(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (8th - 14th May 2020)

India This Week Weekly Current Affairs


(India This Week) Weekly Current Affairs for UPSC, IAS, Civil Service, State PCS, SSC, IBPS, SBI, RRB & All Competitive Exams (8th - 14th May 2020)



इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम का मक़सद आपको हफ्ते भर की उन अहम ख़बरों से रूबरू करना हैं जो आपकी परीक्षा के लिहाज़ से बेहद ही ज़रूरी है। तो आइये इस सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरों के साथ शुरू करते हैं इस हफ़्ते का इण्डिया दिस वीक कार्यक्रम...

न्यूज़ हाईलाइट (News Highlight):

  • पीएम मोदी ने देश को किया संबोधन....LOCKDOWN 4.0 पर लगाई मुहर...साथ ही इस दौरान शताब्दी की शुरुआत में आये Y2K संकट का भी किया जिक्र...
  • कोविड 19 के बीच भारत सरकार ने किया आउटरीच कार्यक्रम ‘मिशन सागर’ का शुभारंभ.... मिशन सागर के तहत INS केसरी हिंद महासागर के रास्ते पांच देशों तक पहुंचाएगा मदद...
  • रोजगार और निवेश को ध्यान में रखते हुए....सरकार ने उठाये कदम श्रम कानूनों में अहम बदलावों की घोषणा की....
  • भारत में covid-19 की टेस्टिंग के लिए किट हुई तैयार.....पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने किया विकसित......
  • श्रधालुओं में लिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा हुई सुगम....सीमा सड़क संगठन ने उत्तराखंड में धारचूला- लीपुलेखा मार्ग का निर्माण किया....
  • विपणन क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी उपज बेचने की राह हुई आसान... राष्ट्रीय कृषि बाजार के साथ 177 ओर मंडियों को जोड़ा...
  • खेतों में कीटनाशक के तौर पर अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहे एंटीबायोटिक पर रोक.....CIBRC के तहत स्थापित पंजीकरण समिति की सिफारिस ...एंटीबायोटिकस के फसलों पर उपयोग पूरी तरह लगे प्रतिबंध.. ...

खबरें विस्तार से:

1.

दुनियाभर के कम्प्यूटर सिस्टम 31 दिसंबर, 1999 से आगे का साल बदल पाने में सक्षम नहीं थे....यह समस्या केवल तब तक रही, जब तक भारतीय कम्प्यूटर इंजीनियर्स ने ऐसे कम्प्यूटरों को 21वीं सदी का बनाकर नहीं छोड़ा....शायद पीएम मोदी भारतीयों की इसी कड़ी मेहनत और परिश्रम का उदाहरण दुनिया के सामने रखना चाहते थे......

इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग के शुरुआती दौर के बाद, तकरीबन पूरी दुनिया में कंप्यूटर सिस्टम में साल को दिखाने के लिए 4 की जगह पर 2 अंकों का ही इस्तेमाल होता था....ऐसा कंप्यूटर कोडर इसलिए करते थे ताकि कम मेमोरी का इस्तेमाल हो.....उस दौर में मेमोरी बचाना कंप्यूटर की लागत कम करने के लिए किया जाता था.....

‘वाई 2के’ में वाई साल (ईयर) को दिखाता है, तो वहीं 2 का मतलब है 2000....साल 1999 खत्म होकर साल 2000 शुरू होने वाला था , लेकिन दुनियाभर के कंप्यूटर सिस्टम 31 दिसंबर, 1999 से आगे का साल बदल पाने के काबिल नहीं थे...

सिस्टम अगले साल के लिए तारीख और महीना बदल सकते थे, लेकिन साल के दो आखिरी अंकों को छोड़कर पहले दो अंक नहीं बदले जा सकते थे और इस तरह से एक जनवरी 2000 को कंप्यूटरों में दिखने वाली तारीख 01/01/1900 ही रहती.....यानी कि समय से ठीक 100 साल पीछे....इस कारण ‘वाई 2के’ बग को ‘मिलेनियम बग’ भी कहा जाता है, जो एक तरह का कंप्यूटर बग था ....आसान भाषा में समझें तो बग एक तरह की कोडिंग में आने वाली दिक्कत होती है जिसकी वजह से कोई भी कंप्यूटर उस काम को नहीं कर पाता जिसके लिए उसे बनाया गया है ....

अमेरिका और यूरोप में कंप्यूटरों को इस तरह बनाया गया था कि उनमें साल 2000 और उससे आगे के सालों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी.....मसलन अमेरिका में तमाम कंप्यूटर गिनतियाँ महीना-दिन-साल (MM-DD-YY) की तर्ज़ पर बनायी गयी थी....साल केवल दो अंकों में था, इसलिए 1999 के बाद जब साल 2000 आया तो सभी तारीकों में बदलाव के साथ 01-01-00 तो हो जातीं, लेकिन कंप्यूटर से जुड़ी सभी सेवाएं ठीक 100 साल पीछे चली जातीं।

उस दौर में कई कंप्यूटर विशेषज्ञों ने इसके बारे में चेताया था की कंप्यूटर में 21वीं सदी के लिए प्रोग्राम्ड नहीं हैं , इसलिए वे ध्वस्त हो सकते हैं...और इससे बहुत सारे कंप्यूटर कार्यक्रम जिन पर अर्थव्यवस्था निर्भर थी, वह सब फेल होने वाले थे.....

बैंकिंग सेवाएं इससे पूरी तरह बंद होने वाली थीं ,पावर ग्रिड फेल हो जाते और उनसे जुडी सभी सेवाएं बाधित हो सकती थीं, जैसे रेल, पानी आपूर्ति आदि.....इसके अलावा कंप्यूटर आधारित सैटेलाइट्स , अंतरिक्ष कार्यक्रम भी इससे बुरी तरह प्रभावित होने की कगार पर थे.....इस तरह कंप्यूटर प्रणाली से जुडी सभी गतिविधियां बाधित होने वाली थी....

भारत ने सुलझाई थी “वाई 2के” की समस्या

रोज़मर्रा के कामों का पटरी से उतरता देख यूरोप-अमेरिकी कंपनियों में हाहाकार मच गया...इन सभी दिक्कतों को दूर करने के लिए सारे कंप्यूटर को नए सिरे से बदलने की ज़रुरत थी.... जिसके लिए बड़ी तादाद में कंप्यूटर इंजीनियरों की जरूरत थी.....उस समय तक भारत में इंफोसिस, विप्रो जैसी आईटी कंपनियों की शुरूआत हो चुकी थी....भारत में उस समय सस्ता मानव संसाधन किसी भी देश के मुकाबले पर्याप्त था....इसके अलावा भारत के पास हुनरमंद इंजीनियर की भी कमी नहीं थी......

यही वजह थी कि ऐसे वक़्त में अमेरिका और यूरोप की कंपनियों का ध्यान भारत की ओर गया....भारत के हुनरमंद युवाओं ने भी इनको निराश नहीं किया और दुनिया भर में अपनी ताकत का लोहा मनवाया..

हालांकि इस समस्या को ठीक करने में काफी धन खर्च हुआ....किसी ने इस समस्या को सुधारने के लगभग 5 साल के दौरान 200 से 300 बिलियन यू.एस. डॉलर के खर्चे का अनुमान लगाया गया।....वहीं एक अन्य अनुमान के मुताबिक वाई 2के बग को सही करने के लिए विश्व भर को 600 से 1,600 बिलियन यू.एस डॉलर खर्च करने पड़े....

इंफोसिस की तरह से ही आईआईएस इन्फोटेक उन 100 से ज्यादा भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक थी, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के “वाई 2के” बग को ठीक करने के काम में जुटी हुई थी....इसके बाद तो भारत की सॉफ्टवेयर कंपनियों ने ऐसी उड़ान भरी कि उसको रोक पाना नामुमकिन सा लगने लगा....1999 से शुरू हुआ भारत का आईटी और सेवा निर्यात 2010 तक तमाम भविष्यवाणियों को तोड़ते हुए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया....वहीं, उस समय भारतीय तकनीकी कंपनियों के कुल राजस्व का लगभग 40 प्रतिशत विदेशी कंपनियों से “वाई 2के” बग को दुरुस्त करने को मिले कॉन्ट्रैक्ट्स से आता था....

ईआईएस ने सॉफ़्टवेयर को “वाई 2के” अनुरूप बनाने के लिए कोड को फिर से लिखा....आई आई एस इन्फोटेक ने अपने विदेशी ग्राहकों की एक ब्ल्यू चिप सूची बनाई, जिसमें सिटीबैंक, अमेरिकन एक्सप्रेस, जी.ई. और प्रुडेंशियल जैसी बड़ी अमेरिकन कंपनियां शामिल थीं..

2.

10 मई, 2020 को भारत सरकार ने COVID-19 महामारी के बीच एक आउटरीच कार्यक्रम “मिशन सागर” लॉन्च किया...भारतीय नौसेना जहाज केसरी को इस मिशन के तहत तैनात किया गया है। यह ऑपरेशन रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के घनिष्ठ सहयोग के तहत किया जा रहा है। इस मिशन को हिंद महासागर में भारत के “SAGAR” विज़न के साथ घनिष्ठता के तहत तैनात किया गया है।

SAGAR विजन क्या है?

2015 में, भारत ने हिंद महासागर के अपने विज़न की शुरुआत की जिसे “SAGAR” कहा जाता है, ‘SAGAR’ का पूर्ण स्वरुप Security and Growth for All in the Region है। भारत का लक्ष्य अपने पड़ोसियों (विशेषकर समुद्री पड़ोसियों) के साथ आर्थिक और सुरक्षा सहयोग प्राप्त करना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत सूचनाओं के आदान-प्रदान, बुनियादी ढांचे के निर्माण, तटीय निगरानी और आपसी क्षमताओं को मजबूत करने में सहयोग करेगा।

इस मिशन में शामिल सभी चार देशों में भारत की नौसेना की मजबूत उपस्थिति है। 2019 में, भारत और मालदीव ने मालदीव में पहले से बंद तटीय रडार निगरानी प्रणाली (सीएसआरआर) को पूरा करने के लिए सहमत हुए। 2018 में, भारत और सेशेल्स ने द्वीप पर एक नौसैनिक अड्डा स्थापित करने पर सहमती प्रकट की। अक्टूबर 2019 में, भारत और कोमोरोस ने रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत ने हाई-स्पीड इंटरसेप्टर नावों की खरीद के लिए कोमोरोस को 20 मिलियन अमरीकी डालर की लाइन ऑफ़ क्रेडिट जारी की थी... वर्ष 2007 में, भारत ने मेडागास्कर की विदेशी धरती पर अपना पहला लिसनिंग पोस्ट बनाया.

यह मिशन भारत के सागर विज़न से बड़ी आसानी से जोड़ा जा सकता है. इस मिशन में शामिल सभी चार देशों में भारत की मजबूत नौसैनिक उपस्थिति है.

3.

श्रम कानूनों में बदलाव की पहले शुरूआत राजस्थान की...गहलोत सरकार ने बदलाव काम के घंटों को लेकर किया...इसके बाद फिर मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने बदलाव किया तो 7 मई को उत्तर प्रदेश और गुजरात ने भी लगभग 3 साल के लिए श्रम कानूनों में बदलावों की घोषणा कर दी. अब महाराष्ट्र, ओडिशा और गोवा सरकार ने भी अपने यहां नए उद्योगों को आकर्षित करने और ठप पड़ चुके उद्योगों को गति देने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं....

जहाँ उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले तीन साल के लिए उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट देने का फैसला किया है. राज्य सरकार ने अर्थव्यवस्था और निवेश को पुनर्जीवित करने के लिए उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट का प्रावधान किया है...वहीं मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने औद्योगिक विवाद अधिनियम और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियमों में संशोधन किए हैं...

राज्य सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, कारखाना अधिनियम 1948अड़तालीस के अंर्तगत आने वाले रजिस्ट्रीकृत सारे कारखाने धारा 51, 54 चौवन, 55, 56, और धारा 59 उनसठ के तहत कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक, घंटों, दैनिक घंटों, अतिकाल, और विश्राम आदि से संबंधित विभिन्न नियमों से 19 जुलाई 2020 तक के लिए छूट के लिए छूट के लिए प्राप्त होंगे. ....

जारी आदेश के मुताबिक कोई कर्मचारी किसी भी कारखाने में प्रति दिन 12 घंटे और सप्ताह में 72 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेगा. पहले यह अवधि दिन में 8 घंटे और सप्ताह में 48 अड़तालीस घंटे थी.....12 घंटे की शिफ्ट के दौरान 6 घंटे के बाद 30 मिनट का ब्रेक दिया जाएगा.....

वहीं कानून में संसोधन के बाद यूपी में अब केवल बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स एक्ट 1996 छियानवे लागू रहेगा....उद्योगों को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट 1923 और बंधुवा मजदूर एक्ट 1976 छिहत्तर का पालन करना होगा. उद्योगों पर अब 'पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट 1936' की धारा 5 ही लागू होगी... श्रम कानून में बाल मजदूरी व महिला मजदूरों से संबंधित प्रावधानों को बरकरार रखा गया है. औद्योगिक विवादों का निपटारा, व्यावसायिक सुरक्षा, श्रमिकों का स्वास्थ्य व काम करने की स्थिति संबंधित कानून समाप्त हो गए. ट्रेड यूनियनों को मान्यता देने वाला कानून भी खत्म कर दिया गया है. अनुबंध श्रमिकों व प्रवासी मजदूरों से संबंधित कानून भी समाप्त कर दिए गए हैं. लेबर कानून में किए गए बदलाव नए और मौजूदा, दोनों तरह के कारोबार व उद्योगों पर लागू होगा. उद्योगों को अगले तीन माह तक अपनी सुविधानुसार शिफ्ट में काम कराने की छूट दी गई है.

कंपनियां अतिरिक्त भुगतान कर सप्ताह में 72 बहत्तर घंटे ओवर टाइम करा सकती हैं और शिफ्ट भी बदल सकती हैं. कामकाज का हिसाब रखने के लिए पहले 61 इकसठ रजिस्टर बनाने होते थे और 13 रिटर्न दाखिल करने होते थे. संशोधित लेबर कानून में उद्योगों को एक रजिस्टर रखने और एक ही रिटर्न दाखिल करने की छूट दी गई है. प्रदेश में 20 से ज्यादा श्रमिक वाले ठेकेदारों को पंजीकरण कराना होता था, इस संख्या को बढ़ाकर अब 50 कर दिया गया है. शिवराज सरकार ने 50 से कम श्रमिक रखने वाले उद्योगों और फैक्ट्रियों को लेबर कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया गया है. संस्थान सुविधानुसार श्रमिकों को रख सकेंगे. श्रमिकों पर की गई कार्रवाई में श्रम विभाग व श्रम न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं होगा.....

जहाँ एक ओर केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ाने के लिए संरचनात्मक श्रम सुधारों का समर्थन किया. राज्य सरकार द्वारा लाए गए व्यापक श्रम कानून में बदलाव और छूट का समर्थन किया. केंद्र सरकार और मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकारों को विश्वास है कि सुधारवादी मानसिकता और श्रम अनुपालन अवकाश अधिक निवेश को आकर्षित करेंगे और इससे विकास सुनिश्चित होगा....

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी के अलावा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने भी श्रम कानूनों में किए जा बदलाव को लेकर अपना विरोध जताया है. मजदूर संघ के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा, 'भारत में वैसे ही श्रम कानूनों का पालन कड़ाई से नहीं होता और जो हैं भी उन्हें भी निलंबित या खत्म किया जा रहा है....

4.

भारत ने कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ मुहिम में एक बड़ी कामयाबी पाई है और टेस्टिंग किट विकसित की है... इस किट से कम समय में जांच मुमकिन होगी....ये किट जांच के लिए जल्द उपलब्ध होगी....आपको बता दें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे (NIV Pune) ने कोविड को लेकर एंटीबॉडी को लेकर एलीसा (Elisa) टेस्ट किट तैयार की है.... बता दें कि अप्रैल महीने में चीन से रैपिड टेस्ट किट मंगवाई गयीं थी...जिनका सेंस्टिविटी टेस्ट अलग अलग आया था...जिसके बाद आईसीएमआर ने इसे कैंसिल कर दिया.. .

एलीसा ये एंटीबॉडी टेस्ट है जबकि कोरोना की जांच के लिए RTPCR यानी REVERSE TRANज़ –SCRIPT-ASE POLY-ME-RASE CHAIN REACTION करवाना जरूरी होता है....इसका नाम कोविड कवच एलिसा टेस्ट दिया गया है.....ये किट बड़ी आबादी वाले इलाके में कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर निगरानी में अहम भूमिका निभाएगी....इस किट की सेंसिटिविटी और गुणवत्ता परखने को लेकर मुंबई के 2 अलग-अलग इलाकों में टेस्ट को अंजाम दिया गया....जहां इसे सही पाया गया. ढाई घंटे में इसकी क्षमता 90 सैंपल के टेस्ट की है...

ड्र्ग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसके कमर्शियल प्रोडक्शन को लेकर जायडस कैडिला (zydus cadila) को अनुमति दी है....दरअसल, देश ने जो टेस्ट किट विकसित की है वो एंटीबॉडी टेस्ट किट है....सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि यह किट जल्द उपलब्ध होगी...

एंटीबॉडी टेस्ट और आरटीपीसीआर क्या है?

अगर कोई व्यक्ति किसी वायरस का शिकार होता है तो उसके शरीर मे वायरस से लड़ने में एंटीबॉडीज बन जाती है. शरीर मे एंटीबॉडीज का पता लगाने के लिए रैपिड टेस्ट की जरूरत पड़ती है. एंटीबॉडी टेस्ट के नतीजे कम वक्त में आ जाते हैं. जबकि कोरोना जांच के लिए RTPCR की रिपोर्ट में अमूमन 24 घंटे लगते हैं. ...

एंटीबॉडी टेस्ट में ब्लड सैंपल लिया जाता है. एक या दो बूंद अंगुली से ब्लड लेकर जांच होती है जिससे पता चलता है कि इम्यून सिस्टम ने वायरस को बेअसर करने के लिए एंटीबॉडीज बनाए हैं या नहीं. मौजूदा वक्त में कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए रियल टाइम पीसीआर टेस्ट (RTPCR) किया जाता है. इसमें लोगों का स्वैब सैंपल लिया जाता है. यह इस लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण खबर है कि देश में ही तैयार किट उपलब्ध होगी. इसके लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा...

दूसरी तरफ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ मिलकर देश में ही कोविड-19 के लिए वैक्सीन तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है. दोनों की कोशिश है कि कोरोना के इलाज के लिए देश में ही वैक्सीन तैयार की जाए….

5.

कैलाश-मानसरोवर यात्रा और सीमा क्षेत्र कनेक्टिविटी में एक नए युग की शुरुआत करते हुएरक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने एक विशेष कार्यक्रम में धारचूला (उत्तराखंड) से लिपुलेख (चीन सीमा) तक सड़क मार्ग का उद्घाटन किया। श्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पिथौरागढ़ से गुंजी तक वाहनों के एक काफिले को रवाना किया...

कैलाश-मानसरोवर की तीर्थयात्रा को हिंदुओं, बौद्धों और जैनियों द्वारा पवित्र तथा पूजनीय माना जाता है....इस सड़क लिंक के पूरा होने के साथ, यात्रा एक सप्ताह में पूरी हो सकती है, जबकि पहले 2-3 सप्ताह का समय लगता था...यह सड़क घटियाबगड़ से निकलती है और कैलाश-मानसरोवर के प्रवेश द्वार लिपुलेख दर्रा पर समाप्त होती है....80 किलोमीटर लम्बी इस सड़क की ऊंचाई 6,000 से 17,060 फीट तक है...इस परियोजना के पूरा होने के साथ, अब कैलाश-मानसरोवर के तीर्थयात्री जोखिम भरे व अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाके के मार्ग पर कठिन यात्रा करने से बच सकेंगे...वर्तमान में, सिक्किम या नेपाल मार्गों से कैलाश-मानसरोवर की यात्रा में लगभग दो से तीन सप्ताह का समय लगता है....लिपुलेख मार्ग में ऊंचाई वाले इलाकों से होकर 90 किलोमीटर लम्बे मार्ग की यात्रा करनी पड़ती थी....इसमें बुजुर्ग यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था.....

सिक्किम और नेपाल के रास्ते अन्य दो सड़क मार्ग हैं...इसमें भारतीय सड़कों पर लगभग 20 प्रतिशत यात्रा और चीन की सड़कों पर लगभग 80 प्रतिशत यात्रा करनी पड़ती थी। घटियाबगड़-लिपुलेख सड़क के खुलने के साथ, यह अनुपात उलट गया है। अब मानसरोवर के तीर्थयात्री भारतीय भूमि पर 84 चौरासी प्रतिशत और चीन की भूमि पर केवल 16 प्रतिशत की यात्रा करेंगे। रक्षा मंत्री ने कहा कि यह वास्तव में ऐतिहासिक है...

6.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के लाभ के लिए प्रौद्योगिकी के महत्वाकांक्षी उपयोग के रूप में ई-नाम पोर्टल की परिकल्पना की थी, जिसके बहुतेरे लाभ देश में परिलक्षित हो रहे हैं...

केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने पिछले दिनों 7 राज्यों की 200 मंडियों को ई-नाम से जोड़ा था, तब उन्होंने कहा था- मई अंत तक इनकी संख्या करीब एक हजार हो जाएगी। इस समय-सीमा के पूर्व ही 177 सतहत्तर मंडियां ई-नाम से जोड़ दी गई....

नई जोड़ी मंडियों में गुजरात की 17, हरियाणा की 26, जम्‍मू-कश्‍मीरकी 1, केरल की 5, महाराष्ट्र की 54 चौवन , ओडिशा की 15, पंजाब की 17, राजस्थान की 25, तमिलनाडुकी 13 और पश्चिम बंगाल की 1 मंडी शामिल हैं। 177 सतहत्तर नई मंडियों के शुभारंभ के साथ, ई-नाम से सम्बद्धमंडियां 962 बासठ हो गई है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम-रूपाला व श्री कैलाश चौधरी तथा सचिव संजय अग्रवाल भी उपस्थित थे....

इससे पहले, 17 राज्यों और 2 संघ शासित प्रदेशों की 785 पचासी मंडियों कोई-नाम के साथ जोड़ा गया था, जिनका उपयोग करने वाले 1.66 करोड़ किसान, 1.30 लाख व्यापारी और 71,911 कमीशन एजेंट रहे है। इस प्लेटफॉर्म पर 9 मई 2020 तक, कुल 3.43 करोड़ मीट्रिक टन और संख्‍या में 37 सैंतीस.93 लाख बांस और नारियल का कारोबार किया गया, जिसका सामूहिक मूल्‍य 1 लाख करोड़ रू. से अधिक है...

क्या है राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM)

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम), भारत में कृषि जिंसों के लिए मौजूदा मंडियों को "वन नेशन वन मार्केट" से जोड़ने के उद्देश्य से एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल की 14 अप्रैल 2016 को प्रधान मंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने शुरूआत की थी....लघु किसान कृषि व्यवसाय संकाय (एसएफएसी) भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में ईएनएएम को लागू करने की प्रमुख एजेंसी है।

एनएएम पोर्टल एपीएमसी से संबंधित सभी सूचनाओं और सेवाओं के लिए एक एकल खिड़की सेवा प्रदान करता है जिसमें जिंसों के आने, उनकी गुणवत्ता और मूल्य शामिल होते हैं, व्यापार प्रस्तावों और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान का किसानों के खातों में सीधे निपटान करने का प्रावधान है और बेहतर बाजार पहुंच में उनकी मदद करता है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-एनएएम) भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी और सफल योजना है जो मौजूदा एपीएमसी मंडियों का समूह बनाती है ताकि कृषि जिंसों के लिए एकीकृत राष्‍ट्रीय बाजार बनाया जा सके। इससे क्रेता और विक्रेता के बीच सूचना की असमानता को समाप्‍त कर और वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर वास्‍तविक समय मूल्य खोज को बढ़ावा देकर एकीकृत बाजार में प्रक्रियाओं को सरल बनाकर कृषि विपणन में एकरूपता को बढ़ावा दिया जा सकता है।

7.

केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIBRC) के तहत स्थापित पंजीकरण समिति ने सिफारिश की है कि स्ट्रेप्टो माइसिन और टेट्रा साइक्लिन जैसे टीबी दवाओं के फसलों पर उपयोग को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए......

पंजीकरण समिति ने 1 मई, 2020 को अपनी 114वीं बैठक आयोजित की। इसकी उप-समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट का 9% और टेट्रासाइक्लिन हाइड्रोक्लोराइड का 1% फसलों पर उपयोग किया जाता है। इस रिपोर्ट के अनुसार इन दवाओं का उपयोग दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में सबसे अधिक किया गया है...

क्या है पूरा मामला

CIBRC आठ फसलों में स्ट्रेप्टो साइक्लिन दवा के उपयोग की अनुमति देता है। हालाँकि, अब यह पाया गया है कि इसका उपयोग कीटनाशक के रूप में अधिक फसलों पर किया जा रहा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने पहले सिफारिश की थी कि फसलों पर टीबी की किसी भी दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह आदेश CIBRC के साथ भी साझा किया गया था...

इस रिपोर्ट में 2022 तक इन दवाओं के उपयोग को रोकने का सुझाव दिया गया है क्योंकि अब इन दवाओं के लिए कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है। तब तक, उपयोगकर्ताओं को लेबल निर्देशों के अनुसार इन एंटीबायोटिक्स का उपयोग करना चाहिए।

पंजीकरण समिति ने एकीकृत कीट प्रबंधन के माध्यम से फसलों में रोगों और कीटों के प्रबंधन की सिफारिश की है। CIBRC ने ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) को बेहतर और सुरक्षित प्रथाओं पर शोध शुरू करने की भी सिफारिश की है।

तो ये थी पिछली सप्ताह की कुछ महत्वपूर्ण ख़बरें...आइये अब आपको लिए चलते हैं इस कार्यक्रम के बेहद ही ख़ास सेगमेंट यानी इंडिया राउंडअप में.... जहां आपको मिलेंगी हफ्ते भर की कुछ और ज़रूरी ख़बरें, वो भी फटाफट अंदाज़ में...

फटाफट न्यूज़ (India Roundup):

1. उद्धव ठाकरे निर्विरोध महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य चुने गए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और 8 अन्य नेताओं को निर्विरोध विधान परिषद का सदस्य चुन लिया गया है। दरअसल, उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने रहने के लिए 27 सत्ताईस मई से पहले परिषद का सदस्य चुना जाना ज़रूरी था। गौरतलब है कि 10 मई 2020 को कांग्रेस ने अपने दो में से एक उम्मीदवार का नाम वापस लेने की घोषणा की थी। उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी इसी वजह से उन्हें विधानसभा या विधान परिषद दोनों में से किसी एक सदन का सदस्य चुना जाना जरूरी हो गया था। क्योंकि 6 महीने की समय सीमा खत्म होने वाली थी। चुनाव के मैदान से अपना नाम वापस लेने की समय सीमा 14 मई तक ही थी...यही वजह है कि आज अतिरिक्त उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस ले लिए जिस कारण से चुनाव की जरूरत भी खत्म हो गई...

2. ब्रिक्स बैंक ने कोरोना से लड़ने के लिए भारत को एक अरब डॉलर का कर्ज दिया

ब्रिक्स देशों के न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए भारत को एक अरब डॉलर की आपातकालीन सहायता ऋण राशि दी है। इसका इस्तेमाल इस महामारी से होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए किया जाएगा। शंघाई स्थित एनडीबी की स्थापना ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने साल 2014 में की थी। एनडीबी के निदेशक मंडल ने 30 अप्रैल को भारत के लिए ‘आपातकालीन सहायता कार्यक्रम ऋण’ को मंजूरी दी थी और इसका उद्देश्य कोरोना वायरस महामारी के कारण होने वाले मानवीय, सामाजिक और आर्थिक नुकसान को कम करना है

3. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में मंत्रिमंडल के साथ 'HOPE' पोर्टल का लोकार्पण किया.... इस पोर्टल से उत्तराखंड में रहने वाले उत्तराखंडी तो जुड़ेंगे ही प्रदेश से बाहर रह रहे और काम कर रहे प्रवासी भी कनेक्ट हो पाएंगे। इसका मकसद युवाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध करना है।इस पोर्टल में उत्तराखण्ड में कौशल विकास विभाग से प्रशिक्षण लेने का भी विकल्प दिया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि यह पोर्टल प्रदेश के युवाओं के लिए एक सेतु के रूप में कार्य करेगा। इस पोर्टल के डाटा बेस का उपयोग राज्य के समस्त विभाग तथा अन्य रोज़गार प्रदाता युवाओं को रोज़गार से जोड़ने के लिए करेंगे।

4. भारत में लागू होगी वन नेशन वन राशन कार्ड योजना जिसके तहत अब एक राज्य का राशन कार्ड दुसरे राज्य में भी मान्य होगा । इससे प्रवासी मज़दूरों को काम की तलाश में एक राज्य से दुसरे राज्य जाने पर अनाज खरीदने के लिए इधर उधर भटकना नहीं होगा ।

5. शंघाई सहयोग संगठन की विदेश मंत्री स्तर की बैठक

भारत ने 13 मई को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया। यह एससीओ की आठ सदस्यीय बैठक वीडियो सम्मेलन के माध्यम से हुई।विदेश मंत्रियों की इस बैठक में घातक कोविड -19 वायरस से लड़ने के लिए सहयोग पर चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया जिसमें आठ देशों के विदेश मंत्री शामिल हुए।विदेश मंत्रियों का यह वीडियो सम्मेलन रूसी संघ के विदेश मामलों के मंत्री सर्गेई लावरोव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इन आठ देशों के विदेश मंत्रियों में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, चीनी विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी शामिल हुए।

6. जम्मू और कश्मीर ने जल जीवन मिशन (JJM) के तहत दिसंबर 2022 तक सभी ग्रामीण परिवारों को पानी की आपूर्ति के लिए नल का कनेक्शन प्रदान करने की योजना बनाई है। हरियाणा के गांवों के घरों में भी साल 2022 तक पीने का साफ पानी पहुंचाने के लिए नल लगाने का टारगेट तय कर लिया गया है। घरों में नल लगाने का काम ‘जल जीवन मिशन’ के तहत होगा।वर्तमान वर्ष के दौरान, केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) तीन जिलों – गंदरबल, श्रीनगर और रायसी के सभी 5,000 गांवों के 100 प्रतिशत कवरेज के लिए योजना बना रहा है।

7. 40 साल में पहली बार घटा भारत का CO2 उत्सर्जन

पर्यावरण संबंधित एक वेबसाइट कार्बन ब्रीफ के विश्लेषण के मुताबिक, कोरोना संकट के बीच चालीस साल में पहली बार भारत में कार्बन उत्सर्जन में साल-दर-साल के लिहाज़ से कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार देश में नवीकरणीय ऊर्जा में प्रतिस्पर्धा और बिजली के गिरते उपयोग से जीवाश्म ईंधन की मांग कमजोर पड़ गई है।अध्ययन में पाया गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन मार्च में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है और अप्रैल में इसमें 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। शोधकर्ताओं ने तेल, गैस और कोयले की खपत का अध्ययन करते हुए अनुमान लगाया है कि मार्च में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में CO2 उत्सर्जन 30m टन तक गिर गया।

8. काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) एनएएल (नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज), बेंगलुरु ने ‘स्वस्थ वायु’ नामक एक वेंटिलेटर विकसित किया है। इस वेंटिलेटर को 36 दिनों के रिकॉर्ड समय में डिजाइन किया गया है।CSIR द्वारा विकसित यह वेंटिलेटर एक डॉन-इनवेसिव BIPAP वेंटीलेटर है। यह वेंटिलेटर बिल्ट-इन बायोकम्पैटिबल कपलर और एक उच्च दक्षता युक्त फिल्टर से बना है। ये सुविधाएँ वेंटीलेटर को COVID-19 के प्रति भय को कम करने में मदद करती हैं।

9. बेंगलुरु सिटी कॉरपोरेशन ने लोगों के श्वसन स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए हाल ही में “प्राणवायु कार्यक्रम” शुरू किया....इस पहल का उद्देश्य लोगों के ऑक्सीजन स्तर को बढ़ाने में मदद करना है। इससे उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी रखने में मदद मिलेगी...गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (SARI) के कारण देश में कई मौतें हुई हैं। विशेष रूप से, COVID-19 के कारण हाइपोक्सिया (ऊतकों में ऑक्सीजन की कमी) होता है।

10. विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

प्रतिवर्ष संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) 9 मई को विश्व प्रवासी दिवस के रूप में मनाता है। यह एक वार्षिक अभियान है जो प्रवासी पक्षियों और उनके आवासों के संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करता है। इस बार की थीम : पक्षी हमारी दुनिया को जोड़ते हैं।इस थीम के द्वारा मुख्य रूप से पारिस्थिति-की कनेक्टिविटी और पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता पर बल दिया गया है। यह थीम ट्रैकिंग तकनीकों पर भी केंद्रित है जो दुनिया में प्रवासी पक्षियों के मार्गों का पता लगाने के लिए उपयोग की जाती हैं। विश्व प्रवासी दिवस की शुरुआत पहली बार 2006 में वन्य जीवों के प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन में की गयी थी..

11. रॉयल बंगाल टाइगर्स

सुंदरबन डेल्टा, जो भारत और बांग्लादेश में फैला हुआ है, विश्व में बाघों का एकमात्र मैं ग्रोव वन निवास हैं। पश्चिम बंगाल वन विभाग के नवीनतम अनुमान के अनुसार, बाघों की संख्या 2019-20 में 88 अट्ठासी से बढ़कर 96 छियानवे हो गई है। सुंदरबन एक विश्व धरोहर स्थल और रामसर स्थल है।सुंदरबन का सार्वभौमिक महत्व है और यह दुनिया में सबसे बड़ा मैंग्रोव वन है। यह विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। सुंदरवन के मैंग्रोव वन गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर बने हुए हैं।

12. ध्रुव सैनीटाइज़र

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) के रिसर्च सेंटर ईमारत (RCI) ने डिफेंस रिसर्च अल्ट्रावॉयलेट सेनिटाइज़र (DHRUVS) विकसित किया है। हैदराबाद स्थित डीआरडीओ की रिसर्च सेंटर ईमारत (RCI) ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, आईपैड, पासबुक, चालान और कागज को सेनिटाइज़ करने के लिए एक अल्ट्रा वायलेट कैबिनेट विकसित किया है। इसका उपयोग करेंसी नोटों और कागजात को सेनिटाइज़ करने के लिए भी किया जा सकता है। यह कैबिनेट के अंदर रखी वस्तुओं में यू।वी। किरणों का 360 डिग्री एक्सपोजर प्रदान करता है। DHRUV एक संपर्क रहित पराबैंगनी सैनिटाइजेशन कैबिनेट है जो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को सैनिटाइज करने के लिए अत्यधिक उपयोगी है।

13. सोहराई कोहबर और तेलिया रुमाल

झारखण्ड की कला सोहराई कोहबर और तेलंगाना के तेलिया रुमाल को जी आई टैग प्रदान किया गया । झारखण्ड में सोहराई कोहबर कला पहली जी आई टैग पाने वाली कला है । यह कला प्राकृतिक और नैसर्गिक रंगों का इस्तेमाल कर बनायी जाती है । इसमें रंग पीली काली लाल मिटी के इस्तेमाल से उकेरे जाते हैं । इस कला का ज़िक्र प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2015 में मन की बात के दौरान किया था ।तेलिया रुमाल बनाने के लिए कपड़े में कॉटन लूम के साथ जटिल हस्त निर्मित का काम शामिल है जो केवल पारंपरिक हथकरघा प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया जा सकता है और किसी अन्य यांत्रिक साधनों द्वारा नहीं।

14. फीफा अंडर 17 महिला विश्व कप

फीफा (FIFA) अंडर-17 महिला वर्ल्ड कप अब अगले साल भारत में ही 17 फरवरी से 07 मार्च के बीच आयोजित किया जाएगा। यह वर्ल्ड कप कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा ने महामारी से पैदा हुई परिस्थितियों का गहन मूल्यांकन करने के बाद 12 मई 2020 को यह फैसला किया।

तो इस सप्ताह के इण्डिया दिस वीक कर्यक्रम में इतना ही। परीक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी और भी तमाम महत्वपूर्ण ख़बरों के लिए सब्सक्राइब कीजिए हमारे यूट्यूब चैनल ध्येय IAS को। नमस्कार।