(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 25 November 2020


(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 25 November 2020



भारत में अब कॉरपोरेट सेक्टर चलाएंगे बैंक?

  • भारत का बैंकिंग क्षेत्र आजादी के बाद प्रमुख रूप से निजी हाथों में था। इन बैंकों का विनियमन कठिन था तथा सामाजिक-आर्थिक विकास में सहायोगी की भूमिका नहीं निभा रहे थे। इसके अलावा यह भी देखा जाता था कि यह बैंक लोगों से पैसे जमा स्वीकार करते थे और बाद में अपने आप को डिफॉल्टर घोषित कर बंद से जाते थे जिससे लोगों की जमा पूंजी डूब जाती थी और बैकों से लोगों का भरोस कम हो रहा था। 1947-1955 तक लगभग 300 छोटे-बड़े बैंक बंद हुए।
  • भारत सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में अपना हस्तक्षेप बढ़ाने के लिए 1949 में RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) का राष्ट्रीयकरण किया। वर्ष 1955 में इंपीरियल बैंक ऑफ इण्डिया राष्ट्रीयकरण उसका नाम भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंण्डिया रखा। वर्ष 1959 में भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम बनाकर 8 क्षेत्रीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, जो स्टेटे बैंक ग्रुप का हिस्सा बने।
  • 19 जुलाई 1969 को देश 14 अन्य प्रमुख बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया, जिसका 50 वर्ष 19 जुलाई 2019 को हुआ। पुनः 15 अप्रैल सन् 1980 को निजी क्षेत्र के 6 और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
  • 1980 के दशक के अंत तक आते-आते भारतीय अर्थव्यवस्था की गति पड़ने लगी थी इसीलिए कई प्रकार के सुधारों की आवश्यकता महसूस हुई, जिसमें बैंकिंग सेक्टर में सुधार भी शामिल था।
  • उदारीकरण निजीकरण, वैश्वीकरण (LPG मॉडल) की नीति के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने जनवरी 1993 में 13 नये घरेलू बैंकों को बैंकिंग गतिविधियाँ शुरू करने की अनुमति दी।
  • इसके बाद निजी बैंकों ने अधिक लोगों तक बैंकिंग सुविधाओं को पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। और कम NPA वाली पूंजी को बड़ी मात्रा में लोन के रूप में वितरित किया है।
  • भारत में कई औद्योगिक घराने जैसे-बजाज, टाटा, बिडला, अंबानी लंबे समय से बैंकिंग सेक्टर में प्रवेश की इक्षा लिये बैंठे है लेकिन RBI औद्योगिक घरानों को बैंक प्रारंभ करने का लाइसेंस देने से बचती रही है। अदरअसल अभी तक RBI का मानना था कि इससे उसका रेगुलेशन कमजोर होगा। लेकिन सरकार और एक बड़े वर्ग का मानना है कि औद्योगिक घरानों को बैंकिंग सेक्टर में लाना चाहिए।
  • कई औद्योगिक घराने NBFC के रूप में पहले ही वित्तीय सेवायें दे रहे हैं लेकिन बैंक खोलने की उनकी इक्षा पूरी नहीं हुई थी। लेकिन अब यह पूरी हो सकती है।
  • वर्तमान सरकार भी बैंकिंग सेक्टर में कई प्रकार के बदलाव करना चाहती है। सरकार वर्ष 2017 के बाद से बैंकों के एकीकरण (कंसोलिडेशन) की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही हैं इसी के तहत देना बैंक और विजया बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिला दिया गया।
  • कुछ समय पहले ही सरकार ने 10 PSB का आपस में विलय कर 4 बैंक बनाने की घोषणा की।
  • इस साल अगस्त में BRI ने सरकार को सलाह दी कि वह PSB में अपनी हिस्सेदारी बेचकर अल्पमत शेयरधारक बन जाये। इसी प्रकार का कुछ विचार नीति आयोग ने भी दिया। उसने तीन PSB-पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र का निजीकरण करने और साथ ही ग्रामीण बैंकों को इण्डिया पोस्ट में विलय करने की सलाह दी है। कुल मिलाकर सरकार की मंशा भी प्राइवेट बैंकों के आकार और संख्या में बढ़ावा देने की रही है।
  • RBI ने 12 जून, 2020 को निजी क्षेत्र के बैंकों के स्वामित्व संचालन एवं कॉर्पोरेट संरचना की समीक्षा करने के लिए लिए एक समिति/आंतरिक कार्य समूह का गठन किया।
  • इस आंतरिक कार्य समूह का गठन सेंट्रल बोर्ड के निदेशक पी के मोहंती की अध्यक्षता में किया गया।
  • इस समीति को निजी क्षेत्र के बैंकों के लिए स्वामित्व और कॉर्पोरेट ढांचें की समीक्षा करना था।
  • निजी क्षेत्र के बैंकों के लाइसेंसिंग से संबंधित दिशा-निर्देशों तथा स्वामित्व और नियंत्रण से जुड़े नियमनों की समीक्षा करने के साथ-साथ उपयुक्त सुझाव देने थे।
  • समिति को शुरूआती लाइसेंसिंग स्तर पर प्रवर्तकों की शेयरधारिता से संबंधित नियमों और शेयरधारिता घटाने की समय-सीमा की भी समीक्षा करना होगा।
  • लाइसेंसिंग के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं के लिए पात्रता संबंधी मानदंडों की समीक्षा करना।
  • इस आंतरिक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 20 नवंबर को सौंपी दी है। जिसमें जिम्न सिफारिशें की गई हैं।
  1. पहला महत्त्वपूर्ण सुझाव NBFC का बैंक के रूप में रूपांतरण से संबंधित है। इस सुझाव में कहा गया है किजिन NBFCs का Asset Size 50,000 करोड रुपये से ज्यादा होगा वह इसके लिए पात्र हो सकते हैं इसके लिए इस NBFC का कार्यकाल 10 साल पूर्ण हो चुका हो तभी यह संभव है।
  2. दूसरा सुझाव यह दिया गया है कि ऐसे पेमेंट बैंक जिनके पास तीन साल का अनुभव है उन्हें स्मॉल फाइनेंस बैंक में परिवर्तित किया जा सकता है।
  3. तीसरा महत्वपूर्ण सुझाव प्राइवेट सेक्टर के प्रमोटर स्टेक के संबंध में है। अभी तक यह प्रावधान है कि किसी बैंक के प्रमोटर को अपना हिस्सा 3 साल के भीतर 40 प्रतिशत करना हाता है और 15 साल में इसे 15 प्रतिशत तक सीमित करना होता है। आंतरिक वर्किंग ग्रुप/कमेटी ने इस संबंध में यह सुझाव दिया है कि अब प्रमोटर को 15 साल में अपनी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक नहीं करना होगा। वह अपनी हिस्सेदारी 26 प्रतिशत तक रख सकता है। इस तरह अब प्रमोटर के पास बैंक का अधिक स्वामित्व होगा।
  4. एक महत्त्वपूर्ण सुझाव यह दिया गया है कि बड़े कॉर्पोरेटर बैंक के प्रमोटर बन सकते हैं अर्थात बैंक खोल सकते हैं हालांकि इसके लिए बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 में परिवर्तन करना होगा, जिससे करने का सुझाव इस कमेटी के द्वारा दिया गया है। अमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि इस संदर्भ में RBI के अधिकार और रेगुलेशन को भी बढ़ाना होगा।
  5. स्मॉल फाइनेंस बैंक या पेमेंट बैंक 6 साल में अपने आप को शेयर कार्केट में लिस्टेड कर सकते हैं, जिससे पूंजी प्राप्त करना आसान हो जायेगा। हालांकि इसके लिए इनका नेटवर्क उतना होना चाजिए जितना यूनिवर्सल बैंक के लिस्टेड होने के लिए है। कमेटी ने यह भी सुझाव दिया है कि इस प्रकार के बैंक यदि 10 साल तक कार्य कर चुके हों तो भी उन्हें लिस्टिंग की अनुमति दी जा सकती है।
  6. मिनिमम इनिशियल कैपिटल रिक्वायरमेंट को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये करने का सुझाव यूनिवर्सल बैकिंग के संदर्भ में इस कमेटी ने दिया है। वहीं स्माल फाइनेंस बैंक के संदर्भ में यह राशि 200 करोड़ से बढ़ाकर 300 करोड रूपये करने की सिफारिश की है।
  7. एक प्रमुख सुझाव लाइसेंसिंग के संदर्भ में है। इसमें यह कहा गया है कि यदि कोई नयी छूट बैंक को खोलने या उसे ऑपरेट करने के संदर्भ में दी जाती है तो इसका फायदा पुराने बैंकों को भी मिलना चाहिए। इसके साथ ही यह भी कहा गया रेगुलेशन में जो भी परिवर्तन हों वह सभी बैंकों के संदर्भ में हों।
  • इस समय देश में 9600 से अधिक NBFCs (Shadow Banks) हैं लेकिन कुल वित्तीय कारोबार का लगभग 80 प्रतिशत 50 NBFC द्वारा किया जाता है।
  • 31 मार्च, 2020 तक हमारे देश के सभी NBFC का कुल Asset Size लगभग 51 लाख करोड़ रुपये है।
  • NBFC ने अपना विस्तार पूरे देश में किया हुआ है और लोगों तक इनकी पहुँच पहले से है, ऐसे में यह यदि बैंक के रूप में कार्य करते हैं तो बैंकिंग सेवाओं का तेजी से विस्तार हो सकता है।
  • यदि कोई NBFC बैंक के लिए आलाई करता है तो उसमें प्रमोतर की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से कम होना चाहिए।
  • अगले 10 साल में प्रमोटर को अपनी हिस्सेदारी 49 प्रतिशत से घटाकर 26 प्रतिशत करना होगा।
  • इस सुझाव का परिणाम यह होगा कि वह कार्पोरेट जिनका NBFC रूप में कार्य करने का अनुभव है वह बैंक खोल सकते है।
  • एक सुझाव इस संदर्भ में यह भी आया है कि नॉन-प्रमोटर शेयर होल्डर पर 15 प्रतिशत का यूनिफॉर्म कैप लगाया जा सकता हैं अर्थात ऐसा प्रमोटर 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा धारित नहीं कर सकता है।

आलोचना-

  1. RBI की वर्किंग ग्रुप द्वारा दिये गये सुझाव पर कई समीक्षकों आलोचकों ने इसकी आलोचना की है।
  2. आलोचकों का कहना है कि बड़े कार्पोरेट ही बैंक खोलेंगे तो अपनी आवश्यकता के लिए वह बैंक के पैसे का प्रयोग करेंगे। बड़े वित्तीय लोन यह कार्पोरेट ही बैंक से लेते है अब इन्हें खुद के बैंक से यह आवश्यकता पूरी होगी जिससे अन्य लोगों तक वित्त का प्रवाह नहीं हो पायेगा।
  3. RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और उपगवर्नर विश्ल अचार्चा ने भी इस सुझाव की आलोचना की है।
  • रघुरात राजन का कहना है कि आखिर इस समय क्या आवश्यकता है कि कार्पोटर सेक्टर को बैंक का भाग बनाया जाये। रघुराम राजन और विरल आचार्या ने कहा है कि कार्पोरेट सेक्टर इस समय बैंक में शामिल करना ठीक नहीं है। इससे वित्त का संकेंद्रण कार्पोरेट के पास हो जायेगा।
  • दूसरी चिंता है कि बैंक में बड़ी संख्या में लोग पैसा जमा करते है, जिसका प्रवाह लोगों से कॉर्पोरेट की तरफ हो जायेगा।
  • NBFC या कॉर्पोरेट जब बैंक के रूप में कार्य करती है तो इनका बैंकिंग अनुभव ठीक नहीं रहा है।
  • बड़े कार्पोरेट पर RBI का रेगुलेशन बहुत प्रभावी नहीं हो पायेगा और राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना बढ़ जायेगी।