(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 15 August 2020


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इजराइल-UAE समझौते की प्रासंगिकता

  • हेनरी अल्फ्रेड किसिंजर अमेरिकी राजनीतिज्ञ एवं राजनायिक थे। इन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और जेराल्ड फोर्ड के प्रशासन के दौरान यूएसए के सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। यह अमेरिकी विदेशनीति के संदर्भ में लिखते है- ‘‘अमेरिका का कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है, स्थायी सिर्फ अमेरिका का हित होता है।’’
  • येरूशलम यहूदियों, मुस्लिमों और ईसाइयों की समान आस्था का केंद्र हैं यहां ईसाईयों की पवित्र सेपुलकर चर्च है। ईसाई समुदाय का मानना है कि ईसा मसीह को यहीं सूली पर लटकाया गया था।
  • यहां मुस्लिम समुदाय की गुंबदाकार ‘डोम ऑफ रॉक’ यानि कुव्वतुल सखरह अल-अक्सा मास्जिद है। यह एक पठार पर स्थित है जिसे मुस्लिम हरम अल शरीफ या पवित्र स्थान कहते हैं।
  • यहां सहूदी समुदाय की पवित्र दीवार है। यहां कभी यहूदी समुदाय का पवित्र मंदिर या स्थल था, जिसका बचा हुआ भाग यह पवित्र दीवार है। यहां के स्थान को यहूदी समुदाय ‘होली ऑफ होलीज’ कहते हैं।
  • फिलिस्तीन और इजराइल पर नियंत्रण के संघर्ष की लडाई बहुत पुरानी है और सबके अपने अपने दावे है।
  • 1947 में फिलिस्तीन में स्वतंत्र यहूदी और अरब राज्य की स्थापना करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने विभाजन योजना ((Partition Plan) प्रस्तुत किया। इसे यहूदी समुदाय ने स्वीकार कर लिया लेकिन अरब समुदाय ने इसे स्वीकार नहीं किया ।
  • वर्ष 1948 में यहूदियों ने स्वतंत्र इजराइल देश की घोषणा कर दिया। इसके बाद अरब राज्यों (इजिप्ट, जॉर्डन, इराक और सीरिया) ने इजराइल पर आक्रमण कर दिया। इस युद्ध में इजराइल ने यूएन के आदेश से मिली भूमि से भी अधिक भूमि पर नियंत्रण कर लिया।
  • 1967 में प्रसिद्ध ‘सिक्स डे वॉर’ (Six-Day War) हुआ जिसमें इजराइली सेना ने गोलन हाइट्स, वेस्ट बैंक तथा पूर्वी येरूशलम को भी अपने अधिकार क्षेत्र में कर लिया।
  • अरब-इजराइल विवाद अभी भी बना हुआ है और मध्य पूर्व के सबसे बड़े तनावों में से एक है।
  • पश्चिम एशिया और अफ्रीका के मुस्लिम देशों का एक समूह अरब लीग है जिसके 22 में से 16 देश इजराइल को एक देश ही नहीं मानते हैं।
  • अनेक संघर्षों और तनावों के बावजूद इजराइल अपना अस्तित्व बचाने में कामयाब रहा।
  • वर्ष 1979 में मिस्र ने तथा वर्ष 1994 में जॉर्डन ने इजराइल के साथ शांति समझौता कर लिया।
  • मिस्र ने जब इजराइल के साथ समझौता किया तो बाकि मुस्लिम देशों ने इसका विरोध किया और मिस्र को OIC (इस्लामिक सहयोग परिषद) से अलग कर दिया।
  • इजराइल के सबसे बड़े विरोधी देश ईरान, सऊदी अरब एवं UAE रहे हैं। ईरान इजराइल से क्षद्म युद्ध (Proxy War) लड़ता रहा।
  • ईरान शिया बहुल देश है वहीं सऊदी अरब सुन्नी बहुल देश है जिसके कारण दोनों के बीच विवाद बना रहता है।
  • सऊदी अरब, इजराइल से बड़ा दुश्मन ईरान को मानता है। हाल में सऊदी अरब, एवं UAE ने ईरान पर हथियार हस्तांतरण पर लगे प्रतिबंध को बढ़ाने की मांग सुरक्षा परिषद से की थी। अर्थात दोनों के बीच तनाव अभी भी चरम पर है।
  • यह भी समझना होगा कि इजराइल और सऊदी अरब दोनों अमेरिका के मित्र देश में शामिल हैं और ईरान के दुश्मन हैं।
  • UAE और सऊदी अरब अच्छे मित्र एवं इस्लामिक सहयोग संगठन/परिषद के सबसे प्रभावी देश है।
  • वर्ष 1971 से संयुक्त अरब अमीरात फिलिस्तीनियों की भूमि पर इजराइल के नियंत्रण को मान्यता नहीं देता था।
  • हाल के समय में भी अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, सीरिया, लेबनान जैसे अनेक देश इजराइल को मान्यता नहीं देते हैं।
  • अमेरिका और इजराइल लंबे समय से खाड़ी देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं और समझौते का प्रयास कर रहे हैं ताकि इजराइल के साथ तनाव कम हो सकें।
  • इसी क्रम में हाल ही में इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात ने ऐतिहासिक वाशिंगटन- ब्रोकेड समझौता के तहत पूर्ण राजनायिक संबंध स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की है।
  • इजराइल के साथ ऐसा समझौता करने वाला UAE तीसरा देश है। हालांकि कई वर्षों से दोनों ने व्यापार एवं बातचीत के अनेक प्लेटफार्म पर इसके लिए बातचीत कर रहे थे।
  • ईरान के साथ दोनों देशों की साझा दुश्मनी और लेबनान के आतंकवादी समूह हिज्बुल्लाह के कारण इजराइल की खड़ी देशों के साथ समीपता बढ़ी है।
  • वाशिंगटन-ब्रोकेड समझौता/इजराइल-यूएई शांति समझौता या अब्राहम एकॉर्ड (Abraham Accord) के तहत दोनों देश शांति स्थापित करेंगे, सहयोग करेंगे।
  • इसके तहत इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी क्षेत्रें को अपने हिस्से में जोड़ने की योजना को निलंबित कर दिया जायेगा।
  • इजराइल वेस्ट बैंक के बड़े हिस्से पर कब्जा करने की योजना को निलंबित कर देगा।
  • USA, UAE एवं इजराइल द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार आने वाले समय में प्रतिनिधिमंडल सीधी उड़ानों, सुरक्षा, दूरसंचार, ऊर्जा पर्यटन और स्वास्थ्य देखभाल के सौदों पर हस्ताक्षर करेंगे।
  • इजराइल- UAE एवं USA ने मध्यपूर्व के शांति के संदर्भ में जहां महत्वपूर्ण बताया है वहीं फिलिस्तीनी समुदाय ने इसे खारिज करते हुए उनके साथ धोखा बताया है।
  • फिलिस्तीनी इस्लामी राजनीतिक संगठन ‘हमास’ ने इसे पूर्णतः खारिज कर दिया है।
  • मिस्र ने इसे महान हितों की दिशा में एक पहल बताया है।
  • ईरान ने इस समझौते को शर्मनाक बताया है।
  • तुर्की ने इसे फिलिस्तीनी समुदाय को धोखा देने वाला समझौता बताया है। तुर्की ने UAE के साथ अपने राजनायिक संबंधों को तोड़ने की बात कहा है। तुर्की आने समय में अपने राजदूत एवं अन्य अधिकारियों को UAE से वापस बुलरा लेगा।
  • समीक्षकों का मानना है कि इस समझौते से ट्रंप को आने वाले चुनाव में फायदा मिलेगा तथा इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कम होती लोकप्रियता में सुधार आयेगा लेकिन मुस्लिम सहयोग परिषद के टूटने की संभावना बढ़ जायेगी।
  • OIC इस्लामिक सहयोग संगठन में पाकिस्तान, मलेशिया एवं तुर्की पहले से ही नये संगठन के निर्माण की बात करते आये है वहीं अब इस मुद्दे पर एर्दोगन (तुर्की के राष्ट्रपति) ने एक ऐसे समूह/संगठन की आवश्यकता की बात कहा जो फिलिस्तीनी समुदाय के लिए संघर्ष कर सके।
  • यहां यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि तुर्की पहला मुस्लिम बहुत देश था जिसने इजराइल को मान्यता दी तथा मार्च 1949 में उसके साथ राजनायिक संबंध स्थापित किये थे।
  • सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज के प्रोफेसर एके पाशा इसे ऐतिहासिक समझौता नहीं मानते हैं। उनके अनुसार इजराइल ने इसेस पहले जो चार समझौते (1979, 1983, 1993, 1994) किये थे उन्हें भी ऐतिहासिक बताया था लेकिन इससे कोई शांति स्थापित नहीं हो पाई थी क्योंकि यह अलग-अलग देशों द्वारा किये जाते हैं। और क्षेत्रीय सहमति इसमें शामिल नहीं होती है।
  • दूसरी तरफ कई समीक्षकों का मानना है कि आने वाले समय में पाकिस्तान एवं अन्य देश जिनके रिश्ते सऊदी अरब से ठीक नहीं है वह इजराइल से समझौता कर सकते हैं अर्थात इजराइल के साथ हुआ यह समझौता आगे बढ़ सकता है।
  • भारत के रिश्ते UAE एवं इजराइल दोनों देशों के साथ अच्छें हैं इसलिए भारत के साथ उनके संबंध अच्छे बनें रहेंगे लेकिन फिलिस्तीन को लेकर भारत की नीति में अस्पष्टता आ सकती है।