(Global मुद्दे) रायसीना डायलॉग और इसके परिणाम (Raisina Dialogue & It's Outcome)



(Global मुद्दे) रायसीना डायलॉग और इसके परिणाम (Raisina Dialogue & It's Outcome)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): पिनाक रंजन चक्रवर्ती (पूर्व राजदूत), प्रो. हर्ष पंत (ORF)

चर्चा में क्यों?

बीते 14 से 16 जनवरी के बीच राजधानी दिल्ली में रायसीना डायलॉग के पांचवें संस्करण का आयोजन किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एस. जयशंकर के साथ-साथ रूस, ईरान और ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया के 13 देशों के विदेश मंत्री मौजूद रहे। इनमें से 12 देशों के साथ भारत ने द्विपक्षीय वार्ताएं भी की। तीन दिवसीय इस आयोजन में 105 देशों के 600 से भी ज्यादा वक्ताओं और दो हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस बार के सम्मेलन के ख़ास बिंदु

रायसीना डायलॉग के इस मौजूदा सत्र में वैश्वीकरण से जुड़ी चुनौतियों, एजेंडा 2030, आधुनिक दुनिया में टेक्नोलॉजी की भूमिका, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद पर लगाम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

  • रायसीना डायलॉग 2020 की थीम- ‘नेविगेटिंग द अल्फा सेंचुरी’ (Navigating the Alpha Century) है।
  • इस आयोजन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद रहे लेकिन उन्होंने भाषण नहीं दिया।
  • भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अब सिर्फ बचने की कोशिश नहीं करता, बल्कि निर्णय लेने में विश्वास रखता है।
  • इस सम्मेलन में अफ़ग़ानिस्तान, न्यूज़ीलैंड, कनाडा, स्वीडन, डेनमार्क, भूटान और दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्र प्रमुखों ने दुनिया की मौजूदा चुनौतियों पर विचार साझा किया।
  • इस साल रूस, ईरान, डेनमार्क, हंगरी, मालदीव, दक्षिण अफ्रीका और एस्टोनिया समेत 12 देशों के विदेश मंत्रियों ने इसमें हिस्सा लिया। इन बड़े नेताओं की भागीदारी से जाहिर होता है कि भारत की साख वैश्विक कूटनीतिक पटल पर अब बढ़ रही है। इसके अलावा शंघाई सहयोग संगठन और यूनाइटेड नेशंस के जनरल सेक्रेटरी ने भी इस सम्मेलन में शिरकत किया।
  • इस सम्मेलन के दौरान हिंद प्रशांत क्षेत्र पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें ‘क्वाड समूह (Quad Group)’ देशों के सैन्य या नौसेना प्रमुखों के अलावा फ्रांस के रक्षा अधिकारी भी शामिल हुए। क्वाड ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।
  • इस बार इस सम्मेलन में किसी भी देश के मौजूदा मुखिया उपस्थित नहीं रहे। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन आने वाले थे, लेकिन उनके देश में जंगलों लगी आग की वजह से उन्होंने अपना फ़ैसला बदल लिया।
  • रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने हिंद-प्रशांत अवधारणा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इसके ज़रिये मौजूदा संरचना में व्यवधान डालने कोशिश की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह कदम मौजूदा संरचना को नया आकार देने और चीन को किनारे करने का प्रयास है। हालाँकि रूस ने कहा कि वो भारत की स्थिति का समर्थन करता है।

क्या है रायसीना डायलॉग?

रायसीना डायलॉग, भारत में आयोजित होने वाला एक ऐसा सालाना सम्मेलन होता है जहां पर भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक विषयों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा किया जाता है।

  • यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की अहम भूमिका पर आधारित सम्मेलन है।
  • इसे भारत के विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन यानी ओआरएफ द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है।
  • इस डायलॉग के सबसे पहले संस्करण का आयोजन साल 2016 में किया गया था।

ओआरएफ क्या है?

ओआरएफ नई दिल्ली स्थित एक स्वतंत्र थिंक टैंक है, जो भारत सरकार समेत देश के दूसरे राजनीतिक और व्यवसायिक जगत से जुड़े नीति निर्माताओं को परामर्श देने का काम करता है।

इस डायलाग का मक़सद क्या होता है?

जिस तरह सिंगापुर में ‘शांगरी ला’ डायलॉग का आयोजन किया जाता है, उसी तर्ज पर भारत में रायसीना डायलॉग का आयोजन किया जाता है।

इस डायलॉग का मुख्य मकसद एशियाई एकीकरण के साथ-साथ बाकी दुनिया के साथ एशिया के बेहतर तालमेल से जुड़ी संभावनाओं और अवसरों की तलाश करना है।

कौन कौन शामिल होता है इस डायलाग में?

यह एक प्रकार का मल्टी-स्टेकहोल्डर और क्रॉस-सेक्टरल बैठक होती है जिसमें दुनिया भर के कई नीति-निर्माताओं और निर्णयकर्त्ताओं को शामिल किया जाता है। इस सम्मेलन में तमाम देशों के विदेश, रक्षा और वित्त मंत्रियों को शामिल किया जाता है। इसके अलावा इसमें उच्चस्तरीय सरकारी अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नामी हस्तियों और मीडिया एवं अकादमिक सदस्यों को भी शामिल किया जाता है।

इसे रायसीना डायलॉग क्यों कहते हैं?

दरअसल भारत के विदेश मंत्रालय का हेड क्वार्टर नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में स्थित है। यह साउथ ब्लॉक रायसीना पहाड़ी पर स्थित है, इसीलिए इसे रायसीना डायलॉग कहा जाता है।

क्या है हिंद प्रशांत क्षेत्र और इसकी अहमियत?

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, हिंद (Indo) यानी हिंद महासागर (Indian Ocean) और प्रशांत (Pacific) यानी प्रशांत महासागर के कुछ भागों को मिलाकर जो समुद्र का एक हिस्सा बनता है, उसे हिंद प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Area) कहते हैं। विशाल हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के सीधे जल-ग्रहण क्षेत्र में पड़ने वाले देशों को ‘इंडो-पैसिफिक देश’ कहा जा सकता है। इस्टर्न अफ्रीकन कोस्ट, इंडियन ओसियन तथा वेस्टर्न एवं सेंट्रल पैसिफिक ओसियन मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाते हैं। इसके अंतर्गत एक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र दक्षिण चीन सागर आता है।

यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे अमेरिका अपनी वैश्विक स्थिति को पुनर्जीवित करने के लिये इसे अपनी भव्य रणनीति का एक हिस्सा मानता है, जिसे चीन द्वारा चुनौती दी जा रही है। ट्रंप द्वारा उपयोग किये जाने वाले ‘एशिया-प्रशांत रणनीति’ (Indo-Pacific Strategy) का अर्थ है कि भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य प्रमुख एशियाई देशों, विशेष रूप से जापान और ऑस्ट्रेलिया, ‘शीत युद्ध’ के बढ़ते प्रभाव के नए ढाँचे में चीन को रोकने में शामिल होंगे। मौजूदा वक्त में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में 38 देश शामिल हैं, जो विश्व के सतह क्षेत्र का 44 फ़ीसदी, विश्व की कुल आबादी का 65 फ़ीसदी, विश्व की कुल GDP का 62 फीसदी और विश्व के माल व्यापार का 46 फ़ीसदी योगदान देते हैं।

इस डायलॉग से भारत को क्या लाभ है?

अक्सर ऐसा होता है कि भारत सरकार को अंतर्राष्ट्रीय संबंधों से जुड़े तमाम सवालों और मुद्दों पर अपना रुख जाहिर करने की जरूरत होती है। रायसीना डायलॉग इस के लिए एक मंच के तौर पर काम करता है। यानी इस तरह से देखा जाए तो इस डायलॉग से भारत अपनी कूटनीतिक क्षमता में इज़ाफ़ा कर रहा है।