(Video) डेली करेंट अफेयर्स (Daily Current Affairs) : यूनाइटेड किंगडम और स्कॉटलैण्ड में अलगाव का मुद्दा चर्चा में क्यों है? (Issue of secession in UK and Scotland)- 09 January 2021


(Video) Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPSC, RPSC & All State PSC/PCS Exams - 09 January 2021



यूनाइटेड किंगडम और स्कॉटलैण्ड में अलगाव का मुद्दा चर्चा में क्यों है?

  • स्कॉटलैण्ड यूनाइटेड किंगडम का उत्तरी भाग है। यह इंग्लेण्ड के उत्तर में स्थित है। स्कॉटलैण्ड और इंग्लैण्ड की मुख्य भूमि सीमा की लंबाई 154 किमी है।
  • स्कॉटलैण्ड का क्षेत्रफल लगभग 77,933 वर्ग किमी है। यह मुख्य रूप से एक पहड़ी क्षेत्र है। इसके पूरब में उत्तर सागर तथा दक्षिण-पश्चिम में नॉर्थ चैनल और आयरिश सागर हैं।
  • मुख्य भूमि के अलावा स्कॉटलैण्ड के अंतर्गत 790 से अधिक द्वीप भी आते हैं।
  • इसकी राजधानी एडिनबर्ग है तथा ग्लासगो यहां का सबसे बड़ा शहर है।
  • स्कॉटलैण्ड खूबसूरत किलों के क्षेत्र के रूप में जाना जाता है इसके अलावा ग्लासगो में गोल्फ कोर्ट के लिए अनुकूल घास के मैदानों का विकास हुआ है, जिसके कारण यहां दुनिया के सबसे अच्छे 40 गोल्फ कोर्ट हैं।
  • यूके के अंतर्गत स्कॉटलैण्ड, इंग्लैण्ड, वेल्स और उत्तरी आयरलैण्ड आते हैं।
  • ग्रेट ब्रिटेन के अंतर्गत स्कॉटलैण्ड, इंग्लैण्ड और वेल्स आते हैं।
  • इस देश का पूरा नाम- यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड नार्दर्न आइलैंड है।
  • यहां की कुल जनसंख्या लगभग 6.7 करोड़ है, जिसमें से 5 करोड़ 62 लाख की आबादी इंग्लैण्ड की है। इंग्लैण्ड क्षेत्रफल और जनसंख्या के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। स्कॉटलैण्ड की जनसंख्या लगभग 55 लाख है वेल्स की जनसंख्या 3.15 लाख है वहीं उत्तरी आयरलैण्ड की जनसंख्या तो 2 लाख से भी कम है।

इतिहास और इंग्लैण्ड से यूके का जुड़ाव-

  • स्कॉटलैण्ड में 4000 साल (2000 BC) से लोगों के रहने की जानकारी प्राप्त होती है। इनका इंग्लैण्ड से प्राचीन समय में कोई जुड़ाव नहीं था।
  • 77 AD से 400 AD तक ब्रिटेन वाले क्षेत्र पर रोम साम्राज्य का अधिकार था लेकिन रोम साम्राज्य स्कॉटलैण्ड पर कब्जा नहीं कर पाया। रोम साम्राज्य के शासक हेड्रियन ने स्कॉटलैण्ड और इंग्लैण्ड की सीमा पर एक दिवार का निर्माण करवाया था, जिससे स्कॉटलैण्ड के लड़ाके ब्रिटेन पर (रोम साम्राज्य) बार-बार हमला न कर सकें।
  • 5वीं सदी आते-आते स्कॉटलैण्ड में स्थायी बसावट प्रारंभ हुई। यह अपने को केल्टिक जनजाति (Celtic Tribe) से जोड़ते हैं। वहीं इंग्लैण्ड के लोग एंग्लो सेक्शन (Anglo Saxon) से आते हैं। इस तरह यहां दोनों में सांस्कृतिक भिन्नता ऐतिहासिक भी है।
  • Anglo Saxon उत्तरी यूरोप के लोग है, जो इंग्लैण्ड में Celtic Tribe के स्कॉटलैण्ड में बस जाने के बाद आये थे।
  • केल्टिक समुदाय प्रकृति को पूजते थे। इनके देवता (पूर्वज) Cernunmos माने जाते हैं। यह कुछ-कुछ सिंधु घाटी सभ्यता के पशुपति की तरह दिखते हैं।
  • 8वीं सदी से 11वीं सदी के बीच Vinking Raids हुआ। यह नार्वे, स्वीडन, फिनलैण्ड, डेनमार्क के लोग थे जो यहां (स्कॉटलैण्ड) आकर बसने लगे। इसीलिए स्कॉटलैण्ड में केल्टिक एवं वाइकिंग समुदाय के लोगों का मिश्रित स्वरूप पाया जाता है।
  • 1236 में एक दुर्घटना में स्कॉटलैण्ड के राजा एलेक्जेंडर द थर्ड की मृत्यु हो गई। कोई संतान या उत्तराधिकारी न कारण यहां की गद्दी पर जल्दी कोई बैठा। इस बीच इंग्लैण्ड ने अपना हस्तक्षेप और आक्रमण बढ़ा दिया। स्कॉटलैण्ड और इंग्लैण्ड का संघर्ष यहीं से बढ़ने लगा। अगले 300 साल तक इसी प्रकार के संघर्ष चलते रहे।
  • 1314 में इसी प्रकार का एक महत्वपूर्ण युद्ध हुआ था, जिसे बानोकर्बन युद्ध के नाम से जाना जाता है। इस युद्ध में इंग्लैण्ड के रॉबर्ट द ब्रूस ने अंग्रेजी सेना पर शानदार विजय प्राप्त की थी। वर्ष 2014 में स्कॉटलैण्ड वासियों ने इसकी 700वीं वर्षगाठ मनाया।
  • वर्ष 1603 में इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड के बीच यह सहमति बनी कि दोनों का राजा एक ही होगा। हालांकि दोनों क्षेत्रें को अपना-अपना शासन अपने हिसाब से चलाना था। इस समय जो राजा होता था उसके साथ दोनों राज्यों के राजा का नाम जुड़ा होता था।
  • 1706 में एक तरह से स्कॉटलैण्ड, इंग्लैण्ड का हिस्सा बन गया। इसके बाद एक एक्ट ऑफ यूनियन पारित हुआ, जो 01 मई 1707 को लागू हो गया। इसके बाद पूरे क्षेत्र को ग्रेट ब्रिटेन नाम से जाना जाता है। इसके बाद ग्रेट ब्रिटेन की संसद का गठन हुआ। इसके बाद स्कॉटलैण्ड की कोई संसद या अलग पहचान नहीं बची वह पूर्ण रूप से ग्रेट ब्रिटेन का भाग बन गया।
  • वर्ष 1801 में ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड को मिलाकर पूरे क्षेत्र को यूनाइटेड किंगडम यानी यूके नाम दिया गया।
  • 20वीं सदी के प्रारंभ में जब आयरलैण्ड में होमरूल की मांग की गई तो स्कॉटलैण्ड के लोगों ने भी इस तरह की मांग प्रारंभ कर दिया, हालांकि कोई बड़ा आंदोलन नहीं हुआ जिसके वजह से स्वतंत्र होने की मांग सफल परिणाम के रूप में तब्दील नहीं हो पाई।
  • 1970 के दशक में उत्तरी सागर (North Sea) में तेल की खोज हुई जिसके आय पर स्कॉटलैण्ड के लोगों का मानना था कि उन्हें मिलना चाहिए लेकिन इस पर नियंत्रण और लाभ प्राप्त यूके को हो रहा है।
  • मछली पकड़ने का मुद्दा भी यहां का एक प्रमुख मुद्दा रहा है, जिसके विषय में भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
  • 1970 के दशक के प्रारंभ में स्कॉटलैण्ड के लोगों ने यह मांग की कि उनको अधिक अधिकार और संसाधनों पर अधिक नियंत्रण किलना चाहिए। इसके लिए इन्होंने खुद की संसद की भी मांग की।
  • मछली पकड़ने का मुद्दा भी यहां का एक प्रमुख मुद्दा रहा है, जिसके विषय में भी मतभेद सामने आते रहे हैं।
  • 1770 के दशक के प्रारंभ में स्कॉटलैण्ड के लोगों ने यह मांग की कि उनको अधिक अधिकार और संसाधनों पर अधिक नियंत्रण मिलना चाहिए। इसके लिए इन्होंने खुद की संसद की भी मांग की।
  • वर्ष 1979 से पहला जनमत संग्रह करवाया गया, जो आजादी के लिए नहीं बल्कि ब्रिटेन के अधिकार में कमी और स्कॉटलैण्ड के अधिकार में वृद्धि के विषय में था। इसका अधिकारिक नाम Scottish referendum for devolution of powers था।
  • इसमें यह नियम लगाया कि यदि कुल जनसंख्या का 40 प्रतिशत हिस्सा नई संसद चाहता है तो उसे अपनी संसद दे दी जायेगी। इस वोटिंग में कम लोगों ने हिस्सा लिया जिसके वजह से 40 प्रतिशत का आंकड़ा प्राप्त नहीं हो पाया, फलस्वरूप संसद अलग नहीं हो पाई।
  • इसके बाद कुछ वर्षों तक तो यह मुद्दा दबा रहा लेकिन उसके बाद फिर से अलग संसद की मांग उठने लगी।
  • वर्ष 1997 दूसरा Scottish Develution जनमत संग्रह हुआ जिसमें जनमत ने होमरूल के संदर्भ में मतदान किया। फलस्वरूप 1998 में नई संसद और होमरूल (स्वराज) भी दे दिया गया। वर्ष 1999 में यहां की संसद के लिए पहली बार चुनाव हुए।
  • यहा का प्रमुख फर्स्ट मिनिस्टर ऑफ स्कॉटलैण्ड कहलाता है।
  • 21वीं सदी के प्रारंभ से स्कॉटलैण्ड के लोगों की मांग बदलने लगी। इनका मानना है कि स्कॉटलैण्ड आजाद होकर अपने विषय में अच्छा निर्णय ले सकता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण वर्ष 2014 में आजादी के लिए अर्थात ब्रिटेन से अलग होने के लिए जनमत संग्रह करवाया गया।
  • इस जनमत संग्रह में 55.3 प्रतिशत लोगों ने अलग न होने के पक्ष में अर्थात यूके के साथ ही रहने के पक्ष में मतदान किया। इसमें यहां के लगभग 88 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया था।
  • अधिक लोगों का मानना था कि यदि स्कॉटलैण्ड ब्रिटेन से अलग हो जाता है तो उन्हें आर्थिक रूप से कई प्रकार का नुकसान हो सकता है और यूके एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसके साथ रहने में फायदा है।
  • वर्ष 2016 में एक नया अंतर्विरोध उत्पन्न यह उत्पन्न हो गया जब ब्रेक्जिट के मुद्द पर स्कॉटलैण्ड के 62 प्रतिशत लोगों ने यूरोपीय यूनियन के साथ रहने के पक्ष में मतदान किया अर्थात ब्रेक्जिट के खिलाफ स्कॉटलैण्ड की जनसंख्या कम होने की वजह से ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह कुछ नहीं कर पाया क्योंकि यूके के लगभग 52 प्रतिशत लोगों ने ब्रेक्जिट के पक्ष में मतदान किया।
  • स्कॉटलैण्ड बड़ी मात्र में मछली का निर्यात यूरोपीय यूनियन को करता है।
  • स्कॉटलैण्ड को लगता है कि ब्रेक्जिट और ब्रेक्जिट डील उनके ऊपर थोपी गई है, क्योंकि इसी डील में उनकी चिंता का ध्यान नहीं रखा गया है। इसलिए अब फिर से यहां जनमत संग्रह करवाये जाने की मांग उठ नहीं है।
  • स्कॉटलैण्ड के लोगों को लग रहा है कि ब्रेक्जिट डील से उनके आर्थिक हित को क्षति पहुँचेगी क्योंकि स्कॉटलैण्ड के लिए इसमें कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया है।
  • बोरिस जॉनसन ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस प्रकार के जनमत संग्रह एक पीढी में एक बार होते है इसलिए वर्ष 2055 के बाद हो पायेगा।

इंडोनेशिया का माउंट मेरापी ज्वालामुखी

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में इंडोनेशिया के माउंट मेरापी ज्वालामुखी (Indonesia's Mount Merapi Volcano) के आस-पास गर्म बादलों के निर्माण को देखा गया है, जिसके चलते इसमें विस्फोट की आशंका बढ़ गयी है।
  • इंडोनेशिया के भूगर्भीय आपदा प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास केंद्र (Geological Disaster Technology Research and Development Center) ने माउंट मेरापी ज्वालामुखी के आस-पास गर्म बादलों के फैलने (hot clouds spread) का अनुमान लगाया है। इसके चलते वहाँ रहने वाले 500 से अधिक निवासियों को हटाया गया है।
  • इसके पहले अगस्त 2020 में इंडोनेशिया के सुमात्रा आइलैंड पर सिनाबुंग ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था। इस ज्वालामुखी के फटने से बड़ी मात्रा में राख और धुएं का गुबार निकाला था। धुआं और राख करीब 5000 मीटर की ऊंचाई तक जा पहुंचा था।
  • वहीं नवंबर 2020 में इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में इली लेवेतलो ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हुआ था।

माउंट मेरापी ज्वालामुखी (Mount Merapi Volcano ) के बारे में

  • इंडोनेशिया में स्थित माउंट मेरापी ज्वालामुखी, एक सक्रिय ज्वालामुखी है। यह सन 1548 से नियमित रूप से सक्रिय रहा है एवं इसमें ज्वालामुखी विस्फोट होते रहे है।
  • इसे इंडोनेशिया का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माना जाता है। यह प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’क्षेत्र में स्थित है।
  • इंडोनेशिया के माउंट मेरापी ज्वालामुखी (Indonesia's Mount Merapi Volcano) में अंतिम भयंकर विस्फोट वर्ष 2010 को हुआ था,जिसमें काफी जाल-माल का नुकसान हुआ था। इस विस्फोट में लगभग 347 लोग मारे गए थे।
  • गौतलब है कि दुनिया में सबसे अधिक सक्रिय ज्वालामुखी इंडोनेशिया के आसपास के क्षेत्र में पड़ते हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इंडोनेशिया की लगभग 250 मिलियन आबादी "रिंग ऑफ फायर" के अंतर्गत आती है,जिसके कारण यहाँ भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट का खतरा बना रहता है।
  • सक्रिय ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जिन पर समय- समय पर विस्फोट होता रहता है। संसार के कुछ सक्रिय ज्वालामुखी में हवाई द्वीप का मौना लोआ, सिसली का एटना और स्ट्राम्बोली, इटली का विसुवियस , इक्वेडोर का कोटोपैक्सी, अंडमान और निकोबार का बैरन द्वीप ज्वालामुखी एवं फिलीपींस का ताल ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।
  • सुषुप्त ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो वर्षों से शांत पड़े होते हैं लेकिन उनमें कभी भी ज्वालामुखी विस्फोट होने की संभावना बनी रहती है संसार के निष्क्रिय ज्वालामुखीयों में इटली का विसूवियस, जापान का फ्यूजीयामा, इंडोनेशिया का क्राकाटोआ एवं अंडमान और निकोबार का नारकोंडम ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।
  • मृत ज्वालामुखी- ऐसे ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो कई युगो से शांत है एवं उनमें विस्फोट होना बंद हो गया है। संसार की कुछ मृत ज्वालामुखीयों में म्यांमार का पोपा, अफ्रीका का किलिमंजारो, दक्षिण अमेरिका का चिम्बराजो, हवाई द्वीप का मोंनाको, ईरान का कोह सुल्तान इत्यादि शामिल है।

'रिंग ऑफ फायर'(Ring of Fire) के बारे में

  • ‘रिंग ऑफ फायर’, प्रशांत महासागर के चारों-ओर स्थित एक ऐसा विस्तृत क्षेत्र है जहाँ विवर्तनिक प्लेटें आकर आपस में मिलती हैं। यहाँ विवर्तनिक प्लेटों के आपस में मिलने से ज्वालामुखी विस्फोट या उद्गार तथा भूकंपीय घटनाओं की निरंतरता रहती है।
  • ‘रिंग ऑफ फायर’ को परिप्रशांत महासागरीय मेखला (Circum-Pacific Belt) के नाम से भी जाना जाता है।
  • विश्व के लगभग 75% ज्वालामुखी ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में ही पाए जाते हैं।
  • क्राकाटोआ (इंडोनेशिया), माउंट फ्यूजी (जापान) और सेंट हेलेना(संयुक्त राज्य अमेरिका) जैसे विश्व प्रमुख ज्वालामुखी इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं|
  • पोपोकैटेपिटल (मेक्सिको) ‘रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) में स्थित सबसे अधिक विनाशक ज्वालामुखी है|
  • विश्व का सबसे गहरा महासागरीय स्थान ‘मैरियाना खाई’ (35,827 फीट) पश्चिमी प्रशांत महासागर में मैरियाना द्वीप के पूर्व में स्थित है|
  • द्वीपीय देश जापान,जो विवर्तनिकी (Tectonic) दृष्टि से पृथ्वी के सबसे सक्रिय स्थानों में से एक है,’रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) के पश्चिमी किनारे पर स्थित है|
  • ‘रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) के सहारे महासागरीय खाईयाँ, वलित पर्वत और भूकम्पीय कंपन पाए जाते हैं|