(Global मुद्दे) भारत - पाक रिश्ते (India-Pak Relations)



(Global मुद्दे) भारत - पाक रिश्ते (India-Pak Relations)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): विवेक काटजू (पूर्व राजदूत), संजय कपूर (वरिष्ठ पत्रकार)

चर्चा में क्यूं ?

बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर एक एक विवादास्पद बयान दिया है। राष्ट्रपति ट्रम्प के मुताबिक़ अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच मौजूद कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस बयान के पीछे तर्क देते हुए कहा है कि जापान के ओसाका में हुई G - 20 शिखर बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मामले को सुलझाने में उनकी मदद मांगी थी। हालाँकि ट्रम्प के इस बयान का भारत ने तुरंत खंडन किया है।

ट्रम्प के बयान पर भारत की प्रतिक्रिया

इस मामले पर संसद में बयान देते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि - मैं सदन को स्पष्ट रूप से आश्वस्त करना चाहूंगा कि प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि शिमला समझौता और लाहौर घोषणा भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से हल करने का आधार प्रदान करता है। ग़ौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ये बातें अमेरिका गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इ दौरे के दौरान कही है।

पाकिस्तान का अमेरिका दौरा

बीते दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अमेरिका दौरे पर थे। तीन दिन के अमेरिका दौर से लौटे इमरान ख़ान अपनी इस यात्रा को बेहद सफल मान रहे हैं। हाँलाकि आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान की अमेरिका ने कोई मदद नहीं की है। पाकिस्तान के इस दौरे के दौरान अमेरिका का पूरा ध्यान अफ़ग़ानिस्तान में शांति वार्ता को लेकर केंद्रित रहा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़ पाकिस्तान पहले अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली को लेकर ज़रूरी कदम उठाए फिर कही जा कर पाकिस्तान के साथ व्यापारिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकेगा।

भारत - पाकिस्तान के बीच मुख्य विवाद

1. भारत - पाकिस्तान कश्मीर मुद्दा

24 अक्टूबर 1947 को कबालियों के जम्मू कश्मीर पर आक्रमण के बाद से ही कश्मीर मुद्दा भारत पाकिस्तान के बीच बना हुआ है। इस हमले के बाद जम्मू कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने जम्मू कश्मीर को भारत में विलय कराने का फैसला किया जिसके बाद भारत और पकिस्तान के बीच आमने - सामने से युद्ध शुरू हो गया। भारत इस मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र गया जहां संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करते हुए युद्ध विराम का ऐलान किया लेकिन पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू कश्मीर भूभाग पर भारत को नियंत्रण नहीं मिल सका। इस युद्ध के बाद से ही एक ओर जहां भारत पाकिस्तान अधिकृत को अपना अभिन्न अंग बताते हुए वापस लौटाने की बात कहता है तो वहीं पाकिस्तान की मंशा ये है कि वो बाकी के कश्मीर पर भी अपना कब्ज़ा कर ले ।

कश्मीर में चरमपंथी उभार - कश्मीर घाटी में चरमपंथी उभार 1989 से दिख रहा है। कुछ इस्लामिक चरमपंथी गुटों ने कश्मीर को भारत से आज़ाद करने और पाकिस्तान में शमिल किए जाने के लिए विरोध शुरू किया। उस दौर से शुरू ये विद्रोह आज भी रह - रह कर घाटी में देखने को मिलता रहता है। हालाँकि ये पूरी दुनिया को मालूम है कि कश्मीर में आज़ादी की मांग करने वाले इन इस्लामिक चरमपंथी गुटों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है जो उन्हें पैसे और हथियार दोनों मुहैया कराता रहा है।

2. भारत पाकिस्तान सीमा विवाद

भारत और पकिस्तान की सीमाएं कुल 4 राज्यों से होकर गुज़रतीं हैं जिनमें पंजाब, गुजरात, और राजस्थान के साथ ही जम्मू कश्मीर राज्य भी शामिल है। पाकिस्तान के साथ गुजरात राज्य की सीमा पर स्थित सर क्रीक सीमा रेखा को लेकर विवाद रहा है। सर क्रीक सीमा रेखा न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का एक बहुत अहम् हिस्सा है बल्कि ये गुजरात राज्य की सुरक्षा के संदर्भ में भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।

ग़ौरतलब है कि सर क्रीक सीमा रेखा विवाद कच्छ और सिंध के बीच समुद्री सीमा रेखा की अस्पष्टता के कारण है। आज़ादी से पहले, ये क्षेत्र ब्रिटिश भारत के बॉम्बे प्रेसीडेंसी का भाग था। 1947 में भारत की आज़ादी के बाद सिंध पाकिस्तान का हिस्सा बन गया, जबकि कच्छ भारत का ही हिस्सा रहा। ये क्षेत्र सामरिक लिहाज़ से बेहद महत्त्व है। ये क्षेत्र एशिया के सबसे बड़े मछली पकड़ने वाले क्षेत्रों में से भी एक है जिसके कारण ये मछुआरों के लिए भी बहुत महत्त्वपूर्ण है। साथ ही इस क्षेत्र के समुद्र के नीचे तेल और गैस के विशाल भंडार मौजूद होने के कारण भी इस क्षेत्र का अपना अलग महत्त्व है।

3. भारत पाकिस्तान जल विवाद

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से तंग आकर भारत ने बीते दिनों सिंधु नदी जल समझौते के तहत भारत के हिस्से में आने वाली नदियों का पानी पाकिस्तान को नहीं देने की बात कही है। सिंधु नदी जल समझौते के मुताबिक़ भारत में पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के पानी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत इनका क़रीब 20 प्रतिशत अपने इस्तेमाल में ले सकता है। सिंधु नदी जल समझौते के तहत भारत को पश्चिमी नदियों से 36 लाख एकड़ फीट पानी स्टोर करने का अधिकार है। पश्चिमी नदियों के पानी से भारत 7 लाख एकड़ क्षेत्र में लगी फसलों की सिंचाई कर सकता है। इसके अलावा भारत इन नदियों पर जलविद्युत परियोजनाएँ भी बना सकता है, हालाँकि भारत उस को रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट के रूप में ही इस्तेमाल करना होगा।

जानकारों का कहना है कि भारत का ये फैसला उन छोटी-बड़ी पहलों का एक हिस्सा है, जो भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ उठा रहा है। विशेषज्ञ इसे पानी की सर्जिकल स्ट्राइक कह रहे हैं। ग़ौरतलब है कि इन तीनों नदियों पर डैम बनाने के बाद पानी पंजाब और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिये इस्तेमाल किया जाएगा।

भारत - पाकिस्तान सम्बन्ध

ब्रिटिश हुक़ूमत से आज़ादी मिलने के बाद पाकिस्तान भारत से 'द्विराष्ट्र सिद्धांत' पर अलग हुआ था। भारत पाकिसान के साथ भाषाई, सांस्कृतिक, भौगोलिक, आर्थिक और जातीय सम्बन्ध साझा करता है लेकिन पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते आपसी मतभेद, शत्रुता और संदेह के कारण पिछले 72 सालों से बेहतर नहीं हो पाए हैं। आज़ादी के बाद से अब तक भारत - पाकिस्तान के बीच चार युद्ध हो चुके हैं। रिश्तों को सुधारने के लिए दोनों देशों के बीच शिमला समझौता और लाहौर घोषणा पत्र जैसे कदम उठाए गए हैं लेकिन शुरू से ही नापाक हरकते करने वाले पाकिस्तान के लिए अब इसके कोई मायने नहीं रह गए हैं।

इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन

26 अक्टूबर 1947 को जम्मू - कश्मीर का विलय भारत में हो गया था। भारत में कश्मीर के विलय को लेकर महाराजा हरी सिंह ने 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन' पर हस्ताक्षर किए थे। इस दौरान इस बात पर भी सहमति जताई गई कि स्थिति सामान्य होने पर जम्मू-कश्मीर की नियति का फैसला जनमत सर्वेक्षण के द्वारा होगा। बाद में मार्च 1948 में शेख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर राज्य के प्रधानमंत्री बने जिसके बाद भारत, जम्मू एवं कश्मीर की स्वायत्तता को बनाए रखने पर सहमत हो गया। जम्मू - कश्मीर को लेकर संविधान में धारा 370 का प्रावधान करके संवैधानिक दर्जा दिया गया।

नेहरू - लियाक़त समझौता 1950

प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाक़त अली खान के बीच 8 अप्रैल 1950 दिल्ली में एक समझौता हुआ था। इस समझौते का मक़सद दोनों देशों के बीच शरणार्थी, संपत्ति, अल्पसंख्यकों के अधिकार और भविष्य में युद्ध की संभावनाए न हो जैसे मुद्दों पर समझौता था।

सिंधु - नदी जल संधि 1960

आज़ादी मिलने के बाद कई अन्य मुद्दों की तरह भारत - पाकिस्तान के बीच पानी के मुद्दे को लेकर भी विवाद शुरू हो गया था। भारत से पकिस्तान जाने वाले इन छः नदियां - झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज को लेकर विवाद चल रहा था। सालों चली बातचीत के बाद 19 सितंबर, 1960 को विश्व बैंक की सहायता से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु - नदी जल संधि समझौता हुआ।

समझौते के मुताबिक़ 3 पूर्वी नदियों (रावी, ब्यास और सतलज) के पानी पर भारत को पूरा हक दिया गया। जबकि बाकी 3 पश्चिमी नदियों (झेलम, चिनाब, सिंधु) के पानी के पाकिस्तान को देना तय हुआ था। ग़ौरतलब है कि सिंधु - नदी जल समझौता 12 जनवरी 1961 से लागू हुआ था। इस संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने रावलिपिंडी में दस्तख़त किये थे। इसके अलावा इन दानियों का एक बहुत छोटा हिस्सा चीन और अफगानिस्तान को भी मिला हुआ है। सिंधु - नदी जल संधि पर पाकिस्तान की आपत्ति ये है कि भारत, पाकिस्तान के हिस्से के पानी का प्रयोग कर रहा है। जबकि भारत का कहना है कि ग्लेशियर और बरसात के कम होने के कारण सिंधु नदी में पानी कम हो रहा है , इसके अलावा पाकिस्तान इस मुद्दे को ढ़ाल बना कर सीमापार आतंकवाद से ध्यान भटकाना चाहता है।

ताशकंद समझौता 1966

ताशकंद समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 10 जनवरी 1966 को हुआ एक शांति समझौता था। ये समझौता 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध के बाद हुआ था। ताशकंद समझौते के अनुसार ये तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे और अपने विवादों का शान्तिपूर्ण तरीके से निपटारा करेंगे। ये समझौता भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब खान के बीच हुआ था।

शिमला समझौता 1972

1971 में हुए भारत - पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला समझौता हुआ था। ये समझौता 2 जुलाई 1972 को शिमला समझौता हुआ था। दरअसल 1971 के भारत - पाकिस्तान युद्ध के दौरान क़रीब 90 हज़ार सैनिकों को भारत ने बंदी बनाया था और पाकिस्तान के लम्बे भूभाग पर भारत ने कब्ज़ा भी कर लिया था। इस सब के परिणामस्वरूप तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फ़िकार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता हुआ था।

शिमला समझौता के मुख्य बातें:

  • शिमला समझौते के मुताबिक़ दोनों देशों के सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुरूप चलेंगे।
  • दोनों देशों के बीच होने वाले सभी मतभेदों और आपसी विवाद को द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए हल किया जायेगा।
  • यदि दोनों देशों के बीच कोई मुद्दा लबित रह जाता है तो कोई देश उस मुद्दे को लेकर स्थिति में बदलाव करने की एकतरफा कोशिश नहीं करेगा।
  • दोनों देश किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे जो शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा हो।
  • समानता और आपसी लाभ के आधार पर शांति पूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखेंगे।
  • एक दूसरे की राष्ट्रीय एकता, राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता व सम्प्रभुता का सम्मान करेंगे
  • समानता और आपसी लाभ के आधार पर एक दूसरे के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे
  • 25 सालों से दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाले कारकों को शांति पूर्ण ढंग से हल किया जायेगा
  • शिमला समझौते के तहत संचार, सीमाएं खोलने, अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को बहाल करने दोनों देशों के नागरिकों की यात्रा सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही गई
  • आर्थिक और दूसरे सहमति वाले क्षेत्रों में व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देना का भी ज़िक्र किया गया
  • विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना
  • भारत और पाकिस्तान की सेनाओं को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर वापस बुलाने का ऐलान
  • युद्धबंदी के भारत भी नियंत्रण रेखा का सम्मान करना और नियंत्रण रेखा को बदलने की एकतरफा कोशिश न करने जैसे फैसले शिमला समझौते के तहत हुए थे।

हालाँकि युद्धबंदियों को भारत द्वारा वापस लौटाने और अपनी ज़मीन को वापस पाने के बाद पाकिस्तान ने इस समझौते का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।

नॉन-न्यूक्लियर एग्रीमेंट 1988

ये समझौता भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बीच 21 दिसंबर, 1988 को समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों में कटौती और किसी दूसरे देश के ज़रिए परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला न करने का वचन दिया गया है।

जम्मू और कश्मीर पर संसद का प्रस्ताव 1994

22 फरवरी,1994 को संसद के दोनों सदनों ने पारित एक प्रस्ताव के तहत पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग माना गया। प्रस्ताव में कहा गया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा। भारत अपने इस भाग को ख़ुद में विलय कराने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। इसके अलावा इस प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र किया गया कि भारत में पर्याप्त क्षमता और संकल्प है कि वो पाकिस्तान के नापाक इरादों का मुंहतोड़ जवाब दे जो देश की एकता, क्षेत्रीय अंखडता और सुरक्षा के ख़िलाफ़ हो। 1994 में पारित इस प्रस्ताव में भारत ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के उन इलाकों को खाली करने की बात कही जिस पर उसने कब्जा किया है।

सदन का मानना था कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पाकिस्तान की तरफ से आतंकियों को हथियार और धन की सप्लाई के साथ-साथ आतंकियों को भारत में घुसपैठ करने में मदद दी जा रही है।

लाहौर घोषणा पत्र 1999

शिमला समझौते के बाद भारत ने एक बार फिर लाहौर घोषणा पत्र के ज़रिए दोनों देशों को बेहतर बनाने के प्रयास किया। 21 फरवरी 1999 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के बीच लाहौर में एक घोषणा पत्र पर दस्तख़त हुआ। लाहौर घोषणा पत्र में पहले के सभी मुद्दों को भूलकर दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने की पेशकश भारत की ओर से की गई। इसके अलावा नई दिल्ली से लाहौर तक हफ़्ते में दो बार बस सेवा सदा -ए - सरहद की शुरुआत की।

लाहौर घोषणा पत्र 1999 के मुख्य बातें:

  • नियमित अंतराल पर दोनों देशों के विदेश मंत्री बैठक करेंगे और आपसी हितों के मुद्दे पर चर्चा करेंगे
  • विश्व - व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विचार - विमर्श की सहमति
  • वीज़ा नियमों को आसान बनाना, युद्धबंदियों या असैनिक बंदियों की जाँच के लिए मंत्रीस्तर पर दो सदस्यीय समिति का गठन
  • सुरक्षा धारणाओं और परमाणु सिद्धांतों पर विचार विमर्श करेंगे
  • मिसाइल उड्डयन परीक्षणों की पूर्व सूचना देना
  • परमाणु ख़तरों को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर क़दम उठाएँग
  • पहले न्यूक्लियर टेस्ट न करने के वादे का पालन करेंगे
  • UN चार्टर के सिद्धांतों और लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता निभाएंगे
  • आपसी विश्वास के लिए समय समय पर विचार - विमर्श
  • सुरक्षा, नि:शस्त्रीकरण और परमाणु अप्रसार के मुद्दे पर द्विपक्षीय वार्ता
  • लाहौर घोषणा पत्र को एक दूसरे की संसद में मज़ूर किया गया

इस घोषणा के तीन बाद ही पकिस्तान ने कारगिल युद्ध छेद दिया।

भारत पाकिस्तान के आर्थिक सम्बन्ध

भारत - पाकिस्तान ट्रेड आर्गेनाईजेशन के मुताबिक़ 2018 - 19 में भारत पाकिस्तान के बीच कुल 2.05 बिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापर था। मौजूदा समय में भारत पकिस्तान को सब्जियाँ, कपास, प्लास्टिक और लोहा व इस्पात जैसे सामानों का निर्यात करता है जबकि भारत पकिस्तान से मसाले, फल, और सीमेंट जैस सामानों को खरीदता है।

भारत ने पाकिस्तान से वापस लिया MFN दर्ज़ा

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते भारत ने इस साल पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन के भी दर्ज़ा वापस ले लिया। ग़ौरतलब है कि मोस्ट फेवर्ड नेशन दर्जा किसी देश के साथ द्विपक्षीय कारोबार को बढ़ावा दिए जाने के लिए दिया जाता है। MFN दर्जे के ज़रिये ही किन्हीं भी 2 देशों के बीच में साझा व्यापार की नींव तैयार होती है। MFN दर्जे के ज़रिए इसमें आयातित सामानों पर लगने वाले सीमा शुल्कों तथा अन्य दूसरे टैक्सों में सहूलियत दी जाती है। इसके अलावा MFN घरेलू प्रशासन के लिए भी फायदेमंद होता है। इसके ज़रिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों को और आसान बनाया जाता है साथ ही उनमें और अधिक पारदर्शिता लाई जाती है।

आतंकवाद के चलते FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ पाकिस्तान

आतंकवाद को पनाह देने के चलते अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट की सूची में रखा है। FATF के मुताबिक़ पाकिस्तान जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों की फंडिंग रोकने में नाकाम रहा है। FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अक्तूबर, 2019 तक पाकिस्तान उसकी 27 मांगों पर काम नहीं करता है तो उसे ‘ग्रे’ से ‘ब्लैक’ लिस्ट में डाल दिया जाएगा।

परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में चीन कर रहा है पाकिस्तान की मदद

भारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के निषेध से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि भारत और पाकिस्तान, दोनों के ही पास परमाणु संपन्न हथियार हैं लेकिन उनके परमाणु सिद्धांत परस्पर विरोधी हैं। भारत एक ओर जहां ‘परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल नहीं करना’की नीति का पालन करता है, तो वहीं पाकिस्तान की ऐसी कोई मंशा ज़ाहिर नहीं होती है। इसके अलावा मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों में चीन और पाकिस्तान की मदद कर रहा है।

पाकिस्तान की वजह से ठप है सार्क संगठन

कई प्रमुख क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं में मुश्किलें पैदा करके पाकिस्तान ने सार्क को निष्क्रिय बना दिया है। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण, भारत समेत बांग्लादेश, अफगानिस्तान और नेपाल जैसे देश सार्क शिखर सम्मेलन से पीछे हट गए है। सार्क शिखर सम्मेलनों का न होना भी भारत - पाकिस्तान के बीच की खाई को और बढ़ा रहा है।

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर कैसे लगे लगाम ?

दरअसल भारत और पाकिस्तान के बीच 3,323 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। जानकारों का कहना है कि सीमा सुरक्षा को और मज़बूत और आधुनिक बनाए जाने की ज़रूरत है। इसके अलावा समयबद्ध तरीके से व्यापक एकीकृत सीमा प्रबंधन प्रणाली को भी तैयार किया जाना ज़रूरी है। साथ ही भारतीय तट रक्षक और दूसरी एजेंसियों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय स्थापित करके तटीय सुरक्षा और चौकसी को मजबूत किया जाना चाहिए जिनमें भारतीय नौसेना, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, कस्टम और बंदरगाह शामिल हैं।

Print Friendly and PDF




Get Daily Dhyeya IAS Updates via Email.

 

After Subscription Check Your Email To Activate Confirmation Link