(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 11 September 2020


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नोबेल पुरस्कार चर्चा में क्यों है?

  • अल्फ्रेड नोबेल विश्व के महान वैज्ञानिक थे। इन्होंने अपने जीवन में लगभग 355 अविष्कार किये थे, जिनका पेटेंट इनके नाम था।
  • अल्फ्रेड नोबेल ने ही 1867 में डायनामाइट का अविष्कार किया था।
  • यह एक संपन्न परिवार से थे और इन्होंने शादी नहीं किया था।
  • पटेंट से अल्फ्रेड नोबल के पास अपार संपत्ति इकट्ठी हो गई थी ।
  • डायनामाइट एक विध्वंसक पदार्थ था और अल्फ्रेड नोबेल यह चाहते थे कि उन्हें मौत के सौदागर के रूप में याद न किया जाये।
  • अपनी मृत्यु से एक साल पहले 1895 में अल्फ्रड नोबेल ने अपनी वसीयत लिखी। जिसमें उन्होंने लिखा कि उनकी संपत्ति का 94 प्रतिशत हिस्सा मानवता के लिए कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित करने में खर्च किया जाये।
  • सम्मानित करने के लिए इनके पैसे के ब्याज का प्रयोग किया जाना था। साथ ही पेटेंट से हमेशा पैसा जो आयेगा उसका भी प्रयोग इन्हीं कार्यों के लिए खर्च किया जायेगा।
  • स्वीडिश बैंक में जमा इस राशि का प्रयोग करने के लिए नोबेल फाउंडेशन की स्थापना 29 जून 1900 को हुई।
  • प्रारंभ में 5 कैटगरी बनाई गईं। यह थीं- भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान, शांति और साहित्य। 1968 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र को भी इसमें शामिल कर दिया गया।
  • इन पुरस्कारों का प्रारंभ 1901 से हुआ । हर साल 10 दिसंबर को इनकी पुण्यतिथी के अवसर पर नोबेल पुरस्कार दिये जाते हैं।
  • अक्टूबर माह में इनकी घोषणा की जाती है एवं लगभग दो माह बाद इन्हें प्रदान किया जाता है।
  • 1974 से पहले किसी मृत व्यक्ति को भी यह पुरस्कार दिया जा सकता था लेकिन 1974 के बाद यह तय किया गया कि यह केवल जीवित व्यक्ति को ही प्रदान किये जायेंगे।
  • यदि नाम के घोषणा होने के बाद किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसे पुरस्कार दिया जायेगा।
  • शांति के अलावा बाकि 5 नोबेल प्राइस (अवार्ड) स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में दिये जाते है जबकि शांति का नोबेल पुरस्कार नार्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है।
  • यह पुरस्कार कम से कम एक व्यक्ति और अधिक से अधिक तीन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है।
  • नोबेल प्राइज वितरण के लिए नोबल फाडंडेशन का गठन किया गया है। इसमें कुल 5 लोग होते हैं। इस फाउंडेशन के मुखिया का चयन स्वीड़न की किंग ऑफ काउंसिल द्वारा तय किया जाता है। 4 अन्य सदस्य पुरस्कार वितरण संस्थान के न्यासी द्वारा तय किये जाते हैं ।
  • सम्मान प्राप्त व्यक्ति स्वीड़न के राजा के हाथों पुरस्कार प्राप्त करता है।
  • नोबेल पुरस्कार जीतने वाले व्यक्ति को एक नोबेल पदक, डिप्लोमा तथा पुरस्कार राशि दी जाती है।
  • पुरस्कार राशि निश्चित नहीं रही है , यह घटती बढ़ती रही है। जैसे 2017 से पहले तक नोबेल पुरस्कार जीतने वालों को 8 मिलियन स्वीडिश क्राउन (SEK) मिलते थे पर 2017 में इसे बढ़ाकर 9 मिलियन (SEK) कर दिया गया। इसे भारतीय रुपयें में बदलें तो लगभग 7 करोड़ रूपये।
  • यदि दो लोग किसी वर्ग मे होते है तो आधी-आधी राशि दी जाती है और यदि तीन लोग है तो कमेटी तय करती है कि किसे कितनी राशि मिलेगी।
  • नोबेल प्राइस/अवार्ड के लिए पहले नामिनेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है । नामिनेशन की प्रक्रिया में हम सब या हर कोई व्यक्ति भाग नहीं ले सकता है।
  • नामिनेशन में राष्ट्र प्रमुख, राजनीतिज्ञ (राष्ट्रीय स्तर के), यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, विदेश नीति संस्थान के निदेशक, नोबेल प्राइज विजेता और नार्वेजियन कमेटी और उसके सदस्य भाग लेते है।
  • नामिनेशन 1 फरवरी से पहले भेजना होता है। 2021 के दिसंबर में जिन्हें इस नामिनेशन में भाग लेना है उनका नामिनेशन वर्ष 2021 के 1 फरवरी तक प्राप्त हो जाना चाहिए।
  • इसके बाद नोबेल प्राइज कमेटी यह फैसला लेती है कि किसे प्राइज/अवार्ड दिया जाना है।
  • वर्ष 2020 के नोबेल प्राइज के लिए अभी तक 318 लोगों का नामिनेशन किया गया है। विजेताओं की घोषणा अक्टूबर माह में की जायेगी।
  • पहला नोबेल शांति पुरस्कार 1901 में रेड क्रॉस के संस्थापक ज्यां हैरी दुनांत और फ्रेंच पीस सोसायटी के संस्थापक फ्रेडरिक पैसी को संयुक्त रूप से दिया गया।
  • नोबेल अवार्ड सामान्यतः समान होते हैं लेकिन जिसकी सर्वाधिक चर्चा होती है, जिस पर सबका ध्यान रहता है, वह है शांति के लिए दिया जाने वाला नोबेल पुरस्कार।
  • हाल ही में नार्वे के एक सांसद क्रिश्चियन ताइब्रिंग जेदे (Christian Tybring Gjedde) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगले साल के शांति के क्षेत्र में दिये जाने वाले नोबेल के लिए नॉमिनेट किया है।
  • इस नॉमिनेशन का आधार उन्होंने यह बताया है कि ट्रंप द्वारा इजराइल और UAE के बीच कराया गया समझौता ऐतिहासिक है और मध्य-पूर्व के क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • वर्ष 2018 में भी ताइब्रिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को नामिनेट किया था। इस समय ताइब्रिंग ने उत्तरी एवं दक्षिणी कोरिया के मध्य शांति स्थापित करवाने के ट्रंप के प्रयास को महत्वपूर्ण बताया था।
  • अब व्हाइट हाउस की तरफ से कहा गया है कि डोनाल्ड ट्रंप इसके हकदार हैं क्योंकि UAE और इजराइल के मध्य करवाया गया समझौता कई दशकों के बाद कराया गया एक बड़ा समझौता है।
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और इजराइल ने 13 अगस्त को घोषणा की थी कि वे पूर्ण राजनायिक संबंध स्थापित करेंगे और दोनों देशों के द्वारा आगे बढ़ते हुए UAE और इजराइल के बीच पहला वाणिज्यिक विमान 31 अगस्त को अबूधावी में उतरा था।
  • डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते के संदर्भ में कहा था- 49 साल इजराइल और UAE अपने राजनयिक संबंध सामान्य बनायेंगे, वे अपने दूतावासों और राजदूतों का आदान-प्रदान करेंगे और अलग- अलग क्षेत्रें में सहयोग शुरू करेंगे जिनमें पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, व्यापार और सुरक्षा शामिल है।
  • ताइब्रिंग का मानना है कि वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए ट्रंप से ज्यादा प्रयास इस पुरस्कार के लिए नामित किसी अन्य सदस्य से नहीं किये है।
  • ताइब्रिंग का कहना है कि जब भी किन्ही दो देशों में विवाद उत्पन्न हुआ ट्रंप ने आगे बढ़कर शांतिपूर्ण तरीके से मध्यस्थता स्थापित करने का प्रयास किया।
  • उन्होंने ट्रंप के नामांकन के लिए लिखे गये पत्र में लिखा कि वह इस पुरस्कार की तीनों पात्रताएं पूरी करते हैं उन्होंने किसी तरह के सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा नहीं दिया और न ही युद्ध की पहल की। उन्होंने बातचीत के जरिए समझौते किये।
  • उन्होंने यह भी जोड़ा कि ट्रंप ने मध्य पूर्व के देशों में नाटो और अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम की है। 39 साल से अमेरिका के राष्ट्रपति या तो अमेरिका को युद्ध की स्थिति में ले जा रहे थे या अमेरिका को सशस्त्र विवाद में उलझा रहे थे। ट्रंप ने इसे समाप्त किया है।
  • डोनाल्ड ट्रंप के नामिनेशन को मजबूती हाल ही में सर्बिया और कोसोवो के मध्य करवाये गये। एक वर्षीय शांति समझौते से मिल सकती है।
  • सर्बिया-कोसोवो के मध्य दो दशक से भी लंबे समय से विवाद चल रहा था। कोसोवो जहां अपनी पहचान के लिए संषर्ष कर रहा है वहीं सर्बिया की मंशा कोसोवो को अपने में मिलाने की रही है।
  • इस समझौते में यह भी कहा गया था कि जुलाई 2021 तक यह दोनों देश जेरूशलम में अपनी एंबेसी स्थापित करेंगे।
  • कई समीक्षकों का मानना है कि इस नामिनेशन के लिए डोनाल्ड ट्रंप की छवि को बलपूर्वक अच्छा करने का प्रयास किया गया है जो शांति के नोबेल पुरस्कार के महत्व को कम करता है।
  • दरअसल शांति के नोबेल पुरस्कार के रूप में दुनिया किसी ऐसे व्यक्ति को देखना चाहती है जिसका योगदान प्रत्यक्ष रूप से शांति स्थापित करने में रहा हो। डोनाल्ड ट्रंप की छवि कम गंभीर नेता की है और उनके कार्यकाल कई तरह के तनाव बढे़ भी है।
  • डोनाल्ड ट्रंप हिंद-प्रशांत क्षेत्र, चीन के साथ ट्रेड वॉर, तुर्की-सीरिया एवं अन्य देशों के साथ विवाद, भारत-चीन, तनाव चीन- ऑस्ट्रेलिया विवाद, उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया विवाद, अफ्रीका में ISIS के बढ़ते प्रभाव को रोकने में पूर्ण सफल नहीं हो सके है।
  • डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन, WHO से अपने देश को बाहर किया तो साथ ही ईरान के साथ अपने तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
  • रूस के साथ तानव बना हुआ है तो चीन के साथ तनाव अपने चरम पर पहुँचा है।
  • अमेरिका में अश्वेतों के साथ हिंसक घटनायें बढ़ी हैं तो ट्रंप प्रशासन ने शरणार्थियों के मुद्दे पर बहुत प्रभावी कदम नहीं उठाया है। कुल मिलाकर ट्रंप के नाम के साथ कई प्रकार के विवाद और चुनौतियाँ अभी जुड़ी हुई है।
  • यदि डोनाल्ड ट्रंप को यह अवार्ड दिया जाता है तो वह 5वें ऐसे व्यक्ति होंगे जो अमेरिका के राष्ट्रपति रहे हों और नोबेल अवार्ड भी जीता हो।
  • अभी तक 4 लोग (अमेरिकी राष्ट्रपति) जिन्हें यह पुरस्कार मिल चुका है- रूजवेल्ट 1906, वुड्रो विल्सन 1920, जिम्मी कार्टर 2002 एवं बाराक ओबामा 2009।
  • वर्ष 2019 का शांति का नोबेल पुरस्कार इथेपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली को दिया गया था। इन्होंने अपने पड़ोसी देश इरीट्रिया के साथ 20 वर्षों से चले आ रहे युद्ध का अंत किया था। इसके माध्यम से उन्होंने हॉर्न ऑफ अफ्रीका में शांति और मित्रता के एक नये युग का प्रारंभ किया था।
  • वर्ष 2018 का शांति का नोबेल पुरस्कार कांगो के डॉक्टर डेनिस मुकवेगे और आईएस के आतंक का शिकार हुई रेप पीडिता नादिया मुराद को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • चयन समीति ने कहा था- दोनों ही विजेताओं को युद्ध क्षेत्र में यौन हिंसा को हथियार की तरह इस्तेमाल किये जाने की मानसिकता के खिलाफ सराहनीय काम किया है। यौन हिंसा के खिलाफ सर्वोच्च योगदान को देखते हुए इन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया।
  • वर्ष 2017 का शांति पुरस्कार एंटी न्यूक्लियर अभियान के लिए ICAN (इंटरनेशनल कंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स) को मिला।
  • वर्ष 2016 का शांति का नोबेल पुरस्कार कोलंबिया के राष्ट्रपति जुआन मैनुएल सांतोष को प्रदान किया गया।
  • वर्ष 2014 में पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसुफजई (Malala Yousafzai) को दिया गया था।
  • वर्ष 2013 में रासायनिक हथियार निषेध संगठन (OPCW) को एवं 2012 में यूरोपीय संघ को दिया गया था।
  • अभी तक 10 भारतीयों या भारतीय मूल के लोगों को यह पुरस्कार मिल चुका है।
  • रविंद्रनाथ टैगोर को साहित्य के लिए 1913 में पुरस्कृत किया गया। वह यह सम्मान प्राप्त करने वाले पहले एशियाई थे।
  • चंद्रशेखर वेंकटरमन ने 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में यह पुरस्कार प्राप्त किया था। जब कोई प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है, तब उसकी वेवलेंथ में बदलाव आता है, इसे रमन इफेक्ट का नाम दिया गया।
  • हरगोविंद खुराना (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक) को चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए 1968 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
  • अल्बानिया मूल की भारतीय मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी के लिए सम्मानित किया गया।
  • 1998 में अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र में अनेक योगदान के लिए पुरस्कार दिया गया।
  • त्रिनिदाद में जन्में भारतीय मूल के लेखक बी-एस- नायपाल को 2001 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • भारतीय मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक वेंकटरामण रामकृष्णन को रसायन के क्षेत्र में कार्य करने के लिए 2009 में नोबेल पुरस्कार दिया गया।
  • वर्ष 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्रलो और माइकल क्रेमर को दिया गया।