Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 16 May 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 16 May 2020



गिलगिट-बाल्टिस्तान में बांध निर्माण

  • पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का जो हिस्सा गिलगिट बालटिस्तान के नाम से जाना जाता है उससे होकर सिंधु नदी प्रवाहित होती है !
  • हाल ही में चीन एवं पाकिस्तान सरकार द्वारा खैबर पख्तूनवा के कोहिस्तान और गिलगिट बाल्टिस्तान के डायमर जिले के बीच सिंधु नदी पर डायमर-भाषा बांध (Diamer-Bhasha Dam) प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किया है !
  • 1980 के दशक से ही इस बांध के निर्माण की बात चल रही थी लेकिन प्रोजेक्ट के रूप में इसे 1998 में प्रस्तुत किया गया था !
  • वर्ष 2010 में इस बांध को निर्मित करने के लिए सरकारी अनुमति भी दे दी गई लेकिन वित्त पोषित करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भारत द्वारा विरोध किए जाने के कारण इसके लिए फंडिंग करने से मना कर दिया !
  • वर्ष 2018 में चीन ने इस प्रोजेक्ट में अपनी रुचि प्रकट की और वित्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने की बात कही उसके बाद से चीन का हस्तक्षेप इसमें बढ़ गया ! लेकिन 2018 में पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था !
  • लेकिन अब पाकिस्तान और चीन ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया है !
  • हस्ताक्षरित अनुबंध में मुख्य बांध तथा 4500 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना का निर्माण तथा कुछ अन्य प्रोजेक्ट शामिल है !
  • इस बांध की ऊंचाई 272 मीटर होगी ! बांध निर्माण के दौरान बिजली आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए 21 मेगावाट का पावर प्लांट बनाया जाएगा !
  • पाकिस्तानी रेपोर्ट के अनुसार इसकी स्टोरेज क्षमता 81 लाभ एकड़ फीट होगी !
  • पानी निकासी के इसमें 14 गेट होंगे एवं अवसाद को निकालने के लिए अलग से व्यवस्था होगी !
  • डायवर्जन सिस्टम में 2 टनल और 1 नहर होगी जिनकी लंबाई अलग-अलग होगी !
  • 5.8 बिलियन के इस सौदे में 70% हिस्सा चीन की सरकारी कंपनी China Powers की और 30% हिस्सेदारी Frontiers Works Organisation की है !
  • इस बांध को वर्ष 2028 तक पूरा किया जाना है !
  • इस प्रोजेक्ट को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा ( China-Pakistan Economic Corridor-CPEC) में शामिल करना चाहता है !
  • इस तरह अक्सई चीन के बाद चीन POK मे भी अपनी रुचि बढ़ा रहा है !
  • चीन का कहना है कि वह इस तरह पाकिस्तान के विकास को बढ़ावा और स्थानीय लोगों का जीवन स्तर बेहतर करने का प्रयास कर रहा है !
  • भारत ने इस बात पर अपना विरोध प्रकट किया है तथा भारत पाकिस्तान के मध्य हस्ताक्षरित सिंधु जल समझौते का तीसरा पक्षकार न बनने की सलाह दी है !
  • सिंधु नदी प्रणाली के अंतर्गत सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, और सतलज को शामिल किया जाता है !
  • समझौते के अनुसार पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलज के पानी पर भारत को पूरा हक है वहीं शेष 3 पश्चिमी नदियों झेलम चिनाब और सिंधु के 20% जल का उपयोग कर सकता है !

नेपाल-बांग्लादेश Palm Oil लाइसेंस समाप्त

  • Palm Oil की प्राप्ति ताड़ के पौधे से होती है !
  • यह पौधा विषुवत रेखीय जलवायु वाले क्षेत्रों में मिलता है !
  • इसका प्रयोग अनेक प्रकार की कॉस्मेटिक पदार्थ, खाद्य पदार्थ एवं अन्य प्रकार के कार्यों में होता है !
  • इंडोनेशिया इसका सबसे बड़ा उत्पादन कर्ता है एवं मलेशिया इसका सबसे बड़ा निर्यातक है !
  • अभी कुछ समय पहले अनुच्छेद 370 में परिवर्तन और नागरिकता कानून में परिवर्तन के बाद मलेशिया द्वारा बार-बार भारत विरोधी दिए गए बयान के बाद यहां से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था तथा भारत ने अपने यहां कच्चे पाम आयल को रिफाइन करने का निर्णय लिया !
  • इंडोनेशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा पाम आयल आयात करेंगे एवं रिफाइंड करेंगे !
  • भारत ने यह निर्णय लिया कि वह किसी भी देश से रिफाइंड Palm Oil का आयात नहीं करेगा ! अपवाद स्वरूप नेपाल और बांग्लादेश को छूट दी गई !
  • हाल ही में भारत में नेपाल और बांग्लादेश से पाम ऑयल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है !
  • दरअसल बांग्लादेश और नेपाल कच्चा Palm Oil इंडोनेशिया और मलेशिया से आयात करते थे और रिफाइंड करके भारत को बड़ी मात्रा में निर्यात करते थे !
  • वर्तमान समय में यह नेपाल के प्रमुख निर्यात वाली वस्तुओं में से एक था !
  • नेपाल चूंकि सार्क देशों के मध्य हुए SAFTA (The South Asian Free Trade Area ) का हिस्सा है इसी वजह से उसे आयात शुल्क में छूट मिलती थी और लाभ बहुत ज्यादा मिलता था !
  • जब सरकार ने नेपाल और बांग्लादेश को दी गई आयात परमिट को कैंसिल कर दिया है !
  • भारत ने ऐसा आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ाने के लिए लिया है !
  • भारत में स्थापित की गई रिफाइनरीज को पहले प्राथमिकता दी जाएगी जिससे घरेलू उत्पाद बढ़े !
  • कुछ समीक्षक इसके एक वजह के रूप नेपाल- चीन के गठजोड़ को मान रहे हैं !

ADB रिपोर्ट

  • Asian Development Bank (ADB) की स्थापना 19 सितंबर 1966 को हुई थी !
  • इसका मुख्यालय मनीला फिलीपींस में है जो 68 सदस्य देश हैं !
  • इसका उद्देश्य सामाजिक आर्थिक विकास में अपना सहयोग देना है !
  • हाल ही में इस बैंक ने एक रिपोर्ट जारी किया है ! इसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस की वजह से विश्व की GDP मे 5.8 से 8 ट्रिलियन डॉलर की कमी आ सकती है !
  • दरअसल लॉकडाउन के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में जो ठहराया है इसके वजह से ऐसा बताया जा रहा है !
  • रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि लोकडाउन तीन माह तक रहा तभी यह नुकसान 5.8 ट्रिलियन तक रुकेगा अन्यथा यह 8 ट्रिलियन तक बढ़ सकता है !
  • दक्षिण एशिया की GDP में 3.9 से 6.0 % तक की कमी का अनुमान लगाया गया है !
  • चीन की अर्थव्यवस्था को भी ADB के अनुसार 1.1 ट्रिलियन डॉलर से 1.6 ट्रिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है !
  • इसमे सरकारों को अपनी नीतियों के संदर्भ में सचेत किया गया है कि यदि समय पर सही नीति अपनाते हैं तो नुकसान को कम किया जा सकता है !
  • यह भी चेतावनी इसमे दी गई है कि इस लॉकडाउन और GDP की कम वृद्धि से डिमांड कम हो सकती है, लोगों की आय कम हो सकती है, तथा संवेदनशील वर्ग ज्यादा प्रभावित हो सकता है !

Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 20 Lakh Crore Package Analysis (Part-1)


20 लाख करोड़ पैकेज का एनालिसिस (भाग - 1)

  • IMF ( International Monetary Fund ) के आंकड़ों के पूरे विश्व की GDP का आकार लगभग 87 ट्रिलियन डॉलर है !
  • इसमें सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था USA की है जिसकी GDP का आकार 21.4 ट्रिलियन डॉलर है !
  • इसके बाद क्रमश: चीन 14.1 ट्रिलियन डॉलर, जापान 5.1 ट्रिलियन डॉलर, जर्मनी 3.8 ट्रिलियन डॉलर, भारत 2.9 और U.K 2.7 ट्रिलियन डॉलर वाली अवस्थाएं हैं !
  • कोरोना वायरस ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है ! ऐसे में सभी देश अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई प्रकार के पैकेज की घोषणा कर रही हैं !
  • GDP के प्रतिशत के अनुसार देखें तो USA ने 13.0%, जापान ने 21.2% , जर्मनी ने 10.7%, भारत ने 10%, फ्रांस ने 9.3%, स्पेन ने 7.3% हिस्सा पैकेज के रूप में अपनी अर्थव्यवस्था के लिए दिया है ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ सके !
  • भारत की GDP 2.9 ट्रिलियन डॉलर की है जिसे रुपए के संदर्भ में यदि देखे तो इसका आकार लगभग 200 लाख करोड रुपए होता है !
  • भारत ने भी इसमें से 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की है !
  • यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है यदि 20 लाख करोड़ रुपए बिल्कुल फ्रेश ( नया) नहीं है ! इसमें से कुछ हिस्सा पहले ही घोषित हो चुका है ! अर्थात पहले घोषित किए गए पैकेज इसमें शामिल हैं !
  • कुछ समय पहले सरकार ने 1.7 लाख करोड़ का पैकेज गरीब कल्याण योजना जो निकाला गया था वह भी शामिल है !
  • इसी के साथ RBI द्वारा तरलता (Liquidity) बढ़ाने के लिए समय-समय पर जो 6.5 लाख करोड़ के पैकेट घोषित किए थे वह भी शामिल है !
  • दूसरे शब्दों में 12 लाख करोड रुपए का पैकेज ही नया है !
  • RBI द्वारा घोषित किए गए ऋण सुगमता उपाय लोगों को सहायता पहुंचाने के अप्रत्यक्ष उपाय माने जाते हैं जो प्रत्यक्ष उपाय की तुलना में कम लाभकारी या प्रभावी सिद्ध होते हैं !
  • दरअसल RBI द्वारा घोषित पैकेज का रकम बैंक RBI से लेकर पुनः RBI के पास जमा कर देते हैं ! और उस पर ब्याज प्राप्त करते हैं !
  • सरकार द्वारा घोषित अप्रत्यक्ष उपायों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, वेतन का भुगतान, सब्सिडी आदि शामिल किए जाते हैं जिसका प्रत्यक्ष लाभ लाभार्थी को मिलता है !
  • चूंकि सरकार के पास आय के रूप में राजस्व नहीं आ रहा है ! इसकी वजह से सरकार ने घोषणा किया है कि वह इस वित्त वर्ष के लिए 12 लाख करोड़ रुपए उधार के रूप में लेगी !
  • हालांकि अभी यह पूरी तरह घोषित नहीं किया गया है कि किससे और किस माध्यम से पैसा उधार लेगी !
  • यह पैकेज 4L5 पर फोकस होगा ! यह 4L5 है - Liquidity, Laws, Labour, और Land
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान (Self- Reliant Campaign)
  • सरकार द्वारा घोषित किए गए 20 लाख करोड रुपए पैकेज को आत्मनिर्भर अभियान का नाम दिया गया है !
  • प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में Covid-19 के बाद भारत को लीडिंग कंट्री (देश) के रूप में उल्लेखित करते हुए कहा कि यह महामारी भारत के लिए एक अवसर है इसलिए भारत को इसका लाभ उठाना चाहिए ! यह तभी संभव होगा जब हम उत्पादन के क्षेत्र में अपना हिस्सा बढ़ाएं और अधिकांश चीजों का उत्पादन करें !
  • यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि यह वैश्वीकरण का बहिष्करण और बंद अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के रूप में नहीं है !
  • यह दरअसल अन्य देशों का सहयोग लेकर भारत को उत्पादन का इतना बड़ा केंद्र बनाना है जिससे वह दुनिया के विकास में अपना सहयोग दे सके, घरेलू अधिकांश आवश्यकता का उत्पादन कर सके और बड़ी मात्रा में निर्यात वाली अर्थव्यवस्था बन सके !
  • आत्मनिर्भरता तभी प्राप्त हो सकती है जब सोसाइटी के सभी सेक्टर, वर्ग, विभाग, क्षेत्र अपना सहयोग दें !
  • इस अभियान को भी इसी तर्ज पर हर सोसायटी, डिपार्टमेंट और सेक्टर से बातचीत कर PMO एवं अन्य मंत्रालयों के सहयोग से चालू किया है !
  • आत्मनिर्भर अभियान के तहत यहां के उद्यम/टैलेंट का उपयोग करके अच्छे गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट बनाया जाएगा और सप्लाई चैन को दुरुस्त किया जाएगा !
  • चीन की अर्थव्यवस्था यदि सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था बन पाई है तो इसके पीछे प्रमुख कारण वहां के सप्लाई चैन का उन्नत होना है !
  • सप्लाई चैन उन्नत होने और “Vocal For The Local” का प्रचार करने से सभी जगहों पर उन्नत किस्म के घरेलू उत्पाद राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचेंगे !
  • आत्मनिर्भर भारत के पांच स्तम्भ रखे गए हैं जो निम्नलिखित हैं -
  1. Economy ( अर्थव्यवस्था ) - ऐसी अर्थव्यवस्था जो हर आवश्यकता के अनुसार खुद को समायोजित कर ले और Quantum jump ( बड़ी उछाल) लगाने की क्षमता रखती हो !
  2. Infrastructure ( अवसंरचना)- किसी देश का औद्योगिक विकास का आधार यही होता है इसलिए इस पर ध्यान दिया जाएगा ! वर्तमान समय में भारत पिछड़ी अवसंरचना वाले देश के रूप में जाना जाता है !
  3. Technology ( प्रौद्योगिकी)- वर्तमान समय की यह सबसे बड़ी हकीकत और उपलब्धि है जिसमें हम अभी पीछे हैं !
  4. Vibrant Demography ( गतिशील जनसांख्यिकी)- भारत विश्व में सर्वाधिक युवा और कार्यशील जनसंख्या वाला देश है जिस के स्कूल को बढ़ाकर अवस्था को ऊर्जा दी जा सकती है !
  5. Demand ( मांग)- मांग ही अर्थव्यवस्था को गति देती है ! मांग बढ़ाने के लिए सभी क्षेत्रों का सहयोग जरूरी होता है ! इसमें भी ऐसा ही प्रयास किया जाएगा !
  • MSMEs –(Micro, Small and Medium Enterprises) की परिभाषा में परिवर्तन -
  • जैसा कि नाम से विदित हो रहा है यह उद्योग सूक्ष्म, लघु और मध्यम आकार वाले होते हैं !
  • यही उद्योग किसी अर्थव्यवस्था की विविधता, उत्पादन क्षमता, रोजगार तथा क्षेत्रीय असमानता कम करने वाले प्रमुख पिलर के रूप में जाने जाते हैं !
  • भारत के संदर्भ में यदि हम इन्हें देखें तो यह कुल रोजगार का 45% का सृजन करते हैं !
  • वहीं निर्यात में इसकी हिस्सेदारी 50% एवं कंपनियों की संख्या में इनका योगदान 95% है !
  • सबसे बड़ी बात इनकी विविधता से संबंधित है यह लगभग 6000 प्रकार के उत्पाद बनाते हैं जिनका सही से Branding करके बहुत लाभ अर्जित किया जा सकता है !
  • वर्ष 2006 में MSMED एक्ट 2006 लाया गया था ! जिसमें MSMEs को दो वर्गो - Manufacturing और Service में विभाजित किया गया और निवेश की मात्रा के आधार पर इन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम श्रेणी में विभाजित किया गया !
Classification Micro Small Medium
Manufacturing Units 25 लाख तक 25 लाख- 5 करोड़ 5-10 करोड़ के बीच
Service Units 10 लाख तक 10 लाख- 2 करोड़ 2-5 करोड़ के बीच
  • इसमें अभी तक सिर्फ निवेश को आधार बनाया जाता था जिसके कारण कंपनियां ज्यादा निवेश करने के बावजूद कम निवेश दिखाती थी और MSMEs का हिस्सा बना रहना चाहती थी !
  • दरअसल MSMEs को बैंक से प्राप्त होने वाले ऋण की ब्याज दर कम होती है ! जबकि बड़े उद्योगों के लिए ज्यादा !
  • बहुत से टेंडर सिर्फ MSMEs के लिए ही होते हैं !
  • Tax Rebates का फायदा इन्हें ज्यादा मिलता है !
  • लाइसेंस और सर्टिफिकेट आसानी से मिल जाते हैं !
  • कंपनी को चलाने के लिए न्यूनतम मानक कम कठोर होते हैं !
  • उपरोक्त लोगों की वजह से कई बार चुनौतियां और भ्रष्टाचार के मामले सामने आते थे ! इसी कारण सरकार ने इसकी परिभाषा में परिवर्तन कर दिया है !
  • परिवर्तन के तथा विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के लिए एक ही मानस रखा है अंतर को समाप्त कर दिया गया है !
  • निवेश के साथ-साथ टर्न-ओवर के आधार पर कैटराइज़ किया जाएगा !

संशोधित परिभाषा

Classification Micro Small Medium
Manufacturing and Service
  • निवेश- 1 करोड़ तक
  • टर्न ओवर- 5 करोड़ तक
  • निवेश- 1-10 करोड़ तक
  • टर्न ओवर- 5-50 करोड़ तक
  • निवेश- 10-20 करोड़ तक
  • टर्न ओवर- 50-100 करोड़ तक
  • यहां ध्यान देने की आवश्यकता है यह है कि इसके लिए सरकार को कानून में परिवर्तन करना होगा !
  • कई समीक्षकों ने इस परिभाषा को भी समय के अनुसार प्रगतिशील बताया है ! वैश्विक स्तर पर जहां 75 करोड़ रुपए टर्नओवर वाले उद्यम को लघु माना जाता है वहीं भारत में सिर्फ 5 करोड़ टर्नओवर वाले उद्यम को भी शामिल किया गया है !