(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 24 December 2020


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केयर्न एनर्जी और भारत सरकार का विवाद चर्चा में क्यों है?

  • केयर्न एनर्जी पाब्लिक लिमिटेड कंपनी यूके बेस्ड यूरोप की एक बड़ी कंपनी है जो तेल और गैस का खोज और व्यापार करती है। यह लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचिबद्ध है। इस कंपनी की स्थापना 1981 में हुई थी।
  • यह कंपनी यूके, यूएसए, पापुआ न्यूगिनी, वियतनाम, चीन, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, इजराइल, मॉरिटेनिया, सेनेगल, मॉरिशस, मेक्सिको, सुरिनाम आदि में तेल-गैस-खनन, खोज का व्यापार करती है या व्यापार कर चुकी है। इस तरह यह एक ग्लोबल कंपनी है।
  • केयर्न कंपनी ने 1990 के दशक में कृष्णा-गोदाबरी घाटी में राव्या तेल एवं गैस क्षेत्र की खोज की। इसके बाद इस कंपनी ने राजस्थान के थार रेगिस्तान क्षेत्र के सबसे बड़े तेल क्षेत्र की खोज की।
  • भारत में केयर्न एनर्जी ने निवेश के लिए केयर्न इंडिया नामक अपनी शाखा खोली थी, जिसका मुख्यालय हरियाणा के गुरूग्राम में था।
  • कंपनी अपनी संपत्ति की लायबिलिटीज को आसान बनाने के लिए री-अरेंजमेंट करती हैं। इसी प्रकार का एक री-अरेंजमेंट कंपनी ने 2006-07 में किया था। इसके तहत केयर्न इंडिया होल्डिंग नामक कंपनी के कुछ शेयर (हिस्सेदारी) केयर्न इंडिया को दे दिया।
  • केयर्न इंडिया के मुताबिक यह हस्तांतरण उसी कंपनी के शेयर एक कंपनी से दूसरी कंपनी में किया गया था लेकिन भारत के आयकर टैक्स अथॉरिटीज के अनुसार इन शेयर के हस्तांतरण से कंपनी को हजारों करोड़ रूपये का लाभ/प्रॉफीट हुआ है, जिस पर कंपनी को कैपिटल गेन टैक्स देना चाहिए। कैपिटल गेन टैक्स वह टैक्स है जो शेयर/या इक्विटी के व्यापार पर प्राप्त होने वाले लाभ पर देना होता है। अगर आपने कोई शेयर खरीदा या फिर किसी म्युचुअल फंड में पैसा लगाया और उसे एक साल के भीतर ही बेच दिया तो उससे होने वाली कमाई पर 15 फिसदी टैक्स देना होगा। यह शार्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का उदाहरण है।
  • इस केपिटल गेन टैक्स को आधार बनाते हुए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 24500 करोड़ रुपये की डिमांड की। कंपनी का मानना था कि यह इंटरनल-री-अरेंजमेंट के तहत किया गया है, इसलिए इस पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए। केयर्न इंडिया ने इनकम टैक्स की इस मांग के खिलाफ इनकम टैक्स अपिलेट ट्रिब्युनल (ITAT) में तथा दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील किया।
  • ट्रिब्युनल ने भी यह माना कि कंपनी को केपिटल गेन टैकस देना चाहिए।
  • केयर्न इंडिया ने बाद में यह निर्णय लिया कि वह भारत छोड़ देगी और अपना बड़ा हिस्सा वह वेदांता कंपनी को बेच देंगे और कंपनी ने ऐसा किया भी। भारतीय इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस कंपनी के 10 प्रतिशत शेयर अपने पास रख लिया।
  • वर्ष 2017 में कंपनी ने निर्णय लिया कि वह केस इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन पैनल के सामने लेकर जायेगा। 2017 में यहां केस रजिस्टर्ड हो गया और फरवरी 2019 में इसका फैसला आना था, फिर यह निर्णय 2019 के अंत के लिए टाल दिया गया। धीरे-धीरे यह टलता रहा लेकिन अब इसमें फैसला अब आ गया है।
  • इनकम टैक्स से जुडे भारतीय पक्षकर रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन की बात कर रहे थे।
  • रेट्रोस्पेक्टिव वे कानून होते हैं जो पिछली तारीख से लागू हो सकते हैं। भारत में सिविल मामलों में इस प्रकार के कानून की अनुमति है।
  • वर्ष 2012 में आयकर अधिनियम में संशोधन किया गया और टैक्स को वर्ष 1962 से लगाने की आजादी दे दी। इसका मतलब यह है कि सरकार पुराने लेन-देन पर भी टैक्स लगा सकती है। 1962 की अवधि इसलिए रखी गई थी क्योंकि 1962 में ही आयकर अधिनियम लागू हुआ था।
  • इस प्रकार के कानून का उद्देश्य पूर्वव्यापी कराधान संबंधी विसंगतियों को दूर करना होता है। सरकार को अब लगता है कि इन विसंगतियों के कारण कंपनियाँ अनुचित लाभ उठा रही हैं तो इस प्रकार के टैक्स लगा दिये जाते हैं।
  • भारत के अलावा इस प्रकार के कानून अमेरिका, ब्रिटेन, नीरलैंडस, कनाड़ा, बैल्जियम, इटली, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी है।
  • इस कानून के बाद कई कंपनियों पर टैक्स लगाया गया। जिसकी वैश्विक आलोचना हुई थी। इसी कानून को पूववर्ती आधार (2007 के सौदे के लिए) पर लागू करते हुए वोडाफोन से 22,100 करोड़ रुपये मांगे गये।
  • वर्ष 2014 में वोडाफोन और वित्त मंत्रलय द्वारा इसका समाधान नहीं हो पाया तो भारत और नदीरलैण्ड के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत वोडाफोन इस मामले को हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (Permanent Court of Arbitration) के समक्ष ले गया।
  • न्यायालय ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि 2007 के सौदे के लिए ब्रिटिश टेलीकॉम पर पूंजीगत लाभ और ‘विथहोल्डिंग कर’ के रूप में 22,100 करोड़ रुपये की भारत सरकार की मांग निष्पक्ष और न्यायसंगत वैधानिक उपचार की गारंटी का उल्लंघन करता है।
  • विथहोल्डिंग कर (Withholding Tax) एक ऐसी राशि है जो नियोक्ता द्वारा कर्मचारी की आय से सीधे काटी जाती है और सरकार को व्यक्तिगत कर देयता के हिस्से के रूप में भुगतान की जाती है।
  • केयर्न एनर्जी के संदर्भ में न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि भारत ने ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत केयर्न के प्रति अपने दायित्वों का उल्लंघन किया है और भारत सरकार को 1.2 अरब अमेरिकी डॉलर का हर्जाना और ब्याज चुकाना होगा। भारत को न्यायाधीकरण में मामले को ले जाने का दो करोड़ डॉलर का खर्चा भी देना होगा। इस तरह कुल 1.4 अरब डॉलर (10,500 करोड़ रुपये) देने होंगे।
  • न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल टैक्स का मुद्दा नहीं था, बल्कि यह निवेश और भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार से जुड़ा भी मुद्दा था इसलिए उसकी अधिकारिता यहां बनती है।
  • न्यायालय ने कहा है कि यह मामला वोडाफोन जैसा ही है जहां भारत ने कर की मांग की थी।
  • रिट्रोस्पेक्टिव टैक्स के संदर्भ में इस साल का यह तीसरा विवाद है जिसमें भारत के खिलाफ फैसला आया है। इसी प्रकार का एक विवाद एट्रिक्स (इसरो की एक सहायक वेंचर) और देवास मल्टीमीडिया के संदर्भ में था।
  • वर्ष 2019 में सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर में भारत के 500 मामले लंबित थे जबकि चीन और यूएसए से संबंधित मामले क्रमशः 75 एवं 60 थे। पेरिस आर्बिट्रेशन सेंटर में भारत के खिलाफ 147 केस हैं इसी तरह लंदन, हेग में भी कई मामले हैं जो यह बताता है कि कंपनियों अपना समाधान भारत में नहीं करवा पा रही हैं या फिर यहां विलंब हो रहा है। साथ ही यहां भारत सरकार की निवेश नीतियों एवं कराधान नीतियों में अस्पष्टता को दिखाता है।

माउंट किलाऊआ चर्चा में क्यों हैं?

  • ज्वालामुखी से तात्पर्य उस छिद्र/दरार या माध्यम से है, जिससे होकर गला हुआ पदार्थ (मैग्मा) बाहर आता है। पृथ्वी के अंदर 100-200 किमी. की गहराई पर एस्थिनोस्फेयर स्थिर है, इसी के एक भाग में पेरीडोटाइट का गलन होता है, जिससे मैग्मा का निर्माण होता है। यहां मैग्मा का निर्माण इस वजह से हो पाता है क्योंकि यह रेडियो एक्टिव पदार्थ का विखण्डन होने से तापमान ज्यादा होता है।
  • पृथ्वी के अंदर जब मैग्मा का निर्माण ज्यादा होता है तो यह मैग्मा संवहनीय तरंगों के सहारे ऊपर आने का प्रयास करता है। इस क्रम में यह किसी दरार/छिद्र का निर्माण करता है, जिससे गला हुआ पदार्थ/ठोस पदार्थ/राख/धूल एवं गैसें निकलती हैं ज्वालामुखी की क्रिया में कार्बन डाइटॉक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन एवं हाइड्रोजन निकलती है।
  • ज्वालामुखी की क्रिया द्वारा निकलने वाला मैग्मा अनेक प्रकार के चट्टानों के गलने से बनता है, इस कारण जब मैग्मा अधिक सिलिका युक्त होता है तो गाढ़ा और चिपचिपा होता है, जिसके कारण यह विस्फोटक होता है। दूसरी तरफ जब मैग्मा पतला, कम चिपचिपा होता है तो अपेक्षाकृत शांत प्रकार की ज्वालामुखी किया होती है।
  • ज्वालामुखी क्रिया जब ददारी प्रकार की होती है तो शांत प्रकार की होती है और मैग्मा दूर तक फैलकर पठार का निर्माण करता है। दक्कन का पठार, कनाडियन शील्ड (पठार) इसके अच्छे उदाहरण हैं।
  • केंद्रीय प्रकार की ज्वालामुखी क्रिया से ज्वालामुखी पर्वत एवं शंकु का निर्माण होता है। इस प्रकार की ज्वालामुखी क्रिया से निकलने वाला गाढ़ा होता है, जिससे कम फैलता है।
  • ज्वालामुखी क्रिया जब भी होती है तो इससे पृथ्वी की कोई न कोई परत टूटती है जिससे भुकंप आता है। ज्वालामुखी विस्फोट और भूकंप की तीव्रता में समानुपाती संबंध होता है।
  • हाल ही में हवाई द्वीप में किलाऊआ नामक एक ज्वालामुखी (Kilauea Volcano) में विस्फोट हुआ है, जिसके कारण इस क्षेत्र में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया।
  • यह ज्वालामुखी अमेरिका के हवाई द्वीप के दक्षिणी-पूर्वी भाग पर हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है। इसे माउंट किलाऊआ के नाम से भी जाना जाता है, जिसका हवाई में अर्थ अधिक फैलाने वाला होता है।
  • विश्व प्रसिद्ध ज्वालामुखी मौनालोआ इसके समीप ही स्थित है और एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
  • हवाई द्वीप का यह क्षेत्र विश्व का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्र है जहां ज्वालामुखी पर्वत एवं ज्वालामुखी शंकु खूब पाये जाते हैं। यहां के ज्वालामुखी गुंबदनुमा आकार के हैं।
  • माउंट किलाऊआ के ऊपरी भाग पर लगभग 3 मील लंबा, 2 मील चौड़ा तथा 4 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में एक काल्डेरा का निर्माण हुआ।
  • काल्डेरा का निर्माण विस्फोट किया तथा धंसाव की क्रिया से हुआ है।
  • माउंट किलाऊआ में समय-समय पर विस्फोट होता रहता है इसी कारण 1952 से अब तक 34 बार विस्फोट हो चुका है।
  • इस विस्फोट से राख और गैसें अभी तक निकल रही है, यह राख सैकड़ों फुट की ऊँचाई तक पहुंच रही है। वाशिंगटन स्थित निगरानी संस्था ने चेतावनी दी है कि यह राख 30 हजार फुट की ऊँचाई तक उठ सकती हैं, जिससे हवाई उड़ान की समस्या आयेगी।
  • इस ज्वालामुखी में इससे पहले विस्फोट मई 2018 में हुआ था।
  • इस समय यहां ऑरेंज एलर्ट जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि विस्फोट की संभावना बढ़ सकती है।
  • यहाँ जब विस्फोट होता है तो निकलने वाला लावा समुद्री जल में भी प्रवेश करता है, जिसके कारण यहां की हवा में कई प्रकार की गैसें मिल जाती हैं, जिसके कारण यहां सांस लेना घातक हो जाता है और लोगों का बड़े स्तर पर प्रवास करना होता है।