(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 28 July 2020


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राफेल की आवश्यकता और संभावनायें

  • पुराने समय में युद्ध लड़ने के लिए थल सेना की भूमिका ज्यादा होती थी। यह थल सेना पैदल सैनिकों, घुडसवार सैनिकों, आदि से मिलकर बनती थी। जिस सेना के पास प्रशिक्षित सेना और उस समय के हिसाब से आधुनिक हथियार होते थे वह विजयी होती थी।
  • जल सेना (समुद्री सेना) या नेवी का जब विकास हुआ तो उपनिवेशवाद के दौर का प्रारंभ हुआ। ब्रिटेन, फ्रांस, पुर्तगाल, जैसे देशों के इ्तिहास में नेवी की भूमिका महत्वपूर्ण थी। इस समय शासन उस देश का होता था जिसकी नेवी मजबूत होती थी।
  • एयरफोर्स के विकास एवं इसमें आधुनिकता के समावेश ने सेना के दो अन्य अंगों की भूमिका को कम कर दिया। आधुनिक समय में एयरफोर्स का महत्व सबसे ज्यादा है। यह सेना का वह भाग है जो कुछ ही मिनटों में युद्ध के परिणाम को बदल सकता है।
  • इस तरह यह स्पष्ट है सेना की भूमिका समय-समय पर बदलती रही है और आधुनिक तकनीकी ने उनके महत्व को बदला है और वर्तमान समय में सर्वाधिक महत्व उस तकनीकी की है जो सबसे उन्नत हो।
  • भारत सरकार ने आजादी के बाद एयरफोर्स के विकास के लिए भरसक प्रयास किये लेकिन भारत की सामरिक स्थिति के दृष्टिकोण से यह पर्याप्त नहीं था ।
  • हमारी अर्थव्यवस्था का आकार छोटा था, चुनौतियाँ ज्यादा थी, रक्षा के क्षेत्र में तकनीकी एवं रिसर्च और डेवलपमेंट कम था, बजट का एक छोटा भाग ही तीनों सेनाओं पर खर्च किया जा सकता था.... आदि कारणों से हम इसमें अग्रणी नहीं बन पाये।
  • भारत ने उपरोक्त परिस्थितियों में रूस का सहयोग प्राप्त किया और भारत की वायुसेना में रूस में बने विमान मिग-21, मिग-27 और सुखोई-30 जैसे विमान शामिल है।
  • मिग-21 और मिग-27 अब आउटडेटेड हो रहें हैं इसी कारण एयरफोर्स में विमानों की संख्या कम होकर 31 स्क्वाड्रन तक सिमट गयी है।
  • सामान्यतः एक स्क्वाड्रन में 12 से 18 लड़ाकू विमान शामिल किये जाते हैं। भारतीय परिस्थितियों के लिए एक स्क्वाड्रन में 18 विमान एक आदर्श अवस्था को दर्शाते है।
  • कई रिपोटर््स में इसका जिक्र किया गया है कि भारत को यदि चीन एवं पाकिस्तान के साथ दोनों मोर्चें पर युद्ध लड़ना पड़ जाये तो कम से कम 42 स्क्वाड्रन की जरूरत होगी।
  • भारत ने अंतिम बार 1996-1997 में सुखोई-30 के तौर पर आखिरी बार कोई लड़ाकू विमान खरीदा या इसलिए लंबे समय से अन्य विमानों की मांग की जा रही थी।
  • भारत सरकार ने अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए वर्ष 2007 में मल्टीरोल नए लड़ाकू विमानों के लिए टेंडर जारी किया।
  • इसके लिए अमेरिका ने F-16, AF-18, रूस ने मिग-35, स्वीडेन ने ग्रिपिन, यूरोपीय समूह ने यूरोफाइटर टाइफून तथा फ्रांस ने रॉफेल की दावेदारी पेश की।
  • 27 अप्रैल 2011 को आखिरी दोड़ में रॉफेल और यूरोफाइटर ही भारतीय आवश्यकता के अनुकूल पाये गये।
  • 31 जनवरी 2012 को सस्ती बोली व फिल्ड ट्रायल के दौरान राफेल के सबसे उपयुक्त साबित होने पर यह टेंडर रॉफेल को दिया गया।
  • उस समय की सरकार ने 126 रॉफेल जेट खरीदने की इच्छा प्रकट की जिसमें 18 तैयार विमान मिलने थे एवं 108 विमान भारत में हिंदूस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ बनाये जाने थे।
  • वर्तमन NDA सरकार ने 36 रॉफेल विमान खरीदने का समझौता किया जिन्हें अप्रैल 2022 तक भारत को सौंपा जाना था।
  • फ्रांस ने वर्तमान तनाव की बजह से उपजी भारतीय आवश्यकता को समझते हुए 5 राफेल विमान कल (27 जुलाई) फ्रांस से रवाना कर दिये हैं।
  • यह विमान 7 घंटे में UAE (अल दफ्रा एयरबेस) पहुँच चुके हैं और कल (29 जुलाई) यह अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंच जायेंगे।
  • इन विमानों को फ्रांस से भारत 17 गोल्डन एरोज कमांडिंग आफीसर के पायलट (भारतीय) भारत लेकर आ रहे हैं।
  • इन सभी पायलटों को फ्रांसीसी दसॉल्ट एविएशन कंपनी द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।
  • इन विमानों को 29 जुलाई या 30 जुलाई को वायुसेना में शामिल किया जायेगा।
  • रॉफेल की विशेषताएँ
  • यह लड़ाकू विमान एक मल्टीरोल फाइटर विमान है जिसे फ्रांस की डेसॉल्ट एविएशन नाम की कंपनी बनाती है।
  • रॉफेल-A कैटेगरी के पहले विमान ने 4 जुलाई 1986 को उड़ान भरा था जबकि C-कैटेगरी के विमान ने 1991 में उड़ान भरा था।
  • रॉफेल 4 कैटेगरी- A, B, C एवं M श्रेणी में एक सीट, डबल सीट और डबल इंजन के विमान बनाता है।
  • वर्ष 1986 से वर्ष 2018 तक यह कंपनी इसकी 165 यूनिट बना चुकी है जो अपनी क्षमता को प्रूव करने में सक्षम साबित हुए है।
  • यह हवा से हवा में, हवा से जमीन पर हमला करने के साथ-साथ परमाणु हमला करने में सक्षम है। यह मिसाइल दाग सकता है।
  • इसकी एक खास विशेषता यह भी है कि यह बेहद कम ऊँचाई पर उड़ान भर सकता है जिससे रड़ार से पकड़ में आने की संभावना कम हो जाती है।
  • यह जमीनी सैन्य ठीकाने के साथ-साथ विमानवाहक पोत से उड़ान भर मिसाइल से हमला कर सकता है।
  • यह एक साथ कई टारगेट पर नजर रख सकता है और प्रतिक्रिया दे सकता है।
  • यह 1 मिनट में 50 हजार फीट की ऊँचाई पर पहुँच सकता है तथा 36 हजार से 50 हजार फीट तक उड़ान भरने में सक्षम है।
  • इसकी रफ्रतार 1920 किमी/घंटा है जो अधिकतम स्पीड 2222 किमी/घंटा तक प्राप्त कर सकता है।
  • इसमें ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम लगा है जिससे लिक्विड ऑक्सीजन भरने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • यह इलैक्ट्रॉनिक स्कैनिंग राड़ार से थ्रीडी मैपिंग कर रियल टाइम दुश्मन की अवस्थिति पता करने में सक्षम है।
  • यह हर मौसम और ऊँचाई पर कार्य करने में सक्षम हैं और 1312 फीट के बहुत ही छोटे रनवे से उड़ान भरने में सक्षम है।
  • यह 24,500 किलोग्राम तक का भार और 17000 किलोग्राम फ्यूल ले जाने में सक्षम है।
  • यह अमेरिका के F-16 की तुलना में 0.79 फीट लंबा एवं 0.82 फीट ज्यादा ऊँचा है।
  • रॉफेल की लंबाई 15.30 मीटर, विंग की लंबाई 10.90 मीटर और जेट की ऊँचाई 5.30 मीटर है।
  • यह पहले से ही दुनिया की सबसे घातक मिसाइल मीटियोर के साथ-साथ स्टेल्थ तकनीकी से लैस है। इसमें भारतीय आवश्यकतानुसार और हथियार लगाये जा सकते हैं।
  • इसमें इजराइल का हेलमेट माउंट डिस्प्ले लगा है जो पायलट को कई तकनीकी खूबियों से लैश कर देता है।
  • इसमें रडार वार्निंग रिसीवर, लो बैंड जेमर, दस घंटे की फ्लाइट डाटा रिकार्डिंग और कई प्रकार के ट्रेकिंग सिस्टम लगा है।
  • परमानु हथियारों से लैस रफाल हवा से हवा में 150 किमी. तक मिसाइल दाग सकता है जबकि हवा से जमीन पर इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है।
  • रफाल ऊपर-नीचे, अलग-बगल यानी हर तरफ निगरानी करने में सक्षम है मतलब इसकी विजिविलिटी 360 डिग्री होगी।
  • यह 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान है जिसका प्रदर्शन अफगानिस्तान,इराक, सीरिया एवं लीबिया में चेक किया जा चुका है।
  • इसमें लगी मीटियोर या मीटोर मिसाइल दुश्मन की सीमा में प्रवेश किये बिना 150 किलोमीटर तक दुश्मन को तबाह कर सकती है।
  • इसके अलावा इसमें स्काल्प क्रूज मिसाइल भी लगाया जायेगा जिसका विकास यूरोपीय डिफेंस कंसोर्टियम MBDA द्वारा किया गया है। यह मूलतः 250 किमी. की दूरी तक मार कर सकती है लेकिन कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह दूरी इससे दोगुनी बतायी जा रही है तो कुछ में 60 से 70 किमी. ही।
  • भारत ने इस पर लगाने के लिए हैमर मिसाइल भी इमरजेंसी के तौर पर खरीदा जायेगा। यह एक मध्यम रेंज की एयर टू ग्रांड मिसाइल है जिसे फ्रांसीसी वायुसेना और नौसेना के लिए डिजाइन व निर्मित किया गया था।
  • हैमर मिसाइल भारत पहाड़ी क्षेत्र सहित किसी भी इलाके में किसी बंकर या ठिकाने पर हमला कर उसे ध्वस्त करने में सक्षम बनायेगा।
  • 36 रफाल से एयरफोर्स के दो स्क्वाड्रन का विकास होगा जो अंबाला और पश्चिम बंगाल के हासीमारा स्क्वाड्रन में लगाये जायेंगे।
  • रफाल भारत को पाकिस्तान के F-16 और JF-17 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों का मुकाबला करने में न सिर्फ सक्षम होगा बल्कि उन पर भारी पड़ेगा।
  • कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा है कि एक राफेल को रोकने के लिए दो F-16 विमानों की आवश्यकता होगी।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राफेल की कंपनी 50 साल तक के लिए फ्रेंच इंडस्ट्रीयल सपोर्ट भी देगी।
  • राफेल के ट्रेनर विमानों के टेल नंबर वायुसेना प्रमुख RKS भदौरिया के सम्मान में RB सीरिज के होंगे। रक्षा सौदे के समय यह उपसेना प्रमुख थे और इस सौदे में भारतीय दल का नेतृत्व व किया था।
  • क्या राफेल से हमारी सभी आवश्यकताएँ पूरी होंगी?
  1. राफेल उन्नत तकनीकी का है लेकिन संख्या कम है। हमारे 36 राफेल 36 जगह पर ही एक साथ लड़ सकते है अर्थात् यदि पाकिस्तान और चीन एक साथ युद्ध की परिस्थिति बनाते है तो उस समय हमारे लिए चुनौती बढ़ सकती है।
  2. चीन के पास फाइटर प्लेन की संख्या हमसे बहुत ज्यादा है और रफाल की तरह उसके पास भी 5वीं पीढी के लड़ाकू विमान है।
  3. राफेल बना-बनाया मिल रहा और आधुनिकी का हस्तांतरण नहीं हो रहा है जिससे हमारी निर्भरता फ्रांस पर बनी रहेगी।
  4. भारत के स्क्वाड्रन में अन्य विमान आउट डेटेड हो रहे है जिससे स्क्वाड्रन की संख्या घट रही है। यदि हमने विमानों की संख्या नहीं बढ़ायी तो इनकी संख्या घटकर 2022 तक 25 रह जायेगी। इसलिए हमें देश के अंदर विमानों के निर्माण की गति बढ़ानी होगी।
  5. हमें छोटे और हल्के फाइटर प्लेन की अधिक आवश्यकता है जिस पर हमें ध्यान देनें की आवश्यकता है।