(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 30 December 2020


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क्रोएशिया में आये भूकंप को समझिये

  • यूरोपीय देश क्रोएशिया में मंगलवार को तीव्र गति का भूकंप आया।
  • यूरोपियन मेडिटेरेनियन सिस्मोलॉजिकल सेंटर ने बताया है कि यह भूकंप क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब से लगभग 50 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में दोपहर 12.19 बजे पेंट्रीजा शहर में आया।
  • आज सुबह पाकिस्तान में भी 4.7 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया, जिसका केंद्र इस्लामाबाद बताया जा रहा है।
  • क्रोएशिया में आये भूकंप से भारी तबाही हुई है और कई लोगों की मृत्यु हो गई है।
  • भूकंप की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि इसके झटके स्लोवेनिया, सर्बिया और बोस्निया में भी महसूस किये गये। स्लोवेनिया ने भूकंप के झटके की भयावहता को देखते हुए अपने क्रस्को परमाणु बिजली संयंत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यह परमाणु संयंत्र स्लोवेनिया और क्रोएशिया सीमा के पास है।
  • क्रोएशिया में इतनी तीव्रता का भूकंप 140 साल बाद आया है।
  • इस भूकंप मूल (Focus) की गहराई 10 किमी बताया जा रहा है।
  • क्रोएशिया में पिछले कई दिनों से निम्न गति के भूकंपीय झटके महसूस किये जा रहे थे, जिन्हें अब पूर्व चेतावनी माना जा रहा है।
  • यह क्षेत्र इस समय भूकंपीय अस्थिरता का सामना कर रहा है। अक्टूबर माह में तुर्की और यूनान में भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता लगभग 7.0 थी।
  • पिछले एक दशक में भूमध्य सागरीय क्षेत्र लगभग एकदर्जन भूकंपों का सामना कर चुका है।
  • भूमध्य सागरीय क्षेत्र ईरान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल क्षेत्र मध्य महाद्वीपीय भूकंपीय क्षेत्र का हिस्सा है जो इस समय सक्रिया विवर्तनिक क्षेत्र है।
  • भू-पृष्ठ (Surface) पर होने वाले आकस्मिक कंपन्न को भूकंप कहते हैं। इस आकस्मिक कपन्न का कारण भूगर्भीय चट्टानों में उत्पन्न होने वाला लचीलापन और समस्थिति होती है।
  • पृथ्वी के अंदर कई प्रकार क्रियायें होती रहती हैं जिसके कारण चट्टानों में हलचल उत्पन्न होती है।
  • भूकंप एक प्रकार की तरंगीय ऊर्जा (Wave Energy) है, जिसकी गति ज्यादा होने पर इसका घातक प्रभाव पृथ्वी पर विनाशक स्थिति उत्पन्न करता है।
  • पृथ्वी के अंदर जिस स्थान से भूकंपीय तरंगे उत्पन्न होती हैं, उसे भूकंप मूल (Focus) कहते हैं। भूकंप मूल से तरंगे गति करते हुए पृथ्वी के जिस भाग पर सर्वप्रथम कंपन्न उत्पन्न करती हैं या धक्का मारती हैं, उसे भूकंप केंद्र (Epi-centre) कहते हैं।
  • भूकंप केंद्र सामान्यतः फोक्स के लंबवत (सीध) में स्थित स्थान होता है। भूकंप केंद्र पर ही सर्वप्रथम यह तरंगें पहुंचती हैं, इसीकारण यहां पर इनकी गति ज्यादा होती है तथा विनाश भी ज्यादा होता है।
  • इपिसेंटर से जैसे-जैसे दूरी बढ़ती जाती है इन तरंगों का प्रभाव कम होता जाता है।
  • भूकंप मूल (Focus) की गहराई के आधार भूकंपों को तीन वर्गो में रखा जाता है। अधिकांश भूकंप (93 प्रतिशत से अधिक) पृथ्वी के अंदर 100 किमी. की गहराई तक उत्पन्न होते हैं।
  1. सामान्य गहराई वाले भूकंप : 0-50 किमी.
  2. मध्यवर्ती गहराई वाले भूकंप : 50-250 किमी.
  3. गहरे या पातालीय भूकंप : 250-700 किमी.
  • भूकंप मूल की गहराई और उसके द्वारा किये जाने वाले विनाशक प्रभाव में व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है।
  • भूकंपीय तरंगों को उनकी विशेषताओं के आधार पर तीन श्रेणियों में भिाजित किया जाता है।
  1. Primary Waves- 'P' - यह सर्वाधिक तीव्र गति से चलने वाली तरंगें हैं जो ध्वनी तरंगों की भांति चलती हैं। यह तीनों माध्यमों में गति कर सकती हैं। इनकी सर्वाधिक गति ठोस भाग में होती है। भूकंप केंद्र पर सर्वप्रथम यही तरंगों पहुँचती हैं।
  2. Secondary Waves- 'S' - यह तरंगें P तरंग के बाद उत्पन्न होती हैं तथा इनकी गति P की तुलना में कम होती है, यह तरल माध्यम में गति नहीं कर पाती हैं।
  3. Surface or Long Waves- 'L' - यह सर्वाधिक घातक भूकंपीय तरंगे हैं जो सिर्फ सतह पर ही चलती हैं।

भूकंप के कारण

  1. ज्वालामुखी क्रिया
  2. विवर्तनिकी अस्थिरता
  3. संतुलन स्थापना के प्रयास
  4. वलन एवं भ्रंशन
  5. भूगर्भीय गैसों का फैलाव
  6. मानवीय कारक
  7. प्लेट विवर्तनिकी कारक
  • प्लेट विवर्तनिकी द्वारा होने वाली भूगार्भिक क्रियायें ही पृथ्वी के अधिकांश भूकंपों का कारण माने जाते हैं।
  • प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत ज्वालामुखी, भूकंप, विवर्तनिकी हलचल की व्याख्या प्लेटों के किनारों के आधार पर करता है। यह किनारें तीन प्रकार के होते हैं।
  1. रचनात्मक प्लेट किनारा
  2. विनाशत्मक प्लेट किनारा
  3. संरक्षी प्लेट किनार
  • प्लेटों के किनारों के आधार पर भूकंपों का विश्व वितरण दिखाया जाता है। वितरण के क्षेत्रों को भूकंपीय पेटी का नाम दिया जाता है।
  • भूकंपों के वितरण को तीन पेटियों के माध्यम से दिखाया जाता है।
  1. प्रशांत महासागरीय पेटी- इस पेटी में सर्वाधिक 63 प्रतिशत वैश्विक भूकंप आते ह्रैं। यहां अधिक भूकंप का कारण प्लेटों का अभिसरण, ज्वालामुखी की क्रिया तथा भूपर्पटी के चट्टानी संस्तरों में भ्रंशन की क्रिया है।
  2. मध्य महाद्वीपीय पेटी- यह दूसरी सर्वाधिक भूकंपीय पेटी है, जिसमें 21 प्रतिशत भूकंप आते हैं। यह पेटी मध्य अटलांटिक महासागर से प्रारंभ होकर, भूमध्य सागर, कॉकेशस श्रेणी एवं हिमालय होते हुए दक्षिणी पूर्वी प्रशांत द्वीपों से जाकर मिल जाती है।
  3. मध्य अटलांटिक पेटी - भूकंप की घटनायें अपनी तीव्रता के आधार पर विनाश उत्पन्न करती है। इस समय पूर्वी भूमध्य सागरीय क्षेत्र भूकंप से प्रभावित है।

न्यूमोसिल वैक्सीन क्या है?

  • स्ट्रैपटोकॉकस निमोनिया या न्यूमोकॉकस बैक्टीरिया के संक्रमण से होने वाले रोग को न्यूमोकॉकल (Pneumococcal) रोग के नाम से जाना जाता है।
  • यह न्यूमोकॉकल रोग कई प्रकार का होता है। इसके सामान्य रूप निमोनिया, मेनिनजाइटिस, साइनस संक्रमण, खून में संक्रमण (सेप्सिस), मध्य कान में संक्रमण हैं।
  • न्यूमोकॉकल रोग के लक्षण- इस रोग से शरीर का जो अंग प्रभावित होता है, लक्षण भी उसी में दिखते हैं लेकिन इसके कुछ लक्षण निम्नलिखित है।
  • अधिक रोशनी सहन न कर पाना, बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, दिल की धड़कन बढ़ जाना, त्वचा में चिपचिपापन आ जाना, कम भूख लगना, त्वचा पर चकत्ते आ जाना, खांसी होना, सांस फूलना, गर्दन में अकड़न होना, थकावट महसूस करना, भ्रम सा महसूस होना, कान में दर्द, थूक में खून आना आदि।
  • यह एक संक्रामक बिमारी है। संक्रमित व्यक्ति के करीब आने, उसके थूक या बलगम के संपर्क में आने, संक्रमित व्यक्ति के मुह या नाक से निकलने वाली द्रव की सूक्ष्म बूंदों के भी संपर्क में आने से स्वस्थ्य व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। यह संक्रमित व्यक्ति के श्वसन तंत्र का भाग बन जाता है इसके कारण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने के माध्यम से यह फैल सकता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक 5 वर्ष से कम आयु के 4-5 लाख बच्चों की मौत न्यूमोकॉकल रोग के कारण प्रति साल होती है। विकासशील देशों में यह एक गंभीर बीमारी है।
  • न्यूमोकॉकल रोग की रोकथाम करने में इसकी वैक्सीन काफी मददगार साबित होती है। शिशु और बच्चों में यह रोग होने का जोखिम अधिक रहता है, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली सही से विकसित नहीं होती है, इसलिए टीका काफी प्रभावी होता है।
  • इसके इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की भी मदद ली जाती है, और इसका पूरा कोर्स करना होता है।
  • यह रोग जब तक सामान्य प्रकार का है तब तक तो ज्यादा दिक्कत नहीं आती है लेकिन यदि जटिल रूप में संक्रमित कर देता है तो समस्या बढ़ जाती है।
  1. मेनिनजाइटिस न्यूमोकॉकल रोग का सबसे गंभीर रूप हैं मेनिनजाइटिस यदि वृद्ध व्यक्ति को होता है तो उसकी मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। मृत्यु के जलावा बहरापन या शारीरिक विकास में देरी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है।
  2. जब न्यूमोकॉकल रोग का प्रसार खून में हो जाता तो इसे बैक्टीरिमिया कहते हैं।
  3. जब इस रोग की वजह से हृदय का वॉल्व तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगता है तो इसे न्यूमोकॉकल एंडोकार्डाइटिस कहते हैं।
  • भारत की एक बड़ी आबादी भी प्रत्येक साल इस रोग से संक्रमित होती है। लेकिन भारत के लिए अब एक अच्छी खबर आई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने सोमवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया, मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन एवं सिएटल स्थित पाथ (PATH) नामक अंतर्राष्ट्रीय गैर लाभकारी वैश्विक स्वास्थ्य संगठन जैसे साझेदारों के साथ मिलकर विकसित की गई देश की पहली न्यूमोकॉकल कॉन्जुगेट वैक्सीन ‘न्यूमोसिल’ पेश किया।
  • डा. हर्षवर्धन ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट टीकों की संख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा टीका निर्माता है और इसके टीके विश्व के 170 देशों में उपयोग किये जाते हैं।
  • यह वैक्सीन उन बैक्टीरिया को लक्षित कर उनके असर को समाप्त करती हैं, जिनके कारण न्यूमोकॉकल संक्रमण होता है।
  • सूचना के मुताबिक यह बाजार में एकल खुराक और बहु खुराक में बहनीय कीमत पर उपलब्ध होगी।
  • यह वैक्सीन भारत एवं बाहर क्षेत्रों में एस निमोनिया के प्रचालित सीरोटाइप के प्रसार को नियंत्रित करने में बहुत सहायक होगी।
  • इस वैक्सीन को भारतीय औषधि महानियंत्रक द्वारा लाइसेंस प्रदान किया चुका है इस वजह से यह जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो सकती है।
  • यह वैक्सीन न सिर्फ बीमारियों से लड़ने की हमारी क्षमता में वृद्धी करेगी बल्कि विदेशी न्यूमोकॉकल कंजुगेट वैक्सीन पर हमारी निर्भरता को कम करेगी।
  • कंजुगेट शब्द का अर्थ यह है कि यह वैक्सीन इस रोग के लिए उत्तरदायी कई जीवाणुओं पर असरदार है।
  • भारत सरकार द्वारा सार्वभौमिक टीकारण कार्यक्रम के इस टीके का प्रयोग किया जायेगा।

BBX11 जीन क्या है?

  • क्लोरोफिल एक हरा पिगमेंट होता है जो पौधों में पाया जाता है। यह सूर्य की किारणों से आने वाले प्रकाश को अवशोषित करके पौधों के पोषण/विकास में सहायता करता हैं यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पत्तियों का हरा रंग इसी क्लोरोफिल से ही मिल पाता है।
  • यह (क्लोरोफिल) एक प्रोटीनयुक्त जटिल रासायनिक यौगिक है। इसका निर्माण कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा मैग्निसियम तत्वों से होता है।
  • क्लोरोफिल के साथ दो अन्य वर्णक कैरोटीन और जैन्थोफिल भी पत्तों में पाये जाते है।
  • विल्स्टेटर नामक जर्मन रसायनज्ञ ने 1911 ई- में इस वर्णक को युद्ध से प्रथक किया।
  • पौधों में क्लोरोफिल का संश्लेषण एक लंबी प्रक्रिया में संपन्न हो पाता है। जब बीज अंकुरित होकर मिट्टी से बाहर प्रकाश के संपर्क में आता है तो पौधा अपना विकास करने के लिए क्लोरोफिल का संश्लेषण करता है। इससे पहले क्लोरोफिल अंकुरित बीज में प्रोटोक्लोरोफिलाइड के रूप में रहता है। यही प्रोटोक्लोरोफिलाइड प्रकाश में आने पर एंजाइम द्वारा क्लोरोफिल में बदल दिया जाता है। इस तरह यह प्रोटोक्लोरोफिलाइड, क्लोरोफिल के संश्लेषण में एक मध्यवर्ती की भूमिका निभाता है।
  • हाल ही में शोधकर्ताओं ने BBX11 नामक जीन के विषय में खोज की है। यह जीन फसलों को हरा बनाये रखने में मदद करता है। यह जीन पौधों द्वारा संश्लेषित प्रोटोक्लोरोफिलाइड की मात्रा को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • पौधों में इन जीन की मात्रा कम होने से प्रोटोक्लोरोफिलाइड सही तरीके से क्लोरोफिल में नहीं बदल पाता है। इसलिए इस जीन की पर्याप्त मात्रा में आवश्यक हो जाता है अन्यथा पौधों का विकास प्रभावित हो जाता है।
  • भविषय में इस जीन पर अधिक कार्य करके हम पौधों में क्लोरोफिल की मात्रा निर्धारित कर सकते हैं, हालांकि यह एक लंबी अवधि में ही संपन्न हों पायेगा और इस पर अभी बहुत अधिक रिसर्च और जेनेटिक टेक्नॉलजी के आवश्यकता होगी।