(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 22 December 2020


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चीन को रोकेंगे भारत और वियतनाम

  • वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है। इसके उत्तर में चीन, उत्तर-पश्चिम में लाओस, दक्षिण-पश्चिम में कंबोडिया तथा पूर्व में दक्षिण चीन सागर स्थित है।
  • यहां तीसरी सर्वाधिक बौद्ध जनसंख्या निवास करती है। इसकी राजधानी हनोई है।
  • भारत ने स्वतंत्रता के बाद प्रारंभ में उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम के साथ वाणिज्यिक संबंध रखे तथा 7 जनवरी 1972 को एकीकृत वियतनाम के साथ पूर्ण राजनायिक संबंध स्थापित किये।
  • वियतनाम आसियान (Association of Southeast Asian Nations), एवेक (Asia Pacific Economic Cooperation) का सदस्य है। भारत और वियतनाम पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, मेंकांग गंगा सहयोग, एशिया यूरोप बैठक जैसे मंचों सहयोगी है।
  • वर्ष 2016 में दोनों के बीच व्यापक रणनीति साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) की शुरूआत की गई।
  • वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का प्रमुख स्तंभ है।
  • वर्ष 2018 में भारत के राष्ट्रपति ने वियतनाम का दौरा किया और यहां के वर्ल्ड हैरिटेज साइट My Son पर भी गये। यह वियतनाम का वह क्षेत्र है जहां सदियों पुरानी शिव के मंदिर एवं अन्य ऐतिहासिक इमारतें है।
  • वर्ष 2019 में भारत-प्रशांत महासागरीय पहल को पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया।
  • यह पहल भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रमकता को देखते हुए प्रारंभ की गई। इसमें समुद्री सुरक्षा, समुद्री पारिस्थितिकी, समुद्री संसाधन, क्षमता निर्माण और संसाधन साझाकरण, आपदा जोखिम और न्यूनीकरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं समुद्री परिवहन के संदर्भ में की गई।
  • वर्ष 2021 से दो वर्ष की अवधि के लिए भारत और वियतनाम दोनों UNSC में गैर स्थायी सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।
  • भारत वियतनाम के साथ मिलकर दक्षिणी चीन सागर में तेल और गैस की खोज कर रहा है। इस संदर्भ में चीन कई बार अपनी प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर चुका है, बावजूद इसके दोनों देश इस क्षेत्र में कार्य कर रहे है।
  • इस समय दोनों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है।
  • वर्ष 2019 को आसियान-भारत पर्यटन वर्ष के रूप में नामित किया गया था।
  • नवंबर 2020 में भारत और वियतनाम के रक्षा मंत्रियों ने रक्षा उद्योग में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों पर विशेष बैठक की। इस दौरान वियतनाम ने भारतीय रक्षा संस्थानों में वियतनामी रक्षाबलों की तीनों सेनाओं के लिए प्रशिक्षण का दायरा और अधिक बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की तथा भारत के द्वारा वियतनामी रक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने में किये गये सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
  • 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक के साथ डिजिटल प्लेटफार्म पर बैठक की। वियतनाम को भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाये रखने में अहम योगदान दे सकता है।
  • इस सम्मेलन के दौरान भारत और वियतनाम के बीच संयुक्त दृष्टि दस्तावेज और 2021 से 2023 दिपक्षीय भागीदारी के लिए एक कार्ययोजना जारी की गई।
  • सम्मेलन में दोनों के बीच रक्षा, वैज्ञानिक शोध, परमाणु ऊर्जा, पेट्रो-रसायन, नवीकरणीय ऊर्जा, कैंसर के इलाज के विषय में विविध विषयों पर सात महत्वपूर्ण समझौतों पर भी हस्ताक्षर किये गये।
  • भारत की तरफ से कहा गया कि नई वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना दोनों देश मिलकर कर सकते हैं। दोनों के विचारों की समानता दोनों देशों के लिए बहुत उपयोगी साबित होगी।
  • भारत ने स्पष्ट किया कि वियतनाम के साथ उसके संबंध दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है।
  • इस सम्मेलन में भारत ने घोषण किया कि वह पहला High Speed Coast Gaurd Boat वियतनाम को हस्तांतरित कर रहा है।
  • उच्च गति वाली ऐसी 12 जहाज भारत वियतनाम को देगा, जिसमें एक हस्तांतरित कर रहा है।
  • 12 उच्च गति वाली जहाजों/नाव के लिए भारत ने वियतनाम को LIC भी दिया है। भारत में यह Boat लार्सन एंड टुब्रो बना रहा है।
  • यह उच्च गति और उच्च क्षमता वाली जहाज है जो किसी क्षेत्र की सुरक्षा और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा समुद्री व्यापार की सुरक्षा तथा अपने व्यापारिक हितों की पूर्ति के लिए भी यह काफी मददगार होंगी।
  • भारत ने इन जहाजों के निर्माण की तकनीकी हस्तांतरण करने की भी सहमति दी है, इसी कारण 7 जहाज वियतनाय में दोनों देशों के सहयोग से बनाये जायेंगे।
  • दक्षिण चीन सागर में वियतनाम लंबे समय से चीन के साथ संघर्ष कर रहा है। यहां चीन हर तरह से वियतनाम को रोकता है ओर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करता हैं यहां तक की चीन यहां वियतनाम के लोगों को मत्स्यन करने से भी रोकता है तथा उनकी नाव डुबा देता है। ऐसी घटनाओं पर अमेरिका भी अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुका है और उसने सहयोग का समझौता किया है।

वियतनाम और इंडो-पौसिफिक क्षेत्र-

  • वर्ष 2000 के प्रारंभ में एक भारतीय नेवी ऑफिसर द्वारा इंडो-पैसिफिक शब्द का प्रयोग किया गया। इस क्षेत्र को पहले एशिया-पैसिफिक क्षेत्र क्षेत्र कहा जाता था।
  • जापान के प्रधानमंत्री शिंजों अबे ने 2007 में भारतीय संसद को संबोधित करते हुए पुनः इस शब्द का प्रयोग किया।
  • हाल के दशक में चीन का इस क्षेत्र में अतिक्रमण बढ़ने के कारण यह क्षेत्र बहुत चर्चित और शक्ति-प्रदर्शन एवं नियंत्रण हासिल करने की होड़ का हिस्सा बन गया है।
  • वर्ष 2019 में भारत सरकार ने अपने विदेश मंत्रालय में इस क्षेत्र के लिए एक पद बनाया जो यहां के क्षेत्र में हो रहे गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे।

E-20 ईंधन चर्चा में क्यों है?

  • पेरिस जलवायु समझौता और संयुक्त राष्ट्र को दिये गये कार्बन उत्सर्जन कटौती की प्रतिबद्धता के तहत भारत कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कई प्रकार के कदम उठा रहा है। इसी प्रतिबद्धता का एक उदाहरण भारत द्वारा BS-VI ईंधन को अपनाना है।
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र को भरोशा दिलाया है कि वह वर्ष 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 33 से 35 फीसदी तक कटौटी करेगा और अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 40 फीसदी तक बढ़ायेगा।
  • इस समय E20 ईंधन चर्चा में बना हुआ है। दरअसल सरकार के द्वारा E20 ईंधन को अपनाने के लिए प्रस्ताव रखा है। इस संदर्भ में अधिसूचना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रकाशित की गई है। सरकार ने इस संदर्भ में जन प्रतिक्रिया आमंत्रित किया है।
  • E20 ईंधन ऐसा ईंधन होगा जिसमें इथेनॉल और गैसोलीन का 20 प्रतिशत मिश्रण होगा। इथेनॉल एक प्रकार का जैव ईंधन है, जिसकी मात्र ईंधन के मिश्रण में बढ़ने पर कार्बन उत्सर्जन में कमी आयेगी।
  • सरकार पहले से इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम पर काम कर रही हैं, जिसके तहत वर्ष 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत बायो इथेनॉल और 2030 तक 20 प्रतिशत बायोइथेनॉल मिश्रण की लक्ष्य रखा गया हैं। भारत अभी अभी तक (2019 तक) केवल 5.6 प्रतिशत मिश्रण के लक्ष्य को प्राप्त कर पाया है।
  • बायो इथेनॉल एक हरित ईंधन है जो जैविक बायोमास जैसे कि मक्का, गन्ना, आलू आदि जैविक पदार्थों से प्राप्त होता है जिसके उपयोग से कार्बन उत्सर्जन परंपरागत ईंधन की तुलना में कम होता है।
  • बायो इथेनॉल मक्का, गन्ना, चूकंदर, आलू, मीठा चारा जैसे जैविक पदार्थ से प्राप्त होने वाले रस का विण्वन का उपयोग करके बनाया जाता हैं इसे गैसोलीन/पेट्रोल में मिलाने पर इसके दहन के स्तर को बढ़ाता है, जिससे कार्बन मोनो ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है।
  • इथेनॉल/एथेनॉल को एथिल एल्कोहल भी कहा जाता है। इसकी शुद्धता 95 प्रतिशत होने पर इसे शोधित स्पिरिट कहते हैं। इसका प्रयोग मादक/नशीले पेय पदार्थ में किया जाता है।
  • मंत्रालय द्वारा बयान में कहा गया है कि E20 ईंधन से न सिर्फ हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन कम होगा बल्कि देश के आयात का बिल भी कम होगा जिससे विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होगी।
  • सरकार आने वाले पांच वर्षों में इथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को वर्तमान के 22000 करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये करने के लक्ष्य को भी प्राप्त कर पायेगी।
  • हालांकि इथेनॉल के संदर्भ में एक प्रमुख चुनौती यह है कि यह गैसोलीन और डीजल की तुलना में कम ऊर्जा देता है इस कारण एक ईंधन के रूप में अपेक्षाकृत सक्षम है। इसके दहन से कम ऊर्जा मिलने के कारण ईंधन का अधिक दहन होता है, जिससे माइलेज पर बुरा असर पड़ता है। इस कारण हरित ईंधन का एक अन्य प्रकार बायोडीजल है जिसे सोसाबीन, ताड़ या वनस्पति अपशिष्ट तेल और पशु वसा से प्राप्त किया जाता है। प्राप्त करने की यह प्रक्रिया Transesterification कहा जाता है। इसे डीजल में मिलाने पर डीजल से होने वाला उत्सर्जन कम होता है।
  • बायोगैस हरित ईंधन का ही रूप है जिसका प्रयोग एक स्वच्छ गैस के रूप में किया जाता है। इसका निर्याण कार्बनिक पदार्थों जैसे जानवरों से प्राप्त होने वाले अपशिष्ट पदार्थों के अवायवीय अपघटन (Anaerobic Decomposition) से होता है। इसमें मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड गैस मुख्य होती है।
  • जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 भारत जैव ईंधन के विस्तार की एक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। यह नीति स्पष्ट रूप से इथेनाल उत्पादन के लिए गन्ने के रस, चीनी युक्त सामग्री, स्टार्च युक्त सामग्री, सडे आलू, टूटे हुए अनाज आदि के प्रयोग की अनुमति देती है।
  • भारत एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था है जहां जैव ईंधन उत्पादन के लिए फसलों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे किसानों को एक नया विकल्प प्राप्त होगा और आय भी बढ़ पायेगी तो साथ ही भारत में स्वच्छ ईंधन का उत्पादन भी अधिक हो पायेगा।

शिगेला बैक्टीरिया

  • शिगेला एक प्रकार बैक्टीरिया है जो दूषित जल, बासी खाना, में विकसित होता है। जब हम इन दूषित पदार्थों का सेवन करते हैं तो हम शिगेला बीमारी से संक्रमित हो जाते है।
  • इसके प्रमुख लक्षणों में पेट में दर्द, ऐंठन, बुखार, उल्टी, मल में खून एवं डायरिया हैं।
  • शिगेलोसिस या शिगेला इन्फेक्शन आंत से जुड़ी बीमारी है।
  • यह एक संक्रामक बीमारी है अर्थात एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। इससे संक्रमित व्यक्ति में सामान्य लक्षण एक से दो दिन में तथा गंभीर लक्षण एक हफ्रते में दिखाई दे पाते हैं।
  • केरल के कोझिकोड जिले में शिगेला इन्फेक्शन (शिगेलोसिस) से एक बच्चे की मौत हो गई है जबकि संक्रमण 50 लोगों तक पहुँच चुका है।
  • जिस बच्चे की मौत हुई है वह डायरिया के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, बाद में उस इलाके के 19 लोग संक्रमित पाये गये। संक्रमित लोगों में अधिकांश लोग लोग बच्चे के परिवार से थे या वह थे जिन्होंने अंतिम संस्कार में भाग लिया और एक दूसरे से मिले।
  • शिगेलोसिस 10 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है, हालांकि बड़े लोगों को भी यह प्रभावित कर सकता है।
  • इस समय इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है जिसके कारण एंटीबायोटिक्स से इसका इलाज किया जाता है। कई मामलों में अधिक आराम करने पर आराम मिल जाता है।
  • इससे बचाव का सबसे अच्छा उपाय है कि बार-बार साबुन से हाथ धोया जाये, पानी को खौला कर पिया जाये, खाना गर्म कर के खाया जाता है।
  • लक्षणों वाले लोगों के लिए ओआरएस घोल, नमकीन दालिया पानी का सेवन करना फायेमंद है। पेयजल स्रोतों को क्लोरीनयुक्त किया जाना चाहिए।