(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 12 November 2020


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डार्क वेबः साइबर अपराध की काली दुनिया क्या है ?

  • इंटरनेट आज हमारी आवश्यकता का महत्वपूर्ण भाग बन गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, कारोबार, सामाजिक संबंध, राजनैतिक क्रिया- कलाप आदि का वर्तमान जुड़ाव गहरे स्तर तक इस इंटरनेट से हो चुका है। आज हमारे जीवन के हर भाग में किसी न किसी रूप में इंटरनेट की मौजूदगी है। हम इस इंटरनेट का प्रयोग करते समय कई प्रकार की अपनी निजी जानकारियाँँ जैसे- मोबाइल नंबर, नाम, पता, जन्मतिथि, स्थान, बैंक एकाउंट, क्रेडिट कार्ड की जानकारी, हस्ताक्षर, फोटो आदि इस पर रखते हैं। यह निजी जानकारियाँ ऐसी हैं, जिन तक यदि किसी गलत व्यक्ति की पहुँच हो जाये तो वह इसका दुरूपयोग कर सकता है। इसी कारण डाटा संरक्षण वर्तमान समय के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।
  • डेटा तकनीकी रूप में जानकारियों का ऐसा समूह है जिसे कंप्यूटर आसानी से पढ़ सकता है। यह जानकारियाँ दस्तावेज, चित्र, ऑडियो क्लिप, सॉफ्रटवेयर प्रोग्राम वा किसी अन्य रूप में हो सकती हैं।
  • वर्तमान समय में विभिन्न कंपनियाँ अपने उपभोक्ताओं के अनुभव को सुखद बनाने के उद्देश्य से इसे संग्रहित कर इसका प्रयोग कर रही हैं। ठीक यही कार्य लगभग हर प्रकार के संगठन करते हैं।
  • वर्तमान समय में भारत में 500 मिलियन से अधिक सक्रिय वेब उपयोगकर्ता हैं। भारत का ऑनलाइन बाजार चीन के बाद सबसे बड़ा बाजार है।
  • हाल ही में चीनी निवेश वाले ऑनलाइन ग्रोसरी प्लेटफॉर्म बिग बास्केट पर साइबर अटैक की खबर है, जिसकी अब पुष्टि भी हो चुकी है।
  • बिग बास्केट के करीब दो करोड़ ग्राहकों का डेटा लीक हो गया है, जिसे डार्क वेब पर बेचा जा रहा है। अमेरिका स्थित साइबर सिक्योरिटी इंटेलीजेंस फर्म साइबल इंक ने यह जानकारी दी है।
  • साइबल इंक के अनुसार जो डाटा लीक हुआ है उसमें ग्राहकों के नाम, ईमेल आईडी, पासवर्ड, पिन, कांटैक्ट नंबर, पता, जन्मतिथि, आईपी एड्रेस और लोकेशन आदि की पूरी जानकारी है।
  • बेंगलुरू बेस्ड कंपनी बिग बास्केट ने इस संबंध में साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज करवायी है।
  • कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि हमारे ग्राहकों की निजता और गोपनीयता हमारी प्राथमिकता है। हम ग्राहकों के फाइनेंनशियल डाटा स्टोर नहीं करते है। कंपनी का कहना है कि ग्राहकों के फाइनेंनशियल डाटा सिक्योर हैं।
  • साइबल ब्लॉग के पोस्ट के मुताबिक बिग बास्केट के ग्रहकों का डाटा डार्कवेब पर 40,000 डॉलर में बेचा जा रहा है।
  • बिग बास्केट कंपनी में चीन के कंपनी अलीबाबा, मिराय एसेट-नेवर एशिया ग्रोथ फंड और ब्रिटिश CDC ग्रुप ने फंडिंग किया हुआ है।
  • बिग बास्केट 350-400 मिलियन डॉलर की पूंजी जुटाने की कोशिश में लगी है इसके लिए कंपनी सिंगापुर सरकार के टीमासेक, अमेरिका बेस्ड फिडेलिटी ओर टाइबोर्न केपिटल के साथ फंडिंग की बात कर रही है। इससे पहले इस प्रकार की घटना से कंपनी का यह उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
  • यहां एक प्रमुख चिंता डेटा संरक्षण के संदर्भ उभर कर सामने आया है।
  • हम-आप में से ज्यादातर लोग इंटरनेट के माध्यम से सूचना प्राप्त करने एवं साझा करने के लिए World Wide Web का इस्तेमाल करते हैं, जिसे संक्षेप में Web के नाम से जानते हैं। वेब पर जो भी सूचना होती हैं उसे हम बड़ी आसानी से किसी ब्राउजर की मदद से प्राप्त कर लेते हैं या हमें वहां तक का एक्सेस मिल जाता है। हम इस तरह जो सूचनायें प्राप्त कर पाते हैं वो पूरे इंटरनेट का सिर्फ 4 प्रतिशत है, इसे Surface Web के नाम से जाना जाता है। 96 प्रतिशत हिस्सा आम सर्च से बाहर होता है, जिसे Deep Web या Dark Web के नाम से जाना जाता है। दूसरे शब्दों में Google, Bing, Yahoo आदि से जो हम सर्च कर पाते हैं वह सिर्फ 4 प्रतिशत है बाकि डीप वेब या डार्क वेब के अंतर्गत आता है।
  • डीप वेब (Deep Web)- यह इंटरनेट का वह हिस्सा है जहां तक केवल सर्च इंजन के सर्च परिणामों की सहायता से नहीं पहुंचा जा सकता है। यहां तक पहुंचने के लिए उसके न्त्स् एड्रेस पर जाकर लॉग-इन करना होगा, जिसके लिए पासवर्ड और यूजरनेम का प्रयोग करना होगा।
  • जीमेल अकाउंट, ब्लॉगिंग वेबसाइट, वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक डेटाबेस वित्तीय अकाउंट की वेबसाइट, सरकारी प्रकाशन, रक्षा विभाग की सूचना, सुरक्षा एजेंसियों के दस्तावेज, अंतरिक्ष, अनुसंधान, आदि ऐसी ही वेबसाइट होती हैं जो अपने प्रकृति में वैधानिक हैं किंतु इन तक पहुंच के लिए एडमिन की अनुमति की आवश्यकता होती है।
  • डीप वेब का अधिकतर हिस्सा वैधानिक कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे डीप वेब इसलिए कहा जाता हैं क्योंकि इसमें यूजर की आइडेंटिटी और ऑनलाइन एक्टिविटी के ट्रैक नहीं किया जा सकता है। आप कौन हैं? क्या कर रहें हैं, दूसरा व्यक्ति इसका पता नहीं लगा सकता है।
  • डार्क वेब (Dark Web)- यह डीप वेब का एक ऐसा भाग है जहां दुनियाभर के गैरकानूनी कार्य होते हैं।
  • यहां ड्रग्स व्यापार, अवैध हथियार, चोरी का सामन, मानव तस्करी, चाइल्ड पोर्नोग्राफी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड की चोरी की गई डिटेल्स, लाइव मर्डर, साइबर क्राइम, मानव अंगों की तस्करी, गैरकानूनी बायोलॉजिकल एक्सपेरिमेंट आदि किया जाता है।
  • डार्क वेब को साइबर की दुनिया का काला पन्ना कहा जाता है क्योंकि यहां जो कुछ होता है वह इतना इनक्रिप्टेड होता है कि उसका पता लगाना संभव नहीं होता है।
  • यहां लॉगिन करने करने के लिए एक सिक्योर कनेक्शन की आवश्यकता होती है, जो आइडेंटिटी को छुपाकर रख सके। इससे इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और सरकारी एजेंसियाँ ट्रैक नहीं कर पाती हैं।
  • डार्क वेब को VPN (Virtual Private Network) का प्रयोग करके ही ओपेन किया जाता है। इससे वेबसाइट विजिटर को ट्रैक नहीं किया जा पाता है। ट्रैकिंग को रोकने के लिए VPN का प्रयोग किया जाता है। हर 5-10 मिनट में VPN बदलता रहता है।
  • डार्क वेब यूज करने के लिए कंप्यूटर में Tor ब्राउजर को इंस्टाल करना होता है, जिसके बाद Tor नेटवर्क से कंप्यूटर जुड़ जाता है। कनेक्ट होने के बाद आपको Tor Dashboard पर आपकी IP एड्रेस दिखाया जायेगा, जो फेक होगा।
  • वर्तमान समय में इनका बढ़ता उपयोग कई प्रकार की चुनौतियों को उत्पन्न कर रहा है और हर साल ऐसे मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह किसी एक देश की समस्या न होकर वैश्विक समस्या है।