(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 20 July 2020


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भारतीय ऊर्जा आवश्यकता में अमेरिकी सहयोग

  • किसी भी अर्थव्यवस्था एक प्रमुख आधार ऊर्जा होता है। ऊर्जा जीवाश्म आधारित या गैर जीवाश्य आधारित किसी भी रूप में हो सकती है।
  • जीवाश्म आधारित ऊर्जा ग्लोबल वॉर्मिंग तथा जलवायु परिवर्तन का कारण बनते है बावजूद उसके यह हमारी ऊर्जा का सबसे बड़ा आधार है।
  • जीवाश्म ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत कच्चा तेल होता है जिसकी कीमत में उतार-चढ़ाव होता रहता है तथा युद्ध के समय इसकी आपूर्ति बाधित भी हो सकती है।
  • कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव से बचने तथा ऊर्जा के रूप में तेल की उपलब्धता को बनाये रखने के लिए स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व की स्थापना की जाती है।
  • यह तेल के ऐसे रिजर्व होते हैं जिसका उपयोग किसी तेल संकट या अभाव से पिटने के लिए किया जाता है।
  • भारत के स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व की क्षमता बहुत कम 39 मिलियन बैरल की है।
  • इन स्ट्रेटजिक रिजर्व के निर्माण में लंबा समय लगता है और खर्च भी आता है क्योंकि भारत में यह जमीन के अंदर बनाये जाते है।
  • सर्वाधिक स्ट्रेजिक रिजर्व की क्षमता अमेरिका के पास 730 मिलियन बैरल की है, उसके बाद चीन 550 मिलियन बैरल, जापान 528 मिलियन बैरल तथा दक्षिण कोरिया 214 मिलियन की क्षमता धारित करता है।
  • हाल ही में भारत एवं अमेरिका ने एक मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया है जिसके तहत भारत अमेरिका में अपने स्ट्रेटजिक पेट्रोलियम रिजर्व बना सकता है।
  • इससे भारत यूएसए से पेट्रोलियम खरीदकर वहीं रिजर्व स्थापित कर सकता है । यह निर्णय अमेरिका-भारत रणनीतिक ऊर्जा की आभासी बैठक में लिया गया।
  • हाल ही मे भारत और अमेरिका के बीच अमेरिका-भारत रणनीतिक ऊर्जा भागीदारी की एक आभासी बैठक का आयोजन किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशो के बीच ऊर्जा सुरक्षा प्रगति की समीक्षा करना, प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालना और सहयोग के नवीन प्राथमिकताओं का निर्धारण करना था।
  • वर्ष 2018 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक ऊर्जा भागीदारी (SEP) को विकसित किया गया था। SEP के अंतर्गता दोनों सरकारों तथा उद्योग जगत के बीच बेहतर जुड़ाव का प्रयास किया जाता है।
  • इसमें मुख्यतः 4 क्षेत्रे में सहयोग का प्रयास किया जाता है यह क्षेत्र- पॉवर और ऊर्जा दक्षता, तेल और गैस, नवीकरण ऊर्जा एवं सतत विकास है।
  • दोनों देश ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए विद्युत क्षेत्र आधुनिकीकरण, स्मार्ट मीटर एवं स्मार्ट ग्रीड में तकनीकी सुधार एवं सहयोग कर रहे है।
  • उन्नत स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान के लिए संयुक्त अनुसंधान एवं विकास किया जा रहा है।
  • स्मार्ट ग्रिड के लिए ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भारत मे स्मार्ट ग्रिड नॉलेज सेंटर की स्थापना पर सहमति बनी है।
  • वायु गुणवत्ता के लिए RAISE (Retrofit of Air Conditioning to Improve Air Quality for Safety and Efficiency) पहल की शुरूआत की गई है।
  • हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए हाइड्रोजन टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
  • वर्ष 2021 में भारत के पहले सोलर डेकाथलॉन इण्डिया पर सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया है।
  • ऊर्जा मॉडलिंग, ऊर्जा डेटा प्रबंधन और कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रोद्योगिकी निर्माण में मिलकर कार्य किया जा रहा है।
  • यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) तथा नीति आयोग ने मिलकर भारत एनजी मॉडलिंग फोरम का शुभारंभ किया है।

Hope मिशन क्या है?

  • पृथ्वी से देखने पर एक ग्रह के चारों ओर लाल रंग की आभा दिखाई देता है जिसे लाल ग्रह के नाम से जाना जाता है। यह सौरमंडल का प्रमुख ग्रह मंगल है।
  • मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है, जो स्थलीय धारातल वाला है।
  • इस ग्रह पर पानी की उपस्थिति, जीवन की संभावना, खनिजों की उपलब्धता आदि ऐसे प्रमुख कारण है जो सभी देशों को आकर्षित करते रहे हैं यही कारण है कि चंद्रमा के बाद सौर मंडल में सबसे अधिक अंतरिक्ष मिशन मंगल के लिए हुए है।
  • इन मिशनों में मंगल की जलवायु, बादल, ध्रुवीय बर्फ की चादर, वहां की घाटी एवं ज्वालमुखी आदि का अध्ययन करने का प्रयास किया जाता हैं इन्हीं अध्ययनों में ग्रह पर तरल पानी की संभावित उपस्थिति का भी पता चला है।
  • इस संभावित पानी की उपस्थिति ने खोजकर्ताओं को इस बारे में अधिक उत्सुक बना दिया है कि क्या मंगल ग्रह जीवन को संभव बनाया जा सकता है?
  • 1971 में USSR मंगल पर लैडिंग करने वाला पहला देश बना था हालांकि इसका मार्स-3 लैंडर विफल हो गया पर विफल होने से पहले मंगल की सतह से 20 सेकंड के लिए डेटा संचरित करने में सक्षम रहा था।
  • 1973 में सोवियत संघ ने दूबारा मंगल पर लैंडिंग किया।
  • मंगल की सतह पर पहुँचने वाला दूसरा देश अमेरिका है। इसने 1976 के बाद से कई बार मार्स पर लैंडिंग की है।
  • यूरोपीय अंतरिक्ष तीसरा तथा भारत चौथा देश है जिसने यहां पर सफलतपूर्वक लैडिंग किया है।
  • भारत का मंगलयान नवंबर 2013 में ISRO द्वारा आंध्रप्रदेश के सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉच किया गया था जो सितंबर 2014 मे मंगल की कक्षा में पहुँच गया था।
  • भारत के बाद कई देशों ने अपने यहां मंगल मिशन के लिए कार्य किया तथा अपनी योजना बनाई । इसमें दो प्रमुख नाम चीन एवं UAE (संयुक्त अरब अमीरात) का है।
  • UAE के प्रेसिडेंट Sheikh Khalifa Bin Zayed Al Nahyan ने जुलाई 2014 में अपने मंगल मिशन की घोषण की।
  • इसमें UAE के मोहम्मद बिन राशीद स्पेस सेंटर, यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोरेडो बॉल्डर, एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी तथा यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बार्कले ने अपना सहयोग दिया जिससे यह मिशन सफल हो पाया ।
  • इसका अरबी नाम Al-Amal तथा अंग्रेजी नाम Hope रखा गया है।
  • यह नाम नवजवान अरब लोगों को एक मैसेज देने के लिए चुना गया है । जिसके माध्यम से यह मैसेज देने का प्रयास किया जाएगा कि हम भी विज्ञान में सर्वोच्चता प्राप्त कर सकते है और यह मिशन यही आशा उत्पन्न करेगा।
  • इसको तानेगाशिमा योशिनोबु प्रक्षेपण परिसर से मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा लांच किया जाना था।
  • UAE का Hope स्पेसक्रॉफ्रट पहले 14 जुलाई को लांच होना था लेकिन मौसम में खराबी के कारण यह विलंबित होता रहा।
  • UAE का Hope मिशन अखिरकार आज (सोमवार) को लांच कर दिया गया है। इसे दक्षिणी जापान के तानेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित किया गया।
  • लांचिंग के लिए H-2A राकेट का प्रयोग किया गया।
  • इस स्पेसक्रॉफ्रट के माध्यम से यह मिशन मंगल के वायुमंडल, मिथेन, ऑक्सीजन आदि का अध्ययन करेगा।
  • उम्मीद की जा रही है कि सितंबर 2021 तक मंगल से डेटा पृथ्वी तक आने लगेगा। जिसे विश्व समुदाय के लिए खुला रखा जायेगा।
  • यह फरवरी 2021 तक मंगल पर पहुँच सकता है। वर्ष 2021 UAE के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा क्योंकि 2021 UAE अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरा करेगा।
  • यह स्पेसक्रॉफ्रट के मंगल पर पहुंचने के बाद एक मंगलवर्ष यानी 687 दिनों तक उसकी कक्षा में चक्कर लगायेगा।
  • अभी इस मिशन के उद्देश्य के रूप में इस ग्रह के पर्यावरण और मौसम का अध्ययन करना बताया गया है लेकिन एक बड़ा लक्ष्य अगले 100 सालों में मंगल पर इंसानी बस्ती बनाने का है।
  • UAE पहला मुस्लिम देश होगा जो मार्च पर अपना मिशन भेजने में सफल होगा।
  • इसमें लगाया हाई रिजोल्यूशन कैमरा कई एंगल से किसी क्षेत्र की तस्वीर चींचकर भेजने में सफल होगा। इसमें लगा अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रोमीटर मंगल के पर्यावरण संबंधी डाटा/डेटा को संकलित करेगा।
  • इसमें इंन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर लगाया गया है जो मंगल के वातावरण के तापमान तथा जल एवं बर्फ के संभावित उपस्थिति का पता लगायेगा।
  • इस स्पेसक्रॉफ्रट की लंबाई 2.3 मीटर, और ऊँचाई 2.9 मीटर है तथा कुल वजन लगभग 1350 किलोग्राम है।
  • इस स्पेसक्रॉफ्रट में 900 वॉट के सोलर पैनल लगाये गये है जो ऊर्जा की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।
  • इसमें लगा 1.5 मीटर का एंटिना पृथ्वी से कम्यूनिकेशन स्थापित करने में सहायक होगा।
  • इसी माह में चीन भी अपना पहला मार्स मिशन तियानवेन-1 लाँच करने वाला है।
  • तियानवेन-1 अपने साथ 13 पेलोड़ ले जायेगा। जो मंगल की सतह पर पानी, बर्फ, मिट्टी आदि की विशेषताओं की जांच करेगा।
  • इसके अलावा चीनी मंगल ग्रह पर एक जिओ पेनेट्रेटिंग रडार को स्थापित करेगा।