्वारा कार्यान्वित यह योजना जम्मू और कश्मीर के सभी निवासियों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान करेगी।

कवर की गयी बीमारियां और खर्चे

इस योजना में शामिल पैकेज में कैंसर और गुर्दे की विफलता जैसी सभी महत्वपूर्ण बीमारियां शामिल हैं। COVID-19 भी हालिया योजना में शामिल है। ऑन्कोलॉजी, कार्डियोलॉजी और नेफ्रोलॉजी को भी इसमें कवर किया जाएगा। हाई-एंड हॉस्पिटलाईजेशन को भी कवर किया जाएगा। तीन दिन के प्री- हॉस्पिटलाईजेशन और पोस्ट-हॉस्पिटलाईजेशन के 15 दिन और अन्य प्रमुख खर्च जैसे, नैदानिक देखभाल और दवा पर खर्च को भी कवर किया जाएगा। वर्तमान में, देश भर में लगभग 23,300 एमपैनलड अस्पताल हैं जहाँ लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY)

वर्ष 2018 में सितंबर में शुरू की गई इस योजना को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा तक मुफ्त पहुंच प्रदान करने के प्रयास में लॉन्च किया गया था। यह योजना 50 करोड़ गरीब और कमजोर भारतीय लोगों को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गयी थी।

ABPMJAY की विशेषताएं

यह योजना एक चिकित्सा उपचार के लिए लाभार्थी को प्रति परिवार पांच लाख प्रदान करती है जिसका लाभ निजी अस्पतालों में भी लिया जा सकता है। परिवार के आकार, आयु या लिंग पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इस योजना में प्री-हॉस्पिटलाईजेशन से लेकर पोस्ट- हॉस्पिटलाईजेशन के 15 दिन तक के खर्च शामिल हैं।

6.

लोकसभा में 16 सितम्बर 2020 को बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया गया. लोकसभा में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक सहकारी बैंकों को नियंत्रित नहीं करता है. सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 पैंसठ से ही भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पास है.

सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन के जरिये सरकार का लक्ष्य इनके कामकाज में सुधार लाना है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इन बदलावों से जमाकर्ताओं का पैसा भी सुरक्षित रहेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में विधेयक पेश करते समय बताया कि सहकारी बैंकों का सकल फंसा कर्ज (एनपीए) मार्च, 2019 में 7.27 प्रतिशत था, जो मार्च, 2020 में बढ़कर 10 प्रतिशत से ऊपर चला गया. वित्त वर्ष 2018-19 में 277 सतहत्तर शहरी सहकारी बैंक घाटे में रहे थे. मार्च, 2019 के आखिर में 100 से ज्यादा शहरी सहकारी बैंक न्यूनतम पूंजी की नियामकीय शर्त भी पूरी करने में सक्षम नहीं रह गए थे.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2020 में एक अध्यादेश के जरिये सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के नियंत्रण में लाने की मंजूरी दी थी. साथ ही वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाले प्रावधानों को सहकारी बैंकों पर भी प्रभावी कर दिया गया था.

विधेयक से संबंधित मुख्य बिंदु

यह विधेयक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को अवश्यकता पड़ने पर सहकारी बैंकों के प्रबंधन में बदलाव करने का अधिकार देता है.

इससे सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा करने वाले आम लोगों के हितों की रक्षा होगी.

विधेयक में कहा गया है कि आरबीआई को सहकारी बैंकों के नियमित कामकाज पर रोक लगाये बिना उसके प्रबंधन में बदलाव के लिये योजना तैयार करने का अधिकार मिल जायेगा.

कृषि सहकारी समितियां या मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में काम करने वाली सहकारी समितियां इस विधेयक के दायरे में नहीं आयेंगी.

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के निचले सदन में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्‍युलेशन एक्‍ट, 1949 उनचास में संशोधन कर बैंक उपभोक्‍ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना चाहती है.

इस बिल से जमाकर्ताओं को फायदा

इस बिल में जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिये बेहतर प्रबंधन और समुचित नियमन के जरिये सहकारी बैंकों को बैकिंग क्षेत्र में हो रहे बदलावों के अनुरूप बनाने का प्रावधान किया गया है. यह विधेयक इससे संबंधित अध्यादेश के स्थान पर लाया गया है.

7.

वैज्ञानिकों ने बीते इस 14 सितंबर, 2020 को खुलासा किया है कि, उन्होंने निर्जन शुक्र ग्रह पर जीवन के संभावित संकेतों का पता लगाया है. इन वैज्ञानिकों ने शुक्र ग्रह के अम्लीय बादलों में फॉस्फीन नामक एक गैस का पता लगाया है जिससे यह इंगित होता है कि, पृथ्वी के पड़ोसी में जीवाणुओं का वास हो सकता है.

हवाई में जेम्स क्लर्क मैक्सवेल टेलीस्कोप का उपयोग करके एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टीम द्वारा शुक्र ग्रह में पहली बार फॉस्फीन की उपस्थिति को देखा गया. इन शोधकर्ताओं ने बाद में चिली में ALMA (अटाकामा लार्ज मिलिमीटर / सबमिलिमिटर एरे है..इस रेडियो टेलीस्कोप का उपयोग करके अपनी इस खोज की पुष्टि की.

इस खोज का क्या अर्थ है?

अध्ययन के सह-लेखक क्लारा सूसा-सिल्वा के अनुसार, शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन को खोजने के लिए सबसे प्रशंसनीय व्याख्या अलौकिक जीवन का अस्तित्व है. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में सोसा-सिल्वा आणविक खगोल भौतिकीविद् यानि PHYSICIST हैं.

उन्होंने आगे यह बताया कि, यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि, "अगर यह फॉस्फीन है, और यदि यह जीवन है, तो इसका मतलब है कि हम अकेले नहीं हैं." उन्होंने आगे यह भी कहा कि, इसका मतलब है कि, जीवन खुद में एक बहुत सामान्य-सी प्रक्रिया है और हमारी आकाशगंगा में कई अन्य ग्रह जीवन से आबाद होने चाहिए.

फॉस्फीन क्या है?

फॉस्फीन परिवेशी तापमान पर एक ज्वलनशील, रंगहीन और विस्फोटक गैस है जिसमें लहसुन या सड़ने वाली मछली की गंध होती है.

शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन की उपस्थिति

फॉस्फीन का पता शुक्र ग्रह के वायुमंडल के समशीतोष्ण क्षेत्र में 20 भाग - प्रति बिलियन में लगभग 50 किमी की ऊंचाई पर लगाया गया था, यह एक ऐसा संकेंद्रण है जो ज्ञात रासायनिक प्रक्रियाओं से संभव नहीं है, क्योंकि शुक्र ग्रह में उच्च तापमान और फॉस्फीन बनाने के लिए दबाव का अभाव है जिस तरह से अन्य गैस से युक्त विशाल ग्रह जैसेकि बृहस्पति करते हैं.

इस अध्ययन में यह कहा गया है कि, शुक्र ग्रह पर फॉस्फीन की उपस्थिति के लिए संभावित स्पष्टीकरण कुछ अज्ञात फोटोकैमिस्ट्री या जियोकेमिस्ट्री हो सकते हैं या फिर, पृथ्वी पर PH3 के जैविक उत्पादन के सादृश्य हो सकते हैं - यह जीवन की उपस्थिति से भी संभव हो सकता है.

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक जेन ग्रीव्स ने यह खुलासा किया है कि, शोधकर्ताओं ने अपने शोध में ज्वालामुखी, उल्कापिंड, बिजली और विभिन्न प्रकार की रासायनिक प्रतिक्रियाओं जैसे संभावित गैर-जैविक स्रोतों की भी जांच की, लेकिन इनमें से कोई भी दिखाई नहीं दिया.

अलौकिक जीवन के संभावित संकेत

अंतरिक्ष अध्ययन शुरू किए जाने के बाद से लोकोत्तर जीवन का अस्तित्व विज्ञान के सर्वोपरि प्रश्नों में से एक रहा है. वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल और उससे आगे के अन्य ग्रहों और चंद्रमाओं पर "बायोसिग्नेचर्स" या जीवन के अप्रत्यक्ष संकेतों की तलाश के लिए जांच और दूरबीन का उपयोग किया है.

हालांकि, शुक्र ग्रह हमारे सौर मंडल में जीवन की खोज का केंद्र बिंदु नहीं था. मंगल ग्रह और बाहरी दुनिया के अन्य ग्रह अलौकिक जीवन के संभावित संकेतों का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर केंद्र बिंदु रहे हैं.

शुक्र ग्रह निर्जन क्यों है?

सूर्य से दूसरे ग्रह और पृथ्वी के निकटतम पड़ोसी ग्रह, इस शुक्र ग्रह की संरचना ऐसी है जो पृथ्वी की तरह ही है लेकिन पृथ्वी से थोड़ी छोटी है. इस ग्रह को घने, विषैले वातावरण में लिपटे होने के लिए जाना जाता है जो गर्मी को रोकता है. शुक्र ग्रह की सतह का तापमान लगभग 471 इकहत्तर डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जोकि इतना अधिक गर्म होता है कि सीसा पिघल जाए. इसलिए, इस ग्रह को जीवन रहित या निर्जन माना जाता है.

अध्ययन के सह-लेखक क्लारा सूसा-सिल्वा के अनुसार, शुक्र ग्रह की सतह पर बहुत लंबे अरसे पहले जीवन हो सकता था

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. विश्व बैंक के ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स में भारत को मिला 116वां स्थान

विश्व बैंक के ताजा वार्षिक ह्यूमन कैपिटल इंडेक्स (मानव पूंजी सूचकांक) में भारत को 116वां स्थान मिला है. इस सूचकांक से विभिन्न देशों में मानव पूंजी से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी मिलती है. यह सूचकांक देशों में मानव पूंजी के प्रमुख घटकों का मूल्यांकन करता है. विश्व बैंक की तरफ से 16 सितम्बर 2020 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2018 के मुकाबले भारत के स्कोर में सुधार देखने को मिला है. साल 2018 में भारत का स्कोर 0.44 रहा था, जो हालिया रिपोर्ट में बढ़कर 0.49 हो गया है. पिछले साल भारत इस सूचकांक में 115वें स्थान पर था. मानव पूंजी सूचकांक 2020 में 174 देशों के स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी आंकड़ों को शामिल किया गया. ये आंकड़े मार्च 2020 तक के हैं, जिसके बाद दुनिया भर में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप तेजी से बढ़ा.

2. लोकसभा में सांसदों के वेतन में 30% की कटौती करने के बिल को मिली मंजूरी

लोकसभा ने 15 सितंबर, 2020 को एक विधेयक पारित किया है, जिसके माध्यम से 01 अप्रैल, 2020 से शुरू होने वाले एक वर्ष के लिए संसद के सदस्यों के लिए देय वेतन में 30% तक कटौती की गई है.

संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन (अमेंडमेंट) बिल, 2020 के द्वारा एक अध्यादेश को बदल दिया गया है, जो पहले कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए संसाधनों को इकट्ठा करने के उपायों के एक हिस्से के तौर पर लाया गया था. इस विधेयक को 14 सितंबर, 2020 को निचले सदन में पेश किया गया था. भारत सरकार ने इस महामारी के मद्देनजर वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के लिए संसद सदस्यों के स्थानीय क्षेत्र विकास योजना कोष के अस्थायी निलंबन के लिए भी अपना अनुमोदन दिया था.

3. लोकसभा में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक 2020 पारित हुआ

लोकसभा में 16 सितम्बर 2020 को बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया गया. लोकसभा में वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक सहकारी बैंकों को नियंत्रित नहीं करता है. सहकारी बैंकों का विनियमन 1965 से ही भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के पास है.

सहकारी बैंकों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून में संशोधन के जरिये सरकार का लक्ष्य इनके कामकाज में सुधार लाना है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इन बदलावों से जमाकर्ताओं का पैसा भी सुरक्षित रहेगा.

4. प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार में 7 परियोजनाओं की शुरुआत की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 सितम्बर 2020 को बिहार की जलापूर्ति व सीवर से जुड़ी 541 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बिहार में सात परियोजनाओं की आधारशिला रखी.

इनमें से चार जल आपूर्ति, दो सीवरेज ट्रीटमेंट और एक रिवरफ्रंट डेवलपमेंट से संबंधित हैं. ये परियोजनाएं केंद्र की नमामि गंगे और अमरुत योजना से जुड़ी हैं. इनमें पटना की बेउर और कर्मलीचक सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के अलावा सीवान, छपरा, मुंगेर, जमालपुर, मुजफ्फरपुर से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं.

5. केंद्र सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगाया बैन,

केंद्र सरकार ने 14 सितम्बर 2020 को प्याज की सभी किस्मों का निर्यात तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अधिसूचना जारी की है. अधिसूचना के अनुसार, प्याज की सभी किस्मों के निर्यात को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है.

इस फैसले का मुख्य उद्देश्‍य घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को काबू में रखना है. अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत आने वाले प्रबंधों के प्रावधान इसके दायरे में नहीं आएंगे. दरअसल दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश के चलते इस बार प्याज की फसल को खासा नुकसान हुआ है. इसके वजह से प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही हैं.

6. भारतीय मूल की पहली अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के नाम पर रखा गया स्पेसक्राफ्ट का नाम

अमेरिकी वैश्विक एयरोस्पेस और रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी, नॉर्थरोप ग्रुमैन ने यह घोषणा की है कि, इसके अगले साइग्नस कैप्सूल का नाम मिशन विशेषज्ञ कल्पना चावला की याद में, “एस.एस. कल्पना चावला” होगा. भारतीय मूल की कल्पना चावला की मृत्यु अंतरिक्ष यान कोलंबिया में सवार अपने छह साथियों के साथ वर्ष 2003 में हुई थी.

नॉर्थरोप ग्रुमैन के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना होने वाले एक अमेरिकी वाणिज्यिक कार्गो स्पेसक्राफ्ट का नाम कल्पना चावला के नाम पर रखने का निर्णय मानव अंतरिक्ष यान में उनके महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करने के लिए लिया गया है. वे अंतरिक्ष में प्रवेश करने वाली पहली भारत में जन्मी महिला थीं.

7. योगी सरकार का बड़ा फैसला, UPSSF के गठन की अधिसूचना जारी की

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ) के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है. इस फोर्स को किसी की गिरफ्तारी के लिए वारंट की आवश्यकता नहीं होगी. गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी के अनुसार, बल का कोई सदस्य किसी मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के बिना तथा किसी वारंट के बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है.

सुरक्षा बल को विशेष परिस्थितियों में बिना वारंट के तलाशी लेने और गिरफ्तारी करने का भी अधिकार दिया गया है. यूपी सरकार ने डीजीपी से इसके विधिवत गठन का रोडमैप तैयार करने को कहा है. अधिसूचना में बल के कार्यों, अधिकार क्षेत्र, और संगठनात्मक ढांचे का निर्धारण कर दिया गया है. सुरक्षा बल में एडीजी के अलावा आईजी, डीआईजी, समादेष्टा उप समादेष्टा व अन्य अधीनस्थ अधिकारियों की तैनाती होगी.

8. राजेश खुल्लर : विश्व बैंक (World Bank) का कार्यकारी निदेशक नियुक्त

हरियाणा के वरिष्ठ IAS अधिकारी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर को तीन वर्ष के लिये विश्व बैंक (World Bank) का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है। कार्यकारी निदेशक के तौर पर राजेश खुल्लर विश्व बैंक में भारत, बांग्लादेश, भूटान और श्रीलंका का प्रतिनिधित्त्व करेंगे। ध्यातव्य है कि विश्व बैंक समूह में कुल 25 कार्यकारी निदेशक शामिल होते हैं जो कि किसी एक देश अथवा देशों के एक समूह क्षेत्र का प्रतिनिधित्त्व करते हैं। नियमों के मुताबिक इन कार्यकारी निदेशकों को या तो नियुक्त किया जाता है अथवा इनके लिये चुनाव होता है। वर्ष 1988 बैच के IAS अधिकारी राजेश खुल्लर लगभग पाँच वर्ष तक हरियाणा के मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रह चुके हैं। राजेश खुल्लर ने वर्ष 1984 में भौतिक विज्ञान (Physics) में पंजाब विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री हासिल की थी। भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने

के बाद से राजेश खुल्लर केंद्र और राज्य स्तर (हरियाणा) पर कई महत्त्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं, जिसमें वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव का पद भी शामिल है। विश्व बैंक संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एक अहम संस्था है और यह कई संस्थाओं का समूह है। विश्व बैंक नीति सुधार कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिये ऋण देता है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष केवल नीति सुधार कार्यक्रमों के लिये ही ऋण देता है।

9. हरिवंश नारायण सिंह : राज्यसभा के उपसभापति

हाल ही में आयोजित चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को एक बार पुनः राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर चुन लिया गया है, इस पद पर यह उनका दूसरा कार्यकाल होगा। 30 जून, 1956 को जन्मे हरिवंश नारायण सिंह ने अगस्त 2018 में राज्यसभा के उपसभापति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल की शुरुआत की थी, जो कि अप्रैल 2020 में समाप्त हुआ था। नियमों के अनुसार, उपसभापति ऊपरी सदन का पीठासीन अधिकारी होता है और राज्यसभा द्वारा अपने सदस्यों में से किसी एक को उपसभापति के रूप में चुना जाता है। सभापति का पद खाली रहने अथवा सभापति की अनुपस्थिति में उपसभापति, सभापति के रूप में कार्य करता है और उसमें सभापति की सभी शक्तियाँ निहित हो जाती हैं।

10. मेकेदातु परियोजना:

मेकेदातु परियोजना एक प्रकार की ‘मेकेदातु संतुलन भंडार’ (Mekedatu Balancing Reservoir) है जिसे पीने के पानी के लिये भंडारण करने हेतु प्रस्तावित किया गया है। इस परियोजना का निर्माण कर्नाटक के रामनगरम ज़िले के कनकपुरा के पास किया जाएगा। मेकेदातु परियोजना एक गुरुत्त्व बांध है जो मेकेदातु में 67.16 टीएमसी जल संग्रहित करेगा। इसमें से 4.75 टीएमसी जल की आपूर्ति पेयजल के उद्देश्य से बंगलुरु को की जाएगी। यह परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण है क्योंकि इसे कावेरी नदी पर बनाया जा रहा है जो दोनों राज्यों के लिये पानी के सबसे महत्त्वपूर्ण स्रोतों में से एक है। इस परियोजना के निर्माण से कावेरी वन्यजीव अभयारण्य की 50 वर्ग किमी. की वन भूमि जलमग्न हो जाने की संभावना है।

11. स्टार्टअप परितंत्र के समर्थन पर राज्यों की रैकिंग

11 सितंबर, 2020 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने वर्चुअल समारोह के माध्यम से स्टार्टअप परितंत्र के लिये समर्थन पर राज्यों की रैकिंग के दूसरे संस्करण के परिणाम जारी किये। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade- DPIIT) ने राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने और स्टार्टअप परितंत्र के संदर्भ में सक्रियता से कार्य करने के लिये राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग के दूसरे संस्करण का संचालन किया। इस रैंकिंग के माध्यम से राज्यों की क्षमता का विकास होगा, राज्य आपसी सहयोग के द्वारा अपने अनुभव साझा करने के लिये प्रोत्साहित होंगे तथा इससे नीति निर्माण एवं कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।

इसमें गुजरात पहले स्थान पर रहा है। गुजरात के बाद बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में बिहार, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और चंडीगढ़ का स्थान रहा है। वहीं आंकांक्षी लीडर श्रेणी में हरियाणा, झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, उत्तराखंड और नगालैंड शामिल हैं। उभरती स्टार्टअप पारस्थितिकी वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम का स्थान रहा है।

12. अभियंता दिवस

देश भर में प्रत्येक वर्ष 15 सितंबर को अभियंता दिवस (Engineer's Day) के रूप में मनाया जाता है। भारत में यह दिवस देश के सुप्रसिद्ध इंजीनियर और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है और इस वर्ष उनकी 160वीं जयंती मनाई जा रही है। डॉ. एम. विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितंबर, 1861 को कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में एक तलुगु परिवार में हुआ था। डॉ. एम. विश्वेश्वरैया न केवल भारत के सबसे महान सिविल इंजीनियरों में से एक थे, बल्कि उन्होंने वर्ष 1912 से वर्ष 1919 तक मैसूर के 19वें दीवान के रूप में भी कार्य किया। लोकहित में उनके कार्यों को याद करते हुए प्रत्येक वर्ष न केवल भारत में बल्कि श्रीलंका और तंज़ानिया में भी 15 सितंबर को अभियंता दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी सबसे उल्लेखनीय परियोजनाओं में से एक कृष्णा राजा सागर झील और बांध है, जो कि कर्नाटक में स्थित हैं। वर्ष 1955 में उनकी अभूतपूर्व तथा जनहितकारी उपलब्धियों के लिये उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाज़ा गया। भारत सरकार ने वर्ष 1968 में उनकी जन्म तिथि को ‘अभियंता दिवस’ घोषित किया था।

13. डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएँ

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बैंकिंग सेवाओं को और अधिक सुविधाजनक तथा समस्या मुक्त बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएँ (Doorstep Banking Services) शुरू की हैं। इस पहल की शुरुआत से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ और दिव्यांग ग्राहकों को लाभ होने की उम्मीद है। बैंकिंग सुधार के एक हिस्से के रूप में डोरस्टेप बैंकिंग सेवाओं के अंतर्गत कॉल सेंटर, वेब पोर्टल या मोबाइल एप आदि के माध्यम से ग्राहकों को उनके दरवाज़े पर तमाम तरह की बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। ध्यातव्य है कि वर्तमान में केवल गैर-वित्तीय जैसे- चेक प्राप्त करना, डिमांड ड्राफ्ट और पे ऑर्डर प्राप्त करने जैसी सेवाएँ ही ग्राहकों को घर बैठे उपलब्ध हो पाती हैं, किंतु नए सुधारों के तहत अब बैंक की वित्तीय सेवाएँ भी अक्तूबर, 2020 से घर बैठे उपलब्ध हो जाएंगी। प्रारंभ में डोरस्टेप बैंकिंग सेवाएँ वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिये ही उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है, जो कि बैंक जाने असमर्थ है। देश भर में 100 केंद्रों पर चयनित सेवा प्रदाताओं द्वारा नियुक्त डोरस्टेप बैंकिंग एजेंटों द्वारा ये सेवाएँ प्रदान की जाएंगी।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।