(Global मुद्दे) भारत - बांग्लादेश : रिश्तों की नई इबारत (India-Bangladesh : New Era of Relations)



(Global मुद्दे) भारत - बांग्लादेश : रिश्तों की नई इबारत (India-Bangladesh : New Era of Relations)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): शिवशंकर मुखर्जी (पूर्व राजदूत), प्रो. एस. डी. मुनि, (कूटनीतिक मामलों के जानकार)

चर्चा में क्यों?

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना 3-6 अक्टूबर तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहीं । पहले बांग्लादेश और फिर भारत में चुनाव पूरा होने के बाद बांग्लादेश के प्रधानमंत्री की ये पहली भारत यात्रा थी । उनके इस दौरे के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच 5 अक्टूबर को द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस मौके पर दोनों देशों के बीच तीन द्विपक्षीय परियोजनाओं समेत कुल 7 समझौते हुए हैं। दोनों देशों के बीच जल संसाधन, शिक्षा, तटीय निगरानी और युवा मामलों समेत संस्‍कृति क्षेत्र में समझौतों और ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि – ‘मुझे खुशी है कि आज मुझे भारत और बांग्लादेश के बीच 3 और द्विपक्षीय परियोजनाओं के उद्घाटन का मौका मिला। एक साल में हमने 12 जॉइंट प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन किया है। ये तीनों द्विपक्षीय परियोजनाएं एलपीजी इंपोर्ट, वोकेशनल ट्रेनिंग और सोशल फैसिलटी को बढ़ाने के रूप में हुई हैं जिनका मकसद दोनों देशों के नागरिकों का जीवन बेहतर बनाना है।

इसके अलावा बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी कहा कि इस मुलाक़ात से भारत और बांग्लादेश के सहयोग को मज़बूती मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा।

द्विपक्षीय बैठक में लिए गए निर्णय:

भारत को क्या मिला?

  • पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए बांग्लादेश से LPG की आपूर्ति
  • बांग्लादेश की फेनी नदी से त्रिपुरा को जलापूर्ति (फेनी नदी से त्रिपुरा के सबरूम कस्बे के लिए होगा 1.82 क्यूसेक पेयजल की आपूर्ति)
  • पाक को अलग थलग करने के लिए सार्क की जगह बिम्सटेक को बढ़ावा
  • बांग्लादेश की तटीय सुरक्षा की जिम्मेदारी यानी बंगाल की खाड़ी में चीन पर नजर

बांग्लादेश को क्या मिला?

  • घरेलू गैस भंडार के लिए भारत का तेजी से बढ़ता बड़ा बाजार
  • ईलाज व शिक्षा के लिए बांग्लादेशी नागरिकों को असानी से आने जाने की सुविधा
  • पोर्ट का इस्तेमाल बढ़ने से भारत से अतिरिक्त राजस्व
  • उत्पादों के लिए भारत का बड़ा बाजार, विशेष आर्थिक समझौते के आसार
  • जल्द से जल्द तीस्ता जल बंटवारे को लागू करने का आश्वासन

NRC का मुद्दा

  • द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच NRC का मुद्दा उठा। हालाँकि उनकी इस चिंता पर उन्हें बताया गया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से क़ानूनी है और अदालत के निर्देश के तहत हो रही है।

तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा

  • द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर भारत ने जल्द से जल्द सहमति बनाने भरोसा जताया है।

रोहिंग्याई समस्या

  • भारत ने बांग्लादेश को रोहिंग्याई समस्या से निबटने में भी पूरी मदद देने का ऐलान किया गया है।

भारत-बांग्लादेश संबंधो का इतिहास:

भारत-बांग्लादेश का साझा इतिहास, स्वाधीनता संघर्ष की साझी विरासत, और भाषा संस्कृति दोनों देशों को आपस में बहुत क़रीब से जोड़ने का काम करती हैं। 1971 में भारत ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत बांग्लादेश के ‘सदाबहार मित्र’ के रूप में उभरा है क्योंकि भारत का क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव बढ़ रहा है, जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा बांग्लादेश भी दशकों की मेहनत और आर्थिक सुधारों के बाद बांग्लादेश ने खुद को एक विकासशील देशों की श्रेणी में लाया है। बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति के कारण चीन और अमेरिका दोनों ही देश यहां अपने पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।

राजनयिक संबंध

भारत ही वो पहला देश था, जिसने सबसे पहले बांग्लादेश के साथ 1971 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। इसके अलावा ये भारत के ही प्रयास थे जिसके ज़रिए बांग्लादेश को 1974 में संयुक्त राष्ट्र संघ की सदस्यता प्राप्त हुई। बांग्लादेश के आजादी के बाद से ही नियमित राजनयिक यात्रओं से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध मधुर रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 1-10 अप्रैल 2017 को भारत की आधिकारिक यात्रा संपन्न की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 36 द्विपक्षीय दस्तावेजों पर समझौता किया गया जिसमें मुख्य रूप से असैन्य परमाणु ऊर्जा, उच्च तकनीकी, अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी, रक्षा, क्षमता निर्माण आदि शामिल हैं। इसके अलावा 4-5 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की तीसरी लाइन ऑफ क्रेडिट को भी मंजूरी दी गई थी।

इससे पहले प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 16-17 अक्टूबर, 2016 को "ब्रिक्स-बिम्सटेक आउटरीच सम्मेलन" में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा पर आयी थी। इसके अलावा भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने भी 6 और 7 जून, 2015 को बांग्लादेश का राजकीय दौरा किया था। इस यात्र के दौरान 22 द्विपक्षीय दस्तावेजों पर निर्णय लिए गए थे जिसमें भारत-बांग्लादेश भूमि सीमा करार (LBA ) भी शामिल है।

रक्षा संबंध

भारत - बांग्लादेश के बीच क़रीब 4000 किमी. से अधिक लम्बी सीमा रेखा है। इसमें पश्चिम बंगाल में 2216 किमी., मिजोरम में 318 कि.मी. और असम में 262 कि.मी. की सीमा रेखाएं शामिल हैं। सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच अद्वितीय संबंध हैं। सर्वोच्च स्तर पर बांग्लादेश के नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि भारत को नुकसान पहुँचाने के लिए किसी को भी बांग्लादेश के भू-भाग का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुरक्षा सहयोग के लिए अपेक्षित सभी करारों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 2011 में समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP) पर भी दोनों देशों की सहमति है। समन्वित सीमा प्रबंधन योजना का उद्देश्य सीमा पार से गैर-कानूनी गतिविधियों और अपराधों नियंत्रण के लिए दोनों देशों के सीमा रक्षा बलों के कार्यों में तालमेल स्थापित करना है। इसके अलावा भारत-बांग्लादेश के बीच नियमित रूप से सैन्य अभ्यास आयोजित किये जाते हैं।

आर्थिक संबंध

भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हुई है। 2016-17 (जुलाई से मार्च) में भारत द्वारा बांग्लादेश को किए गए निर्यात का मूल्य 4489-30 मिलियन अमेरिकी डॉलर था और इस दौरान बांग्लादेश से आयात का मूल्य 672-40 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। वित्त वर्ष 2016-17 से पिछले पाँच वर्षों में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। साफ्टा (SAFTA) , साप्टा (SAPTA) और आप्टा (APTA ) के तहत बांग्लादेश को ड्यूटी में पर्याप्त रियायत प्रदान की गई है। इसके अलावा अन्य बातों के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने के उद्देश्य से 25 मदों को छोड़कर सभी टैरिफ लाइनों को 2011 से नकारात्मक सूची से हटा दिया गया है। पिछले 7 वर्षों में भारत ने बांग्लादेश को 3 लाइन्स ऑफ क्रेडिट (8 बिलियन अमेरिकी डॉलर ) की घोषणा की है।

जून 2015 में बांग्लादेश की यात्र के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर की एक नई ऋण सहायता की घोषणा की। नई ऋण सहायता के तहत सड़क, रेलवे, विद्युत, जहाजरानी, एसईजेड (SEZ ), स्वास्थ्य और चिकित्सा देखरेख तथा तकनीकी शिक्षा के क्षेत्रें में परियोजनाएँ शामिल होंगी।

कनेक्टिविटी

भारत-बांग्लादेश सीमा पर 36 से अधिक लैंड कस्टम स्टेशन (LCS ) हैं जिनके माध्यम से सड़क मार्ग से माल की आवाजाही होती है। अंतर्देशीय जल व्यापार पर प्रोटोकॉल (PIWTT) 1972 से ही लागू है। क्रियाशील है। यह 8 विशिष्ट मार्गों पर बांग्लादेश की नदी प्रणाली के माध्यम से माल की आवाजाही की अनुमति प्रदान करता है। दोनों देशों के बीच तटीय जल मार्गों के माध्यम से कनेक्टिविटी भी स्थापित की गयी है, जिसे तटीय जहाजरानी करार पर हस्ताक्षर के माध्यम से संभव बनाया गया है। ढाका-कोलकाता, ढाका-अगरतला तथा ढाका-सिलांग-गुवाहाटी के बीच बस सेवाएँ भी शुरू की गई हैं। खुलना-कोलकाता बस सेवा भी शुरू होने के लिए तैयारी के अंतिम चरण में है। कोलकाता और ढाका के बीच एक नियमित यात्री ट्रेन सेवा ‘मैत्री एक्सप्रेस’ शुरू की गयी है जो अब सप्ताह में 4 दिन चलती है। दोनों देशों की राष्ट्रीय एयरलाइंस तथा कुछ निजी एयरलाइंस ढाका, चटगाँव, नई दिल्ली, कोलकाता एवं मुंबई के बीच अपनी सेवाएँ प्रदान करती हैं।

नोट - बांग्लादेश की भौगोलिक दृस्टि से ये भारत के लिए सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश भारत और चीन के लगभग बीच में है इसलिए बांग्लादेश सामरिक लिहाज से भी है भारत के ज़रूरी है। एक्ट ईस्ट एशिया पालिसी का भी बहुत ज़रूरी पार्ट है बांग्लादेश। एक अनुमान के मुताबिक बांग्लादेश में कुल क़रीब 10000 भारतीय समुदाय के लोग रह रहें हैं।

भारत - बांग्लादेश के बीच विवादित मुद्दे

सीमा विवाद

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ भारत बांग्लादेश के साथ 4351 कि.मी. तक फैली भूमि सीमा को साझा करता है। ये ज़मीनी इलाके पश्चिम बंगाल असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्य से जुड़े हैं। पोरस बार्डर को अक्सर भारत से बांग्लादेश तक खाद्य वस्तुओं, मवेशी, औषधियों और दवाइयों की तस्करी के लिए एक मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता है। बांग्लादेश से हजारों अवैध आप्रवासियों ने पिछले कुछ वर्षों में रोजगार की तलाश और अपने जीवन में सुधार के लिए भारत की सीमा में आए हैं। अवैध प्रवासियों और भारतीय सैनिकों के बीच हुई हिंसा का सामना करने के लिए भारतीय सीमा गश्ती पुलिस द्वारा देखते ही गोली मारने की विवादित नीति लागू की गई है।

शरणार्थी समस्या

भारत और बांग्लादेश के बीच घुसपैठ सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। 1971 के पश्चिमी पकिस्तान द्वारा पूर्वी पकिस्तान पर ढाए सितम के दौरान क़रीब दस लाख से ज़्यादा बांग्लादेशी शरणार्थियों ने भारत में शरण ली थी। मौजूदा सरकार ने असम में अवैध प्रवासियों की समस्या को देखते हुए NRC की अंतिम लिस्ट जारी कर दी है। NRC की अंतिम लिस्ट से क़रीब 19 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया है। बांग्लादेश को डर है कि उसके पास और शरणार्थियों को रखने की क्षमता नहीं है ऐसे में अगर भारत एनआरसी सूची से बाहर हुए लोगों को बांग्लादेश भेजा जाता है तो रोहिंग्या शरणार्थियों से जूझ रहे बांग्लादेश के लिए ये भी बड़ी चुनौती होगी। इसके आलावा बांग्लादेश के ही ज़रिए तमाम रोहिंग्या शरणार्थी भारत पहुँचे हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक़, भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या रहते हैं। भारत सरकार ने रोहिंग्या को अवैध प्रवासियों और एक सुरक्षा खतरे के रूप में वर्गीकृत किया है। साथ ही भारत सरकार ने म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस लेने की अपील भी की है। इसके अलावा भारत और बांग्लादेश की सीमा पर कंटीले तारों को लगाने का काम जारी है।

जल-विवाद

भारत और बांग्लादेश के बीच कुल क़रीब 50 से अधिक नदियां बहती हैं। हालाँकि 1996 गंगा समझौते के बाद दोनों में पानी के बंटवारे को लेकर कोई समझौता नहीं हो पाया है।

तीस्ता नदी जल विवाद - जल-विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ी दुविधा तीस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदी के बाद तीस्ता भारत व बांग्लादेश से होकर बहने वाली चौथी सबसे बड़ी नदी है। सिक्किम की पहाड़ियों से निकल कर ये नदी भारत में लगभग तीन सौ किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद बांग्लादेश में पहुँचती है। बांग्लादेश का करीब 14 फीसदी इलाका सिंचाई के लिए तीस्ता नदी के पानी पर निर्भर है और बांग्लादेश की 7.3 फीसदी आबादी को इस नदी के माध्यम से प्रत्यक्ष रोज़गार मिलता है।

2011 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ढाका दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इस मसले को लेकर एक नए फार्मूले पर सहमति भी बनी थी। लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) के विरोध के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं किया जा सका था। हालाँकि इस दौरे के दौरान पधानमंत्री मोदी ने जल्द ही इस मसले पर सहमति बनाने की बात कही है।

बांग्लादेश में चीन का बढ़ता वर्चस्व

बांग्लादेश चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना BRI का साझेदार देश है। BRI के तहत चीन बांग्लादेश में बंदरगाह का निर्माण कर रहा है। इसके अलावा चीन द्वारा बांग्लादेश को पनडुब्बी की आपूर्ति का मामला भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है।

आतंकवाद और भारत - बांग्लादेश

आतंकवाद पर दोनों ही देशों का रुख एक समान है और दक्षिण एशिया के विकास में दोनों ही देश अहम् भूमिका निभा सकते हैं। आतंकवाद को पनाह देने वाले देश से दोनों ही देशों ने बराबर दूरी बना रखी है, उरी आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान को वैश्विक तौर पर अलग-थलग करने के भारत के प्रयासों के मद्देनज़र बांग्लादेश ने भी इस्लामाबाद में होने वाले सार्क सम्मेलन में भाग लेने से मना कर दिया था।

अनुच्छेद 370 पर बांग्लादेश का क्या रहा था रुख़

  • जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर बांग्लादेश ने इसे भारत का अंदरूनी मामला बताया था।

OIC में बांग्लादेश द्वारा भारत को समर्थन

  • बीते दिनों ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन ओआईसी में बांग्लादेश ने भारत को पर्यवेक्षक राष्ट्र का दर्ज़ा दी जाने की बात कही थी।

भारत - बांग्लादेश किन समूहों में हैं एक साथ

  • IORA - Indian-Ocean Rim Association
  • SAARC - South Asian Association for Regional Cooperation
  • BIMSTEC - Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation और कॉमन वेल्थ नेशंस ।

रोहिंग्या संकट समाधान के लिये बांग्लादेश ने रखे चार-सूत्रीय प्रस्‍ताव

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा के 74वें सत्र में बांग्लादेश ने रोहिंग्या संकट के समाधान के लिये संयुक्‍त राष्‍ट्र के समक्ष चार सूत्रीय प्रस्‍ताव रखा। बांग्लादेश के मुताबिक़ रोहिंग्या संकट क्षेत्रीय ख़तरा बनता जा रहा है। बांग्लादेश के मुताबिक़ कि इस समस्या से निपटने के लिये अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय का हस्‍तक्षेप ज़रूरी है।

रोहिंग्या संकट समाधान के चार प्रस्ताव क्या हैं?

  1. बांग्लादेश के मुताबिक़ म्‍याँमार को, रोहिंग्या लोगों की म्‍याँमार में सुरक्षित वापसी और उन्‍हें दोबारा से मुख्‍यधारा में शामिल करने की स्‍पष्‍ट राजनीतिक इच्‍छा दिखानी चाहिये।
  2. बंगलादेश का मानना है कि म्‍याँमार को भेदभावपूर्ण कानून और रीति-रिवाज़ छोड़ देने चाहिये और रोहिंग्या प्रतिनिधियों को उत्‍तरी रखाइन प्रांत जाकर वास्तविक हालात देखने की अनुमति देनी चाहिये।
  3. म्याँमार को अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यवेक्षकों की देखरेख में रखाइन प्रांत में रोहिंग्या लोगों की सुरक्षा की गारंटी देनी चाहिये।
  4. बांग्लादेश ने आख़िरी प्रस्ताव के तहत अंतर्राष्‍ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि रोहिंग्या लोगों के मानवाधिकारों के उल्‍लंघन और उन पर किये जा रहे अत्‍याचारों की जवाबदेही तय की जाए।

बांग्लादेश मानता है कि इस संकट का एकमात्र हल यही है कि रोहिंग्या लोगों की रखाइन प्रांत में सुरक्षित और सम्‍मान के साथ वापसी हो। बांग्लादेश इसके लिये म्‍याँमार से लगातार संपर्क में बना रहेगा। गौरतलब है कि महासभा के 74वें सत्र में शेख हसीना ने प्रस्‍ताव रखा था कि कोफी अन्नान आयोग (पूर्व महासचिव, संयुक्त राष्ट्र) आयोग की सिफारिशें पूरी तरह लागू की जाए और म्‍याँमार के रखाइन प्रांत को सुरक्षित क्षेत्र बनाया जाए।

दक्षिण एशिया में भारत को चुनौती दे रहा है बांग्लादेश

विशेषज्ञ बांग्लादेश को दक्षिण एशिया का नया टाइगर कह रहे हैं। दरअसल बांग्लादेश की वृद्धि दर लगभग आठ फ़ीसदी है जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर पाँच फ़ीसदी के आसपास पहुंच गई है। साल 2009 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने डिज़िटल बांग्लादेश प्रोग्राम की शुरुआत की थी। इसके कार्यक्रम के तहत सरकारी सेवाओं को डिज़िटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया साथ ही इन्फ़ार्मेशन टेक्नॉलजी इंडस्ट्री का भी इससे विस्तार हुआ।

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है। 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। बांग्लादेश का लक्ष्य 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए।

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

IMF के एक आकलन के मुताबिक बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मौजूदा वक़्त में 180 अरब डॉलर की है और ये 2021 तक बढ़कर 322 अरब डॉलर की हो जाएगी। इन सब के अलावा बांग्लादेश ने अपनी आबादी को भी नियंत्रित किया है जिसे पाकिस्तान और भारत जैसे देश नहीं कर पाए हैं। एशिया डिवेलपमेंट बैंक के मुताबिक़ बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत की बादशाहत को चुनौती दे रहा है।

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