Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 24 June 2020


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S-400 की आवश्यकता

  • 1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश की स्वतंत्रता के समय भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) पर हमला कर पाकिस्तान की सैनिक अक्षमता को बता दिया था !इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन थे !
  • इस युद्ध में अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ देने तथा भारत को इसका खामियाजा भुगतने की बात कही !
  • इसके बाद अमेरिका ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर को हिंद महासागर में भेजने का आदेश दिया ! कुछ समय बाद इस प्रकार का आदेश U.K. द्वारा भी दिया गया !
  • धीरे-धीरे अमेरिका और पाकिस्तान का साथ देने वाले देशों की संख्या दर्जनों में पहुंच गई !
  • अमेरिका का परमाणु हथियारों से संपन्न एयरक्राफ्ट भारत के करीब पहुंच रहा था !
  • भारत में इसका मुकाबला करने के लिए INS विक्रांत को रवाना कर दिया! लेकिन भारत इस सैन्य गठजोड़ में थोड़ा कमजोर पड़ने लगा !
  • भारत ने रूस (सोवियत संघ) से संपर्क किया और इस संपर्क ने हिंद महासागर की आबोहवा ही बदल दी !
  • रूस ने तुर्की, ईरान और कई देशों को धमकी दी कि यदि वह इस संघर्ष में शामिल होंगे तो अंजाम बुरा होगा फलस्वरूप चीन और अन्य बहुत से देशों ने अपने कदम पीछे खींच लिए !
  • रूस ने अपने परमाणु हथियार संपन्न एयरक्राफ्ट कैरियर और पनडुब्बी को भेजकर U.K. के कैरियर एयरक्राफ्ट को घेर लिया और अमेरिकी एयरक्राफ्ट को आगे ना बढ़ने की धमकी दी जिससे अमेरिका को अपने कदम रोकने पड़े !
  • यह पूरा घटनाक्रम आजादी से 1970 के दशक तक भारत और रूस के परिपक्व संबंधों की कहानी बयान करता है !
  • 1970 के दशक के बाद भी दोनों देशों के संबंध 21वीं सदी के प्रारंभ तक काफी मजबूत रहे !
  • वर्ष 2000 के बाद खासकर 2008 के बाद भारत के संबंध अमेरिका के साथ भी मजबूत हुए !ऐसे में अमेरिका रूस में हल्की दूरी बनी !
  • वर्तमान समय में अमेरिका और रूस दोनों भारत के अच्छे मित्रदेश हैं लेकिन उसकी रूस की विश्वसनीयता कई बार अमेरिका से ज्यादा दिखती है !
  • यही कारण है कि भारत अपने इस मजबूत मित्र के साथ अपने संबंधों को हर हाल में बनाए रखना चाहता है !
  • रूस का नजरिया भी भारत को लेकर सकारात्मक रहता है, जिसका कारण ऐतिहासिक के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन करना है !
  • चीन इसी मामले में भारत से पिछड़ जाता है !
  • भारत चीन सीमा तनाव के बीच इसी कारण रक्षा मंत्री अपने तीन दिवसीय रूस दौरे पर हैं ! इस दौरे के केंद्र में भारत का प्रयास रूस से S-400 डिफेंस सिस्टम प्राप्त करना है !
  • S-400 रूस द्वारा विकसित दुनिया की सबसे उन्नत और प्रभावी मिसाइल डिफेंस सिस्टम है !
  • S-400 दरअसल S-300 का अपग्रेडेट वर्जन है जिसका पहली बार परीक्षण 2007 में हुआ था !
  • इसका पूरा नाम S-400 Triumf है जिसे नाटो देशों में SA-21 ग्रोलर के नाम से जाना जाता है !
  • यह प्रतिरक्षा प्रणाली (डिफेंस सिस्टम) दुश्मन के एयरक्राफ्ट या विमान मिसाइल को हवा में मार गिराने के साथ-साथ दुश्मन के क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी नष्ट करने की क्षमता रखता है !
  • 400 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम यह डिफेंस सिस्टम किसी भी देश को अभेद बना सकती है| !
  • यह दुश्मन के मिसाइल, विमान, ड्रोन का पता 600 किलोमीटर के दायरे में उनके ही क्षेत्र (दुश्मन) मे पता लगा कर 5 मिनट के अंदर एक्टिव हो सकती है !
  • यह 100 से 300 तक हवाई टारगेट को भाप सकती है तथा 36 लक्ष्यों पर एक साथ 30 किलोमीटर की ऊंचाई में निशाना साध सकती है !
  • यह अमेरिका के सबसे उन्नत F- 35 विमान को भी मार गिराने में सक्षम है !
  • इस एक डिफेंस सिस्टम में 8 लांचर, 2 रडार तथा एक कमांड सेंटर होता है !
  • इसकी एक खास विशेषता स्टोल्थ तकनीकी से विकसित विमानों का पता लगाने में सक्षम है !
  • वर्तमान समय में भारत और पाकिस्तान के साथ जिस प्रकार का तनाव है और पड़ोसी देशों के सुर जिस प्रकार बदल रहे हैं ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि भारत अपनी रक्षा प्रणाली को मजबूत करें !
  • रूस के द्वारा S-400 डिफेंस सिस्टम भारत को देने का प्रस्ताव बहुत पहले आया था लेकिन लेटलतीफी की प्रशासनिक अड़चनों केकारण यह भारत को आज तक प्राप्त नहीं हो पाया है !वहीं चीन ने इसे प्राप्त कर लिया है और अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर लिया है !
  • अक्टूबर 2018 में भारत एवं रूस के मध्य इस रक्षा प्रणाली के पांच यूनिट के खरीद हेतु 5 अरब डॉलर का समझौता हुआ था लेकिन अमेरिका के CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act)के तहत प्रतिबंध की बात नियम ने इसे प्राप्त करने में विभव किया !
  • दरअसल CAATSA के कारण रूस को होने वाला पेमेंट विलंब हुआ !
  • यह उम्मीद की जा रही थी कि कोरोनावायरस के कारण थोड़ा विलंब हो सकता है और दिसंबर 2021 तक भारत को इसकी सप्लाई कर पाएगा !
  • भारत और चीन के साथ बढ़ते तनाव के कारण इसकी जल्दी आपूर्ति की मांग कर रहा है !
  • इसके अलावा भारत अब मल्टी यूटिलिटी हेलीकॉप्टर की भी मांग कर सकता है ! भारत को 2014 में ही रूस 60 यह हेलीकॉप्टर देना चाहता था लेकिन अब तक यह नौकरशाही की फाइलों में दबा है !
  • यदि यह हेलीकॉप्टर भारत के पास होते तो जो सैनिक गलवान घाटी में मेडिकल हेल्थ ना मिलने के कारण शहीद हुए उन में से कुछ जवानों को बचाया जा सकता था !
  • इसी प्रकार का एक समझौता रिफाइल निर्माण को लेकर भी हुआ था और उसके लिए अमेठी में ज्वाइंट बेंचर भी स्थापित हुआ था लेकिन उत्पादन अभी फाइलों में अटका हुआ है !

LIC का IPO

  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की स्थापना वर्ष 1956 में भारतीय संसद द्वारा भारतीय जीवन बीमा अधिनियम पारित करके की गई थी !
  • इसका मुख्यालय मुंबई में है और यह भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है !
  • LIC ना सिर्फ एक बड़ी कंपनी के रूप में है बल्कि यह बीमा बाजार में एक बेंच मार्क के रूप में काम करती है !
  • LIC ने वर्ष 2018- 19 में 9.4% की वृद्धि की थी जिससे उसकी कुल संपत्ति बढ़कर 31.11 लाख करोड़ रुपए हो गई थी !
  • LIC को 2018- 19 में सिर्फ नई पॉलिसियों से मिलने वाला प्रीमियम ही डेढ़ लाख करोड़ रुपए का था !
  • 2019 में बीमा बाजार में LIC की हिस्सेदारी 74% ज्यादा थी !
  • LIC में सरकारी हिस्सेदारी 100% है !
  • इस बार के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने LIC में सरकार की कुछ हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया था !
  • सरकार LIC मे विनिवेश कर इसे और पेशेवर बनाना चाहती है ! इसी के लिए सरकार द्वारा LIC का IPO जारी करने की घोषणा की गई थी !
  • IPO के तहत कोई कंपनी पूंजी जुटाने के लिए पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपने शेयरों की बिक्री करती है इसके लिए कंपनी को किसी एक्सचेंज में सूचीबद्ध होना होता है और सूचीबद्ध होते ही कंपनी पब्लिक लिमिटेड कंपनी बन जाती है और इसके बाद शेयरों की खरीद - बिक्री प्रारंभ हो जाती है !
  • सरकार ने LIC का IPO लाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है देश के सबसे पुराने और सबसे बड़ी बीमा कंपनी होने के कारण इसका IPO देश का सबसे बड़ा IPO होगा !
  • वित्त मंत्रालय द्वारा हाल ही में LIC के प्रस्तावित IPO की प्रक्रिया में परामर्श देने के लिए फार्मो, निवेश बेक्रो और वित्तीय संस्थाओं से सलाह आवेदन मांगा है !
  • सरकार को अपनी लगभग 10% हिस्सेदारी की बिक्री से 80000 से 90,000 करोड़ रुपए तक प्राप्त हो सकता है !
  • LIC के कर्मचारी और कई समीक्षकों द्वारा सरकार की इस नीति का विरोध भी किया जा रहा है और निजीकरण की बात कही जा रही है !
  • सरकार ने इसे विनिवेश बताया है और निजीकरण की बात का खंडन किया है !
  • निजीकरण तब होता है जब सरकार अपनी हिस्सेदारी 50% से कम कर ले या फिर एक प्रमोटर के पास बड़ी हिस्सेदारी पहुंच जाए !