Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 24 January 2020


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भारत से दूर जाता म्यांमार

  • म्यांमार भारत का एक मुख्य पड़ोसी देश है। जो दक्षिण पूर्व एशिया के अंतर्गत आता है। दोनों देशों की सीमा 1600 किमी. है।
  • भारत के अलावा इसकी सीमाएं बांग्लादेश, चीन, लाओस एवं थाइलैण्ड से लगती है।
  • यह देश इस समय रोहिंग्या शरणार्थियों की वजह से चर्चा में बना हुआ है।
  • म्यांमार के खिलाफ गैंबिया ने International Court Justice में केस किया है और रोहिंग्या समुदाय के नरसंहार का आरोप लगाया है।
  • भारत के लिए एक चिंताजनक खबर म्यांमार की चीन के साथ बढ़ती निकटता के रूप में सामने आयी है।
  • पिछले हफ्ते चीन के राष्ट्रपति Xi - Jinping म्यांमार की यात्रा की और अपनी छोटी सी यात्रा में शि-जिनपिंग में म्यांमार के साथ 33 एग्रीमेंट किये।
  • यह दोनों देशों की समीपता को दिखाता है।
  • यह समीपता हाल के वर्षो में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है।
  • 2001 के बाद किसी चीनी राष्ट्राध्यक्ष का यह पहला दौरा है। हालांकि शि- जिनपिंग उपराष्ट्रपति रहते हुए 2009 में यात्रा कर चुके हैं।
  • 1948 में आजाद हुए बर्मा के पहले प्रधानमंत्री U. NU थे। इन्होने म्यांमार को चारों ओर कांटों से घिरी लौकी के रूप में बताया।
  • ऐसी स्थिति में किसी देश के लिए किसी एक देश का पक्ष लेना कठिन होता है इसीलिए भारत की तरह म्यामार ने भी Non- Alignment की नीति अपनाई।
  • 1965 में यहाँ एक परिवर्तन आया और यहाँ मिलिट्री शासन लागू हो गया ।
  • इसके बाद पश्चिम के देशों के साथ म्यांमार के संबंध खराब हो गये क्योंकि यह देश अपने आप को लोकतंत्र का समर्थक मानते हैं।
  • इस बीच चीन के साथ म्यांमार के संबंध मजबूत होने लगे क्योंकि वहाँ लोकतंत्र के आधार पर संबंध कायम करने की कोई नीति नहीं है।
  • 1990 के दशक में चीन के साथ बढ़ती निकटता से भारत सचेत हुआ और भारत ने संबंध मधुर करने की रणनीति बनाई।
  • धीरे.धीरे विकसित देशों ने भी चीन के समीप पहुँच चुके म्यांमार को साधने का प्रयास किया। इसी क्रम में 2012 में बराक ओबामा ने म्यांमार का दौरा किया।
  • रोहिंग्या विवाद के बाद फिर से चीन के साथ संबंध पुराने रूप में बनने लगे।
  • चीन हमेशा म्यांमार के साथ खड़ा होता है। और रोहिंग्या के संदर्भ में म्यांमार के पक्ष का समर्थन करता है।
  • राजनीतिक समीकरण के साथ वित्त और निवेश जैसे आर्थिक समीकरण के संदर्भ में चीन म्यांमार के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो जाता है।
  • अभी शि-जिनपिंग के दौरे में इन्ही कारणों को देखते हुए एक दूसरे के साथ गवर्ननेंस का अनुभव शेयर करने, 2+2 लेवल मीटिंग जारी रखने, म्यांमार-चीन कम्यूनिटी को आगे बढ़ाने जैसे समझौते हुए।
  • चीन.म्यांमार इकोनोंमिक कॉरिडोर को और विकसित करने पर भी सहमति बनी।
  • KALADAN PROJECT
  • यह भारत एवं म्यामार के बीच एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।
  • यह एक मल्टि-ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट है। इसमें ट्रांसपोर्ट समुद्र, नदी एवं स्थल मार्ग को जोड़ा जायेगा।
  • इसमें कोलकाता बंदरगाह को Sittwe Seaport से जोड़ा जायेगा।
  • सितवे से सामान सड़क के माध्यम से मिजोरम तक पहुँचाया जायेगा।
  • हमें पता है कि उत्तर पूर्व को जोड़ने का एक प्रमुख रास्ता सिलिगुड़ी कॉरिडोर है।
  • इस प्रोजेक्ट से हमें एक वैकल्पिक रास्ता मिल जायेगा।

नौकरी कौशल तथा अर्थव्यवस्था की पुनर्जीवित के लिए बजट निर्माण

  • देश के अर्थव्यवस्था के इंजन को भाप देकर आगे बढ़ायेगा या वर्तमान स्थिति और खराब हो सकती है, यह आने वाले केंद्रीय बजट पर निर्भर करेगा, इस पर युवाओं का भविष्य भी निर्भर है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 में पिछले 45 वर्षो में दर सबसे ज्यादा है, जिसमें शहरी युवाओं की बेरोजगारी तो अपने खतरनाक स्तर 22% पर है, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पेरिओडिक लेबर फोर्स सर्वे रिपोर्ट) के अनुसार यह कई समस्याओं में से एक है।
  • 15 वर्ष तथा इससे अधिक आयुवर्ग की श्रम में भागीदारी 46.5% पर आ गई है जिसमें शहरी युवाओं की भागीदारी 37.7% से भी कम है।
  • जो लोग रोजगार में लगे हैं उनमें से भी बहुत लोगों को बहुत कम वेतन मिलता है अर्थात वे रोजगारयुक्त गरीबी में फंसे हुए हैं।
  • लम्बे समय से चल रही मंदी के पीछे का कारण रोजगार न होना है, जिसमें सरचनात्मक कारकों ने भी आग में घी का काम किया है।
  • वित्त वर्ष 2019-2020 की दूसरी तिमाही में ळक्च् विकास दर 4.5% रही जो पिछले 6 सालों में सबसे कम है, इसके पीछे का कारण निजी उपभोग तथा निवेश में कमी है।
  • सफल निवेश GDP में 30% से भी कम है जो पिछले 15 वर्ष में औसतन 35% कम है इतना ही नहीं निजी क्षेत्र में क्षमता का उपयोग 70% से 75% तक कम हो पा रहा है।
  • इस स्थिति से निपटने के लिए आगामी बजट में विकास तथा रोजगार को गति प्रदान करने के लिए प्रावधान करने चाहिए, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए पी.एम. किसान तथा मनरेगा जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जा सकता है। हालांकि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चालू वर्ष में पी.एम. किसान का बजटीय आवंटन अ-प्रयुक्त हो जायेगा।
  • हम जानते हैं कि किसान भूमिहीन मजदूर अपनी आय का बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं, ऐसे में इनकी आय बढ़ाने से तुरंत मांग बढ़ेगी, इससे अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में मांग में वृद्धि होगी जिससे अर्थ व्यवस्था में तेजी आयेगी।
  • इसके अलावा सड़क निर्माण, सिंचाई परियोजनाएं आदि ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को प्रोत्साहित करके ग्रामीण बेरोजगारी कम किया जा सकता है।
  • मंदियों में खेतों से एकीकृत रूप में जोड़ने से फलों सब्जियों पर लोगों का खर्च बढ़ेगा, जिससे मुद्रास्फीति के प्रभाव में कमी आयेगी।

शहरी रोजगार को बढ़ाना

  • कृषि के बाद निर्माण क्षेत्र रोजगार देने में दूसरा स्थान रखता है जिससे लगभग 5 करोड़ लोग रोजगार पाते हैं।
  • निर्माण क्षेत्र से सीमेंट स्टील जैसे 200 इससे जुड़े हुए क्षेत्रों में तेजी आती है।
  • किन्तु बुनियादी ढ़ाँचे के अभाव में निर्माण क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है कई रियल एस्टेट परियोजनाएं तो कानूनी विवादों के कारण बंद है, ये विवाद घर खरीदारों एवं डेवलपर्स के बीच है, ये विवाद उधारकर्ताओं तथा डेवलपर्स के बीच है, तथा ये विवाद प्रवर्तन निदेशालय तथा डेवलपर्स के बीच है, जिससे कई लाख करोड़ रूपये के घर फंसे हैं।
  • इससे भी खराब स्थिति कई प्रधिकरण जैसे रियल स्टेट नियामक प्रधिकरण नेशनल कंपनी लॉ ट्रिप्यूनल और उपभोक्ता अदालतों की है, जिससे परियोजनाओं का फिर से शुरू होना मुश्किल हो जाता है।?
  • गैर बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों की स्थिति NPA के कारण बहुत खराब है जिससे वे ऋण नहीं दे पाती हैं।
  • इस रियल स्टेट सेक्टर को पुनर्जीवित करने के लिए होमलोन टैक्स पर छूट दी जा सकती है। सरकार के द्वारा लगभग 25000 करोड़ रूपये का एक फंड का उपयोग उन सभी परियोजनाओं के निपटारा के लिए करना चाहिए। जो लगभग 80% पूरा हो चुका हो तथा NCLT में भी न फंसा हो, हालांकि अलग से एक स्वायत्त प्रधिकरण की स्थापना भी एक विकल्प हो सकता है।
  • आवास एवं बुनियादी ढ़ांचे पर निवेश का अर्थव्यवस्था में व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है, इस संदर्भ में हाल ही में सरकार द्वारा लांच की गयी 102 करोड़ की परियोजना नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) स्वागत योग्य कदम है, यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो यह बुनियादी ढ़ांचे में निवेश को अगले 5 सालों में 2 से 2.5 (GDP) बढ़ा देगा।
  • यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि छप्च् प्रोजेक्ट में सरकार 60% निवेश की अपेक्षा निजी क्षेत्र से करती है जबकि सरकारी विभागों तथा निर्माण कंपनियों के बीच अनुबंध संबंधी विवादों के कारण निजी क्षेत्र द्वारा निवेश जोखिम भरा हो गया है, जिससे बुनियादी ढ़ाचे के क्षेत्र में निजी निवेश बहुत कम है।
  • NIP में राज्यों से भी वित्त की अपेक्षा की गयी है, किन्तु GST अस्थिरता आदि के करण से राज्यों की स्थिति पहले से ही खराब है, इसलिए GDP का 1.11% से भी अधिक NIP पर खर्च करना चाहिए।
  • नई सड़कों , रेल पटरियों एवं शहरी विकास परियोजनओं के लिए बोली लगाना तथा अनुबंध करना एक लम्बी प्रक्रिया है, यही कारण है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कई परियोजनाओं को चालू वित्तीय वर्ष में फंडिंग नहीं कर सकी, ऐसे में हमें उन परियोजनाओं को पूरा करने पर बल दिया जाना चाहिए जो अभी अंडर कॉन्सट्रक्शन हैं, क्योंकि रोजगार पैदा करने तथा अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा बनाये रखने के लिए परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है।
  • MSME क्षेत्र में भी समस्या है जिसमें कुछ उत्पादों पर ळक्ज् दर अधिक है, तथा सरकार के पास सलाना लगभग 20000 करोड़ रूपये इनपुट टैक्स क्रेडिट (ऐसा पैसा जो MSME GST के साथ सराकर को देती है जिसे सरकार को बाद में वापस करना होता है। ) के रूप में फंस जाता है, ऐसे में MSME के व्यापार लागत में वृद्धि हो जाती है, जबकि हम जानते हैं, कि MSME सेक्टर अकेले ही 11 करोड़ लोगों को रोजगार देता है।
  • निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए कौशल तथा कार्य का अनुभव अपेक्षित है, जबकि लोगों में यह गलत धारणा है कि अच्छी जोब के लिए विश्वविद्यालय की डिग्रियां चाहिए। यह गलत धारणा सरकार द्वारा लोगों को रोजगारोन्मुख कौशल दे पाने में विफलता का परिणाम है।
  • इस प्रकार जनसांख्यिकी लाभांश को बोझ बनने से रोकने के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है, साथ ही बजट भी ऐसा हो जो युवाओं को कम्पनियां आन साइट प्रशिक्षण देने में सक्षम हो तथा जिला स्तर पर शिक्षण संस्थानों तथा दूरस्त शिक्षा प्रणाली के द्वारा किया जा सकता है।

क्या है ? नेशलन इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (NIP) प्रोजेक्ट

  • हाल ही में भारत सरकार द्वारा NIP को लान्च किया गया है, जिसमें 102 करोड़ रूपये अवसंरचनात्मक क्षेत्रों मे निवेश किया जायेगा, जिसमें 24% वित्त ऊर्जा क्षेत्र पर, 19% रोड पर, 16% शहरी विकास, 13% रेलवे पर खर्च किया जायेगा। इनमें से 39% वित्त केन्द्र तथा 39% वित्त राज्य तथा शेष निजी क्षेत्र निवेश करेंगे।