(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 15 October 2020


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अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार

  • नोबेल पुरस्कार स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड नोबेल के नाम पर हर साल दिया जाता है। इन पुरस्कारों का प्रारंभ 1901 में हुआ और हर साल अल्फ्रेड नोबेल की पुव्यतिथि के अवसर पर 10 दिसंबर को दिया जाता है। इन पुरस्कारों की घोषणा अक्टूबर माह में की जाती है।
  • प्रारंभ में नोबेल पुरस्कार शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, और चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिया जाता था। 1968 में स्वीडन के केंद्रीय बैंक ने अपनी 300वीं वर्षगांठ पर अल्फ्रेड नोबेल की याद में अर्थशास्त्र के क्षेत्र मे उत्कृष्ट कार्य करने वालों को नोबेल प्राइज देने का निर्णय लिया ।
  • वर्ष 1969 में पहली बार अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार नार्वे के रेगनर एंथोन किटील फ्रिश और नीदरलैण्डस के यान टिरबेरगेन को दिया गया।
  • सामान्यतः अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार उन अर्थशास्त्रियों (Economists) को दिया जाता है जिन्होंने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अन्वेषण (Investigation) या विश्लेषण (Analysis) की पद्धति विकसित की हो जिससे अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नये परिवर्तन आ सकते हों, गरीबी दूर हो सकती हों, संसाधनों का प्रबंधन बेहतर हो सकता हो, वित्तीय प्रबंधन में बदलाव आ सकता हो।
  • वर्ष 1969 से अब तक इन पुरस्कारों को 51 बार दिया जा चुका हैं । वर्ष 2020 का पुरस्कार अर्थशास्त्र का 52वां पुरस्कार होगा।
  • वर्ष 2019 का पुरस्कार (अर्थशास्त्र) भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, एस्थर डुफ्लो एवं माइकल क्रेमर को संयुक्त रूप में दिया गया।
  • तीनों को यह पुरस्कार वैश्विक गरीबी को कम करने के लिए किये गये उपायों के लिए दिया गया। पुरस्कार प्रदान करते हुए रॉयल स्वीडिश एकेडमी ने अपने बयान में कहा कि तीनों अर्थशास्त्रियों ने अपने प्रयोग से डेवलपमेंट इकोनॉमिक्स को पूरी तरह बदल दिया है।
  • 12 अक्टूबर यानि सोमवार को अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गयी । इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार के लिए पॉल आर मिल्ग्रोम और रॉबर्ट बी विल्सन को चुना गया है। ये पुरस्कार उन्हें उनके कार्य ‘नीलामी के सिद्धांत और नए नीलामी प्रारूपों के आविष्कारों में सुधार’ के लिए दिया जाएगा। अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार को तकनीकी रूप से स्वीरिजेज रिक्सबैंक प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल के नाम से जाना जाता है।
  • इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की राशि करोड़ क्रोना होती है जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा में करीब 11 लाख अमेरिकी डॉलर है। इस पुरस्कार राशि के साथ विजेताओं को एक स्वर्ण पदक भी दिया जाता है। यह पुरस्कार नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में एक समारोह में 10 दिसंबर के दिन दिया जाता है।
  • वर्ष 2020 का अर्थव्यवस्था का नोबेल पुरस्कार भी अपने उद्देश्यों के साथ पूर्णतः मेल खाता है क्योंकि इस शोध से नीलामी की प्रक्रिया न सिर्फ आर्थिक रूप से अधिक व्यवहार्य होगी बल्कि नीलामी से प्राप्त होने वाला वित्त सरल, सहज और आर्थिक रूप से लाभदायक होगा।
  • अर्थव्यवस्था का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के पॉल आर मिल्ग्राम और रॉबर्ट बी विल्सन को जिस नीलामी प्रक्रिया में सुधार एवं शोध के लिए दिया गया है, उसकी व्यवहार्यता का परीक्षण भी हो चुका है।
  • दरअसल वर्ष 1994 में मिल्ग्राम एवं विल्सन ने एक नई नीलामी पद्धति विकसित की जिसका नाम सिमुल्टेनियस मल्टीपल राउंउ ऑक्शन (Simultaneous Multiple Round Auction) था।
  • इस नीलामी प्रक्रिया का प्रयोग यूनाइटेड स्टेट फेडरल कम्यूनिकेशन कमीशन द्वारा दूरसंचार स्पेक्ट्रम की नीलामी में किया गया, जिससे अमेरीका की नीलामी पद्धति में न सिर्फ सुधार आया बल्कि लाभकर भी सिद्ध हुआ, तब से इसका प्रयोग अनेक देशों में किया जाता है।
  • 1994 के बाद भी मिल्ग्राम और विल्सन द्वारा नीलामी की प्रक्रिया में अनेक शोध किये जाते रहे हैं, जिससे नीलामी की प्रक्रिया में अनेक प्रकार के बदलाव आ सकते हैं।
  • नीलामी वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी सामान/वस्तु को बेचने के लिए उसके खरीदारों के बीच एक प्रतिस्पर्धा करवायी जाती है। जो इस प्रतिस्पर्धा में जीतता है, मतलब उस सामान की सबसे अधिक कीमत देता है उसे वह सामान बेच दिया जाता है। इससे विक्रेता को कई खरीदारों द्वारा मिलाने वाले कीमत या मूल्य के विषय में जानकारी मिल जाती है तो खरीदार भी यह समझ पाता है कि कोई दूसरा व्यक्ति कितनी कीमत दे सकता है।
  • इस प्रक्रिया में खरीदार कम से कम कीमत देना चाहता है जबकि विक्रेता अधिक से अधिक कीमत प्राप्त करना चाहता है।
  • परंपरागत बोली में लोगों को एक स्थान पर बुलाया जाता है और उन्हें वस्तु के विषय में जानकारी प्रदान करके बोली लगाने के लिए कहा जाता था।
  • यह दो तरह से होता था। 1. बंद लिफाफे के माध्यम से कीमत/बोली लगाने की प्रक्रिया 2. सामने-सामने कीमत पर बोली लगाने की प्रक्रिया।
  • बंद लिफाफा के माध्यम से जो बोली लगायी जाती थी वह बहुत पारदर्शी नहीं मानी जाती है, क्योंकि किसी को कीमत की जानकारी नहीं मिल पाती है। इससे वर्तमान समय में इसकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता कम हुई है।
  • सामने बैठकर बोली लगाने वाली प्रक्रिया भी वर्तमान समय में कम होती जा रही है क्योंकि अब नीलामी में शामिल होने वाला व्यक्ति किसी दूसरे देश / क्षेत्र में हो सकता है और एक स्थान पर आकर वह नीलामी की प्रतीक्षा नहीं करना चाहता है।
  • सभी आर्थिक क्रियाएं इस समय डिजीटल हो चुकी हैं ऐसे में नीलामी भी अब ऑनलाइन और डिजीटल हो गया है।
  • इस तरह समय के अनुसार नीलामी की जो प्रक्रिया बदल रही उसके संदर्भ में मिल्ग्राम और विल्सन का यह शोध बहुत उपयोगी है और आने वाले समय में नीलामी की प्रक्रिया समय अनुकूल और आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनायेगा
  • क्या है नीलामी की थ्योरी
  • नीलामी की परिकल्पना या ऑक्शन थ्योरी एक ऐसी संकल्पना है जिसके तहत बाजार में किसी व्यापार में संसाधनों या वस्तुओं का एक पारदर्शी तरीके से आवंटन किया जाता है। ये आवंटन इस तरह किया जाता है जिससे संसाधनों का पूरी तरह से उपयोग किया जा सके। नीलामी की थ्योरी प्रायोगिक अर्थशास्त्र का एक हिस्सा मानी जाती है। नीलामी के सिद्धांत के तहत लेनदेन में होने वाले नियमों या प्रक्रिया की सूची तैयार की जाती है।
  • क्यों अहम् है नीलामी का सिद्धांत
  • ऐसा आम तौर पर देखा गया है की लोग ग्राहक को ही सामान बेचते हैं जो उस सामान का सबसे ज्यादा दाम देते हैं या कोई ग्राहक उसी दूकान दार से सामान खरीदता है जो उसे सबसे सस्ते दाम पर बेच रहा होता है। अब एक बड़े बाजार या वैश्विक बाजार में इसी चीज को देखा जाये तो बढ़ती तकनीकी के साथ ये चीजें ऑनलाइन हो गयीं हैं। अब सामान संसाधन या कोई सेवा वैश्विक बाजार में कितनी सस्ती है या महंगी है उसी हिसाब से ऑनलाइन बाजार में चीजें खरीदी या बेची जाती हैं। नीलाम होने वाली चीजों का दायरा अब पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है। घर,गाड़ियां दुकानें, बिजली, टेलीकॉम स्पेक्ट्रम, खनिज और बेशकीमती धातुएं सभी की आजकल नीलामी होती ह। ऐसे में नीलामी की अहमियत काफी बढ़ जाती है। यही वजह है की इस बार का नोबेल इस सिद्धांत के लिए दिया गया है।
  • सरकारें ट्रेजरी बिल, फोरेक्स, तेल के कुएं, जमीन, हवाई अड्डे, रेलवे और कई संसाधन भी नीलामी के जरिये ही आवंटित करती है। नीलामी की प्रक्रिया के चलते ही किसी देश में निजीकरण को बढ़ावा मिलता है। सार्वजनिक खरीद जिसके तहत समाज के गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को राशन मुहैया कराया जाता है उसका आवंटन भी नीलामी के तहत ही किया जाता है।
  • इस तरह से अगर गौर किया जाये तो नीलामी का असर खुले बाजार के समाज में हर इंसान के जीवन में अहम् भूमिका अदा करता है। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है की अगर बिजली सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली संस्था को नीलम की जाए तो बिजली के बिल बढ़ जाएंगे और इसका सीधा असर घरेलु बचत में दिखाई पडेगा।
  • नीलामी का सिद्धांत कैसे है मददगार
  • इस सिद्धांत की मदद से देश दुनिया में किसी भी नीलामी की प्रक्रिया में बोली लगाने और चीजों और संसाधनों के दाम कैसे तय किये जाते हैं इसकी जानकारी हासिल होती है। नोबेल समिति ने कहा की शोधकर्ताओं ने नीलामी के सिद्धांत से बोली लगाने और किसी सामान के अंतिम मूल्य के निर्धारण सम्बन्धी अलग अलग नियमों को समझा। और इस तरह से नीलामी का एक प्रक्रम तैयार हो सका।
  • नीलामी के संदर्भ में महत्वपूर्ण नियम:
  1. नीलामी के नियम क्या होंगे
  2. वस्तु के विषय में जानकारी
  3. भागीदारों की संख्या, उनके संदर्भ में प्रावधान
  4. वस्तु की प्रकृति कैसी है? अर्थात स्थायी, अस्थायी, भविषय की संभावना
  • विल्सन एवं मिल्ग्राम इन सभी बिंदुओं पर अपने शोध से निष्कर्ष निकाले हैं और यह कहा है कि नीलामी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवहार्य बनाया जा सकता है।
  • विल्सन ने बताया है कि खरीदर (बोली लगाने वाले) किसी वस्तु की कीमत कम क्यों देते हैं? दरअसल खरीदार यह सुनिश्चित करता रहता है कि वह जो कीमत दे रहा है उसे बाद में यह न लगे कि उसने ज्यादा दे दिया।
  • दरअसल यह इस वजह से होता है क्योंकि उस वस्तु से मिलने वाले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कीमत की पूरी जानकारी नहीं होती है। यदि यह दोनों जानकारियाँ हों तो बोली लगाने वाला व्यक्ति अधिक कीमत दे पायेगा।
  • आज अधिकांश टेलीकॉम कंपनियां घाटे में चल रही है, जिसके पीछे का प्रमुख कारण यह है कि जब इनके लिए 4G स्पेक्ट्रम की नीलामी की जा रही थी, उस समय कीमत (स्पेक्ट्रम का) अधिक लगायी गयी और बद में उस प्रकार का लाभ प्राप्त नहीं हो पाया।
  • उदाहरण स्वरूप एक ऐसे एरिया में टावर लगाने की बोली जिसकी जनसंख्या अभी कम है लेकिन भविष्य में ज्यादा हो सकती है।
  • सामान्य मूल्य (Common Values) और निजी मूल्य (Private Value) का नियम- किसी समान/वस्तु के खरीदारों के बीच उसकी कीमत को लेकर अलग-अलग धारणायें होती हैं। सामान्य मूल्य वह मूल्य है जो सबको दिखाई दे रहा है वहीं निजी मूल्य अपने-अपने रूचि पर निर्भर करता है।
  • उदाहरण स्वरूप किसी तस्वीर की कीमत।
  • मिल्ग्राम और विल्सन दोनों अमेरिका की स्टैनफोई यूनिवर्सिटी में कार्यरत हैं। दोनों नीलामी की प्रक्रिया पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं। उन्होंने ऐसी वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए निलामि प्रारूपों को तैयार किया, जिन्हें पारंपरिक तरीके से बेचना मुश्किल है। इन नये नियमों से दुनियाभर के विक्रेताओं, खरीदारों और करदाताओं को लाभ मिला है।