(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 25 December 2020


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TSO-KAR 42वीं रामसर साइट

आर्द्रभूमि या वेटलेंडस (Wetlands) क्या होते हैं?

  • नमी या दलदली भूमि वाले क्षेत्र को आर्द्रभूमि या वेटलेंडस (Wetlands) कहते है। यह ऐसे स्थान होते हैं जहां वर्ष भर आंशिक रूप से या पूर्णतः जल भरा रहता है, जिससे यहां भरपूर नमी बनी रहती है।
  • हमारे आस-पास में दिखने वाले दलदली वन भूमि (Swamps) दलदली झाड़ी युक्त स्थल (Marsh), घास युक्त दलदली क्षेत्र, जल प्लावित घास क्षेत्र (bogs), खनिज युक्त नम भूमि (Fens), सड़े गले पौधों के जमाव वाली आर्द्रभूमि (Peatland), नदी, झील, बाढ़ क्षेत्र, मेंग्रोव क्षेत्र, डेल्टा क्षेत्र, धान के खेत, कोरल रिफ (Coral Reefs), क्षेत्र, बांध नहरें, झरने आदि पारिस्थितिक तंत्र आर्द्रभूमि के ही विभिन्न रूप हैं।
  • समुद्री जल, जहां भाटा जल की गहराई 6 मीटर से अधिक नहीं हो वह भी आर्द्रभूमि के अंतर्गत आते हैं।

आर्द्रभूमि महत्वपूर्ण क्यों है?

  1. यह ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां स्थलीय एवं जलीय दोनों पारिस्थितिकी तंत्र एक साथ मिलती है, इसके कारण यहां उच्च जैविविधिता पाई जाती है।
  2. आर्द्रभूमि क्षेत्र को बायोलॉजिकल सुपर मार्केट कहा जाता है। यह नाम इसलिए दिया जाता है क्योंकि ये विस्तृत भोज्य जाल (Food Webs) का निर्माण करते हैं।
  3. जिस प्रकार से हमारे शरीर में जल को शुद्ध करने का कार्य किडनी द्वारा किया जाता है, ठीक उसी प्रकार वेटलेंडस का पारिस्थितिक तंत्र जल चक्र को स्वच्छ बनाये रखता है और प्रदूषित अवयवों को ढानकर अलग करता रहता है। इसीकारण आर्द्रभूमि को Kidneys of the landscape अर्थात ‘भूदृश्य के गुर्दे’ कहा जाता है।
  4. आर्द्रभूमि मत्स्य उत्पादन, फसल उत्पादन आदि के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होते हैं इसकारण आजीविका के लिए भी इनका महत्व ज्यादा है।
  5. इनका पर्यावरणीय महत्व सर्वाधिक है। यह बाढ की विभिषिका को कम करते हैं, जल और वायु को स्वच्छ करते है, भूमिगत जल को रिचार्ज करते हैं, खनिजों का शोधन करते हैं, मरुस्थलीकरण को रोक्ति हैं, पृथ्वी और उसके वायुमंडल के तापमान को नियंत्रित करते हैं, जीवों के प्रजनन एवं विकास के लिए अनुकूल दशा उत्पन्न करते हैं, कार्बन अवशोषण कर ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करते हैं।
  • आर्द्रभूमि विश्व के लगभग 3 प्रतिशत भूमि पर विस्तृत है परंतु यह विश्व भर के सभी वनों के मुकाबले दो गुनी मात्र में कार्बन को अवशोषित करता है।
  • प्रवासी पक्षियों के दृष्टिकोण से इनका महत्व बहुत ज्यादा है।
  • पर्यटन के दृष्टिकोण से भ्ी इनका महत्व बहुत ज्यादा होता हैं लोकटक झील जो एक प्रकार वेटलेंडस दुनिया का एकमात्र तैरता वन्य प्राणी बिहार है।

आर्द्रभूमि (Wetlands) के संरक्षण का प्रयास

  • 2 फरवरी 1971 को ईरान के कैस्पियन सागर के तट पर अवस्थित शहर रामसर में वेटलेंडस को संरक्षित करने के लिए एक समझौता हुआ जिसे रामसर समझौता या कन्वेंशन के नाम से जाना जाता है। कुछ लोगों द्वारा इसे आर्द्रभूमि संधि (Wetlands ब्वदअमदजपवद) के नाम से भी जाना जाता है। यह संधि वर्ष 21 दिसंबर 1975 में प्रभावी हुई।
  • यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमियों के संरक्षण और उनके समुचित उपयोग के संदर्भ में मार्गदर्शन प्रदान करती है।
  • इसके हस्ताक्षरकर्ता पार्टीज या सदस्यों की संख्या 171 है और यह विश्व की बड़ी संधियों में से एक है।
  • 1971 में जब यह समझौता हुआ तो सदस्य देशों से कहा गया कि वह अपने किसी एक आर्द्रभूमि को नामित करें, जिससे रामसर सूची का निर्माण किया जा सके। यहां से धीरे-धीरे इस सूची में शामिल आर्द्रभूमियों की संख्या बढ़ने लगी।
  • भारत की तरफ से 1981 में चिल्ल्का झील को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया। यह पहली भारतीय रामसर साइट्स थी।
  • रामसर साइट्स या कन्वेंशन आर्द्रभूमि के संरक्षण अनेक संस्थाओं/संगठनों का सहयोग लेता है। यह संस्थाएं- Bird Life International, IUCN, इंटनरनेशनल वॉटर मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, Wetlands इंटरनेशनल, WWF, WWT, CBD, UNCCD, CMS एवं CITES है।
  • रामसर सूची में शामिल करने का आधार- इस सूची में उन्हीं आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है जिनका पर्यावरणीय एवं जैविक महत्व बहुत ज्यादा हो।
  • प्रकृति एवं पारिस्थितिक दृष्टिकोण से अत्याधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र वहां पर 20000 से अधिक जलीय जीव एवं पक्षी निर्भर हों
  • एक आर्द्रभूमि जो किसी एक एक प्रजाति के कुल संख्या के 1 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता हो
  • जहां मछलियों की अत्यधिक प्रजातियां हों
  • वहां मिलने वाले जीवों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो रहा हो
  • ऐसे आर्द्रभूमि जो किसी भी प्रकार का खास महत्व रखते हो।
  • इस संधि में यह प्रावधान किया गया है कि आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। इसीलिए किसी क्षेत्र की आर्द्रभूमि का महत्व जब ज्यादा होता है तो उसे एक सूची में शामिल कर दिया जाता है, जिसे रामसर सूचि (Ramsar Sites) के नाम से जाना जाता है। इसका अधिकारिक नाम- Wetlands of International Importance है।
  • इस सूची में शामिल स्थानों/आर्द्रभूमियों को संरक्षित करने के लिए बड़े कानून/नियम आरोपित किये जाते हैं और उसे वैश्विक सहयोग भी प्राप्त होता है।
  • इस सूची में इस समय विश्व के 2400 से अधिक साइट्स को शामिल किया जा चुका है जिनका क्षेत्रफल लगभग 2-5 मिलियन वर्ग किलोमीटर है।
  • भारत ने 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किया। भारत में आर्द्रभूमियों संरक्षण के लिए केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रलय को नोड़ल मंत्रलय या एजेंसी बनाया गया है।
  • 24 दिसंबर 2020 को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण मंत्रलय ने जानकरी दी कि Tso Kar वेटलेंड्स को भारत के 42वें रामसर साइट्स के रूप में शामिल कर लिया गया है।
  • Tso Kar वेटलेंडस कांप्लेक्स दक्षिणी लद्दाख में स्थित है। इसके पश्चिम से मनाली-लेह सड़क मार्ग जाता है। त्सो मोरीरी लद्दाख का पहला रामसर साइट्स था, जो Tso Kar के दक्षिण में है। इस तरह लद्दाख में अब दो रामसर साइट्स हो गये हैं।
  • Tso Kar लेह से 160 किमी. दक्षिण है तथा श्री नगर से 540 किमी. पूर्व में है। पूर्वी लद्दाख का क्षेत्र Changthang क्षेत्र कहलाता है, उसी में यह झील स्थित है। इसके पूर्व में Pangongo Tso झील अवस्थित है, जिससे होकर LAC गुजरती है। यहां यह समझना आवश्यक है कि यह (Pangong Tso) रामसर साइट्स नहीं है।
  • इस कांप्लेक्स का निर्माण मुख्य रूप से दो झीलों से मिलकर होता है। उत्तर में Tso Kar झील है, जिसका जल उच्च खारा (Hypersaline) है। इसका विस्तार 1800 हेक्टेयर में है। इसके दक्षिण में दूसरी झील Startsapuk Tso है, जो मीठे पानी की झील है। यह अपेक्षाकृत होटी है, जिसका विस्तार 438 हेक्टेयर में है।
  • Tso Kar का अर्थ White Lake है। दरअसल इस झील के किनारे वाले भाग पर नमक की परत बिछी हुई दिखाई देती हैं।
  • भूगर्भ शास्त्रियों का मानना है इस कांप्लेक्स का विस्तार एक समय एक बहुत बड़े क्षेत्र में हुआ करता था। लेकिन अब सिकुड गया है।
  • Tso Kar दुनिया की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित रामसर साइट्स में से एक है।
  • लद्दाख, तिब्बत के खानाबदोश (Nomadic) लोगों को चांग्पा (Changpa) के नाम से जाना जाता है। इनके लिए Tso Kar नमक प्राप्ति का प्रमुख क्षेत्र है। तिब्बत की सीमाएं जब तक बंद नहीं थीं तब तक यहां के लोग यहां से नमक का निर्यात तिब्बत के लोगों को करते थे।
  • चांग्पा समुदाय इस झील के 3 किमी. दक्षिण में अभी भी निवास करते हैं। यह पश्मीना शॉल के ऊन के लिए प्रसिद्ध है। इनका यहां का निवास स्थान Thugje के नाम से जाना जाता है।
  • यहां वार्षिक तापांतर एवं दैनिक तापांतर उच्च पाया जाता है। गर्मी के समय यहां का तापमान 30ºC तक जबकि ठण्डी के समय यहां का तापमान –40ºC तक पहुंच जाता है।
  • इन प्रमुख झीलों के पास छोटे-छोटे तालाबनुमा (छिछले जल क्षेत्र) क्षेत्र हैं जहां घास, एवं कुछ वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। जहां पक्षियों को भोजन एवं आवास मिल पाता है।
  • इस क्षेत्र के प्रमुख जंतु Kiang, Tibetan Gazelles, Tibetan Wolves और Foxes हैं। इसके अलावा याक, घोडे़ (छोटे आकार के) एवं हिमालय गिलहरी (Himalayan Marmots) पाये जाते है। अधिकांश जीवों का संकेंद्रण दक्षिणी कांप्लेक्स में है। कभी-कभी इस क्षेत्र में Snow Leopard भी देखे जा सकते हैं। यह उच्च भोज्य श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करते हैं, इस कारण इनकी उपस्थिति यहां के अच्छे पारिस्थितिकी का चिन्ह माना जाता है।
  • Tso Kar बेसिन A1 कैटेगरी का IBA (Impartant Bird Area) Bird Life International द्वारा घोषित किया गया है। यहां मध्य एशिया के कई पक्षी आते है। इसके अलावा यह Black-necked Crane तथा Great Crested Grabe, Brown-headed Gull, Bar-headed Geese, Ruddy Shelduck एवं अनेक पक्षियों का प्रजनन क्षेत्र है जिसके कारण यह IBA की कैटेगरी के ऊपर आ जाता है।

भारत में गिरता TFR

  • कुल प्रजनन दर (TFR) से तात्पर्य एक महिला के संदर्भ में अपने प्रजनन जीवन (15 से 49 वर्ष) में जीवित जन्म की संख्या से है। TFR जितना अधिक होगा जनसंख्या उतनी अधिक होगी।
  • प्रतिस्थापन स्तर प्रजनन- बच्चों की वह औसत संख्या जो एक महिला के पास अपने आप को अगली पीढ़ी के साथ प्रतिस्थापन करने के लिए आवश्यक होता है। यह वह संख्या है जिसमें एक पीढ़ी बिना पलायन के स्वयं को दूसरी पीढ़ी के साथ प्रतिस्थापित कर लेती है। सामान्य शब्दों में मरने वाले लोगों का स्थान भरने के लिए उतने ही बच्चे पैदा हो जाते हैं। यह स्तर अधिकतर देशों में 2.1 माना जाता है, हालांकि मृत्युदर अधिक होने पर यह अधिक हो सकता है।
  • TFR जब बहुत अधिक होता है तो जनसंख्या विस्फोट की समस्या उत्पन्न होती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के हाल में आये आंकड़ों से पता चलता है कि कुल प्रजनन दर में गिरावट आ रही है, जिसके कारण भारत की जनसंख्या स्थिरता की ओर बढ़ रही है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने "यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज डे" पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के परिणाम को जारी किया। इस सर्वेक्षण में भारत और इसके राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जनसंख्याए स्वास्थ्य और पोषण के बारे में विस्तृत जानकारी शामिल है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण जनसंख्या की गतिशीलता के संदर्भ में पूरे देश में व्यापक पैमाने पर आयोजित किया जाने वाला राष्ट्रीय सर्वेक्षण है, जिसे कई राउंडस में पूरा किया जाता है। इसका आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रलय के प्रबंधन के अधीन होता है, जिसकी नोडल एजेंसी अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) है।
  • 5वें राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में 6.1 लाख सैंपल घरों में एकत्र किए गए हैं। जिसमें जनसंख्या, स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और पोषण से संबंधित संकेतकों पर जानकारी एकत्र करने के लिए घरेलू स्तर पर साक्षात्कार लिए गए हैं।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एनएचएफ़एस के 5वें दौर के आंशिक आंकड़ों को ही जारी किया है। इन आंकड़ों में बताया गया है कि 205-16 में जारी किए गए चौथे दौर के आंकड़ों की तुलना में इस बार वैक्सीन की आपूर्ति में काफी वृद्धि देखी गयी है।
  • पहले चरण में 17 राज्यों और पांच केंद्रशासित प्रदेशों (असम, बिहार, मणिपुर, मेघालय, सिक्किम, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, केरल, लक्षद्वीप, दादर और नगर हवेली और दमन और दीव) के परिणामों को ही जारी किया गया है।
  • शेष 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े आंकड़े दूसरे चरण में जारी किए जाएंगे। इन राज्यों में COVID-19 के कारण सर्वेक्षण का कार्य निलंबित कर दिया गया था। इसे नवंबर में फिर से शुरू किया गया है और मई 2021 तक पूरा होने की उम्मीद है।
  • TFR में गिरावट के कई कारण हो सकते हैं लेकिन इसमें गिरावट का एक प्रमुख कारण आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों के प्रयोग में बढ़ोत्तरी को माना गया है। NFHS-3 और NFHS-4 में जहां गर्भनिरोधक उपायों के उपयोग में कमी देखी गई थी।
  • शहरी क्षेत्रें में TFR में गिरावट आ रही है, जिसके कारण जनसंख्या स्थिरता के प्रयासों में सफलता मिल सकती है। सर्वेक्षण में शामिल 22 राज्यों में से 19 राज्यों में TFR प्रतिस्थापन स्तर से कम पाया गया है।
  • बिहार में TFR जहां 3.0 है वहीं सिक्किम में सबसे कम 1.1 है।
  • सर्वेक्षण में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 12 से 23 महीने के बच्चों के टीकाकरण कवरेज में काफी सुधार पाया गया है। महिला सशक्तिकरण संकेतक (बैंक खाते वाली महिलाओं सहित) में काफी प्रगति हुई है।
  • 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में कमी हुई है।
  • वहीं समानांतर रूप से राष्ट्रीय राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्वास्थ्य सर्वेक्षण के पहले चरण के दौरान सर्वेक्षण किए गए 22 राज्यों में से 16 राज्यों में 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों कम वजन और उम्र के अनुसार कम लंबाई एवं कम शारीरिक वृद्धि दर्ज की गई।
  • NFHS-4 (2015-16) की तुलना में इस बार 15 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नवजात मृत्यु दर (NMR) कम हुई है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey-NFHS) के बारे में
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) सम्पूर्ण भारत में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के सन्दर्भ में भारतीय परिवारों के एकत्र किए गए विभिन्न नमूनों का एक सर्वेक्षण है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर प्रजनन, शिशु और बाल मृत्यु दर, परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रजनन स्वास्थ्य, पोषण, एनीमिया, स्वास्थ्य और परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता की जानकारी प्रदान करता है।

एनएफएचएस के प्रत्येक क्रमिक दौर के दो विशिष्ट लक्ष्य हैं:

  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य एजेंसियों द्वारा नीतिगत कार्यक्रम और अन्य उद्देश्यों की पूर्ति हेतु आवश्यक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण का डेटा प्रदान करना
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मुद्दे के महत्वपूर्ण उभरते पर जानकारी प्रदान करना।
  • एनएफएचएस निम्नलिखित प्रमुख संस्थानों के सहयोग से तैयार किया जाता है:
  • अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस), मुंबई,
  • ORC Macro, मैरीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • ईस्ट-वेस्ट सेंटर, होनोलुलु, संयुक्त राज्य अमेरिका
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MOHFW), द्वारा इस सर्वेक्षण के लिए IIPS को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया है, जो NFHS के लिए समन्वय और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए जिम्मेदार है।
  • पहला राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-1) 1992-93 में आयोजित किया गया था।