(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 21 November 2020


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रूस पाकिस्तान के साथ कैसे संबंध मजबूत कर रहा है?

  • पाकिस्तान इस समय अमेरिका से दूर जा रहा है, पश्चिमी देशों से अपना अलगाव प्रकट कर रहा है तो साथ ही चीन और रूस के साथ निकटता भी बढ़ा रहा है। हमें यह समझना होगा कि पाकिस्तान ऐसा क्यों कर रहा है तथा चीन एवं रूस पाकिस्तान को अपने साथ क्यों ला रहे है?
  1. हाल के समय में पाकिस्तान के संबंध अमेरिका से खराब हुए हैं डोनाल्ड ट्रंप ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कई बार चेताया है। इसके अलावा अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य मदद में बड़ी कटौती की है और अफगानिस्तान के मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी-खोटी सुनाई है। अनु- 370 और CAA जैसे कानूनों पर अमेरिका ने भारत का साथ दिया है तथा पाकिस्तान द्वारा भारत पर कराये गये हमलों पर पाकिस्तान को धमकाया हैं इस कारण से पाकिस्तान चीन और रूस के करीब आया है।
  2. पाकिस्तान इस समय आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है। यह अटकलेें लगायी जा रही हैं कि पाकिस्तान को पांच साल के भीतर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा कोष से दूसरा बेल आउट पैकेज मांगना पड़ सकता है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का विदेशी मुद्रा भंडार सिमटता जा रहा है तथा पाकिस्तानी रुपये का मूल्य भी गिर रहा है जिसके कारण पाकिस्तान को आयात करना कठिन होता जा रहा है।
  3. तेल के मूल्यों में आने वाले चढ़ाव तथा पाकिस्तान के कपड़ों के निर्यात में आने वाली कमी पाकिस्तान के सामने एक नई आर्थिक चुनौती उत्पन्न कर रही है। बाहर से उसे पाकिस्तानी समुदाय द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंस में भी कमी आ रही है।
  4. पाकिस्तान में परिवार नियोजन को लेकर अभी भी रूढ़िवादिता बनी हुई है, जिसकी वजह से पाकिस्तान में उच्च जन्मदर पाई जाती है। यहां की जनसंख्या 20 करोड़ को पार कर गई है लेकिन सामाजिक- आर्थिक विकास न होने के कारण यहां असंतोष बढ़ रहा है।
  5. पाकिस्तान खाद्य असुरक्षा के साथ-साथ जल असुरक्षा की ओर बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार 2025 तक यहां प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता सिर्फ 500 घनमीटर होगा।
  6. पाकिस्तान के 73 साल के इतिहास में लगभग आधे समय तक सेना ने यहां राज किया है इसलिए सैन्य और असैन्य नेतृत्व के बीच हमेशा खींचतान रहती है।
  7. इन चुनौतियों के अलावा पाकिस्तान को अपने आंतरिक राजनीति को संभालने की चुनौती बनी रहती है, इसलिए हर सरकार यह प्रयास करती है कि वह उन गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान दे जो भारत विरोधी लगें, जिससे यहां के असंतोष को दबाया जा सके।
  • पाकिस्तान कैसे चीन और रूस के नजदीक जा रहा है?
  1. चीन अपने आर्थिक और राजनीतिक महत्वाकंक्षा के तहत पाकिस्तान में बड़ी मात्रा में निवेश कर रहा है। चीन- पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बांधों एवं कई परियोजनाओं का निर्माण, अफगानिस्तान में चीन-पाक कार्ययोजना इसका उदाहरण हैं। इन निवेशों से जहां पाकिस्तान को तात्कालीन वित्तीय सहायता प्राप्त हो रही है वहीं बदले में पाकिस्तान को ऐसा मित्र मिल रहा है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के साथ-साथ सभी मंचों पर पाकिस्तान के साथ खड़ा होता है। जम्मू-कश्मीर, CAA, FATF और आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान का चीन द्वारा संरक्षण इसी का उदाहरण है।
  2. इस समय चीन हथियारों के बड़े विक्रेता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जिसका प्रमुख खरीदार पाकिस्तान है। चीन पाकिस्तान को JF- 17 जैसे आधुनिक फाइटर जेट की आपूर्ति कर रहा है। इसके अलावा इस समय चीन पाकिस्तान की नेवी, एयरफोर्स और थलसेना को सबसे ज्यादा टेंक, सबमरिन, गोला-बारूद की आूपिर्त कर रहा है।
  3. रूस तेल और प्राकृतिक गैस का प्रमुख निर्यातक है तो पाकिस्तान बड़ा खरीदार इसलिए दोनों के आर्थिक हित एक दूसरे से मिलते हैं। वहीं दूसरी ओर मध्य पूर्व और सेंट्रल एशिया में रूस अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जिसके लिए पाकिस्तान एक अच्छा मददगार साबित हो रहा है।
  • वर्ष 2010 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था- पाकिस्तान के साथ रूस कोई सैन्य सहयोग इसलिए नहीं करता है क्योंकि वह अपने भारतीय साथियों की चिंताओं का ध्यान रखता है। लेकिन अब रूस ने यह नीति बदल दी है, जिसका एक प्रमुख कारण यह है कि रूस और भारत के रिश्तों में अमेरिका की भूमिका शामिल हो गई है। भारत-अमेरिकी नजदीकी ने रूस को पाकिस्तान के समीप लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • रूस पाकिस्तान को सुखोई-35 एस युद्धक विमान, एमआई-35 हैलीकॉप्टर और आधुनिक टैंक बेच रहा है जो भारत के लिए चिंताजनक है।
  • दोनों देशों के बीच हाल के समय में कई सैन्य अभ्यास आयोजित हो रहे है। उरी हमले के कुछ दिन बाद ही पाकिस्तान और रूस ने ‘दोस्ती’ नामक सैन्य अभ्यास किया। 2016 से यह हर साल आयोजित होता है।
  • पिछले साल पाकिस्तान ने रूसी सैन्य अभ्यास में भाग लिया था। इस साल सितंबर 2020 में ‘कवकाज या कावाज-2020’ में भी पाकिस्तान ने भाग लिया लेकिन भारत ने इसमें शामिल होने के रूस के आमंत्रण को ठुकरा दिया था।
  • दोनों देशों ने रूस-पाकिस्तान ज्वाइंट मिलेट्री कंसल्टेटिव कमेटी (जेएमसीसी) का गठन कर रखा है। इसके अलावा रूसी फेडरेशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स में पाकिस्तानी सैनिकों के दाखिले का भी करार है। इसके तहत पाकिस्तानी सैनिकों को रूस सैन्य प्रशिक्षण देगा।
  • इस समय क्या हुआ है?
  • रूस और पाकिस्तान ने एक-दूसरे के हितों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रूस और पाकिस्तान मिलकर एक नेचुरल गैस पाइपलाइन का निर्माण करेगें जो पोर्ट कासिम (Port Qasim) (कराची) से कासूर (पंजाब) तक बनायी जायेगी। इसकी लम्बाई लगभग 1100 किलोमीटर होगी।
  • इस गैस पाइपलाइन को बनाने का समझौता 2015 में हुआ था जिसे अब फाइनल रूप दे दिया गया है। वर्ष 2015 में जब यह समझौता हुआ था तब रूस ने यह कहा था कि वह इस प्रोजेक्ट में 100 प्रतिशत वित्त की आपूर्ति करेगा।
  • रूस द्वारा 100 प्रतिशत फाइनेंसिंग को लेकर पाकिस्तान में कई लोगों को डर था कि इससे प्रोजेक्ट पर रूस का एकाधिकार होगा। इसलिए इसे वहां के कोर्ट में चुनौती दी गयी। जिसमें यह फैसला दिया गया कि रूस की वित्तीय हिस्सेदारी 26 प्रतिशत होगी जबकि 74 प्रतिशत हिस्सेदारी पाकिस्तान की होगी।
  • इसे BOOT Investment Model पर बनाया जायेगा जिसे 25 वर्ष बाद रूस पाकिस्तान को ट्रांसफर कर देगा।
  • पहले इस परियोजना को North South Gas Pipeline Project (NSGPP) नाम दिया गया था जिसका नाम बदल कर अब Pakistan Stream Gas Pipeline Project (PSGPP) कर दिया गया है।
  • दोनों देशों के बीच यह तय हुआ है कि इस प्रोजेक्ट को चलाने के लिये एक ज्वाइंट वेंचर कम्पनी का निर्माण किया जायेगा। जिसका नाम रूस पाकिस्तान JVC होगा जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि होगें।
  • इस पाइपलाइन का डायमीटर 48 से 56 इंच तक होगा।
  • पाकिस्तान की Sui Northern और Sui Southern दो गैस कम्पनियाँ इसमें निवेश करेगी।
  • इस समय पाकिस्तान को घरेलू तथा औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आवश्यकता है तो वहीं रूस अपनी आर्थिक मजबूती के लिए अधिक से अधिक तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यात करना चाहता है।
  • रूस और पाकिस्तान का यह प्रोजेक्ट भले ही आर्थिक हितों को लेकर हस्ताक्षरित हुआ है। लेकिन यह भारत के लिए एक चिंताजनक प्रोजेक्ट है क्योंकि भारत में भी तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा बाजार है और भारत भी आयात करता है।