Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 25 June 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 25 June 2020



H1B वीजा चर्चा मे क्यों ?

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद कई बार अमेरिका प्रथम (America First) की नीति को आगे बढ़ाया जिससे अधिक से अधिक अमेरिकी लोगों को रोजगार मिल सके !
  • अमेरिका एक ग्लोबल सर्विस प्रोवाइडर एवं सर्विस उपभोक्ता होने के साथ-साथ विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है !
  • इस अर्थव्यवस्था को यहां तक पहुंचाने मे अमेरिकी नागरिकों का योगदान तो सर्वाधिक है लेकिन बाहर से अमेरिका जाकर रोजगार प्राप्त करने वालों की संख्या भी कम नहीं है !
  • COVID -19 के कारण अप्रैल माह तक ही यहाँ 26 मिलियन लोग बेरोजगार हो गए थे जिनकी संख्या इस समय और भी ज्यादा हो गई है ।
  • 22 अप्रैल को ट्रंप सरकार द्वारा यह घोषणा की गई कि अब अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता दी जाएगी ! इसका अर्थ है प्रवासी कामगारों की संख्या सीमित होगी !
  • इसी प्रकार एक आदेश नए ग्रीन कार्ड को अगले 90 दिन तक जारी न करने के संदर्भ मे दिया गया !
  • अमेरिका में प्रत्येक साल हजारों लोग रोजगार प्राप्त करने के लिए जाते हैं !
  • बाहर से अमेरिका में आकर अस्थाई रूप से कार्य करने के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण एक चर्चित शब्द H1B वीजा है !
  • भारत एवं किसी अन्य देश से आकर अमेरिका में नौकरी/ रोजगार प्राप्त करने के लिए H1B वीजा प्राप्त करना होता है !
  • अमेरिका में रोजगार की दशाएं एवं वेतन अच्छा होने के कारण हर साल लाखों लोग इस वीजा के लिए आवेदन करते हैं जिसमें से न्यूनतम अर्हता सभी नियमों का पालन करने वाले लोगों में से लॉटरी सिस्टम के माध्यम से लोगों को चुना जाता है !
  • H1B वीजा के तहत यह नियम है कि नौकरी गंवाने वाले मजदूरों/ लोगों को दूसरी नौकरी खोजनी होती है या फिर देश छोड़ना है !
  • यह पहली बार 3 साल के लिए जारी किया जाता है लेकिन 6 साल तक के लिए बढ़ सकता है उसको अपने देश वापस आकर पुनः आवेदन करना होगा !
  1. H1B वीजा एक गैर अप्रवासी वीजा है जो संयुक्त राज्य अमेरिका में आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम की धारा 101 (15) के तहत दिया जाता है !
  2. यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विभिन्न व्यवसायों में विदेशी कामगारों को अस्थाई रूप से रोजगार देने की अनुमति देता है !
  3. अमेरिकी कानून के मुताबिक एक वित्तीय वर्ष में 65000 विदेशी नागरिकों को रोजगार के लिए H1B Visa दिया जा सकता है ! तथा इसके अलावा उच्च शिक्षण संस्थाओं में शिक्षा के लिए 20000 वीजा दिया जाता है।
  4. भारत और चीन के लोग इस H1B Visa का सर्वाधिक लाभ लेते हैं !
  5. अमेरिकी नियमानुसार H1B Visa के लिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को पहले अमेरिकी आव्रजन विभाग को इंटरव्यू देना पड़ता है !

इंटरव्यू में पूछे जाने वाले प्रश्न -

  1. यदि आपका मैनेजर आपको नौकरी से निकाल दे तो आप क्या करेंगे ?
  2. आपका प्रोजेक्ट घर बैठकर या अपने देश से पूरा नहीं किया जा सकता ?
  3. आप अमेरिका में रहकर एक कंपनी के लिए काम करेंगे या कई कंपनियों के लिए ?
  4. क्या हम आपका अकाउंट स्टेटमेंट देख सकते हैं ?
  5. भारत वापस जाने की क्या योजना है ? आपने कार्य के लिए USA को ही क्यों चुना ?
  6. आपको वीजा मिल जाता है तो आपकी कंपनी को इससे क्या फायदा होगा ?
  7. अमेरिका में आपके परिचय के कितने लोग रहते हैं ?
  8. क्या आपने चेक कर लिया है कि आपकी कंपनी विश्वसनीय है ?
  • H1B वीजा धारकों में एक रुझान वहां की नागरिकता प्राप्त करने की होती है इसलिए 24% वीजा धारक प्रत्येक वर्ष ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं ! सामान्यतः वीजा अवधि में ही लोग इसके लिए अप्लाई कर देते हैं जिससे वापस ना जाना पड़े !
  • H1B वीजा का सर्वाधिक लाभ भारत एवं उसके पड़ोसी देशों द्वारा उठाया जाता है !
  • वर्ष 2020 21 के लिए अमेरिकी सरकार को प्राप्त आवेदनों में से 67% आवेदन भारतीयों के थे !
  • अमेरिका, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन जैसे देशों के लिए रेमिटेंस का बहुत बड़ा स्रोत है !
  • 2 माह पहले 23 अप्रैल से 23 जून तक नए H1B वीजा को जारी करने पर प्रतिबंध लगाया गया था जिसे अब 31 दिसंबर 2020 तक बढ़ा दिया गया है ! इसका मतलब है अब वर्ष 2021 में ही नए वीजा जारी किए जाएंगे !
  • भारतीय कंपनियों पर प्रभाव ?
  • भारतीय लोगों के रोजगार पर प्रभाव ?

Anti Dumping Duty

  • वर्ल्ड स्टील एसोसिएशन (WSA) द्वारा वर्ष 2019 में जारी एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा स्टील उत्पादक देश बन गया था ! भारत ने उत्पादन में जापान को पीछे छोड़ा था !
  • कुल वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 2019 में 51.3% है अर्थात दुनिया के आधे स्टील का उत्पादन सिर्फ चीन द्वारा किया जाता है !
  • भारत के बाद क्रमश: जापान, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, रूस आदि देशों का नाम आता है !
  • राष्ट्रीय इस्पात नीति 2017 एवं मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के कारण भारत में इस्पात के उत्पादन और खपत दोनों में भारी वृद्धि हुई है !
  • भारत सरकार द्वारा बुनियादी ढांचों के निर्माण पर जोर और प्रतिबद्धता, मेक इन इंडिया, स्मार्ट सिटी तथा रेलवे लाइन विस्तार, आदि कारणों से इसकी खपत बढ़ी है !
  • भारत में 50% से ज्यादा इस्पात का उत्पादन मध्यम एवं छोटे आकार के उद्योगों द्वारा किया जाता है ! जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बहुत मजबूती से टिक नहीं पाते हैं ।
  • इसलिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा जब निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं का पालन नहीं करती है तो इसका खामियाजा हमारे घरेलू उत्पादनकर्ताओं को भुगतना पड़ता है !
  • Anti-Dumping Duty 3 शब्दों से मिलकर बनी एक आर्थिक कार्य प्रणाली का हिस्सा है !
  • Dumping (डंपिंग)- किसी वस्तु के उत्पादनकर्ता देश द्वारा जब उस वस्तु का निर्यात किसी देश को उत्पादन लागत से कम कीमत पर या उत्पादक देश के घरेलू कीमत से कम कीमत पर किया जाता है तो इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डंपिंग के नाम से जाना जाता है !
  • डंपिंग से आयातक देश का घरेलू उत्पादक प्रभावित होते हैं और वह प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाते हैं !
  • इससे घरेलू अर्थव्यवस्था की रक्षा करने के लिए आयातक देश के पास इस डम्पिंग को रोकने के लिए एंटी डंपिंग शुल्क लगाने का विकल्प होता है !
  • यहां यह ध्यान देने योग्य है कि Anti Dumping एक स्वच्छंद शुल्क नहीं है अर्थात इसे गहन जांच परख के बाद अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ही लगाया जाएगा !
  • भारत में यह निर्णय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की जांच शाखा व्यापार उपचार निदेशालय (Directorate General of Trade Remedies-DGTR) द्वारा लिया जाता है !
  • चीन, वियतनाम और दक्षिण कोरिया पर अधिरोपित किया गया एंटी डंपिंग शुल्क 5 वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी होगा और इसमें शुल्क की दर 13.07 डॉलर प्रति टन से लेकर 173.1 डॉलर प्रति टन हो सकता है !
  • इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने चीन, वियतनाम और दक्षिण कोरिया से कुछ प्रकार के विशिष्ट इस्पात उत्पादों के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क (Anti Dumping Duty)लगाने की घोषणा की है !
  • हाल ही में DGTR ने अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला कि चीन, वियतनाम और दक्षिण कोरिया द्वारा अपने स्टील संबंधी उत्पादों का निर्यात भारत में सामान्य से भी कम मूल्य पर किया गया, जिसे घरेलू उत्पादकों को नुकसान हुआ ! इसी कारण एंटी डंपिंग शुल्क को लगाया गया है !
  • सरकार के इस कदम का उद्देश्य घरेलू निर्माताओं एवं उत्पादको की रक्षा करना है !
  • सरकार ने कुछ समय पहले ही यह निर्णय लिया था कि हमें आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे ले जाने के लिए आयात में कमी लाना होगा !
  • कुछ समीक्षक इसे भारत-चीन तनाव से भी जोड़कर देख रहे हैं ! उनका कहना है कि यह चीन के लिए एक संकेत हो सकता है !
  • हाल ही में कोयला के लाइसेंसिंग की बात की गई जो लौह इस्पात उद्योग के लिए सहायक हो सकता है !

6 PM Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 25 June 2020


Arms Trade Treaty क्या है ?

  • अफ्रीका महाद्वीप, एशिया महाद्वीप, दक्षिण अमेरिका और उत्तरी अमेरिका के कुछ देशों में आंतरिक सशस्त्र संघर्ष, सामूहिक संघर्ष, विस्थापन, आतंकवाद आदि की जड़े बहुत गहरी है और यह जड़े इसलिए सूखती नहीं हैं क्योंकि इन्हें आवश्यक हथियार और युद्ध सामग्री समय समय पर मिलती रहती है !
  • आज आधुनिक हथियारों की पहुंच छोटे-छोटे अपराधी संगठनों तक हो गई है जो यह बताता है कि इनके व्यापर पर बहुत सख्त नियंत्रण नहीं है !
  • वर्ष 2006 में स्वयं संयुक्त राष्ट्र महासभा ने स्वीकार किया कि पारंपरिक हथियारों के हस्तांतरण हेतु एक सामान्य अंतर्राष्ट्रीय मानक की अनुपस्थिति दुनिया भर में सशस्त्र संघर्ष, लोगों के विस्थापन, अपराध और आतंकवाद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देती है !
  • हथियारों के इस प्रकार के हस्तांतरण से वैश्विक शांति, स्थिरता, सामाजिक- आर्थिक विकास, सुरक्षा आदि सब इससे प्रभावित होते हैं !
  • इन्हीं समस्याओं को देखते हुए UN महासभा ने हथियारों के हस्तांतरण हेतु एक सामान्य अंतर्राष्ट्रीय मानक की स्थापना करने वाली एक संधि की आवश्यकता महसूस की ।
  • विभिन्न सम्मेलन एवं बैठकों में इसके लिए रूपरेखा तैयार की गई और 2 अप्रैल 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शस्त्र व्यापार संधि (Arms Trade Treaty - ATT) को अपना लिया जो 24 दिसंबर 2014 को लागू हो गई !
  • अब तक 130 देशों द्वारा इस पर हस्ताक्षर किया जा चुका है तथा 103 देशों ने इसे लागू कर दिया है !
  • ATT एक बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय संधि है जो पारंपरिक हथियारों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करने के लिए प्रतिबद्ध है !
  • इसका मुख्य उद्देश्य घातक हथियारों को अपराधियों, मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं तथा संघर्षरत समूहों तक पहुंचने से रोकना है !
  • इस संधि के तहत छोटे हथियार से लेकर टेंक, लड़ाकू विमानों और युद्ध पोतों के व्यापार को विनियमित किया जा सकता है !
  • इसके तहत सदस्य देशों पर यह प्रतिबंध होता है कि वह ऐसे देशों, संगठनों को हथियार ना दें जो आतंकवाद, नरसंहार या मानवता विरोधी गतिविधियों में लिप्त है !
  • यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि संप्रभु देशों को प्राप्त आत्मरक्षा के अधिकार में यह संधि कटौती नहीं करती है ! अर्थात उन्हें हथियार खरीदने की कोई सीमा नहीं हैं ।
  • भारत-चीन जैसे देश इसके अभी तक सदस्य नहीं थे तो अमेरिका इस संधि से बाहर हो गया है !
  • हाल ही में चीन ने घोषणा की है कि वह संयुक्त राष्ट्र की इस संधि का भाग बनेगा !
  • SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) के आंकड़ों के अनुसार चीन अमेरिका के बाद हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है !
  • चीन के द्वारा एशिया महाद्वीप, अफ्रीका महाद्वीप, मध्यपूर्व के साथ साथ यूरोपीय देशों एवं अमेरिका तथा रूस जैसे देशों को भी बेचा जाता है !
  • चीन ने यह कहा कि वह अपनी वैश्विक जिम्मेदारी के प्रति सजग है इसलिए वह शांति और स्थायित्व को विश्व में बढ़ावा देने के लिए इस संधि से जुड़ेगा !
  • चीन ने कहा कि वह ऐसे किसी क्षेत्र में हथियार का निर्यात नहीं करेगा जहां अशांति या तनाव है !
  • चीन ने कहा है कि वह बहुपक्षवाद (Multilateralism) का समर्थक है !
  • चीन ने आगे कहा है कि वह शुरू से ही अवैध व्यापार के खिलाफ रहा है इसलिए वह केवल संप्रभु देशों (Sovereign State) के साथ ही व्यापार करता है ! अर्थात वह ऐसे संस्थाओं और संगठनों से शुरू से ही व्यापार नहीं करता है ! जो हिंसा या आतंकवाद जैसी गतिविधियों में शामिल हैं।
  • इसके साथ ही चीन ने यह भी कहा है कि सभी देशों को हथियारों के व्यापार पर नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए और दूसरे देशों के आंतरिक मामलों मे हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए !
  • अप्रैल 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश को इस महत्वपूर्ण से बाहर कर लिया था ! जबकि बराक ओबामा ने न सिर्फ इसे अपनाया था बल्कि विस्तार के पक्षधर थे !
  • अमेरिका ने बाहर आने का कारण यह बताया कि इससे अमेरिका के आंतरिक कानून और द्वितीय संविधान संशोधन द्वारा प्राप्त किए गए अधिकारों का हनन भी होता है !
  • दूसरे संविधान संशोधन द्वारा अमेरिका में प्रत्येक व्यक्ति को हथियार रखने का अधिकार मिला हुआ है !
  • इसके अलावा अमेरिका हथियार उत्पादक लॉबी द्वारा भी इसका विरोध किया जा रहा था !
  • अमेरिका प्रशासन एवं राजनीति में सबसे अधिक प्रभाव इस लॉबी की है !
  • भारत ने वर्ष 2014 में ही अपना मत स्पष्ट कर दिया था कि यह संधि तभी प्रभावी होगी जब आतंकवादियों तक इनकी पहुंच रुके !
  • भारत का मानना है कि इस संधि में आतंकवादियों और नॉन स्टेट एक्टर पर नियंत्रण हेतु कोई सख्त नियम नहीं है !
  • अमेरिका का इस संधि से बाहर होना और चीन द्वारा संधि का भाग बनना चीन की एक कूटनीतिक पहल का हिस्सा है जिससे वह संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर अमेरिका के बराबर आ सके !
  • यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि संधि में शामिल कई देशों द्वारा कई संघर्षशील गुटों को हथियार दिया जाता रहा है !