(Global मुद्दे) जी-7 की 45वीं बैठक के नतीजे (Outcomes of G7 Summit)



(Global मुद्दे) जी-7 की 45वीं बैठक के नतीजे (Outcomes of G7 Summit)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): विवेक काटजू (पूर्व राजदूत), संजय कपूर (वरिष्ठ पत्रकार)

चर्चा में क्यों?

बीते दिनों फ़्रांस में 45 वें G - 7 शिखर सम्मलेन का आयोजन हुआ। जी-7 शिखर सम्मेलन 24-26 अगस्त के बीच फ्राँस के बियारेत्ज़ शहर में आयोजित किया गया। 45 वें G - 7 शिखर बैठक का विषय "असमानता के ख़िलाफ़ लड़ाई" थी। G - 7 शिखर सम्मलेन में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भारत को भी विशिष्ट अतिथि के तौर पर बुलाया गया था।

ग़ौरतलब है कि भारत G - 7 देशों का सदस्य नहीं है। फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने इस बार जी 7 के सदस्य देशों के अलावा कुछ अन्य देशों को भी आमंत्रित किया था जो दुनिया की राजनीति में ख़ास जगह रखते हैं। इन देशों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल और रवांडा जैसे देशो को भी भारत की तरह इस सम्मेलन में शरीक होने के लिए आमंत्रित किया गया था। इससे पहले 2018 में हुए 44 वें G -7 शिखर सम्मलेन का आयोजन कनाडा में हुआ था और आगामी यानी 2020 में होने वाला 46 वां शिखर सम्मलेन अमेरिका में प्रस्तावित है।

जी-7 क्या है?

जी-7 दुनिया की सात सबसे विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। G -7 समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। 7 देश वाला ये समूह की दुनिया की क़रीब 40 फीसदी जीडीपी का साझेदार भी है। जी-7 की पहली बैठक 1975 में हुई थी। जी-7 की पहली बैठक में वैश्विक आर्थिक संकट से जुड़ी मुश्किलों के हल पर विचार किया गया था। ग़ौरतलब है कि जी-7 समूह का गठन 1973 के तेल संकट के बाद हुआ था। जी-7 की पहली बैठक के दौरान इस समूह में सिर्फ छ: देश ही शामिल थे, लेकिन 1975 में हुई जी-7 समूह की पहली बैठक के अगले साल (1976) ही कनाडा को भी इस समूह में शामिल हो गया और तभी से ये जी-7 बन गय। जी-7 समूह को ग्रुप ऑफ़ सेवन भी कहते हैं। G -7 बैठक में शरीक होने वाले लोगों में जी-7 देशों के राष्ट्र प्रमुख, यूरोपीयन कमीशन और यूरोपीयन काउंसिल के अध्यक्ष शामिल होते हैं।

जी-7 का काम क्या है?

जी-7 देशों के राष्ट्रप्रमुख हर साल आपसी हितों से जुड़े मुद्दों मसलन वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा होते हैं। इसके अलावा विकास के लिए निवेश बढ़ाना, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा पर एक साथ काम करना जैसे मसले भी इस समूह की कायसूची में शामिल है। साथ ही महासागरों को प्लास्टिक मुक्त बनाना, एक समान और सुरक्षित दुनिया का निर्माण करना और लिंग समानता व महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों को लेकर काम करने के लिए भी G -7 समूह प्रतिबद्ध हैं।

जी-7 देशों की ये सालाना बैठक दो दिनों तक चलती है। G -7 समूह के सदस्य देश बारी-बारी से इस समूह की अध्यक्षता करते है साथ ही इस सालाना बैठक की मेजबानी भी करते हैं। G -7 समूह स्वयं को "कम्यूनिटी ऑफ़ वैल्यूज" यानी मूल्यों का आदर करने वाला समुदाय मानता है। आज़ादी, मानवाधिकारों की सुरक्षा, लोकतंत्र और क़ानून का शासन और समृद्धि व सतत विकास जैसे लक्ष्य इसके प्रमुख सिद्धांत हैं। जी-7 देश बैठक के आख़िर में एक सूचना जारी करते हैं, जिसमें सहमति वाले बिंदुओं का ज़िक्र रहता है।

चीन क्यों नहीं हैं जी-7 में शामिल ?

चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवथा होने के बावजूद भी इस समूह का हिस्सा नहीं है। दरअसल इसकी वजह ये है कि यहां दुनिया की सबसे बड़ी आबादी रहती हैं और प्रति व्यक्ति आय जी-7 समूह देशों के मुक़ाबले काफी कम है। इसी कारण से चीन को उन्नत या विकसित अर्थव्यवस्था नहीं माना जाता है, जिसकी वजह से यह समूह में शामिल नहीं है। ग़ौरतलब है जी-7 में नहीं शमिल चीन जी-20 देशों के समूह का हिस्सा है।

जी-7 जो कभी था जी-8

सोवियत संघ के विघटन के बाद साल 1998 में रूस भी इस समूह में शामिल हो गया था और यह जी-7 से जी-8 बन गया था। लेकिन साल 2014 में यूक्रेन से क्रीमिया हड़प लेने के बाद रूस को इस समूह से बाहर कर दिया गया था। हालाँकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस को समूह में फिर से शामिल किया जाना चाहिए "क्योंकि रूस का इस समूह में होना ज़रूरी है।

रूस को जी-7 में शामिल करने के ख़िलाफ़ है यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ के देश अमेरिका के उस बयान के साथ नहीं हैं जिसमें वो दोबारा से रूस को जी - 7 का हिस्सा बनाए जाने की बात कह रहे हैं। यूरोपीय संघ के देशों के कहना है कि रूस जब तक यूक्रेन का हिस्सा रहे क्रीमिया को खा़ली नहीं कर देता, तब तक वो दुनिया की सबसे विकसित और उन्नत अर्थव्यवस्था वाले देशों के समूह में शामिल होने का हक़दार नहीं है। ग़ौरतलब है कि साल 2014 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान रूस को इस समूह से निष्कासित किया गया था।

45वें जी-7 के चर्चित मुद्दें

सम्मलेन के बाद सात देशों के समूह द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में निम्न बिन्दुओं पर सहमति जताई गई

  • मुक्त व्यापार को बढ़ावा (ट्रेड वॉर को जल्द से जल्द ख़त्म किए जाने की बात)
  • US, कनाडा और मैक्सिको समझौते को आगे बढ़ाना
  • यूरोप के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध विकसित करना
  • ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकना और क्षेत्र में शान्ति स्थापित
  • यूक्रेन में शांति समझौते के ज़रिए स्थिरता क़ायम की जाए और यूक्रेन को यूरोपीय संघ में शमिल किया जाए
  • लीबिया में शांति की कायम करने की बात। लीबिया में शनती के लिए संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी यूनियन का साथ देंगा G - 7 समूह
  • हांगकांग प्रदर्शन का मुद्दा भी रहा संयुक्त घोषणा पत्र में शामिल। ब्रिटेन और चीन के बीच हुए 1984 के समझौते का ज़िक्र करते हुए G - 7 समूह के देशों ने चीन को इस बात की याद दिलाने की कोशिश की है इस समझौते के तहत ये प्रावधान था कि जब ब्रिटेन 1997 में हांगकांग को चीन को सौपेगा तो हांगकांग की स्वायत्ता बरक़रार रहेगी। साथ ही यहाँ का प्रशासनिक ढांचा भी अलग होगा जिसमें चीन का कोई हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
  • इसके अलावा बैठक में विश्व व्यापार संगठन और बौद्धिक संपदा संरक्षण के सन्दर्भ में, विवादों को अधिक तेज़ी से निपटाने और अनुचित व्यापार प्रथाओं को समाप्त किए जाने पर सहमति बनी है।

अमेज़न के वर्षावन में लगी आग को लेकर भी हुई जी-7 में चर्चा

G7 देशों के सम्मलेन में अमेज़न के जंगलों में लगी आग को जलवायु परिवर्तन को बेहद ही ख़तरनाक बताते हुए इसे रोकने के लिए एक बड़ी राशि ( 2.2 करोड़ डालर) ब्राज़ील को देने का प्रस्ताव रखा गया। हालाँकि ब्राज़ील ने इसे ठुकरा दिया है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने विदेशी मुल्कों द्वारा अमेज़ंन के जंगलों में लगी आग को रोकने के मकसद से भेजे जाने वाले पैसे को ब्राज़ील की संप्रभुता का हनन माना है। ग़ौरतलब है कि अमेज़न के वर्षवान दुनिया को 20 % ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

जी-7 के नतीज़े?

जानकारों का कहना है कि इस बैठक से कोई बहुत ख़ास उमींद नहीं थी और न ही इस सम्मलेन से दुनिया के समक्ष मौजूद मुद्दों को लेकर कोई सॉलिड एक्शन लिया गया है। जी-7 की बैठक सिर्फ औपचारिकता भर है। विशेषज्ञों का कहना है कि G - 7 बैठक से ज़्यादा महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं रही हैं।

जानकारों के मुताबिक़ जी-7 अपने मक़सदों में नाकाम रहा है। जी-7 दुनिया के सामने मौजूद वैश्विक शांति, व्यापर, वैश्विक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मामलों में कोई कामयाबी नहीं हांसिल कर सका है। जी-7 के सदस्य देशों के बीच राजनीतिक और आर्थिक एकता की कमी है। मौजूदा वक़्त में योरोपियन यूनियन भी एक तरीके से विभाजित है। इसके अलावा अमेरिका भी अपने करीबियों के साथ व्यापार युद्ध लड़ रहा है जिसमें कनाडा को लेकर अमेरिका का रवैया, यूरोप और US के बीच ट्रेड वॉर और नाटो को लेकर मतभेद जैसे मामले जगज़ाहिर हैं। इसके अलावा अमेरिका जापान को भी ट्रेड वॉर में उलझाए हुए है।
जी-7 की अगली बैठक में रूस को आमंत्रित कर सकता है अमेरिका जानकरों का कहना है कि अगले साल अमेरिका में होने वाली G - 7 बैठक में राष्ट्रपति ट्रम्प रूस को ज़रूर आमंत्रित करेंगे। ऐसे में यूरोप और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है।

जी-7 के सामने मौजूद चुनौतियां?

जी-7 समूह देशों के बीच कई मामलों को लेकर अलग - अलग राय है। पिछले साल कनाडा में हुए जी-7 शिखर सम्मेलन में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का अन्य सदस्य देशों के साथ मतभेद हो गया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आरोप था कि दूसरे देश अमरीका पर भारी आयात शुल्क लगा रहे हैं। साथ ही पर्यावरण के मुद्दे पर भी उनका सदस्य देशों के साथ मतभेद था। इसके अलावा जी-7 समूह की आलोचना इस बात के लिए भी की जाती है कि इसमें मौजूदा वैश्विक राजनीति और आर्थिक मुद्दों को लेकर कोई बात नहीं होती है। साथ ही अफ्रीका, लैटिन अमरीका और दक्षिणी गोलार्ध का कोई भी देश इस समूह का हिस्सा नहीं है। जानकारों का मानना है कि भारत और ब्राज़ील जैसी तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं से इस समूह को चुनौती मिल रही है जो जी-20 समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं लेकिन जी-7 का हिस्सा नहीं हैं। इसके अलावा कुछ वैश्विक अर्थशास्त्रियों का भी कहना है कि जी-20 के कुछ देश 2050 तक जी-7 के कुछ सदस्य देशों को पीछे छोड़ देंगे।

जी-7 में भारत

विशिष्ट अतिथि के तौर पर इस बैठक में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो सत्रों को सम्बोधित किया। पहले सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने घटती जैवविविधता, समुदी प्रदुषण और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों को ज़ोर देते हुए अपनी बात रखी। इसके अलावा सतत भविष्य के लिए एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पर पाबंदी लगाने की बात, जल संरक्ष्ण और सौर ऊर्जा के दोहन, जीवा जन्तुओ और पेड़ पौधों के संरक्षण जैसे मसलों पर भी अपनी बात पहले सत्र के दौरान रखी।

दूसरे सत्र में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर प्रधानमंत्री ने ज़िक्र किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने डिजिटल बदलाव के बारे में जानकारी दी साथ ही सामाजिक असामनता से लड़ने के लिए डिजिटल तकनीकी का भी ज़िक् किया। इन सब के अलावा प्रधानमंत्री का जी - 7 बैठक में पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर ज़ोर रहा। साथ ही उन्होंने वैश्विक चुनातियों से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं को भी दोहराया है।
सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं कीं और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतरेस से भी मुलाक़ात की।

रूस और चीन के अलावा भारत को भी शामिल करना होगा जी-7 में

जानकरों का कहना है रूस और चीन के बगैर इस समूह का भविष्य सुनिश्चित नहीं हो सकता है। इसके अलावा जी -7 समूह को यदि वास्तव में विश्व के सबसे प्रमुख औद्योगिक देशों का प्रतिनिधित्व करना है तो रूस और चीन के अलावा भारत के लिए भी इस समूह में दरवाज़े खोलने होंगे।

जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय बैठक

जी-7 बैठक के दौरान मोदी ने की ट्रम्प से मुलाक़ात

जी-7 की बैठक में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बैठक से अलग मुलाक़ात की है। इस बैठक में कश्मीर को लेकर चर्चा हुई। मुलाक़ात के बाद दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता की। प्रेस वार्ता में मोदी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष के दख़ल का कोई औचित्य नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा कि भारत और पाकिस्तान ख़ुद ही अपने मसले सुलझा सकते हैं। जानकर मोदी के इस बयान को काफी महत्वपूर्ण मान रहे हैं क्योंकि पिछले कई दिनों से ट्रंप कश्मीर मसले को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश करते रहे हैं। मोदी के इस बयान के बाद ट्रंप का बयान भी काफ़ी अहमियत रखता है क्योंकि ट्रंप ने भी अपनी मध्यस्थता की बात नहीं दोहराई।

इसके अलावा बैठक में दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापार और ऊर्जा को लेकर चर्चा हुई है। आपको बता दें कि अगले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अमेरिका दौरा प्रस्तावित है।

जी-7 बैठक के दौरान मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री से की मुलाक़ात

ब्रिटेन और भारत के बीच मुलाक़ात हुई मुलाक़ात दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर केंद्रित रही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जानसन ने कहा ग्रेट ब्रिटेन के आर्थिक और समाज में प्रतिभाशाली भारतीयों के योगदान के महत्व को वह समझते हैं। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आर्थिक एजेंडें को आगे बढ़ाने के लिए एक टीम गठित करने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा व्यापार, निवेश, रक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शिक्षा क्षेत्र में कई मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चाएं हुईं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव से भी मोदी ने मुलाक़ात

जी-7 की मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से मुलाक़ात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा की और कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन की चिंता को देखते हुए अक्षय ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है। ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव से हुई मुलाक़ात अनुच्छेद 370 के पृष्ठभूमि में हुई है।

जी - 7 में सेनेगल के राष्ट्रपति से भी प्रधानमंत्री मोदी ने की मुलाक़ात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेनेगल के राष्ट्रपति मैकी सॉल से भी G -7 बैठक के दौरान मुलाक़ात की। अफ्रीका के अहम सहयोगी देश सेनेगल और भारत के बीच आतंकवाद के ख़िलाफ़ अंतराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग समेत कई अलग -अलग मसलों पर सहमति बनी।