(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 23 July 2020


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भारत में परमाणु ऊर्जा का सफर

  • परमाणु ऊर्जा वह ऊर्जा है जिसे नियंत्रित (यानी गैर विस्फोटक) नाभिकीय अभिक्रिया से उत्पन्न किया जाता है।
  • इसमें नाभिकीय विखण्डन की प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है अर्थात इसमें यूरेनियम-235 की छड़ पर बंद रिएक्टर (चेंबर) में नियंत्रित तरीके से न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है तो यूरेनियम के परमाणु का विखण्डन होता है और ऊर्जा (उष्मा) मुक्त होती है।
  • इस उष्मा का प्रयोग प्रयोग करके पानी को गर्म किया जाता है जो गर्म होकर भाप का रूप धारण करती है।
  • यह भाप हाई प्रेशर की अवस्था निर्मित करता हैं और यही भाप तीव्र गति से टरबाइन को घुमाता है।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में जब परमाणु बम का प्रयोग हीरोशिमा एवं नागासाकी पर किया गया तो यह दुनिया के लिए एक नया अनुभव था। यह विशल ऊर्जा का स्रोत और भण्डार था।
  • अमेरिका और यूरोपीय देशों में इस समय तक परमाणु विखंडन की प्रक्रिया पर कुछ कार्य हो चुके थे लेकिन इस बमबारी के बाद अमेरिका एवं USSR के बीच इसके प्रयोग की एक होड़ प्रारंभ हुई।
  • दोनों ही देशों में परमाणु ऊर्जा का प्रयोग घरेलू कार्य के लिए करने हेतु कई अनुसंधान रिएक्टर स्थापित किये गये।
  • EBR-1 एक्सपेरिमेंट ब्रीडर रिएक्टर ऐसा ही अमेरिका का एक रिएक्टर था जिसके द्वारा पहली बार 20 दिसंबर 1951 को किसी रिएक्टर द्वारा बिजली का उत्पादन किया गया था। यह ऊर्जा बुत कम 100 KW की थी।
  • 27 जून 1954 को USSR का ओबनिंस्क, न्यूक्लियर पावर प्लांट विद्युत ग्रिड के लिए बिजली उत्पादित करने वाला दुनिया का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र बना, जिसने लगभग 5 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया। इसके बाद USSR एवं अमेरिका में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ शुरू हो गई।
  • अमेरिका के परमाणु ऊर्जा आयोग के उस समय के (1954) के अध्यक्ष लुईस स्ट्रॉस ने कहा ‘‘परमाणु ऊर्जा भविष्य में इतनी सस्ती होगी कि इसे मीटर से नापने की आवश्यकता नहीं होगी।’’
  • भारत ने अपनी आजादी के बाद जिन क्षेत्रें पर विशेष फोकस करने की बात की उनमें से एक क्षेत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का था।
  • भारत ने भी 4 अगस्त 1954 को अपने पहले परमाणु रिएक्टर ‘अप्सरा’ का शुभारंभ कर अपने परमाणु युग का प्रारंभ कर दिया। यह एक प्रकार का अनुसंधान रिएक्टर था जिसका निर्माण एवं डिजाइन भारत द्वारा किया गया था लेकिन इसके लिए परमाणु ईंधन की आपूर्ति ब्रिटेन द्वारा की गई थी।
  • भारत का दूसरा रिएक्टर ‘साइरस’ कनाडा के साहयोग से विकसित किया गया था। जिसे 1960 में संचालित किया गया था।
  • इसके बाद भारत ने लगभग एक दशक तक न्यूटन भौतिकी एवं विकिरण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं रेडियो आइसोटोप के उत्पादन में अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया।
  • अक्टूबर 1969 में तारापुर में दो रिएक्टरों के माध्य से बिजली बनाने का काम प्रारंभ हुआ।
  • तारापुर परमाणु बिजली स्टेशन का निर्माण अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा किया गया था।
  • 1972 में भारत के दूसरे परमाणु ऊर्जा संयंत्र ने भी काम करना शुरू कर दिया था, जिसे राजस्थान के कोटा के निकट स्थापित किया गया था।
  • भारत का तीसरा परमाणु संयंत्र चेन्नई के निकट कलपक्कम में स्थापित किया गया था, जो भारत का पहला स्वदेशी संयंत्र था।
  • यह भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम था क्योंकि इस समय तक देश में परमाणु ऊर्जा उद्योग (आवश्यक सामान बनाने का उद्योग) बिल्कुल भी विकसित नहीं था।
  • इसके बाद भारत ने अपनी स्वदेशी तकनीकी में कई सुधार और परिवर्तन किये और अपनी एक अनोखी प्रौद्योगिकी को विकसित किया जिसे ‘प्रेशराइज्ड हैवी वॉटर रिएक्टर’ कहा गया।
  • PHWR में (Moderator) और शीतलक (Coolant) के तौर पर भारी जल (Heavy water) अर्थात D 2 O का प्रयोग किया जाता है।
  • इसमें ईंधन के लिए गैर संवर्द्धित प्राकृतिक यूरेनियम का प्रयोग किया जाता है। प्रारंभ में संवद्धित यूरेनियम प्राप्त करना कठिन था इसीलिए गैर संवर्द्धित यूरेनियम का प्रयोग किया गया।
  • इसमें प्राकृतिक यूरेनियम का न केवल कुशलता पूर्वक उपयोग सुनिश्चित होता है बल्कि उप-उत्पाद के रूप में प्लूटोनियम भी प्राप्त होता है।
  • भारत ने आगे चलकर परिष्कृत यूरेनियम का प्रयोग करने के लिए सोवियत संघ के साथ 1988 में समझौता किया लेकिन सोवियत संघ के विघटन के कारण 1998 इस कार्य प्रारंभ हो पाया।
  • कई उतार-चढ़ाव से गुजरते हुए भारत ने अनेक रिएक्टरों का विकास किया और परमाणु ऊर्जा का दायरा बढ़ाया।
  • भारत ने अपने परमाणु कार्यक्रम में USSR, रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाड़ा, वियतनाम जैसे आदि देशों का सहयोग लिया है।
  • वर्तमान समय में परमाणु रिएक्टरों की संख्या 22 है, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 6780 मेगावाट है। वर्ष 2017 के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल ऊर्जा का यह 3.22 प्रतिशत है।
  • अक्टूबर 2016 में भारत सरकार ने 2032 तक परमाणु ऊर्जा को बढ़ाकर 63 गीगावॉट करने का लक्ष्य तय किया लेकिन मार्च 2011 में जापान के फुकुशिमा परमाणु संयंत्र में हुई दुर्घटना परमाणु ऊर्जा की वैश्विक रूचि को कम कर दिया।
  • काकरापार एटोमिक पॉवर स्टेशन/प्लांट (KAPS/ KAPP) गुजरात के शहर सूरत से 80 किमी- दूर ताप्ती नदी के किनारे स्थित है।
  • यहां पर दो इकाईयाँ 200-200 मेगावॉट की है तथा दो इकाईयां 700-700 मेगावॉट की है। इन्हें KAPS-1,KAPS-2 ,KAPS-3 एवं KAPS-4 के नाम से जाना जाता है।
  • KAPS-1 में 1993 से एवं KAPS-2 से 1955 में वाणिज्यिक स्तर पर उत्पादन प्रारंभ हुआ था।
  • 22 जुलाई 2020 को KAPS-3 में भी सामान्य परिचालन (Criticality) प्रारंभ हो गया, जहां ध्यान देना आवश्यक है वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ नहीं हुआ है।
  • KAPS-3 प्लांट का विकास पूर्णतः स्वदेशी तकनीकी एवं संसाधनों से हुआ है।
  • इसका विकास और ऑपरेशन NPCIL (न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया) द्वारा किया गया है।
  • 700 मेगावॉट का यह संयंत्र मेक इन इण्डिया का चमकता उदाहरण है और आने वाले समय में भारत खुद के बल पर अधिक क्षमता वाले रिएक्टर का विकास करने में सक्षम है इसका भी उदाहरण है।
  • KAPS-3 प्रेशराइज्ड हेवी वॉटर रिएक्टर्स के तहत मार्क-4 टाइप कैटेगरी का उपकरण है।
  • सूचनाओं में यह बात प्रमुखता से कही जा रही है कि इस संयंत्र के सुरक्षा के इंतजाम वैश्विक स्तर के है।
  • रिएक्टर का सफलतापूर्वक निर्माण एवं परिचालन ने भारत को अमेरिका, रूस एवं उन देशों की कैटेगरी में शामिल कर दिया है, जो परमाणु ऊर्जा निर्माण की तकनीकी में आत्मनिर्भर है।
  • काकरापारा विद्युत संयंत्र कई बार दुर्घटनाटों एवं रिसाव के कारण चर्चा में आ चुका है। इसलिए सरुक्षा के इंतजाम अति महत्त्वपूर्ण है।
  • परमाणु ऊर्जा के सथा सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा को लेकर ही है।
  • फुकुशिमा संयत्र घटना की वजह से पहली बार वैश्विक आपातकाल घोषित करना पड़ गया था। इसके बाद कई देशों ने परमाणु ऊर्जा में कटौती की बात कहा जर्मनी ने तो 2022 तक अपने सभी एटमी प्लांट बंद करने का निर्णय ले लिया।
  • यूरोप के अन्य देशों के साथ-साथ विश्व अन्य देशो ने भी इसी प्रकार की घोषणाएं की।
  • फ्रांस अपनी आवश्यकता का 75 प्रतिशत ऊर्जा परमाणु ऊर्जा से प्राप्त करता है। ब्रिटेन, रूस, अमेरिका बड़ी मात्र में इसी स्रोत से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
  • ऊर्जा का यह स्रोत कम जगत घरेता है, 80 से 100 साल तक सेवा देता है, प्रति यूनिट उत्पादन लागत कम होती है, पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन भी कम करता है इसलिए लोग इसकी वकालत भी करते है।
  • हालांकि भारत, चीन एवं कुछ अन्य विकासशील देशों के अलावा अधिकांश जनमत इसके विकास से सहमत नहीं है।
  • भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी निवास करती है जिसके विकास के लिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा की आवश्यकता है।
  • हमारी ऊर्जा का वर्तमान आधार कोयला है जिसके भंडार सीमित है एवं पर्यावरण प्रदूषण का कारण भी है।
  • भारत ने पेरिस समझौते के तहत यह वचन दिया है कि वह 2030 तक 40 प्रतिशत ऊर्जा गैर- जीवाश्म ईंधन से प्राप्त करेगा।
  • भारत इस ऊर्जा को बढ़ाकर 2050 तक कुल ऊर्जा का 25 प्रतिशत करना चाहता है।
  • भारत भविष्य में ऊर्जा निर्यातक देश के रूप में अपनी संभावना देख रहा है। इसलिए इस तकनीकी का घरेलू विकास बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है।