Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 31 January 2020


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इजराइल- फिलिस्तीन संबंध

  • हाल ही में USA के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यपूर्व शांति प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिसे 21 वीं सदी का सबसे बड़ा शांति प्रस्ताव बताया इसमें निम्न प्रावधान शामिल हैं।
  • पक्ष्चिमी तट ( वेस्ट बैंक ) बैंक का क्षेत्र इजराइल को मिलेगा दक्षिण पूर्व का क्षेत्र फिलिस्तीन को मिलेगा।
  • येरूशलम शहर इजराइल की स्थाई अविभाजित राजधानी होगी, तथा पूर्वी येरूशलम में फिलिस्तीन अपनी राजधानी स्थापित करेगा।
  • इजराइल या फिलिस्तीन परिवार जहाँ रह रहे हैं वहीं ही रहेंगे उन्हें विस्थापित नहीं किया जायेगा।
  • इस प्लान के अनुसार फिलिस्तीन को पश्चिमी तट पर 30% क्षेत्र छोड़ना पड़ता तथा येरूशलम के दावे की भी तिलांजलि देनी पड़ती है इतना ही नहीं हमास जैसी संस्थाओं पर भी रोक लगानी पड़ती है।
  • इसके अलावा फिलिस्तीन को ऐसे लोगों को संरक्षण देना बंद करना होगा जिसका इजराइल ने शोषण किया है। तथा अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर इजराइल को चुनौती देना बंद करना होगा।
  • जाहिर सी बात है कि फिलिस्तीन इन बिन्दुओं पर सहमत नहीं होगा और हुआ भी ऐसा ही, फिलिस्तीन ने इसे खारिज कर दिया
  • दरअसल इजराइल. फिलिस्तीन का यह विवाद ऐतिहासिक रहा है, जिसके केन्द्र में येरूशलम शहर रहा है इसलिए इससे सम्बन्धित सभी पक्षों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि जान लेना आवश्यक है।

येरूशलम का इतिहास

  • यह यहूदी, ईसाई तथा इस्लाम के आस्था का संयुक्त केन्द्र है, इन तीनों धर्मो के जनक पैगम्बर इब्राहिम माने जाते हैं।
  • आदय, नूह, लूथ, सुलेमान, याकूब, जकारिया, सालेह, समेत कई पैगम्बरों को तीनों धर्मो में विशेष स्थान दिया गया है।
  • कुरान में ईसा की माँ मारियम पर एक सूरा (अध्याय) लिख गया है।
  • येरूशलम में 158 गिरिजाघर तथा 73 मस्जिद हैं।
  • उपरोक्त धार्मिक महत्व के कारण इस क्षेत्र (आज का इजराइल, फिलिस्तीन) में तीनों धर्मों के बीच संघर्ष शुरू हो गया। तथा बाद में आटोमन साम्राज्य एवं ब्रिटिश सत्ता के संघर्ष का भी यह क्षेत्र केन्द्र रहा।
  • ब्रिटिश सरकार ने इसी दौरान लगभग 65 हजार यहूदी यूरोप से लाकर बसाया। अंततः 1914 के आस पास यहाँ 5 लाख आबादी रहने लगी, इस समय (1922) यहाँ ब्रिटिश सरकार का कब्जा था।
  • यहूदी यहाँ पर अपने लिए एक नया देश की मांग करते थे।
  • 1917 में ब्रिटेन के विदेश मंत्री लॉर्ड बाल्फोर ने यहूदियों को देश देने की औपचारिक मान्यता दे दी ।
  • हिटलर के उदय के बाद यूरोप (जर्मनी) में यहूदियों पर अत्याचार होने लगा जिससे 1922-1939 के बीच लगभग 3 लाख यहूदी फिलिस्तीन पहुँचे।
  • यहूदियों के यहाँ पहुँचने का विरोध स्थानीय अरबियों ने की किन्तु 1940 में ब्रिटेन ने इसे दबा दिया।
  • 30 नवम्बर 1947 को यू. एन. ने इस विवादित क्षेत्र को यहूदियों तथा अरबों में बांटने की घोषणा की जिससे ब्रिटेन को छोड़ना पड़ा परिणामस्वरूप 15 मई 1948 को इजराइल नामक एक नये राष्ट्र का उदय हुआ।
  • इस इजराइल के निर्माण का अरबों ने विरोध किया किन्तु इजराइल ने पश्चिमी देशों की सहायता से इस अड़प को शांत किया ही साथ ही फिलिस्तीन के बड़े क्षेत्र पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया।
  • समय के साथ इजराइल बढ़त गया और फिलिस्तीन सिकुड़ता गया एवं फिलिस्तीन के नाम पर गाजापट्टी तथा पश्चिमी तट ही बचा।
  • 1967 के अरब इजराइल के युद्ध में इजराइल ने अरब को हराकर गाजापट्टी समेत कई क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया।
  • 1969 में यासिर अराफात फिलिस्तीन के शासक बने तथा फिलिस्तीन की लड़ाई को और तेज किया।
  • 1973 में सीरिया तथा मिश्र ने इजराइल के सेनाई तथा गोलान क्षेत्र पर आक्रमण किया जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
  • 1978 में मिश्र तथा इजराइल के बीच कैंप डेविड संधि हुई, पर शांति की स्थापना दीर्घ कालिक नहीं हो सकी।
  • 1982 में इजराइल ने लेबनान पर आक्रमण कर सैकड़ों फिलिस्तीनी शरणार्थियों को मौत के घाट उतार दिया, साथ ही फिलिस्तीनी जमीनी पर यहूदियों बस्तियों का विस्तार जारी रहा।
  • 1987 में गाजापट्टी तथा पश्चिमी तट में फिलिस्तीन ने फिर से आजादी की लड़ाई शुरू की।
  • 1993 में यासिर अराफात (फिलिस्तीन के शासक) ने इजराइल से ओस्लो की संधि की जिसके तहत पी. एल. ओ. तथा इजराइल ने एक दूसरे को मान्यता दी, जिससे पश्चिमी तट तथा गाजा में फिलिस्तीन को सीमित शासन करने का अधिकार मिला, किन्तु बाद में इजराइल के मुकरने से यह संधि विफल हो गयी।
  • सन 2000 में इजराइल ने पश्चिमी तट के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया।
  • 2008 में इजराइल ने गाजा पर हमला करके सेकड़ों लोगों की हत्या कर दी।
  • 2011 में फिलिस्तीन ने यू. एन. से एक देश के रूप में स्वयं को मान्यता देने की मांग की।
  • 2018 में फिलिस्तीन यूनेस्को का सदस्य बना पर आजाद देश का सपना अभी भी अधूरा रहा।
  • 2018 मई में यू. एस. ए. ने येरूशलम को इजराइल की राजधानी माना तथा अपने दूतावास को तेल अबीबसे येरूशलम स्थानांतरित कर दिया, हालांकि यू. एन. में भारत ने इसका विरोध किया था। इसके बाद पराग्वे, ब्राजील, समेंत कई देशों ने अपना दूतावास येरूशलम में स्थानांतरित कर दिया।
  • 2020 जनवरी में यू. एस. ए. ने मध्यपूर्व शांति प्रस्ताव पेश किया जिसके तहत इजराइल की राजधानी येरूशलम को माना गया तथा पूर्वी येरूषलम को फिलिस्तीन को देने की बात की गयी है, किन्तु इस प्रस्ताव पर पक्षपता का आरोप लगाकर फिलिस्तीन ने इसे खारिज कर दिया।
  • ध्यातव्य है कि इजराइल की उच्चतम न्यायालय संसद एवं अन्य सरकारी संस्थान येरूशलम में ही है।
  • अतः इस प्रकार उपरोक्त चर्चा के आधार पर यह कह सकते हैं कि तीन धर्मो की पवित्र भूमि न केवल धार्मिक युद्ध की भूमि बनी हुई है, बल्कि विभिन्न शक्तियाँ इसमें अपने अपने हितों की पूर्ति के लिए भी इस्तेमाल करते हैं किन्तु संभव है कि इसे वैश्विक समुदाय जल्द ही सुलझा पायेगा और यू. एन. की मान्यतानुसार इसे बेटिकन सिटी के जैसा अन्तराष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित करने में मदद करेंगे।