(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 27 July 2020


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खालिस्तान एवं रिफ़रेंडम 2020

  • गुरू नानक जी का जन्म 1469 में लाहौर से 64 किमी. दूर हुआ था।
  • नानक जी का जन्म तो हिंदू परिवार में हुआ था लेकिन उनका आध्यात्मिक मन हिंदू धर्म को पूर्णतः स्वीकार नहीं कर पाया और हिंदू और मुस्लिम धर्म का व्यापक अध्ययन करने के बाद उन्होंने एक नये धर्म का मार्ग चुना। यह नया धर्म सिख धर्म कहलाया।
  • एक दिन नानक जी नदी में स्नान करने के लिए प्रवेश किये और गायब हो गये। लोगों ने समझा वह डूबकर मर चुके हैं लेकिन तीन दिन बाद नानक जी ‘‘ना कोई हिन्दू, ना कोई मुसलमान’’ कहते हुए नदी से बाहर आये। इसी घटना के बाद लोग उन्हें गुरू कहने लगे।
  • गुरू नानक देव जी ने घूम-घूमकर सिख धर्म की जानकारी देना प्रारंभ किया और इस धर्म की नींव को मजबूत किया।
  • गुरू नानक देव जी के बाद 9 गुरू और आये जिन्होंने सिख धर्म को बढ़ाया।
  • गुरू राम दास (चौथे गुरू) ने अमृतशहर की स्थापना 16वीं शताब्दी में की।
  • पाचवें गुरू अर्जन देव (Guru Arjan Dev) ने Harmandar Sahib (Golden Temple) को बनवाना प्रारंभ किया जो 1605 में बनकर तैयार हुआ। महाराज रंजीत सिंह ने इसके ऊपर सोने की परत चढ़वायी थी जिसके कारण यह स्थान गोल्डन टेंपल के नाम से जाना जाता है।
  • यहां आदि ग्रंथ की स्थापना भी की गई है, जो गुरू नानक देव के प्रवचनों का संकलन है। यह सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थान है।
  • धीरे-धीरे सिख समुदाय की संख्या बढ़ने लगी और उन्होंने अपने को कई सिख मिसल (misls) में विभाजित कर कई क्षेत्रें में शासन स्थापित कर लिया।
  • महाराजा रंजीत सिंह ने सभी मिसलों को मिलाकर सिख साम्राज्य की स्थापना की । इसकी राजधानी लाहौर को बनाया।
  • अंग्रेजों के साथ हुए एंग्लो-सिख लड़ाई में यह सिख साम्राज्य कई हिस्सों में विभाजित हो गया और बहुत से क्षेत्रें पर अंग्रेजों का भी शासन प्रारंभ हो गया।
  • 1920 में अकाली दल की स्थापना हुई जो सिख समुदाय के राजैतिक अधिकारों के लिए काम करती थी।
  • 1947 में विभाजन में पंजाब भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजित हो गया और सिख समुदाय न सिर्फ दो देशों के बीच विभाजित हुआ बल्कि विभाजन से ऊपजी हिंसा में कई लोगों की जान भी चली गई।
  • आजादी के बाद एक सिख बहुल राज्य के स्थापना की मांग की गई जिसे 1956 में गठित राज्य पुनर्गठन आयोग ने खारिज कर दिया।
  • इसके बाद इन्होंने अपने लिए अधिक स्वायत्तता की मांग की। यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि इस मांग में सभी सिख समुदाय शामिल नहीं थे।
  • इसी समय कुछ सिख लोगों द्वारा खालिस्तान की मांग की गई।
  • खालिस्तान का अर्थ होता है खाल्सा की भूमि अर्थात सबसे पवित्र भूमि (The Land of Pure)।
  • खालिस्तान एक सिख अलगाववादी आंदोलन है जो सिखों के लिए एक संप्रभु (स्वतंत्र) मातृभूमि बनाने की मांग करता है।
  • हालांकि खालिस्तान समर्थित एक बड़ा वर्ग यह भी मांग करता था कि यदि उन्हें अधिक स्वायत्तता मिल जाये तो वह अलग होने प्रयास नहीं करेंगे।
  • 1951 का पंजाब आज के पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश से मिलकर बना था। 1956 में हिमांचल प्रदेश को इससे अलग कर दिया गया। 1966 में पंजाब एवं हरियाणा भी अलग-अलग हो गये।
  • इसके बाद भी सिख समुदाय का एक वर्ग खालिस्तान की मांग करता है। इसके लिए विदेशों में रह रहे सिख समुदाय की मदद लेने का प्रयास कई बार किया जाता है ।
  • जगजीत सिंह चौहान ने UK, कनाड़ा, अमेरिका, में इसके लिए सिख समुदाय का समर्थन प्राप्त करने का कार्य प्रारंभ कर दिया।
  • 1971 के आस-पास अमेरिका में जगजीत सिंह ने खालिस्तान के स्वतंत्रता की घोषणा कर दी।
  • भारत में 1973 आनंदपुर साहिब प्रस्ताव अकाली दल और कई संगठनों के बीच बैठक कर प्रस्तुत किया।
  • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव में कहा गया था कि हरियाण के कुछ क्षेत्र को पंजाब के अंतर्गत आना चाहिए, चंडीगढ़ सिर्फ और पूर्णरूप से पंजाब का हिस्सा होना चाहिए , केन्द्र सरकार का हस्तक्षेप कम होना चाहिए तथा राज्य को अधिक अधिकार मिलने चाहिए....आदि।
  • इंदिरागांधी ने इसे एक अलगाववादी प्रस्ताव बताया और इसे खारिज कर दिया।
  • 1975 से 1977 तक इमरजेंसी के बाद केंद्र एवं राज्य दोनों स्थानों पर सत्ता परिवर्तन होता है। यहां (पंजाब) अकाली दल की सरकार बनी।
  • इसी समय Jarnail Singh Bhindranwale को कांग्रेस पार्टी द्वारा अकाली दल के प्रतिउत्तर में आगे बढ़ाया जाता है।
  • भिंडरावाले एक कट्टर सिख के रूप में अपना पहचान बना चुके थे। इन्हें Saint Soldier कहा जाता था ।
  • 1980 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनी और मुख्यमंत्री बने दरबारा सिंह। यह भिंडरावाले की गतिविधियों से नाखुश थे क्योंकि भिंडरावाले और उनके समर्थक हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
  • भिंडरावाले एवं उनके समर्थकों ने कई लोगों की हत्या कर दी । यह ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे जो इनके विचारों के विपरीत थे और उनका प्रभाव ज्यादा था।
  • भिंडरावाले को गिरफ्तार तो किया गया लेकिन दो दिन बाद छोड़ दिया गया। इसके बाद इनका कद और बढ़ गया।
  • धीरे-धीरे हिंदुओं की हत्या भी की जाने लगी।
  • भिंडरावाले के समर्थक हरविंदर साहब कांप्लेक्स में भी रहते थे और कई हिंसक गतिविधियों को अंजाम देते थे।
  • अप्रैल 1983 में इनके द्वारा DIG AS अटवाल की हत्या गोल्डन टेंपल की सीढ़ियों पर की गई ।
  • धीरे-धीरे भिंडरावाले और उसके समर्थकों ने गोल्डन टेंपल के अंदर बड़ी मात्र में हथियार इकट्ठे करने प्रारंभ कर दिये।
  • 15 दिसंबर 1983 को इन्होंने अकाल तख्त पर कब्जा कर लिया।
  • इंदिरागांधी ने वार्ता की पेशकश कर बात-चीत का प्रयास किया लेकिन यह वार्ता सफल नहीं हो पाई।
  • 1 जून 1984 को पंजाब में कर्फ्यू लगा दिया गया।
  • अब गोल्डन टेंपट को भिंडरावाले और उसके समर्थकों से मुक्त कराने की जिम्मेदारी आर्मी को दी गई। इसके लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) 3 से 6 जून को चलाया गया।
  • भिंडरावाले ने यहां पर कब्जा इसलिए कर रखा था क्योंकि यह धार्मिक जगह है और यहां पुलिस या आर्मी प्रवेश नहीं कर सकती थी।
  • 3 जून 1984 का दिन गुरू अर्जन देव का शहिदी दिवस था। जिसके वजह से यहां भीड़ ज्यादा थी, जिसे भिंडरावाले के समर्थकों ने रोक दिया था।
  • 5 जून को यहां संघर्ष बढ़ गया। और भिंडरावाले के समर्थकों ने टेंक गन, रॉकेट लांचर, मशीनगन और स्नाइपर के माध्यम से आर्मी पर हमला किया।
  • 6 जून को आर्मी ने टेंक का सहारा लिया और अकाल तख्त पर हमला किया गया और नियंत्रण स्थापित किया था।
  • आपरेशन ब्लू स्टार में भिंडरावाले और उसके कुछ समर्थकों को तो मार दिया लेकिन खालिस्तान का मुद्दा जिंदा रहा।
  • इंदिरा गांधी की हत्या, सिखों पर हमले के बाद कुछ सिख अलगाववादियों ने खालिस्तान की मांग के लिए कई तरह के प्रयास प्रारंभ कर दिये।
  • वर्ष 2018 से खालिस्तान फिर से चर्चा में बना हुआ था
  • न्यूयार्क स्थित एक संगठन Sikhs for Justice (SFJ) विगत कुछ वर्षों से रिफ्रेंडम 2020 की मुहिम चला रहा है।
  • SFJ एवं रिफ्रेंडम 2020 का उद्देश्य खालिस्तान की स्थापना है। एक संप्रभु पंजाब राज्य।
  • अमेरिका, कनाड़ा एवं UK के सिख समुदाय को वह इससे जोड़ने के लिए कई प्रकार की रैली एवं बैठकें आयोजित करता आया है।
  • भारत में SFJ को प्रतिबंधित किया गया है और इसके संस्थापक Gurpatwant Singh Pannu को आतंकी घोषित किया गया है। भारत में न तो इनकी वेबसाइट खुल सकती है नही किसी अन्य प्रकार का सोशल एकाउंट।
  • 13 जून 2014 को न्यूयार्क में पहली बार रिफ़रेंडम 2020 के समर्थन में रैली निकाली गई।
  • उसके बाद कनाड़ा, अमेरिका एवं यूरोप के विभिन्न देशों में इस प्रकार की रैलियाँ निकाली गईं।
  • भारत सरकार ने अमेरिका, कनाड़ा एवं यू.के. से इन रैलियों को प्रतिबंधित करने की मांग की लेकिन इन देशों ने अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए ऐसा नहीं किया।
  • इसी कारण भारत और कनाड़ा के संबंध भी कई बार प्रभवित हो चुके हैं। इसका अच्छा उदाहरण वर्ष 2018 में भारत आये कनाडा प्रधानमंत्री के दौरे के समय देखने को मिला और भारत ने इस दौरे को बहुत महत्व नहीं दिया।
  • भारत का कहना रहा है कि कनाड़ा की भूमि का प्रयोग अलगाववादी ताकतें करती है।
  • SFJ को पाकिस्तान, चीन एवं कश्मीरी अलगाववादियों को पूरा समर्थन मिलता है।
  • ‘रिफ़रेंडम 2020’ SFJ द्वारा कराये जाने वाला एक मतदान है जिसके माध्यम से SFJ यह बताना चाहता है कि एक बहुत बड़ा वर्ग एक संप्रभु पंजाब राज्य की मांग का समर्थन करता है।
  • यह रिफ्रेंडम वेबासाइट के माध्यम से करवाना चाह रहे हैं। जिसके लिए वह व्हाट्सएप एवं लोगों के संपर्क का सहारा ले रहा है।
  • इन्होंने कनाड़ा में रह रहे लोगों के लिए ओपन वोटिंग की बात की गयी थी हालांकि वहां की सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी।
  • भारत हर तरह से इस अलगाववाद को रोकना चाहता है लेकिन फिर भी यह नये-नये हथकंडे अपना लेते हैं।
  • इन्होंने अभी रसियन डोमेन की एक वेबासाइट रिफ़रेंडम 2020 का निर्माण किया है जहां यह लोगों से अपील कर रहे हैं कि अलग पंजाब के लिए मत दें।
  • रसियन डोमेन पर वेबसाइट का बनना चिंताजनक है क्योंकि वहां पर वेबसाइट का निर्माण तभी संभव हो पाता है जब सरकारी अनुमति प्राप्त हो।
  • चूंकि इस रिफ़रेंडम का मुख्य स्थल कनाड़ा है इसलिए कनाड़ा के प्रधानमंत्री ने भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए यह कहा है कि वह इस जनमत को मान्यता नहीं देंगे अर्थात जनमत कुछ भी हो वह उसको तवज्ओ नहीं देंगे।
  • SFJ यह मानता है कि यदि अधिक लोग पंजाब के लिए मतदान करते है तो वह फिर इस मुद्दे को यूनाइटेड नेशंस में उठायेगा और UN के माध्यम से भारत पर दबाव डलवायेगा कि भारत में इसके लिए मतदान हो।
  • यूनाइटेड नेसंश चार्टर का अनु- 1 और International Covenant on Civil and Political Rights (ICCPR) सभी व्यक्तियों को यह अधिकार देता है कि वह डिसाइड कर सकते हैं कि उन्हें किस सत्ता के द्वारा शासित होना है।
  • लेकिन इसके लिए जरूरी है कि यह मतदान वहां हो जहां मांग की जा रही है।
  • भारत में खालिस्तान की मांग कोई अस्तित्व नहीं रखती है और यहां के अधिकांश लोग इससे इत्तेफाक नहीं रखते हैं।