(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 14 September 2020


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इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC)

  • सयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद यह तथ्य सामने आया कि कई प्रकार के अपराध राज्यों या उसकी संस्थाओं के द्वारा किये जाते हैं जिससे मानवाधिकार का हनन होता है।
  • युद्ध के दौरान, गृह युद्ध के दौरान, अलगाववाद की समाप्ति के दौरान, जातिय एवं नृजातीय संघर्ष के दौरान और कई बार क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के दौरान राज्यों/उसकी संस्थाओं के द्वारा कई बार ऐसी रणनीति अपनाई जाती है जिससे नरसंहार (Genocide) की घटनायें सामने आती हैं। इसके अलावा इस प्रकार के कृत्य मानवता के खिलाफ अपराध (Crime Against Humanity), युद्ध अपराध (War Crime) एवं अतिक्रमण का अपराध (Crime of Agression) आदि रूपों में हो सकते हैं। इस प्रकार के अपराध समाज में अशांति उत्पन्न करते हैं और मानवाधिकार का हनन करते हैं।
  • इन्हीं समस्याओं को दूर करने एवं इसके मार्ग में आने वाली चुनौतियों को समझते हुए 17 जुलाई वर्ष 1998 को अंतर्राष्ट्रीय अपराधिक न्यायालय की स्थापना करने के लिए रोम संविधि (Rome Statute) को अपनाया गया।
  • इसमें यह प्रावधान था कि जब तक 60 देशों द्वारा इसका अनुमोदन (Ratification) नहीं कर दिया जाता है तब तक यह प्रभावी नहीं होगा। 1 जुलाई 2002 को जब 60 से अधिक देशों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिया तब यह प्रभावी हुआ।
  • ICC का मुख्य काम उन व्यक्तियों को सजा देना या उनके विरूद्ध निर्णय देना है जो नरसंहार, युद्ध अपराध या मानवता के विरूद्ध अपराधों से जुड़े हों।
  • ICC उन सामूहिक नरसंहार या मानवता के विरूद्ध अपराध करने वालों के विरूद्ध मुकदमा दायर करने का आखरी पड़ाव है, जिन पर संबंधित सरकारें कार्यवाही नहीं करती हैं।
  • इस कोर्ट में (ICC में) समझौते में शामिल सभी देशों के विरूद्ध या फिर गैर सदस्य देशों के उन नागरिकों पर मुकदमा दर्ज करने का अधिकार है, जो सदस्य देशों में किये गये अपराधों में शामिल हैं। जैसे अमेरिकी सेना और अधिकारियों के विरूद्ध अफगानिस्तान नरसंहार का मामला। अमेरिका तो रोम संधि से बाहर हो चुका है लेकिन अफगानिस्तान इसका सदस्य है। इसलिए इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट अफगानिस्तान के मामले में अमेरिका से भी पूछताछ कर सकती है।
  • इस समय 123 राष्ट्र रोम संविधि के पक्षकार हैं तथा ICC अधिकार को मान्यता प्रदान करते हैं लेकिन अमेरिका, चीन रूस और भारत इसके भाग नहीं है।
  • ICJ (International Court of Justice) संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का हिस्सा है जबकि ICC संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का हिस्सा नहीं है।
  • ICJ संयुक्त राष्ट्र के 6 प्रमुख अंगों में से एक है जो मुख्य रूप से देशों के मध्य के विवादों की सुनवाई करता है। जबकि ICC व्यक्तियों पर मुकदमा चलाती है क्योंकि इसका अधिकार क्षेत्र किसी राज्य में हुए अपराध या ऐसे राज्य के किसी नागरिक द्वारा किसी राज्य में हुए अपराध या ऐसे राज्य के किसी नागरिक द्वारा किये गये अपराधों तक विस्तारित है।
  • ICC हेग (नीदरलैंड) में स्थित एक स्थायी निकाय है।
  • इसका क्षेत्राधिकार मुख्य रूप से 4 प्रकार के अपराधों तक विस्तारित है। 1. नरसंहार (Genocide) 2. युद्ध अपराध (War Crimes) 3. अतिक्रमण का अपराध (Crime of Aggression) 4. मानवता के खिलाफ अपराध (Crimes Against Humanity)
  • अमेरिका ने प्रारंभ में 1993-2001 तक क्लिंटन प्रशासन के दौरान रोम संविधि की वार्ताओं में अपनी रूचि प्रकट की तथा वर्ष 2000 में उसने इस पर हस्ताक्षर भी किया लेकिन अगले राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश ने वर्ष 2002 में अमेरिका को इस संधि से बाहर कर लिया।
  • इस समझौते से अलग होने से पहले अमेरिका ने यह शर्त रखी थी कि, यदि दुनिया भर में फैले उसके शांति सैनिकों या अधिकारियों के विरूद्ध ICC सुनवाई करता है तो वह अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा। इस मांग को ICC की निगरानी के लिए बनाये गये असेंबली ऑफ स्टेट पार्टीज ने नकार दिया, जिसके बाद अमेरिका इससे अलग हो गया।
  • इस समझौते में भारत चाहता था कि नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के विरूद्ध अपराध की परिभाषा वह रखी जाये जो भारत को भी मंजूर हो, इस मांग को भी अस्वीकार कर दिया गया।
  • रूस ने वर्ष 2000 में इस पर हस्ताक्षर तो किया था लेकिन इसे अनुमोदत नहीं किया था अर्थात वह इसका सदस्य नहीं था लेकिन जुड़ा था।
  • ICC ने 14 नवंबर 2016 को एक आदेश पारित कर 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे को एक अंतर्राष्ट्रीय सैन्य संघर्ष बताया था जिससे रूस नाराज हो गया और खुद को उसने अलग कर लिया।
  • इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में पहली सुनवाई वर्ष 2006 में की गई थी। मामला था सामूहिक नरसंहार और बच्चों के सेना में भरती करने के मामले में कांगों के पूर्व सेनाध्यक्ष थॉमस लुंबेर्गो के विरूद्ध मुकदमे को स्वीकार किया जाये या नहीं।
  • इस संदर्भ में मुकदम स्वीकार किया गया और वर्ष 2009 में इसकी लगातार सुनवाई शुरू की गई। इस मामले में लुंबेंर्गो को दोषी पाया गया और वर्ष 2012 में उन्हें 14 वर्ष के कारावास की सजा दी गई।
  • वर्ष 2009 में इस कोर्ट ने सूड़ान के तत्कालीन राष्ट्रपति ओमर हसन अहमद अल बशीर के खिलाफ वारंट जारी किया था। यह पहला मौका था जब किसी राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ इस कोर्ट ने वारंट जारी किया था।
  • इस समय ICC में कुल 28 मुकदमें दायर हैं, जिसमें से 13 पर कार्यवाही की जा रही है और शेष पर प्रारंभिक विचार किया जा रहा है।
  • कोस्टा डी आइवरी, माली, लीबिया, जॉर्जिया, सूडान, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, बुरूण्डी, युगांडा, केन्या, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, म्यामार ऐसे ही देश है।
  • इस समय यह संस्था डोनाल्ड ट्रंप के कारण चर्चा में है।
  • इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट की वरिष्ठ न्यायधीश फाटू बेन्सौदा अफगानिस्तान में वर्ष 2003 से 2014 के बीच बड़े पैमाने पर नागरिकों की हत्या से संबंधित मुकदमा देख रही हैं और इस संबंध में उन्हें तालिबानी नेताओं, अफगानिस्तान सरकार, अमेरिकी सरकार और सीआईए के बयान लेने हैं।
  • न्यायधीश ने मार्च के माह में अमेरिकी सरकार को नोटिस भेजा, जिसका कोई जवाव ट्रंप प्रशासन की ओर से नहीं दिया गया। लेकिन जुलाई माह में अमेरिकी सरकार ने एक आदेश जारी किया कि ICC से जुड़ा कोई भी व्यक्ति अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकता है। इनका बीजा रद्द कर दिया गया और ICC के किसी कर्मचारी की संपत्ति अमेरिका में है तो उसे भी जब्त कर लिया जायेगा। ICC की मदद करने वाले अमेरिकी निवासियों एवं नागरिकों के साथ भी इसी प्रकार का व्यवहार करने की बात कही गई।
  • अमेरिका की इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट से नाराजगी केवल अफगानिस्तान के कारण ही नहीं है बल्कि फिलिस्तीनियों के विरूद्ध नरसंहारों में शामिल इजराइल से पूछताछ के कारण भी हैं इजराइल की हरेक अमानवीय गतिविधि को अमेरिका बढ़ावा देता है और उसे जांच से बचाता है।
  • अमेरिकी न्याय विभाग को पर्याप्त ICC के विषय में पर्याप्त जानकारी मिली है कि अमेरिका की तरफ कहा गया है कि यहाँ अनेक प्रकार के भ्रष्टाचार एवं मिलिभगत है।
  • अमेरिकी अधिकारियों ने ICC में अपने पक्ष में हेर-फेर करने के लिए रूस को भी जिम्मेदार ठहराया है।
  • अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ माइक पोंपियों ने ICC को भ्रष्टाचारी संस्था बताया है।
  • अमेरिका ने कहा है कि ICC का अधिकार क्षेत्र सिर्फ तभी लागू होता है जब कोई सदस्य राज्य अत्याचारों के खिलाफ मुकदमा चलाने में असमर्थ या अनिच्छुक हो।
  • ICC ने अमेरिका के इस फैसले की निदां यह कहते हुए किया है कि अमेरिका का फैसला ‘विधि’ के शासन और न्यायालय की न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का अस्वीकार्य प्रयास है।’’
  • अंतर्राष्ट्रीय NGO ह्यूमन राइट्स वॉच (Human Rights Watch) के अनुसार संपत्ति जब्त करने और यात्रा पर प्रतिबंध लगाने जैसे निर्णय मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले हैं न कि पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करने वाले अभियोजन पक्ष तथा न्यायधीश के लिए।
  • संयुक्त राष्ट्र एवं यूरोपीय यूनियन ने भ्ज्ञी इसकी आलोचना की है।
  • फ्रांस, ब्रिटेन सहित 10 संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषक सदस्यों ने भी इसकी आलोचना की हैं अमेरिका की तरह यदि अन्य देश भी इसी प्रकार का व्यवहार करते हैं तो मानवाधिकार का संरक्षण मुश्किल हो जायेगा।
  • समीक्षकों ने कहा है कि अमेरिका मानवाधिकार के मुद्दे पर दो तरफा व्यवहार कर रहा है। एक तरफ वह खुद मानवाधिकार का हनन कर रहा है तो दूसरी तरफ इसी मुद्दे पर चीन को घेरने का प्रयास कर रहा है।
  • अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि विगत कुछ वर्षों से अमेरिका द्वारा अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं और उस पर बने लोगों के भरोशे को समाप्त करने का सतत प्रयास का ही एक हिस्सा ICC के संबंध में लाये गये आदेश हैं।
  • अमेरिका अपने को ट्रांस पैसिफिक पार्टनरशिप, पेरिस क्लाइमेट एग्रीमेंट, यूनेस्को, ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन, ईरान न्यूक्लियर डील, UN ह्यूमन राइट काउंसिल, UN रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी, आर्म्स कंट्रोल ट्रीटीज विथ रसिया, WHO से पहले ही अलग कर के अपनी अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी को तिलांजली दे चुका है।