(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 30 September 2020


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रक्षा खरीद प्रक्रिया 2020 क्या है?

  • भारत इस समय कई प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें एक महत्वपूर्ण चुनौती चीन को सीमा पर नियंत्रित करने की है।
  • भारत इस समय LOC, LAC एवं मैकमोहन सीमा रेखा पर एक साथ चीन एवं पाकिस्तान दोनों को रोकने का प्रयास कर रहा है, वहीं नेपाल में चीन का हस्तक्षेप बढ़ने से वह भी भारत के सामने कई प्रकार की चुनौतियां उत्पन्न कर रहा है।
  • नेपाल भारत से लगे अपने सैनिक पोस्ट की संख्या एवं क्षमता बढ़ाकर भारत को घेरने का प्रयास कर रहा है, खासकर लिपु लेख दर्रे के समीपवर्ती क्षेत्र में।
  • भारत इस समय आत्मनिर्भर अभियान के माध्यम से अधिकांश क्षेत्रें के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना चाहता है, इसी के तहत अगस्त 2020 में केंद्र सरकार ने रक्षा में भी आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिए 101 वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया। इस सूची में आर्टीलरीगन, असॉल्ट राइफल्स ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्रट, रडार एवं दूसरी चीजें शामिल हैं।
  • रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा आयात पर यह प्रतिबंध चरणबद्ध तरीके से दिसंबर 2020 से दिसंबर 2025 के बीच लागू किया जायेगा।
  • कुछ माह पहले स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की वार्षिक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके अनुसार सैन्य खर्च के मामले में अमेरिका ,चीन के बाद भारत का तीसरा स्थान है ।
  • रक्षा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कोई नया नहीं है, पहले की डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसिड्यूर (Defence Procurement Procedure) में भी इसका प्रयास किया जा चुका है। 2013 में इसी प्रकार की घोषण की गई थी लेकिन उसके बाद भी जो स्वदेशी उत्पादन प्रारंभ हुए उनके कई पूर्जे विदेशों से आयात होते हैं।
  • भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में भारतीय निजी कंपनियों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है लेकिन अभी तक हम इसमें भी कुछ खास हासिल नहीं कर पाये हैं। भारत के रक्षा क्षेत्र में 2001 के बाद निजी कंपनियों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इनकी हिस्सेदारी अभी 8-10 प्रतिशत तक ही है ,और एलएंडटी, महिंद्रा, भारत फोर्ज जैसे कुछ गिने चुने नाम ही हमारे पास हैं।
  • रक्षा क्षेत्र में बड़ी सरकारी कंपनियों की संख्या भी बहुत ज्यादा नहीं हैं। हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत डायनमिक्स और वीईएमएल जैसे कुछ ही नाम हैं।
  • भारत की निजी कंपनियाँ डिफेंस सेक्टर में निवेश क्यों नहीं करती है?
  1. पूंजी पर रिटर्न लंबे समय में मिलता है।
  2. इसमें भारी पूंजी की आवश्यकता होती है, इसलिए हर कंपनी इसमें प्रारंभ नहीं कर पाती है।
  3. निवेश के बाद रिटर्न की गारंटी नहीं होती है, क्योंकि तकनीकी परिवर्तन से खरीद-बिक्री प्रभावित होता है।
  4. उन विदेशी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा जो 70-80 साल से इसमें कार्यरत हैं।
  5. इन उत्पादों की खपत नहीं होती है, न ही यह जल्दी खराब होते हैं, इसके कारण इनकी मांग हमेशा नहीं रहती है।
  6. डिफेंस क्षेत्र में भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट का वातावरण/पारिस्थितिकी बहुत विकसित नहीं है।
  • भारत ने अपनी रक्षा आवश्यकता को समझते हुए वर्ष 2002 में पहली रक्षा खरीद प्रक्रिया (Defence Procurement Procedure-DAP) को वर्ष 2002 में लागू किया था। तब से इसमें कई परिवर्तन समय के साथ-साथ किये गये और बदलाव लाये गये थे। इसमें अंतिम बार परिवर्तन वर्ष 2016 में किया गया था।
  • अगस्त 2019 में रक्षा मंत्री ने अपूर्वा चंद्रा की अध्यक्षता में रक्षा खरीद प्रक्रिया (DAP) की समीक्षा करने के लिए एक समिति के गठन की मंजूरी दी थी। इस समिति की रिपोर्ट आ चुकी है जिसने कई बदलाव करने की सिफारिश की है।
  • भारत की रक्षा खरीद और खरीद की नीति की जिम्मेदारी रक्षा अधिग्रहण परिषद (Defence Acquisition Council- DAC) की होती है, जिसके मुखिया रक्षा मंत्री होते हैं। इसकी स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी।
  • कल (सोमवार-29 सितंबर, 2020) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने वर्तमान आवश्यकता/चुनौतियों एवं अपनी प्रतिबद्धताओं के तहत रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 को मंजूरी दी तथा DAP-2020 का अनावरण किया।
  • वर्ष 2016 के रक्षा खरीद प्रक्रिया में अनेक बदलाव करते हुए मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर अभियान तथा रक्षा साजो सामान की खरीद प्रक्रिया को सरल, समयबद्ध, पारदर्शी तथा भारत की घरेलू आवश्यकता के अनुसार बनाने का प्रयास किया गया है।
  • नई रक्षा खरीद प्रक्रिया (DAP) 2020 को 1 अक्टूबर 2020 से लागू किया जा रहा है।
  • DAP-2020 की विशेषताएँ-
    1. रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में पहली बार रक्षा उपकरण लीज पर लेने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य यह है कि जब तक हम इस क्षेत्र में आत्म निर्भरता प्राप्त नहीं कर लेते हैं। तब तक हम कुछ देशों से इस प्रकार का समझौता कर सकते हैं कि हम अनेक साजो समान का उपयोग आवश्यकता पड़ने पर कर सकते है। इससे उन्हें उनके सामान की एक कीमत मिल पायेगी, उनके उपकरण से आय प्राप्त हो सकेगा तो भारत को रक्षा उपकरण खरीदने की बजाय देश के अंदर निवेश करने एव आधारभूत संरचना पर खर्च करने के लिए वित्त का अभाव भी उतपन्न नहीं होगा।
  • भारत ने अपने रक्षा खरीद प्रक्रिया में ऑफसेट नीति (Offset Policy) को शामिल कर रखा था, जिसके तहत 300 करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा खरीद में इसे अनिवार्य कर रखा था। इसके तहत 30 प्रतिशत या इससे अधिक के मूल्य की उत्पादन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट या FDI के रूप में भारत में खर्च करना था। राफेल के संदर्भ में यह 50 प्रतिशत था। हाल के DAP-2020 में इसमें बदलाव किया गया है और इसकी अनिवार्यता को कुछ रक्षा सौदों में समाप्त कर दिया गया है।
  • ऑफसेट की नीति का उद्देश्य तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना, भारत के रक्षा कौशल को बढ़ाना, देश के अंदर उत्पादन को बढ़ावा देना था लेकिन यह लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे थे क्योंकि CAG की हालिया रिपोर्ट बताती है कि ऑफसेट के तहत अभी तक एक भी बहुत बड़ा तकनीकी हस्तांतरण नहीं हुआ। दूसरी तरफ विदेशी कंपनियां भी इसके लिए तैयार नहीं हो रहीं थी जिससे रक्षा खरीद प्रभावित हो रहा था, उसमें विलंब हो रहा था इस वजह से इसे शिथिल कर दिया गया है।
  • ऑफसेट के नियम को तीन तरह के समझौते में समाप्त किया गया है। IGA (Inter-Government Agreement) G-G (Government to Government) एवं Single Vendor एग्रीमेंट।
  • DAP-2020 के ऑफसेट संबंधी प्रावधान भूतलक्षी (Retrospective) नहीं होंगे अर्थात पुराने समझौते पर लागू नहीं होंगे।
  • नई रक्षा खरीद नीति 2020 के तहत रक्षा खरीद के एक हिस्से को भारतीय कंपनियों या भारत के लोगों के स्वामित्व वाले लोगों के लिए आरक्षित रखा गया हैं यह उन कंपनियों पर लागू होगा जिसका 50 प्रतिशत या इससे अधिक स्वामित्व किसी भारतीय के पास हो, इससे आत्मनिर्भर अभियान को बढ़ावा मिलेगा।
  • इससे विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों में निवेश कर अपने उत्पाद सरकार को बेच सकेंगी तो साथ ही घरेलू उद्योग का भी संरक्षण हो सकेगा।
  • स्वदेशी उपकरण की मात्रा (प्रतिशत) को भी रक्षा खरीद प्रक्रिया में बढ़ाया गया है। अब निर्मित किये जाने वाले उपकरणों के पूर्जों को 50 या 60 प्रतिशत से अधिक रखा जायेगा जो अब तक 40 से 50 प्रतिशत तक था। इससे हम जो पूर्जों का अधिक आयात करते हैं, वह कम होगा।
  • अभी तक रक्षा उपकरणों के हार्डवेयर की खरीद को ही मुख्य नीति का हिस्सा माना जाता था लेकिन अब इसमें सॉफ्रटवेयर एवं तकनीकी खरीद को भी प्रमुख स्थान दियाग या हैं रक्षा के लिए संचार तकनीकी एवं सुरक्षा तकनीकी पर भी फोकस करने की बात की गई है।
  • एक नयी Make-III कैटेगारी को इसका हिस्सा बनाया गया है, जिसके तहत उपकरणों का निर्माण, प्लेटफार्म का निर्माण, पूर्जों का निर्माण किया जायेगा। इसके तहत एक सूची बनाकर इसके उत्पादन को बढ़ावा देने का प्रयास किया जायेगा।
  • अभी तक हम रक्षा खरीद नीति के लिए 15 वर्ष का एक लांग टर्म प्लान रखते थे जिसे अब घटाकर 10 वर्ष कर दिया गया है, इसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि तकनीकी नवाचार इस क्षेत्र में हो रहा है, इसलिए 10-10 वर्ष पर समीक्षा की जायेगी।
  • किसी रक्षा उपकरण को खरीदने से पहले उसका मूल्यांकन भारत में कई चरणों में होता था, जिसे विदेशी कंपनियाँ विश्व के सबसे कठिन मूल्यांकन मानती है। इस नयी नीति में मूल्यांकन की पद्धति को वैश्विक बनाने अर्थात उन तरीकों को अपनाने की बात की गई है जो अन्य देशों में अपनाये जायेंगे। परीक्षण के दौरान भारतीय आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जायेगा।
  • इसमें यह प्रावधान किया गया है कि निरीक्षण की कोई पुनरावृत्ति विशेष रूप से उपकरणों की स्वीकृति के दौरान नहीं की जायेगी। थर्ड पार्टी परीक्षण का भी प्रावधान रखा गया है।
  • आईडेक्स (IDEX- An Innovation Ecosystem for Defence Litted Innovations for Defence Excellence) के तहत नवाचार को बढ़ावा देने एवं नवाचार के माध्यम से विकसित किये गये प्रोटोटाइप को खरीदने की बात की गई है।
  • DRDO, DPSU (Defence Public Sector Undertaking) तथा OFB (Ordnance Factory Board) द्वारा डिजाइन किये गये एवं विकसित किये गये रक्षा प्रणाली/उपकरण के अधिग्रहण के लिए DAP-2020 में एक अलग से प्रावधान किया गया है तथा इनके द्वारा विकसित उपकरण/तकनीकी के एकल चरण वाले परीक्षण को अपनाने की बात की गई है।
  • रक्षा खरीद प्रक्रिया में यह देखा जाता रहा है कि समझौता होने एवं आपूर्ति होने में कई वर्षों का समय लगता है, जिसमें उसकी कीमत में बड़ा बदलाव आ जाता है। इसके लिए DAP-2020 में एक नया खंड मूलय बदलाव खंड शामिल किया गया है। इसमें कीमत बदलाव को रोकने एवं वास्तविक कीमत पर खरीद सुनिश्चित करने की बात की गई है।
  • विक्रेताओं को भुगतान मे विलंब न हो इसके लिए डिजीटल सत्यापन की बात की गई है।
  • रक्षा खरीद में एक बड़ा बदलाव करते हुए 500 करोड़ रूपये तक के सभी मामलों में AoN (Acceptance of Neaessity) को लाया गया है। जिससे एक चरण में समझौता हो सके और समय कम लगे।
  • किसी खरीद के लिए वेंडरों द्वारा किये जाने वाले अनुरोध और मानक के विषय में दस्तावेजी संबंधी परीक्षण को आसान बनाया गया है ताकि डिफेंस के क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनस को बढ़ावा दिया जा सके।
  • DAP-2020 के माध्यम से हम क्या सुनिश्चित करना चाहते हैं
  1. रक्षा उपकरणों/पूर्जों/हथियारों आदि की एक सूची तैयार करना तथा उसके उत्पादन एवं खरीद के लिए चरण बद्ध तरीके से आगे बढ़ाना।
  2. स्वदेशी एवं निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना जिससे आत्म निर्भरता की ओर बढ़ा जा सके। खरीद की नई नीति के माध्यम से घरेलू सहायक कंपनियों को बढ़ावा देना।
  3. छोटे रक्षा उपकरणों एवं हथियारों घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना जिससे रक्षा कौशल के साथ इसके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी का विकास हो सके।
  • रक्षा क्षेत्र में FDI को बढ़ाना तथा विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन करने के लिए तैयार करना।
  • परियोजना प्रबंधन इकाई (Project Management Unit- PMU) की स्थापना एवं रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया को तेजी प्रदान करना, सरल बनाना।