(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 17 December 2020


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मानव विकास सूचकांक 2020

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक विकास नेटवर्क का एक हिस्सा हैं, जिसका मुख्यालय न्यूयार्क में स्थित है।
  • यह संस्था गरीबी उन्मूलन, असमानता को समाप्त करने का प्रयास करता है। इसके अलावा यह विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतियों के निर्माण, संस्थागत सहयोग, समन्वय स्थापित करने का भी प्रयास करता है।
  • विकास की परिभाषा या इसके स्तर के निर्धारण के संदर्भ में कई तरह के मतभेद बने हुए थे ऐसे में पाकिस्तान के अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक एवं भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्ससेन द्वारा द्वारा मानव विकास सूचकांक (HDI) की अवधारणा को सामने रखा गया।
  • पहला मानव विकास सूचकांक अर्थात् HDI वर्ष 1990 में जारी किया गया था। इसके बाद हर साल इसे जारी किया जाता है।
  • इस सूचकांक की गणना मुख्य रूप से 3 संकेतकों- जीवन प्रत्याशा, ज्ञान/शिक्षा (स्कूली शिक्षा के अपेक्षित वर्ष व शिक्षा के औसत वर्ष) और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय के आधार पर की जाती है। प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय को पीपीपी के आधार पर निकाला जाता है।
  • इन संकेतकों के आधार पर पहले तीनों के अलग-अलग इंडेक्स बनाया जाता है, उसके बाद तीनों को मिलाकर एक समग्र मानव विकास सूचकांक को तैयार किया जाता है। इसे मानव विकास रिपोर्ट् के नाम से जाना जाता है।
  • यह सूचकांक 0 से 1 के बीच मान के आधार पर बनाया जाता है। इसमें देशों को निम्न कैटेगरी में विभाजित किया जाता है।
  1. अत्यधिक उच्च मानव विकास वाले देश - 0.800 और अधिक
  2. उच्च मानव विकास वाले देश - 0.700 - 0.799
  3. मध्यम मानव विकास वाले देश - 0.550 - 0.699
  4. निम्न मानव विकास वाले देश - 0.352 से 0.550
  • इसमें शून्य सबसे खराब तथा 1 सबसे उच्च मान को बताता है।
  • UNDP द्वारा जारी मानव विकास सूचकांक 2020 में भारत को 189 देशों में 131वें स्थान पर रखा गया है, वहीं पिछले साल के सूचकांक में भारत को 129वां स्थान प्राप्त हुआ था। इस तरह भारत की रेंक में 2 स्थान की कमी आई है।
  • भारत इस सूचकांक 0.645 अंक प्राप्त कर मध्यम मानव विकास वाले देश की कैटेगरी में है।
  • इस सूचकांक में भूटान को 129वाँ, बांग्लादेश को 133वां, नेपाल को 142वां तथा पाकिस्तान को 154वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • इस सूचकांक में ब्राजील 84वें स्थान पर, चीन 85वें स्थान पर, रूस 52वें स्थान पर तथा दक्षिण अफ्रीका 114वें स्थान पर आया है।
  • एशिया में सिंगापुर को 11वां स्थान, मलेशिया को 62वां एवं श्रीलंका को 72वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  • इस सूचकांक में भारत की वर्ष 2019 में जीवन प्रत्याशा 69-7 साल आंकी गई है। वहीं अनुमानित स्कूलिंग अवधि 12.2 साल है। जबकि GNI प्रति व्यक्ति 6681 डॉलर है।
  • इस सूचकांक में नार्वे शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद क्रमशः आयरलैण्ड, स्विटजरलैण्ड, हांगकांग एवं आइसलैण्ड है। नार्वे को इस सूचकांक में 0.959 अंक प्राप्त हुए है।
  • पूर्वी अफ्रीकी देश बुरूण्डी 0.433 अंक के साथ 185वें स्थान पर है माली 184वें स्थान पर है।

गृह (GRIHA) रेटिंग क्या है?

  • भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ कार्बन डाईऑक्साइड का अग्रणी उत्सर्जक है।
  • भारत की बढ़ती जनसंख्या जहां अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए जंगलों, घास के मैदानों, खेतों पर भवन निर्माण कर रही है वहीं इन भवनों तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए क्रंकीट की सड़कें बिछायी जार ही है, जिससे कार्बन अवशोषण की क्षमता कम हो रही है।
  • बढ़ता कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर न सिर्फ भारत जलवायु परिवर्तन की रोकने की हमारी प्रतिबद्धता के खिलाफ है बल्कि हमारी आपदा संबंधी चुनौतियों को बढ़ाता है।
  • इन्ही चुनौतियों के समाधान के रूप में ऊर्जा और संसाधन संस्थान (The Energy and Resources Institute - TERI) द्वारा ग्रीन बिल्डिंग मूवमेंट को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मूवमेंट का एक प्रमुख हिस्सा ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट (GRIHA) है। इसे TERI द्वारा विकसित किया गया है।
  • एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत कंस्ट्रंक्शन क्षेत्र में विश्व में तीसरे स्थान पर होगा। ऐसे में यदि इन भवनों को ग्रीन बिल्डि में कन्वर्ट कर दिया जाता है तो यह न सिर्फ CO2 का अवशोषण करेंगी बल्कि पेरिस जलवायु की हमारी प्रतिबद्धता को पूरा करेंगी।

GRIHA (गृह) क्या है?

  • यह भवनों/कार्यालयों को ग्रीन बिल्डिंग के रूप में चिन्हित/प्रमाणित करने के लिए भारत का राष्ट्रीय रेटिंग सिस्टम है।
  • ग्रीन बिल्डिंग के मापदंडो के आधार पर यह 1 से 5 तक रैंकिंग (स्टार) देता है। मानंदडों में बिल्डिंग की ऊर्जा दक्षता, पानी का इस्तेमाइल, बिल्डिंग बनाने में प्रयोग होने वाला सामान, पानी की खपत एवं उसका संरक्षण, नवाचार का स्तर, भवन रख-रखाव की पद्धति, नवीकरणीय ऊर्जा की मात्र, प्रदूषित जल का पुनर्चक्रण, सीमेंट की मात्र और उसका प्रकार, प्राकृतिक रोशनी, वैंटिलेशन आदि को आधार बनाया जाता है।
  • इस प्रणाली का प्रयोग नई इमारतों के डिजाइन में सहायता करने तथा उनके मूल्यांकन के लिए किया जाता है। किसी इमारत का मूल्यांकन उसके पूरे जीवन चक्र के पुर्वानुमानित प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
  • यह प्रणाली उत्सर्जन को कम करने, ऊर्जा की खपत में कमी करने, प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने के लिए किया जाता है।
  • इस प्रणाली के प्रयोग से परिचालन लागत में 30-40 प्रतिशत की कमी आती है। ऊर्जा की खपत में 30-50 प्रतिशत की कमी आती है। पानी की खपत में 40-65 प्रतिशत की बचत होती है।
  • पुणे के म्युनिसिपल कारपोरेशन ऑफ पिंपरी चिंचवाड़ा भारत की पहली ऐसी सिविक बॉडी है जिसने गृह को अपनाया है।
  • वर्ष 2019 के आकड़ों के अनुसार भारत में दो फीसदी भवन ही पर्यावरण अनुकूल हैं। हालांकि इनकी संख्या बढ़ने के आसार हैं क्योंकि देश का करीब 60 प्रतिशत आधारभूत ढांचा अगले 20 साल में बनने वाला है।
  • हाल ही में 12वें गृह (GRIHA - Green Rating for Integrated Habitat Assesment) शिखर सम्मेलन का वर्चुअल आयोजन किया गया।
  • इस सम्मेलन की थीम- कायाकल्प करने वाली लचीली आदतें (Rejuvenating Resilent Habitats) है।
  • इस सम्मेलन का उद्देश्य- नवीन प्रौद्योगिकिणों और संसाधनों पर विचार-विमर्श करने के लिए मंच प्रदान करना था, जिससे भवन निर्माण और घरेलू आदतों को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सके।
  • सम्मेलन का उद्घाटन-भारत के उपराष्ट्रपति ने किया। इस दौरान उन्होंने शाश्वत नामक पत्रिका और 30 स्टोरीज बियॉन्ड बिल्डिंग्स नामक पुस्तक का विमोचन किया।
  • गृह रेटिंग से निर्मित भवनों का बढ़ना भारत के लिए सुखद होगा क्योंकि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) में प्रस्तुत INDC में गृह ग्रीन बिल्डिंग रेटिंग को भारत की तरफ से एक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

म्युकरमाइकोसिस चर्चा में क्यों हैं?

  • म्युकरमाइकोसिस को ब्लैक फंगस या जाइगोमाइकोसिस (Zygomycosis) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक प्रकार का दुर्लभ संक्रमण होता है जो म्युकरमायसिटिस नामक फफूंद के कारण फैलता है।
  • म्युमकरमायसिटिस, कवकों का एक समूह है जो म्युकरमाइकोसिस का कारण बनता है। यह पूरे पर्यावरण में, विशेषकर अपक्षयित कार्बनिक पदार्थों यथा-पशुओं के गोबर, कंपोस्ट/खाद, पत्तियों, कूडे के ढ़ेर में उपस्थित होता है। इसके लिए उत्तरदायी सबसे सामान्य प्रजाति म्यूकर और राइजोपस है।
  • म्यूकर कवक सड़े-गले चीजों पर उत्पन्न होता है। यह सफेद, मटमैला, कवक तंतु के रूप में होता है। यह रूई के आकार का होता है।
  • यह सामान्य प्रतिरक्षा तंत्र वाले व्यक्ति के लिए तो घातक नहीं होते हैं लेकिन जिनका प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है उनके लिए घातक होते हैं।
  • कोविड-19 की बीमारी से ठीक हो चुके कुछ लोगों में म्युकरमाइकोसिस नामक फंगल संक्रमण के साक्ष्य मिले हैं। दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में पिछले 15 दिनों में कोरोना से ठीक हो चुके 13 मरीज म्यूकरमाइकोरिस से पीड़ित पाये गये है। जिसमें से 5 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
  • इसकी वजह से लोगों की आंख प्रभावित हो रही हैं। कोविड-19 के कारण लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो रहा है जिसकी वजह से म्युमरकाइकोसिस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
  • डॉक्टरों का मानना है कि अगर कोरोना से ठीक होने के बाद यदि किसी व्यक्ति की नांक बंद हो रही है, या पपड़ी जम रही है, गाल सुन्न हो रहे हैं या इसमें सूजन आता है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करने की आवश्यकता है अन्यथा यह मौत का भी कारण बन सकता हैं संक्रमण बढ़ने पर आंखों की रोशनी जा सकती है।
  • इनका संचरण श्वसन या पर्यावरण में मौजूद बीजाणुओं के अंतर्ग्रहण द्वारा होता है यहा श्वसन द्वारा फेफडे तक पहुँचकर फेफडा या साइनस में संक्रमित कर सकता है।
  • यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि इसका संचार मानव से मानव तथा मानव और पशुओं के बीच नहीं होता है।
  • इसका असर उन्हीं लोगों पर होता है जो पहले से किसी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती का सामना कर रहे हों या किसीप्रकार की दवा से प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो चुका हो।
  • प्रकार- म्युकरमाइकोसिस शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है इसीकारण इसे कई प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।
  1. साइनस या मस्तिष्क संबंधी म्युकरमाइकोसिस- यह साइनस से होते हुए मस्तिष्क तक फैलता हैं अनियंत्रित मधुमेह या किडनी प्रत्यारोपण कराये हुए व्यक्ति में इसके फैसने की संभावना अधिक है।
  2. फेफड़ा संबंधी म्युकरमाइकोसिस कैंसर से पीड़ित लोगों, स्टेमसेल प्रत्यारोपण या अंग प्रत्यारोपण कराये हुए व्यक्तियों में अधिक फैलता है।
  3. पांचन संबंधी म्युकरमाइकोसिस बच्चों एवं उन लोगों में होता है जिनका लिवर कमजोर हो या अत्यधिक एंटी-बायोटिक दवाओं का उपभोग करते हो।
  4. त्वचा संबंधी म्युकरमाइकोसिस इसका सबसे सामान्य रूप है जो किसी भी व्यक्ति को हो सकता है।
  • संक्रमण का संदेह होने पर शरीर के तरल पदार्थ के परीक्षण या ऊतक बायोत्सी का सहारा लेते है।
  • यह एक कवकजनित बीमारी है, जिसके कारण कवकरोधी दवा (Antifungal Medicine) का प्रयोग किया जाता है।
  • इससे बचाव का तरीका यह है कि विनिर्माण या उत्खनन क्षेत्रें से दूर रहा जाये, किसी आपदा से क्षतिग्रस्त सामानों, बाढ़ के पानी या ऐसे किसी भी सतह के संपर्क में आने से बचा जाये जहां मिट्टी या सड़ा गला पदार्थ हो।
  • इसके उचार के लिए अभी कोई टीका विकसित नहीं हुआ है इसलिए बाहरी बातावरण में सांस लेते समय सावधानी की आवश्यकता है।
  • इसका प्रारंभिक उचार ही बचाव का सबसे अच्छा उपचार क्योंकि थोड़ा विलंब होने पर ही आंख, नाक और जबड़े के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।