Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 March 2020


Daily Current Affairs for UPSC, IAS, State PCS, SSC, Bank, SBI, Railway, & All Competitive Exams - 11 March 2020



तेल की कीमत कम होने में भूमिका किसकी ?

  • कच्चा तेल सभी अर्थव्यवस्थाओं का आधार है ! यह उत्पादन के इंजन की गति को निर्धारित करता है !
  • US-चीन ट्रेड वॉर और कोरोना वायरस की वजह से तेल की मांग में तेजी से कमी आई है जिसके कारण इसकी कीमत प्रति बैरल $30 तक आ गया है !
  • पिछले कुछ वर्षों के आधार पर यदि किसी की मतिगरा हो हम देखें तो हमें पता चलेगा कि 2011 में लगभग प्रति बैरल $130, 2012 में लगभग $120 और 2014 तक $115 तक आ गया है !
  • इसके बाद कुछ गिरावट देखी गई $38 तक पहुंच गया ! उसके बाद पुनः कीमत बढ़ने लगी ! लेकिन 2019 के बाद से प्रारंभ हुई गिरावट वर्तमान $30 तक पहुंच गया !
  • इस गिरावट के पीछे कई और कारण बताए जा रहे हैं जिसमें कोरोना प्रभाव और रूस और सऊदी अरब के बीच तेल विवाद प्रमुख कारण है !
  • तेल की मांग कम होने पर उत्पादन भी कम कर दिया जाता है, जिस कीमतें ज्यादा नीचे आ जाएं !
  • उत्पादन में यह कमी 14 देशों के समूह OPEC (Organization of the Petroleum Exporting Countries ) द्वारा की जाती है !
  • इसकी स्थापना सितंबर 1960 में हुई ! जिसके सदस्य देश अल्जीरिया, अंगोला, कांगो, इक्वाडोर, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, सऊदी अरब, UAE और वेनेजुएला है !
  • यह संगठन यह निर्णय लेता है कि कितना उत्पादन किया जाए ! इस निर्णय को सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका सऊदी अरब की होती है!
  • ओपेक के अलावा बड़ी मात्रा में तेल का उत्पादन USA और रूस के द्वारा भी किया जाता है जो ओपेक के सदस्य देश नहीं है !
  • वर्ष 2019 के 5 सबसे बड़े तेल उत्पादक क्रमशः USA, सऊदी अरब, रूस, इराक, ईरान है !
  • वर्ष 2018 में ओपेक और रूस के बीच एक समझौता हुआ जिसमें मिलजुल कीमत पर नियंत्रण की बात स्वीकार की गई !
  • मार्च 2020 में रूस अपनी बात से पीछे हट गया ! उसने कहा कि वह अभी उत्पादन कम नहीं करेगा ! अभी वह एनालिसिस करेगा !
  • सऊदी अरब की इस वादा खिलाफी से नाराज हो गया और उसने न सिर्फ उत्पादन बढ़ाने बल्कि कम डिस्काउंट रेट पर बेचने की बात मार्केट के सामने रखी !
  • इससे कीमत में तेजी से गिरावट आई है !
  • सऊदी अरब के इस निर्णय से Forbes के अनुसार प्रत्येक दिन 100 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा ! यदि यह प्राइस-वॉर लंबा खिचता है तो रूस की अर्थव्यवस्था को बहुत बड़ी क्षति हो सकती है !
  • रूस की प्रमुख मनसा अमेरिका के शहर गैस के मार्केट को प्रभावित करने की रही है !
  • रूट अधिक उत्पादन करके USA के ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है !
  • भारत पर यदि इसके प्रभाव को देखें तो हमें पता चलेगा कि कम कीमत पर तेल मिलने के कारण वित्त वर्ष 2020- 2021 में इसे 22- 25 बिलियन डॉलर का फायदा हो सकता है क्योंकि हमें कम पैसा खर्च करना होगा !
  • आम ग्राहकों को कितना फायदा होगा या इस पर निर्भर करेगा कि वह कितना एक्साइज ड्यूटी लगाती है !
  • इस सरकार में राजस्व को बढ़ा सकती है !
  • तेल कीमत का वैश्विक प्रभाव यह होगा कि अर्थव्यवस्था की वृद्धि प्रभावित होगी ! अमेरिका का शेल गैस उत्पादन प्रभावित होगा तथा नए प्रकार के ट्रेड वॉर उत्पन्न हो सकते हैं !

Red Panda के शिकार में कमी

  • हिमालय क्षेत्र अनेक प्रकार के विशिष्ट जीवो की शरण स्थली है ! इन्हीं विश्व जीवों में लाल पांडा (Red Panda) शामिल है !
  • यह हिमालय क्षेत्र में भारत भूटान, नेपाल, दक्षिणी चीन एवं म्यांमार के पर्वती क्षेत्र में पाया जाता है !
  • इस जी की तेजी से घटती संख्या को रोकने के लिए लंबे समय से कई प्रयास किए जा रहे थे !
  • यह जीव IUCN की रेड लिस्ट के तहत संकट ग्रस्त (Endangered) जीव की सूची में शामिल है वहीं इसे भारतीय वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल करके कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है !
  • वर्तमान समय में इनकी संख्या लगभग 14500 है ! जिसमें लगभग 1/3 (5000-6000) भारत में पाए जाते हैं !
  • चीन में इनकी संख्या लगभग 6000- 7000 है !
  • हाल ही में ट्रैफिक (TRAFIC) द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार हिमालय क्षेत्र में लाल पांडा के शिकार मामलों में गिरावट दर्ज की गई है !
  • रिपोर्ट को जुलाई 2010 से 2019 के बीच हिमालय क्षेत्र में लाल पांडा के शिकार और इनके गैर कानूनी व्यापार के मामलों के आधार पर जारी किया गया है !
  • इसके पीछे प्रमुख कारण इस क्षेत्र के लोगों में इस जीव के अंग से बने उत्पाद के प्रयोग के प्रति रुचि में कमी प्रमुख कारण है !
  • जुलाई 2010 से जून 2019 के बीच भारत और भूटान की सरकारों द्वारा लाल पांडा के शिकार और गैर कानूनी व्यापार का कोई मामला दर्ज किया जाना तस्करी में आई कमी को चिन्हित करता है !
  • हालांकि विशेषज्ञ इस अवधि में भारत के लाल पांडा के अवैध शिकार के 6 मामले को बता रहे हैं ! हालांकि यह अवैध शिकार व्यापार के लिए किया गया इसकी पुष्टि नहीं की गई है !
  • रिपोर्ट को तैयार करने का आधार सरकारी आंकड़ों के साथ साथ बाजार से प्राप्त जानकारी, लोगों से बातचीत, ई व्यापार वेबसाइट आदि को शामिल किया गया !
  • कमी के पीछे एक कारण लोगों में फैली जागरूकता को माना जा रहा है !

Kyasanur Forest Disease (KFD)

  • कर्नाटक- केरल क्षेत्र में समय-समय पर क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के केस सामने आते रहते हैं !
  • यह बीमारी प्रमुख रूप से बंदरों से इंसान में फैलती है इसी कारण इसे मंकी फीवर (Monkey Fever ) के नाम से भी जाना जाता है !
  • हाल ही में एक प्रस्ताव सामने लाया गया है कि KFD के लिए एक रिसर्च सेंटर, सागर कर्नाटक में बनाया जाए ! जिससे इसके सभी प्रभावों को ना समझा जा सके बल्कि इसका रोकथाम भी किया जा सके !
  • इस वायरस की पहचान कर्नाटक में सर्वप्रथम 1957 में की गई थी ! इसके बाद यह बीमारी धीरे-धीरे फैलने लगी और अब यह हर साल लगभग 400-500 लोगों में फैल जाता है !
  • वर्ष 2015 में इस बीमारी ने केरल में अपना बहुत ज्यादा विस्तार कर लिया था ! इस वर्ष यहां 102 मामले सामने आए जिसकी वजह से 11 लोगों की मौत हो गई थी !
  • यह वायरस Flaviviridae फैमिली से है !
  • क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज के लक्षणों में सर्दी लगना, बुखार, सिर दर्द, मांस पेशियों में दर्द, उल्टी, पेट की समस्याएं, ब्लीडिंग
  • यह अनेक प्रकार के कीड़ों जैसे मकड़ी, बिच्छू, चूहों एवं छछूंदर द्वारा संक्रमित बंदरों द्वारा दूसरी जीवन प्रसारित किया जाता है !
  • अभी तक KFD का कोई पूर्ण इलाज नहीं है लेकिन प्रारंभिक दौर में इसका उपचार करके इससे निपटा जा सकता है !
  • इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है इस वजह से इससे निपटना कठिन हो जाता है !
  • इंसान से इंसान में नहीं फैलने के कारण समानता हम ध्यान नहीं देते हैं जो घातक है !
  • कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गोवा एवं दक्षिणी महाराष्ट्र अधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं !