(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 25 July 2020


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डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान

  • डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान असम के तिनसुकिया शहर से लगभग 12 किमी- उत्तर में स्थित राष्ट्रीय उद्यान है।
  • 350 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ यह राष्ट्रीय उद्यान समुद्रतल से औसतन 118 मीटर ऊँचा है।
  • इस उद्यान के उत्तर में ब्रह्मपुत्र और लोहित नदियाँ और दक्षिण में डिब्रू नदी प्रवाहित होती है।
  • डिब्रू-सैखोवा पार्क असम राज्य सरकार द्वारा 1986 में एक वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था।
  • वर्ष 1999 में भारत सरकार ने इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया।
  • यहा पार्क विश्व के 19 जैवविधता हॉट-स्पॉट वाले क्षेत्रें में से एक है।
  • यहाँ नदियों द्वारा जल उपलब्ध कराये जाने के कारण नमी पर्याप्त रहती है इसीकारण यहां आर्द्र वन प्रचुर मात्र में पाये जाते हैं। इसके अलावा पतझण वन एवं घास के मौदान भी पर्याप्त मात्र में फैले हैं जिससे यहां की जैवविविधता संरक्षित रहती है।
  • यह पूर्वोप्तर भारत का सबसे बड़ा दलदलीय वन है।
  • इस राष्ट्रीय उद्यान को मुख्य रूप से सफेद पंखों वाले देवहंस (Wood Duck) को उसके आवासीय क्षेत्र में संरक्षित करने के लिए स्थापित किया गया था। बाद में जंगली घोड़े और चमकदार रंगीन जंगली सफेद वाले बतख का भी यह केंद्र बन गया।
  • रॉयल बंगाल टाइगार, जंगली बिल्ली, स्लॉथ बीयर, गंगा डाल्फिन, पिग टेल्ड मकॉक, असमिया मकाक, होलोक गिब्बन, एशियाई हाथी, जंगली सुअर, सांभर, हॉग डीअर जैसे जीव इस राष्ट्रीय उद्यान में पाये जाते है।
  • यहां सरी-सृप और 350 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां भी पाई जाती है।
  • अरूणाचल प्रदेश की सीमा के करीब स्थिति यह पार्क स्टिलवेल रोड़ समेत द्वितीय विश्वयुद्ध के कब्रिस्तानों की समीपता की वजह से जाना जाता है।
  • इस समय यह राष्ट्रीय उद्यान किसी अन्य कारण से चर्चा में बना हुआ है। चर्चा का कारण यह है कि राष्ट्रीय हरित अधिकारण (NGT-National Green Tribunal) ने इण्डियन ऑयल कंपनी की इस पार्क के अंदर सात उत्खनन ड्रिलिंग साइटों को पर्यावरणीय मंजूरी दिये जाने संबंधित संस्थाओं/इकाइयों (पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रलय, OIL एवं असम राज्य प्प्रदूषण नियंत्रण एव राज्य जैवविविधता बोर्ड) से जवाब तलब किया है।
  • NGT के समक्ष एक याचिका लगाई गई थी जिसमें कहा गया था कि OIL को दिये गये पर्यावरणी अनुमती में सार्वजनिक सुनवाई तथा जैवविविधता मूल्यांकन (Biodiversity Assessment) अध्ययन संबंधी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया है। इस तरह यह पर्यावरणी प्रभाव आकलन (Environment Impact Assessment EIA)-2006 का उल्लंघन है।
  • याचिकाकर्ता की तरफ से यह भी कहा गया कि यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2017 में दिये गये उस आदेश का भी उल्लंघन है जिसमें कोर्ट ने राष्ट्रीय उद्यान में खनन तथा उत्खनन गतिविधियों पर पूर्णतः रोक लगाने का आदेश दिया था।
  • इस पार्क में सात ड्रिलिंग प्रोजेक्ट के संदर्भ में EIA की रिपोंर्ट कहती है कि भारत में ड्रिलिंग परियोजनाओं में विस्फोट की संभावना नगण्य है। जबकि Baghjan में हुई गैस विस्फोट की घटना इसके बिल्कुल उलट है जिसमें रूक-रूक कर कई बार विस्फोट हो चुका है।
  • OIL ने अपनी स्पष्टीकरण में कहा है कि उसकी उत्खनन ड्रिलिंग परियोजना डिब्रू सैखोवा के अंतर्गत (अंडर द नेशनल पार्क) आती है न कि राष्ट्रीय उद्यान में (इन द नेशनल पार्क)
  • OIL अपने पुराने बयानों में भी यह कहता आया है कि वह ERD (Extended Reach Drilling) का प्रयोग करके तेल का उत्खनन करेगा।
  • ERD के माध्यम से पार्क के अंदर कोई ड्रिलिंग गतिविधि किये बिना राष्ट्रीय उद्यान के सतह के नीचे लगभग 3.5 किमी- की गहराई तक पहुँच जायेगा।
  • ERD तकनीक का उपयोग जलाशय की सतह या क्षेत्रें से दूर हाइड्रोकार्बन लक्ष्यों को दूर करने के लिए किया जाता है।
  • इस तकनीकी का उपयोग करके किसी कुएं तक 4 किमी- की गहराई तक ड्रिल किए बिना प्रवेश किया जा सकता है।
  • यह एक अत्याधुनिक तकनीक है जहां ड्रिलिंग राष्ट्रीय पार्क के सीमांकित क्षेत्र से बाहर औसतन 1.5 किलोमीटर से अधिक दूरी पर किया जायेगा।
  • OIL का मानना है कि इससे डिब्रू सैखोवा नेशनल पार्क को कोई पर्यावरणीय चुनौती नहीं आयेगी।
  • OIL का कहना है कि वह पार्क के अंदर प्रवेश नहीं करेगा और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन नहीं करेगा।
  • OIL का कहना उसने ERD तकनीक के आधार पर ही वर्ष 2016 में सात कुओं के संदर्भ में अनुमती प्राप्त की थी।
  • असम का यह क्षेत्र अवसादी शेलों से निर्मित है जिसके कारण यहां पेट्रोलियम के भंडार पर्याप्त पाये जाते है। यदि OIL को मिली अनुमति वापस ली जाती है तो यहां के पेट्रोलियम का दोहन नहीं हो पायेगा क्योंकि असम के अधिकांश क्षेत्रें में पर्यावरणीय चुनौतियां जायेंगी।
  • पिछले साल उच्चतम न्यायालय ने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं समीपवर्ती नदी क्षेत्रें के जलग्रहण क्षेत्र में खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
  • कोर्ट ने कहा था कि यहां होने वाले अवैध खनन और निर्माण कार्य से यहां की पारिस्थितिकी प्रभावित होती है।
  • वर्ष 2018 में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने भी खनन पर यह कहा था कि राष्ट्रीय वन उद्यान की सीमा के 10 किमी- के भीतर बिना अनुमति के कोई खनन कार्य नहीं होगा।
  • NGT ने राजस्थान के रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में खनन पर कुछ समय पहले रोक लगाया था।