(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 09 September 2020


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इंटरनेशनल डे ऑफ कलीन एयर फॉर ब्लू स्काई

  • वायु विभिन्न प्रकार के गैसों का सम्मिश्रण है । जब यह गैसें संतुलित मात्रा में रहती हैं तो वायु जीवनदायिनी होती है लेकिन जब यह मिश्रण किसी मानवीय या प्राकृतिक कारण से असंतुलित हो जाता है जिससे यह वायु हानिकारक हो जाती हैं और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है इसे ही वायु प्रदूषण कहलाती है।
  • दूसरे शब्दों में वायु प्रदूषण से तात्पर्य विभन्न प्रकार की मानवीय गतिविधियों जैसे ईधन, कृषि औद्योगिक क्रियाओं, ट्रांसपार्टेशन, बिजली निर्माण आदि द्वारा उत्सर्जित विभिन्न प्रकार की प्रदूषक गैसों से वायु में मिलने से है।
  • ज्वालामुखी क्रिया, वनाग्नि, कोहरा एवं परागकण जैसे प्राकृतिक कारकों द्वारा भी वायु प्रदूषण होता है, हालांकि प्राकृतिक कारकों द्वारा होने वाले प्रदूषण को प्रकृति स्व-नियंत्रण प्रक्रिया द्वारा शोधित कर देती है या नियंत्रित कर लेती है।
  • पूरे विश्व में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसके कारण प्रत्येक वर्ष अनुमानित 7 मिलियन लोगों की मृत्यु समय से पहले हो जाती है।
  • विश्व की लगभग 92 प्रतिशत आबादी वायु प्रदूषण का सामना कर रही है।
  • दुनिया की लगभग एक चौथाई आबादी सिर्फ उन चार दक्षिण एशियाई देशों में रहती है जो सबसे ज्यादा प्रदूषित हैं । यह देश- भारत, नेपाल, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश हैं ।
  • हाल ही में आई एक रिपोर्ट बताती है कि वायु प्रदूषण से कई देशों में जीवन प्रत्याशा 5-6 साल कम हो गई है। कुछ क्षेत्रों में तो यह 8 साल तक कम हो गई है।
  • वायुप्रदूषण के लिए जिम्मेदार गैसें एवं पदार्थ-कार्बन मोनो ऑक्साइड, कलोरो-फलोरो कार्बन, सीसा, ओजोन, निलंबित अभिकणीय पदार्थ एवं सल्फर डाइऑक्साइड हैं ।
  • वायु प्रदूषण की चुनौती का समना करने के क्रम में एक नया प्रयास 7 सितंबर 2020 को विश्व में पहली बार इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काई (International Day of Clean Air for Blue Sky) के रूप में किया गया।
  • इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काई का मुख्य उद्देश्य सभी स्तरों यथा-व्यक्ति, समुदाय, निगम, सरकार आदि स्तरों पर जागरूकता बढ़ाना है जिससे वायु प्रदूषण के समाधान मे सभी वर्गों, समुदायों, संगठनों का सहयोग मिल सकें।
  • एक अन्य उद्देश्य- वायु प्रदूषण पर कार्य करने वाले सभी हितधारकों को एक साथ लाने के लिए एक मंच तैयार करना है ताकि अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय समर्थन प्राप्त हो सके।
  • वर्ष 2020 की थीम- क्लीन एयर फॉर ऑल रखा गया है।
  • 19 दिसंबर, 2019 को इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काई आयोजित करने का संकल्प संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपनाया था।
  • इस अवसर पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री प्रकाश जावेडकर ने कहा कि सरकार देश के सबसे प्रदूषित 122 शहरों में वाुय प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • भारत में BS-VI (भारत स्टैंडर्ड-6) को अपनाया गया है, जिससे ईंधन से होने वाले प्रदूषण में कमी आयेगी।
  • सरकार द्वारा सड़कों एवं राजमार्गों का निर्माण काफी तीव्र गति से हो रहा है, फलस्वरूप प्रदूषण में कमी आ रही है।
  • वर्ष 2014 से सरकार वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index-AQI) के माध्यम से आठ मानकों के आधार पर वायु प्रदूषण की निगरानी कर रही है।
  • जनवरी 2019 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रलय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme-NCAP) की शुरूआत की थी। इसके तहत वर्ष 2017 को आधार मानते हुए प्रदूषणकारी कणों PM2.5 और PM10.0 के अनुपात को वर्ष 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • वायु प्रदूषण की चुनौती का सामना करने के लिए भारत सरकार द्वारा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 अधिनियमित किया गया हैं इसके तहत केंद्र एवं राज्य को निम्नशक्तियाँ दी गई हैं।
  1. राज्य किसी भी क्षेत्र को वायु प्रदूषित क्षेत्र घोषित कर सकता है और प्रदूषण नियंत्रित क्षेत्रें में औद्योगिक क्रियाओं को रोक सकता है।
  2. औद्योगिक इकाई स्थापित करने से पहले राज्य प्रदूषण बोर्ड से अनापप्ति प्रमाण पत्र लेना होगा।
  3. प्रावधानों के अनुपालन की जांच के लिए किसी औद्योगिक इकाई में प्रवेश का अधिकार होगा।
  4. राज्य प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध मुकदमा चला सकता है।
  • वायु प्रदूषण से निपटने का मेक्सिको का मॉडल
  • पिछले दो दशकों से मेक्सिको वायु प्रदूषण से बहुत प्रभावित था लेकिन उसके द्वारा अपनाये गये मॉडल से अच्छे परिणाम सामने आये हैं।
  • मेक्सिको ने ग्रीन वे नामक परियोजना के माध्यम से प्रदूषित हवा को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त किया है।
  • इसके तहत मेक्सिको ने 100 से अधिक ऊँचे स्तंभों को उर्ध्वाधर बगीचों में बदल दिया है।
  • इसके तहत उपयोग किये गये खंभों का कुल क्षेत्रफल 600,000 वर्ग फीट से अधिक है।
  • इसके लिए प्लास्टिक से बने विशेष प्रकार की बोतलों में पौधों को विकसित करने के लिए स्वच्छ तकनीकी का उपयोग किया जाता है।
  • इस उर्ध्वाधर बगीचों में पानी के लिए वर्षा जल का प्रयोग किया जाता है।
  • यह बगीचे सालाना 27000 टन प्रदूषण फैलाने वाले गैसों को सोख लेते है तथा 25000 लोगों के लिए सालाना तौर पर ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं।
  • यह तकनीकी अब चीन, जापान, अमेरिका फ्रांस एवं यूरोप के अन्य देशों में भी प्रयोग में लाई जाती है।
  • इसमें नये निर्माण की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं राजमार्ग के खांभों, फ्रलाईओवर के खंभों, सड़कों के मध्य भाग में, दिवालों के सहारे, खंभों के सहारे, तावरों के सहारे विभिन्न स्थानों पर लगाये जा सकते हैं।

NAM चर्चा में क्यों है?

  • द्वितीय विश्वयुद्ध के पश्चात विश्व मुख्यतः दो गुटों- साम्यवादी सोवियत संघ और पूंजीवादी अमेरिका के बीच बंटा हुआ था। यह शीतयुद्ध (Cold War) का दौर था।
  • इस समय एक घटना विश्व के अनेक भागों में और घटित हो रही थी, वह थी कई देशों को मिलने वाली आजादी अर्थात उपनिवेशवाद से मुक्ति।
  • इस काल में आजाद हुए देशों में गरीबी, आर्थिक पिछड़ापन, निम्न मानव विकास आदि जैसी जटिल समस्यायें थीं, इसलिए यह देश किसी संगठन/गुट का भाग बनकर अपने मूल समस्याओं से अपना ध्यान नहीं हटाना चाहते थे-
  • उपनिवेशवाद से स्वतंत्र इन देशों ने स्वयं को दोनो समूहों से दूर रखते हुए एक समूह गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non Aligned Movement-NAM) की स्थापना की। इनका मुख्य उद्देश्य नवीन देशों के हितों की सुरक्षा करना था।
  • गुटनिरपेक्षता की ओर पहला कदम वर्ष 1955 में बांडुंग सम्मेलन के माध्यम से उठाया गया जिसमें कई नव स्वतंत्रत देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया।
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला सम्मेलन वर्ष 1961 में बेलग्रेड में आयोजित किया गया जिसमे जवाहर लाल नेहरू, यूगोस्लाविया के राष्ट्रपति सुकर्णों, मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल नासिर, घाना के राष्ट्रपति क्वामे एन्क्रूमा जैसे नेताओं ने भाग लिया।
  • वर्तमान समय में NAM संयुक्त राष्ट्र के वाद विश्व का सबसे बड़ा राजनीतिक समन्वय एवं परामर्श करने वाला मंच है, जिसमें 120 विकासशील देश शामिल हैं।
  • इसके निम्नलिखित उद्देश्य रखे गये- शीतयुद्ध की राजनीति का त्याग करना, स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय राजनीति का अनुसरण, साम्राज्यवाद और उपनिवेशवाद का विरोध, सैन्य गठबंधनों से पर्याप्त दूरी, मानवाधिकार की रक्षा एवं रंगभेद की नीति के विरूद्ध संघर्ष की निरंतरता आदि।
  • 1990 के दशक में जब सोवियत संघ विघटित हुआ तब कई समीक्षकों ने कहा कि अब इसे (NAM) को समाप्त कर देना चाहिए क्योंकि अब कोई गुट ही नहीं है तो गुटनिरपेक्षता की क्या आवश्यकता है?
  • भारत इसकी स्थापना के बाद से वर्तमान तक इसके सिद्धांतों पर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करता आया है।
  • इसकी स्थापना से लेकर 2016 तक भारत का प्रधानमंत्री ही इस आंदोलन में भारत का प्रतिनिधित्व करता आया है जो इसके प्रति भारत की प्रतिबद्धता का परिचायक है। केवल वर्ष 1979 में कार्यवाहक प्रधानमंत्री होने के कारण चौधारी चरण सिंह इसके सम्मेलन में भाग नहीं ले सके थे।
  • हालांकि हाल के समय में भारत की रूचि इस आंदोलन में कम हुई है।
  1. इसमें एकमत का अभाव अया है तो साथ ही इसमें शामिल देश आपस में ही गुटबंदी कर रहे है।
  2. इसके सदस्य देश क्षेत्रीय गुटों का गठन कर रहे है।
  3. गुटनिरपेक्ष आंदोलन वर्तमान की समस्याओं को लेकर भी प्रयास नहीं कर रहा है। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, परमाणु निशस्त्रीकरण, शरणार्थी समस्या, मुक्त आवागमन, क्षेत्रीय अतिक्रमण इस समय की अनेक चुनौतियां सिर उठा रही हैं लेकिन यह आंदोलन ठोस रूप में कुछ नहीं कर पाया है।
  4. भारत भी बदलते वैश्विक परिवेश में अपने राजनीतिक एवं आर्थिक हितों की पूर्ति के लिए किसी औपचारिक समूह पर अपनी निर्भरता को सीमित कर रहा है।
  • हाल ही में विदेश मंत्री एस- जयशंकर ने कहा था कि NAM एक विशिष्ट काल और परिस्थितियों में तो प्रासंगिक थी लेकिन अब वह परिस्थितियों नहीं हैं।
  • यह कथन अप्रत्यक्ष रूप से भारत को NAM के दायरे से बाहर करने का संकेत देता है।
  • दरअसल एक बड़े वर्ग का मानना है कि भारत को NAM दायरे से बाहार निकलकर ऐसी विदेशनीति अपनानी चाहिए जिससे वह एशिया में शक्ति संतुलन कायम करने में अपनी शक्ति को बढ़ा सके।
  • हाल के समय में चीन द्वारा अपनाई गई नीतियों से भारत एवं अमेरिका में नजदीकी बढ़ी है, जिसे भारत को स्पष्ट रूप से व्याख्यायिक करना चाहिए।
  • भारत का QUAD (क्वाड) ग्रुप में मजबूती बढ़ानी चाहिए।
  • समीक्षकों का कहना है कि भारत NAM पहले ही परिवर्तन कर चुका है जब उसने Multi-Alignment की नीति अपनाई।
  • अमेरिका एवं अन्य देशों का भारत पर पहले से आरोप रहा है कि भारत अवसरवाद की नीति अपनाता और मल्टी एलाइमेंट के माध्यम से फायदा उठाता है, और कोई स्पष्ट नीति नहीं अपनाता है।
  • भारत ने इसके बाद मुद्दा आधारित पार्टनराशिप का सिद्धांत अपनाया लेकिन यह भी बुहत सफल नहीं हो सका क्योंकि मुद्दों पर एकमत कायम करना कठिन होता है तथा हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं।
  • इस समय भारत द्वारा advancing Prosperity and influence की नीति का प्रयोग किया जाता है।
  • कई समीक्षकों ने यह भी कहा है कि भारत-चीन तनाव को देखते हुए यू-एस-ए- ग्रुप में शामिल होने की सीझक भारत को अब छोड़ देना चाहिए।
  • विदेश मंत्रलय का यह कहना है कि भारत अभी किसी एलाइंस का भाग नहीं बनेगा।
  • बहुत से समीक्षकों का यह भी मानना है कि किसी एलाइंस में शामिल होने की रणनीति भी इस समय किसी देश के लिए प्रासंगिक नहीं हैं उदाहरण स्वरूप नाटो एवं दक्षिण एशिया सहयोग संगठन को देखा जा सकता है।
  • दरअसल अधिकांश संगठन USSR को ध्यान में रखकर बनाये गये थे जिसके कारण अब वह आंतरिक रूप से कमजोर हो चुके हैं।
  • कुछ समीक्षकों का मानना है कि भारत को Geostrategy पर (भू- रणनीति) के महत्व को प्राथमिकता देनी चाहिए और उसके हिसाब से रणनीति बनानी चाहिए।
  • हिंद-महासागर क्षेत्र, एशिया प्रशांत क्षेत्र एवं भारत के उत्तर का भाग जियो स्ट्रेटजी के दृष्टिाकोण से महत्वपूर्ण है।
  • इस दृष्टिकोण से ईरान, रूस, अफगानिस्तान, दक्षिण पूर्व एशिया के भारत समर्थक देश एवं ऑस्ट्रेलिया बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है।
  • अमेरिका को लेकर भारत ज्वाइंट वेंचर की रणनीति अपना सकता है। इसके तहत उन मुद्दों पर दोनों देश एक साथ काम करते है जिन पर सहमति होती है।
  • कुछ समीक्षकों का मानना है कि भारत का कद और उसकी अर्थव्यवस्था 1970 के दशक से परिवर्तित हो चुकी है इसलिए भारत को बिल्कुल स्वतंत्रता नीति का पालन करना चाहिए न कि किसी गुट या समूह की नीति का।