(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 11 December 2020


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पीएम वाणी योजनाः हर व्यक्ति के पास होगा इंटरनेट

  • वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति (NDCP) 2018 को मंजूरी प्रदान की तथा दूरसंचार आयोग का नाम बदलकर-डिजिटल संचार आयोग कर दिया।

इस राष्ट्रीय नीति के निम्न लक्ष्य और उद्देश्य रखे गये-

  1. प्रत्येक नागरिक को 50 Mbps की गति से सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना।
  2. सभी ग्राम पंचायतों को वर्ष 2020 तक 1 Gbps तथा 2022 तक 10 Gbps की कनेक्टिविटी प्रदान करना। सरकार ने तय किया था कि वर्ष 2020 तक 05 मिलियन तथा 2022 तक 10 मिलियन हॉटस्पॉट का निर्माण किया जायेगा। लेकिन अभी तक लगभग 1 लाख हॉटस्पॉट का ही निर्माण हो पाया है।
  3. ऐसे क्षेत्र जिन्हें अभी तक कवर नहीं किया गया है उनकी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
  4. वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की सक्रिय भागीदारी हेतु सहायता देना और भारत की डिजिटल संचार अवसंरचना तथा सेवाओं को मजबूत करना।
  5. व्यक्ति की निजता, स्वायत्तता तथा पसंद को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक डाटा संरक्षण व्यवस्था का निर्माण करना और इसके लिए 100 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करना।

रणनीति क्या होगी-

  1. राष्ट्रीय फाइबर प्राधिकरण बनाकर राष्ट्रीय डिजिटल ग्रिड की स्थापना करना।
  2. ओपन एक्सेस नेक्स्ट जनरेशन नेटवर्कों के विकास में सहायता देना।
  • वर्ष 2018 में ट्राई (TRAI) अर्थात टेलीकॉम रेगुलेटर अथॉरिटी ने मोबाइल कंपनियों को डेटा ऑफिस प्रोवाइडर (POD या PDO) बनाने का सुझाव दिया। इसके माध्यम से शहरों/कस्बों में हर जगह डेटा ऑफिस प्रोवाइडर होंगे जिनसे उपभोक्ता बहुत कम शुल्क पर हाईस्पीड वाइ-फाई सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
  • टेलिकॉम रेगुलेटर ने पॉवर ग्रिड की तर्ज पर देशभर में Wifi ग्रिड बनाने का विचार रखा। ट्राई का मानना था कि देश के छोटी-बड़ी कंपनियों द्वारा इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने के एक नये मॉडल की आवश्यकता है। ट्राई ने कहा था PCO की तर्ज पर POD सेंटर आम लोगों को लगभग निःशुल्क (अति न्यूनतम) कीमत पर इंटरनेट एक्सेस उपलब्ध करा सकते हैं।
  • सरकार ने डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले कैबिनेट ने पीएम-पब्लिक वाई फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (PM-WANI-पीएम वाणी) योजना को मंजूरी दी।
  • सरकार के अनुसार इस योजना के लागू होने के बाद आम आदमी की इंटरनेट के लिए किसी बड़ी कंपनी के ऊपर निर्भरता कम होगी और देश के दूर-दराज क्षेत्रें में भी तेज इंटरनेट स्पीड सेवा उपलब्ध होगी।
  • सरकार इस योजना को लागू करने के लिए तीन स्तर पर काम करेगी जिसमें पब्लिक डेटा ऑफिस, पब्लिक डेटा एग्रीगेटर और ऐप प्रोवाइडर शामिल होंगे।

पब्लिक डेटा ऑफिस-

  • पब्लिक डेटा ऑफिस से तात्पर्य उस स्थान से है, जहां से कोई उपभोक्ता वाई-फाई प्राप्त कर सकता है। जैसा कि प्रत्येक व्यक्ति दुकान में च्ब्व् खोल सकता था, उसी प्रकार चाय की दुकान, राशन की दुकान से लेकर बड़े स्तर के कोई भी दुकानदार या ऑफिस वाले अपने को पब्लिक डेटा ऑफिस (PDO) के रूप स्थापित कर सकते हैं। इसके लिए कोई नयी संरचना का निर्माण नहीं करना होगा।
  • सरकार ने इसे जटिलतामुक्त करने के लिए यह प्रावधान किया है कि PDO के लिए किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस या शुल्क देने की आवश्कता नहीं होगी।
  • PDO पहले बड़े इंटरनेट प्रदाता से इंटरनेट खरीदेंगे और अपने पास से उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवायेंगे।
  • PDO का लाभ यह होगा कि सरकार को किसी प्रकार का निर्माण या सेंटर बनाने की आवश्यकता भी नहीं होगी और ऐसे दुकानदार या ऑफिस को एक वैकल्पिक आय का स्रोत भी मिल जायेगा जो अपने को PDO के रूप में स्थापित करते है। इस तरह यह आसान और लाभदायक होने के साथ तेजी से विस्तार कर सकता है।
  • PDO सही से कार्य करें, बेहतर सुविधायें दें तथा PDO स्थापित करने में कोई रूकावट न आये इसकी जिम्मेदारी पब्लिक डेटा एग्रीगेटर की होगी। यह इस व्यवस्था में सामंजस्य बनाकर रखने का काम करेंगे। पब्लिक अकाउंट का हिसाब रखेंगे। पब्लिक डेटा एग्रीगेटर को सरकार 7 दिन के अंदर लाइसेंस देगी, दरअसल इनके रजिस्ट्रेशन को ही लाइसेंस माना जायेगा। यहां यह ध्यान देना आवश्यक है कि यह सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करेंगे न रेगुलेटर के रूप में इनके ऊपर जिम्मेदारी सुविधा को आसान बनाने की है ना कि नई नीति बनाने की।

ऐप प्रोवाइडर-

  • जिस तरह हम अधिकांश स्पेशलाइज्ड सेवाओं के लिए ऐप का निर्माण करते हैं, उसी तरह PDO की सुविधा के लिए हमें ऐप का प्रयोग करना होगा। यह ऐप आपको सूचित करेगा कि कहा पर PDO है। इस ऐप के माध्यम से ही PDO के वाई-फाई से हमारा मोबाइल कनेक्ट होगा।
  • सरकार यहां ऐप इकॉनमी को भी बढ़ावा दे रही है। कोई ऐप प्रोवाइडर सरकार से रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर के इससे जुड़ सकता है। इन ऐप को ऐप स्टोर के साथ डिजिटल वेबसाइट पर रखा जायेगा जहां से आप हम इसे इंस्टाल कर सकते हैं।
  • देश के स्तर पर PDO, PDO एग्रीगेटर तथा ऐप प्रोवाइडर को संभालने के लिए सेंट्रल रजिस्ट्री का निर्माण किया जायेगा।
  • यहां यह समझना होगा कि वाई-फाई सुविधा PDO से प्राप्त करने के लिए शुल्क देना होगा यह फ्री में उपलब्ध नहीं होगा, हालांकि यह बहुत सस्ता होगा लेकिन निःशुल्क नहीं होगा।
  • भारत में इस समय लगभग 42-45 करोड़ मासिक इंटरनेट यूजर हैं, जो चीन के बाद (80 करोड़) सबसे ज्यादा है। हालांकि कुछ रिपोर्टस में यह आंकड़ा 50 से 55 करोड़ है।
  • मोबाइल का सर्वाधिक उपयोग किशोरों के द्वारा किया जा रहा है जिससे डिजिटल शिक्षा की गति बढ़ रही है।
  • मई 2020 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार शहरी इलाकों में जहां 22 करोड़ 50 लाख की आबादी इंटरनेट का इस्तेमाल करती है तो ग्रामीण इलाकों में 22 करोड़ 70 लाख लोग इसका उपयोग करते है। हालांकि ग्रामीण इंटरनेट यूजर की संख्या का अनुपात अभी भी कम है क्योंकि हमारे यहां शहरी आबादी 35 प्रतिशत से भी कम है। सरकार की इस नवीन योजना से उपयोगकर्ता की संख्या बढ़ेगी।
  • इतना होते हुए भी हमारे यहां इंटरनेट पहुँच का दायरा लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या तक ही है जबकि चीन में यह 61 प्रतिशत और अमेरिका में 88 प्रतिशत है।

चुनौतियाँ-

  • PDO का विचार अच्छा होने के बावजूद पर्वतीय, जंगली और मरुस्थलीय क्षेत्र में इसका विस्तार करना कठिन होगा।
  • दूसरी सबसे बड़ी चुनौती साइबर क्राइम और डाटा सुरक्षा की होगी।
  • तेजी से बढ़ता इंटरनेट समाज में कई प्रकार की प्रारंभिक सामाजिक चुनौतियाँ लेकर आता है, जिसकी संभावना बनी रहेगी।
  • भारत में डिजीटल लिटरेसी कम है।

जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक 2021

  • किसी क्षेत्र के दीर्घकालीन मौसम के औसत को जलवायु कहा जाता है। यह जलवायु लगभग 30 वर्ष या उससे अधिक समय तक के मौसमी आकड़ों (दआशों) के आधार पर निर्धारित की जाती है।
  • बदलते प्राकृतिक स्वरूप और मानवीय हस्तक्षेप से जब यह (क्षेत्र विशेष) जलवायु परिवर्तित होती है तो इसे जलवायु परिवर्तन कहते हैं। पृथ्वी के विकास से अब तक पूरी पृथ्वी की जलवायु कई बार परिवर्तित हो चुकी है। वर्तमान समय में भी हम जलवायु परिवतर्न की चुनौती का सामना कर रहे हैं।
  • आँकड़ों से पता चलता है कि 19वीं सदी के अंत से अब तक पृथ्वी की सतह का औसत तापमान लगभग 0.9 डिग्री सैल्सियस बढ़ चुका है। तापमान बढ़ने से जलवायु में परिवर्तन आया है। इसके कारण पिछली सदी से अब तक समुद्र जल स्तर में 8 इंच की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। आज जलवायु पविर्तन विश्व की सबसे प्रमुख चुनौतियों में से एक है। जिसके समाधान के लिए राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रयास किये जा रहे हैं।
  • 57 देशों और यूरोपीय संघ के जलवायु संरक्षण संबंधी उपायों के प्रदर्शन के आधार पर वर्ष 2005 से जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक प्रत्येक वर्ष जारी किया जाता है। यह देश विश्व की 90 प्रतिशत ग्रीन हाउस गैस के उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी हैं।
  • इस सूचकांक को जर्मनवॉच, न्यूक्लाइमेट इंस्टीट्यूट और क्लाइमेंट एक्शन नेटवर्क द्वारा प्रकाशित किया जाता है।
  • इस सूचकांक का लक्ष्य/उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अलग-अलग देशों द्वारा किये जा रहे प्रयासों/प्रगति की समीक्षा करना है।
  • इस सूचकांक को 4 संकेतकों/आधारों के आधार पर तैयार किया जाता है। यह संकेतक-ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन (40 प्रतिशत), जलवायु नीति (20 प्रतिशत), नवीकरणीय ऊर्जा (20 प्रतिशत) तथा उर्जा उपयोग (20 प्रतिशत) है।
  • वर्ष 2020 के प्रदर्शन को आधार बनाते हुए हाल ही में जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक-2021 जारी किया गया है जिसमें भारत को 10वां स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि पिछले साल भारत को 9वां स्थान प्राप्त हुआ था। इस तरह भारत दूसरी बार शीर्ष दस देशों की सूची में शामिल है।
  • सूचकांक के पहले तीन स्थान पर कोई देश नहीं है क्योंकि कोई भी देश उस स्तर को प्राप्त नहीं कर पाया है।
  • इस सूचकांक में सबसे ऊपर चौथे स्थान पर स्वीडन है। इसके बाद क्रमशः यूके, डेनमार्क, मोरक्को, नार्वे, चिली और भारत हैं।
  • G-20 समूह के दो देश भारत और यूके को इसमें स्थान मिला है।
  • अमेरिका को इस सूची में सबसे नीचे 61वें स्थान पर रखा गया है। वहीं GHG के सबसे बड़े उत्सर्जनकर्ता चीन को 33वें स्थान पर रखा गया है।
  • अमरिका के बाद सबसे खराब प्रदर्शन सऊदी अरब (60वां स्थान), ईरान (59), कनाड़ा (58), ऑस्ट्रेलिया (54) और रुस (52वां) का है।
  • भारत को चार सूचकांकों के 100 स्कोर में से 63-98 स्कोर प्रापत हुआ है।
  • नवीकरणीय ऊर्जा श्रेणी के तहत 57 देशों में 27वें स्थान पर है जबकि पिछले साल 26वाँ स्थान मिला था। भारत ने वर्ष 2022 तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और वर्ष 2030 तक 450 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्ति का लक्ष्य रखा है।
  • भारत 2030 तक 40 प्रतिशत गैर जीवाश्म ईंधन के प्रयोग के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है।
  • भारत को ग्रीन हाउस उत्सर्जन में 12वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। इसके पीछे प्रमुख कारण BS-VI उत्सर्जन मानदंड को लागू करना है।
  • भारत को जलवायु नीति में 13वां स्थान प्राप्त हुआ है। जबकि ऊर्जा उपयोग में भारत को 10वां स्थान प्राप्त हुआ है।