Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 18 June 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 18 June 2020



भारत का घटता व्यापार घाटा

  • सभी देश अपने यहां के लोगों की आवश्यकता पूरी करने के लिए कुछ वस्तुओं और सेवाओं की मांग दूसरे देश से करते हैं, इसे आयात के नाम से जाना जाता है !
  • ठीक इसी प्रकार अधिकांश देश अपने यहां अधिक मात्रा में उत्पादन होने वाले वस्तुओं/सेवाओं को दूसरे देशों को बेचते हैं इसे उस देश का निर्यात कहा जाता है !
  • आयात के लिए जहां दूसरे देश को भुगतान करना होता है वहीं निर्यात की अवस्था में दूसरे देश से हमें भुगतान प्राप्त होता है !
  • वर्तमान समय में सभी अर्थव्यवस्थाए वैश्विक रूप से एक दूसरे से जुड़ी है इसलिए आयात और निर्यात एक आवश्यक विनिमय बन गया है क्योंकि कोई भी देश सभी सामानों का पूर्ण रूप से उत्पादन करने में सक्षम नहीं है !
  • आयात और निर्यात के अंतर को व्यापार संतुलन (Balance of Trade) कहते हैं !
  • जब किसी देश द्वारा निर्यात की तुलना में आयात अधिक किया जाता तो उसे व्यापार घाटा (Trade deficit) की स्थिति के नाम से जाना जाता है !
  • इसके विपरीत जब आयात की तुलना में निर्यात अधिक किया जाता है तो इसे ट्रेड सरप्लस (Trade surplus) की अवस्था के नाम से जाना जाता है !
  • भारत लगभग 230 से अधिक देशों और शासनाधिकृत क्षेत्रों के साथ आयात और निर्यात करता है !
  • इनमें से कुछ देशों जैसे चीन, सऊदी अरब, इराक, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया, रूस, जापान, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के साथ भारत का घाटा अधिक है !
  • वहीं अमेरिका बांग्लादेश नेपाल U.A.E हॉन्ग काँग जैसे देशों के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस है !
  • भारत इंजीनियरिंग सामान, रत्न और आभूषण, रासायनिक और संबद्ध उत्पाद, वस्त्र एवं संबंधित उत्पाद, पेट्रोलियम क्रूड और संबद्ध उत्पाद ,कृषि एवं संबद्ध उत्पाद, समुद्री उत्पाद, अयस्क और खनिज, चमड़ा और चमड़ा उत्पाद आदि सामानों का निर्यात करते हैं !
  • पेट्रोलियम तेल और संबंधित उत्पाद, पूंजीगत वस्तुएं( मशीनरी, मेटल, परिवहन उपकरण) रत्न और आभूषण, रसायन संबंधी उत्पाद ( जैविक रसायन उर्वरक) इलेक्ट्रॉनिक सामान, कृषि एवं संबद्ध उत्पाद तथा अयस्क और खनिज आदि प्रमुख आयात की वस्तुएं हैं !
  • हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले माह (मई) में देश के निर्यात में 36.47% गिरावट आई है और इस कारण यह 19.05 अरब डॉलर तक सिमट गया है !
  • निर्यात में गिरावट का यह लगातार तीसरा माह है !
  • मुख्य गिरावट पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा, इंजीनियरिंग, रत्न एवं आभूषण के सेक्टर में देखने को मिला है !
  • इसी के साथ आयात में भी पिछले माह 51% की गिरावट आई है और यह 22.2 अरब डॉलर तक सीमित हो गया है !
  • इस तरह भारत का घाटा घटकर 3.15 अरब डॉलर पर आ गया है !
  • पिछले साल इसी महीने में यह घाटा 15.36 अरब डॉलर था !
  • भारत का आयात निर्यात से ज्यादा होता है इस कारण हमारा व्यापार संतुलन घाटे में रहता है !
  • हालांकि जनवरी 2020 से ही भारत के व्यापार घाटे में कमी दर्ज की जा रही है !
  • निर्यात एवं आयात दोनों में कमी का सबसे बड़ा प्रमुख कारण लॉकडाउन की वजह से व्यापार का ठप्प होना बताया जा रहा है !
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आज के अपने संबोधन में कहा कि भारत को आपदा में अवसर की तलाश करना है और आयात पर अपनी निर्भरता कम करते हुए आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करना है |
  • आयात न करना पड़े इसके लिए भारत अपने साधन तथा संसाधन लगातार विकसित करने का प्रयास कर रहा है !
  • आयात को निर्यात में बदलने के लिए प्रत्येक सेक्टर और वस्तु पर समग्र रूप से काम किया जाएगा यह भी प्रधानमंत्री जी ने अपने संबोधन में जोड़ा।
  • ऊर्जा सेक्टर में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कोयला क्षेत्र में नई नीलामी की जाएगी !
  • कोयला सेक्टर में अभी Coal India Limited का प्रभुत्व है !
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कोयला भंडार की दृष्टि से विश्व का चौथा सबसे बड़ा तथा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होते हुए भी कोयले का आयात करता है |
  • कोयला नीलामी प्रक्रिया से बहुत जल्दी इस स्तिथि में परिवर्तन आने की संभावना है ।

मरुस्थलीकरण की समस्या

  • किसी भूमि या उसके किसी भूभाग की जैविक क्षमता का ह्रास या विनाश इस तरह होना की धीरे-धीरे उसमें निर्जनता और मरुस्थल जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाए यह परिस्थिति मरुस्थलीकरण कहलाता है !
  • घासों अधिक चराई, अधिक गहन खेती, वनों की कटाई, भूजल का अत्यधिक दोहन, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन तथा अवैज्ञानिक शहरी निर्माण कार्य आदि मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारण है|
  • मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया तो विश्वव्यापी है लेकिन शुष्क, अर्ध शुष्क और अर्ध-नम इलाकों में यह ज्यादा होता है !
  • इस तरह मरुस्थल जब अपना विस्तार बाहर के क्षेत्रों में करता है, तो इसे मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है !
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया द्वारा हर साल 24 अरब टन उपजाऊ भूमि समाप्त हो जाती है !
  • मरुस्थलीकरण से वर्षा में कमी आती है, सूखा की और मृदा अपरदन की समस्या बढ़ती है, कृषि उत्पादकता प्रभावित होती है, खाद्य असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न होती है और गरीबी तथा कुपोषण की स्थिति होती है !
  • 1992 के रियो सम्मेलन में अपनाए गए एजेंडा 21 की सिफारिश से 17 जून, 1994 को फ्रांस के पेरिस में एक सम्मेलन हुआ जिसमें मरुस्थलीकरण को रोकने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई !
  • मरुस्थलीकरण से निपटने हेतु संयुक्त राष्ट्र अभिसमय (UNCCD) 1996 में प्रभावी हुआ !
  • 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाता है !
  • वर्ष 2020 की थीम Food, Feed, Fiber the links between consumption and land रखा गया है |
  • पिछले साल इस दिवस पर “लेट्स ग्रो द फ्यूचर टुगेदर” का नारा दिया गया था !
  • भारत में 14 अक्टूबर 1994 को इस पर हस्ताक्षर किया !
  • भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.87 लाख हेक्टेयर है जिसका लगभग 69.6% भाग शुष्क भूमि से आच्छादित है !
  • भारत की मरुस्थलीकरण की समस्या से प्रभावित होने वाले देशों की सूची मे ऊपरी देशों में शामिल है क्योंकि उत्तर से दक्षिण तक एक शुष्क पेटी का विस्तार है !
  • एक अनुमान के अनुसार भारत की कुल भूमि क्षेत्र का करीब 32% Land Degradation ( भूमि अवनयन) तथा 25% क्षेत्र मरुस्थलीकरण की समस्या से प्रभावित है !
  • मरुस्थलीकरण की समस्या जिस तरह से बढ़ रही है उसके वजह से भविष्य में भारत और पूरे विश्व में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है !
  • संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2025 तक दुनिया के 2/3 लोग जल संकट का सामना कर रहे होंगे !
  • राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, जम्मू- कश्मीर, कर्नाटक, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और तेलंगाना मरुस्थलीकरण और उससे उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के दृष्टिकोण से अधिक संवेदनशील है !
  • सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट द्वारा जारी स्टेट ऑफ एनवायरमेंट इन फिंगर्स 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक 2003-05 से 2011-13 के बीच भारत में मरुस्थलीकरण में व्यापक वृद्धि हुई है !
  • अगस्त-सितंबर 2019 के बीच UNCCD के पक्षकारों की 14 वीं बैठक (COP-14) की मेजबानी भारत द्वारा की गई थी !
  • जिसने भारत ने यह घोषणा की कि सरकार 2030 तक 2.6 करोड हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाएगा !