(Global मुद्दे) अनुच्छेद 370 पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया (Article 370 and International Reactions)



(Global मुद्दे) अनुच्छेद 370 पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया (Article 370 and International Reactions)


एंकर (Anchor): कुर्बान अली (पूर्व एडिटर, राज्य सभा टीवी)

अतिथि (Guest): विवेक काटजू (पूर्व राजदूत), सतीश जैकब (वरिष्ठ पत्रकार)

चर्चा में क्यों?

बीते 5 अगस्त को राष्‍ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने अनुच्छेद 370 से जुड़ा एक बड़ा ऐलान किया। राष्ट्रपति की ओर से जारी संवैधानिक आदेश में जम्‍मू-कश्‍मीर से जुड़े इस अनुच्छेद के खंड 1 को छोड़कर बाकी सभी खंडों को हटा दिया गया है। इसको लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रस्ताव भी पेश किया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्ज़ा अब खत्म हो गया है। गृह मंत्री ने सदन को बताया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अब केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाएगा। इसमें जम्मू-कश्मीर विधानसभा के साथ और लद्दाख बिना विधानसभा के केन्द्र शासित प्रदेश बनेंगे।

मामला अदालत में पहुंचा

अनुच्छेद 370 को लेकर सरकार के ऐलान के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है। इस संबंध में दायर याचिका में राष्ट्रपति के इस आदेश को संविधान की मूल भावना के खिलाफ़ बताया गया है। साथ ही इस याचिका में जम्मू-कश्मीर कि स्थिति बदलने के लिए सरकार द्वारा किए गए संशोधन को भी असंवैधानिक बताया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है की सरकार द्वारा किया गया यह संशोधन तभी मान्य होगा, जब इस पर जम्मू कश्मीर की संविधान सभा की राय ली गई हो। वकील मनोहर लाल शर्मा द्वारा दायर इस याचिका में राष्ट्रपति की इस अधिसूचना को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है।

क्या है अनुच्छेद 370?

अनुच्छेद 370 भारतीय संविधान का एक अस्थाई, संक्रमण कालीन और विशेष प्रावधान है। यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर की स्वायत्तता से जुड़ा हुआ है। इस अनुच्छेद के मसौदे का उल्लेख संविधान के भाग XXI में किया गया है।

अनुच्छेद 370 के प्रावधानों के मुताबिक भारतीय संसद को जम्मू कश्मीर के बारे में केवल रक्षा, विदेश, संचार और वित्त के विषय में कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है। इन विषयों के अलावा केंद्र सरकार द्वारा किसी अन्य विषय पर कानून बनाने और उसे जम्मू-कश्मीर में लागू करवाने के लिए राज्य सरकार का अनुमोदन जरूरी होता था।

क्या दिक्कतें थीं अनुच्छेद 370 की वज़ह से?

अनुच्छेद 370 के चलते जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती, और ना ही राष्ट्रपति के पास जम्मू-कश्मीर राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार था। इसके अलावा राष्ट्रपति को वहां अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपात लगाने का भी अधिकार नहीं था।

  • जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती थी - एक भारत की और दूसरी जम्मू-कश्मीर की।
  • भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में कुछ ही विषयों से जुड़े कानून बना सकती थी।
  • जम्मू-कश्मीर का अपना एक अलग ध्वज और एक अलग संविधान था।
  • अनुच्छेद 370 के तहत भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते थे। हालांकि यह प्रावधान भारत के कुछ अन्य राज्यों में भी है।
  • जम्मू कश्मीर के अपने संविधान के मुताबिक वहां की विधानसभा का कार्यकाल 6 सालों का होता था, जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल सिर्फ 5 साल का ही होता है।
  • इससे भी विचित्र बात यह थी कि भारत के सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश जम्मू-कश्मीर के भीतर लागू या मान्य नहीं होते थे।
  • अगर जम्मू-कश्मीर की कोई महिला भारत के किसी दूसरे राज्य के व्यक्ति से शादी कर ले तो उस महिला की जम्मू-कश्मीर की नागरिकता खत्म हो जाती थी। वहीँ अगर वह महिला पकिस्तान के किसी व्यक्ति से शादी कर ले तब उसकी नागरिकता खत्म नहीं होती थी। उससे भी अजीब बात तो यह थी कि उस महिला के पाकिस्तानी पति को भी जम्मू कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी।
  • अनुच्छेद 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई, शिक्षा के अधिकार और कैग (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते थे।
  • जम्मू-कश्मीर में सिर्फ महिलाओं पर शरियत कानून लागू था और साथ ही वहां पंचायतों को कोई अधिकार प्राप्त नहीं था।

भारत-पकिस्तान विवाद

भारत की आज़ादी के वक़्त शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व में मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस (बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस) कश्मीर की प्रमुख राजनैतिक पार्टी थी। कश्मीरी पंडित, शेख़ अब्दुल्ला और राज्य के ज़्यादातर मुसलमान कश्मीर का भारत में ही विलय चाहते थे क्योंकि भारत एक पंथनिरपेक्ष देश था। वहीं पाकिस्तान का मानना था कि कश्मीर एक मुसलमान बाहुल्य प्रांत है इसलिए उसे पाकिस्तान में शामिल होना चाहिए। इसके लिए पाकिस्तान इस हद तक चला गया कि साल 1947-48 में पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों की भेष में कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया। यहीं से भारत और पकिस्तान के बीच विवाद शुरू हो गया।

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

भारत और अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ते निलंबित करने का एलान किया है। साथ ही इस मसले को संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में उठाए जाने का फैसला किया है। पाकिस्तान ने भारत और पाकिस्तान के बीच में चलने वाले दो महत्वपूर्ण ट्रेनों - समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस - को भी बंद करने का निर्णय लिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने के साथ ही क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कूटनीति के आधार पर सुरक्षा परिषद का एक विशेष सत्र बुलाने के लिए बात कर सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए दुनिया के सामने तर्कों के साथ अपना रुख रख सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव का बयान

अनुच्छेद 370 हटाने को लेकर पाकिस्तान ने भी काफी नाराज़गी जताई है। भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती तल्ख़ी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। साथ ही महासचिव ने इस मुद्दे के समाधान के लिए साल 1972 में हुए 'शिमला समझौते' का भी संदर्भ दिया है। साथ ही इस दौरान महासचिव ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच इस विवाद को लेकर कोई तीसरा मध्यस्थता नहीं कर सकता।

क्या है शिमला समझौता?

1971 में हुए भारत - पाकिस्तान युद्ध के बाद शिमला समझौता हुआ था। ये समझौता 2 जुलाई 1972 को शिमला समझौता हुआ था। दरअसल 1971 के भारत - पाकिस्तान युद्ध के दौरान क़रीब 90 हज़ार सैनिकों को भारत ने बंदी बनाया था और पाकिस्तान के बड़े भू-भाग पर भारत ने कब्ज़ा भी कर लिया था। इस सब के परिणामस्वरूप तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो के बीच शिमला समझौता हुआ था।

  • शिमला समझौते के मुताबिक़ दोनों देशों के सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुरूप चलेंगे।
  • दोनों देशों के बीच होने वाले सभी मतभेदों और आपसी विवाद को द्विपक्षीय बातचीत के ज़रिए हल किया जायेगा।
  • यदि दोनों देशों के बीच कोई मुद्दा लबित रह जाता है तो कोई देश उस मुद्दे को लेकर स्थिति में बदलाव करने की एकतरफा कोशिश नहीं करेगा।
  • दोनों देश किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे जो शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा हो।
  • समानता और आपसी लाभ के आधार पर शांति पूर्ण सहअस्तित्व बनाए रखेंगे।
  • एक दूसरे की राष्ट्रीय एकता, राजनीतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता व सम्प्रभुता का सम्मान करेंगे।
  • समानता और आपसी लाभ के आधार पर एक दूसरे के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
  • 25 सालों से दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित करने वाले कारकों को शांति पूर्ण ढंग से हल किया जायेगा।
  • शिमला समझौते के तहत संचार, सीमाएं खोलने, अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को बहाल करने दोनों देशों के नागरिकों की यात्रा सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही गई।
  • आर्थिक और दूसरे सहमति वाले क्षेत्रों में व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देना का भी ज़िक्र किया गया।
  • विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना तय किया गया।
  • भारत और पाकिस्तान की सेनाओं को अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर वापस बुलाने का ऐलान हुआ।

हालाँकि युद्धबंदियों को भारत द्वारा वापस लौटाने और अपनी ज़मीन को वापस पाने के बाद पाकिस्तान ने इस समझौते का उल्लंघन करना शुरू कर दिया।

पाकिस्तान के फैसले पर भारत की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान सरकार ने जब यह निर्णय लिया कि भारत के साथ सभी राजनयिक और व्यापारिक रिश्तो को निलंबित कर दिया जाएगा तो इस पर भारत सरकार ने भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। भारत सरकार ने पाकिस्तान से अपील की है कि वो नई दिल्ली से राजनयिक रिश्ते ख़त्म करने और कारोबार बंद करने के फ़ैसले पर एक बार फिर विचार करे। इसके पीछे भारत का तर्क है कि रिश्ते तोड़ने के पीछे पाकिस्तान के द्वारा बताई गई वजहें ज़मीनी हकीक़त से बिल्कुल अलग हैं।

यूरोपीय यूनियन का बयान

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर यूरोपियन यूनियन ने अपने बयान में कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच जो तनाव बढ़ा है, उसे कम करने के लिए दोनों देशों को बातचीत के लिए आगे आना चाहिए। बातचीत के जरिए मामले को आसानी से सुलझाया जा सकता है।

कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

  • मौजूदा मामले को लेकर चीन ने चिंता जाहिर की थी इस भारत में चीन को हिदायत दी कि 370 हटाया जाना भारत का आंतरिक मामला है और इसमें चीन की दखलअंदाजी ठीक नहीं।
  • अफगानिस्तानी संगठन तालिबान ने भी मामले को शांति से हल करने की अपील की है साथ ही तालिबान ने कश्मीर मसले को अफगानिस्तान से न जोड़े जाने की भी सलाह दी है।
  • पाकिस्तानी सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने भी पाकिस्तान को इस मामले में आईना दिखाते हुए कहा इससे कश्मीर में शांति बहाल हो सकती है लिहाजा पाकिस्तान फालतू के कदम उठाने से बचना चाहिए।
  • अनुच्छेद 370 के मामले पर बांग्लादेश के आवामी लीग के महासचिव अब्दुल कादर ने कहा कि 370 हटाए जाना भारत का आंतरिक मामला है। इसमें अंतरराष्ट्रीय समुदाय को हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं बनता।