(Global मुद्दे) कोरोना की दहशत (Corona Virus Scare in the World)



(Global मुद्दे) कोरोना की दहशत (Corona Virus Scare in the World)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): आर. के. श्रीवास्तव (पूर्व महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं), डॉ. मोहसिन वली (जाने माने फिज़ीशियन)


पूरी दुनिया में कोरोना वायरस ने अपनी दहशत फैला रखी है अमेरिका यूरोप पश्चिमी एशिया , दक्षिण पूर्व एशिया दक्षिण एशिया के छोटे बड़े सभी देशों में कोरोना ने अपनी मौजूदगी दर्ज़ करा रखी है । सभी देशों ने कोरोना से बचाव के लिए दिशा निर्देश जारी कर रखे हैं इसके अलावा सभी देशों के वैज्ञानिकों ने इसके इलाज़ पर भी काम करना शुरू कर दिया है । समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार चीन ने बुधवार को 15 नए मामलों की जानकारी दी। इससे यहां अभी तक 80,793 लोग संक्रमित हो गए हैं। वहीं 11 और लोगों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या 3,169 हो गई है। 11 में 10 मौतें हुबेई में हुई हैं। पूरी दुनिया में फैला ये कोरोना वायरस चीन के हुबेई प्रांत से शुरु हुआ था।

चीन के बाद कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले इटली में पाए गए हैं । यहां अभी तक तक 827 मरीजों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 12 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए हैं। चीन के वुहान शहर से फैले इस वायरस ने अभी तक 117 से ज़्यादा देशों को अपनी ज़द में ले लिया है

इधर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है। साथ ही उसने इसके खतरनाक स्तर पर प्रसार और गंभीरता और इसे रोक पाने में असमर्थता पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने चीन के बाहर कोरोना वायरस (COVID-19) के 4,596 नए मामले दर्ज किए हैं। इससे अभी तक संक्रमित लोगों की कुल संख्या 37,371 हो गई है। मरने वालों की संख्या 1,130 हो गई है।

संगठन के अनुसार चीन के बाहर कोरोना वायरस (COVID-19) के 4,596 नए मामले दर्ज किए गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार इससे अभी तक संक्रमित लोगों की कुल संख्या 37,371 हो गई है। दुनियाभर में करीब एक लाख 20 हजार लोग इससे संक्रमित हो गए हैं। मरने वालों की संख्या 1,130 हो गई है। वहीं 4298 लोगों की जान जा चुकी है।

थाईलैंड ने अब तक 11 नए मामलों की सूचना दी, जिससे दक्षिण पूर्व एशियाई देश में कुल मामलों की संख्या 70 हो गई। इससे यहां एक व्यक्ति की मौत भी हुई है। दक्षिण कोरिया में 114 नए मामले सामने आए हैं। यहां संक्रमित लोगों की संख्या 7,869 हो गई है। जबकि, पांच अन्य लोगों की मौत हो गई है। मरने वालों की संख्या 66 हो गयी है।

कतर में कोरोना वायरस के एक दिन में 238 मामले सामने आए हैं। इससे देश में संक्रमित लोगों की संख्या 262 हो गई है। समाचार एजेंसी आइएएनएस ने इसकी जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सभी नए मरीजों को पहले तीन मामले सामने आने के बाद क्वॉरेंटाइन किया गया था।

भारत ने इसके संक्रमण को रोकन के लिए 15 अप्रैल तक सभी देशों के वीजा को निलंबित कर दिया है। देश में अब-तक 70 से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो गए हैं। वहीं अमेरिका ने एक महीने के लिए ब्रिटेन छोड़ पूरे यूरोप की यात्रा पर रोक लगा दी है। अमेरिका के 30 से ज्यादा राज्य इससे प्रभावित हो गए हैं। इसके चलते कई राज्यों ने इमरजेंसी घोषित कर दिया है। वायरस से मरने वालों की संख्या 31 हो गई है। अब तक 1,037 लोग संक्रमित हो गए हैं। हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम हैंक्स और पत्नी रीता विल्सन कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। दोनों वर्तमान में फिल्म की शूटिंग के लिए ऑस्ट्रेलिया में हैं।

इधर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में बताया कि ईरान में कुल 6,000 भारतीय फंसे हुए हैं। इनमें से महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर के 1100 तीर्थयात्री और 300 छात्र शामिल हैं। तीर्थयात्रियों को वापस लाने पर प्रारंभिक ध्यान है, जो ज्यादातर क्योम में फंसे हुए हैं। ईरान में फंसे 529 भारतीयों में से 229 संक्रमित नहीं हैं। ईरानी कानून सख्त होने की वजह से भारतीयों को निकालने में दिक्कत हो रही है।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के रिसर्च के मुताबिक़ वह कोरोनावायरस को अलग करने में कामयाब रहे हैं। इनके पास 11 ऐसे आइसोलेट्स हैं। ऐसे लोगों को न्यूनतम 1 ।5 से 2 वर्ष तक टीके लगेंगे।

इसके अलावा भारत सरकार के अन्य देशों में भी भारतियों को निकालने की कोशिशें जारी हैं ।अब तक भारत सरकार ने मालदीव, म्यांमार, बांग्लादेश, चीन, अमेरिका, मेडागास्कर, श्रीलंका, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका और पेरू जैसे 48 अन्य देशों के 900 भारतीय नागरिकों को निकाला है।

ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्डधारियों को दी जाने वाली वीजा मुक्त यात्रा सुविधा 15 अप्रैल 2020 तक के लिए निलंबित कर दी गई है। यह बंदरगाहों पर प्रस्थान के लिए 13 मार्च 2020 को 12 .00 बजे से लागू होगी।

इसके अलावा भारत में कोरोना वायरस की जांच और इसके इलाज़ की बात करें तो पूरे देश में तकरीबन 1 लाख परीक्षण किट उपलब्ध हैं। ज़्यादा परीक्षण किट के लिए पहले ही ऑर्डर किए जा चुके हैं और वे खरीद की प्रक्रिया में भी हैं।

इसके अलावा देश भर में कोरोनावायरस की 52 परीक्षण प्रयोगशालएं और कुल 56 नमूना संग्रह केंद्र हैं

कोरोनावायरस के 73 पाजीटिव मामलों के संपर्क में आने वाले 1,500 से अधिक लोगों को निगरानी में रखा गया है

देश भर में अब तक कोरोनावायरस के 73 मामले, जिसमें 56 भारतीय और 17 विदेशी।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से ईरान में भारतीय छात्रों से संपर्क करने और उन्हें वापस लाने का आश्वासन देने के लिए कहा है। कोर्ट ने साथ में कहा कि कोरोना वायरस के मद्देनजर ईरान से भारतीयों को निकालने के लिए कोई नीति बनाई गई है या नहीं इसे लेकर रिपोर्ट देने के लिए भी कहा है।

कोरोना वायरस की पुष्टि के लिए क्या टेस्ट किये जाते हैं और क्या भारत ,में मौजूद प्रयोगशालाएं इसके लिए तैयार हैं ?

पहला परीक्षण जिसमे सभी संभावित रोगियों के नमूनों को पीसीआर टेस्ट के लिए भेजा जाता है । कोरोनावायरस के लिए किए जाने वाले इस परीक्षण में न्यूक्लिक एसिड के विस्तारण पर आधारित एक जांच की जाती है जिसे पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) कहा जाता है। इसका एक और सूक्ष्म प्रकार है जिसे रियल-टाइम पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) कहा जाता है है। अगर जांच में ये पाया जाता है की टेस्ट पॉजिटिव है तो इन नमूनों को राष्ट्रीय विष्णु अनुसन्धान संस्थान पुणे भेजा जाता है जो एक मात्र ऐसा सरकारी संस्थान है जो जीनोम सिक्वेंसिंग के ज़रिये इन मामलों की पुष्टि करता है ।कोरोना वायरस के लिए किया जाने वाला ये अंतिम परीक्षण होता । यहाँ ये जानना दिलचस्प होगा की इस परीक्षण को कोरोना संक्रमण का पता लगने पर रातों रात इज़ाद किया गया था ।

विषाणुओं से पैदा होने वाले रोगों के अनुसन्धान और इसके निदान के लिए भारत में कई प्रयोगशालाएं है जिनमे भारतीय आयुर्विज्ञान संसथान दिल्ली ,किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ , सवाई मान सिंह अस्पताल जयपुर , कोलकाता स्थित राष्ट्रीय कॉलरा संसथान नागपुर में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज जहाँ पीसीआर परीक्षण को अंजाम दिया जा सकता है । कई निजी प्रयोगशालएं भी इन परीक्षणों को करने के लिए सक्षम हैं लेकिन संक्रमण के तेज़ी से फैलने के डरऔर इलाज़ में देरी के चलते सरकारी संस्थानों को परीक्षण के लिए ज़्यादा उचित माना जा रहा है।

क्या मास्क पहनने से कोरोना वायरस का संक्रमण रोका जा सकता है

मास्क पहनने से तेज़ी से फ़ैल रहे संक्रमण से बचा जा सकता है । कोई भी व्यक्ति जिसने कभी भी बीमारी प्रभावित क्षेत्रों में यात्रा की है या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आया है और जिसमे इस बीमारी के लक्षण पाए गए हैं उसे मास्क ज़रूर पहनना चाहिए । स्वस्थ्य कर्मियों को भी मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी गयी है।

मौजूदा हालात में आम जनता को मास्क पहनने की ज़रुरत नहीं है ।कोई भी व्यक्ति जो पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित है उसके लिए मास्क पहनना और जानलेवा साबित हो सकता है ।कई जानकारों का कहना है की कई लोग मास्क को गलत तरीके से पहनते हैं जिससे बार मुंह को छूने से संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।

अगर किसी भी शख्स की किसी भी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होती है जो पहले से ही कोरोना वायरस से संक्रमित रहा है या कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसने संक्रमित क्षेत्र में हाल ही में यात्रा की हो ऐसे हर व्यक्ति को न तो किसी पार्टी या किसी भी भीड़ भाड़ वाले जगह में जाने से बचना चाहिए इसके अलावा ऐसे व्यक्ति को कोई भी पार्टी के दौरान अपने यहाँ लोगन को न्यौता नहीं देना चाहिए ।ऐसे व्यक्ति को किसी भी सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए ।कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्ति को खांसते या छींकते समय अपने मुंह पर हाथ रख लेना चाहिए और अपने हाथों को बार धोना और साफ़ रखना चाहिए।

कोरोना वायरस इंफेक्शन के लक्षण क्या हैं?

कोरोना वायरस की वजह से रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट यानी श्वसन तंत्र में हल्का इंफेक्शन हो जाता है जैसा कि आमतौर पर सामान्य सर्दी-जुकाम में देखने को मिलता है। हालांकि इस बीमारी के लक्षण बेहद सामान्य हैं और कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से पीड़ित न हो तब भी उसमें ऐसे लक्षण दिख सकते हैं। जैसे-

  • नाक बहना
  • सिर में तेज दर्द
  • खांसी और कफ
  • गला खराब होना
  • बुखार आना
  • थकान और उल्टी महसूस होना
  • सांस लेने में तकलीफ आदि
  • निमोनिया
  • ब्रॉन्काइटिस

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कोरोना वायरस के बढ़ते मामले परेशानी की वजह बन सकते हैं । कोरोना वायरस जिसकी ज़द में अभी तक दुनिया के लगभग हर बड़े देश आ चुके है और इसके चलते हज़ारों लोग मौत के आगोश में समा चुके हैं । भारत में इस वायरस के बढ़ते मामले इस लिए ज़्यादा चिंता बढ़ाते हैं क्यूंकि यहाँ पर स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है और आबादी ज़्यादा । ऐसे में इस त्रासदी से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है बचाव।