(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (10th - 16th October 2019)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (10th - 16th October 2019)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • वैश्विक भूख सूचकांक में पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी पिछड़ा भारत। 117 देशों की सूची में भारत को मिला है 102 वां स्थान
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF के मुताबिक़ दुनिया में जारी ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन का है भारत पर सबसे ज़्यादा असर। इस साल दुनिया के क़रीब 90 फीसदी देशों की कम रहेगी वृद्धि दर
  • प्लास्टिक प्रदुषण के चलते दक्षिणी ग्रेट निकोबार द्वीप के पांच समुद्र तटों के वज़ूद पर ख़तरा। भारत के इस सबसे पुराने द्वीप पर पाई गई हैं प्लास्टिक की बोतलें
  • नागा शांति समझौते को लेकर नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड - IM ने लगाए केंद्र सरकार पर आरोप। कहा 2015 में हुए नागा शांति समझौते के अपने वादे से मुकर रही है केंद्र सरकार
  • भारतीय ऊर्जा फोरम के सेरावीक सम्मलेन का हुआ नई दिल्ली में आयोजन। अनुबंधात्मक प्रतिबद्धताओं का सम्मान करेगा भारत
  • World Sight Day के मौके पर WHO ने जारी की वर्ल्ड विज़न रिपोर्ट 2019। दुनिया में लगभग 1 बिलियन से अधिक लोग हैं दृष्टिहीनता से ग्रसित।
  • सबसे अधिक HIV संक्रमण से प्रभावित राज्य है मिज़ोरम। पूर्वोत्तर भारत के दो और राज्य मणिपुर और नगालैंड भी हैं HIV संक्रमण से ग्रसित
  • फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग अकाउंट्स को आधार से जोड़ने की अर्ज़ी को सुप्रीम कोर्ट ने किया ख़ारिज। सोशल नेटवर्किंग अकाउंट्स पर नियंत्रण के लिए दायर की गई थी ये याचिका
  • अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नासा ने भेजा आइकॉन उपग्रह। वायु और अंतरिक्ष के मिलन बिंदु वाले रहस्यमयी और गतिशील क्षेत्र आयनमंडल का पता लगाने का काम करेंगी ये सैटलाइट

खबरें विस्तार से:

1.

2019 का वैश्विक भूख सूचकांक जारी हो गया है। बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत समेत दुनिया के 17 देश वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2019 में शीर्ष पर बने हुए हैं। हालाँकि भारत की स्थिति एक बार फिर से इस सूचकांक में काफी निराशाजनक रही है। 117 देशों की इस सूची में भारत को 102वें स्थान पर रखा गया है। देखा जाए तो 2019 के हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में सिर्फ 1 अंक का मामूली सा सुधार आया है। इस सूचकांक में अगर भारत के पिछले 4 सालों के रिकॉर्ड को देखे तो इसमें लगातार गिरावट दर्ज़ हो रही है। साल 2014 में भारत जहां इस सूची में 55वें पायदान पर था। तो वहीं 2015 में - 80वें, 2016 में - 97 वें, 2017 में - 100वें और साल 2018 में भारत - 103 वें पायदान पर था ।

दरअसल ये रिपोर्ट में देशों में भूख की स्थिति के आधार पर तैयार की जाती है। GHI इंडेक्स में देशों में भूख की स्थिति 0 से 100 अंकों के ज़रिए दर्शाई जाती है। इस इंडेक्स में 0 अंक मिलने का मतलब है कि सम्बंधित देश में सर्वोत्तम यानी भूख की स्थिति बिलकुल नहीं है। इसके अलावा 10 से कम अंक पाने वाले का मतलब है कि देश में भूख की समस्या काफी कम है। जबकि इस इंडेक्स में 20 से 34.9 अंक पाने वाले देशों को भूख के गंभीर संकट वाले देशों की श्रेणी में रखा जाता है। साथ ही 35 से 49.9 अंक वाले देशों में भूख की हालत चुनौतीपूर्ण होती है और 50 या इससे ज्यादा अंक पाने वाले देशों को भूख के मामले में बेहद भयावह स्थिति वाले देशों की श्रेणी में रखा जाता है। भारत को इस इंडेक्स में 30.3 अंक मिला है। इस हिसाब से भारत में भूख का गंभीर संकट है।

ग़ौरतलब है कि चुनौतीपूर्ण स्थिति वाली श्रेणी में दुनिया के सिर्फ चार देश हैं जिनमें चाड, मेडागास्कर, यमन और जाम्बिया जैसे देश शमिल हैं। इसके अलावा सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक को इस सूची में 53.6 अंक मिला है जिसके कारण वो भूख के मामले में बेहद ही भयावह स्थिति वाली कैटिगरी में शुमार है। इस रिपोर्ट में गौर करने वाली बात ये भी है कि दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत को इस सूचकांक में दक्षिण एशियाई देशों में भी सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। वैश्विक भूख सूचकांक में पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देश भी भारत से आगे हैं। इसके अलावा भारत ब्रिक्स देशों ब्राजील, रूस, चीन और साउथ अफ्रीका जैसे देशों से भी बहुत पीछे है।

भारत के रैंकिंग में ख़राब प्रदर्शन के लिए लंबाई के अनुपात में कम वजन यानी Child Wasting को मुख्य वजह बताया गया है। इस मामले में भारत की स्थिति यमन और जिबूती जैसे देशों से भी खराब है। इसके अलावा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक़ भी पांच साल से कम के क़रीब 38% बच्चे Stunted यानी उम्र के अनुपात में कम लंबाई और 21% बच्चे का Child Wasting यानी लंबाई के अनुपात में कम वजन के शिकार हैं। साथ ही WHO द्वारा जारी की जाने वाली ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 के मुताबिक भी भारत में कुल चार करोड़ 66 लाख बच्चे ऐसे है जिनका कुपोषण के चलते लंबाई और वजन नहीं बढ़ा है।

देखा जाए तो भारत में लोगों का एक बड़ा तबका खाद्य व पोषण की दृष्टि से असुरक्षित है। ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिहीन, पारंपरिक दस्तकार, पारंपरिक सेवाएँ करने वाले लोग और निराश्रित व भिखारी पोषण की दृष्टि से असुरक्षित हैं। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में भी परिवार में कामकाजी सदस्यों की कमी और कम वेतन पाने वाले रोज़गार में व्यवसाय करने वाले लोग भी खाद्य असुरक्षा का शिकार हैं।

संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत स्वास्थ्य राज्यों का विषय है। ऐसे में पोषण, जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का काम राज्य के ऊपर हैं। हालाँकि आज़ादी के बाद से ही नीति निर्मातों ने खाद्यानों पर निर्भरता के लिए कई क़दम उठाए हैं। इनमें सार्वजानिक वितरण प्रणाली PDS, समन्वित बाल विकास कार्यक्रम ICDS, मिड डे मील और अंत्योदय अन्न योजनाओं जैसे कई और भी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स के बारे में बताएं तो ये दुनिया के देशों में भुखमरी और कुपोषण की गणना और इसके तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक बहुआयामी साधन है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स को आयरलैंड की एड एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन संस्था वेल्ट हंगर हिल्फे तैयार करते हैं। ग्लोबल हंगर इंडेक्स को मुख्य रूप से चार मापनों के ज़रिए मापा जाता है। इनमें अल्पपोषण, लंबाई के अनुपात में कम वजन, आयु के अनुपात में कम लंबाई और बाल मृत्यु दर जैसे मानदंड शामिल हैं। एक तरीके से इस इंडेक्स के ज़रिए ये दिखाया जाता है कि दुनिया भर में भूख के ख़िलाफ़ चल रही देशों की लड़ाई में कौन-सा देश कितना सफल और कितना असफल रहा है। ग़ौरतलब है कि इस इंडेक्स में उन देशों को शामिल नहीं किया जाता है जो विकास के एक ऐसे स्तर तक पहुँच चुके हैं, जहाँ भुखमरी नाम मात्र की है।

2.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलिना जॉर्जीवा का कहना है कि इन दिनों दुनिया के क़रीब 90 फीसदी देश ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन से गुज़र रहे हैं। IMF का मानना है कि मौजूदा ग्लोबल इकोनॉमिक स्लोडाउन का असर भारत और ब्राज़ील जैसी तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर सबसे ज़्यादा दिख रहा है। इसके अलावा चीन की आर्थिक वृद्धि दर भी धीरे-धीरे कम हो रही है।

IMF ने इस हालात के लिए मौजूदा भू - राजनीतिक तनाव, ब्रेक्सिट और अमेरिका व चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर को ज़िम्मेदार बताया है। IMF के मुताबिक़ अकेले व्यापार युद्ध के चलते अगले साल तक क़रीब 700 अरब डॉलर का नुकसान होगा जोकि दुनिया की कुल जीडीपी की 0.8 फीसदी होगी। भारत के लिहाज़ से देखें तो वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर पांच फीसद थी, जो कि पिछले साढ़े छह सालों का सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान को 6.9% से घटाकर अब 6.1 फीसद कर दिया है। गौर करने वाली बात ये है कि इस स्थति से निपटने के लिए IMF ने बुद्धिमता के साथ मौद्रिक नीतियों का इस्तेमाल करने और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाने का सुझाव दिया है।

आपको बता दें कि इकोनॉमिक स्लोडाउन को आर्थिक अवमंदन के रूप में जाना जाता है। दरअसल जब किसी देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जाती है तो इसे ही आर्थिक अवमंदन यानी इकोनॉमिक स्लोडाउन कहते हैं। इसके अलावा आर्थिक मंदी यानी इकोनामिक रिसेशन वो अवस्था होती है जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि के बजाय घटोत्तरी या कमी होने लगती है। ग़ौरतलब है कि आर्थिक मंदी को मापने के लिए 5 कारकों का इस्तेमाल होता है, जिनमें वास्तविक जीडीपी, आय, रोज़गार, विनिर्माण और खुदरा बिक्री शामिल है।

इसके अलवा स्लोडाउन के कारणों में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू कारण शुमार होते हैं। इन तमाम अंतर्राष्ट्रीय वजहों के अलावा कच्चे तेल के बढ़ते दाम, रुपये की घटती कीमत और आयात के मुकाबले निर्यात में गिरावट भी शामिल होती है। इसके अलावा स्लोडाउन के घरेलू कारणों में महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों में गिरावट, मांग और आपूर्ति के बीच लगातार कम होता अंतर और निवेश में कमी जैसे कारक शामिल भी होते हैं।

3.

हाल ही में जारी एक सर्वे के मुताबिक़ प्लास्टिक की समस्या के चलते भारत के सबसे पुराने दक्षिणी ग्रेट निकोबार द्वीप के पांच समुद्र तटों का वज़ूद ख़तरे में आ गया है। इन तटों पर प्लास्टिक की बोतलें पाई गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन तटों पर भारतीय मूल का केवल 2.2% कचरा था, जबकि बाकी कचरा अन्य देशों के हैं। ग़ौरतलब है कि इस अंडमान के ग्रेट निकोबार द्वीप का क्षेत्रफल क़रीब 1044 वर्ग किमी है और यहां लगभग 8,069 से अधिक लोग रहते हैं। इस द्वीप में ग्रेट निकोबार बायोस्फीयर रिज़र्व भी मौजूद है जिसे यूनेस्को ने बायोस्फीयर रिज़र्व्स के विश्व नेटवर्क के रूप में घोषित किया गया है। इन बायोस्फीयर रिज़र्व्स में गैलाथिया नेशनल पार्क और कैम्पबेल बे नेशनल पार्क शामिल हैं। इसके अलावा इस द्वीप भारत की सबसे आदिम जनजाति शोम्पेंस भी रहती हैं।

दरअसल ये प्लास्टिक कचरे हजारों साल तक वातावरण में बने रहते है यानी नष्ट नहीं होते हैं। साथ ही कुल उत्पादित प्लास्टिक का मात्र 10-13% ही रीसायकल हो पाता है। फेंके गए प्लास्टिक ज़मीन के अन्दर या नदी के जरिए समुद्र में बह जाते हैं जहाँ ये छोटे-छोटे कणों में टूटकर खतरनाक रसायनों में तब्दील हो जाते हैं। जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को भारी नुक्सान होता है। इसके अलावा प्लास्टिक में अस्थिर प्रकृति का जैविक कार्बनिक एस्टर होता है जिसके कारण कैंसर होने की संभावनाएं रहती हैं।

प्लास्टिक की समस्या को देखते हुए बीते 2 अक्टूबर से देश में सिंगल यूज प्लास्टिक को पूरी तरह से बैन कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य 2022 तक प्लास्टिक के प्रयोग को पूरे तरीके से प्रतिबंधित करने का है। ये अभियान देश भर में राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान के तहत तीन चरणों में चलाया जायेगा। इसमें विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के कचरे को जगह-जगह से इकठ्ठा कर इसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाएगा।

4.

हाल ही में, नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड - IM ने केंद्र सरकार पर ये आरोप लगाया है कि सरकार साल 2015 में हुए नागा शांति समझौते के अपने वादे से मुकर रही है। NSCN - IM का कहना है कि इस समझौते में एक साझा नागा संप्रभुता और संविधान के साथ-साथ नागाओं के लिए एक अलग ध्वज की बात कही गई है, जिस पर केंद्र सरकार हिला-हवाली कर रही है। हालांकि NSCN – IM 2015 के जिस नागा शांति समझौते की बात कर रही है उसके प्रारूप को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

आपको बता दें कि नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय एक उग्र और अलगाववादी संगठन है। ग़ौरतलब है कि आजादी के पहले नागा समुदाय पूरी तरीके से ब्रिटिश नियंत्रण में नहीं था। नागा इलाके के कुछ मामलों को अंग्रेजी सरकार देखा करती थी, जबकि ज्यादातर आंतरिक मामले नागा समुदाय के अधीन थे। इसके तहत ब्रिटिश सरकार ने इस इलाके को ‘नगा हिल्स एक्सक्लूडेड एरिया’ नाम दिया था।

आजादी के वक्त नागा नेता अंगामी फिजो के नेतृत्व में इस समुदाय ने भारत सरकार से एक 9 सूत्रीय समझौता किया। जिसके तहत इस बात पर सहमती बनी थी कि अगले 10 साल तक नागा भारत में शामिल होंगे। उसके बाद वे अपने राजनीति भविष्य का फैसला खुद करेंगे और तय करेंगे कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं या नहीं। हालाँकि ये समझौता फिजो को अपने साथियों के दबाव में लेना पड़ा था। इसलिए आगे चलकर फिजो ने नागा नेशनलिस्ट काउंसिल यानी NNC नाम से अपना एक अलग संगठन बना लिया और एक अलगाववादी मुहिम शुरू की । अलगाववाद के अपने इस मकसद को पाने के लिए फिजो ने सशस्त्र विद्रोह का रास्ता अपनाया।

अंग्रेज़ों से आज़ादी मिलने के बाद फ़िज़ो के इस क़दम ने भारत के सामने देश की अखंडता को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसलिए साल 1975 में भारत सरकार और नागा नेशनलिस्ट काउंसिल के बीच ‘शिलांग समझौता’ पर दस्तख़त किया गया। लेकिन तमाम भिन्नताओं के चलते यह समझौता भी पूर्वोत्तर में चल रहे संघर्ष पर रोक लगाने में नाकाम रहा और पूर्वोत्तर में संघर्ष जारी रहा।

दरअसल नागा समुदायों का विस्तार म्यांमार समेत असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मणिपुर जैसे राज्यों तक फैला हुआ है। इसलिए साल 1980 में पूर्वोत्तर के 3 बड़े नेताओं चिसी सू, टी. मुइवा और एस. एस. खापलांग के नेतृत्व में एक नए संगठन नेशनलिस्ट सोशलिस्ट काउंसिल आफ नागालैंड का गठन किया गया। इस संगठन का मकसद इन सभी इलाकों को मिलाकर ‘नागालिम’ नाम से एक अलग देश बनाना था। हालांकि आगे चलकर भारत के साथ रिश्ते की प्रकृति को लेकर इन नेताओं में आपसी मतभेद हो गया जिसके कारण NSCN दो गुटों में बट गया। इसके बाद खापलांग के नेतृत्व वाले गुट को NSCN -K कहा गया जबकि मुइवा गुट को NSCN-IM कहा जाता है। दरअसल ये अलगाव इस लिए हुआ था क्यूंकि खापलांग गुट पूरी तरह से भारत से अलग होने के पक्ष में है, जबकि मुइवा गुट भारत के साथ रहकर ज्यादा स्वायत्तता की मांग कर रहा है।

हालाँकि इन सब के बावजूद भी पूर्वोत्तर में शांति बहाल करने के मक़सद से भारत सरकार ने 2001 में NSCN के साथ संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर भी किया था। लेकिन साल 2011 में NSCN -K द्वारा इस समझौते का उल्लंघन करने के कारण इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इसके बाद शांति बहाल करने के अगले प्रयास में साल 2015 में सरकार ने NSCN-IM के साथ ‘नागा शांति समझौते’ पर हस्ताक्षर किया था और इसी समझौते को लेकर NSCN-IM केंद्र सरकार पर अब आरोप लगा रही है।

5.

बीते दिनों कैम्ब्रिज एनर्जी रिसर्च एसोसिएट्स वीक के तीसरे भारतीय ऊर्जा फोरम में मंत्रिस्तरीय वार्ता हुई। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के संरक्षण में आयोजित इस वार्ता में कई राष्ट्रीय के साथ-साथ क्षेत्रीय ऊर्जा कंपनियों ने शिरकत की। वार्ता के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि सरकार ने गतिशील वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में भारत के ऊर्जा क्षेत्र को अत्यधिक महत्व दिया है। भारत आने वाले दशकों में ऊर्जा की भारी मांग और विकास की ज़रूरतों को देखते हुए विश्व में वैश्विक ऊर्जा मांग का सबसे महत्वपूर्ण कारक साबित होगा।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक़ विद्युत क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा के हिस्से में पर्याप्त वृद्धि हुई है जो इस समय 22 प्रतिशत है, जबकि 2014-15 में ये करीब 10 प्रतिशत थी। इसके अलावा इथनॉल को मिलाने का प्रतिशत भी बढ़कर अब 6 प्रतिशत हो गया है जोकि 2012-13 में 0.67 फीसदी था। साथ ही मौजूदा वक़्त में लगभग 95 % से ज्यादा परिवारों तक एलपीजी की पहुंच भी हो गई है।

दरअसल भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में तीन महत्त्वपूर्ण बदलाव किये गए हैं। इनमें गतिशीलता, शहरीकरण और विद्युत उत्पादन शामिल है। रेल मंत्रालय के मुताबिक़ भारत की रेलवे भी 2023 तक 100 प्रतिशत विद्युतीकृत होने की राह पर है। इसके अलावा कोयला मंत्रालय का भी कहना है कि भारत में कोयले की प्रति व्यक्ति खपत अमेरिका की तुलना में करीब 1/10वां हिस्सा है। साथ ही भारत इन सभी क़दमों के अलावा गैस अर्थव्यवस्था में बदलने की योजना बना रहा है। कैम्ब्रिज एनर्जी रिसर्च एसोसिएट्स वीक के बारे में आपको बताए तो इसकी स्थापना 1983 में कैम्ब्रिज में की गई थी। मौजूदा वक़्त में कैम्ब्रिज एनर्जी रिसर्च एसोसिएट्स वीक दुनिया का प्रमुख ऊर्जा कार्यक्रम बन गया है।

6.

बीते दिनों विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO ने पहली विश्व दृष्टि रिपोर्ट 2019 जारी की है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में क़रीब 1 बिलियन से अधिक लोग ऐसे हैं जो दृष्टिहीनता ग्रसित हैं। इसके अलावा क़रीब 1.8 1 बिलियन लोग प्रेस्बोपिया से ग्रसित हैं यानी जिन्हें आस-पास की चीज़ों को देखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।

इन सब के अलावा वर्ल्ड विज़न रिपोर्ट 2019 में कई और भी महत्वपूर्ण आकंड़े दिए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में क़रीब 2.6 बिलियन लोग ऐसे हैं जो मायोपिया यानी जिन्हें दूर दृष्टि दोष हैं। गौर करने वाले बात ये है कि दूर दृष्टि दोष से ग्रसित लोगों में करीब 312 मिलियन लोग 19 साल से भी कम उम्र के हैं। इसके अलावा रिपोर्ट में दृष्टि दोष से जुड़े हुए कई और भी आँकड़ों का ज़िक्र है। इनमें 65.2 मिलियन लोग मोतियाबिंद, 6.9 मिलियन लोग ग्लूकोमा और 4.2 मिलियन लोग कॉर्नियल ओपेसिटी से ग्रसित हैं।

साथ ही डायबिटिक रेटिनोपैथी और ट्रेकोमा से ग्रसित लोगों की संख्या भी क्रमश: 3 और 2 मिलियन है।

ग़ौरतलब है कि वर्ल्ड विज़न रिपोर्ट 2019 के मुताबिक़ पश्चिमी और पूर्वी उप-सहारा अफ्रीका के अलावा दक्षिण एशिया के निम्न और मध्यम-आय वाले क्षेत्रों में दृष्टिहीनता की दर उच्च-आय वाले देशों के मुक़ाबले आठ गुना ज़्यादा है। इसके अलावा रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं में मोतियाबिंद और ट्रेकोमैटस ट्राइकियासिस जैसे मामले सबसे अधिक पाए गए हैं। इन सब के अलावा रिपोर्ट में इस बात का ज़िक्र है कि दृष्टिहीनता ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले निम्न आय वाले लोगों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों में सबसे अधिक देखे जाते हैं।

WHO द्वारा जारी इस रिपोर्ट में भारत के प्रयासों का भी सराहना की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत सरकार द्वारा चलाई गई NPCB कार्यक्रम के तहत साल 2016-2017 में, मोतियाबिंद से जूझ रहे कुल 6.5 मिलियन लोगों की सर्जरी की गई। आपको बता दें कि नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ़ ब्लाइंडनेस NPCB दृष्‍टिहीनता नियंत्रण के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है जिसकी शुरुआत 1976 में की गई थी। NPCB कार्यक्रम का मक़सद 2020 तक देश में दृष्‍टिहीनों की संख्‍या को 0.3 प्रतिशत तक करने का लक्ष्‍य है।

इसके अलावा विश्व दृष्टि रिपोर्ट 2019 बीते विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर जारी की गई है। विश्व दृष्टि दिवस हरसाल अक्टूबर महीने के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। विश्व दृष्टि दिवस का मक़सद बचने योग्य अंधेपन और दृष्टि नुकसान के वैश्विक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जागरूकता प्रसारित करना है।

7.

मौजूदा वक़्त में मिज़ोरम देश का सर्वाधिक HIV संक्रमण से प्रभावित राज्य है। बीते दिनों मिज़ोरम में HIV/AIDS के कुछ नए मामले सामने आए हैं। मिज़ोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी MCACS के आँकड़ों के मुताबिक़ मिज़ोरम में HIV संक्रमण दर 2.04% है। मिज़ोरम में HIV संक्रमण दर 2017 - 2019 के दौरान काफी तेज़ी से बढ़ी है। एक ओर जहां साल 2017-18 के दौरान मिजोरम में HIV संक्रमण में कुल 7.2% की दर से वृद्धि हुई तो वहीं साल 2018-19 में ये दर 9.2% तक पहुँच गई । मिजोरम के अलावा पूर्वोतर भारत के 2 और राज्य मणिपुर और नगालैंड भी HIV प्रभावित राज्यों की सूची में क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर है। मणिपुर में जहां HIV संक्रमण दर 1.43%है तो वहीं नगालैंड में भी HIV संक्रमण दर 1.15% बनी हुई है। ग़ौरतलब है कि HIV संक्रमण से प्रभावित लोगों में 25-34 साल के व्यक्ति सबसे अधिक पाए गए हैं। इसके अलावा 35-49 साल और 15-24 आयु वर्ग के लोग भी HIV संक्रमण से प्रभावित लोगों की सूची में क्रमशः दूसरे और तीसरे पायदान पर हैं। मिज़ोरम राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी MCACS के मुताबिक़ साल 2006 से मार्च 2019 के बीच क़रीब 67.21% व्यक्ति यौन संबंधों के कारण HIV संक्रमण से ग्रसित हुए हैं। इसके अलावा ड्रग्स लेने के लिए इस्तेमाल की गई संक्रमित सुइयों की वजह से भी क़रीब 28.12% व्यक्ति HIV संक्रमण से प्रभावित हुए हैं।

मिज़ोरम सरकार ने HIV संक्रमण से बचाव और उपचार के लिये इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए हैं। मिज़ोरम सरकार ने राज्य में इस तरह के 44 केंद्र स्थापित किए गए हैं जहां मरीजों की निशुल्क जांच की जाती है। इसके अलावा मिजोरम स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के मुताबिक़ इन केंद्रों पर प्रतिदिन HIV संक्रमण के नौ नए मरीज जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं जोकि चिंता का विषय है। ग़ौरतलब है कि मिजोरम में HIV पॉजिटिव का पहला मामला 1990 में सामने आया था। अब तक राज्य में एड्स के कुल 19,631 मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा इस संक्रमण के चलते राज्य में अब तक कुल क़रीब दो हजार से अधिक एड्स मरीजों की मौत तक हो चुकी है।

मिज़ोरम के बारे में आपको बताएं तो ये भारत के सात उत्तर-पूर्वी राज्यों में से एक है। इसकी सीमाएं पूर्व और दक्षिण में म्यांमार और पश्चिम में बांग्लादेश से मिलती हैं। इसके अलावा मिज़ोरम का उत्तरी हिस्सा भी पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों से घिरा हुआ है, जिसमें मणिपुर, असम और त्रिपुरा राज्य शामिल हैं। मिजोरम में सबसे ज़्यादा ईसाई समुदाय के लोग रहते हैं, जिनकी मौजूदगी करीब 87 % है। ईसाई बहुल राज्य मिज़ोरम राज्य के म्याँमार और बांग्लादेश की सीमा से लगे होने के कारण ये राज्य लम्बे समय से ड्रग्स और मानव तस्करी की समस्या से भी जूझ रहा है।

8.

बीते दिनों क्रेडिट सुइस रिसर्च इंस्टीट्यूट ने CS जेंडर 3000 रिपोर्ट जारी की है। ये रिपोर्ट लैंगिक असमानता और कंपनी के बेहतर प्रदर्शन के बीच संबंध को बदलते महौल की दिशा में प्रदर्शित करती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़ मौजूदा वक़्त में ख़ास तौर पर उच्च पदों पर पुरुष वर्चस्व कायम है, जिसे कम या दूर करने के लिये निजी क्षेत्र द्वारा काफी काम किये जाने की ज़रूरत है। इस रपोर्ट में बताया गया है कि परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों में महिलाओं की भागीदारी 10% से भी कम है। इसके अलावा पारिवारिक ज़िम्मेदारियों के चलते भी महिलायें नौकरी नहीं कर पाती हैं जोकि उनके ऊपर सामाजिक रूप से दबाव पैदा करने का काम करती हैं । साथ ही सभी क्षेत्रों में महिलाओं के मुक़ाबले में पुरुषों का वेतन भी ज़्यादा है ग़ौरतलब है कि इस रिपोर्ट के लिये दुनिया के कुल 56 देशों की क़रीब 3000 कंपनियों का सर्वे किया गया है। सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक़ वैश्विक स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसमें नॉर्वे, फ्राँस, स्वीडन और इटली जैसे देश शीर्ष स्थान पर हैं हालाँकि भारत की इस मामले में स्थिति सराहनीय नहीं है।

पिछले साल आई वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट 2018 में भी भारत 108वें स्थान पर था। इसके अलावा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम द्वारा जारी की जाने वाली वैश्विक लैंगिक अंतराल रिपोर्ट में भारत अपने कई पड़ोसी मुल्क़ों से भी पीछे है। एक ओर जहां बांग्लादेश इस सूची में 48वें और श्रीलंका 100वें पायदान पर है तो वहीं चीन और नेपाल भी इस मामले में भारत से बेहतर हैं। दरअसल लैंगिक असमानता का मतलब लैंगिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव करने से है। लगातार कम होते लिंगानुपात के कारण जनसंख्या में असंतुलन पैदा हो होता है जिससे कारण महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध बढ़ने जैसी कई सामाजिक समस्याएँ पैदा होती हैं। एक अरसे से महिलाओं को समाज में कमज़ोर वर्ग के रूप में देखा जाता रहा है। दुनिया भर में मौजूद लैंगिक असामना के पीछे महिलाओँ की कम आर्थिक भागीदारी, कम साक्षरता दर और ख़राब स्वास्थ्य के अलावा कम जीवन प्रत्याशा जैसे मामले शामिल हैं। इसके अलावा भारत में भी मौजूद लैंगिक असामनता के पीछे आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक कारणों जैसे महत्वपूर्ण कारक ज़िम्मेदार हैं। समाजशास्त्रियों के मुताबिक़ भारत में पितृसत्तात्मक सोंच भी लैंगिक असमानता के लिए बाधा है। इसके अलावा ग़रीबी, कुपोषण, बाल विवाह, दहेज और घरेलू हिंसा जैसी गतिविधियां भी भारत में लैंगिक असमानता के लिए ज़िम्मेदार हैं।

क्रेडिट सुइस रिसर्च इंस्टीट्यूट क्ले बारे में आपको बताएं तो ये एक इन-हाउस थिंक टैंक है। इस संस्था की शुरुआत साल 2008 के वित्तीय संकट को देखते हुए की गई थी। इस संस्था का मक़सद लंबे समय के वित्तीय विकास और इसके प्रभावों का आर्थिक क्षेत्र और उसके बाहर अध्ययन करना है।

9.

बीते 14 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किंग अकाउंट्स को आधार से जोड़ने की मांग को ख़ारिज कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले पर मद्रास हाई कोर्ट पहले ही सुनवाई कर रहा है ऐसे में दख़ल की कोई जरूरत नहीं है। एक आंकड़े के मुताबिक नफरत फैलाने वाले संदेशों के मामलों में हर साल 19 से 30 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है. इसमें एक बड़ा हिस्सा ‘फेक न्यूज़’ का भी है.

सोशल नेटवर्किंग अकाउंट्स पर ठीक से नियंत्रण न होने के कारण असामाजिक तत्व गलत मकसद से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. जिसके कारण सामाजिक सौहार्द को खतरा पैदा हो रहा है. इसके अलावा आतंकवादी और कट्टरपंथी विचारधारा के प्रसार के लिए भी सोशल मीडिया का दुरुपयोग किया जा रहा है. माइक्रोसॉफ्ट के एक सर्वे में भी दावा किया था कि फेक न्यूज के मामले में भारत दुनिया भर में सबसे ऊपर है.

दरअसल यहां दिक्कत ये है कि सोशल मीडिया कंपनियां अक्सर गोपनीयता का हवाला देते हुए जांच में सहयोग नहीं करती हैं. इसके अलावा सूचनाओं का इनस्क्रिप्शन और सर्वर का अन्य देशों में स्थित होने जैसे भी कई दूसरे ऐसे कारण हैं जिसके चलते इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल हो रहा है. वहीं इससे अलग कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी से प्राप्त डाटा के मुद्रीकरण से ‘सर्वेलान्स कैपिटलिज़म’ को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही ‘सर्वेलान्स डेमोक्रेसी’ के रूप में एक नए प्रकार का लोकतंत्र पैदा हो सकता है. इसके अलावा निगरानी के चलते लोगों के निजता के अधिकार के हनन होने की भी संभावनाएं हैं

10.

बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक हालिया फैसले में कहा है कि किसी बच्चे को अपने माता और पिता दोनों का ही स्नेह पाने का अधिकार है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश एक व्यक्ति द्वारा अपने बच्चे की कस्टडी के लिये दायर याचिका की गई याचिका के बाद आया जिसका बच्चा उसकी पत्नी के साथ है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के मुताबिक़ यदि माता-पिता अलग हो चुके हैं तो बच्चे की कस्टडी में बच्चे के हितों को ख़्याल सबसे आगे रखा जाना चाहिये। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात का भी ज़िक्र किया है कि पारिवारिक अदालतों को माता-पिता को मिलने का अधिकार इस तरह से देना चाहिये कि कोई भी बच्चा अपने माता-पिता के प्यार और देखभाल से दूर न रहे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में माता - पिता द्वारा बच्चे को प्यार करना और बच्चे को प्यार पाने का अधिकार देने को ही मौलिक अधिकार क़रार दिया गया है।

आपको बता दें कि माता - पिता के अलग होने के बाद किसी बच्चे की कस्टडी सौंपी जाती है। हालाँकि इसमें बच्चे का व्यक्तिगत विकास और उसके गुणवत्तापूर्ण जीवन के अधिकार पर ख़तरे की सम्भवना होती है। इसके अलावा पारिवारिक कानूनों में ऐसे कई प्रावधान हैं जो माता-पिता के कस्टडी अधिकारों पर उनके लिंग के आधार पर भेदभाव करते हैं। इस तरह ये पति या पत्नी दोनों में से किसी एक के अधिकारों का हनन होता है। साथ ही ऐसे हालात बच्चे के मौलिक अधिकारों के भी ख़िलाफ़ हैं, क्यूंकि ऐसे हालात में बच्चा वो अपने माता और पिता दोनों की देखभाल और पालन-पोषण से वंचित रह जाता है। अगर देखा जाए तो मौजूदा पारिवारिक कानूनों में बाल-केंद्रित दृष्टिकोण की कमी है जिससे साझा पालन-पोषण का विचार प्रभावित होता है। इस सन्दर्भ में बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पारिवारिक कानूनों के कुछ प्रावधानों की जाँच करने की बात कही थी जिसमें विशेष रूप से वैवाहिक अलगाव के बाद माता और पिता में से बच्चे की कस्टडी किसे दी जाए सम्बंधित मामले से जुड़ा था

11.

हाल ही में, अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ‘नासा’ ने आयनमंडल का पता लगाने के लिये ‘आइकॉन’ नामक एक उपग्रह को अंतरिक्ष में भेजा है. यह उपग्रह वायु और अंतरिक्ष के मिलन बिंदु वाले रहस्यमयी और गतिशील क्षेत्र का पता लगाने का काम करेगा। यह ‘आइकॉन’ उपग्रह के जरिए नासा आयनमंडल में उपस्थित गैसों से बनने वाले हवा के प्रकाशीय पुंजों का अध्ययन करेगा. साथ ही पृथ्वी की सतह से करीब 580 किमी की ऊँचाई पर स्थित अंतरिक्ष-यान के चारों ओर आवेशित वातावरण को मापने की कोशिश करेगा।

दरअसल पृथ्वी से ऊपर के वातावरण को कई स्तरों में बांटा गया है और आयनमंडल उन्हीं में से एक स्तर है जो मध्यमंडल के ऊपर 80 से 400 किलोमीटर के बीच स्थित होता है। यहां पर ‘आयन’ नामक विद्युत आवेशित कण पाए जाने के कारण इसे आयनमंडल के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर ऊँचाई बढ़ने के साथ ही तापमान में बढ़ोत्तरी होने लगती है। ग़ौरतलब है कि पृथ्वी द्वारा भेजी गई रेडियो तरंगें इस इसी क्षेत्र से टकराकर पृथ्वी पर वापस लौट आती हैं, जिससे प्रसारण, रेडियो संचार और जीपीएस आदि का काम संभव हो पाता है।

12.

बीते 14 अक्टूबर को नई दिल्ली में भारतीय मोबाइल कांग्रेस 2019 का तीन दिवसीय आयोजन किया गया. इस दौरान अमेरिकी कंपनी क्वालकॉम के स्नैपड्रैगन प्लेटफॉर्म पर ‘नाविक’ का पहला प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर इसरो ने बताया कि क्वालकॉम ने इसरो के साथ मिलकर अपना नया चिपसेट प्लेटफॉर्म विकसित किया है और उसका परीक्षण भी पूरा कर लिया गया, यानी यह चिपसेट प्लेटफॉर्म ‘नाविक’ को सपोर्ट करता है। इस तरह से उम्मीद ज़ाहिर की जा रहे है कि नवंबर महीने से भारतीय ‘नाविक’ प्रणाली का इस्तेमाल शुरू हो सकता है।

आपको बता दें कि भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली यानी नाविक इसरो द्वारा विकसित, एक क्षेत्रीय स्वायत्त उपग्रह नौवहन प्रणाली है जो पूरी तरह से भारत सरकार के अधीन है। इसका मकसद देश तथा देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के हिस्से में इसके उपयोगकर्ता को सटीक स्थिति की सूचना देना है। इस प्रणाली में 7 उपग्रह शामिल हैं जिन्हें PSLV-XL प्रक्षेपण यान द्वारा लांच किया गया था।

13.

हाल ही में भारतीय नन मरियम थ्रेसिया को पोप फ्रांसिस द्वारा संत घोषित किया गया. वेटिकन में आयोजित एक भव्य समारोह में पोप ने थ्रेसिया समेत चार अन्य को संत का दर्ज़ा प्रदान किया। केरल की मरियम थ्रेसिया के साथ ही ब्रिटिश कार्डिनल जॉन हेनरी न्यूमैन, स्विस लेवीमेन मार्गरेट बेज, ब्राजील की सिस्टर डुल्स लोप्स और इटली की सिस्टर गिसेपिना वानीनि को भी संत की उपाधि दी गई। केरल में सामाजिक उत्थान के कामों के लिए विख्यात रहीं सिस्टर मरियम को मदर टेरेसा के दर्जे का माना जाता है। सिस्टर मरियम को उनके देहांत के करीब 93 सालों बाद इस सम्मान से सम्मानित किया गया है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. चेन्नई के मामल्लापुरम में संपन्न हुई भारत और चीन के बीच दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता। द्विपक्षीय और व्यापारिक रिश्तों समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर हुई दोनों देशों के बीच चर्चा।

11 - 12 अक्टूबर के दौरान हुई इस वार्ता के दौरान व्यापार असंतुलन को कम करना, आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए साथ काम करना और रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकनोमिक पार्टनरशिप - RCEP को लेकर भारत की चिंताओं के समाधान की बात कही गई। इसके अलावा व्यापार, निवेश और सेवाओं से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक उच्च-स्तरीय आर्थिक एवं व्यापार संवाद तंत्र तैयार करना और सीमा शांति बरक़रार रखने के लिए उपायों के ऐलान किया गया है। इस मौके पर शी जिनपिंग ने तीसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए अगले साल भारत को चीन आने का न्यौता दिया है ।

2. मां और नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा के लिए शुरू हुई की गई नि:शुल्‍क सुरक्षित मातृत्‍व आश्‍वासन योजना-सुमन। इस योजना का मक़सद बिना किसी खर्च के सभी माताओं और नवजात शिशुओं को उच्‍च गुणवत्‍ता वाली स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं मुहैया कराना है। सुरक्षित मातृत्‍व आश्‍वासन योजना-सुमन की शुरुआत 10 अक्टूबर को केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन द्वारा की गई है।

3. 11-14 अक्‍टूबर के बीच वाराणसी में आयोजित हुआ 38वां इंडिया कार्पेट एक्सपो। सांस्‍कृतिक धरोहर और भारतीय हस्‍तनिर्मित कालीनों और फ्लोर कवरिंग की बुनाई के कौशलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य के साथ विदेशों से आने वाले कालीन के खरीददारों के लिए आयोजित किया गया था इंडिया कार्पेट एक्सपो। आपको बता दें कि इंडिया कार्पेट एक्‍सपो एशिया में लगने वाले सबसे बड़े हस्‍तनिर्मित कालीन मेलों में से एक है।

4. 10 अक्टूबर से कश्‍मीर घाटी में पर्यटकों का आवागमन फिर से हुआ चालू। इस महीने के आखिर तक राज्‍य सरकार ने दिए 10वीं, 12वीं समेत कॉलेजों की परीक्षाएं कराने का आदेश। ग़ौरतलब है कि बीते दिनों जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद दो अगस्‍त से घाटे में ये प्रतिबन्ध लागू था।

5. पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने आपदा संबंधी चेतावनी के लिए लांच किया जैमिनी उपकरण। ख़ासतौर पर मछुआरों को आपदा के दौरान जानकारी प्रदान तैयार किए जाने के लिए तैयार हुआ है ये उपकरण। आपको बता दें कि जैमिनी एप्लिकेशन का पूरा नाम - गगन आधारित समुद्री संचालन और जानकारी उपकरण है। जैमिनी उपकरण, आपदा संबंधी चेतावनी, समुद्री राज्‍यों में मछुआरों के लिए चेतावनी और मछली संभावित जोन के बारे में जानकारी देगा। इसके आलावा ये उपकरण उपग्रह पर आधारित संचार प्रणाली है। ये उपकरण गगन उपग्रह से मिले डाटा को ब्‍लूटूथ संचार के ज़रिए मोबाइल तक पहुँचाएगा। दरअसल तट से अधिक दूर जाने पर मछुआरों का मोबाइल नेटवर्क संपर्क टूट जाता है।

6. मां और नवजात शिशु के जीवन की सुरक्षा के लिए शुरू हुई की गई नि:शुल्‍क सुरक्षित मातृत्‍व आश्‍वासन योजना-सुमन। इस योजना का मक़सद बिना किसी खर्च के सभी माताओं और नवजात शिशुओं को उच्‍च गुणवत्‍ता वाली स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं मुहैया कराना है। सुरक्षित मातृत्‍व आश्‍वासन योजना-सुमन की शुरुआत 10 अक्टूबर को केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन द्वारा की गई है।

7. नई दिल्‍ली में आयोजित हुई भारत-थाईलैंड के संयुक्‍त आयोग की 8वीं बैठक। भारत और थाईलैंड के विदेश सेवा संस्‍थानों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर किए गए हस्‍ताक्षर। ग़ौरतलब है कि इस बैठक में भारतीय और थाईलैंड के विदेश मंत्री शामिल हुए हुए थे।

8. आर्मी एविएशन कोर को राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद ने प्रदान किया ‘प्रेसिडेंट्स कलर। आर्मी एविएशन कोर को उसकी सराहनीय सेवा के लिए मिला है ये सम्मान। आपको बता दें कि 1986 में आर्मी एविएशन कोर की स्थापना हुई थी। मौजूदा वक़्त में आर्मी एविएशन कोर भारतीय सेना की सबसे नई कोर है। आर्मी एविएशन कोर ने पिछले 32 सालों में इसने सभी क्षेत्रों में उत्‍कृष्‍टता हासिल की है और अलग - अलग अभियानों के दौरान अपनी शूरवीरता प्रमाणित की है।

9. टेलीविज़न और रेडियो के क्षेत्र में भारत एवं विदेशी प्रसारकों के बीच समझौते को मिली मंज़ूरी। सार्वजनिक प्रसारक को नए दृष्टिकोण खोजने में मिलेगी मदद भारत एवं विदेशी प्रसारकों के बीच हुए इस समझौते से नई टेक्नोलॉजी और कड़ी प्रतियोगिता से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये नई रणनीतियों के बारे में मदद मिलेगी।

10. जल शक्ति मंत्रालय ने शुरू किया गंगा आमंत्रण अभियान। गंगा नदी में प्रदूषण के चलते हो रहे पारिस्थितिकी बदलाओं के बारे में लोगों को जागरूक करना है है इस अभियान का मकसद। आपको बता दें की गंगा आमंत्रण अभियान में राफ्टिंग और नौका चालन शामिल है। ये अभियान उत्तराखंड के देवप्रयाग से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के गंगा सागर तक चलाया जाएगा। इस अभियान में जल, थल,और वायु सेना के भी सैनिक शामिल होंगे। इसके अलावा वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद CSIR के सदस्य इस दौरान अलग - अलग जगहों से गंगा के पानी का सैंपल इकठ्ठा कर शोध करेंगे।

11. बीते दिनों दो अफ्रीकी देशों कोमाेरोस और सिएरा लिओन के दौरे पर गए उपराष्ट्रपति एम वेंक्यानायडू। भारत की ओर से दो अफ्रीकी देशों की ये यात्रा पहली आधिकारिक उच्‍च स्‍तरीय यात्रा है। इस मौके पर उपराष्ट्रपति एम वेंक्यानायडू ने आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावित कोम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेरररिज्म CCIT को किसी नतीजे पर ले जाने का अनरोध किया। दरअसल 1993 में हुए मुंबई हमले के बाद आतंकवाद से लड़ने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा की जरुरत को भारत ने महसूस किया और साल 1996 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को व्यापक आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय संधि CCIT अपनाने का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा वक़्त में ये प्रस्ताव UN के सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं हो पाने के कारण किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है।

12. साल 2019 के नोबेल पुरुस्कारों को घोषणा। कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली शख्सियतों को दिया जाता है दुनिया का सर्वोच्च पुरूस्कार नोबेल प्राइज इस बार के नोबेल पुरस्कार विजेताओं में अमेरिका के विलियम केलिन, ग्रेजग सेमेंजा और ब्रिटेन के पीटर रैटक्लिफ को संयुक्त रूप से चिकित्सा के लिए, जॉन बी गुडएनफ, स्टैनली विटिंघम और अकीरा योशिनो को रसायनशास्त्र के लिए और कनाडा-अमेरिका के जेम्स पीबल्स, स्विट्जरलैंड के माइकल मेयर और डिडियर क्वेलोज को भौतिकीशास्त्र के लिए नोबेल पपुरूस्कार दिया गया है। साहित्य के लिए पुरस्कार पीटर हैंडके और ओल्गा टोकारजुक को संयुक्त रूप से दिया जाएगा इसके अलावा शांति का नोबेल इस बार इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद को दिया जा रहा है।

13. नोबेल पुरस्कार विजेताओं की लिस्ट में अर्थशास्त्र के लिए भारत के अभिजीत विनायक बनर्जी को नोबेल प्राइज। वैश्विक गरीबी खत्म करने के प्रयोग के उनके शोध के लिए मिला है अर्थशास्त्र का 2019 का नोबेल पुरस्कार । अभिजीत बनर्जी को नोबेल पुरस्कार उनकी पत्नी एस्थर डफ्लो और माइकल क्रेमर को वैश्विक गरीबी खत्म करने के प्रयोग के उनके शोध के लिए संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। ग़ौरतलब है कि अभिजीत बनर्जी की पत्नी एस्थर डफ्लो अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाली सबसे कम उम्र की महिला हैं। आपको बता दें कि नोबेल पुरस्कार हर साल शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र में सर्वोत्कृष्ट योगदान के लिए दिए जाते है। इन क्षेत्रों में दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा नोबेल फॉउंडेशन दवरा की जाती है।

14. कर्नाटक संगीत के वरिष्ठ संगीतज्ञ श्री कादरी गोपालनाथ का निधन। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित थे कादरी गोपालनाथ

15. सरकारी कालोनियों के पर्यावरण संरक्षण के लिए मोबाइल ऐप एमहरियाली की शुरूआत। इस ऐप का मक़सद लोगों को पौधे लगाने और इस तरह के अन्‍य हरित उपाय करने के लिए प्रेरित करना। इसके अलावा पौधारोपण के जरिये खुले स्‍थान की सफाई और वर्षा जल संचयन के बारे में भी लोगों को जागरूक करना है।

16. 10 से 23 अक्‍टूबर तक नई दिल्ली में हो रहा है सरस आजीविका मेले का आयोजन। ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीन दयाल दयाल उपाध्‍याय योजना की एक पहल है सरस आजीविका मेला। इस आयोजन का मुख्य मक़सद ग्रामीण महिला स्‍वयं सहायता समूहों को अपने कौशल का प्रदर्शन करने, उत्‍पादों को बेचने और थोक खरीदारों के साथ सीधे संपर्क बनाने का अवसर प्रदान करना है।

17. भारत और बांग्‍लादेश की नौसेनाओं ने की उत्‍तरी बंगाल की खाड़ी में साझा गश्‍त। साझा गश्त में आईएनएस रणविजय और स्‍वदेशी प्रक्षेपास्‍त्र पोत ले रहे हैं हिस्‍सा। आपको बता दें की इस तरह के कॉरपैट की शुरूआत 2018 में हुई थी, जिसके तहत दोनों देशों की नौसेनाएं समुद्र में साझा गश्‍त लगाती है। इस अभ्‍यास के दौरान हेलिकाप्‍टरों और गश्‍ती विमानों का उपयोग किया जाता है। ग़ौरतलब है कि कि दोनों देशों की साझा समुद्री सीमा 4000 किलोमीटर से अधिक है। इसके मद्देनजर दोनों देश अभ्‍यास करते हैं और अंतर्राष्‍ट्रीय समुद्री सीमा के निकट आपसी सहयोग से गश्‍त लगाते हैं।

18. साफ-सफाई और स्वच्छता के शीर्ष मानकों के लिए सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दिए गए कायाकल्प पुरस्कार। 15 मई 2015 को स्वच्छ भारत अभियान के तहत की गई थी कायाकल्प पुरस्कार की शुरुआत। इस पुरूस्कार का मक़सद लोगों के बीच साफ-सफाई, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण उपायों के शीर्ष स्तर को प्रदर्शित करने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहचान करना और उन्हें बढ़ावा देना है। इस पुरूस्कार के तहत केंद्र सरकार की संस्‍थाओं में दिल्‍ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान सस्‍थान- एम्‍स, पुदुचेरी के जवाहरलाल पोस्‍ट ग्रेजुएट चिकित्‍सा शिक्षा और अनुसंधान संस्‍थान अलावा गुजरात, हरियाणा, केरल, और मध्‍य प्रदेश समेत कई अन्‍य राज्‍यों को भी इस सम्मान से पुरस्कृत किया गया है।

19. उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित हुआ राष्‍ट्रीय हिन्‍दी विज्ञान लेखक सम्‍मेलन। हिन्‍दी और अन्‍य भारतीय भाषाओं में विज्ञान लेखन को बढ़ावा देना है राष्‍ट्रीय हिन्‍दी विज्ञान लेखक सम्‍मेलन का उद्देश्य । सम्‍मेलन के दौरान विज्ञान लेखन की विधाओं जैसे अभियांत्रिकी, तकनीक और प्रौद्योगिकी के अलावा स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा और शोध में हिन्‍दी भाषा के प्रयोग पर चर्चा हुई।

20. 11 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाई गया अन्‍तर्राष्‍ट्रीय बालिका दिवस। लड़कियों के सामने आने वाली चुनौतियों के प्रति जागरूकता पैदा करना, उनका सशक्तिकरण करना और उन्‍हें उनके अधिकार देना है अन्‍तर्राष्‍ट्रीय बालिका दिवस का मक़सद। भारत ने बालिकाओं को सशक्त और समाज में मौजूद भेदभाव को मिटाने के लिए की है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरआत 2015 से की है।

21. केंद्र सरकार कर रही है ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया बनाने का विचार। बढ़ते भूमि क्षरण और थार रेगिस्तान के पूर्वी विस्तार को रोकना है भारत की ग्रीन वॉल का मक़सद। इस योजना के तहत गुजरात से दिल्ली-हरियाणा सीमा तक क़रीब 1,400 किमी. लंबी और 5 किमी. चौड़ी हरित पट्टी बनाए जाने का विचार किया जा रहा है। ये हरित पट्टी पोरबंदर से पानीपत तक भी बनाई जाएगी जो अरावली पर्वत में वनीकरण के ज़रिए से ज़मीन की उर्वरता बनाए रखने में सक्षम होगी । इसके आलावा ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तान से आने वाली धूल को भी रोकने का काम करेगी।

22. दिल्ली एनसीआर को मिला एक और एयरपोर्ट। हिंडन एयरपोर्ट से शुरू होंगी वाणिज्यिक उड़ाने

23. 10 अक्तूबर को मनाया गया दुनियाभर में मृत्युदंड विरोधी दिवस मनाया जाता है। मृत्युदंड के प्रति विरोध दर्ज करना है मृत्युदंड विरोधी दिवस का मक़सद

24. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय OHCHR ने सभी देशों से मृत्युदंड को खत्म करने का आह्वान किया गया है। ग़ौरतलब है कि दुनिया के लगभग 170 देशों ने अपने यहाँ मृत्युदंड को या तो औपचारिक रूप से ख़त्म कर दिया है या न्यायिक फैसलों में मौत की सज़ा बंद कर दिया है। इसके अलावा चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया जैसे देशों में बड़ी संख्या में मृत्युदंड देने के मामले हैं।

25. सौरव गांगुली बने BCCI के नए अध्यक्ष। इस तरह से BCCI के 35वें अध्यक्ष होंगे सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI देश में क्रिकेट के लिये राष्ट्रीय शासकीय निकाय है। दिसंबर, 1928 में इसका गठन तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत किया गया था। मौजूदा वक़्त में बोर्ड का मुख्यालय मुंबई में मौजूद है

26. राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव के 10वें संस्करण की मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुई शुरुआत। एक भारत श्रेष्ठ भारत पहल के तहत 14 से 21 अक्तूबर तक मनाया जाएगा राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव। आपको बता दें कि भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय इसका आयोजन कर रहा है। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव संस्कृति मंत्रालय के प्रमुख त्यौहारों में शुमार है जिसकी शुरुआत साल 2015 में की गई थी।

27. 9 से 12 अक्तूबर के बीच डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में हुआ C - 40 विश्व महापौर शिखर सम्मेलन का आयोजन। जलवायु परिवर्तन से निपटने जैसे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जलवायु जोखिमों को कम करना है C - 40 विश्व महापौर शिखर सम्मेलन का आयोजन का काम ।

इस मौके पर C-40 दिल्ली ने स्वच्छ वायु शहर उद्घोषणा” के तहत एक ‘विशेष कार्य दल’ के गठन का फैसला लिया है जो इस उद्घोषणा के लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयासों की समीक्षा करेगा। इसके अलावा C-40 में शामिल कलकत्ता शहर को भी इस साल ई-मोबिलिटी और निम्न कार्बन उत्सर्जन के लिये C-40 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। आपको बता दें कि C - 40 विश्व महापौर शिखर सम्मेलन साल 2005 में अस्तित्व में आया था। इसमें जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले दुनिया के 90 से अधिक शामिल हैं। ग़ौरतलब है कि भारत के 5 शहर-दिल्ली NCR, जयपुर, कलकत्ता, चेन्नई तथा बंगलूरु C-40 शहरों में शामिल हैं।

28. 12 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम पर आयोजित बैठक को सम्बोधित। इस कार्यक्रम का मक़सद राज्यों के बीच तमाम अहम मुद्दों पर व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण विकसित करना और क्षेत्रीय संस्कृतियों के महत्व पर प्रकाश डालना है। इस कार्यक्रम की घोषणा साल 2015 में सरदार पटेल की 140वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा कियागया था। कार्यक्रम के तहत हर साल प्रत्येक राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश को आपसी संपर्क के लिये अन्य राज्य या केन्द्र शासित प्रदेश के साथ जोड़े जाने की योजना है।

29. 2019 के लिए बुकर पुरस्कार की घोषणा। मार्ग्रेट एटवुड और बेरनार्डिन एवारिस्टो को संयुक्त रूप से दिया गया है बुकर पुरस्कार अमूमन इस पुरूस्कार को सिर्फ एक ही व्यक्ति को दिया जाता है लेकिन इस बार निर्णायकों ने नियमों में परिवर्तन करते हुए दो विजेताओं को चुना। ये पुरस्कार जीतने वाली एवारिस्टो पहली अश्वेत महिला हैं। आपको बता दें कि साल 1969 से साहित्य के क्षेत्र में दिया जाने बाला यह पुरस्कार नोबेल पुरस्कारों के बाद सबसे बडा पुरस्कार माना जाता है. इसे बुकर कंपनी और ब्रिटिश प्रकाशक संघ द्वारा संयुक्त रूप से हर साल दिया जाता है। ग़ौरतलब ही कि ये पुरस्कार अंतर्राष्ट्रीय मैन बुकर पुरस्कार से अलग है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मैन बुकर पुरस्कार हर 2 साल में विश्व के किसी भी उपन्यासकार को दिया जाता है, जबकि बुकर पुरस्कार हर साल केवल अंग्रेजी उपन्यास के लिये राष्ट्रमंडल देशों के लेखकों को ही दिया जाता है।

30. 15 अक्तूबर को हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के 35वें स्थापना दिवस पर समारोह का आयोजन। गुरुग्राम के मानेसर में स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का मुख्यालय आपको बता दें कि आतंकवाद से निपटने के लिये NSG का गठन साल 1984 में एक संघीय आकस्मिक बल के रूप में किया गया था। आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत की ज़ीरो टॉलरेंस की नीति में NSG की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इसके अलावा NSG गृह मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। आमतौर पर NSG को ब्लैक कैट के नाम से भी जाना जाता है।

31. केंद्र सरकार ने छात्राओं में Science, Technology, Engineering और Mathematics शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की विज्ञान ज्योति योजना।

विज्ञान ज्योति योजना के तहत वर्ष 2020-2025 तक 550 ज़िलों की छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाएगा जिसमें कक्षा 9 से 12 तक की छात्राएं शामिल होंगी। दरअसल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के आँकड़ों के मुताबिक़ मौजूदा वक़्त में Science, Technology, Engineering और Mathematics की शिक्षा में सिर्फ़ 24% महिलाएँ शामिल हैं।

32. उष्ण कटिबंधीय चक्रवात हगीबिस के कारण जापान में जनजीवन अस्त-व्यस्त। फिलीपींस ने दिया है इस उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को हगीबिस का नाम दरअसल चक्रवात निम्न वायुदाब वाली ऐसी मौसमी परिघटना होती है जिसमें हवाएं बाहर से अंदर की ओर तेज़ गति से घूमती है। चक्रवात मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। जिन्हें उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात के नाम से जाना जाता है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवात का प्रभाव प्रमुख रूप से प्रशांत महासागर, हिंद महासागर और उत्तरी अटलांटिक महासागर के क्षेत्रों पर ज्यादा रहता है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को अमेरिका में हरिकेन और टारनेडो, आस्ट्रेलिया में विली-विलीज़, चीन और जापान में टायफून और भारत में चक्रवात के नाम से जाता है।

33. भारत और जापान के बीच 19 अक्तूबर से 2 नवंबर तक होगा संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास धर्म गार्जियन-2019 का आयोजन। मिज़ोरम के काउंटर इन्‍सर्जेंसी वारफेयर स्‍कूल- वैरेंटे में किया जाएगा इस संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास का आयोजन साल 2018 में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समेत सामरिक संबंधों को मज़बूत बनाने के लिहाज़ से धर्म गार्जियन का आयोजन हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों ही देशों के विशेषज्ञ, युद्ध परिचालन से जुड़े अलग - अलग बिंदुओं पर अपनी विशेषज्ञता को साझा करते हैं।

34. जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने की ‘गोल’ कार्यक्रम के दूसरे चरण की घोषणा। देश भर की जनजातीय युवा महिलाओं को डिजिटल रूप से प्रोत्साहित और प्रशिक्षित करना है इस कर्यक्रम का लक्ष्य जीओएएल यानी गोल का पूरा नाम गोइंग ऑनलाइन एज लीडर्स है। इस कार्यक्रम की शुरूआत मार्च, 2019 में हुई थी। ‘गोल’ के जरिए वंचित युवा जनजातीय महिलाओं को व्यापार, फैशन और कला क्षेत्रों के वरिष्ठ विशेषज्ञों से जोड़ा जाता है, ताकि वे डिजिटल और जीवन कौशल सीख सकें। इस कार्यक्रम के दूसरे चरण में जनजातीय कार्य मंत्रालय और फेसबुक भारत के जनजातीय बहुल जिलों में 5,000 युवा महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगे।

35. भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण FSSAI ने की खाद्य सुरक्षा मित्र योजना की शुरुआत। खाद्य सुरक्षा मित्र (FSM) योजना, का मक़सद ज़मीनी स्तर पर लोगों को खाद्य सुरक्षा तंत्र में शामिल करने की योजना है

36. मामल्लपुरम् के समुद्र तट पर प्रधानमंत्री ने किया प्लॉगिंग। टहलना और कचरा उठाना शामिल है प्लॉगिंग शब्द का मतलब दरअसल प्लॉगिंग एक प्रकार की अंतर्राष्ट्रीय फिटनेस प्रवृत्ति है, जिसका मतलब टहलना और कचरा उठाना शामिल है।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।